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19-07-2020
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, 30 प्रतिशत रियायत पर लौह अयस्क उपलब्ध कराने किया आग्रह

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर बस्तर में स्टील उद्योग को एनएमडीसी के माध्यम से 30 प्रतिशत रियायत पर लौह अयस्क उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे बस्तर में बड़े पैमाने पर स्टील उद्योगों का संचालन और इसके जरिए बड़े पैमाने पर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इससे बस्तर के विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इस बात का उल्लेख भी किया है कि, राज्य शासन की ओर से भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी को इस आशय का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।
मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि एनएमडीसी की ओर से दंतेवाड़ा जिले में विगत लगभग आधी शताब्दी से बड़ी मात्रा में लौह अयस्क का खनन किया जा रहा है। लौह अयस्क की प्रचुरता के बाद भी विषम परिस्थितियों के विद्यमान होने के कारण निजी उद्यमियों के लिए बस्तर में स्टील उद्योगों की स्थापना लाभप्रद नहीं है। यदि एनएमडीसी की ओर से बस्तर में स्टील निर्माण किए जाने वाले निवेशकों को लौह अयस्क 30 प्रतिशत की छूट पर दिया जाए, तो इससे बस्तर अंचल में छोटी-बड़ी अनेक स्टील निर्माण इकाईयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।  स्थानीय निवासियों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री ने अवगत कराया है कि राज्य शासन की ओर से एनएमडीसी को इस आशय का औपचारिक प्रस्ताव प्रेषित किया जा चुका है।

 

23-01-2020
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को लिखा पत्र, मूल्य वृद्धि से उद्योगों को हो रही कठिनाईयों की दी जानकारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्रीय इस्पात धर्मेन्द्र प्रधान को छत्तीसगढ़ के लौह खनिज आधारित लघु उद्योगों और स्पंज आयरन उद्योगों को एनएमडीसी की प्रदेश में संचालित लौह अयस्क की खदानों से आयरन ओर रियायती दर पर सुगमता से उपलब्ध कराने के संबंध में पत्र लिखा है। भूपेश बघेल ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री से इस वर्ष जनवरी माह में एनएमडीसी द्वारा लौह अयस्क के मूल्य में की गई वृद्धि तत्काल प्रभाव से वापस लेने और छत्तीसगढ़ के लौह खनिज आधारित लघु उद्योगों और स्पंज आयरन उद्योगों के हित में उचित दीर्घकालिक रियायती दर निर्धारित करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि मुझे स्पंज आयरन ओर एसोसिएशन के माध्यम से अवगत कराया गया है कि एनएमडीसी द्वारा खनिज आयरन ओर लम्प (डीआरसीएलओ) के 3 जनवरी 2020 से पूर्व लागू दर के बेसिक मूल्य में प्रति टन 230 रूपए की वृद्धि की गई है। इसके बाद पुनः 22 जनवरी 2020 को एनएमडीसी के द्वारा खनिज आयरन ओर लम्प (डीआरसीएलओ) के मूल्य में 470 रूपए प्रति टन की वृद्धि की गई है। इस प्रकार विगत मात्र 16 दिनों में खनिज आयरन ओर लम्प (डीआरसीएलओ) के बेसिक मूल्य में 700 रूपए की वृद्धि की गई है। इस मूल्य के आधार पर खनिज की रायल्टी एवं अन्य कर को मिलाकर आयरन ओर की कीमत में कुल 875 रूपए प्रति टन की वृद्धि हो गई है। इस वृहद स्वरूप की मूल्य वृद्धि के कारण उत्पादित इस्पात के मूल्य में 2000 रूपए प्रति टन की वृद्धि हो रही है।

