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13-12-2019
अर्थव्यवस्था को लगा झटका, रेटिंग एजेंसी ने विकास दर का अनुमान घटाया

नई दिल्ली। रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस ने विकास दर के अनुमान को शुक्रवार को घटा दिया है। एजेंसी ने अनुमान जताया कि भारत की विकास दर 5.6 रहेगी। लेकिन एजेंसी ने यह भी बताया है कि साल 2020 और 2021 में अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी और विकास दर लगातार 6.6 फीसदी और 6.7 फीसदी रहेगी। 

डीबीएस बैंक ने भी कम किया अनुमान

इसके साथ ही सिंगापुर के डीबीएस बैंक ने भी शुक्रवार को विकास दर में कटौती कर इस वर्तमान वित्त वर्ष में पांच फीसदी रहने का अनुमान जताया है। पहले डीबीएस बैंक ने 5.5 फीसदी का अनुमान जताया था। 

4.5 फीसदी पर भारत की जीडीपी

इससे पहले जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से अर्थव्यवस्था में सुस्ती गहराने के संकेत मिले हैं। जुलाई-सितंबर, 2019 की तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक विकास दर घटकर महज 4.5 फीसदी रह गई, जो लगभग साढ़े छह साल का निचला स्तर है। यह लगातार छठी तिमाही है जब जीडीपी में सुस्ती दर्ज की गई है। 

इससे पहले जनवरी-मार्च, 2013 तिमाही में जीडीपी विकास दर 4.3 फीसदी रही थी, वहीं एक साल पहले की समान अवधि यानी जुलाई-सितंबर, 2018 तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी।
 

नोमुरा ने भी घटाया था अनुमान

जापान की वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी नोमुरा ने भी इस साल दिसंबर तिमाही का विकास दर का अनुमान घटाकर 4.3 फीसदी किया था। हालांकि नोमुरा के अनुसार, वर्ष 2020 की पहली तिमाही में इसमें सुधार आएगा और यह 4.7 फीसदी पर रह सकती है। इस संदर्भ में नोमुरा की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत और एशिया) सोनल वर्मा का कहना है कि, 'गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के संकट के कारण डोमेस्टिक लोन अवेबिलिटी की स्थिति गंभीर बनी है।' 

आरबीआई ने भी घटाया GDP अनुमान

इससे पहले पांच दिसंबर 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी जीडीपी का अनुमान घटाया था। केंद्रीय बैंक के अनुसार, साल 2019-20 के दौरान जीडीपी में और गिरावट आएगी और यह 6.1 फीसदी से गिरकर पांच फीसदी पर आ सकती है। इससे अर्थव्यवस्था को झटका लगा है।

एडीबी ने भी की थी कटौती

इससे पहले एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए देश की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.50 फीसदी से घटाकर 5.10 फीसदी कर दिया था। 

29-11-2019
सरकार आज जारी करेगी जीडीपी के आंकड़े, जाने कितनी हो सकती है विकास दर

नई दिल्ली। उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में कमी के कारण जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की विकास दर छह साल से भी ज्यादा नीचे जा सकती है। सरकार शुक्रवार को जीडीपी के आधिकारिक आंकड़े जारी करेगी। इससे पहले गुरुवार को विशेषज्ञों के बीच कराए गए एक सर्वे में पता चला है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में विकास दर 4.7 फीसदी पर आ सकती है। सर्वे के अनुसार, वैश्विक मंदी ने भारत के निर्यात पर काफी असर डाला है। जून तिमाही में विकास दर पांच फीसदी रही थी, लेकिन सितंबर तिमाही में यह पिछली 26 तिमाहियों में सबसे कमजोर रह सकती है। 2018 की समान तिमाही में यह सात फीसदी रही थी। सरकार सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सितंबर तिमाही में विकास दर चार फीसदी से भी नीचे जा सकती है। इससे पहले जनवरी-मार्च 2013 में विकास दर 4.3 फीसदी रही थी। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री दिवेंद्र पंत का कहना है कि उपभोक्ता खपत में गिरावट की वजह से शहरी क्षेत्र की विकास दर काफी सुस्त हो सकती है, जिसे त्योहारी सीजन में भी पर्याप्त ग्राहक नहीं मिल सके हैं।

