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10-06-2021
सब्सिडी के बावज़ूद डीएपी खाद 18-19 सौ रुपए में बेचना अन्यायपूर्ण :साय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ से प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों को वंचित रख रही है। धान के समर्थन मूल्य में केंद्र सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी के बाद साय ने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र द्वारा समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि का लाभ सीधे किसानों को नहीं दिया जाना अन्यायपूर्ण है। इसी प्रकार केंद्र द्वारा सब्सिडी देने की घोषणा के बावज़ूद प्रदेश के किसानों को डीएपी खाद 12सौ के बजाय 18-19 सौ रुपए में दी जा रही है। प्रदेश सरकार अपने इन किसान और जनविरोधी कृत्यों की क़ीमत चुकाने के लिए तैयार रहे।


साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 25सौ रुपए प्रति क्विंटल धान ख़रीदने का वादा किया था। केंद्र सरकार ने इस बीच तीन बार कृषि उपजों के समर्थन मूल्य में सम्मानपूर्ण बढ़ोतरी करके किसानों के हितों की चिंता की लेकिन प्रदेश सरकार इस बढ़े हुए समर्थन मूल्य की राशि को 25सौ रुपए में समाहित कर अपनी ओर से दी जाने वाली अतिरिक्त राशि में लगातार कटौती कर रही है, जिससे किसानों को बढ़े समर्थन मूल्य का सीधा लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ क़दम-क़दम पर छलावा कर रही प्रदेश सरकार एक ओर जहाँ अपने घोषित धान मूल्य का एकमुश्त भुगतान करने में हाँफ रही है, वहीं केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभ से भी किसानों को वंचित कर रही है। पिछले सत्रों में केंद्र सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में 200 रुपए की वृद्धि की है। साय ने मांग की कि अब प्रदेश सरकार आनुपातिक रूप से अगली फ़सल के लिए धान की क़ीमत 27 सौ रुपए प्रति क्विंटल कर उसके एकमुश्त भुगतान की घोषणा करे। इसी प्रकार अन्य फ़सलों की क़ीमतें बढ़ाई जाएँ।

साय ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की चिंता करके डीएपी खाद पर सब्सिडी की घोषणा की, जिसे लेकर कांग्रेस व प्रदेश सरकार के लोग अपने मुँह मियाँ मिठ्ठू बनकर वृथा गाल बजा रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को 12 सौ के बजाय 18-19 सौ रुपए में खाद दे रही है। समिति प्रबंधकों द्वारा किसानों को सब्सिडी का लाभ नहीं देकर सीधे-सीधे लूटा जाना और प्रदेश सरकार का इस पर चुप्पी साधे रहना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार द्वारा किसानों को डीएपी पर दी गई सब्सिडी के लाभ से प्रदेश सरकार के इशारों पर वंचित रखने का शर्मनाक कृत्य किया जा रहा है।

20-05-2021
खाद पर सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किसान हितैषी, बृजमोहन ने केन्द्र सरकार का माना आभार 

रायपुर। पूर्व कृषि मंत्री व भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने केन्द्र सरकार की ओर से प्रति बोरी सब्सिडी 1200 रुपए किए जाने के ऐलान का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि संकट के समय डीएपी खाद पर सब्सिडी 140 प्रतिशत बढ़ाई गई, जो किसान हितैषी और ऐतिहासिक फैसला है। इस फैसले से किसानों को डीएपी पर 500 रुपए प्रति बोरी से बढ़कर अब 1200 रुपए प्रति बोरी की सब्सिडी मिलेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को डीएपी का एक बैग 2400 रुपए के बजाय अब 1200 रुपए में मिलेगा। केन्द्र सरकार के इस फैसले से सब्सिडी पर 14,775 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हर साल रासायनिक खादों पर सब्सिडी पर करीब 80,000 करोड़ रुपए खर्च करती है। डीएपी में सब्सिडी बढ़ाने के साथ ही खरीफ सीजन में केन्द्र सरकार करीब 14,775 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करेगी। पूर्व मंत्री अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि किसानों का कल्याण केन्द्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में हैं। किसानों के हित से समाज के हर वर्ग का हित संभव है, इसलिए किसानों की प्रगति को राष्ट्र के प्रगति का सूत्रपात हमेशा माना गया है।

