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15-09-2020
सामुदायिक शौचालय के उत्कृष्ट ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर 1.75 लाख तक जीतने का मौका, 2 अक्टूबर को दिए जाएंगे पुरस्कार

रायपुर। सामुदायिक शौचालय के उत्कृष्ट ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर आर्किटेक्ट और इंजीनियर पौने दो लाख रुपए तक का पुरस्कार जीत सकते हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की ओर से राज्य स्वच्छता पुरस्कार-2020 के अंतर्गत साढ़े तीन लाख रुपए, साढ़े चार लाख रुपए और साढ़े पांच लाख रुपए लागत के सामुदायिक शौचालय के सर्वश्रेष्ठ  मॉडल को क्रमश: 1 लाख रुपए, सवा लाख रुपए और पौने दो लाख रुपए का नगद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके लिए 20 सितंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं। विजेताओं को गांधी जयंती 2 अक्टूबर को पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए राज्य स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की वेबसाइट www.sbmgcg.in पर सीधे प्रविष्टि की जा सकती है। मिशन कार्यालय की ई-मेल आईडी sbmg.cg@gov.in पर या राज्य मिशन कार्यालय, नीर भवन, सिविल लाइंस, रायपुर में डाक से या स्वयं उपस्थित होकर भी आवेदन जमा किया जा सकता हैं। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अधिकारियों ने कहा कि, मिशन के पहले चरण (अक्टूबर-2014 से मार्च-2020) के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है। खुले में शौचमुक्त की स्थिति को बनाए रखने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर सामुदायिक शौचालयों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। राज्य में ऐसे सामुदायिक शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य है, जो सभी वर्गों और समुदायों के लोगों के लिए सहज व सुविधाजनक हो।

इन सामुदायिक शौचालयों में तृतीय लिंग व्यक्तियों सहित दिव्यांगों, महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग-अलग शौचालय, मूत्रालय एवं हाथ धुलाई की सुविधा तय की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में हाट-बाजारों, बस-स्टैंडों, धार्मिक स्थलों, तालाब के किनारे, हाई-वे के किनारे तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बसाहटों में सामुदायिक शौचालय बनाए जाएंगे। राज्य स्वच्छता पुरस्कार-2020 के अंतर्गत समावेशी सामुदायिक शौचालयों के ड्राइंग एवं डिजाइन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इस प्रतियोगिता में कोई भी इंजीनियर या आर्किटेक्ट भाग ले सकता है। सामुदायिक शौचालयों के सर्वश्रेष्ठ मॉडल का चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में प्रतिभागियों को सबसे पहले ड्राइंग एवं डिजाइन के साथ आनलाइन आवेदन करना होगा। इसमें चयनित पांच सर्वश्रेष्ठ मॉडलों में प्रत्येक को पांच हजार रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। पहले चरण के विजेताओं को दूसरे चरण में प्रस्तावित ड्राइंग एवं डिजाइन के प्रस्तुतिकरण के साथ थ्री-डी मॉडल  प्रस्तुत करना होगा। द्वितीय चरण में सर्वश्रेष्ठ ड्राइंग एवं डिजाइन का चयन नामांकित जूरी द्वारा किया जाएगा।

 

 

15-09-2020
कलेक्टर और एसपी पहुंचे पमालवाया, ग्रामीणों ने की बातचीत,मांगों को पूरा करने का दिया आश्वासन

बीजापुर। जिले के गंगालूर क्षेत्र में हज़ारों ग्रामीणों की रैली होने की सूचना मिलने पर कलेक्टर रितेश अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप सुरक्षा कारणों से खुद मोर्चा संभाला। कलेक्टर और एसपी स्वयं ग्रामीणों से चर्चा करने पमालवाया तक पहुंचे। कलेक्टर और एसपी ने रैली में शामिल होने आए कुछ ग्रामीणों से चर्चा की। ग्रामीणों से उनकी मांगो के संबंध में जानकारी ली। कोरोना महामारी से बचने के सुझाव भी दिए। ग्रामीणों की मांगों का हरसंभव पूरा करने का भरोसा भी दिया।

