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29-09-2020
इस वर्ष मानसून की विदाई हो सकती है तय समय पर

रायपुर। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो गई है। इसी क्रम में मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों से लौट गई है। मानसून इस समय हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, अमृतसर, भटिंडा से होकर वापस लौट रही है। इसके अलावा दो-तीन दिनों में मानसून देश के अन्य राज्यों से भी विदा हो जाएगी। मौसम विभाग की नियमित रिपोर्ट की माने तो देश के पश्चिमी भागों से मानसून की विदाई शुरू हो गई है। अनियमित हो चुकी मानसूनी द्रोणिका के चलते इस तरह की स्थिति बन रही है। वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान की ओर से लौटना शुरू हो गई है। आगामी दो-तीन दिनों में मानसून देश के कई अन्य राज्यों से वापस हो जाएगी।

वर्तमान में देश के पश्चिमी भागों में निचले स्तर पर एक एंटीसाइक्लोनिकल परिसंचरण बन जाने, नमी की मात्रा और वर्षा में पर्याप्त कमी के मद्देनजर दक्षिण पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ भागों से विदा हो गई है। इसके अलावा आगामी दो-तीन दिनों में कुछ और राज्यों से मानसून की विदाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन चुकी है। इसमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के कुछ भागों से मानसून जल्द विदा हो सकती है। इधर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो आमतौर पर छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में हो जाती है। इस लिहाज से 8 अक्टूबर से 15 अक्टूबर के मध्य दक्षिण पश्चिम मानसून प्रदेश से विदा हो जाता है, लेकिन इस वर्ष मानसून की विदाई में थोड़ा विलंब हो सकता है। हालांकि परिस्थितियां अनुकूल रही तो मानसून अपने तय समय पर विदा हो जाएगा।

04-08-2020
जिले में 2 लाख 71 हजार 268 लोगों की हुई मलेरिया जांच

बीजापुर। मानसून की शुरुआत के पश्चात् जिले में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का द्वितीय चरण विगत 15 जून से 31 जुलाई तक संचालित किया गया। नक्सली प्रभावित बीजापुर जिले के सभी ब्लाकों में कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में सबसे पहले पहुंचविहीन इलाके के गांवों में मलेरिया मुक्त अभियान को शुरु किया गया। अभियान के द्वितीय चरण के तहत् सभी घरों का सर्वेक्षण कर निर्धारित लक्ष्य 2 लाख 66 हजार 759 के विरुद्ध 2 लाख 71 हजार 268 लोगों का मलेरिया जांच की गई। मलेरिया सर्वेक्षण दलों द्व़ारा इस दौरान कुल 3 हजार 766 लोगों की रिर्पोट मलेरिया पाॅजीटिव्ह पाई गई।इन सभी लोगों को मलेरिया का सम्पूर्ण उपचार करने सहित मलेरिया से बचाव संबंधी जानकारी दी गई। इस बारे में मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.बी.आर. पुजारी बताते हैं कि मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के प्रथम चरण के दौरान जिले का वार्षिक परजीवी सूचकांक 54 था, यह हमारे लिये क्षेत्र की विषम परिस्थितियों के बीच लक्ष्य पूर्ण करने की कठिन चुनौती थी। मद्देनजर रखने हुए इसे जिले में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के द्वितीय चरण को 6 जून से आरंभ किया गया,जिसे सघन रुप से संचालित कर पूरा किया गया है। यही वजह है कि अब अभियान के दूसरे चरण के पश्चात् जिले में वार्षिक परजीवी सूचकांक कम होकर 13 पर आ गया है। यह मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के तहत् बीजापुर जिले के लिये बहुत बड़ी सफलता है। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर संभाग के लोगों को मलेरिया से मुक्त करने की दिशा में बस्तर संभाग में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान की शुरुआत की। इसके तहत् प्रथम चरण 15 जनवरी से 14 फरवरी 2020 तक चलाया गया। इसके पश्चात् 15 जून से 31 जुलाई 2020 तक द्वितीय चरण संचालित किया गया। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान का तीसरा चरण आगामी नवम्बर महीने में चलाया जायेगा,जिससे बस्तर अंचल में मलेरिया से जल्द ही मुक्ति मिल सकेगी।

