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18-09-2020
भूपेश बघेल ने कहा-केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के लिए अहितकारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, केन्द्र सरकार का एक राष्ट्र-एक बाजार अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है। इससे मंडी का ढांचा खत्म होगा, जो किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए लाभप्रद नहीं है। अधिकांश कृषक लघु सीमांत है, इससे किसानों का शोषण बढ़ेगा। उनमें इतनी क्षमता नहीं कि राज्य के बाहर जाकर उपज बेच सके। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलेगा। केन्द्र सरकार की ओर से आवश्यक वस्तु अधिनियम में किए गए संशोधन से आवश्यक वस्तुओं के भंडारण और मूल्य वृद्धि के विरुद्ध कार्यवाही करने मे कठिनाई होगी। कान्ट्रैक्ट फार्मिंग से निजी कंपनियों को फायदा होगा। सहकारिता में निजी क्षेत्र के प्रवेश से बहुराष्ट्रीय कंपनिया, बड़े उद्योगपति सहकारी संस्थाओं पर कब्जा कर लेंगे और किसानों का शोषण होगा।  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले को 332.64 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात देने के बाद कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ने की। कार्यक्रम में सभी मंत्री, लोकसभा सांसद ज्योत्सना महंत और अन्य जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, आम जनता के हितों का संरक्षण और उनकी खुशहाली हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

यह प्रेरणा हमें विरासत में मिली है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी की नीतियों और आदर्शों का अनुसरण करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार गरीबों, मजदूरों, किसानों और आदिवासियों के बेहतरी के लिए कार्य कर रही है। कोरोना आपदा काल में छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को अपने जनहितैषी कार्यक्रमों और योजनाओं के जरिए 70 हजार करोड़ रुपए की सीधे मदद दी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि,आज देश और दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। बहुत से देशों की राष्ट्रीय सरकारों ने किसानों, गरीबों और आपदा पीड़ितों के प्रति सहानुभूति का रवैया रखते हुए बीमारी के नियंत्रण में अच्छी सफलता हासिल की है,लेकिन हमारे देश ने जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक के तरीके से नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन किया गया, उससे लगातार हालत खराब होती गई और सबका मिला-जुला असर कोरोना काल में राष्ट्रीय आपदा के रूप में सामने आया है। यदि केन्द्र सरकार रचनात्मक और सहानुभूतिपूर्ण रवैया रखती तो देश को आज जैसे दिन नहीं देखने पड़ते। मुुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र सरकार की ओर से विश्वव्यापी कोरोना संकट के समय के अवसर को अच्छा अवसर मानते हुए कृषकों के शोषण के लिए चार अध्यादेश लाया गया है। इसके तहत एक राष्ट्र- एक बाजार के तहत एक्ट में संशोधन किया गया है। इसमें किसानों को देश के किसी भी हिस्से में अपनी उपज बेचने की छूट दी गई है।

इसमें किसान और व्यापारी को उपज खरीदी-बिक्री के लिए राज्य की मंडी के बाहर टैक्स नहीं देना होगा अर्थात मंडी में फसलों की खरीदी-बिक्री की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और निजी मंडियों को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि, इसी तरह आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन, खाद पदार्थों के उत्पादन और बिक्री को नियंत्रण मुक्त किया गया है। तिलहन, दलहन, आलू, प्याज जैसे उत्पादों से स्टाक सीमा हटाने का फैसला लिया गया है। कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग और सहकारी बैंकों में निजी इक्विटी की अनुमति का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा स्पष्ट मत है कि कोरोना आपदा के समय में केन्द्र सरकार की ओर से जो अध्यादेश लाए गए हैं, उसका बहुत बुरा असर होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पुरजोर तरीके से केन्द्र सरकार के किसान विरोधी कानूनों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने दो मॉडल स्पष्ट हैं कि आपदा में जनसेवा के माध्यम से विश्वास जगाते हुए सबको साथ लेकर चलने वाला छत्तीसगढ़ी मॉडल और दूसरा आपदा को मनमानी करने का अवसर मानने वाला केन्द्र सरकार का मॉडल। उन्होंने कहा कि हमें अपने छत्तीसगढ़ी मॉडल पर भरोसा है, जिसने आपदा के समय में जरुरतमंदों को सीधे मदद पहुंचाने के साथ ही नवगठित जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के विकास को नया आयाम दिया है।