भूपेश बघेल ने पत्र में यह भी लिखा है कि पिछले एक महीने में स्टील की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन पहले से ही उत्पादन की लागत में वृद्धि हुई थी। स्टील की कीमत में बढ़ोत्तरी उद्योगों के लिए राहत का विषय था, किन्तु एनएमडीसी द्वारा आयरन ओर की दरों में अप्रत्याशित वृद्धि के बाद एनएमडीसी की खदानों से आयरन ओर प्राप्त करने में प्रदेश के स्पंज आयरन तथा स्टील उद्योगों के संचालन में वृहद कठिनाई तथा इस्पात के उत्पादन में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। जबकि एनएमडीसी द्वारा अपनी खदानों में क्षमता के अनुसार अधिकतम उत्पादन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री प्रधान को पत्र में लिखा है कि राज्य शासन द्वारा विगत माह में दक्षित बस्तर दंतेवाड़ा जिले में एनएमडीसी की 4 आयरन ओर खदानों की लीज 20 वर्ष की अवधि विस्तार के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें यह शर्त उल्लेखित है कि एनएमडीसी द्वारा राज्य में संचालित लौह अयस्क आधारित उद्योगों को उनके आवश्यकतानुसार लौह अयस्क की आपूर्ति निरंतर बनाई रखी जानी होगी। उक्त शर्त की पूर्ति तभी संभव हो पाएगी जब एनएमडीसी द्वारा दीर्घकालिक उचित रियायती दर का निर्धारण होगा।

भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में विभिन्न खनिजों के अकूत भण्डार विद्यमान हैं, जिनमें से आयरन ओर एक प्रमुख खनिज है। विश्व स्तर की खनिज आयरन ओर की खदानें राज्य के दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले में हैं,जहां एनएमडीसी की कुल 5 व्यवसायिक खदानें संचालित हैं। प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में खनिज आयरन ओर आधारित लघु एवं स्पंज आयरन संयंत्र संचालित हैं,जिसे एनएमडीसी की अपर्युक्त लौह अयस्क खदानों से लौह अयस्क रियायती दर पर क्रय किया जाता है। प्रदेश में स्पंज आयरन एसोसिएशन कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इण्डस्ट्री (सीआईआई) द्वारा राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के माध्यम से प्रदेश में संचालित स्पंज आयरन उद्योगों को सुगमता से संचालन हेतु आधारभूत आवश्यकता के अनुसार आयरन ओर उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर लिखा गया है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में केन्द्रीय मंत्री को बताया है कि राज्य शासन द्वारा इस संबंध में 11 जुलाई 2019 को अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक, एनएमडीसी लिमिटेड को पत्र प्रेषित कर राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के माध्यम से प्राप्त प्रस्ताव के परिप्रेक्ष्य में खनिज आयरन ओर को सुगमता से रियायती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए आग्रह किया गया है। जिसके परिप्रेक्ष्य में एनएमडीसी ने 25 सितम्बर 2019 के पत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की औद्योगिक इकाईयों के लिए खनिज आयरन ओर की दर में जून 2019 से 13 प्रतिशत कमी किए जाने एवं मांग के अनुसार स्पंज आयरन ओर (डीआरसीएलओ) छत्तीसगढ़ राज्य की औद्योगिक इकाईयों को प्राथमिकता से आपूर्ति किए जाने तथा स्पंज आयरन उद्योगों में सीधे उपयोग हेतु आयरन ओर उपलब्ध कराने के संबंध में लिखा है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री ने अनुरोध किया है कि प्रदेश की एनएमडीसी की खदानों से छत्तीसगढ़ राज्य में लौह अयस्क आधारित उद्योगों और स्पंज आयरन उद्योगों को रियायती दर पर आवश्यकतानुसार लौह अयस्क उपलब्ध कराने के लिए 20 जनवरी 2020 को की गई मूल्य वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए तथा उचित दीर्घकालिक रियायती दर निर्धारित कर लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए विशेष पहल करते हुए समुचित कार्यवाही की जाए।

 

18-12-2019
 उद्योगों को लौह अयस्क आपूर्ति की शर्त पर बढ़ाई गई एनएमडीसी खदान की लीज

