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20-06-2020
उर्जित पटेल को मिली नई जिम्‍मेदारी, बने इस थिंक टैंक के प्रमुख, 2018 में छोड़ा था आरबीआई के गवर्नर का पद

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर पद से इस्तीफा देने के 18 महीनों बाद एक बार फिर उर्जित पटेल की सरकार में वापसी हुई है। आर्थिक शोध संस्थान ने कहा कि पटेल 22 जून से यह पद संभालेंगे। वह विजय केलकर का स्थान लेंगे। केलकर ने एक नवंबर 2014 को संस्थान के चेयरमैन का पद संभाला था। एनआईपीएफपी ने एक बयान में कहा कि पटेल लगभग छह सालों तक एनआईपीएफपी की कमान संभालने वाले पूर्व नौकरशाह विजय केलकर की जगह लेंगे। वह 22 जून को पद संभालेंगे और उनका कार्यकाल चार साल का होगा। एनआईपीएफपी वित्त मंत्रालय पूर्ववर्ती योजना आयोग और कई राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। यह एक स्वतंत्र गैर-सरकारी निकाय है और केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों को सलाह देते हुए सार्वजनिक नीति में अनुसंधान करता है। गवर्निंग काउंसिल का पटेल को नियुक्त करने का निर्णय इस बात का संकेत है कि केंद्र उनके अनुभव का इस्तेमाल कर कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों का सामना करना चाहती हैं।

एनआईपीएफपी की गवर्निंग काउंसिल, जिसमें राजस्व सचिव, आर्थिक मामलों के सचिव और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार शामिल हैं। इन सभी लोगों ने नीति आयोग, आरबीआई और तीन राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर गुरुवार को एक बैठक की। बैठक में केलकर द्वारा पटेल को अध्यक्ष के रूप में नामित करने वाले निमंत्रण पर सहमति बनी। वहीं, रथिन रॉय ने एनआईपीएफपी के निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा सुमित बोस ने एनआईपीएफपी के उपाध्यक्ष के पद से इस्तीफा दिया है। गवर्निंग काउंसिल द्वारा एक नए निदेशक की नियुक्ति के लिए एक खोज और चयन समिति नियुक्त करने की उम्मीद है। रॉय से जब उनके इस्तीफे को लेकर संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, पूर्व वित्त सचिव बोस ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि उन्होंने पद से इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि वह कोलकाता शिफ्ट हो गए हैं। पटेल ने पांच सितंबर, 2016 को आरबीआई के 24वें गवर्नर के रूप में पद संभाला था। उन्हें भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने रघुराम राजन के उत्तराधिकारी के रूप में नामित किया था। उर्जित के नेतृत्व में आरबीआई और सरकार के बीच संबंध विवादास्पद रहे।

04-06-2020
सुप्रीम कोर्ट से आरबीआई ने कहा- जबरदस्ती ब्याज माफी ठीक नहीं, इससे बैंकों को हो सकता है दो लाख करोड़ का नुकसान 

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर वह कर्ज किस्त के भुगतान में राहत के हर संभव उपाय कर रहा है। लेकिन जबरदस्ती ब्याज माफ करवाना उसे सही निर्णय नहीं लगता है, क्योंकि इससे बैंकों की वित्तीय स्थिति बिगड़ सकती है और जिसका खामियाजा बैंक के जमाधारकों को भी भुगतना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक ने किस्त भुगतान पर रोक के दौरान ब्याज लगाने को चुनौती देने वाली याचिका का जवाब देते हुए कहा कि उसका नियामकीय पैकेज, एक स्थगन, रोक की प्रकृति का है, इसे माफी अथवा इससे छूट के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह ईएमआई से मोहलत (मोरेटोरियम) की अवधि में लोन के ब्‍याज को माफ नहीं कर सकता है।  बता दें कि कोरोना वायरस के दौरान लागू लॉक डाउन में ईएमआई पर मोहलत दी गई थी।


बैंकों को हो सकता है दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान :

रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस लॉक डाउन के कारण आर्थिक गतिविधियों के बंद रहने के दौरान पहले तीन माह और उसके बाद फिर तीन माह और कर्जदारों को उनकी बैंक किस्त के भुगतान से राहत दी है। कर्ज की इन किस्तों का भुगतान 31 अगस्त के बाद किया जा सकेगा। इस दौरान किस्त नहीं चुकाने पर बैंक की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। आरबीआई ने कहा कि इस अवधि का ब्याज भी नहीं लिया गया तो बैंकों को दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। 

रिजर्व बैंक ने उच्चतम न्यायालय में सौंपा हलफनामा :
रिजर्व बैंक ने उच्चतम न्यायालय में सौंपे हलफनामे में कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के प्रसार के बीच वह तमाम क्षेत्रों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव उपाय कर रहा है। लेकिन इसमें जबरदस्ती बैंकों को ब्याज माफ करने के लिए कहना उसे सूझबूझ वाला कदम नहीं लगता है, क्योंकि इससे बैंकों की वित्तीय वहनीयता के समक्ष जोखिम खड़ा हो सकता है और उसके कारण जमाकर्ताओं के हितों को भी नुकसान पहुंच सकता है।  

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि जहां तक उसे बैंकों के नियमन के प्राप्त अधिकार की बात है वह बैंकों में जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने को लेकर है। इसके लिए भी यह जरूरी है कि बैंक वित्तीय तौर पर मजबूत और मुनाफे में हों। शीर्ष अदालत ने 26 मई को केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक से रोक की अवधि के दौरान ब्याज की वसूली करने के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब देने को कहा था। यह याचिका आगरा निवासी गजेंद्र शर्मा ने दायर की है। रिजर्व बैंक ने किस्त भुगतान पर रोक के दौरान ब्याज लगाने को चुनौती देने वाली याचिका जवाब देते हुए कहा कि उसका नियामकीय पैकेज, एक स्थगन, रोक की प्रकृति का है, इसे माफी अथवा इससे छूट के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।

22-05-2020
ईएमआई भुगतान पर तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत, मोरेटोरियम को 31 अगस्त तक बढ़ाया

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और ग्राहकों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया। होम लोन, पर्सनल लोन, वाहन कर्ज की ईएमआई चुका रहे लोगों के लिए आरबीआई ने फिर राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कटौती कर दी है, जिससे आपके लोन की ब्याज दरें कम हो जाएंगी। साथ ही टर्म लोन मोरेटोरियम 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है। यानी अगर आप अगले 3 महीने तक अपने लोन की ईएमआई नहीं देते हैं तो बैंक दबाव नहीं डालेगा। शक्तिकांत दास ने रेपो रेट कटौती का ऐलान किया है। इस कटौती के बाद आरबीआई की रेपो रेट 4.40 फीसदी से घटकर 4 फीसदी हो गई है। इसके साथ ही लोन की किस्‍त देने पर 3 महीने की अतिरिक्‍त छूट दी गई है। आरबीआई ने कहा ईएमआई देने पर राहत 1 जून से 31 अगस्त तक के लिए बढ़ाई जा रही है। दरअसल आरबीआई को यह निर्णय इसलिए करना पड़ा कि लॉक डाउन के जारी रहने से लोगों की आय का फ्लो फिर से सुचारू नहीं हो पाया है। लोग ईएमआई मॉरेटोरियम की मौजूदा 31 मई तक की अवधि के खत्म होने के बाद मौजूदा परिस्थिति में अपना कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं होंगे। इसलिए मॉरेटोरियम को और तीन माह तक बढ़ाना पड़ा। यह कर्ज लेने वालों और बैंकों दोनों के लिए इस मुश्किल वक्त में मददगार रहेगा।

रेपो रेट में 0.40 फीसदी की कटौती :

आरबीआई गवर्नर ने बताया कि पिछले तीन दिन में एमपीसी ने घरेलू और ग्लोबल माहौल की समीक्षा की। इसके बाद रेपो रेट में 0.40 फीसदी की कटौती का फैसला लिया गया है। लॉक डाउन में यह दूसरी बार है जब आरबीआई ने रेपो रेट पर कैंची चलाई है। इससे पहले 27 मार्च को आरबीआई गवर्नर ने 0.75 फीसदी कटौती का ऐलान किया था। इसके बार बैंकों ने लोन पर ब्‍याज दर कम कर दिया था। जाहिर सी बात है कि इससे आपकी ईएमआई भी पहले के मुकाबले कम हो गई है।

