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11-09-2020
लोगों की जान से बड़ा पैसा नहीं, सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और कोरोना कैपिटल बन गया रायपुर : बृजमोहन

रायपुर। विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश में लगातार बढ़ रहे कोविड-19 के प्रकरण व अस्पतालों की दुर्दशा, कोविड मरीजों के इलाज के संबंध में राज्य सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं। बृजमोहन ने कहा है कि, सरकार कोरोना के लिए व्यवस्था करने के बजाए हिसाब किताब में लगी हुई है। यह समय हिसाब किताब का नहीं बल्कि लोगों की जान बचाने का है। छत्तीसगढ़ के लोगों की जान से बड़ा पैसा नहीं है। उन्होंने कहा है कि,शासन को कोरोना की व्यवस्था करने के लिए सभी प्रकार की लिमिट हटाकर हॉस्पिटल को जो जरूरत हो, जितना पैसा चाहिए वहन करना चाहिए। युद्धस्तर पर इलाज, बेड व व्यवस्थित क्वारेंटाइन सेंटर की व्यवस्था करनी चाहिए। प्रदेश के सभी निजी हॉस्पिटलों के 50 प्रतिशत बेड सरकार को कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के लिए निर्धारित कर लेना चाहिए। इन हॉस्पिटलों में गरीब मरीजों का इलाज का भार शासन को वहन करना चाहिए।

सरकार व्यवस्था करने में पूरी तरह लचर और अक्षम साबित हुई है। पूरे प्रदेश में कोरोना मरीजों के लिए बेड की कमी हो गई है। अस्पतालो में जगह नहीं है। मुख्यमंत्री की होम क्वारेंटाइन सुविधा व निशुल्क दवा की घोाषणा सिर्फ बयानो में  ही है। बी और सी सीमट्मेटिक मरीज के लिए कही बेड नहीं है। प्रदेश की जनता ऑक्सीजन व वेंटीलेटर के आभाव में दम तोड़ रही है। शासन बताने की स्थिति में नहीं है कि, उन्होंने जनता के लिए कहां-कहां ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की व्यवस्था की है, कितनी-कितनी की है। अब सरकार मरीज व मौत का आंकड़ा भी छिपा रही है। अनेक जिलों से जो मरीजों व मृतकों का आंकड़ा जारी होता है, प्रदेश से जारी आंकड़ों में उससे कम व भिन्न रहता है। प्रदेश में जनता के मन में भय व दहशत व्याप्त हो गया है। लोग अव्यवस्था को देख भय में टेस्ट कराने से भाग रहे हैं और यही मौत की वजह बनते जा रही है। 5 माह सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।  शासन और प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। इस कारण राजधानी कोरोना कैपिटल में तब्दील हो गई है। प्रदेश के नागरिक इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं, हॉस्पिटलों में बेड नहीं है और सरकार बयानबाजी में उलझी हुई है।

 

08-09-2020
अब रेणुका और बृजमोहन को हो रही चिंता,पहले होती तो 15 साल में छत्तीसगढ़ कुपोषण मुक्त हो जाता : फूलोदेवी नेताम

रायपुर। राज्यसभा सांसद व महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष फूलोदेवी नेताम ने केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह और बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार गढ़बो सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान चलाकर प्रदेश के नौनिहालों को कुपोषण मुक्त और महिलाओं को एनीमिया मुक्त करने अभियान चला रही तो भाजपा नेताओं को राजनीति सूझ रही है। कोविड-19 के बचाव के मापदंडों का पालन करते हुए आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों से छत्तीसगढ़ के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को गर्म भोजन, कृमि नाशक गोली और विटामिन की गोलियां के साथ पोषण युक्त आहार दिया जा रहा है।  उन्होंने दोनों से पूछा है कि, इस पर भाजपा नेता ओछी राजनीति क्यों कर रहे हैं? मोदी वन में कुपोषण हटाने काम नहीं किया गया। यही वजह है भारत विश्व में 100वे नंबर पर है,यहां सुपोषित-स्वस्थ और तंदुरुस्त बच्चों की संख्या कम है। फूलोदेवी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, 15 साल के रमन भाजपा शासनकाल में मंत्री रही रेणुका सिंह व बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ के बच्चों और महिलाओं की चिंता नहीं हुई। कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार करने में दिन रात एक किए हुए थे।

