GLIBS
09-12-2020
हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से शरीर में थकान, कमजोरी, नशों में होता है दर्द

रायपुर। स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर में सभी प्रकार के तत्वों की जरूरत होती है। उनमें आयरन भी एक घटक होता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। इसे लौह युक्त प्रोटीन भी कहते हैं जो शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को संतुलित करता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से शरीर में थकान, कमजोरी, नशों में दर्द जैसी अनेक समस्याएं होने लगती है। इलाज के दौरान सबसे पहले खून की जांच इसीलिए करते हैं ताकि शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगाया जा सके। एनिमिया मुक्त भारत’ अभियान के तहत सुकमा जिले में 18 से 30 नवम्बर 2020 तक 15 से 49 आयुवर्ग महिलाओं के हीमोग्लोबिन की जांच की गई थी। इसमें कुल 77.56 प्रतिशत अर्थात 48617 महिलाओं के रक्त की जांच हुई। सघन रूप से हुए इस जांच अभियान में सुकमा विकासखंड के 16272,कोंटा के 19798, व छिंदगढ़ के 26613 कुल 62683 महिलाओं का लक्ष्य रखा गया था। इनमें 15 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाएं, गर्भवती महिलाएं व 19 से 49 वर्ष की अन्य महिलाएं शामिल की गई थी। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कुल 176 महिलाओं का हीमोग्लोबिन 7 ग्राम से कम था जबकि 7 से 9.9 ग्राम के अंतर्गत 9441 महिलाएं, 10 से 10.09 ग्राम के अंतर्गत 12379 महिलाएं व 11 ग्राम से अधिक हीमोग्लोबिन वाली  26621 महिलाएं पाई गई। कोंटा के बीएमओ कपिल कश्यप ने बताया महिलाओं में हुई हीमोग्लोबिन की जांच के आधार पर उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं दी गई। जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर 7 से 9 के बीच था। उन्हें अस्पताल में भर्ती कर आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन दिया गया। साथ ही उन्हें आयरन युक्त सब्जी एवं विटामिन लेने की सलाह दी गई। इसके अलावा जिन महिलाओं का हीमोग्लोबिन 7 से कम था उन्हें जिला अस्पताल ले जाकर खून चढ़ाया गया व वापस उन महिलाओं को घर तक छोड़ा गया। उन्होंने बताया मुख्य रूप से पोषक तत्वों की कमी के कारण हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। इसका सीधा असर शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। शरीर में खून की मात्रा सामान्य होने पर ही शरीर स्वस्थ होता है, और शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने की स्थिति में एनीमिया लक्षण सामने आने लगते हैं। एनीमिया कई बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। एनीमिया महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है, खासकर प्रेगनेंसी के दौरान। क्योंकि इस समय शरीर को विटामिन, मिनरल, फाइबर की ज्यादा मात्रा की जरुरत पड़ती है। ब्लड में लोह तत्व कम होने से थकान और कमजोरी बढ़ती जाती है। ब्रेस्ट फीडिंग (स्तन पान ) करवाने वाली महिलाएं भी अक्सर एनीमिया से ग्रस्त रहती हैं। गर्भवती महिलाओं में एनिमिया समयपूर्व प्रसव और कई बार बच्चे की मौत का भी कारण बन जाता है। एनिमिक बच्चे प्रायरू अल्प-पोषण, कुपोषण और ठिगनापन का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका पूरा जीवन प्रभावित होता है। रक्त में ऑक्सीजन की कम आपूर्ति से अंदरूनी अंग जैसे कि किडनी-लीवर आदि को क्षति पहुंच सकती है। एनिमिया के लक्षण रू त्वचा का सफेद दिखना, जीभ, नाखूनों एवं पलकों के अंदर सफेदी, कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट, चक्कर आना- विशेषकर लेटकर एवं बैठकर उठने में, बेहोश होना, सांस फूलना, हृदयगति का तेज होना, चेहरे एवं पैरों पर सूजन दिखाई देना। एनिमिया के कारण एनिमिया के सबसे प्रमुख कारण आयरन से भरपूर वाली चीजों का उचित मात्रा में सेवन न करना। किसी भी कारण रक्त में कमी, जैसे- शरीर से खून निकलना (दुर्घटना, चोट, घाव आदि म अधिक क खून बहना) शौच, उल्टी, खांसी के साथ खून का बहना, माहवारी में अधिक मात्रा में खून जाना,पेट के कीड़ों व परजीवियों के कारण खूनी दस्त लगना, बार-बार गर्भ धारण करना। आयरन हरी पत्तेदार सब्जी, और फल में पाया जाता ह। गर्भवती महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा निशुल्क गोलियां दी जाती है।

