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23-11-2020
ग्रामीणों की सोच से मानव-भालू द्वंद्व खत्म, वीरान पहाड़ी पर पौधारोपण कर वन्य प्राणियों का संरक्षण

रायपुर। प्राकृतिक संसाधनों, पारिस्थितिक तंत्र और जल, जंगल व जमीन को सहेजने में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, यह देखना हो तो मसनिया पहाड़ पर उगाए गए पेड़ों के बीच खेलते-कूदते भालूओं के आनंददायक दृश्य का साक्षात्कार करना चाहिए। मनरेगा और वन विभाग की योजनाओं के अभिसरण से वहां न केवल पहाड़ को वृक्षों से आच्छादित किया गया है, बल्कि जल संरक्षण के लिए कई चेकडेम भी बनाए गए हैं। मानव और वन्य प्राणी के सह-अस्तित्व को मानवीय कोशिशों से मजबूत करने का नायाब उदाहरण है। मसनिया पहाड़ और इसके आसपास के क्षेत्र में मनरेगा और वन विभाग से हुए काम। जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती विकासखंड के मसनियाकला और मसनियाखुर्द गांव से लगे मसनिया पहाड़ पर कुछ साल पहले तक हरियाली का नामो-निशान तक नहीं था। पेड़-पौधों से वीरान इस पहाड़ी पर खाने-पीने की कमी हुई तो भालू एवं अन्य वन्य प्राणी गांव की तरफ खींचे चले आए। नतीजतन भालू और ग्रामीण बार-बार आमने-सामने होने लगे जिससे कभी भालू तो कभी ग्रामीण घायल हुए। भूख के कारण भालू फसलों को भी नुकसान पहुंचाने लगे। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त रहने लगा और वे इस समस्या से निजात पाने का रास्ता तलाशने लगे।

गांववालों ने आपस में चर्चा कर भालूओं को पहाड़ एवं जंगल में ही संरक्षित करने की योजना बनाई। मसनियाकला ग्राम पंचायत और आश्रित गांव मसनियाखुर्द में ऐसे पौधे लगाने पर विचार किया गया जिससे कि भालूओं को जंगल में ही खाने को मिल जाए और वे गांव की तरफ न आए। इसके लिए मनरेगा और वन विभाग की योजनाओं के अभिसरण से पहाड़ पर पौधारोपण का रास्ता निकाला गया। वर्ष 2017-18 में अगले पांच वर्षों के लिए योजना तैयार कर इसे अमलीजामा पहनाया गया। लगभग 25 एकड़ जमीन पर मिश्रित पौधों का रोपण किया गया जिसमें सागौन, डूमर, खम्हार, जामुन, आम, बांस, शीशु, अर्जुन, केसियासेमिया और बेर के 25 हजार पौधे शामिल थे। इस काम के लिए मनरेगा से 29 लाख 38 हजार रुपए स्वीकृत होने के बाद श्रमिकों ने अपनी सहभागिता निभाते हुए दुर्गम मसनिया पहाड़ी पर पौधे रोपने का काम शुरू किया। यह काम मुश्किल था क्योंकि पौधरोपण के बाद पानी की कमी के चलते अधिक समय तक वह जिंदा नहीं रह पाता था। पानी की समस्या को दूर करने मनरेगा और वन विभाग के अभिसरण से भूजल संरक्षण के लिए करीब दस लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इस राशि से ब्रशवुड चेकडेम, गाडकर चेकडेम, बोल्डर चेकडेक और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया। श्रमिकों ने कड़ी मेहनत से लगातार पौधों को पानी देकर व फेंसिंग कर पौधों को सुरक्षित रखा।

