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08-01-2021
रेखचंद जैन ने कहा-किसानों का शोषण करने मोदी सरकार ने लागू किए काले कानून

जगदलपुर/रायपुर। जगदलपुर विधायक व संसदीय सचिव रेखचंद जैन शुक्रवार को एनएसयूआई के अभियान एक रुपया-एक पईली धान देकर बढ़ाएं किसानों का सम्मान को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया है कि अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से कमजोर करने और खेतों को उद्योगपतियों के हवाले अप्रत्यक्ष रूप से करने मोदी सरकार ने काले कानून को लागू किया है। इसके विरोध में किसान आंदोलन कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ी है। सभी वर्गों का समर्थन भी मिल रहा है। बस्तर के किसानों से एक रुपए और एक पईली धान देकर किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है।संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संवेदनशील भूपेश बघेल सरकार किसानों का एक-एक दाना धान खरीद रही है। 1850 रुपए समर्थन मूल्य व 650 रुपए राजीव गांधी न्याय योजना के माध्यम से दे रही है। इसको रोकने भाजपाईयों की ओर से हथकंडे अपनाए जा रहें हैं। तीन वर्षों से भाजपा बेनकाब हो गई है और दिल्ली में चल रहे किसानों के आंदोलन से ध्यान भटकाने छत्तीसगढ़ में भाजपा प्रोपोगंडा कर रही है। मोदी सरकार व भाजपा को नसीहत देते किसानों के हित के लिए काले कानून को वापस लेने की मांग की है। आईटी सेल प्रदेश महासचिव योगेश पानीग्राही व एनएसयूआई प्रदेश प्रवक्ता उस्मान रजा ने भी कार्यक्रम को भी संबोधित किया। एनएसयूआई के इस अभियान के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान जिला महामंत्री अनवर खान,हेमू उपाध्याय, जिला सहमंत्री विनोद कुकड़े, राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस प्रदेश महासचिव विजय सिंह, जिला अध्यक्ष कुलदीप भदौरिया, आशिफ अली , माज लीलहा सहित बड़ी संख्या में एनएसयूआई व कांग्रेस पार्टी नेता उपस्थित थे।

14-11-2020
गूगल पर अकाउंट है तो हो जाएं सावधान, जल्द लागू होगी नई पॉलिसी.....

रायपुर। 1 जून 2021 से गूगल नई पॉलिसी लागू करने जा रहा है। नई पॉलिसी लागू होने बाद आपका अकाउंट बंद भी हो सकता है। नई पॉलिसी के अनुसार यूजर्स का जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटो अकाउंट दो साल से निष्क्रिय है तो गूगल इन सभी अकाउंट पर आपका कंटेंट हटा देगी और इन अकाउंट को बंद कर देगी। वहीं यदि आपको अपने जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटो अकाउंट को आगे भी इस्तेमाल करना है तो आपको इन अकाउंट पर अपनी सक्रियता बढ़ानी होगी। गूगल किसी भी यूजर का कंटेंट हटाने से पहले उसे इसकी जानकारी भी देगा। गूगल की नई पॉलिसी से अनुसार यदि आपका अकाउंट 2 साल से अपनी स्टोरेज लिमिट से ज्यादा है तो गूगल कंटेंट को जीमेल, ड्राइव और फोटो पर से हटा सकता है। हालांकि गूगल ने साफ कर दिया है कि कंटेट हटाने से पहले यूजर्स को इसकी जानकारी भी दी जाएगी। यदि आप अपने अकाउंट को बंद होने से बचाना चाहते हैं तो आपको समय-समय पर अकाउंट को ओपन कर उसमें अपडेट करना होगा।

23-10-2020
प्याज की अनियंत्रित कीमतों पर काबू करने केंद्र सरकार ने लागू किए नियम,विक्रेताओं के लिए की भंडारण सीमा तय