 

15-09-2020
तीन सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण उतरे सड़क पर,राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। जिले के गंगालूर और दर्जनों गांवों हज़ारों ग्रामीणों अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर रैली के माध्यम से जिला मुख्यालय पहुंचे और अपनी मांगों का ज्ञापन राज्यपाल के नाम एसडीएम हेमेंद्र भुआर्य को सौपा। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिन पहले गंगालूर में हज़ारों ग्रामीण एक जुट हुए थे और कोरोना संक्रमण के संबंध में ग्रामीणों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा था।डिप्टी कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने ग्रामीणों को समझया और हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया था,उसके बाद ग्रामीण अपना धरना खत्म कर वापस अपने गांव लौट गए थे। ग्रामीणों का कहना है कि ज्ञापन देने के बाद भी हमारी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसलिए मंगलवार को दोबारा रैली निकाल जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप रहे हैं। राज्यपाल को ग्रामीणों के द्वारा दिए गए ज्ञापन में प्रमुख रूप से वर्तमान समय में जिला चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र के ग्रामीणों को कोरोना संक्रमण नहीं होने के बावजूद भी उन्हें उठाकर जबरदस्ती हॉस्पिटल में भर्ती कराया जा रहा है। खाने-पीने व इलाज सही तरीके से नहीं हो रहा है। शासकीय अस्पताल एवं प्राइवेट अस्पताल में कोरोना का अफवाह फैला कर कोरोना के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को हटाकर नए प्रभारी नियुक्त करने की बात भी आवेदन में लिखी गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बीजापुर बीआर पुजारी ने कहा कि क्षेत्र में काफी समय से अपनी सेवा दे रहा हूं। अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्रों में पैदल जाकर सेवा देता हूं,पर आज रैली निकाल कर राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने नाम ज्ञापन में मेरे नाम का उल्लेख कर आवेदन दिया गया। इससे में बहुत आहत हुआ हूं। ग्रामीणों का मेरे खिलाफ आना यह किसी की साजिश भी हो सकती है और मेरे जान को भी खतरा हो सकता है। कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने कहा कुछ महीना पूर्व माओवादियों ने संगठन की एक अपनी महिला साथी को कोरोना होने पर संगठन से दूर करने वाले आज कोरोना के नाम पर भ्रामक जानकारी फैला कर ग्रामीणों को गुमराह कर रही है। बेहतर स्वास्थ्य सुविधा,सड़क,शिक्षा की सुविधा जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में चल रहा है। इस भयानक महामारी के दौर में भी स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर व कर्मचारी नदी,नाला,पहाड़,पैदल चलकर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मलेरिया,कोरोना के अलावा बच्चों के टीकाकरण जैसे कई कार्य करते हैं। उसके बाद भी आरोप लगाना समझ से परे है। जिला प्रशासन ग्रामीणों से अपील करती है की भ्रामक जानकारी फैलाने वाले माओवादियों के झांसे में ना आकर रैली निकाल कर समूह में खड़े होकर अपनी जान खतरे में ना डालें ग्रामीण। कोरोना एक महामारी वायरस का नाम है। कोरोना होने के बाद भी डॉक्टरों के द्वारा इलाज़ करने पर जिले में अभी काफी लोग ठीक हो चुके हैं। जिले मैं अब तक कई लोग इस महामारी के चपेट में आ चुके हैं और कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके है। इस समय गंगालूर ,चेरपाल से रैली ज्यादा होने की वजह से अंदरूनी ग्रामीण क्षेत्रो के बच्चे,बूढ़े भी इस महामारी की चपेट में आ सकते हैं। भ्रामक जानकारी से खुद भी बचे और दूसरों को भी बचाएं।

 