01-03-2021
फिर महंगा हुआ घरेलू गैस सिलिंडर, जाने कितना बढ़ा रेट

नई दिल्ली। दिल्ली में एक बार फिर सब्सिडी घरेलू गैस सिलिंडर के दाम ने आसमान छू लिया है। सोमवार से घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की कीमत में 25 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। अब 14.2 किलोग्राम के सिलिंडर की कीमत 794-819 रुपए हो गई है। इससे पहले 25 फरवरी को एलपीजी सिलिंडर की कीमत में 25 रुपए बढ़ाया गया था। कोलकाता में सब्सिडी और कमर्शियल दोनों ही गैस सिलिंडर की कीमत बढ़ गई है। सब्सिडी वाले गैस सिलिंडर की कीमत में 25 रुपए की बढ़ोतरी के बाद अब नई कीमत 845.50 रुपए हो गई है, जबकि कमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में 19 रुपए की बढ़ोतरी हुई है।

15-02-2021
एलपीजी गैस की कीमत 50 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ी

नई दिल्ली/रायपुर। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत 50 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई है। आज से दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 769 रुपए प्रति सिलेंडर होगी। अब राजधानी दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले गैस की कीमत 769 रुपए है। बता दें कि पिछले साल दिसंबर से लेकर अब तक सिलेंडर के दाम में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इससे पहले 4 फरवरी को भी नॉन सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर के दाम 694 रुपए से बढ़ाकर 719 रुपए कर दिए गए थे। एक तरफ पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम लोगों की जेबों पर भारी पड़ रहे हैं तो अब एलपीजी की कीमतों ने और बोझ बढ़ा दिया है।

01-02-2021
आम बजट जो आम आदमी का बजट कहलाता है लेकिन जिसे न आम आदमी देखता है और न सुनता है वह आम होता ही नहीं है

दिल्ली/रायपुर। मोदी सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज आम बजट पेश करने जा रही हैं। आमतौर पर कहा जाता है कि सारे देश की नजर आम बजट पर रहती है। इसमें कोई शक नहीं आम बजट पर उद्योगपतियों की व्यापारियों की मध्यम वर्ग की टैक्स देने वाले लोगों की सबकी नजर जरूर रहती है लेकिन देश का एक बहुत बड़ा तबका जो गरीबी रेखा के नीचे रहता है उसे इस बजट से कोई लेना-देना नहीं रहता। कहने को यह बजट उनके उत्थान के लिए बनाया जाता है। उनके लिए बहुत सारी योजनाएं होती है। लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी आम बजट से आम आदमी को कभी कोई राहत मिलती दिखती नहीं है।

आम आदमी यानी जो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाला आम आदमी है वह वही का वही है। उसकी आर्थिक कभी-कभी नहीं सुधरी है। गरीब का गरीब ही है। सब्सिडी पर जी रहा है और सब्सिडी पर ही जीता ही रहेगा। हालांकि हाल के सालों में उनका जीवन स्तर सुधारने की सरकार ने बहुत सारी योजनाएं बनाई कच्चे मकानों की जगह बने पक्के मकान रहने को मिल गए। लेकिन आज भी वह गरीब का गरीब ही है। जिस दिन आम आदमी गरीबी रेखा से ऊपर आने लगेगा। जिस दिन गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या कम होने लगेगी। जिस दिन गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग नहीं रहेंगे। तब लगेगा सारा देश आम बजट को देख रहा है और आम बजट सारे देश के लिए हौ हर आदमी के लिए है आम आदमी के लिए है।

15-12-2020
15 दिन में दूसरी बार हुई एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमत में बढ़ोत्तरी

नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। एलपीजी गैस सिलेंडरों की कीमतों में 50 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 694 रुपये हो गई है। 15 दिनों के भीतर यह दूसरी बार गैस सिलेंडरों की कीमतों को बढ़ाया गया है। इससे पहले तेल कंपनियों ने 3 दिसंबर को गैस सिलेंडर के भाव में 50 रुपये का इजाफा किया था।
महज 15 दिनों में एलपीजी गैस सिलेंडरों के दाम 100 रुपये बढ़ गए है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 694 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है। पहले इसकी कीमत 644 रुपये प्रति सिलेंडर थी। सिलेंडरों के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर असर पड़ने वाला है। रसोई गैस सिलेंडर की कीमत चेक करने के लिए आपको सरकारी तेल कंपनी की वेबसाइट पर जाना होगा। यहां पर कंपनियां हर महीने नए रेट्स जारी करती हैं।

 

12-11-2020
वित्त मंत्री ने किया प्रोत्साहन पैकेज का ऐलान, नया रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों को सब्सिडी देगी केंद्र सरकार

नई दिल्ली। कोरोना काल में बेपटरी हुई अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए दिवाली से पहले मोदी सरकार ने प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आत्मनिर्भर भारत 3.0 के तहत नई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का ऐलान किया।वित्त मंत्री ने कहा कि जिस संस्था में 1,000 या उससे कम कर्मचारी हैं उसमें कर्मचारी के हिस्से का 12 प्रतिशत और काम देने वाले के भी भत्ते का 12 प्रतिशत का केंद्र सरकार योगदान देगी। जहां 1,000 से ज़्यादा कर्मचारी हैं वहां केवल कर्मचारियों का केंद्र सरकार 12 प्रतिशत योगदान देगी। ये अगले दो वर्ष तक लागू रहेगा।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना की घोषणा की। केंद्र सरकार नया रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों को सब्सिडी देगी, इसके तहत नई भर्ती के लिए दो साल तक सरकार की ओर से भविषय निधि कोष में योगदान दिया जाएगा।
वित्त मंत्री ने दो करोड़ रुपये तक की आवासीय इकाइयों की पहली बार की बिक्री के लिए सर्कल रेट और समझौता मूल्य के बीच के अंतर को दोगुना तक रखे जाने की घोषणा की। सीतारमण ने किसानों के लिए 65,000 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी की घोषणा की।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को नई रोजगार सृजन योजना की घोषणा की, जिसके तहत नई भर्तियां करने वाले प्रतिष्ठानों को सब्सिडी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सब्सिडी के तहत दो साल के लिए सेवानिवृत्ति निधि में कर्मचारियों के साथ ही नियोक्ताओं के योगदान को भी शामिल किया जाएगा।उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का योगदान (वेतन का 12 प्रतिशत) और नियोक्ता का योगदान (वेतन का 12 प्रतिशत), इस तरह कुल वेतन का 24 प्रतिशत हिस्सा अगले दो वर्षों के लिए नई भर्तियां करने वाले प्रतिष्ठानों को दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत प्रतिष्ठानों को नए कर्मचारियों की भर्ती पर यह सब्सिडी मिलेगी। वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत 15,000 रुपये से कम मासिक वेतन पाने वाले नए कर्मचारी को गिना जाएगा।उन्होंने बताया कि इसमें 15,000 से कम वेतन पाने वाले ऐसे कर्मचारी भी शामिल होंगे, जिन्हें कोविड-19 महामारी के दौरान नौकरी से निकाल दिया गया था और वे एक अक्टूबर 2020 को या उसके बाद दोबारा जुड़े हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए अधिकतम 50 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कम से कम दो नई कर्मचारियों को भर्ती करना होगा, जबकि जिन प्रतिष्ठानों में 50 से अधिक कर्मचारी हैं, उन्हें कम से कम पांच नई भर्ती करनी होगी।सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि एक लंबे और कड़े लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत में जोरदार सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कुछ और प्रोत्साहनों की घोषणा करने के लिए आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि व्यापक आर्थिक संकेतक हालात में सुधार की ओर इशारा कर रहे हैं। सीतारमण कहा कि देश मे कोविड-19 के सक्रिय मामले एक समय 10 लाख से अधिक थे, जबकि अब ये मामले घटकर 4.89 लाख रह गए हैं और मृत्यु दर घटकर 1.47 प्रतिशत पर आ गयी है।अर्थव्यवस्था में सुधार का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि कंपनियों के कारोबार की गति का संकेत देने वाला कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में बढ़कर 58.9 रहा, जो इससे पिछले महीने में 54.6 था। उन्होंने कहा कि अक्टूबर के दौरान ऊर्जा खपत में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह 10 प्रतिशत बढ़कर 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वित्त मंत्री ने कहा कि दैनिक रेलवे माल ढुलाई में औसतन 20 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है।उन्होंने आगे कहा कि बैंक ऋण में भी 5.1 प्रतिशत का सुधार हुआ है। इससे पहले सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के इरादे से बुधवार को 10 और क्षेत्रों के लिये दो लाख करोड़ रुपये मूल्य की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दे दी थी। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का लाभ रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन जैसे उत्पादों, औषधि, विशेष प्रकार के इस्पात, वाहन, दूरसंचार, कपड़ा, खाद्य उत्पादों, सौर फोटोवोल्टिक और मोबाइल फोन बैटरी जैसे उद्योगों में निवेशकों को मिलेगा।