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्याज की जमाखोरी रोकने तथा इसके मूल्य को नियंत्रित करने के लिए तुरंत प्रभाव से भंडारण सीमा निर्धारित कर दी है। उपभोक्ता मामलों की सचिव लीमा नंदन ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्याज के थोक विक्रेताओं के लिए भंडारण सीमा 25 टन और खुदरा विक्रेताओं के लिए यह सीमा दो टन निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ माह से प्याज की कीमतें बढ रही थी। भंडारण सीमा निर्धारित किये जाने से प्याज की जमाखोरी करने वाले के साथ आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि कुछ स्थानों पर प्याज का खुदरा मूल्य करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि प्याज के मूल्य को नियंत्रित करने के लिए इसका निर्यात रोक दिया गया और इसका आयात करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही प्याज के एक लाख टन के बफर स्टाक से राज्यों को उनकी मांग के हिसाब से इसकी आपूर्ति की जा रही है। राज्यों को 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से प्याज दिया जा रहा है। बफर स्टाक में अब भी करीब 25 हजार टन प्याज बेचा है। केरल और असम को बफर स्टाक से प्याज की आपूर्ति की गई है। इसके अलावा तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगना ने भी प्याज की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस बार भारी वर्षा से कुछ स्थानों में प्याज की खरीफ फसल को नुकसान हुआ है जबकि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में प्याज की पैदावार में कमी आयी है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 43 लाख टन प्याज उत्पादन का अनुमान था जो घटकर 37 लाख टन हो गया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव ने कहा कि पिछले दस साल के दौरान प्याज का उत्पादन 150 लाख टन से बढकर 261 लाख टन हो गया है। वर्ष 2019-20 के दौरान रिकार्ड 261 लाख टन प्याज का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष करीब 15 लाख टन प्याज का निर्यात किया गया है । अब एमएमटीसी और कुछ निजी कम्पनियां प्याज आयात करने की प्रक्रिया में है।

03-09-2020
निर्मला सीतारमण ने बैंक प्रमुखों से कहा, जल्‍द से जल्‍द रिजॉल्‍युशन स्‍कीम को लागू करें

नई दिल्‍ली। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सभी बैंक प्रमुखों से कहा कि वह जल्‍द से जल्‍द रिजॉल्‍युशन स्‍कीम को लागू करें। साथ ही कोरोना के चलते वित्‍तीय संकट में फंसे लोगों को बैंक के कर्ज चुकाने में भी मदद करें। सीतारमण ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गुरुवार को बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के प्रमुखों के साथ बैठक में ये बात कही। कोरोना संकट के बीच बिजनेस को रिवाइव करने के लिए इस स्कीम को लागू किया जा रहा है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वित्त मंत्री ने बैंकों और एनबीएफसी प्रमुखों के साथ बैठक में निर्देश दिया है कि वो रिजॉल्युशन स्‍कीम को 15 सितम्बर तक लागू करें। सीतारमण ने बैंकों को ये भी कहा कि लोन रिपेमेंट पर मोरेटोरियम खत्म होने के बाद भी जरूरत पड़ने पर कर्ज लेने वालों को सपोर्ट करें। उन्‍होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान इससे बैंकों के क्रेडिट एसेसमेंट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

मंत्रालय ने बयान में कहा है कि 'बैंकों ने आश्वस्त किया कि वो ​रिजॉल्युशन प्लान को लागू करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने योग्य बारोवर्स की पहचान करने और उनके संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही ये भी कहा कि आरबीआई द्वारा निर्धारित समय सीमा का अनुपालन करेंगे।'रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने पिछले महीने ही कॉरपोरेट और रिटेल लोन को लेकर बैंकों को वन-टाइम लोन रिस्ट्रक्चरिंग की अनुमति दी थी।  उल्‍लेखनीय है कि पिछले महीने ही आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि कोरोना संबंधित स्ट्रेस्ड अकांउट्स के लिए रिजॉल्युशन फ्रेमवर्क को 6 सितम्बर तक तैयार क​र लिया जाएगा। उन्‍होंने कहा था कि कुछ लोन को रिस्ट्रक्चर करने से आर्थिक रिकवरी को सपोर्ट करने में मदद मिलेगी और नकदी के संकट से जूझ रहे बिजनेस खुद को​ फिर से मजबूत कर सकेंगे।