अच्छी देखभाल से पौधे दो साल में ही वृक्ष की तरह लहलहाने लगे। वहां सागौन के 8015, डूमर के 2975, खम्हार के 1815, जामुन के 2445, आम के 2075, बांस के 1425, शीशु के 1245, अर्जुन के 1275, केसियासेमिया के तीन हजार तथा बेर के 730 पौधों को मिलाकर कुल 25 हजार पौधे रोपे गए। मजदूरों ने कांवर एवं डीजल पंप के माध्यम से इन पौधों की सिंचाई की। पौधों की सुरक्षा के लिए सीमेंट पोल चैनलिंक से 716 मीटर फेंसिंग की गई। पांच सालों की इस कार्ययोजना में पहले साल पौधारोपण और उसके बाद के तीन वर्षों में पौधों के संधारण एवं सुरक्षा कार्य में अब तक कुल 7851 मानव दिवस सीधे रोजगार का सृजन भी हुआ है। इसके लिए श्रमिकों को करीब 14 लाख रुपए का मजदूरी भुगतान किया गया है। वहां मनरेगा अभिसरण से ही निर्मित ब्रशवुड चेकडेम, गाडकर चेकडेम, बोल्डर चेकडेक व कंटूर ट्रेंच से पौधों को भरपूर पानी मिलने से उनकी अच्छी बढ़ोतरी हुई। अभी 10 से 12 फीट तक के पेड़ वहां नजर आने लगे हैं। भू-जल संरक्षण से अब भालूओं को पहाड़ी पर ही पानी मिलने लगा है। 

जामवंत परियोजना से भालू रहवास एवं चारागाह विकास : राज्य कैम्पा मद से जामवंत परियोजना के तहत क्षेत्र को विकसित करने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में 48 लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इस राशि से वहां जलस्रोत के विकास के लिए तालाब एवं डबरी बनाया गया है। भालू रहवास एवं चारागाह विकास के लिए छायादार व फलदार 13 हजार 200 पौधे रोपे गए हैं। इनमें बेर, जामुन, छोटा करोंदा, बेल, गूलर, बरगद, पीपल, सतावर, केवकंद, जंगली हल्दी और शकरकंद के पौधे शामिल हैं। भालूओं को दीमक अति प्रिय है। इसलिए क्षेत्र में दीमक सिफिंटग (भालू के लिए उपयोगी) को भी यहां स्थापित किया गया है। वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव कहती हैं कि जल, जंगल और जमीन को बचाने से ही प्रकृति का संतुलन बना हुआ है। मनरेगा और वन विभाग के तालमेल से मसनिया पहाड़ी में इस दिशा में अहम काम हुआ है। पहाड़ पर पौधारोपण और जल संग्रहण से वन्य प्राणी खासकर भालू स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। 

मानव-भालू द्वंद्व के बजाय सह-अस्तित्व : मसनियाकला के सरपंच संजय कुमार पटेल बताते हैं कि पौधरोपण के बाद से इस क्षेत्र की रंगत बदल गई है। मनरेगा तथा वन विभाग के संयुक्त कार्यों से मानव व भालू के बीच द्वंद्व अब समाप्त हो गया है और वे सह-अस्तित्व की भावना से एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाए बिना साथ मिलकर रहवास कर रहे हैं। फलदार और छायादार पेड़ों ने पहाड़ को न केवल हरियाली की चादर ओढ़ाई है, बल्कि भालूओं को भी संरक्षण प्रदान किया है। भालूओं को किसी से, किसी तरह का कोई नुकसान न हो, इसके लिए गांव में भालू मित्र दल का गठन किया गया है। इस दल की सदस्या भगवती पटेल बताती हैं कि गांव में भालूओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। मसनिया पहाड़ के नीचे पेड़ों के पास भालू अकसर दिख जाते हैं।

27-09-2020
गन लाइसेंस के लिए लगाने होंगे 10 फलदार पौधे, कलेक्टर की अनूठी पहल

रायपुर/सूरजपुर। वृक्षों के महत्व को आज पूरी दुनिया समझने लगी हैं। यही कारण हैं जो वैष्विक स्तर पर पौधारोपण के लिए विभिन्न कवायदे की जा रही हैं। इसी क्रम में सूरजपुर के कलेक्टर रणबीर शर्मा ने पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी पहल की है। इसमें उनके द्वारा गन लाइसेंस लेने वाले व्यक्तियों के समक्ष पहले 10 पौधों के रोपण की शर्त रखी गई है। गन का लाइसेंस लेने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को पहले 10 फलदार पौधों का रोपण कर जिला प्रशासन द्वारा जारी फेसबुक पेज 'ट्रीस फॉर गन' में फोटो अपलोड करना होगा। इसके पश्चात ही जिला प्रशासन आवेदक के आवेदन पर विचार करेगी। ऐसी अनूठी पहल शायद ही पहले कभी सूनी गई होगी, जिसकी शुरूआत अब सूरजपुर जिले से की गई है।