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की बैलाडीला लौह अयस्क खदान की लीज 20 वर्षों के लिए बढ़ा दी गई है। छत्तीसगढ़ के उद्योगों के विकास एवं स्थानीय रोजगार को उत्तरोत्तर वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बैलाडीला से एनएमडीसी द्वारा खनन किए गए लौह अयस्क की उपलब्धता निरंतर एवं प्राथमिकता के साथ छत्तीसगढ़ में स्थित उद्योगों को मिलें यह सुनिश्चित करने की शर्त के साथ ही खनिपट्टा विस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड के चार खनिपट्टों को 1965 के पश्चात अभी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के अधीन बनाए गए नियमों के तहत राज्य शासन द्वारा खनिज (सरकारी कम्पनी द्वारा खनन) नियम, 2015 के अंतर्गत विस्तारण का स्वीकृति जारी की गई है। एनएमडीसी लौह अयस्क खनन के क्षेत्र में देश का सबसे बडा सार्वजनिक उपक्रम है एवं उनकी लगभग तीन चौथाई खनिज उत्पादन छत्तीसगढ़ के बैलाडीला पहाडि़यों से होता है। छत्तीसगढ़ के उद्योगों के विकास एवं स्थानीय रोजगार को उत्तरोत्तर वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बैलाडीला से एनएमडीसी द्वारा खनन किए गए लोह अयस्क की उपलब्धि निरंतर एवं प्राथमिकता के साथ छत्तीसगढ़ में स्थित उद्योगों को मिलें यह सुनिश्चित करने की शर्त के साथ ही खनिपट्टा विस्तारण करने के निर्देश दिया गया। तदानुसार खनिज साधन विभाग द्वारा खनि रियायत नियम, 2016 के नियम 12(1)(आई) के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित लोह अयस्क आधारित उद्योगों को उनके आवश्यकतानुसार खनिज लौह अयस्क की आपूर्ति निरंतर बनाए रखने की शर्त के साथ खनि पट्टों का विस्तारण आदेश जारी किया गया है।

2015 में भारत सरकार द्वारा खनिज अधिनियम एवं नियमो में लाए गए संशोधन के पश्चात कई राज्यों में लौह अयस्क खदाने 2020 मार्च के बाद जब तक नये सिरे से नीलामी ना हो जाय तब तक बंद होने की संभावनाएं बनी हुई है। इससे स्टील उद्योग भी कच्चे माल उपलब्धता को लेकर बेहद चिंतित है। समय पर की गई खनिपट्टा विस्तारण से एवं उसमें स्थानीय उद्योगों की निरंतर लौह अयस्क उपलब्ध होने के रास्ता निकालने से राज्य एवं जनता के हित को ध्यान में रखा गया। एनएमडीसी द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 24 मिलियन मीट्रिक टन लौह अयस्क का उत्पादन किया जाता है एवं स्थानीय उद्योगों द्वारा लगभग 7 मिलियन मीट्रिक टन की आवश्यकता बताई जा रही है।

जिला कार्यालय दंतेवाड़ा के प्रतिवेदन के अनुसार आवेदित क्षेत्र में लौह अयस्क पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है इसलिए जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा की तहसील कुआकोंडा स्थित बैलाडीला डिपॉजिट नंबर 14 एनएमजेड कंपार्टमेंट नंबर 626,627, 638,639 और 640 के कुल रकबा 506.742 हेक्टेयर क्षेत्र पर खनिज लौह अयस्क के स्वीकृत खनिपट्टा को मैसर्स नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में खनिज (सरकारी कंपनी द्वारा खनन) नियम 2015 के परिपेक्ष में 20 वर्ष के लिए 7 दिसंबर 2015 से 6 दिसंबर 2035 तक (कुल अवधि 70 वर्ष) के लिए कुछ शर्तों के साथ विस्तारित किया गया है। एनएमडीसी को एमएमडीआर एक्ट 1957, वन संरक्षण अधिनियम 1960, वन,पर्यावरण अधिनियम 1980 के तहत सभी नियमों और निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना होगा। इसी तरह खनिज (परमाणु और हाइड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों से भिन्न) रियायत नियम 2016 के नियम के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में संचालित लौह आधारित उद्योगों को उनके आवश्यकतानुसार लौह अयस्क की आपूर्ति निरंतर बनाए रखी जानी होगी। खनि पट्टा स्वीकृत आदेश दिनांक 20 अप्रैल 1965 एवं नवीनीकरण आदेश दिनांक 29 जून 2002 में उल्लेखित अन्य शर्तें यथावत लागू रहेंगी।