 

04-11-2020
स्पंज-आयरन और स्टील क्षेत्र में विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा 

रायपुर। प्रदेश सरकार की ओर से लिए गए दूरदर्शितापूर्ण निर्णयों से कोरोना संकट काल में भी प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिली है। प्रदेश सरकार की नई औद्योगिक नीति के तहत अब इस्पात (स्पंज आयरन एण्ड स्टील) क्षेत्र के मेगा अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट में निवेश के लिए विशेष निवेश प्रोत्साहन पैकेज देने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से मेगा निवेशकों के लिए घोषित किए गए पैकेज में अधितम 500 करोड़ रुपए तक का निवेश प्रोत्साहन (बस्तर संभाग के लिए 1000 करोड़ तक) मान्य होगा। इसके लिए प्रस्तावित इकाईयों को 31 अक्टूबर 2024 को अथवा उसके पूर्व व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ करना जरूरी होगा। इसी तरह 100 करोड़ रुपए का स्थाई पूंजी निवेश मद में निवेश कर व्यावसायिक उत्पादन आरंभ करने वाली नवीन इकाईयों को आर्थिक निवेश प्रोत्साहन दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने कोर सेक्टर के उद्योगों को पूरे राज्य में विद्युत शुल्क छूट की पात्रता भी प्रदान की गई। बिजली में सब्सिडी मिलने से इस्पात सहित कोर सेक्टर के उद्योगों को नई संजीवनी मिली है। इससे इन कोर सेक्टर के उद्योगों को देश भर के मार्केट का लाभ मिलेगा। स्पंज आयरन एवं स्टील सेक्टर के उद्योगों के लिए बी-स्पोक पॉलिसी के तहत विशेष पैकेज घोषित करते हुए, क्षेत्रवार छूट की सीमा 60 प्रतिशत से 150 प्रतिशत तक कर दी गई है। लॉक डाउन की अवधि में राज्य की ओर से 27 लाख टन का स्टील उत्पादन किया गया, जो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक उत्पादन है।

08-06-2020
विद्युत संशोधन बिल से राज्य के अधिकारों का होगा हनन, केंद्र करें विचार-विमर्श : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार की ओर से प्रस्तावित विद्युत संशोधन बिल 2020 को समाज के गरीब तबको और किसानों के लिए अहितकारी बताया है। उन्होंने इस संबंध में केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह को पत्र लिखकर देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस संशोधन बिल को फिलहाल स्थगित रखने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए संशोधन बिल को लागू करने से पूर्व सभी राज्य सरकारों से विचार-विमर्श करने कहा है। बघेल ने पत्र में कहा है कि इस संशोधन बिल में क्रास सब्सिडी का प्रावधान किसानों और गरीबों के हित में नहीं है। समाज के गरीब तबके के लोगों और किसानों को विद्युत सब्सिडी दिए जाने का वर्तमान प्रावधान जांचा परखा और समय की जरूरत के अनुरूप है।

