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22-01-2021
बारदाने की कमी के कारण किसान नहीं बेच पा रहे धान,व्यवस्था होने पर ही टोकन देने की बात

महासमुंद। धान खरीदी को अब 8 दिन ही बचे हैं, लेकिन धान संग्रहण केन्द्रों में अब भी बारदाने की समस्या बरकरार है। सैकड़ों किसानों के अब तक धान नहीं बिके हैं। किसान बारदाना नहीं होने की वजह से कई समितियों में धान नहीं बेच पा रहें हैं। मिलरों की ओर से समितियों को दिया गया बारदाना इतना खराब है कि उसका उपयोग किसान नहीं कर पा रहे हैं। बेलसोढ़ा के किसानों का कहना है कि फटे पुराने बारदानों में ही छांट-छांट कर अपने धान बेचने के लिए सिलाई कर धान बेच रहे हैं। कुछ किसान धान बेचने के लिए बाजार से बारदाना खरीदकर धान बेच रहे हैं। किसानों ने बताया कि 35 रुपए की लागत से किसान बारदाना बाजार से खरीद रहे हैं, जिसके एवज में किसानों को 15 रुपए बारदाने का कीमत दी जा रही है। बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र पहुंचे लगभग दो दर्जन किसानों ने जानकारी दी है कि बारदाने की वजह से वह सुबह से अब तक समिति के प्रबंधन का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन धान बेचने टोकन नहीं कट पा रहा है। 
किसान पुनीत राम चंद्राकर नेकहा कि वे छोटे किसान हैं,सिर्फ 58 कट्टा धान है, जिसे वे अब तक बेच नहीं पाए हैं।

समिति के अधिकारियों का कहना है कि बारदाना नहीं है, इसलिए टोकन नहीं मिलेगा। व्यवस्था होगी तब टोकन उपलब्ध कराया जाएगा। कई और किसानों ने भी इसी तरह की शिकायत बताई है। बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र के प्रबंधक ने बताया कि समिति को 2 लाख कट्टा धान खरीदना है और अब तक 1 लाख 40 हजार कट्टा धान की खरीदी हुई है। अब भी 60 हजार कट्टा लगभग खरीदना बाकी है। समिति प्रबंधन ने यह भी जानकारी दी है कि प्रतिदिन लगभग 6 हजार कट्टा धान की खरीदी शुरूआत में की जा रही थी, लेकिन बारदाने की समस्या के कारण 6 हजार कट्टा धान की खरीदी नहीं हो पा रही है। आगामी 8 दिनों में 6 हजार कट्टा धान भी खरीदा जाएगा। तब भी 60 हजार कट्टा धान की खरीदी मुश्किल लग रही है। बता दें कि महासमुंद शहर से लगा ग्राम बेलसोढ़ा धान संग्रहण केन्द्र में  5 गांव के किसान अपना धान बेचेंगे। इस धान संग्रहण केन्द्र में बेससोढ़ा, नांदगांव, मुढ़ेना, घोड़ारी और साराडीह के किसान धान बेच रहे हैं। 1 दिसंबर से धान की खरीदी शुरू हुई है तब से लेकर अब तक समितियों में बारदाने के लाले पड़े हैं।

22-01-2021
भूपेश सरकार की योजनाओं का किसानों को मिल रहा लाभ, पक्के चबूतरे धान को नमी बारिश और चूहों से बचा रहे