 

 

18-09-2020
कलेक्टर ने कहा, किसान पंजीयन में केवल धान फसल का रकबा दर्ज होगा, गिरदावरी का काम समय पर करें पूरा

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार ने जांजगीर तहसील के ग्राम कुलीपोटा में चल रहे गिरदावरी कार्य का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने कहा कि गिरदावरी में केवल धान फसल वाले रकबे को ही दर्ज किया जाएगा। इस संबंध में राज्य सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। अनुपयोगी, बंजर भूमि, पड़त भूमि, निकटवर्ती नदी नालों की भूमि, निजी तालाब, डबरी की भूमि, कृषि उपयोग के लिए बनाए गए कच्चे-पक्के शेड, मेड़ आदि की भूमि को पंजीयन में से कम किया जाएगा। उद्यानिकी तथा धान से पृथक अन्य फसलों के रकबों को किसी भी स्थिति में धान के रकबे के रूप में पंजीयन नहीं होगा। किसान पंजीयन का कार्य राजस्व दस्तावेज के अनुसार किया जाता है। राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है कि गिरदावरी का काम समय पर पूरा करें। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर लीना कोसम, एसडीएम मेनका प्रधान सहित राजस्व विभाग के मैदानी अमले उपस्थित थे।

 

18-09-2020
भूपेश बघेल के निर्देश पर गिरदावरी की जानकारी लेने खुद कर्मचारी किसानों के खेतों तक जा रहे हैं, सीएम हो तो ऐसा

रायपुर। भूपेश बघेल के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी जिलों में राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारी गिरदावरी के लिए किसानों के खेतों में पहुंचकर फसलों की जानकारी लेकर भूमि के खसरों व अभिलेखों में प्रविष्टियां कर रहे हैं। राजस्व विभाग के हल्कों में तैनात पटवारी फसल के रकबे का पंजीयन भी कर रहे हैं। पटवारियों को अपने हल्के के अंतर्गत सभी किसानों के खेतों में पहुंचकर गिरदावरी कर ऑनलाइन एंट्री करने के निर्देश दिए गए हैं। गिरदावरी के कार्य का मौके पर निरीक्षण विभाग के उच्च अधिकारी कर रहे हैं। बिलासपुर के कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने तखतपुर विकासखण्ड में राजस्व विभाग के अमले द्वारा किये जा रहे गिरदावरी कार्य का निरीक्षण किया। वे खेतों में उतरे और स्थल पर गिरदावरी के कार्य को बारीकी से देखा और निर्देशित किया कि शत् प्रतिशत शुद्धता के साथ गिरदावरी का कार्य किया जाये।    

राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल गिरदावरी का कार्य जिले में संचालित हो रहा है। इस क्रम में बिलासपुर कलेक्टर ने ग्राम-सकरी पटवारी हल्का नंबर 45 के अंतर्गत चल रहे गिरदावरी कार्य को स्वयं खेत में उतरकर देखा कि गिरदावरी कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है या नहीं। कलेक्टर ने गिरदावरी के कार्य को बारीकी से करने के निर्देश देते हुए निर्धारित समय पर इसकी ऑनलाइन एंट्री करने कहा ताकि बाद में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

18-09-2020
अवरूद्ध आउटलेट से सिंचाई पानी पाने मशक्कत करनी पड़ी किसानों को

रायपुर। महानदी मुख्य नहर से निकले व जल उपभोक्ता संस्था टेकारी के अधीन आने वाले आउटलेट से सिंचाई पानी पाने टेकारी के किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस आउटलेट से लगभग 100 एकड़ खेतों को सिंचाई पानी मिलता है। इस आउटलेट में मुख्य नहर में बहने वाले कचरों के भर जाने की वजह से पानी निकासी अवरुद्ध हो गया था। बीते 3-4 दिनों से किसान इस आउटलेट को जाम करने वाले कचरों को विभागीय कार्यवाही की प्रतीक्षा किये बिना निकालने प्रयासरत थे जिसमें सफलता पूर्वान्ह प्राप्त हुयी। इधर इस संस्था के अधीन आने वाले वितरक शाखा 24 में टेकारी को सिंचाई पानी देने के लिये बनाये गये अस्थायी हेडअप को विध्न संतोषियों द्वारा गिरा दिये जाने के कारण पर्याप्त पानी न मिलने से आक्रोशित किसानों ने पुनः हेडअप बना, विभागीय अधिकारियों से ऐसे विध्न संतोषियों को पकड़ कानूनी कार्यवाही का आग्रह किया है।  