आरबीआई घटा सकता है रेपो रेट

सर्वे में कहा गया कि रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। तीन से पांच दिसंबर चलने वाली एमपीसी बैठक में रेपो रेट को घटाकर 4.90 फीसदी पर की जा सकती है। सर्वे में शामिल अधिकतर अर्थशास्त्रियों का कहना है कि घरेलू कर्ज की धीमी रफ्तार और कंपनियों के घटते मुनाफे की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार पकड़ने में समय लगेगा। 

 

02-11-2019
इस महीने 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, जल्द निपटा ले अपने काम

नई दिल्ली। अगर आपको बैंक का कोई भी कार्य करना है तो आपके लिए ये खबर बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर में बैंक एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 12 दिन बंद रहेंगे। बता दें कि इन आठ छुट्टियों में अलग-अलग राज्यों में होने वाली छुट्टियां भी शामिल हैं। इस दौरान खाताधारकों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए अगर बैंक से जुड़ा कोई भी कार्य शेष है तो उसे समय पर पूरा कर लीजिए। इस महीने छठ पूजा, गुरु नानक जयंती,  कन्नड राज्योत्सव, वांग्ला फेस्टिवल, आदि के चलते बैंक बंद रहेंगे। आइए जानते हैं नवंबर में किस दिन बैंक बंद रहेंगे। 

 

02-11-2019
पीएमसी बैंक घोटाला : एक और खाता धारक की मौत, अब तक सात लोगों से गंवाई जान

मुंबई। पंजाब एवं महाराष्ट्र को ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी बैंक) के एक और निवेशक की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इस घोटाले से पीड़ित निवेशकों में 64 वर्षीय कुलदीप कौर विज की मौत इस मामले में सातवीं मौत है। बैंक में 4355 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और धन निकासी पर आरबीआई की रोक से ऐसी मौतें हो रही हैं। कौर के परिजनों ने बताया कि वह नवी मुंबई के खारघर में रहती थीं और मंगलवार की रात अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

पीएमसी बैंक से नकद निकासी पर पाबंदी हटाने को लेकर सरकार और आरबीआई को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) से नकद निकासी पर लगी पाबंदी को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र, दिल्ली सरकार और आरबीआई को नोटिस जारी किया। चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी हरिशंकर की पीठ ने शुक्रवार को वित्त मंत्रालय, दिल्ली सरकार, आरबीआई और पीएमसी बैंक को याचिका पर रुख स्पष्ट करने को कहा है।

याचिका में ग्राहकों के बैंक में जमा पैसे के लिए 100 फीसदी बीमा कवर की मांग की गई है। 4,355 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद आरबीआई ने पीएमसी बैंक पर पाबंदियां लगा दी थीं। आरबीआई ने पहले, तरलता संकट को ध्यान में रखते हुए राशि निकालने की सीमा 1,000 रुपये कर दी थी। इसे बाद में बढ़ा कर 40,000 रुपये (छह महीने के भीतर) कर दिया, जिससे ग्राहक तनाव में हैं। याचिका बेजोन कुमार मिसरा ने दायर की है। पहले उन्होंने याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी लेकिन पिछले महीने इस पर सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

31-10-2019
आरबीआई चोर है, चीख-चीख कर नारे लगाते रहे पीएमसी बैंक के जमाकर्ता

मुंबई/रायपुर। आरबीआई चोर है आरबीआई चोर है। ये नारे लगाते रहे पीएमसी बैंक घोटाले के प्रभावित लोग मुंबई में। पीएमसी बैंक घोटाले के प्रभावित लोगों का प्रदर्शन जारी है। फिर इकट्ठा हुए लोग और उनका गुस्सा हट पड़ा आरबीआई पर। उनका कहना था कि आरबीआई का प्रतिबंध पीएमसी बैंक पर से तत्काल हटना चाहिए। उनका अपना जमा किया हुआ पैसा उनको वापस मिलना चाहिये। उनमें से कोई अपनी किडनी बदलवाने के लिए रुपया निकालना चाहता है तो कोई रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए। पीएमसी बैंक घोटाला महाराष्ट्र सरकार की गले की हड्डी बन गया है। ऊपर से गठबंधन की फांस भी सरकार बनने में रोड़ा बनी हुई है। ऐसे में पीएमसी बैंक के पीड़ितों को तत्काल राहत मिलती हुई दिख नहीं रही है।

