GLIBS
10-09-2020
प्राकृतिक आपदा दुर्घटनाओं से पीड़ित परिवारों के लिए 4-4 लाख की आर्थिक सहायता राशि मंज़ूर

रायपुर। प्राकृतिक आपदाओं-दुर्घटनाओं के कारण पीड़ित परिवार के सदस्य को सहायता राशि कलेक्टर अभिजीत सिंह की ओर से स्वीकृत स्वीकृत की गई है। कलेक्टर के माध्यम से आपदा पीड़ितों को आर्थिक सहायता मंजूर की जाती है। ऐसे ही प्रकरणों में नारायणपुर जिले के विकासखंड के ग्राम मरकाबेड़ा निवासी प्रतिभा पिता लच्छू मंडावी और ग्राम माहका के धनाजी की मृत्यु सर्प के काटने के कारण हुई थी। मृतकों के पीड़ित परिजनों को 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि मंजूर की है। इसी प्रकार ग्राम झारा निवासी सोमारी पति रामूराम,पनकी पति  पनकू और कुमारी उर्मिता पिता मोतीराम की मृत्यु पानी में डूबने के कारण हुई थी। मृतकों के पीड़ित परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

 

12-08-2020
छत्तीसगढ़ के लिए एक राजनीतिक आपदा की तरह है कांग्रेस सरकार : विष्णुदेव साय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को हर मोर्चे पर बुरी तरह विफल बताया है। साय ने कहा कि प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के लिए एक राजनीतिक आपदा से जरा भी कम नहीं है। कर्ज के बोझ से प्रदेश दबा जा रहा है, कानून-व्यवस्था सरेआम दम तोड़ रही है, कोरोना का संक्रमण विस्फोटक हो चला है और लोग अब क्वारेंटाइन सेंटर्स ही नहीं, इलाज के दौरान कोविड अस्पतालों में आत्महत्या करने के लिए विवश हो रहे हैं और शराब के गोरखधंधे में भी गबन होना प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। इन सबके बावजूद, राज्य सरकार और कांग्रेस को अपनी विफलताओं पर जरा भी कोफ़्त नहीं होना बेहद शर्मनाक है।


साय ने कहा कि कर्ज पर कर्ज लेकर प्रदेश सरकार राज्य को कंगाली की अंधी सुरंग में धकेल रही है। 18 महीनों में ही रिकॉर्ड तोड़ कर्ज लेकर राज्य सरकार ने यहाँ के अर्थतंत्र को पस्त कर दिया है। कर्ज लेकर राज्य सरकार जिन योजनाओं को लागू करने का ढोंग रच रही है, वे योजनाएँ भी इक साल में ही दम तोड़ रही हैं। किसानों के पिछले खरीफ सत्र के धान-मूल्य की अंतर राशि की दूसरी किश्त देने तक के लिए सरकार के खजाने में पैसे नहीं हैं, जब अंतर राशि के भुगतान के लिए कर्ज लिया ही तो सरकार अब किसानों की शेष अंतर राशि का किश्तों के बजाय एकमुश्त भुगतान करे। दूसरी तरफ चालू खरीफ सत्र की धान खरीदी के लिए पंजीयन की प्रक्रिया सरकार शुरू करने जा रही है। पिछला भुगतान नहीं कर पाने वाली सरकार अगली खरीदी के लिए राशि कहाँ से जुटा पाएगी, यह भी साफ नहीं है। साय ने कटाक्ष किया कि दम तोड़तीं नरवा-गरुवा-घुरवा-बारी, गौठान, रोका-छेका, गौ-धन न्याय योजना, लाउड स्पीकर से पढ़ाई जैसी तमाम योजनाओं के लिए तो सरकार के पास न तो फंडिंग का स्रोत दिख रहा है, न ही सरकार इन योजनाओं के लिए आर्थिक प्रावधान को लेकर गंभीर नजर आ रही है।

 