इस आउटलेट से सिंचाई प्राप्त करने वाले किसानों में से एक टेकारी के पूर्व सरपंच गणेशराम लहरे व सिंचाई पंचायत सदस्य रहे रामानंद पटेल सहित प्रभावित किसानों ने जानकारी दी कि इस आउटलेट में कचरा भर जाने की वजह से जाम हो जाने के चलते पानी निकासी नहीं हो पा रहा था। जबकि इसके कमांड एरिया में आने वाले खेतों को तत्काल पकोना पानी की आवश्यकता ‌‌‌‌थी। बीते 3 - 4 दिनों के अथक प्रयास के बाद इसमें फंसे कचरे को निकालने के बाद आज अपरान्ह से इस आउटलेट से सिंचाई पानी निकासी शुरू होने की जानकारी देते हुये इन लोगों ने बतलाया कि हर‌ साल कचरों की वज़ह से इस समस्या से किसानों को जूझना पड़ता है। किसानों ने इस आउटलेट से खेतों तक पानी ले जाने के लिये बनाते गये नाली के‌ भी क्षतिग्रस्त हो जाने व‌ फिलहाल बोरी डाल पानी ले जाने की व्यवस्था किसानों द्वारा किये जाने की जानकारी दी व नाली का पुनर्निर्माण की मांग की।

इधर 6 ग्रामों को सिंचाई पानी देने के लिये महानदी मुख्य नहर‌ से निकले वितरक शाखा 24 के रिमाडलिग व लाइनिंग के बाद इसके कमांड एरिया में आने वाले पहले ग्राम टेकारी को सिंचाई में होने वाली दिक्कतों को देखते हुये बीते वर्षों की तरह सिंचाई पानी देने विभाग द्वारा इस वर्ष भी बनवाये गये अस्थायी‌ हेडअप को विध्न संतोषियों द्वारा क्षतिग्रस्त किये जाने‌ से पर्याप्त‌ सिंचाई पानी न मिलने ‌‌‌‌से आक्रोशित टेकारी के किसानों ने फिलहाल पुनः ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌हेडअप बनवा सिंचाई पानी लेना तो शुरू कर दिया ‌‌‌‌है पर विध्न संतोषियों के खिलाफ कार्यवाही ‌‌‌‌‌‌‌‌की‌ मांग ‌‌‌‌‌‌‌की है। इधर इस सिंचाई पंचायत के अध्यक्ष रहे भूपेंद्र शर्मा ने  महानदी मुख्य नहर में आम लोगों द्वारा कचरा डालने की प्रवृत्ति के चलते अधिकांश आउटलेटों ‌‌‌‌में यह समस्या आने की जानकारी देते हुये ऐसे सभी आउटलेटों में विभाग द्वारा जाली लगवाने का सुझाव दिया है व अस्थायी हेडअप को‌ क्षति पहुंचाने वालों का चौकसी करवा पकड़ ठोस कार्यवाही की मांग विभागीय अधिकारियों से की है।

17-09-2020
उन्नत व आधुनिक खेती किसानी की जनकल्याणकारी योजनाओं से किसान हो रहे हैं खुशहाल

रायपुर/जगदलपुर। जन कल्याणकारी योजना से किसानों के जीवन में आ रही खुशियां। छत्तीसगढ़ को समृद्ध व आत्मनिर्भर बनाने राज्य के कृषि को उन्नतशील बनाने की सोच व उसे कार्य रूप में परिणित कराना शुरू से ही छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष प्राथमिकता रही है। राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में ठोस निर्णय लेकर और योजना बनाकर उनका सफल क्रियान्वयन भी किया है। इसके परिणाम स्वरूप पूरे राज्य के साथ-साथ बस्तर जिले के किसान भी शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेकर आधुनिक व आत्मनिर्भर कृषि की ओर बढ़ रहे हैं। योजना का सफल क्रियान्वयन का ही नतीजा है कि बस्तर जिले में धान का रकबा 10 वर्ष पूर्व खरीफ सीजन में 1 लाख 13 हजार 120 हेक्टेयर व औसत उत्पादकता 1533 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। वह बढ़कर 1 लाख 11 हजार 942 हेक्टेयर और औसत उत्पादकता 3202 प्रति हेक्टेयर हो गया है।