उस दौरान राज्य के नौनिहाल और महिलाओं की चिंता की होती तो, 15 साल में छत्तीसगढ़ कुपोषण मुक्त हो जाता। पूर्व  रमन सरकार के समय प्रदेश में 9 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषित थे। कुपोषण को कांग्रेस सरकार ने गंभीरता से लेते हुए जमीन स्तर पर जुड़कर काम किए हैं,इसका परिणाम है कि,  67 हजार 889 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों की संख्या में लगभग 13.79 प्रतिशत की कमी आई है। ये कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक बड़ी उपलब्धि है। बहुत ही कम समय में ही कुपोषण की दर में उल्लेखनीय कमी का श्रेय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कुशल नेतृत्व सहित उनकी दूरदर्शी सोच को जाता है। फूलोदेवी नेताम ने यह भी आरोप लगाया है कि, हर क्षेत्र मे विफल मोदी सरकार के कारण आज कोरोना महामारी विश्व में दूसरे नंबर पर आ गया है। प्रधानमंत्री ने समय रहते यदि ध्यान दिया होता तो इस आपदा से बचा जा सकता था। जिस वक्त कोरोना भारत में पैर पसार रहा था, उस समय प्रधानमंत्री नमस्ते ट्रम्प, विधायकों की  खरीद फरोख्त में लगे हुए थे।

02-09-2020
बृजमोहन ने कहा- स्मार्ट सिटी का पैसा बेमतलब खर्च करने से अच्छा शहर की स्थायी समस्या हल करें

रायपुर। भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बुधवार को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति दिशा की बैठक में शासन की विभिन्न योजनाओं पर चर्चा हुई।  अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी के पैसों को बेमतलब खर्च करने के मामले में कहा है कि स्मार्ट सिटी के पैसों से शहर के स्थाई समस्याओं को दूर करने के लिए खर्च किया जाना चाहिए। स्मार्ट सिटी से पूरे शहर में चौक-चौराहों में जहां भी जगह मिले शौचालय और मूत्रालय का निर्माण किया जाना चाहिए। शहर के मध्य स्थित सड़क मालवीय रोड, कोतवाली, कालीबाड़ी चौक, पुलिस लाइन, आमापारा,आजाद चौक, सदर बाजार की मुख्य सड़कों को स्मार्ट सड़क बनाना चाहिए। सभी विद्युत खंभों को हटाकर अंडर ग्राउण्ड बिजली के तार केबल लगाया जाए, जिससे सड़के सुंदर व वायर विहीन दिखें। अग्रवाल ने कहा है कि अमृत मिशन के तहत सड़कों के किनारे स्थित तालाब/डबरियों का पाथवे सहित सौंदर्यीकरण करना चाहिए। अमृत मिशन के तहत बूढ़ातालाब व खारून नदी पर बनने वाला एसटीपी क्यों इतने समय बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। मेकाहारा में लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाया जा रहा 80 बिस्तर वेंटिलेटर युक्त कोविड कक्ष क्यों नहीं बन पा रहा है।

आज 5 माह बाद भी यह कक्ष नहीं बनना चिंताजनक है, जबकि इस कक्ष की सबसे ज्यादा आवश्यकता अभी है। उन्होंने कहा कि इस निर्माण को 7 दिन में पूरा करवाकर 80 बिस्तर वेंटिलेटर युक्त कोविड कक्ष की सुविधा रायपुर की जनता को उपलब्ध कराए। अग्रवाल ने कहा कि शहर के मध्य टिकरापारा स्वीपर कॉलोनी व अन्य बस्तियों से हटाए जा रहे गरीब बस्ती वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना व अन्य योजनाओं के तहत वहीं पर मकान बनाकर दिया जाना चाहिए। ये सभी गरीब लोग शहर के मध्य काम में या नगर निगम के सफाई व्यवस्था में लगे हुए हैं। इन्हें शहर से बाहर भेजने के इनकी पूरी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। गरीब लोगों को रोजगार की समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है। बृजमोहन ने शहर के स्मार्ट सिटी के तहत योजना में वेंडर जोनों में लोगों को एक टाइप स्मार्ट गुमटी उपलब्ध कराने कहा, जिससे पूरे शहर में वेंडर जोन व्यवस्थित व एकरूप दिखे व शहर का सौंदर्य भी बढ़ें।

 

27-08-2020
बृजमोहन ने विधानसभा में उठाया गायों की मौत का मामला, कहा-गौठान को मजाक बना दिया है