18-06-2020
नरेंद्र मोदी ने कहा, आपदा पर आंसू बहाना भारत की फितरत नहीं,कोरोना काल को भी बनाएंगे अवसर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निजी क्षेत्र के लिए 41 कोयला खदानों की नीलामी की प्रक्रिया की शुरुआत की। अपने संबोधन में उन्होंने एक बार फिर कहा कि भारत की आपदा पर आंसू बहाने की फितरत नहीं है, हम इस संकट को अवसर में बदलेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कोरोना से लड़ेगा और इससे आगे भी बढ़ेगा। इस संकट ने भारत को आत्मनिर्भर होने की सीख दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत आयात पर अपनी निर्भरता को कम करेगा। आत्मनिर्भर यानि भारत आयात खर्च पर होने वाली लाखों करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा को बचाएगा। आत्मनिर्भर भारत यानि की भारत को आयात न करना पड़े। इसके लिए देश में ही साधन और संसाधन विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज ऊर्जा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है।

महीने भर के अंदर हर घोषणा, हर रिफॉर्म्स, चाहे वो कृषि क्षेत्र में हो, चाहे सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग क्षेत्र में हो या फिर अब कोयला और खनन के सेक्टर में हो, तेजी से जमीन पर उतर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये दिखाता है कि भारत इस वैश्विक आपदा को अवसर में बदलने के लिए कितना गंभीर है। भारत की आपदा पर आंसू बहाने की फितरत नहीं है। आज हम केवल निजी क्षेत्रों के लिए कोयला खदानों की नीलामी की शुरुआत नहीं कर रहे हैं बल्कि कोयला क्षेत्र को लॉकडाउन से भी बाहर निकाल रहे हैं।  प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मजबूत खनन और खनिज क्षेत्र के बिना भारत का आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं है क्योंकि खनिज और खनन हमारी अर्थव्यवस्था के मजबूत खंभे हैं। देश में 16 जिले ऐसे हैं जहां कोयले के बड़े-बड़े भंडार हैं। इनका लाभ वहां के लोगों को उतना नहीं हुआ, जितना कि उन्हें होना चाहिए था।

30-05-2020
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- हम विजयी होंगे, हमारा वर्तमान और भविष्य कोई आपदा तय नहीं कर सकती

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम एक पत्र लिखा है। प्रधानमंत्री ने लिखा कि अगर स्थिति सामान्य होती तो वो लोगों के बीच आकर इस बारे में बात करते, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के पैदा स्थितियों में वो पत्र के माध्यम से बात कर रहे हैं। इस पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने जनता को धन्यवाद कहते हुए देश के लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति को पूरे विश्व के लिए मिसाल बताया। उन्होंने इस पत्र में पिछले एक साल की सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करने के साथ-साथ कई बातें कही हैं। इस पत्र में उन्होंने जहां एक ओर भाजपा के पहले कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाईं तो दूसरी ओर कोरोना वायरस के चलते लगातार गिरती जा रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का खाका भी सामने रखा। पढ़िए उनका पत्र उन्हीं की भाषा में...

प्रधानमंत्री का पत्र :

आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने जिम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का।

 यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियां बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूं। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाशीष और सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा और प्रेरणा दी है। इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज पूरे विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

2014 में देश ने परिवर्तन के लिए वोट दिया था- प्रधानमंत्री :

वर्ष 2014 में देश की जनता ने देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पांच सालों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है। उन पांच सालों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए सरकारी व्यवस्था को परिवर्तित होते देखा है। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। उस कार्यकाल में जहां विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर,  शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई। उस कार्यकाल में जहां सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स (जीएसटी), किसानों की एमएसपी (अधिकतम समर्थन मूल्य) की बरसों पुरानी मांगों को भी पूरा करने का काम किया।

पत्र में गिनाई पहले कार्यकाल की उपलब्धियां :

