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21-06-2021
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: शिक्षकों ने किया योगाभ्यास, कहा-योग से ही शरीर रहेगा निरोग

कोरबा। सातवें विश्व योग दिवस के अवसर पर मिनी माता उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय एवं अनुभव भवन बालको में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के बैनर तले विश्व योग दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यअतिथि दुष्यंत शर्मा सचिव मिनी माता स्कूल, प्रधान पाठक  भोजेन्द्र सिंह, पीएल सोनी, मुकेश कुमार पांडेय, उमा नेताम, उपेंद्र राठौर एवं स्कूल शिक्षिका-शिक्षक उपस्थित रहे। इस अवसर पर स्कूल सचिव ने अपने उद्बोधन में कहा कि योग भारत की प्राचीन कला है,जिसकी उत्पत्ति भारत में ही हुई है और योग के माध्यम से शरीर को रोग मुक्त कर लंबी आयु प्राप्त की जा सकती है। विकासखण्ड पाली अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला सरईसिंगार के द्वारा शाला में कोविड सुरक्षा मानदंडों का पालन करते हुए योगा दिवस कार्यक्रम मनाया गया। इसमें शाला के प्रधान पाठक राजकुमार निर्मलकर, शिक्षिका वसुंधरा कुर्रे, शिक्षिका निर्मला भारद्वाज के द्वारा योगा एवं योगा से होने वाले लाभ के बारे में योगा कराते हुए उन्हें जागरूक किया गया। 

 

 

19-06-2021
विश्व सिकल सेल दिवस आज, खून में पल रही बीमारी ले सकती है जान 

रायपुर। विश्व सिकल सेल दिवस शनिवार को है। यह दिन इसके उपचार के उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में इस रोग पर प्रभावी नियंत्रण पाने के लिए मनाया जाता है। खून में पल रही सिकल सेल एक खतरनाक बीमारी है, जो गंभीर मरीज की जान भी ले सकती है। हालांकि जागरूक मरीज उपचार के जरिए सामान्य जीवन जी सकता है। यह रोग और इसके उपचार के तरीकों के बारे में लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिए हर साल 19 जून को 'विश्व सिकल सेल दिवस' मनाया जाता है।

क्या है सिकल सेल बीमारी :
सिकल सेल खून से जुड़ी बीमारी है जो शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं को प्रभावित करती है और यह आमतौर पर माता-पिता से बच्चों में वंशानुगत मिलती है। आमतौर पर लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है, लेकिन जिन लोगों को सिकल सेल बीमारी होती है, उनकी लाल रक्त कोशिकाओं में ज्यादातर हीमोग्लोबिन एस होता है जो कि हीमोग्लोबिन का असामान्य प्रकार है। इस कारण लाल रक्त कोशिकाओं का आकार बदल जाता है और वे सिकल शेप (अर्धचन्द्राकार आकार) के बन जाते हैं। चूंकि सिकल के आकार वाली ये लाल रक्त कोशिकाएं छोटी-छोटी रक्त धमनियों से गुजर नहीं पातीं इसलिए शरीर के उन हिस्सों में बेहद कम खून पहुंचता है। जब शरीर के किसी ऊतक तक सामान्य खून नहीं पहुंचता तो वह हिस्सा क्षतिग्रस्त होने लगता है।

18-06-2021
रास्ते में मिली युवक की लाश, शरीर पर चोट के निशान, हत्यारे की तलाश में जुटी पुलिस