रायपुर। प्रदेश के गौठानों में गायों की मौत का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से गुरुवार को भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 19 जून को कलेक्टरों को रोका छेका के लिए क्या पत्र लिखा है व निर्देश दिया है,जो गायों के मौत का, मैं कहूंगा हत्या का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि रोका छेका के आदेश के कारण सरपंच गायों को अंधेरे कमरे में बंद कर रहे हैं। गंदगी में बंद कर रहे हैं। आप इससे पाप के भागीदार बनेंगे। बृजमोहन ने कृषि मंत्री को कहा कि आपके इस आदेश के कारण गायों की मौत हो रही है। उन्होंने गायों के मालिकों को मुआवजा देने की मांग भी की। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जब रोका छेका पुरानी व्यवस्था है तो आप श्रेय क्यों ले रहे है। जो व्यवस्था पुरानी थी उस पर सर्कुलर जारी कर गायो के मौत का साधन बना दिया है। छत्तीसगढ़ में रोका छेका, गौठान के कारण 1000 से ज्यादा गायों की मौत हुई है। रोका छेका, गौठान को मजाक बना दिया है। वहाँ चारा नहीं है जब तक चारे की व्यवस्था नही करेंगे कहाँ से गौठान में गाये पलेगी। उन्होंने कहा कि आपके रोका-छेका में रोकने वाली गायों, गौठानों की गायों के चारे के लिए गौ सेवा आयोग की 25 रूपये की व्यवस्था है, उसको आप क्यों नहीं दे देते। उसको 50 रूपये करने का निर्णय हुआ था, उसको आप लागू क्यों नहीं कर दे देते? अगर हम सच्चे गौमाता के भक्त, सेवक हैं तो हमको उसके बारे में पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए। हमारे आधे से ज्यादा गौठान डिफंग पड़े हुए हैं। रोका छेका योजना गावों की स्वतंत्र व्यवस्था थी। निर्देश के कारण गायों को गंदे कमरे में, छोटे-छोटे कमरों में जबरदस्ती बंद किया जा रहा है और उसके कारण गायों की मौत होगी तो हम उसको गौहत्या नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे? हम चाहेंगे कि सरकार की तरफ से यह आना चाहिए था कि रोका-छेका के तहत गायों को रोकने के लिए उन गायों की हम क्या व्यवस्था करेंगे? गौठानों की गायों के चारे की हम क्या व्यवस्था करेंगे? मैं यह मानता हूँ कि आपकी बुरी नीयत नहीं है। परन्तु आपके निर्देशो को पालन करने के लिए अधिकारी जिस तत्परता से काम करते हैं, उसमें वह सावधानी नहीं रखते, उन असावधानियों के कारण इन गायों की मौत हो रही है, इसको आपको रोकना चाहिए।

गांवों में सुविधा विहीन गौठानों की व्यवस्था

बृजमोहन अग्रवाल ने ध्यानाकर्षण में कहा कि ‘रोका-छेका’ फ्लेगशीप प्रोग्राम के चलते प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों के सख्त निर्देश एवं धमकी के कारण गांव-गांव में मवेशियों को खुले में चरने पर रोक लगा दी गई है। सभी सरपंचों ने रोका-छेका के तहत ऐसे मवेशियों को किसी भवन/जगह में अवरूद्ध करने के निर्देश दिये गये, जिसके भयावह परिणाम हुए है। इसी के चलते 25 जुलाई 2020 को बिलासपुर जिले के तखतपुर के ‘मेड़पार’ गांव में 50 से अधिक गायों की हत्या एक ही रात में हो गई। सरपंच ने इन गायों को रोका-छेका के तहत पुराने एवं जर्जर भवन में ठूंस कर रख दिया था। गायों को ऐसा भरा गया था कि वहां एक आदमी के खड़े होने लायक जगह नहीं थी। भवन के दरवाजे एवं खिड़कियों को बंद कर दिया गया था। गायों के लिए ‘चारा’ की व्यवस्था तो दूर पानी पीने की व्यवस्था नहीं थी। गायों को किसी कसाई खाने से भी बदतर हालत में रखा गया था। अचरज की बात तो ये है कि ऐसा कृत्य प्रदेश के लगभग सभी ग्रामों में हो रहा है। प्रदेश के 20 हजार से अधिक गांवो में से मात्र 2500 गांवो में ही आधे-अधूरे, सुविधा विहीन गोठानों की व्यवस्था की गई है। ऐसे ही बिलासपुर नगर निगम के मोपका स्थित गौठान में जुलाई माह में 200 मवेशियों को कीचड़ सने गौठान में रखा गया, जहां चारा एवं पानी की व्यवस्था भी नहीं है, जिसके चलते वहां पर 7 से अधिक गायों की मौत हुई। यही हाल रायगढ़ शहर के भीतर स्थित 2 गौठानों का है, यहाँ पशुओं को रखने की कोई व्यवस्था नहीं है, बिना चारा एवं पानी के उन्हें भूखा मारा जा रहा है। बलौदाबाजार जिले में भी अव्यवस्थाओं चलते गौठान में गायों की मौत हो गई। जिला कलेक्टर्स ने मुख्यमंत्री के निर्देश को पालन करने के निर्देश गांव-गांव में दिये है। इन बातों को ध्यान में ही नही रखा कि कितने गांवो में गायों एवं अन्य मवेशियों को रखे जाने की व्यवस्था है ? सरकार ने रोका-छेका गोठान की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंपकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली है। पंचायतों के लिए न तो इन कामों के लिए समुचित व्यव्स्था की गई और न ही राशि उपलब्ध कराई गई है। इससे प्रदेश के सभी 20 हजार से अधिक गांवों मे गौ-पालको के मन में राज्य सरकार के खिलाफ भारी रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