 

23-07-2020
मौसम खुशनुमा, भारी बारिश के आसार

रायपुर। प्रदेश में मानसून के सिस्टम सक्रिय रहने से कई जगहों पर रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही। सुबह से ही बदल छाए हुए हल्की बारिश भी बीच-बीच में होती रही। मौसम विभाग के मुताबिक भारी बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और भारी बारिश के आसार है। मौसम खुशनुमा होने के कारण सुबह से ही घरों में भजिया, पूड़ी और चाय का आनंद लेते लोग नजर आए।

18-07-2020
मानसून में चिपचिपे बालों से है परेशान, तो इस तरह रखे ध्यान  

रायपुर। मानसून के मौसम में बाल चिपचिपे या तैलीय हो जाते हैं। मौसम के बदलने से बालों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता हैं। बालों के चिपचिपेपन या तैलीय हो जाने से कही बहार जाने में बहुत परशानी होती है। मानसून में बाल जल्दी गंदे और तैलीय हो जाते हैं। अगर मानसून में आप बालों का ध्यान रखना चाहते हैं। तैलीय बालों की देखभाल के कुछ टिप्स जिन्हें अपनाकर आप बालों के चिपचिपेपन से राहत पा सकते हैं। 

बारिश में न भीगे : 

बरसात का पानी बालों के लिए बहुत ख़राब होता है। अगर आप गलती से भीग भी गए तो घर आते ही तुरंत अपने बालों को शैम्पू करें।

तैलीय बालों को नियमित रूप से धोये :

अपने सिर के बाल नियमित रूप से धोइए। बालों को धोने के लिए अच्छे शैम्पू का प्रयोग करें। 

तैलीय बालों को सप्ताह में तीन बार बालों को धोएं :

ऑयली हेयर को सप्ताह में कम से कम तीन बार अवश्य धोना चाहिए जिससे बाल साफ रहते हैं और तैलीय कम होती है। 

तैलीय बालों को बांध कर न रखे :

अपने बालों को कभी कभी खुला भी रखिये। हमेशा बांधने से आयल एक जगह इकठा हो जाता है, जिससे बाल तैलीय लगते हैं।

कंघी की सफाई हमेशा करें :

बालों की साफ-सफाई का ध्यान रखते तो आप रखते ही है, पर कंघी को साफ करना भूल जाते हैं जो कि सबसे जरुरी बात है। हर हफ्ते बालों में इस्तेमाल करने वाली कंघी को साफ करना जरुरी है। रोज इस्तेमाल करने वाली कंघी को कुछ देर धूप में रखें और अगर लकड़ी की कंघी का इस्तेमाल करें तो वो बहुत अच्छी बात है।

तैलीय बालों के लिए विटामिन सी और मिनरल्स जरुरी होती है :  

विटामिन सी और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण, नींबू का रस सिर की त्वचा में अतिरिक्त चिपचिपेपन को सोखता है। यह ज़्यादा तेल के उत्पादन को रोकता है। इसीलिए, ऑयली हेयर वालों को नींबू का रस बालों में लगाना चाहिए। सादे पानी में नींबू का रस मिक्स करें। इसे,  सिर की त्वचा पर 5-10 मिनट के लिए लगाकर रखें। फिर, हल्के गुनेगुने पानी से बालों को शैम्पू करें।