19-07-2020
  संघर्ष के बाद मिले मतदान के अधिकार की हत्या का प्रयास : बीएमएस

भिलाई। बीएसपी कर्मियों के बीच आईआर एक्ट को लागू करने को लेकर भारी आक्रोश का माहौल है। इस संबंध में चर्चा के लिए भिलाई इस्पात मजदूर संघ (बीएमएस) की एक आपातकालीन बैठक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष एसएम पांडेय के अध्यक्षता में आयोजित की गई।यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष एसएम पांडेय ने कहा कि जारी अधिसूचना में स्टील एवं सीमेंट का नाम है इसलिए कर्मियों के बीच यह स्थिति पैदा हो गई है कि क्या यह स्टील में भी लागू हो गया है? और अगर आईआर एक्ट स्टील में लागू हो गया है तो प्रबंधन यूनियन की सभी कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग करे और यदि प्रबंधन यूनियन से बात करना चाहता है तो सभी यूनियन से सामूहिक बात करे।यूनियन के उप महासचिव सनी इप्पन ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ऐसे समय पर आईआर एक्ट की बात कही जा रही है जब बीएसपी कर्मचारियों के वेज रिवीजन सहित अन्य लंबित मुद्दों पर शीघ्र निर्णय होने का वातावरण बन चुका है।

यूनियन के उप महासचिव निर्मल मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम मंत्रालय द्वारा 2010 के आईडी एक्ट के संबंध में दिए गए अध्यादेश का क्या होगा, क्या जानबूझकर संवैधानिक संकट की स्थिति पैदा की जा रही है? बैक डोर एंट्री किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, अल्पमत के चक्कर में 71 परसेंट बहुमत का अपमान किसी भी परिस्थिति में नहीं सहा जाएगा।यूनियन के उप महासचिव आरके पांडेय ने कहा कि बीएसपी कर्मियों में फैले भ्रम की स्थिति को प्रबंधन तत्काल स्पष्ट करे और बताए कि आज दिनांक को भिलाई में आईआर एक्ट लागू है कि आई डी एक्ट?। यूनियन के उपाध्यक्ष हरिशंकर ने कहा कि श्रमिकों को अपनी पसंद के यूनियन चुनने का अधिकार आईडी एक्ट में मतदान के द्वारा दिया गया था। षडयंत्र पूर्वक इस अधिकार को समाप्त करना कर्मचारियों का अपमान है,जिसे किसी भी परिस्थिति में हम नहीं सहेंगे।यूनियन के महामंत्री दिनेश कुमार पांडेय ने कहा कि सोमवार को इस विषय पर प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर स्थिति स्पष्ट करने कहा जाएगा। बीएमएस के भारी संघर्ष के बाद बीएसपी में आईडी एक्ट लागू हुआ था,जिसमें सभी कर्मियों को मतदान का अधिकार है अपनी पसंद के यूनियन चुनने का अधिकार है किसी भी स्थिति में इस अधिकार को समाप्त नहीं होने देंगे।

18-06-2020
खरीफ फसलों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ की पारम्परिक व्यवस्था रोका-छेका होगी लागू

रायपुर। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। प्रदेश में खरीफ फसलों में धान सबसे प्रमुख है। फसलों को चराई से बचाने यहां रोका-छेका की परम्परा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपील के बाद कबीरधाम जिले में भी इसे प्रभावी ढंग से अमल में लाने किसानों और पशु पालकों के साथ प्रशासन भी जुटा हुआ है।राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 19 जून से 30 जून के बीच रोका-छेका की शुरूआत के साथ ही सभी गांवों में कृषि, उद्यानिकी, वन, पशुपालन एवं मछली पालन विभाग द्वारा किसानों, पशु पालकों और मछली पालकों को विभिन्न सामग्रियों का वितरण किया जाएगा। इस दौरान गौठानों में आयोजित विविध कार्यक्रमों में चयनित किसानों को 250 मिनी किट, 114 क्विंटल धान बीज और 750 क्विंटल रागी बीज का वितरण किया जायेगा। पशुधन विकास विभाग द्वारा गौठानों में पशुओं का टीकाकरण, बधियाकरण और कृत्रिम गर्भधारण कराया जाएगा। साथ ही शिविरों में लोगों को विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। मछली पालन विभाग द्वारा जाल, आइस-बॉक्स एवं मछली बीज भी वितरित किए जाएंगे।


