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30-11-2020
341 क्विंटल धान और 11 क्विंटल मक्का ज़ब्त,कोचियों पर लगाम लगाने बनाए गए 21 चेक पोस्ट

कोंडागांव। धान खरीदी के लिए राज्य द्वारा तय की गई 1 दिसम्बर की तिथि पास आते ही राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले में कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा के आदेश पर पड़ोसी राज्यों से लगने वाली सीमावर्ती सड़कों पर 21 चेक पोस्टों का निर्माण किया गया है। इन चेक पोस्टों पर आने जाने वाले सभी माल वाहक वाहनों के निरीक्षण के लिए पुलिस, वन, सहकारिता, खाद्य, मार्कफेड, जिला सहकारी बैंक एवं राजस्व विभाग के कर्मियों को लगाया गया है। कर्मचारियों का दल 24 घण्टे अलग अलग शिफ्ट में निगरानी करेंगे। ओडिसा सीमा पर सलना, मारंगपुरी, हल्दा, बाँसकोट, गम्हरी, छतोड़ी, छिनारी, एरला, फ़रसापदर, अरंगुला, मिरमिंडा, मगेदा, हीरापुर, बेलोंडी, बदेसोहंगा, नेवरानाला में चेकपोस्ट बनाये गए हैं। राजस्व विभाग द्वारा निर्मित चेकपोस्टों में अब तक राज्य की सीमा से जिले में अवैध रूप से परिवहित किये जा रहे 341 क्विंटल धान को पकड़ा गया है वही 11 क्विंटल मक्का भी जब्त किया गया है। इसमें कोण्डागांव तहसील अंतर्गत 80 क्विंटल, केशकाल तहसील अंतर्गत 11 क्विंटल, बडेराजपुर में 153 क्विंटल, फरसगांव अंतर्गत 97 क्विंटल ज़ब्त किया गया है। 11 क्विंटल मक्का भी  बडेराजपुर में परिवहित करते पाया गया है। जिले के सभी तहसीलों के अंतर्गत आने वाले धान मिलों को राज्य शासन के आदेशानुसार सत्यापन किये जाने के लिए खाद्य निरीक्षकों की नियुक्ति की गयी है साथ ही सभी मिलों से पुराने बारदानों को जमा कराया जा रहा है।

 

 

19-10-2020
धान और मक्का बेचने वाले नये किसान 31 अक्टूबर तक करा सकेंगे पंजीयन

रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का बेचने वाले नये किसानों का पंजीयन 31 अक्टूबर तक किया जाएगा। राज्य शासन के निर्देशानुसार धान और मक्का बेचने के लिए पुराने पंजीकृत किसानो को फिर से पंजीयन कराने समिति में आने की आवश्यकता नहीं है। धान और मक्का बेचने के इच्छुक नए किसान 31 अक्टूबर तक पंजीयन के लिए आवेदन कर सकते हैं। धान-मक्का बेचने वाले नए किसान पंजीयन के लिए संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
राज्य के जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2019-20 में धान और मक्का बेचने का पंजीयन करा लिया था, उन्हें नए पंजीयन की जरूरत नहीं है। पिछले सीजन में पंजीकृत किसानों की दर्ज भूमि, धान और मक्के के रकबे और खसरे को राजस्व विभाग द्वारा अद्यतन किया किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2020-21 में किसान पंजीयन के लिए पिछले वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसानों का डाटा कैरी-फॉरवर्ड किया गया है। पुराने पंजीकृत किसान अपने पंजीयन में संशोधन कराना चाहते हैं तो समिति मॉड्युल के माध्यम से संशोधन करने की सुविधा दी जा रही है। कोरबा जिले में अब तक एक हजार 104 नये किसानों ने धान बेचने के लिये समितियों में अपना पंजीयन कराया है। पिछले वर्ष 27 हजार 694 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिये सहकारी समितियों में पंजीयन कराया था। इन्हें मिलाकर इस वर्ष 28 हजार 718 किसानों का पंजीयन कर खेतों में लगे धान के वास्तविक रकबे का सत्यापन तेजी से किया जा रहा है। जिले में अब तक नये-पुराने मिलाकर 15 हजार 419 किसानों के धान के रकबे को सत्यापित कर खसरे में इंद्राज किया गया है।

 