17-07-2020
महासमुंद में 595 मिलीमीटर औसत बारिश, बागबाहरा में सर्वाधिक 

रायपुर/महासमुंद। चालू मानसून के दौरान विगत एक जून से आज 17 जुलाई तक 595 मिलीमीटर औसत वर्षा जिले में रिकार्ड की गई है। इस दौरान सबसे ज्यादा 741.6 मिलीमीटर बारिश बागबाहरा तहसील में हुई है। कार्यालय कलेक्टर भू-अभिलेख नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार बसना तहसील में 697 मिलीमीटर, सरायपाली में 679 मिलीमीटर, महासमुंद में 484 मिलीमीटर और पिथौरा में सबसे कम 374 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। बता दें कि जिले की सभी पांच तहसीलों में मानसून की संभावित औसत वर्षा सबसे अधिक बसना तहसील में 1268.7 मिलीमीटर महासमुंद की 1265.8 मिलीमीटर सरायपाली की 1225.6 मिलीमीटर पिथौरा की 1172.8 मिलीमीटर और सबसे कम बागबाहरा तहसील की 1026.9 मिलीमीटर है। इस प्रकार मानसून के दौरान जिले की औसत वर्षा 1192 मिलीमीटर है।

10-07-2020
मानसून हिमालय में मना रहा छुट्टी, इधर मेहमानों की तरह आए बादल और बरसकर रवाना हो गए

रायपुर। राजधानी में मौसम ने करवट बदली तो ऐसा लगा कि झूमकर बरसेंगे बादल, लेकिन मेहमान की तरह आए और कुछ देर बरस कर रवाना हो गए। ये मौसम का छलावा है,इसे मानसूनी बारिश ना समझें, क्योंकि मानसून हिमालय की तराई पर सैर कर रहा है। वो तो भला है द्रोणिका का,जो प्रदेश का खयाल रख रही है, वरना मानसून ने तो उम्मीदों पर ब्रेक ही लगा दिया है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा कि मानसून द्रोणिका का पूर्वी छोर हिमालय की तराई में चले जाने के कारण प्रदेश में मानसून ब्रेक जैसी स्थिति बन गई है। बारिश की मात्रा और क्षेत्र दोनों घट गई है। दक्षिण ओड़ीसा और उसके आसपास स्थित द्रोणिका के प्रभाव से प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हुई। उन्होंने कहा कि एक द्रोणिका दक्षिण पूर्व उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ होते हुए दक्षिण ओड़िसा तक 4.5 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। प्रदेश में 11 जुलाई को कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। प्रदेश में अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है।

 

10-07-2020
मानसून में खान-पान का रखें विशेष ध्यान, क्या खाएं और क्या न खाएं

रायपुर। वैश्विक महामारी कोरोना से पूरा देश जूझ रहा है। वहीं मानसून के साथ मौसमी बीमारियों को आमंत्रण मिल चुका है। बता दें कि बारिश के मौसम में ज्यादातर बीमारियां हमारे खान-पान के कारण होती हैं। सामान्य फ्लू, बुखार, बैक्टीरियल, वायरल और फंगस से युक्त भोजन हमें बीमार करते हैं। इस मौसम में फैलने वाली बीमारियों से खुद को बचाने के लिए आप अपने खान-पान में थोड़ा बदलाव करें। बारिश के मौसम में खुद को फिट रखना है या परिवार के लोगों की सेहत का ध्यान रखना है तो भोजन में दाल, सब्जियां, कम वसा वाली चीजें ज्यादा शामिल करें। प्रोटीन के अलावा बीटा कैरोटीन, बी काम्प्लेक्स विटामिन, विटामिन सी, ई, सेलेनियम, जिंक, फॉलिक एसिड, आयरन, कापर, मैग्नीशियम, प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक आहार भी शरीर के लिए अच्छे होते हैं। इस दौरान अपने खान-पान में इन सावधानियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

गर्मागर्म सूप और मसाले वाली चाय का करे सेवन : 
बारिश के बाद शरीर को ठंडक से बचाने के लिए अदरक की लच्छों के साथ सूप का आनंद ले सकते हैं। यह ठंड से ही नहीं फ्लू से भी आपको बचाता है। साथ ही शरीर को थकान और टूटन से बचाने में मदद करता है। उन लोगों के लिए यह अच्छा आहार है जो बरसात के दिनों में मेहनत नहीं कर पाते हैं। गले के संक्रमण में एक कटोरी सूप अच्छा आराम पहुंचाता है। साथ ही आपका पेट भी भर जाता है।