शासन के जन कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप खेती किसानी में आये आषातित सुधार व परिवर्तन से बस्तर जिले के सुदूर वनांचल के किसान भी अछूता नहीं है। इसी का परिणाम है कि आज अपने खेती किसानी के लिए वर्षा की पानी पर निर्भर रहने वाले जिले के बस्तर विकासखण्ड के ग्राम दूबेउमरगांव कृषक जितेन्द्र साहू को कृषि कार्य के लिए बारहमासी पानी मिलने से आज एक आत्मनिर्भर किसान बन गया है। किसान जितेन्द्र कृषि विभाग के शाकम्भरी योजना से अनुदान लेकर 5 एचपी का डिजल पम्प तथा किसान समृद्धि योजना से ट्यूबवेल खनन कराने से आज उसे उन्नतषील एवं मन पसंद खेती के लिए केवल वर्षा के जल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उसे अब खेती के लिए समय पर पानी मिल जाता है, जिससे वे धान के अलावा मक्का, दलहन, तिलहन, सब्जी भाजी आदि फसल उगाकर आत्मनिर्भर व समृद्धि किसान बन गया है।

किसान जितेन्द्र ने बताया कि वे एक मध्य श्रेणी के ग्रामीण किसान है। इससे पहले वे करीब 20 वर्षों से वर्षा परंपरागत रूप से वर्षा पर आधारित धान की खेती करते आ रहे थे। लेकिन वर्षा के पानी के अलावा सिंचाई के लिए अन्य कोई साधन नहीं होने से समय पर खेती किसानी का काम करना बड़ा कठिन होता था। इसके अलावा फसलों में कीट व्याधियों का प्रकोप तथा उन्नत खेती के लिए तकनीकी ज्ञान के अभाव होने के कारण उसे उत्पादन एवं उससे आय मेहनत के हिसाब से बहुत ही कम मिल पाता था। उन्होंने बताया इसी बीच उसका सम्पर्क कृषि विभाग के अधिकायों से हुआ। उन्होंने उन्नत व आधुनिक खेती किसानी के लिए शासन की विभिन्न जन कल्याणकारी योजना की जानकारी दी जिसके माध्यम से उन्होंने इन योजना का लाभ लिया है।

13-09-2020
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से अचानक गायब हो गए किसानों के नाम

कवर्धा। केंद्र सरकार ने किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कि शुरुआत की है। इस योजना के तहत पंजीकृत किसानों को हर वर्ष 6 हजार रुपए उनके खाते में डाले जाने थे। लेकिन अचानक इस योजना से किसानों के नाम गायब होते गए। इससे किसान अधिक परेशान है। वही केंद्र सरकार की इस योजना को छलावा बता रहे हैं। कबीरधाम जिले में 1 लाख 64 हजार पंजीकृत किसान है। लेकिन पहली किस्त जिले के 1 लाख 16 हजार 485 किसानों को योजना की पहली किस्त यानी दो दो हजार रुपए मिले, लेकिन यह पांचवी क़िस्त तक जाते किसानों की संख्या आधे से भी कम हो गई। किसानों के नाम योजना से गायब होने के बाद किसानों को अधिकारियों के चक्कर लगाना पड़ रहा है, लेकिन साफ्टवेयर से ही किसानों के नाम गायब हो गए है। 

ये है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना 
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि इस योजना के तहत सरकार किसानों के बैंक खातों में हर साल 6000 रुपये जमा करती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसान के खाते में डाली जाती है। इस योजना के तहत सरकार किसानों के बैंक खातों में हर साल 6000 रुपये जमा करती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में किसानों के खाते में डाली जाती है। ताकि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके।

देखिए कैसे कम होते गए किसान
जिले में करीब 1 लाख 64 हजार पंजीकृत किसान है, जिसमें से 116485 किसानों को पहली क़िस्त मिली। इसके बाद दूरी क़िस्त 102427 किसानों को मिली, तीसरी क़िस्त में 71447 किसानों की मिली, चौथी क़िस्त में 56288 किसानों को मिली इसके बाद पांचवी क़िस्त मात्र 11138 किसानों को सम्मान निधि की राशि मिल पाई है। वही छटवी क़िस्त में भी किसानों की संख्या काफी कम कर देने की जानकारी मिल रही है। इस प्रकार अचानक योजना से किसानों के नाम गायब हो गए। इससे किसान परेशान है। 