साल 2019 में देश की जनता का आशीर्वाद देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था। इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान हैं। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए निरंतर निर्णय लेकर कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रिय स्नेहीजन 

बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है। राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियां आप सभी को स्मरण हैं।एक के बाद एक हुए इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहां सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस दौरान गरीबों को, किसानों को, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है।

अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत नौ करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है। देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।

देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेतिहर मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद तीन हजार रुपये की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है। मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएं बढ़ाने और ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग सात करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है।

सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी बीते वर्ष में तेज गति से कार्य हुआ है। हमारी संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेजी से बन पाए हैं। सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गांवों के बीच की खाई कम हो रही है।पहली बार ऐसा हुआ है जब गांव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10 प्रतिशत ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए इस तरह के ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं। लेकिन मैं इतना अवश्य कहूंगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है,  संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं।

प्रिय स्नेहीजन,

देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत को भी घेर लिया। एक ओर जहां अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और विशाल अर्थव्यवस्था वाली विश्व की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी आबादी और अनेक चुनौतियों से घिरा हमारा भारत है। कई लोगों ने आशंका जताई थी कि जब कोरोना भारत पर हमला करेगा, तो भारत पूरी दुनिया के लिए संकट बन जाएगा।

लेकिन आज सभी देशवासियों ने भारत को देखने का नजरिया बदलकर रख दिया है। आपने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।

निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है। इनकी परेशानियां दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है। यह एक बड़ा कारण है कि भारत आज अन्य देशों की तुलना में ज्यादा संभली हुई स्थिति में है। ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहां के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

प्रिय स्नेहीजन, 

इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं। 

आज समय की मांग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है - आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्टअप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। 

भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा। 

प्रिय स्नेहीजन, 

बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है। देश के सामने चुनौतियां अनेक हैं, समस्याएं अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूं। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। और इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है। 

मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है। हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती। हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। 

हमारे यहां कहा गया है- ‘कृतम् मे दक्षिणे हस्ते, जयो मे सव्य आहितः’ यानी, हमारे एक हाथ में कर्म और कर्तव्य है तो दूसरे हाथ में सफलता सुनिश्चित है। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूं। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए। जागृत रहिए, जागरूक रखिए। 

आपका प्रधानसेवक

नरेंद्र मोदी

20-05-2020
आपदा में फंसे मजदूरों के छत्तीसगढ़ सकुशल पहुंचने पर भाजपा नेता जता रहे हमदर्दी : कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि भाजपा के 9 सांसद छत्तीसगढ़ के हितों-हकों और गरीबों, मजदूर किसानों प्रति वफादार नहीं रहे। संकटकालीन दौर में जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन नहीं कर पाए हैं? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की दूरदर्शिता समसामयिक निर्णय और ठोस नीति के बदौलत छत्तीसगढ़ को कोरोना महामारी को नियंत्रित रख पाने में सफलता मिली है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के प्रयास से दूसरे राज्यों में फंसे छत्तीसगढ़ के श्रमिकों की बसों,ट्रेनों  से सकुशल घर वापसी हो रही है। जब मजदूर आपदा में फंसे थे, तब भाजपा के सांसद विधायक और नेता  मौन थे आज छत्तीसगढ़ में मजदूरों की सकुशल वापसी हो रही है तो भाजपा के नेता झूठी हमदर्दी दिखाकर मजदूरों के नाम से राजनीति कर रहे हैं। आपदा में अवसर ढूंढने वाले भाजपा के नेता मजदूरों की मदद कर नहीं बल्कि झूठ फरेब के सहारे राजनीति करना चाह रहे हैं। धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के खिलाफ देशभर में भड़के जन आक्रोश मजदूरों की गहरी नाराजगी और कोरोना महामारी को नियंत्रित करने में असफलता से भाजपा को अपनी राजनीतिक धरातल खिसकते नजर आ रही है।