बता दें कि कलेक्टर रणबीर शर्मा पर्यावरण में बड़ी ही रूचि रखते हैं इसके साथ ही साफ-सफाई और पौधारोपण के प्रति भी अत्यंत संवेदनशील है। अपनी नवीन पदस्थापना के बाद से ही कलेक्टर ने जगह-जगह साफ-सफाई की व्यवस्था को सुधारा है और विभिन्न प्रयासों के तहत् फलदार व छावदार पौधों का रोपण कराया है। कलेक्टर शर्मा ने ट्रीस फॉर गन के संकल्पना के विषय में बात करते हुए बताया है कि गन लाइसेंस के लिए 10 फलदार पौधों का रोपण कर उक्त फेसबुक पेज पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है और यह एक शुरूआत है। इसी प्रकार के कई कार्यों में पौधों के रोपण के साथ जिले की सुंदरता व विकास की राह सुनिश्चित की जाएगी। आमजन भी फेसबुक पेज ट्रीस फॉर गन पर विजीट करके अवलोकन कर सकते हैं।

02-09-2020
भाजपा नवनियुक्त जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने किया पौधारोपण

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महर्षि बाल्मीकि वार्ड के कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त जिलाध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी के साथ एटीएम चौक प्रस्तावित अटल चौक स्थित गार्डन में पौधारोपण किया। इस अवसर पर सुंदरानी ने आम एवं सीताफल के फलदार पौधे लगाएं। साथ ही आम लोगों से अपील की है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए अधिक से अधिक पौधों का रोपण कर उसकी देखरेख करें। इससे न केवल हमारा शहर हरा भरा रहेगा बल्कि नागरिकों को ऑक्सीजन भी पर्याप्त मात्रा में मिलेगी। पौधारोपण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार राठी, मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह ठाकुर, जितेंद्र नाग ,मेघुराम साहू, अशोक गुप्ता, मिनी पांडे, डॉ विवेक श्रीवास्तव, अखिल चटर्जी, किशोरचंद नायक, अजय राणा, गज्जू साहू, अनिल यादव, अमलेश सिंह, जयराम कुकरेजा, चयन जैन, विकास शुक्ला, प्रहलाद क्षत्रिय, जूही कुमारी, जुबेदा बानो उपस्थित रही।

10-08-2020
Video: पं. धर्मदत्त पाण्डेय की पुण्यतिथि पर किया गया पौधारोपण व ट्राईसाइकिल वितरण

जांजगीर-चाम्पा। जिले के नगवागढ़ ब्लाक ग्राम पंचायत सिवनी (नैला) के प्रथम निर्वाचित सरपंच (1952) एवं न्याय पंचायत नैला के पूर्व उपाध्यक्ष स्व. पं. धर्मदत्त पाण्डेय की 57 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सोमवार को स्व.धर्मदत्त पाण्डेय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सिवनी नैला में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान पौधरोपण एवं दिव्यांगों को ट्राईसाइकिल वितरण किया किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष रामकुमार यादव, कलेक्टर यशवंत कुमार, एसपी पारूल माथुर एवं पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला रघुराज प्रसाद पाण्डेय सहित बड़ी तादात मे लोग उपस्थित रहे। इस दोरान अतिथियों ने पुण्यतिथि के अवसर पर पौधरोपण कार्यक्रम की सराहना करते हुए सभी से पौधरोपण करने की अपील की।

 