15-09-2020
सेना के ड्रोन से मिली नक्सल गतिविधियों की वीडियो

रायपुर/जगदलपुर। सेना के ड्रोन से मिली वीडियो में नक्सली सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों को लेकर सड़क खोदने जाते दिख रहे हैं। यह तस्वीर सुकमा जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र के ग्राम पालोड़ी की बताई जा रही है। सेना के ड्रोन की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सड़क पर बड़ी संख्या में लोग चलते हुए आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें काले वर्दी में नक्सलियों को भी साफ देखा जा सकता है।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने सेना के ड्रोन से मिली वीडियो के संबंध में बताया कि उक्त वीडियो 4 दिन पुराना है। उसी इलाके में सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों ने सड़क खोदने का प्रयास कर रहे नक्सलियों को खदेड़ा था। इस दौरान हुई मुठभेड़ में एक नक्सली भी मारा गया था। हालांकि मारे गए नक्सली का शव बरामद नहीं हो पाया लेकिन नक्सलियों के मंसूबे को विफल कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि विकास विरोधी नक्सलियों को आम जनता से कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीणों को बहला-फुसलाकर धमकी और भय से सड़क खोदने का काम कराते हैं।

13-09-2020
अटल विश्वविद्यालय के कुलपति से कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि 14 सितंबर से और आगे बढ़ाने की मांग

रायपुर/बिलासपुर। बिलासपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कोरोना संक्रमण तथा मौजुदा विषम परिस्थितियों को देखते हुए अटल विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश की अंतिम तिथि को 14 सितंबर से और आगे बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय के द्वारा उससे संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश के लिए 14 सितंबर को अंतिम तिथि के रूप में घोषित किया गया है। जबकि व्यावहारिक रूप में अगर देखा जाए तो प्रवेश की अंतिम तिथि 14 सितंबर को और आगे बढ़ाया जाना चाहिए। केशरवानी ने कहा है कि कोरोना संक्रमण और उसके मद्देनजर लागू हुए लंबे लॉक डाउन के चलते अभी अनेक विषयों एवं कक्षाओं की परीक्षाएं बाकी हैं। वहीं अनेक विषयों तथा कक्षाओं के छात्र छात्राओं को अभी तक उनके रिजल्ट भी प्राप्त नहीं हुए हैं। शायद यही वजह है कि 14 सितंबर की अंतिम तिथि को मात्र 1 दिन बचा होने के बावजूद अभी भी विश्वविद्यालय के सभी संबद्ध कॉलेजों में मात्र 20 से 25 प्रतिशत सीटें ही भरी जा सकी हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि विभिन्न कक्षाओं में अभी तक अधिकांश विद्यार्थी प्रवेश नहीं ले पाए हैं। इसे देखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने अटल विश्वविद्यालय के कुलपति से आग्रह किया है कि वे विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में 14 अप्रैल को तय प्रवेश की अंतिम तिथि को और आगे बढ़ाने का निर्णय लें। इससे सभी संबद्ध कॉलेजों में रिक्त पड़ी सीटें (छात्रों के प्रवेश के जरिए) भरी जा सकें। वहीं ऐसा करने पर कॉलेजों की विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के इच्छुक छात्र-छात्राओं को भी राहत और सहूलियत होगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि विश्वविद्यालय के कुलपति इस मामले में संवेदनशीलता का परिचय देते हुए प्रवेश की अंतिम तिथि को 14 सितंबर से आगे बढ़ाने का निर्णय जरूर लेंगे।

11-09-2020
जिले के हजारों ग्रामीण उतरे सड़क पर,राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक में कई गांव के ग्रामीण भारी संख्या में पातरपारा में अपनी 20 सूत्री मांगों को लेकर इकट्ठा हुए। ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम एसडीएम भोपालपटनम एआर राणा को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम ने ग्रामीणों से कहा कि उनकी मांगों को यथाशीघ्र सरकार के समक्ष रखी जाएगी और जल्द इसके निराकरण का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए कहा कोरोना महामारी के संकट में इस तरह सामूहिक रूप से इकट्ठा होना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि सभी से निवेदन है अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार सामूहिक रूप में जमा न हो। 