29-11-2020
ठंड में रखे अपना विशेष ध्यान : शारीरिक तापमान में अस्थिरता हाइपोथर्मिया है वजह 

रायपुर। हमारे शरीर का एक सामान्य तापमान होता है, जो कि शरीर द्वारा संचालित होता है। जब शरीर का तापमान सामान्य व सुरक्षित स्तर से अचानक नीचे गिर जाता है, तो यह अल्पताप या हाइपोथर्मिया कहलाता है। यह समस्या गंभीर भी साबित हो सकती है। हाइपोथर्मिया के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ रामेश्वर शर्मा ने बताया कि ठंड के मौसम में हमारा शरीर आवश्यकतानुसार शारीरिक गर्मी का उत्पादन नहीं कर पाता, जितनी गर्मी की हमारे शरीर द्वारा मांग होती है। सर्दी के मौसम में हमारे शरीर को अधिक सामान्य तापमान चाहिए होता है, लेकिन जब शरीर जरूरी गर्माहट को संरक्षित नहीं रख पाता तो मुश्किल स्थिति बन जाती है। यह समस्या ज्यादा देर ठंड या ठंडे पानी में रहने की वजह से भी हो सकती है।

जाने शरीर का सामान्य तापमान : शरीर का सामान्य तापमान उम्र, लिंग और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है। वैसे, सामान्य शारीरिक तापमान 97.7 डिग्री फारेनहाइट यानी 36.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर  99.5 डिग्री फारेनहाइट यानी 37.5 डिग्री सेल्सियस तक होता है। न्यून्तम सामान्य शारीरिक तापमान 36 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है। शारीरिक तापमान के 95 डिग्री फारेनहाइट से नीचे गिरने को हाइपोथर्मिया कहा जाता है और 38 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा शारीरिक तापमान को बुखार की समस्या कहा जाता है। शरीर में गर्मी बनाए रखने का कार्य दिमाग का एक हिस्सा करता है, जिसे हाइपोथेलेमस कहा जाता है। जब हाइपोथेलेमस को संकेत मिलता है कि शरीर में गर्माहट का स्तर गिर रहा है, तो यह शारीरिक तापमान को उठाकर सामान्य बनाने का कार्य करता है। 

जाने क्या है लक्षण : हाइपोथर्मिया की वजह से आपके सोचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हाइपोथर्मिया की स्थिति में बोलने की गति कम हो जाती है। हाइपोथर्मिया के कारण अत्यधिक कंपन महसूस हो सकता है। हाइपोथर्मिया की समस्या में व्यक्ति की सांसें धीमी पड़ जाती हैं। हाइपोथर्मिया की समस्या सोचने की क्षमता पर बुरा असर डालती है, कुछ लोगों को इस समस्या की वजह से शारीरिक थकान का सामना भी करना पड़ सकता है। हाइपोथर्मिया की वजह से याद्दाश्त भी कमजोर हो सकती है। हाइपोथर्मिया में हाथ और पैरों में सुन्नपन हो सकता है। नवजातों की त्वचा हाइपोथर्मिया की वजह से बिल्कुल लाल या ठंडी हो सकती है। इसके अलावा, नवजात बच्चों की ऊर्जा, हाइपोथर्मिया की वजह से काफी कम हो सकती है।हाइपोथर्मिया से ग्रस्त होने पर बोलचाल में परेशानी, ध्यान केंद्रित करने में समस्या, चाल लड़खड़ाने लगती है।हाइपोथर्मिया बिगड़ने पर व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।