28-07-2020
गौठानों में छायादार वृक्ष लगाए गए या नहीं इसकी हर सप्ताह जानकारी लेंगे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने वर्षा ऋतु के दौरान गौठानों में छायादार वृक्ष लगाने कहा हैं। साथ ही गौठानों में सीपीटी वर्मी कंपोस्ट यूनिट, स्वसहायता समूहों के लिए कार्य-शेड और आवश्यक मशीनों व उपकरणों के कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग कर इनमें तेजी लाने कहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गौठानों में मवेशियों के लिए छायादार स्थान उपलब्ध कराने अभी बरसात के मौसम में पौधारोपण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने गौठानों में आर्थिक गतिविधियां शुरू करने सभी व्यवस्थाएं जल्द सुनिश्चित करने कहा है। वे हर सप्ताह इन कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। विभागीय मंत्री टी.एस. सिंहदेव के निर्देश पर प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने मनरेगा के सभी जिला कार्यक्रम समन्वयकों-सह-कलेक्टरों को इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने कलेक्टरों को इन कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। विभाग से जारी परिपत्र में कहा गया है कि वन विभाग की ओर से प्रत्येक गौठान की जरूरत व मांग के अनुसार पर्याप्त ऊंचाई और अच्छी गुणवत्ता के छायादार बड़े पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। बड़े पौधों के रोपण से जहां उनके जीवित रहने की संभावना ज्यादा होगी, वहीं गौठान परिसरों में छाया की व्यवस्था भी शीघ्र उपलब्ध होगी। पौधारोपण वन और कृषि विभाग के अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन में कराया जाएगा। गौठान में लगाए गए पौधों की देखभाल एवं रखरखाव की जिम्मेदारी गौठान संचालन समिति की होगी। विभाग ने गौठानों में मूलभूत जरूरतों सीपीटी, वर्मी कंपोस्ट यूनिट, स्वसहायता समूहों के लिए कार्य-शेड और आवश्यक मशीनों व उपकरणों की स्थापना के कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग कर इनमें तेजी लाने कहा है। मुख्यमंत्री की ओर से कार्यों की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा के लिए कलेक्टरों को निर्धारित प्रारूप में इसकी अद्यतन जानकारी मनरेगा आयुक्त कार्यालय को हर सप्ताह भेजना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

17-07-2020
संकुल दीपका अंतर्गत बेलटिकरी बसाहट में हुआ पौधारोपण

कोरबा। दीपका संकुल अंतर्गत ग्राम बेलटिकरी बसाहट में आज कई फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया। वृहद स्तर पर किए गए इन पौधों के रोपण में प्रमुख रूप से अंचल के जनप्रतिनिधि एवं शासकीय विभागों के सेवारत अधिकारी एवं कर्मचारी सम्मिलित हुए प्रमुख रूप से भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व खाद्य आयोग के अध्यक्ष ज्योतिनंद दुबे तथा पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष मनोज शर्मा ने भी पौधा लगाया। कार्यक्रम में कई फलदार एवं छायादार पौधे रोपित किए गए। इस अवसर पर शासकीय विभागों के कर्मचारी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।

08-07-2020
इंद्रावती के तट पर सघन पौधारोपण से समाज के लोगों से जुड़ने की अपील की कलेक्टर रजत बंसल ने

रायपुर/जगदलपुर। इंद्रावती नदी के दोनों किनारों पर किए जा रहे सघन पौधारोपण अभियान ’आमचो इंद्रावती-कठा लगाऊ बुटा’ में समाज के सभी वर्गों के लोगों को सक्रिय भागीदारी सुनिष्चित कर इस अभियान को सफल बनाने की अपील की कलेक्टर रजत बंसल ने। कलेक्टर बंसल ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत केवल पौधों को रोपित करना ही महत्वपूर्ण नहीं है वरन् उनका संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा महत्वपूर्ण है। उन्होंने अगले दो वर्षों तक रोपे गए पौधों के देख-रेख को अत्यंत आवश्यक बताया। बस्तर जिले में प्रभावित होने वाले जीवनदायिनी नदी इंद्रावती के दोनों किनारे पर जिला प्रशासन की ओर से तीन स्तरीय पौधारोपण करवाया जा रहा है।