ईएमआई पर तीन महीने की अतिरिक्‍त छूट :

आरबीआई ने लॉक डाउन के शुरुआती दिनों में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर बैंकों से 3 महीने के लिए लोन और ईएमआई पर छूट देने को कहा था। इसके बाद अधिकतर बैंकों ने इसे 3 महीने के लिए लागू कर दिया था। अब आरबीआई के नए 3 महीनों के लिए मोहलत के ऐलान के बाद ग्राहकों को कुल 6 महीने की छूट मिल जाएगी। मतलब ये कि आप कुल 6 महीने तक लोन की ईएमआई नहीं देना चाहते हैं तो बैंकों की ओर से कोई दबाव नहीं पड़ेगा। वहीं, आपका क्रेडिट स्‍कोर भी दुरुस्‍त रहेगा। यानी बैंक की नजर में आप डिफॉल्‍टर नहीं होंगे। हालांकि, इसके लिए आपको अतिरिक्‍त ब्‍याज देनी पड़ेगी।

27 मार्च को घोषित किया था विकल्प :

भारतीय रिजर्व बैंक ने 27 मार्च को बैंकों व वित्तीय संस्थानों को 1 मार्च 2020 तक बकाया सभी टर्म लोन्स लेने वालों को ईएमआई के भुगतान पर 3 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराने को कहा था। इस विकल्प में ग्राहक मार्च, अप्रैल और मई माह की अपनी ईएमआई चाहें तो होल्ड कर सकते हैं। हालांकि ईएमआई स्थगन के इन तीन महीनों की अवधि के दौरान ब्याज लगता रहेगा, जो बाद में एक्स्ट्रा ईएमआई के तौर पर देना होगा। जो ग्राहक अपनी ईएमआई होल्ड नहीं करना चाहते, उन्हें कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। उनकी ईएमआई वैसे ही कटती रहेगी, जैसे कट रही थी।

आरबीआई गवर्नर की बड़ी बातें :

- पहली छमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 2020-21 में निगेटिव रहेगी. हालांकि साल के दूसरे हिस्से में ग्रोथ में कुछ तेजी दिख सकती है।

- रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

- लॉक डाउन से आर्थिक गतिविधियों में भारी गिरावट, छह बड़े औद्योगिक राज्यों में ज्यादातर रेड जोन रहे।

- मार्च में कैपिटल गुड्स के उत्पादन में 36 फीसदी की गिरावट।

-कंज्यूमर ड्यूरेबल के उत्पादन में 33 फीसदी की गिरावट।

-औद्योगिक उत्पादन में मार्च में 17 फीसदी की गिरावट।

- मैन्युफैक्चरिंग में 21 फीसदी की गिरावट. कोर इंडस्ट्रीज के आउटपुट में 6.5 फीसदी की कमी।

-खरीफ की बुवाई में 44 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

-खाद्य महंगाई फिर अप्रैल में बढ़कर 8.6 फीसदी हो गई।

-दालों की महंगाई अगले महीनों में खासकर चिंता की बात रहेगी।

- इस छमाही में महंगाई उंचाई पर बनी रहेगी, लेकिन अगली छमाही में इसमें नरमी आ सकती है।

- 2020-21 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 9.2 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी 487 बिलियन डॉलर का है।

-15,000 करोड़ रुपये का क्रेडिट लाइन एग्जिम बैंक को दिया जाएगा।

-सिडबी को दी गई रकम का इस्तेमाल आगे और 90 दिन तक करने की इजाजत।

28-04-2020
आरबीआई के कर्मचारी आए मदद के लिए आगे, पीएम केयर फंड में देंगे एक दिन का वेतन