मंत्रीजी व्यवस्था सुधारने की जरूरत है

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मंत्रीजी आप व्यवस्था सुधारिए। आपके निर्देशों के कारण कितने सरपंच मरेंगे, छोटे-छोटे अधिकारी मरेंगे। आपके निर्देशों का पालन करने के कारण इसलिए आपको व्यवस्था सुधारने की जरूरत है, आप इस व्यवस्था को सुधारें और जहां तक हमारे सरकार के समय की बात है तो वह निजी लोगों के गौशालाओं में मृत्यु हुई थी, आज आपके तो सरकारी निर्देश के कारण मृत्यु हो रही है इसलिए मैं इसको गौहत्या कह रहा हूँ। अग्रवाल ने कहा कि वहां 50 से ज्यादा जानवरों की मृत्यु हुई है, गायों की मृत्यु हुई है और उन किसानों की रोजी-रोटी वही थी, और वह सरकार के निर्देशों के कारण हुई है तो आप किसी योजना में नहीं तो कम से कम मुख्यमंत्री सहायता कोष से उन किसानो को राशि दे दें। मंत्री सहायता कोष में दे दें। गौसेवा आयोग में पैंसा है, उसमें से पैसा दे दें।

पशुओं के नियंत्रण के लिए रोका छेका प्रथा प्रचलित : चौबे

ध्यानाकर्षण के जवाब में पशुपालन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में फसल बुवाई कार्य के पूर्व कर रहे पशुओं के नियंत्रण के लिए रोका छेका प्रथा प्रचलित है,जिससे फसल बुवाई को बढ़ावा देने तथा पशुओं के चरने से फसल को होने वाले हानि से बचाने के लिए पशुपालक तथा ग्रामवासियों द्वारा पशुओं के बांधकर रखने अथवा पहटिया की व्यवस्था इत्यादि कार्य किया जाता है। उक्त प्रयास से न ही कृषक शीघ्र बोवाई कार्य पूर्ण कर पाते है, अपितु द्वितीय फसल लेने के लिये भी प्रेरित होते हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्त जिला कलेक्टर को यहा निर्देश दिये गये थे कि 19 जून 2020 को रोका छेका कार्यक्रम आयोजित कर ग्राम स्तर पर बैठक आयोजित कर ग्राम सरपंच, पंच जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण रोका-छेका प्रथा अनुसार पशुओं को बांध कर रखने, पशुओं के नियंत्रण से फसल बचाव की शपथ दिलाई जावे। गौठानों में पशुओं के प्रबंधन, रख रखाव की उचित व्यवस्था के लिए गौठान प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की जावे। पहटिया/चरवाहे की व्यवस्था से पशुओं का गौठानों में व्यवस्थापन सुनिश्चित करावें। खुले में विचरण कर रहे पशुओं का नियंत्रण व गौठानों में संधारण करावे। गौठानों में पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविर का आयोजन करावे। वर्षा के मौसम में गौठनों में पशुओं के सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंधन किया जावे।