रहना होगा सावधान : हाइपोथर्मिया की समस्या वैसे तो किसी को भी हो सकती है,लेकिन उम्र हाइपोथर्मिया की समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। समान्य तौर पर बुर्जुगो और बच्चो विशेषकर नवजात शिशुओ को यह समस्या होती है। क्योंकि इन लोगों में सामान्य शारीरिक तापमान को बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है। शरीर की सामान्य तापमान बनाए रखने की क्षमता नकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। शराब या ड्रग्स का सेवन करने से भी आपको हाइपोथर्मिया की समस्या का खतरा हो सकता है। इसमें शराब का सेवन करना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। क्योंकि, शराब का सेवन करने से आपके शरीर के गर्म होने का झूठा एहसास होता है, जबकि असल में रक्त धमनियां फैल जाती हैं और त्वचा के जरिए ज्यादा शारीरिक गर्मी शरीर से निकल जाती है। डिमेंशिया या बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी अन्य मानसिक समस्या होने की वजह से भी आपको हाइपोथर्मिया की दिक्कत हो सकती है। मानसिक समस्या होने की वजह से लोग अपनी पर्याप्त देखभाल नहीं कर पाते और ऐसे में सर्दी के मौसम में पर्याप्त देखभाल के बिना बाहर जाना खतरनाक हो सकता है और उनके सामान्य शारीरिक तापमान में गिरावट का कारण बन सकता है।

19-11-2020
नाश्ता सुबह का हो या शाम का उसे टेस्टी और हेल्दी बना देता है हर किसी की पसन्द पनीर पकोड़ा

रायपुर। सुबह का नाश्ता शरीर के लिए बहुत आवश्यक होता है। सुबह हो या शाम का नाश्ता पनीर के पकोड़े हैं सपके पसंद। पनीर के व्‍यजनों में पनीर के पकोड़े बेहद मशहूर हैं। ये टेस्‍टी तो होते ही हैं साथ ही बनाने में भी आसान हैं। इसे कभी भी ट्राई कर सकते हैं। पनीर पकोड़ा एक सरल और आसान स्नैक है

सामग्री :
500 ग्राम पनीर (बड़े-बड़े टुकड़ों में कटा हुआ)
आधा कप बेसन
1 टेबलस्पून अदरक-लहसुन का पेस्ट
1-1 टीस्पून हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, चाट मसाला व अमचूर पाउडर
आधा कप कॉर्नफ्लोर
तलने के लिए तेल
नमक स्वादानुसार
आवश्यकतानुसार पानी

विधि :
पनीर और चाट मसाला छोड़कर बाकी सारी सामग्री को मिलाकर गाढ़ा घोल बना लें। 
पनीर के टुकड़े बेसन के घोल में डुबोकर गरम तेल में डीप फ्राई कर लें। 
चाट मसाला छिड़ककर गरम-गरम सर्व करें।

01-11-2020
जरूरत से ज्यादा उपयोग नुकसानदेह होता है ये बात साबित करता है नमक स्वाद तो बढ़ाता है नुकसान भी करता है

रायपुर। बिना नमक खाना अधूरा है। पर ज्यादा नमक का सेवन करना भी हमारे शरीर के लिए हानिकारक होता है। डॉक्टरों, रिसर्चों ने हमें अधिक नमक का सेवन न करने को लेकर बहुत बार बताया जाता है। लेकिन हम उन्हें अनसुना करके अपने मनमुताबिक नमक का सेवन करते हैं। अगर आप भी ऐसा कुछ करते हैं तो जान लें इससे सेहत पर क्या-क्या नुकसान होते हैं। 