इसके लिए समाज सेवी व्यक्ति, संस्था, प्रकृति प्रेमी, सभी आयु वर्ग के लोगों को इस नदी तट पौधारोपण महा अभियान में जुड़ने के लिए कलेक्टर रजत बंसल की अपील। कलेक्टर बंसल ने कहा कि ’’आमचो इंद्रावती-कठा लगाऊ बुटा’’ अभियान में लगभग 80 हजार पौधे नदी किनारे रोपित होने है। उसमें लगभग 14 हजार रोपित हो गए हैं। साथ ही आधी संख्या में गढ्ढे खोदकर आवश्यक तैयारी कर ली गई है। वन, राजस्व और पंचायत विभाग के हमारे शासकीय अमले की ओर से जन सहयोग से इंद्रावती नदी के किनारे स्थित जिले के 80 ग्राम पंचायतों में इस कार्य को बाखूबी अंजाम दिया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत कम खर्चों में अधिक से अधिक पौधों का रोपण तथा उनकी सुरक्षा के लिए स्थानीय सामाग्रियों का उपयोग कर सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। बंसल ने जिले के आम नागरिकों से रोपे गए पौधों को अपने बच्चों के समान देख-रेख कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने आशा व्यक्त कि सभी के सहयोग से निर्धारित समयावधि में इस कार्य को पूरा कर इस अभियान को सफल बनाएंगे।

07-07-2020
गरियाबन्द जिले के स्कूलों, आंगनबाड़ी व छात्रावासों आश्रमों में मुनगा लगाकर मुनगा महाअभियान

रायपुर/ गरियाबंद। शासन के निर्देशानुसार गरियाबंद जिले में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से जोड़ते हुए जिले के सभी ऑगनबाडी, स्कूलों और छात्रावास आश्रम में मुनगा के पौधा लगाकर इस मुनगा महाअभियान की शुरुआत की गई। राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करते हुए पौधारोपण के पहले चरण में प्रोटीन, विटामिन,आयन एवं अन्य पोषक तत्वों के मुख्य स्त्रोत मुनगा के पौधा का रोपण किया गया। राज्य सरकार की मंशा अनुसार गरियाबंद जिले के 288 आंगनबाड़ी केन्द्रों में 1452 नग मुनगा पौधा तथा 392 स्कूल में 2782 नग मुनगा पौधा एवं 21 छात्रावास आश्रम में 159 नग मुनगा पौधा इस प्रकार कुल 700 स्थानों में 4393 नग मुनगा पौधा का रोपण किया गया। वनमण्डल गरियाबंद अंतर्गत वन परिक्षेत्र, गरियाबंद नवागढ़,धवलपुर,मैनपुर,इंदागांव, परसुली,छुरा,पाण्डुका और फिंगेश्वर में व्यापक तौर पर जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकगण की उपस्थिति में और ग्रामीणों के पूर्ण सहयोग से मुनगा महाअभियान कार्यक्रम को सफल बनाया गया।

वनमण्डलाधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2020-21 में वन विभाग की ओर से पौधारोपण का कार्यक्रम तीन चरणों में किया जाएगा। आगामी 11 जुलाई 2020 को बाड़ी योजना के अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों क्षेत्र में आने वाले हितग्राहियों, परिवारों और सदस्यों को फलदार व सब्जी प्रजाति के बीज उपलब्ध कराए जाएंगी, ताकि वर्षा ऋतु में यह अपने घरों के बाड़ियों में लगाकर व्यापक तौर पर लाभ अर्जित कर सकें। इसी प्रकार लगभग 1 लाख सीडबॉल वन विभाग के द्वारा तैयार किए गए है, जो कि आगामी तारीख को विभिन्न स्थानों पर रोपण किए जाएंगे। इसी प्रकार 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के अवसर पर गौठान एवं आवर्ती चराई क्षेत्र तथा चारागाह में फलदार,छायादार पौधा रोपण करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण की तैयारियों व्यापक तौर पर चल रही है। गरियाबंद वनमण्डल अंतर्गत विभिन्न स्थानों में मुनगा महाअभियान कार्यक्रम को सफल बनाने जनप्रतिनिधियों पदाधिकारियों, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।

 