दम घुटने से पशुओं की मृत्यु हुई

मंत्री ने कहा कि बिलासपुर जिला विकासखण्ड तखतपुर के ग्राम मेड़पार गांव में कुल 45 मवेशियों की मृत्यु हुई है। उक्त ग्राम में ग्रामीणों द्वारा मेड़पार बाजार केे आवारा पशुओं को पुराने पंचायत भवन में दिनांक 24 जुलाई 2020 को रख जाकर 25 जुलाई 2020 को जंगल में छोड़ जाने के उद्देश्य से रखा गया था, ताकि खड़ी फसलों को नुकसान से बचाया जा सके। पशुओं को रखे गये कमरे का आकार छोटा होने एवं पशुओं की संख्या अधिक होने से पशुओं के सींग आदि से कमरो का खिड़की दरवाजा बंद होने तथा पशुओं के गोबर व मूत्र विसर्जन करने से उत्पन्न होने वाले गैस के कारण दम घुटने से पशुओं की मृत्यु हुई। उक्त घटना के लिए अज्ञात व्यक्तियों के नाम पर थाना हिर्री, जिला बिलासपुर में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट 0110 दिनांक 25.07.2020 दर्ज हुई है, जिसकी विवेचना जारी है।

आवश्यक मूलभूत सुविधाएं के साथ प्रदेश में बनाए गए 3149 गौठान

प्रदेश में कुल 5826 गौठान स्वीकृत हुए है,जिसमें से 3149 गौठान निर्मित हो चुके हैं, जिसमें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं प्रदाय की गई। इन गौठानों में औसतन 4.35 लाख पशु प्रतिदिन आते हैं। जिनको मूलभूत एवं पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। गौठानों में पैरादान से प्राप्त धान पैरा अथवा गौठान के पास विकसित चारागाह से उत्पादित हरे चारे को काटकर पशुओं को खिलाया जाता है। साथ ही गौठानों में प्राकृतिक रूप से उगे घास/झाड़ियों को गौठानों में आने वाले पशुओं को चराया जाता है। बिलासपुर नगर निगम के मोपका स्थिति गौठान में जुलाई से केवल 02 कमजोर एवं वृद्ध गायों की मृत्यु हुई है। उक्त गौठान में पशु शेड में पानी व चारे के कोटने निर्मित हैं। पशुओं के विचरण हेतु सुरक्षित खुले क्षेत्र में वर्षा से बहकर मिट्टी आने से कीचड़ हुआ है, जिसका उपयोग प्रतिबंधित है। रायगढ़ में सड़को पर विचरण करने वाले पशुओं को ट्रांसपोर्ट नगर के पास निर्मित कांजी हाउस को अस्थायी तौर पर गौठान के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें पशुओं को रखा गया है, जहां पर पशुओं के लिए चारा पानी आदि समुचित व्यवस्था की गई है। गौठान निर्माण के लिये निगम क्षेत्र में 4-5 कि.मी. दूर स्थित ग्राम सम्बलपुर में जमीन का चिन्हांकन किया गया है। बलौदाबाजार जिले के गौठानों में गायों की मौत की कोई सूचना नहीं है। शासन द्वारा रोका-छेका कार्यक्रम के तहत् ग्रामवासियों को किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाला गया है। शासन द्वारा गौठान संचालन की जिम्मेदारी गौठान प्रबंधन समिति को दी गयी है। इस के लिए गौठान प्रबंधन समिति को अनुदान के रूप में प्रतिमाह राशि 10 हजार दिये जाने का प्रावधान किया गया है। अतः प्रदेश के गौपालकों के मन में राज्य सरकार के प्रति रोष एवं आक्रोष व्याप्त नहीं है।

 

18-08-2020
बृजमोहन के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, कहा भाजपा छत्तीसगढ़ की परंपरा संस्कृति की है विरोधी

रायपुर। पूर्व मंत्री एवं विधायक बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुख्यमंत्री निवास में हुई तीजा पोला तिहार के आयोजन पर टीका टिप्पणी से भाजपा का छत्तीसगढ़  विरोधी चाल चरित्र उजागर हुआ। भूपेश बघेल मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ के तीज त्यौहार परंपरा संस्कृति का आयोजन करते हैं। त्योहारों में आम जनता के साथ सरकार की सहभागिता सुनिश्चित करते हैं तो भाजपा नेताओं के पेट में दर्द क्यों होता है? धनंजय ने कहा कि 15 साल के रमन शासन काल के दौरान छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति परम्परा विलुप्तप्राय होने की कगार पर खड़ी थी। 15 साल मेंं रमन भाजपा ने छत्तीसगढ़ में हरेली,हरितालिका तीज,कर्मा जयंती, विश्व आदिवासी दिवस के दिन अवकाश नहीं दिए। रमन सिंह के मुख्यमंत्री रहते मुख्यमंत्री निवास में कभी छत्तीसगढ़ के हरेली तीजा पोला, गोधन पूजा का आयोजन नहीं हुआ। रमन सरकार के दौरान उनके मंत्री और भाजपा के नेता पंडाल लगाकर दीनदयाल की कथा सुनने में मग्न थे,सत्ता रहते रमन भाजपा मजदूर किसान छात्र महिलाओं की व्यथा सुनकर परेशानी का निराकरण करते,चुनाव में किये वादा को पूरा करते,युवाओं की भावना को समझते,आदिवासी वर्ग को उनका कानूनी अधिकार देते तो विधानसभा चुनाव में भाजपा 15 सीटों में नहीं सिमटती।