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कर्मचारी एर दिन की तनख्वाह पीएम केयर्स फंड में दान करेंगे। आरबीआई की ओर से बताया गया है कि सभी कर्मचारियों ने पीएम केयर्स फंड में एक या ज्यादा दिन की सैलरी देने का फैसला किया है। कर्मचारियों के इस योगदान से कुल 7.30 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड को मिलेंगे।कोरोना वायरस के लगातार फैलते जाने और लॉकडाउन होने के चलते अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य के मोर्चे पर काफी संकट का सामना करना पड़ रहा है। देश में बीते एक महीने से ज्यादा समय से लॉकडाउन है, जिसके चलते ज्यादातर कामकाज बंद हैं।

27-04-2020
कोरोना संकट के बीच आरबीआई का ऐलान- म्यूचुअल फंड कंपनियों को दिए जाएंगे 50 हजार करोड़ रुपए

नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड पर तरलता दबाव को कम करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को म्यूचुअल फंड के लिए 50,000 करोड़ रुपए की विशेष लिक्विडिटी सुविधा की घोषणा की है। बता दें कि देश के अग्रणी म्यूचुअल फंड हाउस फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने भारत में छह डेट फंड्स को बंद कर दिया है, जिसके बाद आरबीआई ने म्यूचुअल फंड्स के लिए विशेष तरलता सुविधा देने की घोषणा की है। आरबीआई ने सोमवार को म्‍यूचुअल फंड्स के लिए एक विशेष ऋण योजना का ऐलान किया, जिसके तहत उन्‍हें 50,000 करोड़ रुपए का लोन उपलब्‍ध कराया जाएगा, ताकि उद्योग में तरलता का संकट न खड़ा हो। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि वह सतर्क है और कोरोना वायरस के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

आरबीआई फिक्स रेपो रेट पर 90 दिन की अवधि का एक रेपो ऑपरेशन शुरू करेगा।आरबीआई ने कहा कि एसएलएफ-एमएफ ऑन-टॉप और ओपन-एंडेड है और बैंक सोमवार से शुक्रवार तक किसी भी दिन वित्त हासिल करने के लिए अपनी बोली जमा कर सकते हैं। यह सुविधा 27 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और 11 मई, 2020 तक रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी जोर दिया कि वह कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे उसे वह उठाएगा। बता दें इन 6 ओपेन एंडेड डेट स्कीम का कुल मिलाकर एसेट बेस करीब 28 हजार करोड़ रुपए है।

18-04-2020
अजीत जोगी ने आरबीआई गवर्नर को लिखा पत्र, ईएमआई जमा करने की अवधि बढ़ाने किया आग्रह

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रमुख अजीत जोगी ने शनिवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शशिकांत दास को पत्र लिखा है। जोगी ने लॉक डाउन-2 की स्थिति में बैंकिंग ग्राहकों को लोन ईएमआई जमा करने की अवधि 31 मई से बढ़ाकर 31 जुलाई  तक करने का आग्रह किया है।जोगी ने पत्र के माध्यम से कहा कि वैश्विक महामारी (कोविड-19) कोरोना वायरस के कारण केंद्र सरकार की ओर से प्रथम चरण में 23 मार्च से 14 अप्रैल तक  देश भर में लॉक डाउन किया गया था। लॉक डाउन के कारण लोगों के आय के स्रोत की कमी को ध्यान में रखते हुए, मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आरबीआई  ने देशभर के उपभोक्ताओं को बहुत बड़ी राहत दी।  "सभी कमर्शियल बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, छोटे फाइनेंशियल बैंक और स्थानीय क्षेत्र के बैंक सहित), सहकारी बैंक, वित्तीय संस्थान अन्य बैंकिंग संस्थाओं को 1 मार्च तक बकाया सभी कर्जों के संबंध में किस्तों के भुगतान पर, तीन महीने की मोहलत अर्थात 31 मई  तक देने की अनुमति दी।जोगी ने कहा देश में कोरोना वायरस के बढ़ते हुए संक्रमण को मद्देनजर गंभीरता पूर्वक  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉक डाउन-1 के अंतिम दिन 14 अप्रैल को पुन: लॉक डाउन-2 आगामी 3 मई तक की घोषणा की है। 