22-10-2019
बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन ने मांगों को लेकर कामकाज किया ठप

रायपुर। अखिल भारतीय बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन के आव्हान पर मंगवार को सरकारी क्षेत्र के बैंकों ने निजीकरण, विलय एवं अन्य मुद्दों को लेकर राष्ट्रव्यापी कामकाज ठप किया। फेडरेशन के पदाधिकारी डीके मुखर्जी ने बताया कि दशकों पहले 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने बैंकों के निजीकरण के चलते देशवासियों को हो रही अनेक प्रकार की परेशानियों के मद्देनजर शासकीयकरण किया था। वर्तमान सरकार द्वारा बैंकों का निजीकरण करने से देश के करोड़ों खातेदारों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। बैंकों की राष्ट्रव्यापारी हड़ताल के चलते आज प्रदेश में करोड़ों रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन ने ऐन दीवाली के समय हुई परेशानी के लिए खेद व्यक्त करते हुए इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। हड़ताल में एसबीआई, आरबीआई एवं निजी क्षेत्र के सहकारी बैंकों में हड़ताल में शामिल नहीं होने के कारण अन्य दिनों की तरह कामकाज सामान्य रूप से होता रहा है।

 

21-10-2019
आरबीआई ने बंद की दो हजार के नोटों की छपाई, जाने क्या है वजह...

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद शुरू किए गए 2 हजार के नोट की छपाई अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बंद कर दी है। राइट-टू-इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि इस वित्त वर्ष में 2 हजार रुपये का एक भी नोट नहीं छापा गया। आरबीआई ने इसकी कोई वजह नहीं बताई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इस अधिक वैल्यू वाले नोट को बंद करने के पीछे ब्लैक मनी, भ्रष्टाचार और जाली करंसी बड़े कारण हैं। सरकार के 2016 में 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों पर रोक लगाने के फैसले के बाद आरबीआई ने पहले 2 हजार रुपये के नोट बैंकिंग सिस्टम में पहुंचाए थे। इसके बाद 500 रुपये के नए नोट लाए गए। सरकार की ओर से 2 हजार रुपये के नोट को बंद करने का फैसला करने की रिपोर्ट पहले भी आई थी, लेकिन केंद्र और आरबीआई ने तब इससे इनकार किया था। फाइनैंस मिनिस्ट्री में डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स के तत्कालीन सेक्रटरी सुभाष चंद्र गर्ग ने इस वर्ष की शुरुआत में ट्वीट किया था, ‘नोटों की छपाई की योजना अनुमानित जरूरत के अनुसार बनाई गई है। हमारे पास सिस्टम में 2 हजार रुपये के पर्याप्त नोट हैं। सर्कुलेशन में वैल्यू के लिहाज से 35 पर्सेंट से अधिक नोट 2 हजार रुपये के हैं। 2 हजार रुपये के नोट की छपाई को लेकर हाल ही में कोई फैसला नहीं हुआ है।’

क्या है परेशानी?

अधिक वैल्यू वाले नोटों से ब्लैक मनी बढ़ जाती है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। ब्लैक मनी रखने वाले अधिक वैल्यू के नोटों को अपने पास जमा कर लेते हैं। इसके साथ ही जाली करंसी की समस्या से निपटने के लिए भी यह कदम उठाया गया है। नैशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने हाल ही में बताया था कि पाकिस्तान से 2 हजार रुपये के जाली नोट बड़ी संख्या में भारतीय मार्केट में पहुंचाए जा रहे हैं। इन नोटों की पहचान करना भी आसान नहीं है। इंटेलिजेंस ब्यूरो और फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट ने भी सरकार को गैर कानूनी गतिविधियों के लिए 2 हजार रुपये के नोटों को जमा किए जाने का चलन बढ़ने की रिपोर्ट दी थी।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बहुत से छापों में जब्त किए गए नोटों में से अधिकतर 2 हजार रुपये के हैं। इससे संकेत मिलता है कि टैक्स की चोरी और वित्तीय अपराधों में शामिल लोग इन नोटों को अधिक पसंद करते हैं। नोटबंदी के बाद 2 हजार के नोट को शुरू करने की विपक्षी दलों ने निंदा की थी। उनका कहना था कि इससे लोगों के लिए ब्लैक मनी रखना आसान हो जाएगा। उस समय कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमोटर उदय कोटक ने भी 1 हजार रुपये के नोट की जगह 2 हजार रुपये का नोट लाने के सरकार के कदम पर सवाल उठाया था।

क्या होगा असर?