06-07-2020
वन होम वन ट्री कैंपेन, पौधा लगाकर प्रकृति को सहेजने भागीदारी की अपील

दुर्ग। जिले में वन होम वन ट्री अभियान के अंतर्गत आज हर घर में नागरिक पौधे रोपेंगे। रविवार को सभी निगमों में एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पौधों का वितरण नागरिकों को किया गया। इसके साथ ही स्कूलों में, आंगनबाड़ी केंद्रों में, प्रमुख सड़कों में, उद्यानों में, गौठान में भी पौधों का रोपण किया जाएगा। सभी शासकीय स्कूलों के साथ ही प्राइवेट स्कूलों में भी पौधों का रोपण किया जाएगा। स्कूलों में 22,000 से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। आंगनबाड़ी केंद्रों में 12,000 से अधिक मुनगा के पौधे रोपे जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में दो लाख से अधिक पौधे रोपे जाने की संभावना है। सभी शासकीय कार्यालयों में पौधे रोपे जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

नगर निगम रिसाली में कल्याणी मंदिर के पास के तालाब के निकट सामूहिक पौधारोपण का कार्यक्रम किया जाएगा। दुर्ग विधायक अरुण वोरा ने सभी से अपील की है कि कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने सभी संगठनों से पुन: अपील की है कि 6 जुलाई को सभी सामूहिक रूप से पौधरोपण करें। साथ ही अपने घरों में भी पौधे लगाएं। इसके साथ ही संगठन के सभी सदस्यों को भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने सभी नागरिकों से भी  पौधे लगाने की अपील की है। वन होम वन ट्री में शामिल होकर लें अपनी सेल्फी और शेयर करें हमारे साथ दुर्ग जिले के आधिकारिक फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर इसे टैग कर दें।

03-07-2020
गोबर ने किया कमाल, समूह की महिलाएं हुई मालामाल

रायपुर। इंसान की काबिलियत उसकी मेहनत पर निर्भर करती है और यदि कम मेहनत और कम संसाधन में ज्यादा फायदा मिले तो उसे एक अलग ही पहचान मिलती है। ऐसी ही पहचान टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोबर से गमले बनाए है। अभी तक गोबर का उपयोग खाद के रूप में होता था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की दूरदर्शिता से अब गोबर का उपयोग व्यवसायिक रूप में होने जा रहा है। अब गोबर से कंडे ही नहीं बल्कि दीये, गमले एवं अन्य वस्तुएं भी बनने लगे हैं। राज्य सरकार द्वारा गांव की समृद्धि और किसानों की खुशहाली के लिए गोबर खरीदने की कार्य योजना तैयार की जा रही है। गोबर के गमले से बेमेतरा जिले के ग्राम पंचायत टिपनी की जय महामाया महिला स्व सहायता समूह ने कमाई शुरू भी कर दिया है।

महिलाओं ने अभी तक 1200 गमले बेचकर 18 हजार रुपए की कमाई कर चुकी हैं। एक गमला बनाने में 7 रुपए की लागत आती है और वह बिकता 15 रुपए में है। इस तरह से 9600 रुपए की शुद्ध कमाई। महिलाओं ने अभी तक 1500 गमलों का निर्माण कर चुकी हैं। गोबर गमला निर्माण में कच्चा माल के रूप में गोबर, पीली मिट्टी, चूना, भूसा इत्यादि का उपयोग किया जाता है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविकास मिशन (बिहान) के तहत प्रेरित किया जा रहा है। गोबर से गमला बनाने का मुख्य लाभ यह है कि यह टिकाऊ होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल है तथा प्लास्टिक-पॉलीथिन के गमले के स्थान पर इनका उपयोग किया जाता है।

अगर गमला क्षतिग्रस्त हो गया तो इसका खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। गोबर के गमले का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग पौधारोपण या पौधे की नर्सरी तैयार करने में हैं, जिसमें गोबर के गमले में लगें पौधें को सीधा भूमि पर रोपित कर सकते हैं। गोबर खाद के रूप में अधिकांश खनिजों के कारण मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। पौधें की मुख्य आवश्यकता नाईट्रोजन, फॉसफोरस तथा पोटेशियम की होती है। ये खनिज गोबर में क्रमशः 0.3-0.4, 0.1-0.15 तथा 0.15-0.2 प्रतिशत तक विद्यमान रहते हैं। मिट्टी के सम्पर्क में आने से गोबर के विभिन्न तत्व मिट्टी के कणों को आपस में बांधते हैं। यह पौधों की जड़ों को मिट्टी में अत्यधिक फैलाता हैं एवं मिट्टी को अधिक उपजाऊ बनाती है। इस तरह समूह की महिलाओं ने गोबर से गमला बनाकर आजीविका के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