जोगी ने आरबीआई गवर्नर को लिखे पत्र में कहा कि लॉक डाउन-2 दिनांक 3 मई को यदि समाप्त हो भी जाता है, तब भी आर्थिक मंदी के कारण आम आदमी से लेकर धनाढ्य वर्ग सभी लोगों को दैनिक दिनचर्या, सामान्य स्थिति में आने सितंबर-अक्टूबर लग जाएगा। ऐसे में उन्हें 31 मई के बाद ईएमआई जमा करने में अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन, कार लोन, सभी प्रकार के टर्म लोन, विशेषकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े हुए और व्यावसायिक प्रयोजन के ऋणधारी ग्राहक बड़ी संख्या में  ईएमआई जमा करने में डिफॉल्ट करेंगे,जिससे न्यायालयों में प्रकरणों की भरमार हो जाएगी और उपभोक्ताओं के साथ ही बैंकों,फाइनेंस कंपनियों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।जोगी ने कहा दुनिया भर की अर्थव्यवस्था इस समय मुश्किल में है,जिसमें भारत भी अछूता नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से देश हित में लॉक डाउन के बीच बैंकिंग सेक्टर बैंकों, माइक्रो फायनेंस इंस्टिट्यूट, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए एक लाख करोड़ रुपया नकदी देने के निर्णय का स्वागत योग्य हैं,इससे आर्थिक मंदी के दौर में भी आम जनता को ब्याज की कम दरों में लोन मिल सकेगा,आम जनता के आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की यह भी एक ठोस कदम है।

17-04-2020
भूपेश बघेल ने कहा, आरबीआई ने माना छत्तीसगढ़ ने आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की

रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फेसबुक पर पोस्ट कर लिखा है कि' रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि देशव्यापी लॉक डाउन में भी छत्तीसगढ़ ने तेज़ी से आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की है,जो कि देश में सुखद वातावरण बनाता है। इस रिपोर्ट में कृषि और उससे संबंधित कार्यों में बनी तेज़ी की सराहना की गई है। खाद्यान्न और बागवानी के उत्पादन में, कृषि और संबद्ध गतिविधियों के सभी कार्यों में निरंतर तेज़ी बनी रहने के कारण राज्य में देश के अन्य विकसित राज्यों के मुक़ाबले आर्थिक विकास की दर काफ़ी अच्छी है।  

01-04-2020
राहत : पीएनबी, एसबीआई  और बीओबी नहीं लेंगे तीन महीने की ईएमआई

नई दिल्ली। आरबीआई की अपील पर सरकारी बैंकों के साथ-साथ प्राइवेट बैंकों ने भी अपने ग्राहकों के लोन की ईएमआई तीन महीने तक स्थगित कर दिया है। सरकारी बैंक जहां सीधे राहत दे रहे हैं तो वहीं  प्राइवेट बैंक ये सुविधा ऑनडिमांड दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 मई, 2020 के बीच पडऩे वाले कॉर्पोरेट, एमएसएमई, एग्रीकल्चर, रिटेल, हाउसिंग, ऑटो, पर्सनल लोन्स सहित तमाम लोन के इंस्टॉल्मेंट के भुगतान को तीन महीने के लिए टालने का ऐलान कर दिया है। वही यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के आदेश के अनुसार कर्ज की किस्त/ब्याज का भुगतान तीन महीने के लिए 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 मई, 2020 के बीच नहीं करना होगा।पंजाब नैशनल बैंक की ओर से ट्वीट कर कहा कि कोरोना वायरस की वजह से 1 मार्च, 2020 से लेकर 31 मई, 2020 तक सभी टर्म लोन के तमाम इंस्टालमेंट्स और कैश क्रेडिट फैसिलिटी पर ब्याज की उगाही ना लेने का फैसल लिया गया है।वही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि 1 मार्च, 2020 से 31 मई, 2020 तक की ईएमआई को टालने का फैसला लिया गया है। वहीं समान अवधि में वर्किंग कैपिटल फैसिलिटीज पर ब्याज को 30 जून, 2020 तक टालने का फैसला हुआ है।

 