2 हजार रुपये के नोटों की छपाई बंद करने से कुछ हद तक ब्लैक मनी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी। इससे ब्लैक मनी रखने वालों के लिए करंसी जमा करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार के लिए एक बड़ी समस्या जाली करंसी की है और 2 हजार का नोट बंद होने से जाली करंसी का व्यापार करने वालों के लिए मुश्किल बढ़ जाएगी क्योंकि कम वैल्यू के जाली नोट बनाना और उन्हें चलाने में फायदा कम और पकड़े जाने का खतरा अधिक होता है। सरकार का जोर देश में डिजिटल ट्रांजैक्शंस बढ़ाने पर है। हालांकि, इसमें अभी तक बहुत अधिक सफलता नहीं मिली है। बड़ी वैल्यू के नोट उपलब्ध नहीं होने से लोग भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम का उपयोग बढ़ा सकते हैं।

 

19-10-2019
कॉर्पोरेट टैक्स घटाने से बढ़ेगा निवेश, सात फीसदी तक हो सकेगी विकास दर

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा कि भारत में सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती करने के एलान से अगले साल विकास दर सात फीसदी हो सकती है। फिलहाल इस वित्त वर्ष में इसके 6.1 के रहने की उम्मीद है। मुद्रा कोष के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के निदेशक चेंगयांग री ने कहा कि रेपो रेट में आरबीआई द्वारा कमी और टैक्स में कटौती से देश के अंदर निवेश काफी बढ़ेगा। इसके साथ ही देश को वित्तीय एकीकरण पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही एनबीएफसी सेक्टर की समस्याओं का भी समाधान करना चाहिए। सरकारी बैंकों को पूंजी मुहैया करवाने जैसे प्रयासों से बैंकिंग सेक्टर में सुधारों की प्रक्रिया जारी है।

इस क्षेत्र में हालत बेहतर करने की जरूरत

इस संदर्भ में आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि बुनियादी मुद्दों पर भारत ने काफी अच्छा काम किया है। लेकिन अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए भारत को कुछ और समस्याओं का हल करना होगा।

प्रतिभाशाली हैं भारत की महिलाएं

क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि दीर्घकालिक सुधारों के लिए मानव पूंजी में निवेश पहली प्राथमिकता है। उनका कहना है कि श्रम शक्ति में महिलाओं को शामिल करना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की महिलाएं काफी प्रतिभाशाली हैं, लेकिन वो घर बैठी हुई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में पिछले साल काफी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई थी।

 

15-10-2019
पीएमसी बैंक मामला: प्रदर्शन के दौरान खाताधारक की मौत, बैंक में फंसे 90 लाख रुपए

मुंबई। पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक में जमा पैसे निकालने की सीमा तय किए जाने के बाद से खाताधारकों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच एक खाता धारक की प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई। 51 वर्षीय संजय गुलाटी सोमवार को मुंबई के किला कोर्ट के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके बाद सदमे से उनकी मौत हो गई। संजय के परिवार का 90 लाख रुपया पीएमसी बैंक में जमा था, इसके पहले उनकी जेट एयरवेज से नौकरी चली गई थी। संजय गुलाटी मुंबई के ओशिवारा इलाके में रहने वाले थे। प्रदर्शन के बाद घर लौटे तभी उनकी अचानक तबियत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। संजय गुलाटी के बैंक में 90 लाख रुपये जमा थे। बता दें कि आरबीआई ने सोमवार को संकट में फंसे पीएमसी बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी सीमा 25 हजार रुपए से बढ़ाकर 40 हजार रुपए प्रति खाताधारक कर दी है। यह तीसरा मौका है जब आरबीआई ने ग्राहकों को राहत देते हुए निकासी सीमा बढ़ाई है।