गरियाबंद। जिला के धबलपुर गांव के समीप स्थित नयापारा के एक 35 वर्षीय युवक फिरतूराम की लाश मिली। व्यक्ति की रास्ते पर मृत अवस्था में लाश मिली,जिसके शरीर से कमीज गायब थी। शरीर में कुछ स्थानों पर जख्म के निशान मिले। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में पाया गया कि उसका गला घोट कर हत्या की गई है। मैनपुर पुलिस ने धारा 302 कायम करते हुए अज्ञात आरोपी की खोज खबर प्रारंभ कर दी है मिली जानकारी के अनुसार थाना मैनपुर के ग्राम जंगलधवलपुर नवापारा निवासी फिरतुराम यादव पिता दयाराम यादव उम्र 35 वर्ष,मजदूरी का काम करता था। मृतक फिरतुराम यादव 15 जून को अपने मित्र की मोटर साइकिल से गणेशराम यादव के साथ उसके ससुराल नयापारा राजिम गया था। लौट कर शाम को अपने मित्र की बाइक वापस किया लेकिन रात में  घर नहीं लौटा। गुरूवार सुबह ग्रामीणों ने मृतक फिरतुराम यादव से घर से महज 300 मीटर की दूरी पर नवापारा जंगल के मार्ग में फिरतुराम यादव को मृत अवस्था में देखा। उसके शरीर के कपडे निकले हुए थे। मैनपुर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की। पीएम में पाया गया कि फिरतू राम की किसी ने गला दबाकर हत्या की है। मैनपुर पुलिस ने धारा 302 के तहत अपराध दर्ज करते हुए अज्ञात आरोपी की खोज शुरू कर दी है। 

18-06-2021
कुछ यूँ होगा उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली का सबब

इंदौर/रायपुर। जैसा कि हम सभी जानते हैं, हमारा देश '2030 के भारत' की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसके अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से सभी 17 लक्ष्यों को हासिल किया जाना तय है। दरअसल इन लक्ष्यों के अंतर्गत ऐसे विषयों का समागम किया गया है, जिनकी कमी लिए हमारा देश लम्बे समय से गुजर-बसर कर रहा है। इन महत्वपूर्ण विषयों में से एक है उत्तम स्वास्थ्य तथा खुशहाली, जो कहीं न कहीं हमारे स्वस्थ जीवन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य है। केंद्र सरकार की इस बेमिसाल पहल का सबब यह है कि जनता का सहयोग इसमें प्रखर है। सिर्फ सरकार की ओर से की जाने वाली तमाम कोशिशें तब तक निरर्थक हैं, जब तक जनता इसमें मजबूती से सहयोग न करें। इसलिए इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को सख्त नियम तथा कानून बनाने होंगे और साथ ही इनका सख्ती से पालन भी करना होगा। राजनितिक विश्लेषक अतुल मलिकराम कहते हैं कि यह लक्ष्य सीधे तौर पर आज के समय में चल रहे विकट संकट का बखान करता है। समूचा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। आज तकनीकी और प्रौद्योगिकी की असीमित तरक्की भी इस पर पूरी तरह काबू नहीं पा सकी है। पूरी तरह तकनीकी पर निर्भर होने के बजाए इस संकट काल में यदि कोई सबसे बड़ा हथियार है, तो वह है हमारा मनोबल।