एक कप गर्म कड़क चाय या मसाला चाय का कोई जवाब नहीं : 
बरसात के दिनों में यह उपयुक्त पेय है। वही लॉन्ग और दालचीनी वाली मसाला चाय पीने से गले के संक्रमण और जुकाम से बचा जा सकता है। बारिश के दौरान प्याज और अदरक का सेवन ज्यादा करना चाहिए भोजन में रेशेदार फलों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। नींबू में विटामिन सी मिलता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वहीं पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है। इसलिए इसे खाने में शामिल करना चाहिए। इसे चटनी और सलाद में प्रयोग करना चाहिए। बारिश के मौसम में पीने के पानी का खास ध्यान रखना चाहिए। हरी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि इसमें फंगस और बैक्टीरिया से ज्यादा पनपते हैं।

घर में बने पकौड़े ही खाए :
बारिश के दौरान हर कोई पकौड़े खाना पसंद करता है। हल्की फुहारों के साथ एक कप गर्म चाय और एक प्लेट पकोड़े का अलग ही आनंद हैं। प्याज पकोड़ा, पालक पकोड़ा, पनीर पकोड़ा, हरी मिर्च का पकोड़ा आदि बनाए जा सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि बारिश के दौरान बाहर के पकोड़े ना खाकर घर में बने पकोड़े खाए।

09-07-2020
नदी-नालों और पुराने पुल-पुलियों को सावधानी से करे पार : कलेक्टर

रायपुर/नारायणपुर। जिले में बाढ़ से होने वाली जनहानि और धनहानि को रोकने के मकसद से जिला स्तर पर तैयारियां पिछले माह से शुरू हो गई है। कलेक्टर सिंह ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा है कि नदी-नालों, पुराने पुल-पुलिया आदि को पार करते समय एहतियात बरतें। इसके साथ ही आपदा की जानकारी मिलने पर जिला स्तरीय बाढ़ कन्ट्रोल रूम में इसकी सूचना दें। यह कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम कर रहा है। नारायणपुर जिले में चालू मानसून के दौरान विगत एक जून से आज 8 जुलाई तक 414 मिलीमीटर औसत वर्षा रिकार्ड की गई है। नारायणपुर विकासखंड में 439 और ओरछा विकासखंड में 389 मिलीमीटर औसत वर्षा रिकार्ड की गई। कलेक्टर सिंह ने जन सामान्य से कहा कि वे अपने शहर या गांव में बाढ़ की संभावना और विगत वर्ष में बाढ़ के सबसे उच्च स्तरों को जानें। अपनी बहुमूल्य वस्तुओं और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखें। अपने नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य तथा सहायता केन्द्र की जानकारी रखें। आपातकालीन किट तैयार करें, जिसमें सूखा खाद्य पदार्थ, पेयजल, आवश्यक दवाएं, रेडियों, टॉर्च, जरूरी कागजात, आपात दूरभाष नम्बर सूची, मोमबत्ती, माचिस, रस्सी आदि शामिल हों तथा इन्हें उपयोग हेतु चालू हालत में रखें। बाढ़ की संभावना को देखते हुए पालतू जानवरों को पहले से ही सुरक्षित तथा ऊंचे स्थानों पर भेज दें या जल स्तरबढ़ रहा हो, तो उन्हें खुला छोड़ दें।