ज्यादा नमक खाने से होने वाले नुकसान :
-नमक का सेवन अधिक करने से आपको किडनी में पथरी हो सकती है। इसके अलावा आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का सामना कर सकते हैं। 
-अधिक नमक का सेवन करने से शरीर में जमा हो जाता है, जिसके कारण शरीर में सूजन आने लगती है। इसका असर आपको हाथ, पैरे और चेहरे पर साफ नजर आने लगेगा।
- ज्यादा नमक का सेवन करने से हिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
- कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि अधिक नमक का सेवन करने से आपको वजन भी तेजी से बढ़ सकता है। 
-ज्यादा नमक लेने से शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होने लगती है। जिसके कारण आप अल्सर, ऑस्टियोपोरोसिस का शिकार हो सकते हैं। 
-अधिक नमक सेवन करने से सोडियम का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है, जिसके कारण आप डिमेंशिया के शिकार हो सकते हैं।

29-10-2020
शरीर को एक्टिव और हेल्दी बनाए रखना है तो सुबह उठते ही भरपूर पानी पीजिए, शरीर की गंदगी और खून साफ होता है

रायपुर। सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से सबसे ज्‍यादा फायदा होता है। शरीर को एक्टिव और हेल्‍दी बनाए रखने के लिए दिन भर पानी पीना चाहिए लेकिन सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से सबसे ज्‍यादा फायदा होता है। खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। 

 सुबह उठकर पानी पीने के फायदे :
-सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है। 

-सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती है। 

-सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए। 

-जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं। उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते। 

-सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती है।

15-10-2020
हरि सब्ज़ियां बढ़ाती है प्रतिरोधी क्षमता, देती है प्रोटीन विटामिन और मिनरल, स्वस्थ्य के लिए बेहद जरूरी

रायपुर। हरी सब्जियों का हमारे स्वस्थ जीवन में बहुत बड़ा योगदान होता है। हरी सब्जियों के फायदे एक नहीं बल्कि कई है। हरी सब्जियों में भरपूर मात्रा में विटामिन, प्रोटिन और मिनरल होते हैं, जो शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करता है। हमारे शरीर को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए हरी सब्जियां का सेवन जरूरी है।
 
हरी सब्जियों का ये है महत्व :
-पत्तीदार हरी शाक-सब्जियाँ शरीर के उचित विकास व अच्छे स्वास्थ के लिए आवश्यक होती है, क्योंकि इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व उपस्थित होते हैं।
-भारत में कई तरह की हरी सब्जियों को खाया जाता है, इनमे से कुछ हैं पालक, तोटाकुरा, गोंगुरा, मेथी, सहजन की पत्तियाँ और पुदिना आदि।
-पत्तेवाली सब्जियां लौहयुक्त होती हैं। लौह की कमी से एनीमिया जैसी बीमारी हो सकती है, जो गर्भवती स्तनपान करानेवाली महिलाओं में आम है।
-रोज खानेवाले भोजन में हरी पत्तीदार सब्जियों का सेवन एनीमिया को रोकने में सहायक होता है। वह स्वास्थ के लिए लाभदायक भी होता है।
-हरी पत्तीदार सब्जियों में  कैल्शियम, बीटा कैरोटिन एवं विटामिन सी भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं।
-भारत में लगभग पांच वर्ष से कम आयुवाले 39,000 बच्चे हर वर्ष विटामिन ए की कमी से अन्धेपन का शिकार हो जाते हैं। हरी पत्तीदार सब्जियों में -उपस्थित कैरोटिन शरीर में विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है, जिससे अन्धेपन को रोका जा सकता है।
-हरी सब्जियों में विटामिन सी को बचाए रखने के लिए उन्हें ज्यादा देर तक पकाना अनुचित है, क्योंकि पोषक तत्व जो मसूड़े को शक्ति प्रदान करते हैं, -अधिक पकाने से नष्ट हो जाते हैं।
-हरी सब्जियों में विटामिन बी काम्पलेक्स भी पाया जाता है।
-हरी पत्तीदार सब्जियाँ प्रतिदिन वयस्क महिलाओं के लिए 100 ग्राम, वयस्क पुरुषों के लिए 40 ग्राम, स्कूल न जान वाले बालकों के लिए (4-6 वर्ष) 50 ग्राम -और 10 वर्ष से अधिक उम्र वाले बालक-बालिकाओं के लिए 50 ग्राम प्रतिदिन आवश्यक है।