 

15-08-2020
आजादी की लड़ाई में सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर जवानों को नमन : बृजमोहन

रायपुर। पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्वतंत्रता दिवस पर शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले समस्त वीर जवानों और समस्त स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को शत-शत नमन। सभी देशवासियों को 74वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई।

09-08-2020
रमन और बृजमोहन की गुटबाजी के कारण प्रताड़ित हैं भाजपा कार्यकर्ता : विकास तिवारी

रायपुर। कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने भारतीय जनता पार्टी के अंदर गुटबाजी और पदों पर धनबल वालों की नियुक्ति का आरोप लगाया है। तिवारी ने कहा कि प्रदेश भाजपा में लगातार विधानसभा 2014 के पूर्व से ही गुटबाजी की जंग छिड़ी हुई है। इस कारण डॉ. रमन सिंह और धरमलाल कौशिक के नेतृत्व में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया और वह मात्र चौदह सीटों पर सिमट गई। वहीं दूसरी ओर प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत के चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया। विकास ने कहा कि लगातार डॉ. रमन के चेहरे पर हो रही हार से भारतीय जनता पार्टी का एक बहुत बड़ा धड़ा नाराज, परेशान है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह इतनी बड़ी हार के बाद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी और अपने समर्थित विधायक धरमलाल कौशिक को नेता प्रतिपक्ष बनाने में सफल हो गए। 

विकास तिवारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई लगभग खात्मे की कगार पर है। धन-पिशाचों, कमीशनखोरों के द्वारा पार्टी के शीर्ष पदों को उसी प्रकार खरीदा जा रहा है जिस प्रकार भेड़ बकरी की मंडी में व्यापारी से ग्राहक मोटी रकम देकर जानवर खरीदता है। विकास तिवारी ने मांग की है कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और पूर्व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को जनता के बीच इस बात का स्पष्टीकरण देना चाहिए कि क्या प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष पद में खरीद-फरोख्त का काम हो रहा है और नहीं तो प्रदेश अध्यक्ष बने विष्णुदेव साय अब तक अपनी कार्यकरणी क्यों घोषित नहीं किए हैं? क्या बड़े पदों पर धन पिशाच बड़ी बोली लगाकर अपने समर्थकों को बैठाने की जुगत में है?

01-08-2020
बृजमोहन ने कहा- मुख्यमंत्री, वनमंत्री, कांग्रेस में तेंदूपत्ता बीमा, बोनस को लेकर विरोधाभास

रायपुर। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि वनमंत्री द्वारा राज्यपाल को लिखे गए पत्र बाहर आने से यह बात अब स्पष्ट हो गई है कि कांग्रेस सरकार ने गरीब आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहको को पिछले दो साल के बोनस, लाभांश, छात्रवृत्ति व बीमा से वंचित कर रखा है। राज्य सरकार की लापरवाही के कारण ही 31/05/2019 को बीमा योजना का नवीनीकरण नहीं हो पाया। बिना बीमा के इस दौरान आकस्मिक व दुर्घटना जनित मौत व एक्सीडेंटल केस से प्रभावित आदिवासी परिवारों को सहायता कहां से मिलेगी, कितनी मिलेगी? इस पर विभाग ने मौन साध रखा है। वन विभाग, वनमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच संवादहीनता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि बीमा व बोनस पर मंत्री, मुख्यमंत्री व सत्ताधारी पार्टी के अलग-अलग तथ्य व बयान आ रहे हैं। वनमंत्री इसी कारण इस मामले में श्वेतपत्र जारी करने से डर रही है।अग्रवाल ने वनमंत्री के पत्र के बाद, फिर तीखे हमले करते हुए कहा कि वनमंत्री ने ये क्यों नहीं बताया कि 31 मई 2019 को बीमा का नवीनीकरण क्यों नहीं कराया गया।