 

10-09-2020
जगदलपुर जिले के भीतरी हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार जारी

रायपुर/जगदलपुर। शासन-प्रशासन की ओर से जिले के अंदरूनी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। कई स्थानों में उप स्वास्थ्य केंद्र के नए भवनों का निर्माण किया गया है। इससे ग्रामीणों को उनके निवास स्थल के समीप स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही है। प्रशासन की ओर से बकावंड तहसील के उड़ियापाल में उप स्वास्थ्य केंद्र की नवीन भवन का निर्माण किया गया। और इस उप स्वास्थ्य केंद्र के स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करने के उपरांत 9 सितम्बर को पहली संस्थागत प्रसव एएनएम लोचना कश्यप के द्वारा डेंगगुड़ा निवासी गर्भवती सुखदई का किया गया, जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का प्रयास जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमलों की ओर से किया जा रहा है।

 

10-09-2020
झाड़ियों में मिली अज्ञात बच्ची, ग्रामीणों ने पहुंचाया अस्पताल 

अंबिकापुर। एक अज्ञात बच्ची झाड़ियों में मिली। इसकी सूचना ग्रामीणों ने चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। घटना सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र के ग्राम उडमकेला की है। यहां ग्रमीणों ने झाड़ियों में एक बच्ची को देखा और इसकी सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। वाहन 112 में उपचार के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीतापुर लाया गया। मेडिकल स्टाफ की मदद से बच्ची को बचा लिया गया। पुलिस ने मामले में बच्ची के परिजनों की तलाश कर रही है।

09-09-2020
भालू के हमले से ग्रामीण हुआ घायल, फिर मृत अवस्था में मिला भालू, जांच में जुटा वन अमला

कांकेर। कोरर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम नरसिंगपुर में ऐसी घटना सामने आई है,जिसने सभी को हैरत में डाल दिया है। इसमें भालू के हमले से एक व्यक्ति घायल हो गया है तो वहीं भालू की गोली लगने से मौत हो गई है। जिन परिस्थितियों में भालू की मौत हुई है, उससे अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पाया है, बताया जा रहा है कि ग्रामीण पर हमले के पूर्व गोली लगने से भालू स्वयं घायल अवस्था में था। भालू को गोली किसने मारी थी यह सबसे बड़ा सवाल है। बहरहाल वन विभाग के उच्चाधिकारी पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नरसिंगपुर निवासी चमन गावड़े उम्र 40 वर्ष सुबह 4 बजे अपने घर से बाहर निकला हुआ था। उसी दौरान एक भालू ने उस पर हमला कर दिया। इस घटना में चमन गावड़े गंभीर रूप से घायल हो गया। अपने बचाव में संबंधित व्यक्ति ने भी भालू पर हमला किया,जिससे भालू की घटना स्थल पर ही मौत हो गई।

घायल व्यक्ति को ग्रामीणों द्वारा उपचार के लिए धनेलीकन्हार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। यहां उसका उपचार जारी है। वन विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार भालू के शव के परीक्षण से यह ज्ञात हुआ कि पूर्व में ही किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे गोली मारी थी। इसके कारण वह घायल अवस्था में था तथा इस बीच हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष में उसकी मृत्यु हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही कोरर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर भालू के शव को जब्त किया एवं उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई यथास्थिति मामले की गंभीरता को देखते हुए जाँच के पश्चात सीसीएफ, डीएफओ तथा एसडीओ की उपस्थिति में भालू के शव का पोस्टमार्टम किया गया एवं आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इस सबंध में अरविंद पीएम, डीएफओ कांकेर ने बताया कि घायल ग्रामीण अस्पताल में उपचार के बाद स्वस्थ है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पायेगी।

 