मारा मस्तिष्क इतना शक्तिशाली है कि यह चाहे तो हमारे शरीर को किसी विशेष बीमारी से ग्रसित भी कर सकता है, और यह चाहे तो गंभीर से गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म भी कर सकता है। यदि इसे मरहम के रूप में उपयोग किया जाए तो 2030 से पहले ही उत्तम स्वास्थ्य तथा खुशहाली लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इसलिए धन से न सही, मन से जरूर लोगों के लिए कार्य करें, उनका मनोबल बढ़ाएं और सकारात्मकता फैलाएं। अधिक से अधिक समय अपनों के साथ व्यतीत करें और जरूरतमंदों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें। जो व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य का आनंद लेता है, वास्तव में वह अमीर तथा समृद्ध होता है। अच्छा स्वास्थ्य न सिर्फ जीने के लिए जरुरी है, बल्कि यह आर्थिक वृद्धि तथा सम्पन्नता को भी बल देता है, जो खुशहाल जीवन का परिणाम है। सभी के लिए उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना, निरापद, असरदार, उत्तम और किफायती दवाएँ तथा टीके उपलब्ध कराना आदि स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के लिए हम सभी का सहयोग इसे सार्थक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करें, अपनी बारी आने पर जरुरी दवाएं तथा टीकें जरूर लें। हानिकारक रसायनों के उपयोग को कम करने में योगदान दें, जिससे कि वातावरण सुरक्षित रहे। अपने-अपने स्तर पर प्रदुषण को कम करने में सहयोग दें। वाहनों का कम से कम उपयोग करके साइकलिंग को बढ़ावा दें। योग तथा व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। सात्विक भोजन अपनाएं। देश से कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए उचित समाधान निकाले जाएं। जगह-जगह पर स्वास्थ्य संबंधी बूथ बनाए जाएं, जहाँ से व्यक्ति बेहतर स्वास्थ्य के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकें। एक निश्चित समय अंतराल के दौरान उचित जाँचें आदि कराने का प्रावधान हो। आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को कम शुल्क या निशुल्क इलाज तथा उचित दवाइयाँ प्राप्त हों। बेहतर चिकित्सा को लेकर देश के हर कोने में ठोस नियम बनाएं जाएं। तब जाकर देश का हर नागरिक उत्तम स्वास्थ्य तथा खुशहाली से फलीभूत हो सकेगा और हमारा भारत तब जाकर बन सकेगा स्वस्थ भारत।

13-06-2021
बेहिचक लगवाएं टीका, कोरोना वैक्सीन लगाने से शरीर में चुंबकीय गुण आने के दावे भ्रामक : डॉ. दिनेश मिश्र

रायपुर। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से पिछले कुछ दिनों से कोरोना वैक्सीन के संबंध में अलग0-अलग दावे आ रहे हैं। कोई शरीर में चुंबकत्व आने का दावा कर रहा है तो कहीं वैक्सीन के दुष्प्रभाव को लेकर शंका है। कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों को किसी भी भ्रम, संदेह में नहीं आना चाहिए। कोरोना की वैक्सीन वह टीका है जो शरीर में कोरोना से बचाव के लिए प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है। यह किसी भी प्रकार से किसी भी व्यक्ति के शरीर में चुंबकीय शक्ति पैदा नहीं कर सकती और न ही कोई दुष्प्रभाव है। वैक्सीन से चुंबकत्व और दुष्प्रभाव के संबंध में  किए जा रहे सारे दावे और बातें निराधार हैं। पहले भी कई बार कुछ लोगों की ओर से खुद के शरीर में चुंबकीय शक्ति होने की बात कही गई, पर बाद में उनके दावे गलत साबित हुए।

डॉ.मिश्र ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति के शरीर में किसी वस्तु के चिपकने का कारण उसकी और चिपकने वाली वस्तु के बीच में एक स्पर्श होना है। हर व्यक्ति की त्वचा में पसीने की ग्रंथियां होती है,जिनसे पसीना बाहर आता है। हमारे पसीने का एक प्रमुख तत्व पानी के अलावा सीबम एक तेलीय पदार्थ होता है, जो सेबसियस ग्लैंड से निकलता है। यह हमारे पसीने को चिपचिपा बनाता है। इसके साथ ही हमारे पसीने में नमक के अलावा अन्य तत्व भी होते हैं। इस कारण हल्की वस्तु उस स्थान पर चिपक सकती है,जहां पर पसीना अधिक हो। जब पसीना सूख जाता है, तब कुछ देर बाद वह वस्तु गिर जाती है। किसी भी प्रकार से इसमें वैक्सीन से चुंबकत्व उत्पन्न होने जैसी कोई बात सही नहीं है।