27-03-2020
पीएम मोदी ने आरबीआई के फैसले को सराहा, कहा-कोरोना के संक्रमण से अर्थव्यवस्था को बचाएंगी रिजर्व बैंक की घोषणाएं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिजर्व बैंक की सराहना करते हुए शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय बैंक ने कोरोना वायरस के संक्रमण से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट किया इन घोषणाओं से बाजार में तरलता की स्थिति बेहतर होगी, कर्ज की ब्याज दरें कम होंगी तथा मध्यम वर्ग और कारोबारियों को मदद मिलेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कई राहतों की घोषणा की। आरबीआई ने तीन महीने के लिए रेपो रेट में कटौती कर ईएमआई और घटने का रास्ता साफ कर दिया है। इस एलान के बाद पीएम मोदी ने आरबीआई की तरफ से उठाए गए कदमों पर पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट कर आरबीआई के इस फैसले की तारीफ की है और इसे मजबूत कदम बताया है। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर को कम करने के लिए शुक्रवार को रेपो दर को 0.75 प्रतिशत घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की अप्रत्याशित घोषणा की।

कोरोना वायरस से उत्पन्न आपदा के बीच रिजर्व बैंक ने भी मोर्चो संभाला है। केन्द्रीय बैंक ने शुक्रवार को अर्थव्यवस्था में नकदी की तंगी दूर करने और कर्ज सस्ता करने के लिए अपने फैरी नकदी कर्ज पर ब्याज की दर रेपो और बैंकों आरक्षित नकदी अनुपात (सीआरआर) में बड़ी कटौती जैसे कई उपायों की घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने देश व्यापी बंदी के चलते कर्ज की किस्त चुकाने में दिक्कतों को देखते हुए बैंकों को सावधिक कर्ज की वसूली में तीन माह टालने की सहूलियत दी है। इसके साथ कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान पर भी तीन माह के लिए रोक लगाने की अनुमति दी गई है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने जमाकर्ताओं की चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि देश की बैंक प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि बैंक के शेयर भाव में कमी को जमा की सुरक्षा से जोड़ना गलत धारणा पर आधारित है। यस बैंक संकट और कोरोना वायरस महामारी के बाद बैंकों के शेयरों की कीमतें के नीचे आने के बाद दास ने यह बात कही। उन्होंने जमाकर्ताओं से यह भी आग्रह किया कि वे घबराकर बैंकों से पैसा नहीं निकाले।

 

 

27-03-2020
आरबीआई का बड़ा ऐलान, रेपो रेट में 75 फीसदी की कटौती, सस्ते होंगे लोन-घटेगी ईएमआई

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बड़ा ऐलान किया है। आरबीआई ने रेपो और रिवर्स रेपो रेट में कटौती की है। आरबीआई गवर्नर ने बताया कि कोरोना वायरस की वजह से कैश फ्लो में आई चुनौती से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने रेपो रेट में 75 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। रेपो रेट 5.15 से घटाकर 4.45 कर दिया है। रिवर्स रेपो रेट में 90 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई है। लॉकडाउन के बीच देश की इकोनॉमी को बूस्ट देने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इसी के तहत रिजर्व बैंक ने उम्मीद के मुताबिक रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। इस कटौती के बाद रेपो रेट 5.15 से घटकर 4.45 फीसदी पर आ गई है। बता दें कि बीते दो मौद्रिक समीक्षा बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को लेकर कोई फैसला नहीं लिया था। इसके साथ ही आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट कटौती करते हुए 4 फीसदी कर दी है। रेपो रेट कटौती का फायदा होम, कार या अन्य तरह के लोन सहित कई तरह के ईएमआई भरने वाले करोड़ों लोगों को मिलने की उम्मीद है। कैश रिजर्व रेशियो में 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती करके 3 प्रतिशत कर दिया गया है। यह एक साल तक की अवधि के लिए किया गया है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक सभी कमर्शियल बैंकों को ब्याज और कर्ज अदा करने में 3 महीने की छूट दी जा रही है। इस फैसले से 3.74 करोड़ रुपए की नकदी सिस्टम में आएगी।

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