09-09-2020
पंचायतों और गौठान समितियों के लिए सीमित संसाधनों के भरोसे मवेशियों की देखभाल कर पाना भगवान भरोसे : भूपेन्द्र शर्मा

रायपुर। राज्य सरकार की ओर से अब तक बनवाए गए आधे-अधूरे नवाचारी गौठानों में पहुंच रहे बाहरी आवारा मवेशियों का सीमित संसाधनों के भरोसे देखरेख कर पाना पंचायतों व गौठान समितियों के बस की बात नहीं है। इन मवेशियों के साथ होने वाले किसी अनहोनी के लिए शासन-प्रशासन द्वारा इनके कंधों पर बंदूक रख चलाने की प्रवृत्ति के चलते ये पंचायतें व समितियां सांसत में हैं और खासकर ग्रामीण राजनीति के कारण ज्यादा। इन्हें इस सांसत से छुटकारा दिलाने ऐसे मवेशियों के लिए अभ्यारण्य बनवाने सहित कई सुझावों को लेकर किसान संघर्ष समिति ने शासन के नुमाइंदों को ज्ञापन प्रेषित किया है । प्रदेश सरकार के मुखिया भूपेश बघेल व पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री टी .एस . सिंहदेव को मेल से व कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे तथा गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास को व्हाट्सएप के द्वारा यह सुझावयुक्त ज्ञापन समिति संयोजक भूपेन्द्र शर्मा ने प्रेषित किया है । ज्ञापन मे अवैध कब्जों की वजह से बदरंग हो चले ग्रामों में सुराजी गांव योजना के तहत  वर्तमान परिवेश में नवाचारी गौठान निर्माण की परिकल्पना को व्यापक ग्रामहित में स्वागतेय ठहराते हुये लिखा गया है कि प्रदेश के 20599 ग्रामों में से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल 5000 गौठान निर्माण का लक्ष्य होने व तकरीबन 2200 गौठानों के अस्तित्व में आने की जानकारी मिली है ।

इन अस्तित्वधारी गौठानों के भी परिकल्पना के अनुरूप अब तक निर्माण न हो आधे - अधूरे रहने के बाद भी ऐसे आवारा मवेशियों को किसानों की फसल बचाने मजबूरन सीमित संसाधनों के भरोसे रखे जाने व इन मवेशियों के साथ हो रहे किसी अनहोनी के लिये पंचायत व गौठान समितियों को जिम्मेदार ठहराये जाने से आक्रोश पनपने की जानकारी भी ज्ञापन ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌में‌ दिया गया है। नवाचारी गौठान न होने वाले ग्रामों के ग्रामीणों द्वारा अपने अनुपयोगी व अलाभप्रद मवेशियों सहित बाहर के ग्रामों से पहुंचने वाले ऐसे आवारा मवेशियों को धकेलते धकेलते इन‌ गोठानों तक पहुंचाने की वजह से हरेक ऐसे गोठानों में सैकड़ों की संख्या में ये मवेशिया अब तक इकट्ठे हो जाने की बात भी ज्ञापन में लिखा गया है। इन मवेशियों के संबंध में पूर्ववर्ती सरकार के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल सहित तात्कालिक मुख्य सचिव  अजय सिंह को सुझावयुक्त ज्ञापन सौंपे जाने व इस पर कार्यवाही लंबित रहने के‌ दौरान ही सरकार बदल जाने की जानकारी देते हुये पूर्ववर्ती सरकार के शासनकाल में इन मवेशियों के लिये अभ्यारण्य निर्माण की योजना को राजनैतिक नजरिया ‌‌‌से न ले तत्काल अमलीजामा पहनाने की दिशा में अग्रसर होने का आग्रह किया गया है ।