25-09-2020
कीटो डाइट से रहे दूर : हार्ट प्राब्लम, मसल्स की मास में कमी के साथ शरीर को पहुंचाता है कई प्रकार के नुकसान

रायपुर। कीटो डाइट आज सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। लोग इसका उपयोग कर रहे हैं। लेकिन लोग इस बात से अंजान हैं कि इसके कई सारे ऐसे नुकसान हैं। इसके कारण बॉडी में थकान, बॉडी में फाइबर, मिनरल्स और विटामिन्स की कमी हो सकती है

हार्ट प्रॉब्लम : कीटो डाइट हार्ट के लिए घातक साबित हो सकती है। कीटो डाइट कम समय के लिए वजन कम करने में मदद करती है। लेकिन इसमें कई सारी ऐसी चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है, जिससे हार्ट रिस्क बढ़ सकता है।

एथलेटिक परफॉर्मेंस में कमी : कीटो डाइट पर रहने से परफॉर्मेंस में कमी आ जाती है। दरअसल, जब बॉडी कीटोसिस में होती है तो शरीर अधिक अम्लीय अवस्था में रहता है, जो पीक लेवल पर परफॉर्मेंस की क्षमता को लिमिटेड कर देता है।

दोबारा वजन बढ़ना : कीटो डाइट को लंबे समय तक फॉलो नहीं करना चाहिए। इसके बाद आपको अपने नॉमर्ल डाइट पर आ जाना चाहिए। कीटो डाइट की बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर लोगों का डाइट छोड़ने के बाद वापस वजन बढ़ने लगता है, क्योंकि वो कार्ब्स का सेवन शुरू कर देते हैं।

मसल्स मास कम होता है : कीटो डाइट से जल्दी वजन कम होने का एक कारण यह भी है कि इससे मसल्स को काफी नुकसान होता है। इससे फैट बर्न होने के साथ मसल्स मास भी बर्न होता है। इससे आप जल्दी पतले हो जाते हैं, जब कोई व्यक्ति कीटोजेनिक डाइट से बाहर आता है तो वह मूल वजन का अधिकतर हिस्सा वापस से प्राप्त कर लेता है। लेकिन उसमें लीन मसल्स की अपेक्षा फैट गेन अधिक होता है।

17-09-2020
अनानास खाने के है अनेक फायदे..

रायपुर। पाइनएप्पल यानि की अनानास में भरपूर मात्रा में फाइबर्स होता है। स्वाद में खट्टा और मीठा दोनों होने के कारण यह बहुत ही मजेदार होता है। लेकिन इसे खाकर आप अपने शरीर की कई सारी परेशानियों को कम कर सकते हैं या फिर दूर भगा सकते हैं। दरअसल पाइनएप्पल में कई सारे ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं। पाइनएप्पल खाने से आपको सेहत से जुड़ी कई सारी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। पाइनएप्पल में विटामिन और एंटीऑसीडेंट के गुण पाए जाते हैं। तो चलिए जानते हैं अगर आप इशका सेवन करते हैं तो आपको इसके कितने सारे फायदे मिलेंगे।