14-08-2020
धान व मक्का बेचने को इच्छुक किसान जिन्होंने पिछले साल नही बेचा मक्का व धान वे इस साल पंजीयन करा सकेंगे

रायपुर/रायगढ़। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान व मक्का बेचने के लिए किसानों का पंजीकरण और पूर्व से पंजीकृत किसानों के जानकारी का अद्यतीकरण 17 अगस्त से 31 अक्टूबर 2020 तक किया जायेगा। गत खरीफ वर्ष में जिन किसानों ने पंजीयन नहीं करवाया था लेकिन इस वर्ष धान और मक्का समर्थन मूल्य पर बेचने के इच्छुक है ऐसे नवीन किसानों का तहसीलदार के माध्यम से पंजीयन किया जायेगा। नये पंजीयन के लिए किसानो को समिति से आवेदन प्राप्त कर उसे भरकर संबंधित दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय में जमा करना होगा।

आवेदन में उल्लेखित भूमि व फसल के रकबे और खसरे का पटवारी से राजस्व रिकार्ड , भूईयां के आधार पर सत्यापन पश्चात नवीन किसान का पंजीयन किया जायेगा। इसी प्रकार गत वर्ष 2019-20 में पंजीकृत किसान किसी कारण से पंजीयन में संशोधन कराना चाहता है तो संबंधित समिति के माध्यम से संशोधन करने की व्यवस्था प्रदान की जाएगी। इस दौरान पंजीकृत किसान की दर्ज भूमि व फसल रकबे का सत्यापन संबंधित पटवारी की ओर से राजस्व रिकार्ड व भूईयां डाटाबेस के आधार पर तैयार कर समिति को दिया जायेगा। पटवारी से सत्यापित अद्यतन सूची के आधार पर समिति में डेटा एन्ट्री की जाएगी।

 

14-07-2020
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाभ लेने के लिये किसानों को आखिरी मौका,15 जुलाई अंतिम तारीख

रायपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2020 का लाभ लेने की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की गई है। इस योजना केे अंतर्गत धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग एवं उड़द को बीमा के लिए बीमा ईकाई ग्राम पर अधिसूचित किया गया है। इसमें ऋणी और अऋणी किसान भू-धारक और बटाइदार सम्मिलित हो सकते हैं। इस संबंध में संचालक कृषि संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर की ओर से आदेश जारी किया गया है। कृषि संचालनालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जोखिम जैसे फसल पैदावार के आधार पर व्यापक क्षति, बाधित रोपाई, रोपण जोखिम, स्थानीयकृत आपदाएं एवं फसल कटाई के उपरांत सूखने खेत पर रखे गए करपा को असामयिक वर्षा से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। अधिसूचित फसल को बीमित कराने के लिए इच्छुक किसान फसल बीमा के लिए अंतिम तिथि 15 जुलाई तक नजदीकी बैंक, वित्तीय संस्था, लोकसेवा केन्द्रों में संपर्क कर अपनी फसल को बीमित करा सकते हैं। किसानों को सुझाव दिया गया है कि वे इस योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला के अंतर्गत सूचित बीमा ईकाई, फसल, प्रावधानित जोखिम, दावा भुगतान की प्रकिया के लिए कृषि कार्यालय, बैंक, वित्तीय संस्थान और बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

 

08-07-2020
इस खरीफ वर्ष में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए 15 जुलाई आखिरी तारीख तय

रायपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के खरीफ वर्ष 2020 का लाभ लेने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2020 निर्धारित की गई है। इस योजना केे अंतर्गत धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग और उड़द को बीमा के लिए बीमा ईकाई ग्राम पर अधिसूचित किया गया है। इसमें ऋणी और अऋणी किसान भू-धारक एवं बटाईदार सम्मिलित हो सकते है। इस संबंध में संचालक कृषि संचालनालय छत्तीसगढ़ रायपुर द्वारा आदेश जारी किया गया है। कृषि संचालनालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि जोखिम जैसे फसल पैदावार के आधार पर व्यापक क्षति, बाधित रोपाई, रोपण जोखिम, स्थानीयकृत आपदाएं एवं फसल कटाई के उपरांत सूखने के लिए खेत पर रखे गए करपा को असामयिक वर्षा से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। अधिसूचित फसल को बीमित कराने के लिए इच्छुक किसान फसल बीमा के लिए अंतिम तिथि 15 जुलाई तक नजदीकी बैंक, वित्तीय संस्था, लोकसेवा क्रेंदों में संपर्क कर अपनी फसल को बीमित करा सकते हैं। किसानों को सुझाव दिया गया है कि वे इस योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए जिला के अंतर्गत सूचित बीमा ईकाई, फसल, प्रावधानित जोखिम, दावा भुगतान की प्रकिया के लिए कृषि कार्यालय, बैंक, वित्तीय संस्थान तथा बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