04-11-2019
राज्योत्सव: स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी स्टॉल में जाकर खनिजों के बारे में ले रहे जानकारी

रायपुर। विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए राज्योत्सव में लगाए गए खनिज साधन विभाग का स्टॉल जिज्ञासा और कौतूहल का केन्द्र बना हुआ है। स्कूल, कॉलेज के विद्यार्थी और युवा यहां प्रदर्शित डोलोमाइट, ग्रेफाइट, बॉक्साइट, बेन्डेट हेमेटाइट क्वार्टजाइट, गेलेना जैसे अनेक बहुमूल्य खनिज पदार्थों को देखने का अवसर मिल रहा है तथा इन खनिजों के बारे में दिलचस्पी के साथ जानकारी भी ले रहे हैं। साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्योत्सव में खनिज गतिविधियों एवं योजनाओं की महत्वपूर्ण उपलब्धियों की जानकारी जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है। खनिज साधन विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों में पारदर्शिता एवं प्रक्रिया के सरलीकरण के उद्देश्य से विभाग द्वारा वेब बेस्ड ‘खनिज ऑनलाईन पोर्टल का भी प्रदर्शन किया जा रहा है। पोर्टल के तहत प्रदेश में एसईसीएल, एनएमडीसी, बीएसपी, बाल्को, हिंडालको सहित अनेक सीमेंट संयंत्रों एवं क्रशर, वॉशरी संचालकों द्वारा सफलतापूर्वक खनिज आधारित व्यवसाय का संपादन किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल के तहत प्रथम फेज में मुख्य खनिज तथा कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूनापत्थर खानों में सिंगल पॉइंट पेमेंट, ऑनलाईन आवेदन, ई-परमिट, ई-ट्रांजिट पास, खनिज वाहनों का ई-पंजीयन इत्यादि सुविधाओं से जहां एक ओर इस कार्य में संलग्न व्यवसायियों, संस्थानों का कार्य व्यवस्थित एवं सरलीकृत हो गया है। वहीं वर्ष में विभाग को भी खानों के रेगुलेशन में भी सुविधा हुई है। खनिज ऑनलाईन पोर्टल में माह अक्टूबर 2019 तक कुल 108 लीज होल्डर्स, 159 लायसेंसी, 2520 एण्ड यूजर्स एवं 51 हजार 740 वाहन सफलतापूर्वक पंजीकृत होकर कार्य कर रहे हैं। पोर्टल से पांच हजार 611 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है एवं 31 लाख से अधिक ई-ट्रांजिट पास जारी किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि आईटी क्षेत्र में हो रहे सतत बदलावा एवं खनिज ऑनलाइन योजना अंतर्गत वर्तमान में संचालन की उपर्युक्त स्थित, ट्रांजेक्शनल फैक्ट्स के अलावा इसके अंतर्गत प्रमुख व्यवस्था, स्टेकहोल्डर्स की सुविधा एवं पोर्टल को और प्रभावी करने के उद्देश्य से खनिज ऑनलाईन 2.0 प्रस्तावित किया गया है। प्रस्तावित खनिज ऑनलाईन 2.0 परियोजना में नये मॉड्यूल जैसे मोबाइल एप्लीकेशन, व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, कमाण्ड कंट्रोल सेंट्रल जैसे विभिन्न नवाचार के साथ खान एवं खनिज संबंधी सम्पूर्ण कार्य डिजिटल और पेपरलेस करते हुए खनिज ऑनलाइन को अपने नए स्वरूप में बहुआयामी और सारे हितधारको के लिए सरल बनाया जा रहा है। 