04-10-2019
आरबीआई ने रेपो रेट में घटाए 0.25 अंक, जनता की जेब पर होगा ये असर

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था को गति देने के प्रयासों के क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी प्रमुख नीतिगत दर में लगातार पांचवीं बार कमी की है। आरबीआई ने इस मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में रेपो दर 0.25 आधार अंक घटाकर 5.15 फीसदी कर दिया है, जिससे इस साल रेपो दर में कुल कटौती 135 आधार अंक पहुंच गई है। पहले ये दर 5.40 फीसदी थी। नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम हुआ है। रिवर्स रेपो रेट 4.90 फीसदी कर दी गई है।
 
एक और कटौती की उम्मीद


छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई में हुई। केंद्रीय बैंक खुदरा महंगाई को ध्यान में रखते हुए प्रमुख नीतिगत दरों पर फैसला लेता है। हालांकि ज्यादातर विशेषज्ञ दिसंबर में होने वाली समीक्षा में 15 आधार अंक की एक और कटौती की उम्मीद कर रहे हैं।

आपको ऐसे होगा फायदा

अगर रेपो रेट में कटौती का फायदा बैंक आप तक पहुंचाते हैं तो का आम लोगों को काफी फायदा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अब बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव रहेगा। इससे लोगों को लोन सस्ते में मिल जाएगा। इसके अलावा जो होम, ऑटो या अन्य प्रकार के लोन फ्लोटिंग रेट पर लिए गए हैं, उनकी ईएमआई में भी कमी हो जाएगी।

इसलिए अहम है आरबीआई की बैठक

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की यह बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि उसने रेपो दर में कमी का फायदा ग्राहकों को देने के लिए सभी बैंकों को एक अक्तूबर से अपने कर्ज रेपो दर जैसे बेंचमार्क से जोड़ने का आदेश दिया था। बैठक से पहले दास की अगुवाई वाली वित्तीय स्थायित्व एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) उप समिति ने मौजूदा व्यापक परिदृश्य का जायजा लिया था।

आरबीआई गवर्नर ने दिया था संकेत

बता दें कि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास पहले ही संकेत दे चुके थे कि महंगाई में नरमी के मद्देनजर मौद्रिक नीति को लचीला बनाने की अभी गुंजाइश है। इससे पहले सरकार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पांच फीसदी के साथ छह साल के निचले स्तर पर पहुंची आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने के लिए कॉर्पोरेट कर में भारी कमी, एफपीआई पर लगाए गए उपकर को वापस लेने सहित कई कदम उठा चुकी है।

अगस्त में इतनी कम की थी रेपो रेट

इससे पहले सात अगस्त को हुई बैठक में भी भारतीय रिजर्व बैंक ने आम लोगों के लिए बड़ी घोषणा की थी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की समीक्षा बैठक में लगातार चौथी बार रेपो रेट में कटौती की घोषणा की गई थी। फैसले के अनुसार, रेपो रेट को घटाकर 5.40 फीसदी कर दिया गया था। इसमें 35 आधार अंकों की कटौती की गई थी। केंद्रीय बैंक ने रिवर्स रेपो रेट को 5.15 फीसदी किया था।

खुदरा मुद्रास्फीति का भी जताया था अनुमान

साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी का अनुमान सात फीसदी से घटाकर 6.9 फीसदी किया था। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही के लिये खुदरा मुद्रास्फीति 3.5 से 3.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

 

11-09-2019
सीएम बघेल बोले-नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपा भयभीत क्यों ?