डॉ. मिश्र ने कहा है कि पिछले दो-तीन दिनों में दिल्ली, महाराष्ट्र ,छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और रायपुर से जो मामले प्रकाश में आए उनमें यही बताया गया। जब उन्होंने खबर में देखा कि किसी व्यक्ति को टीका लगाने के बाद चीजें शरीर में चिपक रही हैं,तब उन्होंने भी अपने शरीर में चिपकाने का प्रयास किया। अन्य लोगों को बताया कि उनके शरीर में भी चुंबकीय गुण पैदा हो गया है,जबकि चुंबक लोहे को आकर्षित करता है और चुंबक से लोहे की वस्तुएं चिपकती हैं। स्टील ,प्लास्टिक की वस्तुएं वैसे भी चुंबक से नहीं चिपकती, क्योंकि स्टील शुद्ध लोहा नहीं होता। दूसरी बात यह कि अगर किसी व्यक्ति के शरीर में चुंबकत्व है तो उसके शरीर के हर हिस्से में लोहे की वस्तुएं चिपकना चाहिए ,लेकिन सिर में किसी ने भी दावा नहीं किया कि उसके सिर में भी चुंबकत्व है।

सिर में बाल होते हैं,शरीर के जिस हिस्से की त्वचा में जैसे जिनकी बांह का ऊपरी हिस्सा, सीने गर्दन और पेट के हिस्से  त्वचा अपेक्षाकृत चिकनी ,नम,तैलीय और रहती है। वहां पर ऐसी हल्की, वस्तु चिपक रही हैं। कुछ  लोगों ने तो यह भी कह दिया टेलीविजन का रिमोट भी शरीर से चिपक रहा है। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा है कि आम लोगों को इस प्रकार के दावों पर ध्यान देकर भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है। पहली बात तो यह कोई भी हल्की कम वजन की चीजें व्यक्ति के शरीर पर नमी से चिपकायी जा सकती हैं, लेकिन इससे यह प्रमाणित नहीं होता कि उसमें चुंबकत्व का गुण आ गया है। दूसरी बात यह भी है प्रचार हो रहा है। वैक्सीन लगाने के बाद यह हुआ है, अगर लोगों ने पहले भी प्रयास किया होता तो भी उनके शरीर में इस प्रकार की वस्तुएं चिपक सकती थी। ऐसा कई बार हुआ है कि कुछ लोगों ने दावा किया कि उनके शरीर में चुंबकत्व है, तब समिति के कार्यकर्ताओं ने जब जांच की तो उनके दावे झूठे पाए गए। डॉ.दिनेश मिश्र ने कहा है कि देश में वर्तमान में कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चल रहा है। 20 करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण हो चुका है। सभी प्रदेशों में टीके लगाए जा रहे हैं। सरकारें गंभीरता से इस कार्यक्रम को पूरा करने में लगी हुई है।

कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय संपूर्ण टीकाकरण ही है, इसलिए लोगों को इस प्रकार की भ्रामक बातें प्रचारित करने से बचना चाहिए। इस प्रकार की भ्रामक बातें और दावों से अफवाहें फैलती हैं और जिसे भ्रम ,अंधविश्वास बढ़ता है जबकि आज की स्थिति में देश में टीकाकरण बहुत आवश्यक है। हर नागरिक को टीकाकरण अभियान में सहयोग करना चाहिए। अपने आसपास के लोग जो अभी भी टीका लगवाने से हिचक रहे हैं और उनके मन में भ्रम, शंकाएं है, उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

 

28-05-2021
Video: विचित्र बीमारी से ग्रसित है ढाई माह का मासूम,शरीर पर काले जख्मों जैसे निशान दे रहे तकलीफ