17-05-2020
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया ऐलान, मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की पांचवीं और आखिरी किस्त का ब्योरा दे रही हैं। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि आपदा को अवसर में बदलने की जरूरत है। उसी के मुताबिक ये आर्थिक पैकेज तैयार किया गया है। उन्होंने प्रोत्साहन पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करते हुए रविवार को बताया कि मनरेगा के लिए अतिरिक्त 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इससे गांव वापस जा रहे प्रवासी मजदूरों को काम मिल सकेगा। वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा 'मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन बढ़ाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में काम की कमी ना आए और आमदनी का साधन मिले, इसके लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में निर्मला सीतारमण ने कहा कि मजदूरों को घर ले जाने के लिए ट्रेनें चलाई गई हैं। मजदूरों को ट्रेनों से ले जाने का 85 फीसदी खर्च केंद्र सरकार ने वहन किया है। 15 फीसदी खर्च राज्य सरकारों ने किया है। श्रमिकों को ट्रेनों में खाना भी उपलब्ध कराया गया। आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए राशन की व्यवस्था की है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो माह में कोरोनावायरस से जंग में हेल्थ संबंधी कदमों में राज्यों में 4113 करोड़ रुपए जारी किए गए। जरूरी सामानों पर 3750 करोड़, टेस्टिंग लैब्स और किट्स के लिए 550 करोड़ रुपए की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 20 करोड़ महिला जनधन खाताधारकों के खातों में सीधी मदद भेजी गई। साथ ही निर्माण से जुड़े श्रमिकों के अकाउंट में भी सरकार ने पैसे डाले। जनधन के 20 करोड़ लोगों के खाते में पैसे भेजे गए। मजदूरों के लिए चलाए गए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में 85 फीसदी पैसे केंद्र सरकार दे रही है। उज्ज्वला योजना के तहत गरीबों को मुफ्त रसोई गैस सिलिंडर दिए गए।
 
जनस्वास्थ्य क्षेत्र के लिए घोषणा :

जनस्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा। इसके लिए रिफॉर्म्स किए जाएंगे। ग्रामीण स्तर पर ऐसी सुविधाएं देने की आवश्यकता है जो महामारी की स्थिति में लड़ने की क्षमता हो। इसके लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जाएगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में वेलनेस सेंटरों को बढ़ावा दिया जाए। सभी जिला स्तर के अस्पतालों में संक्रामक रोगों से लड़ने की व्यवस्था  की जाएगी। लैब नेटवर्क मजबूत किए जाएंगे। सभी जिलों में प्रखंडस्तर पर एकीकृत लैब बनाए जाएंगे।   

दिवालियापन के लिए सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपए :

जिस तरह एमएसएमई की परिभाषा बदलकर उनके लिए विस्तार का रास्ता खोला। उन पर दिवालियापन की कार्रवाई ना हो इसके लिए न्यूनतम सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ कर दिया गया है। इससे एमएसएमई सेक्टर को फायदा होगा। विशेष दिवालियापन रेज्यूलेशन फ्रेमवर्क को आईबीसी के 240 ए में जोड़ दिया जाएगा। एक साल तक दिवालियापन की कोई कार्रवाई शुरू नहीं होगी।

29-04-2020
ओलावृष्टि, बारिश से प्रभावितों को आर्थिक सहायता पहुंचाएंगे राजस्व अधिकारी

रायपुर। प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए प्रभावितों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के निर्देश राजस्व अधिकारियों को दिए हैं। मंत्री अग्रवाल ने रवि मौसम की बागवानी फसलों सहित अन्य फसलों, मकान, पशुहानि और जनहानि का आंकलन कर प्रभावितों को आरबीसी 6-4 के तहत आर्थिक अनुदान सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

20-04-2020
मंत्री भेंड़िया से केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ की स्थिति पर टेलीफोन पर की चर्चा