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग में नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम से ही कराए जाने की मांग पर पलटवार किया है। सीएम बघेल ने पूछा है कि नगरीय निकाय चुनाव को लेकर भाजपाई इतने भयभीत क्यों है? यदि बैलेट से चुनाव हो जाएगा तो उनमें डर क्यों हैं ? बैलेट में पहले भी सब जगह चुनाव होते रहे हैं । यहां भी नगरीय निकाय या पंचायत चुनाव यदि बैलेट से होगा तो उन्हें डर क्यों सता रहा है?  बैलेट से चुनाव कराने पर विभाग निर्णय लेगा, लेकिन भाजपा तो पहले से ही दहशत में है। दिल्ली दौरे को लेकर सीएम बघेल ने कहा कि कल गुरुवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी सीएलपी और पीसीसी अध्यक्ष की बैठक लेंगी, उसी में शामिल होने नई दिल्ली जा रहा हूं। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ट्वीट किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम तो दिल्ली में भी जाकर बोलते हैं कि हमने लोगों की क्रय-शक्ति बढ़ाई है और इस कारण मंदी का असर छत्तीसगढ़ में नहीं पड़ रहा है। अनेक सेक्टर हैं, जिनमें काफी बढ़ोतरी हुई है। जब तक लोगों की क्रय-शक्ति नहीं बढ़ाएंगे तो मंदी का प्रभाव पड़ेगा ही है। सीएम बघेल ने पूछा है कि केन्द्र ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करके सभी लोगों का पैसा बैंक में डाल दिए, आज एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए आरबीआई से निकाल लिए तो यह पैसा गया कहां? बता दें कि नगरीय निकायों के चुनाव के संबंध में आज भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी के नेतृत्व में राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह को विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख मांग की गई कि बिना त्रुटि के कम समय में मतगणना हो इसके लिए ईवीएम से वोटिंग कराई जाए।

06-09-2019
एक अक्टूबर से ईएमआई में होगा बड़ा बदलाव, आरबीआई ने सभी बैंको को दिए आदेश  

नई दिल्ली। एक अक्टूबर से आपकी ईएमआई में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रिटेल के अलावा कारोबारियों के लोन की दर को कम करने का आदेश केंद्रीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को दे दिया है। आदेश के अनुसार सभी बैंकों से कहा है कि यह लोन अब एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़े जाएंगे। इससे ऐसे लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। आरबीआई ने सर्कुलर जारी करते हुए कहा है किएक अक्टूबर से सभी तरह के पर्सनल, होम व अन्य तरह के रिटेल लोन और छोटे कारोबारियों को मिलने वाले लोन की दर एक्सटर्नल बेंचमार्क के तहत की जाएगी। हालांकि पहले से चल रहे पुराने लोन जिनका ब्याज एमसीएलआर, बेस रेट या फिर बीपीएलआर से जुड़े हैं वो बाद में जुड़ सकेंगे। बैंक कोई भी तरह का बेंचमार्क चुनने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। आरबीआई ने चार तरह के बेंचमार्क तय किए हैं। पहला, आरबीआई रेपो रेट है। दूसरा, केंद सरकार की तीन साल की ट्रेजरी बिल यील्ड है। तीसरा, केंद्र सरकार द्वारा छह महीने की ट्रेजरी बिल है और चौथा एफबीआईएल द्वारा कोई अन्य बेंचमार्क रेट। ज्यादातर सरकारी बैंकों ने होम, कार लोन आदि को आरबीआई के रेपो रेट से लिंक कर दिया है। अब देश में कार्यरत सभी निजी बैंको को भी इस आदेश का पालन करना पड़ेगा। इससे आपकी ईएमआई पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। लेकिन रेपो रेट के अलावा भी कुछ अन्य फैक्टर हैं, जिनका आपकी ईएमआई पर असर पड़ेगा।

कब कम होगी ईएमआई

बैंक आरबीआई की मौद्रिक नीति आने के बाद वाले महीने से ब्याज दरों में बदलाव करेंगे। अगर रेपो रेट में आरबीआई कमी करता है तो फिर इसका फायदा अगले महीने से मिलेगा। हालांकि यह केवल उनके लिए होगा, जो नया लोन लेते हैं। पुराने ग्राहकों को कम से कम तीन महीने का इंतजार करना पड़ेगा। आरबीआई ने पुराने ग्राहकों के लिए कम से कम तीन महीने का रिसेट पीरियड करने का निर्देश दिया है। ऐसे में अगर किसी ग्राहक का लोन सितंबर में शुरू हुआ है और आरबीआई अक्टूबर में मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो रेट में कमी करता है तो उस ग्राहक के लिए ब्याज दरों में कमी दिसंबर से होगी। जब भी रेपो रेट में कमी या फिर बढ़ोतरी होगी तो उसका फायदा हर तीन महीने के बाद ही मिलेगा।

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