गरियाबंद। ढाई माह की मासूम रवीना का दर्द जानकर आप का भी दिल पसीज जाएगा। इस बच्ची को एक ऐसी बीमारी में घेर रखा है, जिसका नाम भी कई डॉक्टरों से पूछने के बाद पता चल पाया। बच्ची को कंजनाइटल एनमिलिस और हाइड्रोसीफेलस नामक दो बीमारियां हैं। बच्ची के शरीर पर जन्म से ही कई जगह जख्म की तरह काले काले कई निशान हैं,जो बच्ची को लगातार तकलीफ दे रहे हैं। यही वजह है कि बच्ची दिन रात रोते रहती है। ठीक ढंग से सो भी नहीं पाती, जिसके कारण पूरा परिवार रात भर नहीं सो पाते। वहीं दूसरी बीमारी, हाइड्रोसीफेलस के कारण बच्ची का सिर बड़ा होता जा रहा है। उसमें पानी भरता जा रहा है। इस पर और बड़ी समस्या यह की बच्ची के जन्म के बाद से बढ़े हुए कोरोना के आंकड़ों के कारण बच्ची के गरीब माता-पिता इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं। उसे कोरोना के डर से इलाज कराने कहीं ले जा भी नहीं पा रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं बाहरी व्यक्तियों से मिलने पर अस्पताल आदि जाने पर उन्हें भी कोरोना ना हो जाए। बच्ची के लिए इलाज का यह प्रयास और घातक साबित ना हो।  एक दिन क्षेत्र के जिला पंचायत उपाध्यक्ष संजय नेताम अपने क्षेत्र के जनसंपर्क के दौरान उस बच्ची की तकलीफ जानी। लगभग 30 किलोमीटर दूर उस बच्ची के घर झोलाराव नामक गांव में पहुंचे। बच्चों की स्थिति देखकर के हुए भी द्रवित हो गए और उन्होंने फैसला लिया कि वह इस संबंध में उच्च अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को अवगत करा कर बच्ची का समुचित इलाज कराएंगे। उन्होंने कहा कि शासन से इलाज करवाएंगे अगर दिक्कत आती है तो वह अपने पास से भी रुपए खर्च करने में पीछे नहीं हटेंगे।  उन्होंने तत्काल इस घटना की जानकारी गरियाबंद जिलाधीश निलेश क्षीरसागर एवं सीएमओ डॉ. नवरत्न को दी और सहयोग मांगा है। संजय नेताम जल्द ही इसकी जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को देकर बच्ची के समुचित इलाज की मांग करेंगे।

28-04-2021
मेकाहारा प्रबंधन ने जारी किया बयान-महिला के शरीर में मौजूद नहीं थे जीवन के संकेत

रायपुर। कुशालपुर निवासी 72 वर्षीय महिला लक्ष्मीबाई अग्रवाल को 28 अप्रैल को शाम 4.30 बजे केजुअल्टी विभाग में उनकी पोती निधि जैन के द्वारा 108 एम्बुलेंस के माध्यम से अम्बेडकर अस्पताल लाया गया। जहाँ पर उनकी ईसीजी की गई और ईसीजी रिपोर्ट फ्लैट आई, इसके आधार पर यह पता चला कि महिला की मृत्यु हो गई है। तत्पश्चात कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार उनकी कोविड जांच की गई और कोविड रिपोर्ट निगेटिव आई और शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.विनित जैन ने बताया कि परिजनों के संदेह के आधार पर फिर वापस 7 बजे के आसपास लक्ष्मीबाई का शव अस्पताल लाया गया,जिसमें परिजनों को यह संदेह था कि सांसें चल रही हैं,जिसकी पुष्टि के लिये दोबारा से जाँच की गई। इसमें पता चला कि मृत शव में राइगर मोर्टिस की प्रक्रिया शुरू हो गई है और जीवन का कोई संकेत मौजूद नहीं है। उस वक़्त भी मृत शरीर में जीवन के किसी प्रकार के कोई लक्षण नहीं थे। राइगर मोर्टिस यानी मृत्यु जनित कठोरता (Rigor mortis), यह मृत्यु के पहचानने जाने योग्य लक्षणों में से एक है। यह मृत्यु के उपरान्त पेशियों में आने वाले रासायनिक परिवर्तनों के कारण होता है, जिसके कारण शव के हाथ-पैर अकड़ने लगते है।