रायपुर। महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंड़िया से सोमवार को केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री देबश्री चौधुरी ने टेलीफोन कर छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की स्थिति और रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों के संबंध में चर्चा की। मंत्री भेंड़िया ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कोरोना संकट से निपटने सभी आवश्यक कदम समय पर उठाए गए हैं। इससे प्रदेश में संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने केन्द्रीय राज्य मंत्री से संकट की घड़ी में पूरे समर्पण के साथ दिन-रात काम कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए केन्द्र से प्रोत्साहन राशि देने की मांग रखी। प्रदेश में ओलावृष्टि से रबी फसल को हुए नुकसान को देखते हुए किसानों को भी केन्द्र से क्षतिपूर्ति राशि देने के लिए कहा। उन्होंने छत्तीसगढ़ में जरूरतमंदों की मदद और विकास के लिए केन्द्र से आर्थिक सहायता राशि देने की भी मांग रखी। मंत्री भेंड़िया ने देबश्री को बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन के दौरान सभी आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ियों बंद कर दिए गए हैं। इस दौरान महिलाओं और बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा गया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट और पूरक पोषण आहार का वितरण कर रही हैैं। लॉकडाउन के दौरान सभी 24.38 लाख हितग्राहियों को रेडी-टू-ईट और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत 3.34 लाख हितग्राहियों तक सूखा राशन पहुंचाया गया है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए निर्धारित मापदण्डों जैसे-समय-समय पर हाथ धोना, सोशल डिस्टेंसिंग, साफ-सफाई के बारे में भी बता रही हैं। बच्चों की देखभाल और शिक्षा संबंधी जानकारी वीडियो और कहानी, कविताओं के माध्यम दी जा रही है।केन्द्रीय राज्यमंत्री देबश्री के द्वारा मंत्री भेंड़िया से प्रदेश में किसानों की स्थिति की भी जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि असमय ओलावृष्टि और बारिश से रबी फसल को नुकसान पहुंचा है। इसके लिए किसानों को केन्द्र से क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने की मांग की है। वायुयान सेवा शुरू करने संबंधी राय लिए जाने पर उन्होंन कहा कि संक्रमण की स्थिति पूरे देश में नियंत्रण में आने पर ही अंतर्राष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय सीमाओं को खोला जाना चाहिए, जिससे एक राज्य से संक्रमण दूसरे राज्यों में न फैल सके।

 

13-04-2020
आपदा के समय सारा देश बना एक परिवार,जिले में अन्य राज्यों के लोगों का हो रहा सत्कार

कोण्डागांव। शास्त्रों मे ‘वसुधैव कुटुम्बकम‘ को आदर्श माना गया है अर्थात उदारचित्त वाले लोगों के लिए सम्पूर्ण विश्व ही एक परिवार के जैसी होती है इसी को चरितार्थ करते हुए वर्तमान कोरोना आपदा काल मे पूरा देश एक परिवार बन गया है। जिले के कई श्रमिक अन्य राज्यों में आजीविका की तलाश में गए थे,जो विगत दिनों चल रही देशव्यापी तालाबन्दी में वापिस घर आने का अवसर प्राप्त नहीं हुआ वे अन्य राज्यों में खुद को फंसा हुआ पा रहे थे ऐसे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन सभी श्रमिकों एवं उनके परिवारों को उनकी सकुशलता का विश्वास दिलाया और सभी की सकुशलता के लिए अन्य राज्यों से सक्रिय साझेदारी करने के लिए हाथ बढ़ाया। साथ ही राज्य में फसें अन्य राज्यों के लोगों के लिए सभी आवश्यक इंतेजाम करने का आदेश प्रशासन को दिया। जिला कलेक्टर नीलकण्ठ टीकाम ने सभी प्रवासी श्रमिकों की सूची तैयार कर उन सभी से संपर्क साधने के प्रयास तेज कर दिए। सूची अनुसार 6199 धनोपार्जन के लिए अन्य राज्यों में गए थे जिनमें से 1109 श्रमिको के सकुशल वापिस अपने गृहग्राम लौटने की बात सामने आई। शेष 5143 श्रमिक अभी भी अन्य राज्यों में रह रहे हैं। ऐसे में जिले में लौटे इन श्रमिकों को जिला प्रशासन ने घरों में ही क्वारेंटाइन किया साथ ही मास्क, सैनिटाइजर, चावल, दाल एवं राशन सामग्री भी प्रदान किया गया है।