कबीरधाम जिले के कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को सुराजी गांव योजना अंतर्गत नरवा, गरवा, घुरवा और बारी योजना के लाभ के बारे में बताया जाएगा। सभी गांवों में गौठान प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित की जाएगी। रोका-छेका लागू करने और फसलों को बचाने ग्रामीण आपस मे चर्चा करेंगे। इस दौरान विभिन्न विभागों के मैदानी अमले द्वारा सरकार की योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गांवों में निर्मित सर्वसुविधायुक्त गौठानों से रोका-छेका में बहुत मदद मिलेगी। मवेशियों के लिए गौठानों में ही चारा, पानी और छाया की व्यवस्था है।उन्होंने बताया कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से बचाव के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए मास्क या साफ कपड़े से मुंह ढंककर कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। आगामी 19 जून से 30 जून के बीच वन विभाग द्वारा गौठानों में वृक्षारोपण, ग्राम गौठान समिति की बैठक, शासकीय योजनाओं के साथ ही गौठानों में चारे की व्यवस्था के लिए पैरा एकत्रीकरण पर चर्चा की जाएगी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता   समूहों द्वारा गौठानों में बनाए गए उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय भी किया जायेगा।

 

10-06-2020
कोरोना को मात देने वाले लोग स्नेह के हैं हक़दार

रायपुर। कोरोना संक्रमण के कारण हुए देशव्यापी लॉक डाउन में फ़िलहाल तो कुछ छूट दी गई है एवं अनलॉक 1.0 को देशभर में लागू कर दिया गया है। लेकिन अभी भी कोरोना संक्रमण के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी ही देखी जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने विडियो जारी कर अनलॉक 1.0 के दौरान कोरोना से बचाव की उपायों की जानकारी दी है। साथ ही कोरोना से ग्रसित लोग, कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोग एवं कोरोना  पीड़ितों की देखभाल में जुटे चिकित्सक या अन्य कर्मियों के खिलाफ़ हो रहे भेदभाव के विषय में भी लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है। कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों के प्रति भेदभाव समुदाय में सही जानकारी के अभाव को दर्शाता है। बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं,जो ठीक होने के बाद कोरोना पीड़ितों के उपचार के लिए प्लाज्मा डोनेट भी कर रहे हैं। इसलिए वे भेदभाव नहीं बल्कि स्नेह के हक़दार हैं।

कोरोना को मात देकर ठीक हुए लोगों से नहीं करें भेदभाव

‘जब से कोरोना से ठीक होकर अस्पताल से लौटी हूँ। पड़ोसी मेरे साथ कुछ अजीब ही व्यवहार कर रहे हैं। घर वालों के पास भी कोई विकल्प नहीं है। सभी घर में ही कैद रहने को मजबूर हैं’।‘मैं अब बिलकुल ठीक हो चुकी हूँ। लेकिन घर वापस लौटने के बाद यहाँ कुछ भी ठीक नहीं है। आस-पास के लोग तो मुझे पानी भी भरने नहीं देते। यह भेदभाव ठीक नहीं है।’स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोरोना को मात देकर घर लौटी कुछ महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव पर उनकी बातों को वीडियो के माध्यम से साझा किया है। साथ ही एम्स दिल्ली के निदेशक एवं चिकित्सकों ने भी इस पर अपनी राय भी रखी है। एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कोरोना भी एक आम वायरल रोग है। यद्यपि बाकी वायरल रोगों की तुलना में इसका प्रसार तेज है। बहुत सारे कोरोना के ऐसे भी मरीज हैं,जिनमें कोई लक्षण नहीं है एवं वे आसानी से ठीक भी हो रहे हैं। लेकिन ठीक होने के बाद लोग उनसे दूर भागने लगते हैं एवं उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जो वैज्ञानिक रूप से बिलकुल गलत है।

ठीक हुए मरीजों से कोरोना का संक्रमण दूसरे लोगों में नहीं फ़ैलता है। उन्होंने बताया भेदभाव के ही कारण बहुत सारे लोग पीड़ित होकर भी जाँच के लिए सामने नहीं आते हैं। इससे उनकी जान को खतरा है।एम्स दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौशल सिन्हा देव बताते हैं,कोरोना ने लोगों को डरा दिया है। इस डर के कारण लोगों के व्यवहार में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। लोगों को लगता है कि जो भी लोग कोरोना से लड़ रहे हैं या जो लोग कोरोना को हराकर ठीक हो चुके हैं उनसे दूरी बनाकर कोरोना संक्रमण से बचाव संभव है। लेकिन सत्य यह है कि लोगों से भेदभाव करके एवं कोरोना की जंग में शामिल लोगों पर ऊँगली उठाकर इस महामारी से बचा नहीं जा सकता है।