 

03-07-2020
धान,मक्का,सोयाबीन,मूंगफली, उड़द, मूंग आदि फसलों का कॉमन सर्विस सेंटर में बीमा का काम शुरू

रायपुर/जगदलपुर। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा के अंतर्गत खरीफ फसलों का बीमा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) केन्द्र कर रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में फसल बीमा का कार्य 1 जुलाई से प्रारंभ किया जा चुका है। ग्रामीण किसान मुख्य फसल धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द, इत्यादि फसलों का बीमा करवा सकते हैं। किसान को यह सुविधा जिले के सभी ग्रामीण एवं शहरी सीएससी केन्द्रों में मिल रही है। इस योजना के अंतर्गत ऋणी और अऋणी किसान अपनी फसलों का बीमा अंतिम तिथि 15 जुलाई तक कर सकते हैं।सभी किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में जाकर बीमा ऑनलाइन करवा सकते हैं।

किसानों को अन्यत्र जाने की आवश्यकता नहीं होगी अर्थात ग्राम-ग्राम पंचायत में स्थित सीएससी केंद्र से बीमा का लाभ लिया जा सकता है। सीएससी केन्द्रों कि सुविधा ग्राम पंचायेतो में उपलब्ध है। बीमा के लिए फसल के प्रकार के आधार पर अलग-अलग प्रीमियम राशि किसानों को देनी होगी इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जायेगा। बीमा के लिए आवश्यक दस्तावेजों में  बीमा प्रस्ताव बी-1, पी-2, फसल बुआई प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और आधार की प्रतिलिपि आवश्यक है। कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) केंद्र से बीमा की सुविधा मिलने से बस्तर जिले में इस बार फसल बीमा योजना से जुड़ने वाले किसानांे की संख्या बढ़ने की संभावना है।

 

12-05-2020
समर्थन मूल्य पर मक्का 31 मई तक समितियों के माध्यम से खरीदा जाएगा:नान प्रबंधक

रायपुर/अम्बिकापुर। नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक आरपी पाण्डेय ने बताया है कि सरगुजा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2019  में समर्थन मूल्य पर समितियों के माध्यम से मक्का खरीदी 31 मई 2020 तक किया जाएगा। शासन की ओर से औसत अच्छे किस्म के मक्के का समर्थन मूल्य 1 हजार 760 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। पाण्डेय ने बताया कि सरगुजा जिला के आदिम जाति समिति उदयपुर, धौरपुर, नमनाकला, नर्मदापुर, बटवाही, बतौली, लखनपुर और सीतापुर के माध्यम से समर्थन मूल्य में खरीदी की जाएगी। मक्का उत्पादक कृषक जिनका इन समितियों में पंजीयन है वे अपना मक्का शासन की ओर से  निर्धारित मापदण्ड के अनुसार तैयार कर समर्थन मूल्य से विक्रय कर सकते हैं।समितियों की ओर से कृषकों से क्रय किये जाने वाले मक्के की राशि कृषक के खाते में सीधे अन्तरण की जायेगी। किसानों की राशि भुगतान की सुविधा को दृष्टिगत करते हुये छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड अम्बिकापुर सरगुजा की ओर से जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा अम्बिकापुर में अग्रिम राशि जमा की जा रही है। मक्का उपार्जन से संबंधित समस्याओं व कठिनाईयों को निराकरण के लिए खाद्य विभाग की कॉल सेन्टर नम्बर 1800-233-3663 पर दर्ज कराया जा सकता है।

 

14-02-2020
जैविक खेती, सब्जी उत्पादन और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले किसानों का हुआ सम्मान