किसानों को विद्युत पर दी जाने वाली सब्सिडी यदि जारी नहीं रखी गई तो किसानों के समक्ष फसलों की सिंचाई को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा और देश के समक्ष संकट खड़ा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों और मजदूरों की मेहनत का सम्मान होना चाहिए। इन्होंने अपनी मेहनत से देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। समाज के गरीब वर्ग के लोगों और किसानों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए उन्हें रियायत दिया जाना जरूरी है। भूपेश बघेल ने कहा है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर सिस्टम जो वर्तमान में लागू है, वह सही है। इसमें बदलाव करने से समाज के गरीब तबके के लोग और लघु और नसीमांत कृषक लाभ से वंचित हो जाएंगे। खेती-किसानी के सीजन में प्रति माह फसलों की सिंचाई के लिए यदि कोई किसान एक हजार यूनिट विद्युत की खपत करता है तो उसे सात से आठ हजार रुपए के बिल का भुगतान करना होगा, जो उसके लिए बेहद कष्टकारी और असंभव होगा। यह संशोधन बिल वातानुकूलित कमरों में बैठ कर तैयार करने वाले उच्च वर्ग के लोगों और सलाहकारों के अनुकूल हो सकता है लेकिन यह जमीन सच्चाई से बिलकुल परे है। इस संशोधन बिल को लागू करने से देश के समक्ष कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होगी।

इससे गरीब, किसान और विद्युत कम्पनियों और आम लोगों को नुकसान होगा। रियायती दर पर किसानों को बिजली न मिलने से फसल सिंचाई प्रभावित होगी। खाद्यान्न उत्पादकता घटेगी जिसके चलते देश के समक्ष खाद्यान्न का संकट पैदा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन बिल के माध्यम से राज्य सरकारों के अधिकारों की कटौती और राज्य विद्युत नियामक आयोग की नियुक्तियों के अधिकारों को केन्द्र सरकार के अधीन किया जाना संघीय ढांचे की व्यवस्था के विपरीत है। यह बिल राज्य विद्युत नियामक आयोग के गठन के संबंध में राज्यों को सिर्फ सलाह देने का प्रावधान देता है। नियुक्ति के संबंध में राज्य की सहमति आवश्यक नहीं है। यह प्रावधान राज्य सरकार की शक्तियों का स्पष्ट अतिक्रमण है। 

विद्युत संशोधन बिल 2020 में विद्युत के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सब लाइसेंसी और फ्रेन्चाईजी की नियुक्ति का भी प्रावधान है। यह प्रावधान चेक और बेलेन्स की नीति के विरुद्ध है, क्योंकि नियामक आयोग से लाईसेंस लेने के लिए सब लाईसेंसी और फ्रेंचाईजी बाध्य नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट है कि यह अधिकार और कर्तव्य के सिद्धांत के भी विपरीत है। मुख्यमंत्री बघेल ने विद्युत वितरण प्रणाली को आम जनता की जीवन रेखा बताते हुए कहा है कि इसे निजी कम्पनियों का सौंपा जाना किसी भी मामले में उचित नहीं होगा। यह संशोधन विधेयक पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला और निजी कम्पनियों को इलेट्रिसिटी बोर्ड को कब्जा दिलाने वाला है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह संशोधन बिल केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) के गठन का प्रस्ताव करता है। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील के संबंध में दिए गए निर्णय का भी विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन पूरे देश में किया जा चुका है।

उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) का गठन औचित्यहीन है। यदि ऐसा किया जाता है तो राज्य विद्युत नियामक आयोग अधिकार विहीन हो जाएंगे। यह संशोधन केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) के गठन का प्रस्ताव करता है। विद्युत नियामक विद्युत खरीदने के लिए अनुबंध की मंजूरी और होने वाले विवाद के समाधान के लिए पूरी तरह से सक्षम हैं। प्रस्तावित संशोधन केंद्र सरकार को नवीकरणीय और पनबिजली खरीद दायित्व को संरक्षित करने के लिए भी शक्ति प्रदान करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संसाधन हैं। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि इसे देखते हुए पूरे देश के लिए इसको लागू किया जाना उचित नहीं होगा।