जिला प्रशासन अन्य राज्यों में रुके श्रमिकों से लगातार संपर्क बना रखा है और संबंधित राज्य सरकारों एवं अधिकारियों से भी निरन्त संपर्क एवं सहयोग श्रमिकों को प्राप्त हो रहा है जो यहां उनके परिजनों के माथे की चिंता की लकीरों को मिटाने का कार्य कर रहा है। इस पर कलेक्टर ने बताया कि अन्य राज्यों से संपर्क लगातार बनाया गया है और उन राज्यों ने विश्वास दिलाया है कि उनके यहां सभी रह रहे लोगों का सम्पूर्ण ख्याल रखा जाएगा और सभी लोगों को निरन्तर स्वास्थ जांच मेडिकल टीमों द्वारा किया जाता है साथ ही खाने के लिए उत्तम भोजन का भी प्रबंध है। ज्ञात कि जिले के बाहर रह रहे श्रमिकों के लिए हेल्प लाइन नंबर 07786-242180 की शुरुआत की गई है। जिसमे कोई भी व्यक्ति या उसके परिजन जो जिले के निवासी हैं अपने अन्य राज्यों में रह रहे व्यक्ति की सूचना दे सकते हैं जिससे उनतक आवश्यक मदद पहुंचाई जा सके।‘अतिथि देवो भवः‘ की परंपरा को सार्थक करते हुए अन्य राज्यों के जिले में रह रहे 104 लोगों का जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता से ख्याल रख रहा है। इसके तहत इन सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ सभी के लिए स्वच्छ जल एवं उत्तम भोजन का प्रबंध किया गया है तथा जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं अन्य अधिकारियों द्वारा इन राहत शिविरों का निरीक्षण निरंतर किया जाता है। इन शिविरों में रह रहे 104 लोगों में से तेलंगाना के 18 राजस्थान के 27 झारखंड के 2 बिहार के 15 पश्चिम बंगाल के 34 लोग शामिल हैं।

 

13-04-2020
कोई भी नहीं रहे भूखा, जिले में दानदाता दे रहे आपदा कोष में सहायता राशि

कोण्डागांव। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए जिला आपदा राहत कोष में सोमवार को किसान राइस मिल द्वारा 1 लाख 11 हजार, राइस मिल एसोसियेशन कोण्डागांव द्वारा 1 लाख एक हजार,अखिल भारतीय राजपूत समाज कोण्डागांव द्वारा 18 हजार, विपणन संस्था कोण्डागांव 11 हजार, दिगम्बर जैन समाज द्वारा 21 हजार तथा नगर के अन्य नागरिकों हरमोहन कोहली, टी.वेंकट राॅव, आरके जैन द्वारा 11-11 हजार रुपये एवं जगदीश पाण्डे 5 हजार एवं गणेश टावरी द्वारा 2500 की सहयोग राशि विधायक मोहन मरकाम एवं कलेक्टर नीलकंठ टीकाम के समक्ष दी गई। गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण मानव जीवन में आए इस अभूतपूर्व संकट से पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है और इस महामारी को रोकने के लिए राज्य सरकार सहित संपूर्ण स्वास्थ्य अमला अपनी पूरी क्षमता से जुटा हुआ है। अतः इस बीमारी के प्रभावी रोकथाम के लिए एवं आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए जिले की स्वंयसेवी संस्थान एवं नागरिकों द्वारा अपने-अपने स्तर पर स्वेच्छिक दान किया जा रहा है।

 

Advertise, Call Now - +91 76111 07804