धमतरी। राज्य शासन की मंशा के अनुरूप कृषि एवं अनुषांगिक विभागों के द्वारा मक्का सहित अन्य दलहन-तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार को नगरी विकासखण्ड के ग्राम गुहाननाला में कृषक संगोष्ठी सह मक्का दिवस का आयोजन किया गया। जहां पर ‘महूं लगाहूं जोंधरा‘ की थीम पर आधारित प्रदर्शनी विभागों के द्वारा लगाई गई। इस अवसर पर रायपुर संभाग के सम्भागायुक्त जीआर चुरेन्द्र ने किसानों को पारम्परिक खेती को प्रोत्साहित करने तथा जैविक खाद का उपयोग कर कृषि पद्धति में परिवर्तन लाने में शासन का भागीदार बनने व आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित करने की अपील की। इस अवसर पर जैविक खेती, सब्जी उत्पादन और कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को संभागायुक्त ने प्रशस्ति-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। ग्राम गुहाननाला में आयोजित कृषक संगोष्ठी-सह-मक्का दिवस के अवसर पर सम्भागायुक्त ने अपने उद्बोधन में ग्रामीणों से कहा कि ‘महूं लगाहूं जोंधरा‘ के माध्यम से किसानों को फसलचक्र परिवर्तन का सकारात्मक संदेश दिया जा रहा है। अब समय आ गया है कि कृषि पद्धति में परिवर्तन लाकर आय में वृद्धि करने के साथ-साथ सेहतमंद जीवन-यापन कर सकें। उन्होंने आगे कहा कि वक्त के साथ भूजल जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है, रासायनिक खादों एवं दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है,जिसका मानव जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप जैविक खाद को बढ़ावा देने, धान की जगह मक्का की फसल का रकबा बढ़ाने तथा पुरातन जीवन शैली अपनाकर प्रकृति से जुड़ने का आव्हान इस अवसर पर किया। इस दौरान मौजूद कलेक्टर रजत बंसल ने अपने उद्बोधन में कहा कि नगरी क्षेत्र मक्का के उत्पादन के लिए काफी अनुकूल है और इसके जरिए किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जैविक खेती से उत्पादित फसलों का क्रेज बढ़ता जा रहा है तथा आने वाले समय में क्षेत्र में विपणन की सुविधाओं में विस्तार किया जाएगा। कलेक्टर ने आगे कहा कि सुपोषण अभियान में भी मक्का वरदान साबित हो रहा है। क्षेत्र के महिला स्वसहायता समूह इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहे हैं तथा फसल-चक्र परिवर्तन से न सिर्फ सेहतमंद अनाज खेतों में पैदा होंगे, बल्कि स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर भी होंगे। इस अवसर पर जिला पंचायत की सीईओ नम्रता गांधी ने भी संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालकर अपने विचार व्यक्त किए।

आज आयोजित संगोष्ठी में सुराजी गांव योजना के तहत ग्राम दुगली, देवगांव और छिंदीटोला के तीन महिला स्वसहायता समूहों को 10-10 हजार रूपए के चेक वितरित किए गए। इसी तरह धमतरी के उत्कृष्ट किसान सेवक पटेल, ग्राम सेमरा (नगरी) के रोहित साहू और शासकीय रोपणी (बिंद्रानवागांव) धमतरी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी परियोजनांतर्गत सब्जी उत्पादन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली शासकीय रोपणी भाठागांव की उद्यानिकी विस्तार अधिकारी कु.डिम्पल वर्मा तथा नगरी के चंद्रहास साहू को जैविक टोकरी मंचस्थ अतिथियों के द्वारा भेंट की गई। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत नलकूप खनन हेतु ग्राम अछोटा के किसान रामाधार और ग्राम सेमरा के किसान लखनलाल को 35 हजार रूपए के चेक प्रदान प्रदान किए गए। इसके अलावा 10 किसानों को मक्का बीज मिनी किट भी विभाग की ओर से बांटे गए। इस अवसर पर कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र सहित जिले के नवाचारी एवं उत्कृष्ट किसानों व महिला स्वसहायता समूहों के द्वारा स्टाॅल लगाकर विभागीय योजनाओं व उपलब्धियों पर आधारित प्रर्दशनी आयोजित की गई। संभागायुक्त, कलेक्टर एवं सीईओ ने स्टाॅल का अवलोकन कर जिले में किए जा रहे नवाचारों की सराहना की।
कृषक संगोष्ठी में जिले के उत्कृष्ट किसानों ने जैविक खेती से होने वाले लाभ की जानकारी ग्रामीणों को दी, साथ ही आज के परिवेश में जैविक उत्पादन की आवश्यकता क्यों है, इस पर भी चर्चा एवं परिचर्चा की। इसमें ग्रामीणों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया तथा किसानों से प्राप्त प्रतिक्रिया पर नवाचारी किसानों ने समाधानकारक उत्तर भी दिए। इस अवसर पर स्थानीय सरपंच, उप संचालक कृषि, सहायक संचालक उद्यानिकी, कृषि विज्ञान केन्द्र के समन्वयक सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा काफी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