बाढ़ की चेतावनी मिलने पर उसका पालन करें, अपने पड़ोसियों को सूचित करें तथा सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर चले जाएं यदि स्थान छोड़ रहे हैं, तो अपने साथ आपाकालीन किट जरूर ले जाएं। घर छोड़ने से पहले बिजली का मुख्य स्विच, गैस और पानी के नलों को बंद कर दें एवं मित्रों व रिश्तेदारों को अपने प्रस्थान की जानकारी दें। पुलिस और दमकल अधिकारियों के अनुदेशों का पालन करें व उन्हें सहयोग दें, आपकी सुरक्षा उनका ध्येय है। उबाला हुआ या क्लोरीन की टेबलेट से साफ किया हुआ पानी पियें। सांप, विषधर प्राणियों से बचकर रहें, प्रायः बाढ़ के समय सांप के काटने की घटनाएं होती है। नवीनतम जानकारी हेतु स्थानीय मौसम और समाचार रिपोर्टों को सुनें। अपने आसपास वातावरण को साफ एवं सवच्छ रखें।कलेक्टर ने कहा कि बाढ़ का पानी न पियें और न ही उससे भोजन पकाएं। बाढ़ के पानी के सम्पर्क में आया हुआ खाद्य पदार्थ न खायें। बाढ़-ग्रस्त क्षेत्र में न जाएं तथा गाड़ी चलाने से बचें। मदद के बिना बाढ़ के पानी में न जाएं, बच्चों को बाढ़ के पानी के पास खेलने ना दें। उन बिजली उपकरणों का प्रयोग न करें, जो बाढ़ के पानी में भीगे हों। अफवाहें न फैलायें और न ही उन पर ध्यान दें।

08-07-2020
तेज व जरूरत से ज्यादा बारिश में सुरक्षा के उपाय और सुझाव बताये जनमानस को आपदा प्रबंधन विभाग ने

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने जन सामान्य के लिए इस मानसून के दौरान अत्याधिक वर्षा के दौरान बाढ़ इत्यादि से सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय और सुझाव दिए। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी निर्देशों के तहत जन सामान्य अपने शहर या गांव में बाढ़ की संभावना और विगत वर्ष में बाढ़ के सबसे उच्च स्तरों को जानें। अपनी बहुमूल्य वस्तुओं और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा करने की योजना बनाएं। प्राथमिक स्वास्थ्य तथा सहायता केन्द्र स्थलों की जानकारी रखें। आपातकालीन किट तैयार करें, जिसमें सूखा खाद्य पदार्थ, पेयजल, आवश्यक दवाएं, रेडियों, टॉर्च, जरूरी कागजात, आपात दूरभाष नम्बर सूची, मोमबत्ती, माचिस, रस्सी आदि शामिल हों तथा इन्हें उपयोग के लिए चालू हालत में रखें। बाढ़ की संभावना को देखते हुए पालतू जानवरों को पहले से ही सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर भेज दें या जल स्तरबढ़ रहा हो, तो उन्हें खुला छोड़ दें।स्थानीय प्राधिकरणों से बाढ़ की चेतावनी मिलने पर उसका पालन करें, अपने पड़ोसियों को सूचित करें तथा सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर चलें जाएं यदि स्थान छोड़ रहे हैं, तो अपने साथ आपाकालीन किट जरूर ले जाएं।

घर छोड़ने से पहले बिजली का मुख्य स्विच, गैस और पानी के नलों को बंद कर दें और मित्रों व रिश्तेदारों को अपने प्रस्थान की जानकारी दें। पुलिस और दमकल अधिकारियों के अनुदेशों का पालन करें व उन्हें सहयोग दें, आपकी सुरक्षा उनाका ध्येय है। उबाला हुआ या क्लोरीन की टेबलेट से साफ किया हुआ पानी पियें। सांप, विषधर प्राणियों से बचकर रहें, प्रायः बाढ़ के समय सांप के काटने की घटनाएं होती है। नवीनतम जानकारी के लिए स्थानीय मौसम और समाचार रिपोर्टों को सुनें।इसी प्रकार बाढ़ का पानी न पियें और न ही उससे भोजन पकाएं। बाढ़ के पानी के सम्पर्क में आया हुआ खाद्य पदार्थ न खायें न ही बाढ़ में मौजूद मछली और जलीय जीवों को न खायें। बाढ़-ग्रस्त क्षेत्र में न जाएं तथा गाड़ी चलाने से बचें। मदद के बिना बाढ़ के पानी में न जाएं, बच्चों को बाढ़ के पानी के पास खेलने ना दें। उन बिजली उपकरणों का प्रयोग न करें, जो बाढ़ के पानी में भीगे हों। जन प्राधिकणों द्वारा सुरक्षित घोषित किए जाने तक अपने घर वापस न आएं। अफवाहें न फैलायें और न ही उन पर ध्यान दें।बाढ़ की स्थिति में जन सामान्य को बचाव और सुरक्षा उपायों के जरिये बाढ़ की स्थिति में जान-माल की सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और सेहत की देखभाल कर सकेंगे।