इन बातों का रखें विशेष ख्याल

• सार्वजानिक स्थानों पर लोगों से 6 फीट की दूरी बनायें।
• अपनी आँख, नाक एवं मुंह को छूने से बचें।
• हाथों की नियमित रूप से साबुन एवं पानी से अच्छी तरफ साफ़ करें या आल्कोहल आधारित हैण्ड सैनिटाईजर का इस्तेमाल करें।
• अक्सर इस्तेमाल की जाने वाली सतहों की नियमित सफाई कर इसे कीटाणु रहित करें।
• अनावश्यक यात्रा न करें।
• यदि सामाजिक समारोह स्थगित नहीं किया जा सकता तो मेहमानों की संख्या कम से कम रखें।
• कोविड-19 पर जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1075 पर संपर्क करें।

29-05-2020
मजदूरों को वापस लाने के लिए 59 ट्रेनों की अनुमति,39 ट्रेनों के लिए रेल मंडलों को 3 करोड़ 74 लाख से अधिक भुगतान

रायपुर। नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लाॅक डाउन से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अन्य राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों तथा अन्य लोगों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर वापस लाने का सिलसिला लगातार जारी है। बघेल के निर्देशन पर राज्य के बाहर फंसे श्रमिकों एवं अन्य लोगों को वापस लाने के लिए राज्य सरकारों से समन्वय कर अब तक 59 ट्रेनों के लिए सहमति प्रदान की गई है। श्रम मंत्री डाॅ.शिवकुमार डहरिया ने बताया कि भवन एवं अन्य सन्ननिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा प्रवासी श्रमिकों को वापस छत्तीसगढ़ लाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन के लिए विभिन्न रेल मंडलों को श्रमिकों के यात्रा व्यय के लिए आवश्यक राशि का भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में 50 हजार 797 यात्रियों को 39 ट्रेनों से वापस लाने के लिए 3 करोड़ 74 लाख 31 हजार 330 रूपए का भुगतान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा स्पेशल श्रमिक ट्रेन से अन्य प्रदेशों में फंसे श्रमिकों को 53 ट्रेनों के माध्यम से लगभग 71 हजार 712 श्रमिकों को एवं 453 अन्य यात्रियों को वापस लाया जा चुका है।

डाॅ.डहरिया ने बताया कि लाॅक डाउन के कारण श्रमिकों को जो छत्तीसगढ़ राज्य की सीमाओं पर पहुंच रहे है एवं राज्य से होकर गुजरने वाले सभी श्रमिकों के लिए नाश्ता, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं परिवहन की निःशुल्क व्यवस्था से श्रमिकों कोे काफी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ के सभी सीमाओं पर पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को, चाहे वो किसी भी राज्य के हो, उन्हें छत्तीसगढ़ का मेहमान मान कर शासन-प्रशासन के लोग उनकी हरसंभव मदद कर रहे है।  उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के अधिकारियों का दल गठित कर विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, नियोजकों एवं प्रबंधकों से समन्वय कर श्रमिकों के लिए राशन एवं नगद आदि की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रदेश के 26 हजार 205 श्रमिकों को 38 करोड़ 26 लाख रूपए बकाया वेतन का भुगतान भी कराया गया है। वहीं लाॅक डाउन के द्वितीय चरण में 21 अप्रैल से शासन द्वारा छूट प्रदत्त गतिविधियों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 1 लाख 4 हजार श्रमिकों को पुनः रोजगार उपलब्ध कराया गया है और छोटे-बड़े 1390 से अधिक कारखानों में पुनः कार्य प्रारंभ हो गया है।

21-05-2020
राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लागू होना किसानों नहीं भाजपा के साथ अन्याय : कांग्रेस

रायपुर। राजीव गांधी किसान न्याय योजना को भाजपा नेताओं की ओर से किसानों के साथ अन्याय बताने पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि योजना का लागू होना भाजपा के साथ अन्याय है। अब भाजपा को किसानों के नाम से राजनीति करने का मौका नहीं मिलेगा। भाजपा नेताओं को न्याय और अन्याय में फर्क ही नहीं मालूम है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार किसानों से किए वादों को पूरा करने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना जो शुरू की है ये न्याय है। किसानों का कर्ज माफ किए ये न्याय है। किसानों की जमीन लौटाए ये न्याय है और 15 साल तक मुख्यमंत्री  रहे रमन सिंह और बीते 6 साल से प्रधानमंत्री पद पर विराजमान नरेंद्र मोदी ने किसानों के साथ जो वादाखिलाफी की ये अन्याय है।