हड्डियों के लिए फायदेमंद : पाइनएप्पल खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। अगर आप पाइनएप्पल खाते हैं तो इससे आपकी हड्डियों को मजबूती मिलती है। इसलिए आप पाइनएप्पल का जूस जरुर पीए। इसमें कई सारे मिनरल्स और विटामिन होते हैं जो आपकी हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करते हैं। खसाकर महिलाओं और बच्चों का इसका सेवन जरूर कराएं, ये उनके लिए कापी असरदार साबित होता है।

आंखों के लिए फायदेमंद : पाइनएप्पल अगर आप खाते हैं बतौर जूस या फिर फ्रूट के तौर पर तो इससे आपकी आंखों को भी कई सारे फायदे होते हैं। आजकल लोग अपना ज्यादातर समय अपना कंप्यूटर पर बिताते हैं। ऐसे में आपको अपनी आंखों का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि उनमें किसी प्रकार की परेशानी ना हो। 

स्टोन के लिए : अगर आप पथरी या फिर स्टोन से परेशान हैं तो ऐसे में आप पाइनएप्पल को अपने खाने में जरूर शामिल करें। आप चाहें तो इसका जूस बनाकर भी पी सकते हैं। पाइनएप्पल एक प्राकृतिक औषधि के रूप मे उपयोग की जाती है। यह पथरी या किडनी स्टोन के लिये बहुत फायदेमंद होता है।

इम्युनिटी के लिए करागर : इम्युनिटी आजकल हर किसी के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे में आपको अपने शरीर का खास ध्यान देना होगा तभी आपकी इम्युनिटी अच्छी रहेगी। क्योंकि अगर ये गिरती है तो ऐसे में आपका स्वास्थ भी नीचे आ जाता है और शरीर कमजोर और थका हुआ हो जाता है। ऐसे में आप पाइनएप्पल से अपनी इम्युनिटी को बढ़ा सकते हैं। आप इसे फल या फिर जूस के तौर पर ले सकते हैं।

वजन कम करने में मददगार : अगर आप डायट पर हैं तो ऐसे में पाइनएप्पल का सेवन जरूर करें। इसका इस्तेमाल आप जूस के रूप में भी कर सकते हैं। इसके सेवन से शरीर में कमजोरी महसूस नहीं होती है। वजन को कम करने में भी आपकी मदद कर सकता है।

21-07-2020
हेल्थ स्पेशल : खाली पेट चाय पीना पड़ सकता है महंगा...

रायपुर। खाली पेट सुबह चाय पीने से बचना चाहिए। चाय में कई तरह के ऐसिड होते हैं। खाली पेट चाय पी कर आप अपने पेट को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। इससे अल्‍सर या गैस जैसी परेशानियां बढ़ने की संभावना रहती है। लोगों का मानना है कि सुबह के समय चाय पीने से शरीर में चुस्ती आ जाती है लेकिन यह बात गलत है। खाली पेट चाय का सेवन करने से सारा दिन थकान और स्वभाव में चिड़चिड़ापन बना रहता है। इसलिए खाली पेट चाय पीने का ख्याल अपने दिमाग से निकाल दे।

16-07-2020
मौसमी फल और सब्जियों के सेवन से बढ़ेगी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता

रायपुर। कोरोना वायरस संक्रमण के साथ ही अब बारिश में डेंगू, टाइफाइड, मौसमी बुखार, मलेरिया और सर्दी-जुकाम के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। बच्चे और बड़ों के साथ ही बुजुर्गों की मुशिकलें बढ़ गई हैं। ऐसे में अगर इन मौसमी बीमारियों के गिरफ्त में आ गए तो कोरोना से खतरा और भी बढ़ जाएगा। कोरोना वायरस व मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए बारिश के मौसम में आने वाले फलों व सब्जियों का सेवन सेहत के लिए बेहद जरुरी है।
आयुर्वेदिक अस्पताल के पंचकर्म विभाग के एचओडी डॉ. रनजीप कुमार दास ने बताया इन बीमारियों से लड़ने में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मदद करेगी। ऐसे में जरूरी है कि हर उम्र के लोग शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर खासा ध्यान दें। खानपान और अच्छी दिनचर्या से ही हम अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं।