16-05-2020
आज आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त होगा ऐलान, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शाम 4 बजे करेंगी प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी शनिवार को चौथी बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आर्थिक पैकेज के बारे में विवरण देंगी। बता दें कि शाम चार बजे आर्थिक पैकेज से जुड़ी डिटेल को लेकर वित्त मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। यह लगातार चौथा दिन है जब निर्मला सीतारमण मीडिया से मुखातिब होंगी। वित्त मंत्री पहले ही 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की तीन किस्तों का ऐलान कर चुकी हैं। आज इसी क्रम में चौथी किस्त का ऐलान होगा। हर दिन किसी न किसी सेक्‍टर के लिए कुछ खास ऐलान किए जा रहे हैं।

जानें तीसरी किस्त में वित्त मंत्री ने क्या ऐलान किया था :

1. लॉक डाउन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद के लिए 74,300 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। पीएम किसान फंड के तरह 18,700 करोड़ रुपए पिछले दो महीने में किसानों के खाते में डाले गए हैं। 

2. लॉक डाउन के दौरान दूध की मांग में 20-25 फीसदी की कमी आई। प्रतिदिन खपत 360 लाख लीटर की जगह हमने 560 लाख लीटर दूध खरीदा। इस योजना से किसानों को लाभ मिला। उन्हें दो फीसदी अनुदान दिया गया। दो करोड़ किसानों को ब्याज सब्सिडी के तहत 5 हजार करोड़ रुपए का लाभ मिला है।

3. मत्स्य पालन के क्षेत्र में कोविड-19 की सभी चार घोषणाओं को लागू किया गया। दो महीने मे 242 नई श्रिंप हैचरी (मछली के अंडों की उत्पत्तिशाला) को अनुमति दी गई।

4. कृषि आधारभूत ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपये की योजना लाई जा रही है। इसके तहत कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे जिससे भंडारण क्षमता बढ़ेगी। किसानों की भी आमदनी बढ़ेगी। इसका लाभ किसान संघों, उद्यमियों और स्टार्ट अप को मिलेगा। 

5. दो लाख सूक्ष्म इकाइयों को मदद पहुंचाने की योजना। तकनीक में सुधार और मार्केटिंग से लाभ पहुंचाया जाएगा। इसके लिए 10 हजार करोड़ रुपए की योजना लाई जा रही है। इससे रोजगार और आय के साधन बढ़ेंगे। क्लस्टर के माध्यम से तकनीक व ब्रांडिंग बढ़ाने की योजना है। जिस तरह से बिहार में मखाना है, यूपी में आम है, कर्नाटक में रागी है, तेलंगाना में हल्दी है, कश्मीर में केसर है, नॉर्थ ईस्ट में बांस व हर्बल प्रोडक्ट है, लोकल से ग्लोबल नीति के तहत इन्हें बढ़ावा दिया जाएगा।

6.प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए 20 हजार करोड़ की योजना लाई जा रही है। 11 हजार करोड़ रुपए समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के लिए दिया जाएगा। 9 हजार इसके आधारभूत ढांचे के विकास के लिए किया जाएगा। योजना से 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

7.53 करोड़ मवेशियों के टीकाकरण की योजना। मवेशियों में मुंह पका खुर पका बीमारी (फुट एंड माउथ) से निपटने के लिए 13,343 करोड़ रुपए की योजना लाई गई है। इसके तहत 53 करोड़ गायों, भैंसों, सूअर, बकरी, भेड़ का 100 फीसदी टीकाकरण किया जाएगा। अभी तक 1.5 करोड़ गाय व भैंसों का टीकाकरण हुआ है। 

बता दें कि केंद्र के नरेंद्र मोदी सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से किए गए लॉक डाउन से जूझती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। आर्थिक पैकेज की पहली किस्त का ऐलान बुधवार को हुआ था। निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वो कुछ दिनों यानी रोज मीडिया के सामने आएंगी और विस्तार से आर्थिक पैकेज की जानकारी देंगी। कल (शुक्रवार) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीसरी किस्त का ऐलान किया था। इसमें उन्होंने किसानों और ग्रामीण भारत के लिए दी गई राहतों के बारे में विस्तार से बताया। सरकार ने कृषि के आधारभूत ढांचे के लिए एक लाख करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है।

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