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17-02-2020
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एयरटेल,वोडाफोन आइडिया और टाटा ने किया एजीआर बकाए का भुगतान

नई दिल्ली। एयरटेल के बाद अब वोडाफोन आइडिया और टाटा समूह ने सोमवार को सरकार को सांविधिक बकायों में से कुछ पैसे का भुगतान किया है। सूत्रों के अनुसार वोडाफोन आइडिया ने 2,500 करोड़ रुपये और टाटा समूह ने 2,190 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार ने दूरसंचार कंपनियों पर सकल समायोजित आय (एजीआर) के बकाए की वसूली को लेकर के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इस सख्ती के बीच भारती एयरटेल ने सोमवार को सांविधिक बकाया मदद में दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया। कंपनी ने कहा कि वह स्व-आकलनके बाद शेष राशि का भुगतान करेगी। सुनील मित्तल की अगुवाई वाली कंपनी ने दूरसंचार विभाग को दिये पत्र में कहा, 'भारती एयरटेल, भारतीय हेक्साकॉम और टेलीनोर की तरफ से 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।'
बता दें कंपनियों ने एजीआर वैधानिक बकाए का भुगतान करने के लिए दो साल की रोक के साथ 10 साल का समय देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर में सरकार द्वारा दूरंसचार कंपनियों से उन्हें प्राप्त होने वाले राजस्व पर मांगे गए शुल्क को जायज ठहराया था। भुगतान में देरी पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सकल राजस्व के बकाए का भुगतान करने के आदेश का अनुपालन न करने पर दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई और अवमानना का नोटिस जारी किया। 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस कंम्युनिकेशन, टाटा टेलीसर्विसेज और अन्य कंपनियों के एमडी और डेस्क अफसर को तलब किया। 

 

15-02-2020
दूरसंचार कंपनियां फिर से बढ़ा सकती है कॉल दरें, रिचार्ज कराना पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली। दो महीने के अंदर दूसरी बढ़ोतरी दूरसंचार कंपनियां द्वारा की जा सकती है। एजीआर का भुगतान करने के लिए मोबाइल कंपनियां रिचार्ज शुल्क में 25 फीसदी तक बढ़ोतरी कर सकती है। अगर कंपनियां टैरिफ वाउचर में 10 फीसदी भी इजाफा करती हैं, तो इससे उन्हें अगले 3 वर्षों में 35 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च ने अनुमान है कि कंपनियां अपने भुगतान का बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं और आने वाले समय में टैरिफ में एक बार फिर 20 से 25 फीसदी तक इजाफा हो सकता है। इससे पहले 1 दिसंबर, 2019 से कंपनियों ने अपने बिल में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की थी। साथ ही ग्राहकों को मिलने वाली कई तरह की सुविधाओं को भी खत्म कर दिया था। टैरिफ में 25 फीसदी बढ़ोतरी होने पर जियो का मौजूदा 149 रुपये का प्लान 186 रुपये का हो जाएगा। इसी तरह, एयरटेल का 219 रुपये का प्लान बढ़कर 273 रुपये, वोडा आइडिया का 199 वाला प्लान 248 रुपये का हो जाएगा। परामर्श फर्म कॉम फर्स्ट इंडिया के निदेशक महेश उप्पल ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए बुरी खबर है। खासतौर पर वोडा आइडिया के लिए परिस्थितियां पहले के मुकाबले बेहद संवेदनशील है, इसे एजीआर के रूप में सबसे ज्यादा 53 हजार करोड़ चुकाने हैं। कंपनी में 45.39 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली ब्रिटिश इकाई वोडाफोन के सीईओ निक रीड ने पिछले सप्ताह कहा था कि एजीआर के बाद भारत में स्थितियां काफी जटिल हो गई हैं और परिचालन मुश्किल हो रहा है।