रमन सिंह के 15 साल के सत्ता के दौरान हुए किसानों की आत्महत्या का महापाप और किसानों से किए गए वादाखिलाफी के अपराध के बोझ तले दबे भाजपा राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है।धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा छत्तीसगढ़ में सरकार बनने पर किसानों के धान की कीमत 2100 रुपया प्रति क्विंटल और 300 रुपया बोनस देने का वादा किया था ठीक उसी तरह 2014 लोकसभा चुनाव में किसानों से केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुसार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने,महंगाई कम करने,किसानों की आय दुगुनी करने का वादा किया था।

2013 में बनी रमन सिंह की सरकार और 2014 में बनी मोदी की सरकार ने किसानों से वादाखिलाफी कर किसानों के साथ अन्याय किया। किसान सम्मान निधि के नाम से निरंतर किसानों का अपमान मोदी भाजपा की सरकार कर रही है।धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा नेताओं से कहा है कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की तरह ही मोदी सरकार से देशभर के किसानों के लिए स्वामीनाथन  कमेटी की सिफारिश के अनुसार उपज का लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य तत्काल लागू कराए।

04-05-2020
लॉक डाउन 3.0 आज से लागू,देश में इन चीजों में लागू रहेंगे ये प्रतिबंध,जानिए प्रदेश में क्या खुलेगा और क्या रहेगा बंद

नई दिल्ली। देश में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लॉक डाउन को दो हफ्ते और बढ़ा दिया गया है। 4 मई यानी आज से लॉक डाउन 3.0 की शुरुआत हो रही है। इस लॉक डाउन की अवधि 17 मई तक की है। बता दें कि राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन के शुरू हो रहे तीसरे चरण में और अधिक छूट दी गई है, लेकिन निषिद्ध क्षेत्रों यानी कंटेनमेंट जोन में पाबंदियां जारी रहेंगी। केंद्र सरकार ने देश भर के जिलों को तीन जोन में बांटकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। ग्रीन, ऑरेंज और रेड जोन में बांटे गए जिलों में कई तरह की छूट दी जा रही हैं। हालांकि कुछ सेवाओं पर पाबंदी पहले की तरह ही जारी रहेंगी। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए मार्च के अंतिम दिनों से लागू देशव्यापी लॉक डाउन के तीसरे चरण की शुरुआत आज (चार मई) से हो रही है। वहीं, कई राज्यों ने भी पिछले दिनों कुछ क्षेत्रों को छूट तो कुछ पर पाबंदी लगाने का ऐलान किया है। जानिए, देश भर में किन राज्यों में लॉक डाउन के तीसरे चरण में आज से छूट मिलेगी और किस पर रहेगा प्रतिबंध।

दिल्ली में खुलेंगे सरकारी और प्राइवेट ऑफिस :

दिल्ली सरकार 4 मई से कुछ रियायतें देने जा रही है। इनमें सभी सरकारी दफ्तर खुलेंगे, जो जरूरी सेवाओं से संबंधित हैं, वहां 100 प्रतिशत लोग आएंगे। गैर-जरूरी सरकारी सेवाओं में डिप्टी सेक्रेट्री और 33 फीसदी स्टाफ आएगा। निजी संस्थान में भी 33 फीसदी स्टाफ आएगा। स्टेशनरी, सभी तरह की स्टैंड-अलोन शॉप खुलेंगी। शराब की दुकानें खुलेंगी। जरूरी सामान बनाने वाली कंपनियां भी खुलेंगी। उनकी सप्लाई चेन भी खुलेगी। आईटी हार्डवेयर, ई-कॉमर्स में जरूरी सेवाएं रहेंगी। वहीं शादी में 50 लोगों को इजाजत और किसी की मौत होने पर 20 लोगों की जुटने की इजाजत दी गई है।

दिल्ली में सोमवार से सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालय खुलेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में लॉक डाउन के दौरान रेड जोन में दी गई सभी राहतें लागू रहेंगी। आवश्यक सेवाएं मुहैया कराने वाले सरकारी कार्यालयों में 100 फीसदी कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी। दूसरे सरकारी कार्यालय में सचिव और उप-सचिव के अलावा 33 फीसदी कर्मचारी आएंगे।