क्यों तेंदूपत्ता संग्राहकों को दो वर्ष का बोनस, लाभांश व छात्रवृत्ति नहीं दी गई। इसके लिए दोषी कौन-कौन है, अनेक बीमा नहीं होने से पीड़ित आदिवासी परिवार सहायता के लिए दर दर भटक रहे हैं। वहीं शिक्षारत बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हुई है, आखिर इसके लिए दोषी कौन ? इनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है। क्यों सरकार 18 माह तक तेंदूपत्ता संग्राहकों का डाटा इकट्ठा नहीं कर पाई।अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, मुख्यमंत्री व वनमंत्री के बयान में ही भारी विरोधाभास है। कांग्रेस पार्टी का फोल्डर गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू करेगी-बीमा योजना में कहा गया है कि इस योजना में संग्राहकों की सामान्य मृत्यु पर 1 लाख रुपए व विकलांग होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान है। राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना लेकर आयेगी, वहीं वनमंत्री कह रहे हैं 2 लाख व 4 लाख देंगे। श्रम विभाग की योजना नहीं, अलग से बीमा करायेंगे। आखिर झूठ कौन बोल रहा है ? कांग्रेस पार्टी ? या वनमंत्री ?।

 

28-07-2020
बृजमोहन का आरोप, वन और श्रम विभाग के बीच पिस रहे आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहक, नहीं कोई संवैधानिक संरक्षण

रायपुर। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस सरकार पर प्रदेश के भोले-भाले आदिवासियों के साथ छल, कपट एवं अन्याय करने का आरोप लगाया है। बृजमोहन ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीमा में भाजपा सरकार में जहां उन्हें सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए और दुर्घटना मृत्यु पर 4 लाख रुपए देने का प्रावधान था। उसमें कटौती कर वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार की श्रम विभाग की प्रस्तावित योजना अर्थात असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना में मृत्यु होने पर 1 लाख व दिव्यांग होने पर 50 हजार देने का प्रावधान है। यह सीधे-सीधे गरीब आदिवासियों के आर्थिक कमर तोड़ने वाला काम है। अग्रवाल ने राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता श्रमिकों के लिए श्रम विभाग द्वारा प्रस्तावित  किए जा रहे योजना को नाकाफी बताते हुए कहा कि श्रम विभाग की योजना असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना सहायता योजना है जबकि पूर्व शासन में जो बीमा होता था वह बीमा-सुरक्षा योजना है। सहायता योजना शासन के परिस्थितियों पर निर्भर है जबकि बीमा योजना विधि अधिनियम अनुसार संचालित है जिसमें बीमित को संवैधानिक संरक्षण है। उन्होंने प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि नवीनीकरण के चलते बीमा नहीं होने के कारण अभी तक घटित घटनाओं पर पीड़ित संग्राहकों का क्या होगा ? सरकार जवाब क्यों नहीं देती।

अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार बार-बार श्रम विभाग की असंठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना को लागू करने की बात कर रही है वह योजना पूर्व में भी वन विभाग की बीमा योजना के साथ ही साथ लागू था, और प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहक जिन्होंने श्रम विभाग में भी पंजीयन कराया था, उसे इस योजना का वन विभाग की योजना के साथ ही लाभ मिल रहा था। अब अधिकारी वन विभाग, आदिवासियों तथा जनता के दबाव में अपने बचाव के लिए जो यह प्रस्तावित  योजना जो बता रहे है, उसमें जिन आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ता की मौत होगी उसे एक लाख रुपए देने का प्रावधान रखा गया है, दिव्यांग होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान रखा गया है। पहले भाजपा सरकार में तेंदूपत्ता संग्राहकों का जो बीमा था, उसमें आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहक की सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए और दुर्घटना मृत्यु होने पर 4 लाख रुपए देने का प्रावधान था, श्रम विभाग के माध्यम से जो आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं को योजना के लिए सूची देने का निर्णय लिया गया है, उसमें एक षड्यंत्र के तहत साईकिल देने का भी प्रावधान रखा गया है।

अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। बहुत जल्द 13 लाख तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं को उनके बीमा कराने के लिए श्रम विभाग के माध्यम से प्रक्रिया प्रारंभ करने की बात कह रहे हैं, जबकि श्रम विभाग के पास पहले ही अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले असंगठित मजदूर लोगों का 12 लाख लोगों का बीमा करने की प्रक्रिया चालू है, और उसमें भी 1000 असंगठित मजदूरों की मृत्यु हो चुकी है, अभी हाल ही में श्रम विभाग की हुई एक बैठक में उन मृतक श्रमिकों का जो भुगतान शेष है, वह नहीं होने के कारण बैठक में नाराजगी व्यक्त की गई थी। 12 लाख असंगठित मजदूरों के बीमा के लिए विभिन्न कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किया गया है। जो विचाराधीन है। श्रम विभाग तो अपना ही मूल कार्य नहीं कर पा रहा है। फिर इन आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहकों का क्या होगा?