वर्जन
किसानों का लगातार पंजीयन किया जा रहा है। पंजीकृत सभी किसानों की लिस्ट योजना के लिए भेजी गई है। लेकिन केंद्र से ही कम किसानों की लिस्ट आई है। लिस्ट के आधार पर सीधे खाते में राशि डाली जाती है। 
मोरध्वज डड़सेना, डिप्टी डारेक्टर, कृषि विभाग कबीरधाम

08-09-2020
भरतपुर व कोटाडोल के 6 ग्रामों का अनुपलब्ध नक्शा होगा अपलोड

कोरिया । विधायक गुलाब कमरो के निर्देश पर तहसील भरतपुर व कोटाडोल  के 6 ग्रामों का ऑनलाइन भू नक्शा सॉफ्टवेयर अपलोड किया जाएगा। उल्लेखनीय है ग्राम देवगढ़ ठोरगी मेगरा सोनवाही बडगांव खुर्द मनिहारी में नक्शा ऑनलाइन सॉफ्टवेयर उपलब्ध ना होने से किसानों को नक्शा प्रदाय नहीं होने व ऑनलाइन प्रदर्शित नहीं होने की समस्या उतपन्न हो गई थी। इसके कारण नामांतरण बंटवारा एवं नक्शा अपडेशन का कार्य प्रभावित हो रहा था। इसके लिए क्षेत्र के ग्रामीणों ने विधायक गुलाब कमरो से मांग की थी। इस पर विधायक गुलाब कमरो के निर्देश के बाद नक्शा अपडेट करने आदेश जारी किया गया है।

08-09-2020
एथेनॉल निर्माण संबंधी 508 करोड़ की चार प्रस्तावों पर एमओयू, पहली बार स्थापित हो रहे एथेनॉल निर्माण की इकाईयां

रायपुर। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य की पूरे देश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री बघेल की उपस्थिति में आज यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ में एथेनॉल निर्माण संबंधी 507 करोड़ 82 लाख रुपए के चार प्रस्तावों पर एमओयू संपन्न हुआ। इन इकाईयों की वार्षिक उत्पादन क्षमता एक लाख 17 हजार 500 किलोलीटर एथेनॉल निर्माण की है, जिसके लिए लगभग 3 लाख 50 हजार टन धान की आवश्यकता होगी। चारों इकाईयों में 583 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। इन इकाईयों में से दो इकाईयां मुंगेली और एक-एक इकाईयां जांजगीर-चांपा तथा महासमुंद में स्थापित होंगे। इन एमओयू पर राज्य शासन की ओर से उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ तथा संबंधित एथेनॉल निर्माण इकाई के उद्योगपतियों द्वारा हस्ताक्षर किया गया। 

मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर राज्य में एथेनॉल निर्माण इकाईयों के स्थापना के लिए बधाई तथा शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इन एथेनॉल निर्माण इकाईयों से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन आएंगी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है। यहां एथेनॉल निर्माण की इकाईयों की स्थापना होने से राज्य में धान के आधिक्य का पूरा-पूरा उपयोग होगा। इसका राज्य में गरीब आदिवासी किसानों सभी वर्ग के लोगों को भरपूर लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार की विशेष पहल से छत्तीसगढ़ में एथेनॉल निर्माण की इकाई की स्थापना संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान सीमेंट, बिजली और स्टील प्लांट आदि के रूप में तो विख्यात है ही, लेकिन अब यहां एथेनॉल निर्माण की इकाई से छत्तीसगढ़ की खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनेगी। इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि राज्य में एथेनॉल निर्माण इकाई की स्थापना यहां किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर राज्य सरकार द्वारा की गई है। राज्य में धान खरीदी, उत्पादन तथा निष्पादन की प्रक्रिया सतत् रूप से चलने वाली है। एथेनॉल निर्माण की इकाई स्थापित होने से राज्य की आर्थिक व्यवस्था को विशेष गति मिलेगी। इस दौरान एथेनॉल निर्माण की इकाई स्थापित करने वाले उद्योगपतियों से इकाईयों की स्थापना को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए भी कहा गया। इसमें राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग के लिए आश्वस्त किया गया। 