 

30-11-2019
प्रदेश में धान खरीदी एक दिसम्बर से, खाद्य मंत्री ने दिए निर्देश 

रायपुर। खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने प्रदेश में रविवार एक दिसम्बर से शुरू हो रहे धान खरीदी के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए है। उन्होने कहा है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। खरीदी केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध रहना चाहिए। राज्य सरकार द्वारा एक दिसम्बर रविवार के दिन से प्रदेश के सहकारी समितियों के माध्यम से धान खरीदी करने के निर्णय के अनुरूप आज से खरीदी शुरू हो रहा है। राज्य के सभी जिलों में धान का उपार्जन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा एवं मक्का का उपार्जन छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में धान की खरीदी विगत खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में संचालित एक हजार 995 खरीदी केन्द्रों एवं खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रारंभ किए गए 33 नवीन खरीदी केन्द्रों में की जाएगी। प्रदेश में 48 मंडियों एवं 76 उपमंडियों के प्रांगण का उपयोग विगत खरीफ विपणन वर्ष के अनुसार धान उपार्जन केन्द्र के लिए किया जाएगा।

  वर्तमान खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रदेश के 19 लाख 56 हजार किसानों ने पंजीयन करा लिया है, जो गत वर्ष पंजीकृत किसानों की संख्या 16 लाख 97 हजार से दो लाख 58 हजार ज्यादा है। राज्य शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 के दौरान राज्य के किसानों से नगद व लिंकिंग में धान की खरीदी एक दिसम्बर से 15 फरवरी 2020 तक एवं समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का की खरीदी भी एक दिसम्बर 2019 से 31 मई 2020 तक की जाएगी। खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रदेश के किसानों से धान खरीदी की अधिकतम सीमा 15 क्विंटल प्रति एकड़ लिंकिंग सहित निर्धारित की गई है। मक्का खरीदी की अधिकतम सीमा 10 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। खरीफ वर्ष 2019-20 में राज्य के किसानों से 85 लाख मैट्रिक टन धान एवं 5 हजार मैट्रिक टन मक्का का उपार्जन अनुमानित है। वर्ष 2019-20 में मक्का खरीदी की राशि का समस्त भुगतान धान खरीदी के समान ही किसानों के खाते में डिजिटल मोड से किया जाएगा। 


 

07-11-2019
प्रदेश में धान खरीदी 1 दिसम्बर से 15 फरवरी तक

रायपुर। राज्य शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 के दौरान राज्य के किसानों से नगद व लिंकिंग में धान की खरीदी 1 दिसम्बर से 15 फरवरी 2020 तक एवं समर्थन मूल्य पर किसानों से मक्का की खरीदी भी एक दिसम्बर 2019 से 31 मई 2020 तक की जाएगी। एक दिसम्बर 2019 रविवार को अवकाश होने के बावजूद भी उस दिन धान खरीदी की जाएगी। धान खरीदी के संबंध में सचिव खाद्य विभाग से जारी दिशा-निर्देशो के अनुसार खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रदेश के किसानों से धान खरीदी की अधिकतम सीमा 15 क्विंटल  प्रति एकड़ लिंकिंग सहित निर्धारित की गई है। खरीफ वर्ष 2019-20 में मक्का खरीदी की अधिकतम सीमा 10 क्विंटल प्रति एकड़ निर्धारित की गई है। खरीफ वर्ष 2019-20 में राज्य के किसानों से 85 लाख मैट्रिक टन धान एवं 5 हजार मैट्रिक टन मक्का का उपार्जन अनुमानित है। वर्ष 2019-20 में मक्का खरीदी की राशि का समस्त भुगतान धान खरीदी के समान ही किसानों के खाते में डिजिटल मोड से किया जाएगा। 

