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13-09-2019
गवाहों का बयान देखना न्यायालय का काम : पूर्व सीएम डॉ. रमन

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नागरिक आपूर्ति निगम के कथित घोटाले में गुरुवार को आए शिवशंकर भट्ट के शपथपत्र पर नपी-तुली प्रतिक्रिया दी।  उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए  कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम का प्रकरण न्यायालय में है। इस मामले में जितने भी गवाह हैं, सभी गवाह पहले इस मामले में अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। उस समय उनके बयान क्या थे? यह न्यायालय के समक्ष है। उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद जिस तरह इस प्रकरण से जुड़े गवाह अपने बयान बदल रहे हैं। यह सभी गवाह अपने बयान क्यों बदल रहे हैं? यह राज्य की जनता को सबकुछ समझ आ रहा है, मुझे भी यह समझ आ रहा है और न्यायालय को भी समझ आ रहा है। गवाहों के पूर्व और आज के बयान को देखना न्यायालय का काम है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस मामले में शिवशंकर भट्ट का 164 के तहत बयान दर्ज नहीं लिया गया, इसलिए उनसे शपथपत्र लेकर इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, क्योंकि न्यायालय में इस मामले का अंतिम प्रतिवेदन प्रस्तुत हो चुका है और विचरण जारी है। आगे जो भी कार्यवाही होगी, विचरण न्यायालय में होगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 
 

19-08-2019
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- हमारे आदेश को न दें राजनीतिक रंग 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित संत रविदास मंदिर को गिराने के उसके आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की सरकारों को ये सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक रूप से या प्रदर्शनों के दौरान कानून व्यवस्था संबंधी कोई स्थिति उत्पन्न न हो। पीठ ने कहा कि हर चीज राजनीतिक नहीं हो सकती। धरती पर किसी के भी द्वारा हमारे आदेश को राजनीतिक रंग नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने नौ अगस्त को कहा था कि वनक्षेत्र को खाली करने के उसके पूर्व आदेश पर अमल न कर गुरु रविदास जयंती समारोह समिति ने बड़ी गलती की है। बता दें कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानते हुए मंदिर को गिरा दिया था।

इसके बाद से चारों ओर विरोध हो रहा है। पंजाब के जालंधर सहित कई शहरों में सड़कों को जाम कर प्रदर्शन किया किया गया। दिल्ली-हरियाणा में भी लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बता दें कि दिल्ली के तुगलकाबाद में संत रविदास का एक भव्य मंदिर था।  इस मंदिर में एक खास वर्ग के साथ-साथ सिख समाज भी इसमें आस्था रखता है। डीडीए का आरोप है कि मंदिर का निर्माण जंगल की जमीन पर किया गया था। इस बारे में कई बार इसे हटाने के लिए कहा गया, लेकिन संत रविदास जयंती समारोह समिति ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी मंदिर को जंगल की जमीन से नहीं हटाया गया, तब जाकर 9 अगस्त को एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर को ढहाए जाने का आदेश जारी किया और डीडीए के दस्ते ने उस मंदिर को वहां से हटा दिया।

 

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