राज्य में एथेनॉल निर्माण के लिए एमओयू संपन्न हुए चार इकाईयों में से मेसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टीलरीज लिमिटेड कुम्हारी द्वारा उक्त परियोजना में 157 करोड़ 50 लाख रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 100 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। उक्त इकाई द्वारा 36 हजार 500 किलोलीटर एथेनॉल और 1825 किलोलीटर अशुद्ध स्प्रीट के उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह मेसर्स चिरंजीवनी रियलकॉम प्रायवेट लिमिटेड बिलासपुर द्वारा उक्त परियोजना में 130 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 118 लोगों को रोजगार मिलेगा। इकाई द्वारा 1.80 करोड़ लीटर एथेनॉल, 1.80 करोड़ लीटर ई.एन.ए. तथा 14 हजार 400 टन डीडीजीएस वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह मेसर्स क्यूबिको केमिकल्स प्रायवेट लिमिटेड भिलाई द्वारा उक्त परियोजना में 122 करोड़ 32 लाख रूपए पूंजी निवेश किया जाएगा।

इससे 222 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध होगा। इकाई द्वारा 33 हजार किलोलीटर एथेनॉल निर्माण का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेसर्स श्याम वेयरहाउसिंग एंड पावर प्रायवेट लिमिटेड द्वारा उक्त परियोजना में 98 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 93 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। इकाई द्वारा 30 हजार किलोलीटर एथेनॉल निर्माण का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव रश्मि आशीष सिंह, राज्य महिला आयोग की अघ्यक्ष  किरणमयी नायक, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, अपर मुख्य सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव डॉ. एम.गीता, सचिव आर. प्रसन्ना, नीलेश क्षीरसागर सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

07-09-2020
मोदी सरकार ने काटे 25 लाख किसानों के नाम,नाक बचाने भाजपा नेता कर रहे राजनीति : मोहन मरकाम

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के आरोप पर पलटवार किया है। मरकाम ने केन्द्र सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ एक और धोखाधड़ी कर रही है। 6 हजार रुपए प्रति वर्ष मिलने वाली किसान सम्मान निधि की पहली किस्त तो 27 लाख किसानों को दी गई, लेकिन अब इस सूची में सिर्फ़ 2 लाख किसान बचे हैं। उन्होंने कहा है कि, पंजीकरण के नाम पर केंद्र की भाजपा सरकार किसानों के नाम काट रही है। भाजपा के राज्य के नेता इस पर राजनीतिक रोटी सेंकने की कोशिश कर रहे हैं। मरकाम ने कहा है कि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह को छत्तीसगढ़ की जनता को जवाब देना चाहिए कि मोदी सरकार छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि की किस्त क्यों नहीं दे रही है? मरकाम ने कहा है कि,किसानों के साथ ठगी की आदी हो चुकी मोदी सरकार किसानों को बार-बार पंजीयन कराने पर मजबूर कर रही है। इसी में खामियां निकालकर किसानों की संख्या घटाई जा रही है। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने किसानों को आय दोगुनी करने का वादा किया था लेकिन अब पांच सौ रुपए महीने भी देने में चालबाजी कर रहे हैं। ठीक उसी तरह रमन सिंह ने प्रदेश के किसानों को बोनस और समर्थन मूल्य के नाम पर भ्रम जाल में फंसाया था। भाजपा का चरित्र में ही है धोखेबाजी करना। मोदी सरकार किसानों के साथ ही नहीं बल्कि देश के बेरोजगार युवाओं, मजदूरों,गृहणियों ,व्यापारियों, छात्रों के साथ भी दगाबाजी छल धोखा कर रही है।

 

07-09-2020
Video : रमन सिंह ने कृषि विभाग की लापरवाही पर सरकार को घेरा,कहा-किसानों को नहीं मिला हक का पैसा