07-07-2020
प्रदेश के अनेक स्थानों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार, रायपुर में ललचा रहे बादल  

रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। इधर रायपुर में सुबह से ही मौसम खुशनुमा बना हुआ है। धूप-छांव का खेल जारी है। सोमवार रात से ही बादल लोगों को ललचा रहे हैं लेकिन अभी शांत हैं। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा है कि एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और भारी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मानसून द्रोणिका चिन्हित निम्न दाब के क्षेत्र सौराष्ट्र और उसके आस-पास, इंदौर, पेंड्रा रोड, डाल्टनगंज और बंकोरा तक 3.6 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। एक चक्रीय चक्रवाती घेरा  उत्तर तटीय आंध्रप्रदेश और उसके आसपास 5.8 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। इसके प्रभाव से मंगलवार को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।

एक-दो स्थानों पर गरज चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और भारी बारिश होने की संभावना है। 8 जुलाई को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। बस्तर संभाग में एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है। रायपुर शहर में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। शाम के समय आसमान में बादल छाए रहेंगे। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 32 डिग्री और 26 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। अगले 72 घंटे में अधिकतम तापमान में 1 डिग्री की बढ़ोत्तरी हो सकती है।

 

06-07-2020
प्रदेश के उत्तरी भाग में अधिक मेहरबान रहेंगे बादल, कई जिलों के लिए  ऑरेंज और यलो अलर्ट जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिर सक्रिय हुए मानसून ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राजधानी सहित प्रदेशभर में रविवार को बादल झूमकर बरसे हैं। मौसम विभाग ने आगामी 24  घंटे के लिए प्रदेश के कई जिलों को ऑरेंज अलर्ट और आगामी 48 घंटे के लिए प्रदेश के कई जिलों को यलो अलर्ट में रखा है। मौसम विभाग ने राहत आयुक्त छत्तीसगढ़ शासन को इस संबंध में चेतावनी जारी की है।मौसम विज्ञानी आरके वैश्य ने प्रदेश के सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर, रायगढ़, कोरबा, बलौदाबाजार, महासमुंद, बेमेतरा, बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में एक दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। उन्होंने आगामी 24 घंटे के लिए इन जिलों के संबंध में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसी तरह प्रदेश के सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जशपुर, बस्तर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में एक दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। उन्होंने आगामी 48 घंटों के लिए इन जिलों के संबंध में यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा कि मानसून द्रोणिका मध्य समुद्र तल पर सौराष्ट्र, वंशवाड़ा, गुना, सतना डाल्टनगंज, निम्न दाब का क्षेत्र दीघा और उसके बाद पूर्व उत्तर पूर्व दिशा की ओर होते हुए उत्तर पूर्व बंगाल की खाड़ी तक स्थित है। निम्न दाब का क्षेत्र झारखंड के दक्षिण पूर्व और उसके आसपास 7.6 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। इसके कारण प्रदेश में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। प्रदेश में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा होने और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। प्रदेश के उत्तरी भाग में भारी वर्षा की संभावना ज्यादा है। 7 जुलाई को प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने या गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। चरम उत्तर और चरम दक्षिण छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने औरे भारी वर्षा होने की संभावना है।

 

 

 

 

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