उत्तर प्रदेश में गुटका, तम्बाकू पर सख्ती से बैन :

यूपी में रेड व आरेंज जोन में 50 से अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता के बिना विशेष परिवहन की सुविधा दी जाएगी। इन वाहनों में क्षमता से आधे लोग ही बैठेंगे। कार्यस्थल पर थर्मल स्कैनिंग होगी। कार्यस्थल पर दो पारियों के बीच एक घंटे का अंतर होगा। कर्मचारी भोजन अलग-अलग करेंगे। दो लोग कम से कम छह फीट की दूरी पर काम करेंगे। 10 से अधिक लोगों की बैठकें नहीं होंगी। लिफ्ट में चार से अधिक की अनुमति नहीं होगी। गुटका व तम्बाकू आदि पर सख्ती से प्रतिबंध होगा। थूकना भी प्रतिबंधित होगा। कार्यस्थल पर गैरजरूरी लोग नहीं आ पाएंगे। सभी प्रकार की इंडस्ट्री के मालिक व श्रमिक आपसी सहमति से काम के घंटे बढ़ा सकते हैं। यह व्यवस्था आगामी तीन महीने तक रहेगी। ग्रामीण  क्षेत्रों में किसी तरह की औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति होगी। 

वहीं, शहरी क्षेत्र में उन्हीं निर्माण की अनुमति होगी, जहां श्रमिकों को बाहर से लाने की जरूरत न पड़े। इसी तरह रेन्यूबल इनर्जी को अनुमति होगी। शहरी क्षेत्रों में नगर निगम और नगर पालिका की सीमा के अंदर सभी माल, मार्केट काम्पलेक्स व मार्केट बंद रहेंगे। वहीं, जरूरी वस्तुओं की दुकानें मार्केट व मार्केट कांप्लेक्स में खुलेंगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में माल को छोड़कर सभी दुकानों को खुलने की छूट होगी। सभी में दो गज की दूरी का पालन अनिवार्य होगा। ई-कामर्स के जरिए जरूरी वस्तुएं खरीदी जा सकेंगी। 

राजस्थान में ई कॉमर्स को मिली रियायत :

राजस्थान के आठ जिले रेडजोन में हैं। मोबाइल, लैपटॉप स्टेशनरी और कपड़ों की दुकानें भी अब रेड जोन में खुलेंगी। ओपीडी और मेडिकल क्लिनिक खोलने की सुविधा भी रेड जोन में दी गई है। निर्माण कार्य वाले श्रमिक जो साइट पर हैं, निजी दफ्तरों में 33 प्रतिशत कर्मचारी, ई कॉमर्स को भी रियायत दी गई है। वहीं, लॉक डाउन-3 के दौरान पान, गुटखा और तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पर लगा प्रतिबंध जारी रहेगा। राज्य सरकार के आदेशानुसार, शराब की दुकानों को सुनिश्चित करना होगा कि एक बार में पांच से ज्यादा व्यक्ति दुकान पर ना आए दो गज दूरी रखे रहें। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार गृहमंत्रालय द्वारा स्वीकृत किए गए लोगों के अलावा अन्य के लिये हवाई, रेल, अंतर्राज्यीय आवागमन पर प्रतिबंध जारी रहेगा।


मध्यप्रदेश में ऑरेंज जोन के भी उन्हीं इलाकों में रियायतें मिलेंगी जहां संक्रमण कम है। गली-मोहल्ले की दुकानें कुछ घंटों के लिए खुलेंगी, ट्रांसपोर्ट सेवाओं के लिए भी सीमित अनुमति होगी। ग्रीन जोन वाले क्षेत्रों में छोटे उद्योग शुरू होंगे। मध्य प्रदेश के 9 जिलों को रेड और 19 जिलों को ऑरेंज जोन में रखा गया है।

 
महाराष्ट्र में मॉल और प्लाजा में दुकानों को खोलने की इजाजत नहीं :