03-11-2019
मुख्यमंत्री ने डीएमएफ के मूल नियम में किये गये संशोधनों के संकलन का किया विमोचन 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डीएमएफ के मूल नियम में अब तक किए गए संशोधनों के संकलन का विमोचन राज्योत्सव के दौरान खनिज विभाग के स्टॉल के निरीक्षण के दौरान किया। राज्योत्सव के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी में खनिज संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के स्टॉल में सभी वर्ग के लोगों की अपार भीड़ उमड़ रही है। खनिज संसाधन विभाग की प्रदर्शनी में विभाग की गतिविधियों, उपलब्धियों तथा खनिज नमूनों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा अन्य वरिष्ठ मंत्रीगणों द्वारा पैवेलियन का भ्रमण किया गया तथा प्रदर्शनी की सराहना की। डीएमएफ के नियम के नवीन संशोधन 14 अगस्त 2019 को राज्य शासन द्वारा किया गया है। मूल नियम मे अब तक किये गये संशोधन का संकलन कर इसका विमोचन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वरिष्ठ मंत्रीगणों एवं विभागीय विशेष सचिव की गरिमामयी उपस्थिति मे खनिज विभाग के स्टाल मे किया गया। छत्तीसगढ़ में खनिजों के प्रचूर भण्डार है, जो राज्य के विकास की धुरी है। इस राज्य में अनेक महत्वपूर्ण खनिज आधारित वृहत उद्योग कार्यशील है और खनिज आधारित उद्योगों को अपार संभावनाएं है। खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना तथा परिचालन के लिए आवश्यक मूलभूत संभावनाएं भी प्रदेश में उपलब्ध है। प्रदेश में प्रमुख रूप से कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर, डोलोमाइट, बाक्साइट, टिन अयस्क, हीरा एवं स्वर्ण है। इनके अलावा भी विभिन्न औद्योगिक महत्व के खनिज, जेमस्टोन तथा भवन निर्माण हेतु उपयोगी खनिज प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है। 
राज्य में देश का लगभग 19.6 प्रतिशत लौह अयस्क (4031 मिलियन टन), 18 प्रतिशत कोयला (54912 मिलियन टन), तथा 8959 मिलियन टन चूना पत्थर के भण्डार उपलब्ध हैं। देश का 11 प्रतिशत सीमेंट छत्तीसगढ़ में उत्पादित होता है। देश को 13 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति छत्तीसगढ़ से होती है। देश के कुल खनिज उत्पादन मेें छत्तीसगढ़ 16 प्रतिशत का योगदान देता है। छत्तीसगढ़ राज्य में गौण खनिज रेत से संबंधित नियमों में संशोधन कर नवीन नियम ‘छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2019‘ बनाया गया है। जिसके तहत नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) प्रक्रिया के द्वारा पारदर्शिता के साथ रेत खदानों का आबंटन किया जा रहा हैं। प्रथम चरण में नवीन नियम के तहत प्रदेश स्तर पर 168 रेत खदानों हेतु एनआईटी जारी कर रेत खदान आबंटन हेतु खुली निविदा पारदर्शी तरीके से किया जाकर 02 वर्षाें हेतु खदान आबंटन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। 
     
 

11-06-2019
सीएम भूपेश बघेल और बस्तर के सांसद,विधायकों में हुई चर्चा, 4 मांगें हुई स्वीकार

रायपुर। एनएमडीसी बैलाडीला लौह अयस्क खान परियोजना दंतेवाड़ा के डिपाजिट 13 के संबंध में मंगलवार को मंत्रालय में बस्तर के सांसद दीपक बैज और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के नेतृत्व  प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में बस्तर के अन्य विधायक भी उपस्थित रहे। सीएम भूपेश बघेल ने इस आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल की मांगों को स्वीकार किया है। इसमें वनों की कटाई पर तुरंत रोक, वर्ष 2014 के फर्जी ग्रामसभा के आरोप की जांच कराई जाएगी, क्षेत्र में संचालित कार्यो पर तत्काल रोक लगाई जाएगी और राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को पत्र लिखकर जन भावनाओं की जानकारी दी जाएगी। बैठक में वनमंत्री मो.अकबर भी मौजूद थे।

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