30-03-2021
क्या आप भी गर्मी में टैनिंग से बचने लगाते हैं सनस्क्रीन लोशन? तो ध्यान रखें ये बातें

रायपुर। गर्मी का सीजन शुरू होने वाला है और ऐसे धुप में निकलने से पहले लोग सनस्क्रीन लोशन लगाना पसंद करते हैं। खासकर लड़कियां इस बात का ध्यान रखती हैं ताकि उनकी स्किन पर टैनिंग ना पड़ जाए। आप धुप से बचने के लिए लोशन का इस्तेमाल तो करती हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। कभी-कभी लड़कियां सही जानकारी ना होने के कारण गलत सनस्क्रीन लोशन खरीदती हैं। इससे उनकी त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। सूरज की हानिकारक किरणें जब हमारे शरीर पर पड़ती हैं तो त्वचा काली होने लगती है। आज हम बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही टिप्स जिन्हें आपको जानकारी मिलेगी।

-अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो आप हमेशा स्प्रे और जेल सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपकी त्वचा ऑयली नहीं होगी।

-हमेशा ऐसी सनस्क्रीन लोशन खरीदें जो आपकी त्वचा को नेचुरल लुक दे और साथ ही आपकी त्वचा के चिपचिपापन और पसीने को भी रोक सके।

-सूरज की यूवीए और यूवी किरणों के प्रभाव से त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी होता है। इससे त्वचा काली नहीं पड़ती है और टैनिंग की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।

-सनस्क्रीन लोशन खरीदते वक़्त उसकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें, जिससे आपकी त्वचा को कोई नुकसान ना हो।

19-03-2021
भुना चना और गुड़ खाइए, शरीर रहेगा रोगमुक्त 

रायपुर। चना खाने का फायदा होता है ये बात तो हम सदियों से सुनते आ रहे हैं। लेकिन आपको पता है क्या रोजाना चना खाने से शरीर को कार्बोहाइड्रेट, चिकनाई, रेशा, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स जैसे पोषक तत्व मिलते है। साथ ही यदि आप गुड़ के साथ इसका सेवन कर रहे हैं तो इसके फायदे दोगुने हो जाते हैं। भुने चने और गुड़ खाने से शरीर रोग मुक्त रहता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सेवन से कुष्ठ रोग समाप्त हो जाता है। भुने चने और गुड़ खाने से शरीर की चर्बी कम होती है। साथ ही वजन भी नियंत्रित रहता है। भुन चने और दूध का सेवन करने से मेल सीमन का पतलापन दूर होता है।

02-03-2021
जानिए भगवान ​शिव शरीर पर क्यों रमाते है भस्म ?

रायपुर। सनातन धर्म में भगवान शिव की महिमा का बखान अक्सर सुनने को मिलता है। शिवजी का न आदि है और न ही अंत है। शास्त्रों में शिवजी के स्वरूप के बारे में कई महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख है। शिवजी का स्वरूप सभी देवी-देवताओं से भिन्न है। जहां सभी देवी-देवता दिव्य आभूषण और वस्त्र आदि धारण करते हैं। भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं, उनके आभूषण भी विचित्र है। 
शिवजी शरीर पर भस्म क्यों रमाते हैं? इस संबंध में धार्मिक मान्यता यह है कि भगवान शिव को मृत्यु का स्वामी माना गया है और शिवजी शव के जलने के बाद बची भस्म को अपने शरीर पर धारण करते हैं। इस प्रकार शिवजी भस्म लगाकर हमें यह संदेश देते हैं कि हमारा शरीर नश्वर है। एक दिन इसी भस्म की तरह मिट्टी में विलिन हो जाएगा। इसलिए हमें इस नश्वर शरीर पर घमंड नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति कितना भी सुंदर क्यों न हो, मृत्यु के बाद उसका शरीर इसी तरह भस्म बन जाएगा।

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