महाराष्ट्र में रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन में दुकानों को खोलने के निर्देश दिए गए हैं। कंटेनमेंट या हॉटस्पॉट जोन में दुकानें नहीं खुलेंगी। एमएमआर और पीएमआर क्षेत्रों में दुकानों कुछ शर्तों के साथ खोली जाएंगी। स्टैंड अलोन शॉप को ही खोलने की अनुमति दी जाएगी। मॉल और प्लाजा में दुकानों को खोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। केवल गैर-जरूरी कमोडिटीज की 5 दुकानें ही हर लेन में खुली रहेंगी। जरूरी दुकानों के लिए संख्या नहीं निर्धारित की गई है। शराब की दुकानें खुली रहेंगी लेकिन उन्हीं दुकानों को खोलने की इजाजत दी जाएगी, जो किसी भी मॉल और रेस्त्रां का हिस्सा नहीं होंगी। सैलून पर पाबंदी लागू रहेगी।

पूरे देश में लागू रहेंगे ये प्रतिबंध :

हवाई, रेल, मेट्रो यात्रा और सड़क मार्ग से अंतरराज्यीय आवागमन पर हर जोन में प्रतिबंध रहेगा। स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान, प्रशिक्षण व कोचिंग संस्थान को खुलने की अनुमति नहीं दी गई है। होटल और रेस्टोरेंट सहित अन्य आतिथ्य सत्कार सेवाओं पर भी हर जोन में प्रतिबंध जारी रहेगा। सार्वजनिक रूप से एकत्र होने के स्थान जैसे- जिम, थिएटर, मॉल, सिनेमा हॉल, बार आदि बंद रहेंगे। धार्मिक, सामाजिक तथा राजनीतिक सभाएं करने की अनुमति नहीं होंगी। सभी जोन में 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और 10 साल से कम उम्र के बच्चे आवश्यक और स्वास्थ्य कारणों को छोड़ कर घरों के अंदर ही रहेंगे।
निषिद्ध क्षेत्रों (कंटेनमेंट जोन) में लोगों की आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी और आवश्यक सेवाएं उनके घर पर ही उपलब्ध कराई जाएंगी। बता दें कि रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन का वर्गीकरण कोविड-19 के खतरे के आधार पर किया गया है। अगर किसी जिले में अभी तक या पिछले 21 दिनों में कोविड-19 का कोई मामला सामने नहीं आया है तो उसे ग्रीन जोन कहा जाता है। वहीं, जहां कोरोना संक्रमण की रफ्तार बहुत तेज होगी या बड़ी संख्या में मामले सामने आए होंगे उसे रेड जोन माना जाता है। जिन जिलों में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी होगी उसे ऑरेंज जोन माना जाता है।

28-04-2020
वर्दी की आड़ में शराब तस्करी करते एक सब इंस्पेक्टर समेत 4 लोग चढ़े पुलिस के हत्थे

कांकेर। कोरोना वैश्विक महामारी के कारण छत्तीसगढ़ में भी शराबबंदी लागू की गई है, जिनके लिए पुलिस जवान अपनी जान जोखिम में डाल लोगों नियमों का पालन करना सीखा रहे है। तो वहीं कुछ वर्दीधारी पुलिस की वर्दी को दागदार करने में लगे है। ऐसा ही ताजा मामला कांकेर जिले के चारामा थाना क्षेत्र में सामने आया है। बीती रात एक सब इंस्पेक्टर अपने तीन साथियों के साथ अवैध रूप से शराब परिवहन करते गिरफ्तार किया गया है। पूरा मामला चारामा थाना क्षेत्र का है दरअसल चारामा पुलिस को सूचना मिली थी कि माचांदुर गांव के पास दुर्ग के पाटन थाना में पदस्थ एक सब इंस्पेक्टर देवानंद पटेल 55 लीटर देशी महुआ शराब अपने तीन सहयोगियों के साथ स्विफ्ट डिजायर कार में अवैध शराब लेकर जा रहे हैं। पुलिस ने सूचना मिलते ही माचांदुर गांव के नाका के पास घेराबंदी की और स्विफ्ट डिजायर वाहन क्रमांक सी जी 07 बी एच 0697 में जांच के बाद 55 लीटर शराब पाया गया पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों देवानंद पटेल सब इंस्पेक्टर, पप्पू लहरे, सुरेश बंछोर, बल्लभ को चारामा थाना ले आई जहां विवेचना के बाद चारों आरोपियों के ऊपर आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कर आगे की कार्रवाई कर रही है।

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