प्रदेश में बीज उत्पादक किसानों का बीज, बीज निगम द्वारा उपार्जित करने के लिए बीज प्रमाणीकरण संस्था से धान बीज की शुद्धता एवं अंकुरण की जांच करायी जाती है। चूंकि परीक्षण कार्य में समय लगता है, इसलिए धान का समर्थन मूल्य पर चिन्हाकित खरीदी केन्द्रों में किसानों से बीज निगम से प्रमाण पत्र के आधार पर एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक उपार्जन किया जाएगा। खाद्य विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप राज्य के सभी जिलों में धान का उपार्जन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा एवं मक्का का उपार्जन छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में धान की खरीदी विगत खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में संचालित एक हजार 995 खरीदी केन्द्रों एवं खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रारंभ किए गए नवीन खरीदी केन्द्रों में की जाएगी। प्रदेश में 48 मंडियों एवं 76 उपमंडियों के प्रांगण का उपयोग विगत खरीफ विपणन वर्ष के अनुसार धान उपार्जन केन्द्र के लिए किया जाएगा। 

04-11-2019
15 नवंबर तक पंचायतों में होगा जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन 

बीजापुर। जिला बीजापुर की ग्राम पंचायतों में जैव विविधता प्रबंधन समिति गठन करने के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन वनमंडलाअधिकारी वन मंडल बीजापुर डीके साहू एवं जिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी पोषणलाल चंद्राकर की अध्यक्षता में जिला पंचायत सभागार में रखी गई। कार्यशाला में ग्राम पंचायत के सचिवों केा वनमंडलाधिकारी द्वारा प्रत्येक पंचायत में गठित होने वाली समिति की गठन प्रक्रिया, उद्देश्य की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा जैव विविधता नियम 2002 बनाया गया है। जिसके द्वारा संग्राहकों को लाभांस प्रदान करने की व्यक्ति नियमेां के अंतर्गत प्रावधानित किया गया है, नियमों के अंतर्गत लाकर संग्रहण विपणन कर स्थानीय संग्राहकों को लाभांश दिया जावेगा। किसी भी इलाके में पायी जाने वाली जीवित अथवा मृत वनस्पति विभिन्न पेड़ पौधे फूल पते कंद मूल औषधी पौधे वन्यप्राणी खाद्य फसल धान, गेहूं, मक्का, जौ, तिल व अन्य स्थानीय फसलें जैव विविधता के अंतर्गत आते हैं। इनका संग्रहण कर ग्रामीणों के द्वारा हाट बाजार में बेचा जाता है। इसके कारण ग्रामीणों को बहुत कम लाभ मिल पाता है, जबकि इनसें उत्पाद बनाने वाली कंपनियां अधिक मुनाफा कमाती हैं। इसी कारण जैव विविधता प्रबंधन समिति के द्वारा उन कंपनियों से लाभांश प्राप्त कर ग्रामीणों के हित में उपयोग किया जावेगा। जैव विविधता समिति  ग्राम पंचायत स्तर पर बनाई जाएगी। जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन प्रक्रिया ग्राम पंचायत सरपंच के द्वारा प्रारंभ की जावेगी। पंचायत की बैठक सरपंच की अध्यक्षता में होगी। जैव विविधता प्रबंधन समिति में 6 सदस्य होंगे जिसमें से कम से कम 2 महिला सदस्य होना अनिवार्य व 4 अनुसुचित जन जाति के सदस्य होंगे, 1 सदस्य अनुसुचित जाति से भी हो सकता है।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी पोषणलाल चंद्राकर ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत की बैठक में कोरम का ध्यान रखा जाए तथा बैठक में बहुमत से निर्णय लिया जावेगा। स्थानीय सदस्य स्थानीय प्रजाति, वन एवं वन्यप्राणी, कीट, कृषि मछली पालन तथा वनोषधि पारंपरिक ज्ञान रखने वाला हो तो बेहतर होगा। सभी पंचायतों में 15 नवंबर तक अनिवार्य रूप जैव विविधता प्रबंधन समिति का गठन पूर्ण कर लिया जाए।
जैव विविधता प्रबंधन समिति जिला स्तरीय कार्यशाला में जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, वनमंडल के अधिकारियों के अलावा प्रबल आधार संस्था के सदस्य, पंचायत सचिव व वनमंडल के जमीनी स्तर के कर्मचारी उपस्थित थे।

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