फौरी व्यवस्था के तहत इन‌ मवेशियों के लिये हरेक जनपद पंचायत स्तर पर  भूमि का चयन कर ऐसे मवेशियों को एक जगह इकट्ठा रखने व इनकी संपूर्ण जिम्मेदार जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को देने का सुझाव दिया गया है । ज्ञापन में अनुसंधान विस्तार वन मंडल के  लावारिस पड़े रोपणियों को इसके लिये उपयोग में लाते जाने का भी सुझाव देते हुते बताया गया है कि मंदिरहसौद थाना क्षेत्र के भीतर ही ग्राम कुरूद , बकतरा , मुनगी आदि में ऐसे कई‌ रोपणिया‌ हैं। जो 35-40 एकड़ में फैले हैं तथा चारदीवारी से‌ घिरे‌ होने के साथ पानी की व्यवस्था भी रखते हैं तथा वहां के वृक्ष इतने बड़े हो गये हैं जिन्हें मवेशिया नुकसान नहीं पहुंचा सकते व उन्हें चारा भी आसानी से मिल सकता है। इन इकट्ठे मवेशियों के गोबर से शासन को आय‌ भी होने के साथ-साथ इकट्ठे मवेशियों के देखरेख में गोठानों की तुलना में खर्च भी काफी कम आने ‌‌‌‌‌‌‌की‌ बात ज्ञापन में कहा गया है। प्रायोगिक तौर पर यहां से शुरुआत कर पूरे प्रदेश के ऐसे रोपणियों का‌ पता लगवा इस कार्य को अंजाम दिये जाने का भी सुझाव दिया गया है।

इसके अतिरिक्त ज्ञापन में प्रत्येक ग्राम के किसानों के मवेशियों के पहचान के लिये टैगिंग अविलंब करवाने , आवारा छोड़े जाने वाले मवेशियों के मालिकों पर ऐसे मवेशियों को अपने कब्जे में न रखें जाने पर उनको‌ मिलने वाले समस्त शासकीय सुविधाओं के लाभ से वंचित करने का कानूनी अधिकार पंचायत को देने कानून बनाने व वर्तमान में इन मवेशियों के साथ गौठानों में हो‌ रहे किसी परिस्थितिजन्य अनहोनी के लिये सरपंच व गौठान समिति के अध्यक्ष सहित पंचायत सचिवों के कंधों पर बंदूक रख चलाने वाले अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाही का भी‌ सुझाव देते हुये प्रत्येक ग्राम के निस्तार पत्रक‌ में गौठानों व‌ चरागनों के लिये कानूनी तौर पर आरक्षित भूमियों पर हुये अवैध कब्जों को न हटवा अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये कानून सुरक्षित खाली पड़े ‌‌‌भूमियों पर गोठान निर्माण किये जाने पर क्षोभ प्रगट करते‌ हुये सुप्रीम कोर्ट के फैसले का‌ पालन करते हुये ग्रामों के निस्तारी भूमियों को बेजा कब्जों से मुक्त कराने का भी आग्रह किया गया है।

08-09-2020
11 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्रामीण उतरे सड़क पर,अधिकरियों के आश्वासन के बाद वापस लौटे

बीजापुर। जिले के गंगालूर क्षेत्र के सात गांव पुसनार, मेटापाल, बुरजी, मल्लूर,गोंगला,हिरोली एवं नैनपाल के लगभग दो हज़ार ग्रामीण अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर गंगालूर में प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेश भूषा में नज़र आये। ग्रामीणों के हाथ में तीर धनुष के साथ देवी देवता फोटा भी थी। ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को कोसा। ग्रामीणों का कहना है कि इस कोरोना महामारी के चलते उन्हें इलाज़ सही तरह से नहीं मिल रहा है। इस से इस भयंकर बीमारी से लोगों की मृत्यु भी हो रही है। बच्चों के पढ़ाई पर भी असर हो रहा है। ग्रामीणों के मांगों में महंगाई,शिक्षा,फ़र्ज़ी मुठभेड़ और अत्याचार प्रमुख है। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर अमितनाथ त्यागी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मिर्ज़ा ज़ियारत बेग ने ग्रामीणों को समझया और हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया। उसके बाद ग्रामीण अपना धरना खत्म कर गांव लौटे।

 

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