02-07-2020
ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए मनुष्यता बचाने असाधारण कदम उठाने का है वक्त : आरपी मंडल

रायपुर। वो ही शहर है वो ही रास्ते, वो ही घर है और वो ही लान भी, मगर उस दरीचे से पूछना, वो दरख्त अनार का क्या हुआ, बशीर बद्र की इस गजल में वो पीड़ा छिपी है जो निजी रूप से पेड़ों के हमारे जीवन में घटती जगह की चिंता दिखाती है। अपने घरों को हमने कांक्रीट में बदल दिया है और इस तरह सारे शहर कांक्रीट के जंगल में बदल रहे हैं। पौधारोपण का अभियान बहुत कुछ शासकीय स्तर पर हो रहा है अथवा उन लोगों द्वारा किया जा रहा है, जो पर्यावरण प्रेमी हैं। यह अभियान इससे भी आगे जाए। इस व्यापक उद्देश्य से जिला प्रशासन दुर्ग ने 6 जुलाई को पौधरोपण महाभियान का आह्वान जिले के नागरिकों से किया है।

मुख्य सचिव आरपी मंडल रजिस्ट्री कार्यालय दुर्ग के भवन के लिए जमीन चिन्हांकित करने अभी हाल ही में वहां गए थे। उन्हें उस भूमि में एक पेड़ दिखा। उन्होंने कहा कि भवन बने, लेकिन ये पेड़ न कटे। क्योंकि हम लोग यहां पेड़ सहेजने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेड़ को ग्लास के माध्यम से पैसेज दिया जाए। ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुए मनुष्यता को बचाने के लिए असाधारण कदम उठाने का वक्त है और शासन के साथ ही आम जनता को भी बराबरी से इस दिशा में कार्य करना होगा। बशीर बद्र की यह गजल फिर याद आती है, कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बंधा हुआ वो गजल का लहजा नया नया, न सुना हुआ न कहा हुआ। इस सुंदरता को सहेजना है और रोज अपने दरीचों से देखना है, तो 6 जुलाई को एक पौधा अवश्य लगायें। प्रकृति को सहेजने की इस लड़ाई में जब तक आम आदमी की व्यापक भागीदारी नहीं होगी, तब तक हरियाली के विस्तृत दायरे की कल्पना करना भी कठिन है। घरों में जब पौधे पहुंचेंगे और हर नागरिक इसे बचाने और सहेजने की शपथ लेगा तो निश्चित ही आने वाली पीढ़ी को हरीतिमा से भरे शहर का तोहफा मिलेगा। पौधारोपण को लेकर पिछले साल भी वन विभाग ने एक पहल की थी जिसमें पौधों के इच्छुक नागरिकों को घर पहुंचाकर पौधे दिये गए थे।

इस बार भी यह कार्य किया जा रहा है। कोई कार्य मिशन के रूप में और उत्सव के रूप में होता है तो इसके और भी बड़े और शुभ परिणाम सामने आते हैं। छह जुलाई को ऐसे ही परिणाम आने की उम्मीद है। घरों के लिए फलदार पौधे वितरित किये जाने की योजना है। कहीं आम के पौधे दिये जाएंगे। कहीं अमरूद के पौधे और कहीं जामुन के पौधे। कोई अच्छा कार्य होता है, तो उसे अंग्रेजी में फ्रूटफुल कहते हैं। हिंदी में कहते हैं कि यह फलदायी कार्य हुआ। जो लोग पौधे ले जाएंगे, उन्हें न केवल अपने परिवार के लिए कुछ ही सालों में फलदायी पेड़ों से फल मिलेंगे अपितु उससे भी बढ़कर उनका घर हरीतिमा से पूर्ण और सुंदर  होगा। किसी घर को सुंदर दिखाना है तो सबसे न्यूनतम निवेश में होने वाला कार्य यही है कि कोई सुंदर सा पेड़ लगा दो। अगर आप आम का पेड़ लगा देंगे तो आम्रमंजरियों की खूबसूरती और खुशबू से आपका घर महक उठेगा। अगर आप गुलमोहर का पेड़ घर में लगा देंगे तो इसकी सुंदरता से घर गुलजार हो जाएगा। शहरों में तो अब यह भी देखने को मिलता है कि घर का विस्तार करना है और कोई पेड़ आ गया तो इसके लिए पैसेज खोल देते हैं, लेकिन पेड़ नहीं काटते।