वोडा-आइडिया के शेयर 23% गिरे, निवेशकों के 2,988 करोड़ डूबे

एजीआर पर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद वोडा आइडिया लिमिटेड के शेयरों 23 फीसदी की गिरावट आई। कंपनी ने गुरुवार को दिसंबर तिमाही में 6,438 करोड़ रुपये के घाटे का खुलासा किया था, जिसका भी निवेशकों पर असर पड़ा। बीएसई पर कंपनी के शेयर 23.21 फीसदी गिरकर 3.44 रुपये प्रति इकाई के भाव पर आ गए। वहीं, एनएसई पर 22.22 फीसदी गिरावट के साथ 3.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुआ। इससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण 2,988 करोड़ रुपये घटकर 9,884 करोड़ रुपये रह गया। पिछले तीन महीने में कंपनी की कुल आय 5 फीसदी कम हो गई है। हालांकि, भारती एयरटेल के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा का उछाल दिखा। 

एसबीआई चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि पूंजी जुटाना दूरसंचार कंपनियों पर निर्भर होगा और हो सकता है कि उन्होंने अभी तक इसकी व्यवस्था भी कर ली हो। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, अब यह दूरसंचार कंपनियों पर निर्भर है कि वे पैसा जुटाने के लिए क्या कदम उठाती हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने इंतजाम कर लिया होगा।  कुमार ने कहा कि बैंक ने दूरसंचार क्षेत्र को 29 हजार करोड़ का कर्ज दे रखा है और 14 हजार करोड़ गैर कोष आधारित एक्सपोजर है। कंपनियां अगर अपने एजीआर भुगतान के लिए बैंक से और कर्ज लने की अपील करती हैं, तो उस हालात में इस पर विचार किया जाएगा। एसबीआई के सकल एनपीए में दूरसंचार क्षेत्र की भागीदारी 9,000 करोड़ रुपये की है।

30-09-2019
यहां की जाती है खुर्सी और फर्नीचर की खेती, 11 लाख तक होती है मेज की कीमत

नई दिल्ली। आज तक अपने कई प्रकार की खेती के बारे में सुना होगा, लेकिन हम आज आपको जिस खेती के बारे में बताने जा रहे है उसे पढ़कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। इंग्लैंड में रहने वाले पति-पत्नी गेविन और एलिस मुनरो का कहना है कि  '50 साल पुराने किसी पेड़ को काटकर फर्नीचर बनाने से बेहतर है कि पौधों को फर्नीचर के आकार में ही उगाया जाए'। ये दंपति सालों से फर्नीचर के आकार में ही पौधे उगा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो अब तक 50 मेज, 100 लैंप और 250 कुर्सियां उगा चुके हैं। गेविन ने पौधों को फर्नीचर के आकार में उगाने की शुरुआत साल 2006 में की थी। उस समय उन्होंने कुल कुर्सियां उगाईं थी। इसके बाद तो उनके अंदर इस काम को करने का जुनून ही सवार हो गया। साल 2012 में गेविन ने एलिस से शादी कर ली। उसके बाद उन्होंने मिलकर एक कंपनी खोली और अपने आइडिया को एक कारोबार का रूप दे दिया।

हालांकि पहली बार जब उन्होंने फर्नीचर उगाया तो उनकी फसल बर्बाद हो गई थी। गेविन बताते हैं कि उन्हें फर्नीचर के आकार के पौधा उगाने का आइडिया तब आया था, जब उन्होंने एक बोनसाई के पौधे को देखा था, जो बिल्कुल किसी कुर्सी की तरह लग रहा था। पौधों को फर्नीचर की तरह बनाने में बहुत समय लगता है। इसके लिए पौधों की डालियों को उसी हिसाब से मोड़ना पड़ता है, जिस तरह का फर्नीचर बनाना हो। गेविन और उनकी पत्नी एलिस अब इस काम में माहिर हो चुके हैं। गेविन के मुताबिक, इस तरह उगाई गई एक कुर्सी आठ लाख रुपये में बिकती है। वहीं मेज की कीमत 11 लाख रुपये तक है, जबकि एक लैंप 80 हजार रुपये में बिकता है। जानकारी के मुताबिक, पौधे वाली एक कुर्सी बनाने में 6-9 महीने का समय लगता है, जबकि यह सूखने में भी इतना ही समय लेता है। इसके बाद ही यह बिकने के लिए तैयार होता है।

 

 

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