26-07-2020
बृजमोहन ने कहा, गायों की मौत नहीं यह गौ हत्या है, गौठान रोका छेका से लेकर गोधन योजना को बताया सुपर फ्लॉप

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लाक में मेडापार गांव में गायों की दम घुटने से हुई दर्दनाक मौत को सीधा सीधा गौ हत्या करार दिया है। बृजमोहन ने कहा कि सरकार के रोका छेका के निर्देश के बाद बिना किसी तैयारी के इनके धरातल पर लाने प्रशासनिक आतंक के चलते रोका छेका के नाम पर गांव गांव में यही हाल है। ये तो एक गांव है हाल सामने आया है,पूरे प्रदेश के गांवों का यही हाल है। जिस गांव में गौठान नहीं है, जहां कांजी हाउस नहीं है, वहां रोका छेका का निर्देश किसका था।  चारे की कहीं व्यवस्था नहीं है पानी की कहीं व्यवस्था नहीं है बरसात में गायों को रखने की व्यवस्था नहीं है वहां पर सैकड़ों गायों को कमरे में ठूंसकर रखा गया। भोजन, पानी, हवा न होने के कारण, गायों की मौत दम घुटने से तड़प तड़प कर हुई है। यह मौत नहीं सीधा सीधा गौ हत्या है।

सरकार स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर एफआरआई कराकर गौ हत्या के इस पाप से बच नहीं सकती।अग्रवाल ने कहा कि सरकार की सभी योजनाएं एक एक कर सुपर फ्लॉप रही है। गोधन न्याय योजना गोधन अन्याय योजना में परिवर्तित हो गई है। सरकार ने रोका छेका के तहत रखने वाले गायों के चारे की व्यवस्था ही नहीं की,गांव में गायों को रोका छेका कर रखने की उचित जगह ही नहीं है, गांव गांव में जो आदर्श गौठान बनाये गए हैं,उसमें ज्यादातर तो कागजों में बने हैं।अग्रवाल ने मांग की है कि सरकार को गौठान से लेकर रोका छेका व गोधन न्याय योजना की एक बार हर स्तर पर समीक्षा होनी चाहिए। जब तक गायों की रखने की व्यवस्था, चारे की समुचित व्यवस्था,पानी की समुचित व्यवस्था न हो इस योजना को तब तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए।

 

21-07-2020
तेंदूपत्ता संग्राहकों पर कांग्रेस के बयान पर बृजमोहन ने कहा, कांग्रेस नेता आरोप लगाने के बजाय जवाब दें

रायपुर। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस,समितियों के लाभांश, संग्राहकों के बीमा के नवीनीकरण की तिथि सहित अन्य मुद्दों पर पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस नेताओं को निशाने पर लिया है। बृजमोहन ने कहा कि कांग्रेस नेता आरोप लगाने के बजाय जवाब दें कि क्या तेंदूपत्ता संग्राहकों को 597 करोड़ बोनस देना है? क्या तेंदूपत्ता समितियों को 432 करोड़ लाभांश देना है? क्या संग्राहकों व समितियों के 1000 करोड़ से अधिक राशि को बैंक में जमा कर आदिवासियों को बांटने के बजाए ब्याज खा रही है सरकार? तेंदूपत्ता संग्राहकों की बीमा की नवीनीकरण की अंतिम तिथि क्या थी? नवीनीकरण क्यों नहीं कराया गया? संग्राहकों के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति दो सत्र की क्यों नहीं दी गई है? बीमा नवीनीकरण नहीं होने से आदिवासी संग्राहक परिवारों को मिलने वाली राशि अब कौन देगा? बताएं कांग्रेस? बता दें कि पूर्व में बृजमोहन अग्रवाल की ओर से सरकार पर लगाए आरोपों पर मंगलवार को प्रदेशके तीन मंत्रियों मो.अकबर, डॉ.शिवकुमार डहरिया और कवासी लखमा ने प्रेसवार्ता में पलटवार किया। इसके बाद बृजमोहन अग्रवाल ने ट्वीट कर कांग्रेस नेताओं पर पलटवार किया।

 

 

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