18-06-2020
हरियर छत्तीसगढ़ योजना के तहत रोपे गए पौधों का अतापता नहीं, ग्रामीणों में आक्रोश

रायपुर। शासन द्वारा हर बरसात में पौधारोपण के तहत रोपाई कराते जाने वाले पौधों के हश्र की बात तो दूर मन्दिरहसौद के निकट स्थित ग्राम तुलसी (बाराडेरा) में मोनेट इस्पात एंड एनर्जी लिमिटेड द्वारा 5 एकड़ में कथित रूप से बीते दो वर्षों में रोपे गये 10,000 पौधों में से उंगलियों में गिने जाने लायक पौधों को छोड़ शेष का अतापता भी नहीं। इसे लेकर इस संयत्र के प्रदूषण के खिलाफ मुखर रहने वाले जागरूक ग्रामीणों सहित तुलसी के निवासियों में आक्रोश व्याप्त है। ज्ञातव्य हो कि ग्राम तुलसी से लगे ग्राम कुरूद में स्थापित मोनेट इस्पात संयत्र द्वारा फैलाये जाने वाले प्रदूषण से प्रभावित आसपास के 15-20 ग्रामों के ग्रामीणों द्वारा बीते कुछ वर्षों पूर्व किसान संघर्ष समिति के अगुवाई में एक लम्बे समय तक प्रभावी आन्दोलन चलाया गया था।

इस आन्दोलन में तुलसी के ग्रामीणों ने भी सहभागिता निभाई थी। इसी तुलसी ग्राम के नवनिर्मित व उद्घघाटन के प्रतीक्षा जोहते सब्जी मंडी के ठीक सामने तुलसी के तत्कालीन सरपंच नेमीचंद धीवर के कार्यकाल में सन् 2017 व 2018 में इस संयत्र द्वारा 5 एकड़ भूमि पर 10,000 पौधे हरियर छत्तीसगढ़ कार्यक्रम के तहत रोपे गये थे। प्रदूषण के खिलाफ मुखर रहे ग्रामीणों की शिकायत पर पौधारोपण स्थल का निरीक्षण करने के पश्चात समिति संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने जानकारी दी है कि कथित रूप से रोपे गये दस हजार पौधों में से महज उंगलियों में गिने जाने लायक पौधे आज की स्थिति में स्थल पर मौजूद दिख रहे हैं।

उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि संयत्र द्वारा या तो महज शासन की तात्कालिक वाहवाही लूटने कथित पौधारोपण किया गया था या फिर पौधारोपण की औपचारिकता निभाने के बाद वे देखरेख में लापरवाही बरत गये जिसकी वज़ह से पौधारोपण कार्यक्रम मजाक बन कर रह गया। इधर ग्राम तुलसी के पूर्व सरपंच व ग्राम सेवा समिति के वर्तमान अध्यक्ष चन्दू धीवर ने पौधारोपण स्थल के उजाड हो जाने से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त होने की जानकारी देते हुए संयत्र प्रबन्धकों से इस बरसात में तुलसी के ग्रामीणों की मौजूदगी में नये सिरे से पौधारोपण कराने व हरे-भरे पेड़ों के तैयार होने तक सतत देखरेख की व्यवस्था कराने व इसकी जिम्मेदारी ग्राम के युवाओं को देते हुए उन्हें रोजगार देने की मांग की है।

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