डॉ. दास का कहना है कि मौसमी फल, सब्जी, नींबू के अलावा रसोई में बहुत सी चीजें उपलब्ध हैं जिनकी मदद से हर कोई शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है। आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में कोरोना वायरस से बचाव और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुष विभाग की ओर से काढा का वितरण किया जा रहा है। इसका लाभ प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीज व अन्य लोग सहित लगभग 300 लोग काढा का सेवन कर रहे हैं। सीएमएचओ रायपुर डॉ.मीरा बघेल ने बताया कि जिले के अस्पतालों में कोविड से पहले इस वर्ष जनवरी, फरवरी व मार्च में कुल ओपीडी 4.22 लाख दर्ज किया गया था जो औसत प्रति माह 1.40 लाख मरीजें थी। साल के पहले तिमाही रिपोर्ट के अनुसार हर दिन औसत 5,550 मरीज ओपीडी में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। आयुष अस्पतालों में तीन महीने का ओपीडी 8,400 रहा, हर महीने 2800 मरीज पहुंच रहे थे जो कि प्रतिदिन औसत 107 मरीजों का रहा है। लॉक डाउन के दौरान ओपीडी में गिरावट के साथ के साथ अप्रैल, मई व जून में जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का कुल ओपीडी 3.14 लाख है।

वहीं प्रतिमाह औसत 1.04 लाख मरीजों को ओपीडी में मरीज पहुंच रहे हैं। यानी प्रति दिन अस्पतालों में 4,000 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि आयुष के अस्पतलों का ओपीडी बीते तीन महीने में कोरोना की वजह से 4800 है। महीनेभर में 1600 मरीज और प्रतिदिन का औसत 61 मरीज आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सा सेवा का लाभ ले रहे हैं। कोविड-19 की वजह से अस्पताल में नॉन-कोविड के मरीजों की संख्या में कमी आई थी जो अब अस्पतालों में मरीजों की तादात धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। डॉ. बघेल ने बताया कि कोरोना वायरस के लक्षण के बारे में जानकारी ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। वायरस के लक्षण जैसे –बुखार आना, सिरदर्द, नाक बहना, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, खांसी, गले में खराश और सीने में जकड़न होता है। कोरोना से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क से बचना, कई बार हाथों की साबुन से धुलाई, नाक-आंख-कान व मुंह न छूना ज़रूरी है। संक्रमित सामग्रियों को छूने से बचना।
अधिक जानकारी के लिए शासकीय जिला अस्पताल से अथवा राज्य सर्वेलेंस इकाई के नंबर- 0771-2235091, 9713373165 या फिर टोल फ्री नंबर -104 से संपर्क कर सकते हैं।

सावधानी के लिए जरुरी उपाय :
- बाहर की खानपान की चीजों से बचें, यदि विषम परिस्थितियों में खाना पड़े तो ठंडी चीजों से परहेज करें।
- पैक्ड और बाहर फलों का जूस पीने के बजाय घर पर निकाल कर पीये। बेहतर होगा मौसमी फल खाए।
- घर या बाहर चाय और काफी का सेवन करें।
- गरम दूध में हल्दी डालकर पीएं, यदि अंडा खाते हैं तो इसे ले।
- अदरक, काली मिर्च, लोंग, दालचीनी, मुलेठी, तुलसी का काढ़ा दिन में दो बार पीएं।
- संतुलित भोजन ले जिसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक हो, एक ग्राम प्रति किग्रा शरीर के वजन के अनुसार प्रोटीन लेनी चाहिए।
- विटामिन और मिनरल के लिए मौसमी फल और सब्जियां और ड्राईफ्रूट का सेवन करें।
- चना, मूंग, अरहर समेत सभी दाल खायें।
- अंकुरित चना, मूंग, सोयाबीन और मोठ ले सकते हैं।

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