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कृषि विभाग की लापरवाही पर भूपेश सरकार को घेरा है। उन्होंने भूपेश सरकार पर किसानों के लिए संवेदनहीन होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि, कृषि विभाग की लापरवाही के कारण किसान अपने हक से वंचित रह गए। उन्होंने कहा है कि, किसान सम्मान निधि के लिए सरकार के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 27 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे। इससे 540 करोड़ रुपए की राशि किसानों के खाते में जानी थी। आज दिनांक तक 27 लाख से घटकर दो लाख तक रजिस्ट्रेशन पहुंच गया है। यह सरकार के कृषि विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा है। किसानों के खाते में 540 करोड़ रुपए के बजाए सिर्फ 40 करोड़ की राशि ही मिली। यदि विभाग की ओर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया होती तो ये स्थिति नहीं होती। डॉ. सिंह ने आग्रह किया है कि,तत्काल किसानों का रजिस्ट्रेशन कराया जाए ताकि आने वाले दिनों में किसानों को पूरी राशि मिल सके।

 

06-09-2020
नदी में जाने वाले पानी‌ की धार को मोड़ा गया सिंचाई पानी देने नहर की ओर 

रायपुर। बीते सप्ताह हुए घनघोर बारिश के चलते गंगरेल लबालब हो गया है और इसमें केचमेंट एरिया से आ रहे अतिरिक्त पानी को नदी में न छोड़ खेतों को सिंचाई पानी पहुंचाने इसकी धार को महानदी मुख्य नहर की क्षमता के अनुरूप इस नहर की ओर‌ मोड़ ‌‌‌दिया गया है। इसके चलते न केवल पानी की कमी वाले खेतों को‌ सिंचाई पानी मिल सकेगा वरन् नदी में व्यर्थ जाने वाले पानी‌ का सार्थक उपयोग होने के साथ-साथ फिलहाल गंगरेल लबालब रहेगा। ज्ञातव्य हो कि बीते सप्ताह पूरे प्रदेश में हुए भारी‌ बारिश के चलते गंगरेल सहित प्रदेश के लगभग सभी बांध लबालब हो गये हैं व गंगरेल के केचमेंट एरिया में हुए घनघोर बारिश की वजह से इसके लबालब होने के बाद भी पानी का आवक जारी ‌‌‌है। इधर किसान एक बार फिर सिंचाई के लिये पानी की आवश्यकता महसूस कर‌ रहे थे। 

किसानों के अनुसार ‌‌‌फिलहाल कन्हार खेतों के लिए पानी की आवश्यकता नहीं है पर‌ मटासी‌ मिट्टी वाले खेतों सहित आउटलेटों के कमांड एरिया में आने वाले खेतों के लिये पानी की आवश्यकता महसूस की जा रही थी क्योंकि इन‌ खेतों ‌‌‌में जाय्दा दिन तक पानी ठहरता नहीं। इसके अतिरिक्त घनघोर भारी बारिश के चलते खेतों के मेड़ों में कटाव आ जाने व इनकी मरम्मत करते तक इन खेतों में इकट्ठा पानी भी बह‌ निकला था। इस स्थिति को देखते हुए किसानों की मांग तथा पूर्व में जल संसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे का‌ इस ओर‌ ध्यानाकर्षण कराये जाने के चलते इस अतिरिक्त पानी का रूख महानदी मुख्य नहर की ओर मोड़ दिया गया है।

ज्ञातव्य हो कि बीते 24 अगस्त को गंगरेल के केचमेंट एरिया में हो रहे बारिश के चलते गंगरेल के लबालब हो जाने की संभावना को देखते हुये रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे‌ भूपेन्द्र शर्मा ने चौबे का ध्यानाकर्षण इस ओर कराते हुये अतिरिक्त पानी को नदी में न छुड़वा नहर में डलवाने का आग्रह किया था पर इसके तुरंत बाद प्रदेश भर में‌ हुये भारी बारिश व‌ खेतों के लबालब हो जाने की स्थिति को देखते हुये अतिरिक्त पानी को नहर में तब नहीं छोड़ा गया था पर अब खेतों में सिंचाई पानी की आवश्यकता को देखते हुये पानी का रूख नहर की ओर मोड़ दिया गया है व महानदी मुख्य नहर में पानी दौड़ने लगा है। सिंचाई पंचायतों के अध्यक्ष रह‌ चुके थानसिह साहू,   हिरेश चन्द्राकर, चिंताराम वर्मा, प्रहलाद चन्द्राकर, गोविंद चन्द्राकर, भारतेन्दु साहू, धनीराम साहू, मनमोहन गुप्ता, संतराम बघेल, तुलाराम चन्द्राकर, योगेश चन्द्राकर आदि ने नहर में पानी ‌‌‌छोड़े जाने का‌ स्वागत किया है।

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