रायपुर। भूपेश सरकार के प्रयासों से किसानों  को लगातार लाभ मिल रहा है। मनरेगा के अभिसरण से धान संग्रहण केंद्रों में बनाए गए पक्के चबूतरे इस साल धान को नमी, बारिश और चूहों से बचा रहे हैं। कोरिया जिले के दूरस्थ विकासखण्ड भरतपुर के गाँव कंजिया में भी मनरेगा और 14वें वित्त आयोग की राशि के अभिसरण से संग्रहण केंद्र में पक्के चबूतरे बनाए गए हैं। इन चबूतरों ने सरकार द्वारा समर्थन मूल्य में उपार्जित धान की सुरक्षा को लेकर ग्राम पंचायत और सहकारी समिति के प्रबंधकों के माथे से चिंता की लकीरें खत्म कर दी हैं। वहीं दूसरी ओर अपना धान बेच चुके किसान भी अब पूरी तरह से निश्चिंत हैं कि स्थानीय सहकारी समिति द्वारा खरीदा गया उनका धान बेमौसम होने वाली बारिश, नमी तथा चूहों व कीड़ों के प्रकोप से सुरक्षित है। मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के अभिसरण तथा ग्राम पंचायत और सहकारी समिति के संयुक्त प्रयास से यह संभव हो सका है। मनरेगा से स्वीकृत सात लाख 38 हजार रूपए और 14वें वित्त आयोग के 50 हजार रूपए के अभिसरण से कंजिया धान संग्रहण केंद्र में चार पक्के चबूतरों का निर्माण किया गया है। स्थानीय पंचायत एवं समिति को इससे जहां धान को सुरक्षित रखने में सहजता हो रही है, वहीं किसान भी अब खुश हैं।

वनांचल भरतपुर की ग्राम पंचायत कंजिया की सरपंच विपुलता सिंह कहती हैं कि संग्रहण केन्द्र में चबूतरों के निर्माण से धान को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिल रही है। इनके निर्माण के कुछ ही महीनों में उपार्जित धान के सुरक्षित रखरखाव से पक्के चबूतरों की उपयोगिता और सार्थकता दिख रही है। कंजिया में 18 जनवरी 2021 तक किसानों से उपार्जित 15 हजार 106 क्विंटल धान आ चुका है, जिसे इन चबूतरों के ऊपर सुरक्षित रखा गया है। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित गढ़वार (कंजिया) के सहायक प्रबंधक विक्रम सिंह बताते हैं कि इस सहकारी समिति से आसपास के 30 गाँव जुड़े हुए थे। इस साल एक और उपकेन्द्र कुंवारपुर में खुल जाने से कंजिया में लगभग 21 हजार क्विंटल धान की खरीदी का अनुमान है। उन्होंने बताया कि पूर्व के वर्षों में यहाँ सुरक्षित भंडारण की सुविधा नहीं होने से उठाव होने तक हर साल लगभग 150 से 200 क्विंटल धान खराब हो जाता था। इसका सीधा नुकसान सहकारी साख समिति प्रबंधन और समिति से जुड़े किसानों को होता था। परंतु अब पक्के चबूतरे बन जाने से यह समस्या समाप्त हो गई है। सिंह ने बताया कि हाल ही में अभी नए साल की शुरुआत में बेमौसम बारिश हुई थी। परंतु इस बार धान को सुरक्षित रखने में कोई परेशानी नहीं हुई। धान संग्रहण चबूतरों के बन जाने से अब किसानों के द्वारा दिन-रात की मेहनत से उपजाई गई पूँजी 'धान' को ज्यादा अच्छे से रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन चबूतरों के निर्माण के समय गांव के 49 मनरेगा श्रमिकों को 393 मानव दिवस का सीधा रोजगार भी प्राप्त हुआ था।

22-01-2021
मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर किसानों को दी बधाई, कहा-धान खरीदी का रिकॉर्ड बन गया

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को एक ट्वीट किया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि राज्य के 20 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक धान ख़रीदी का रिकॉर्ड बन गया है। 21 जनवरी तक 84.44 लाख टन धान की ख़रीदी हो चुकी है। ख़रीदी अभी जारी है।

22-01-2021
किसान आंदोलन का 58वां दिन 11 वे दौर की चर्चा आज, सरकार का रुख नरम लेकिन किसान अड़े, टकराव जारी

दिल्ली/रायपुर। किसान आंदोलन का आज 58 वा दिन है और आंदोलन के खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। गणतंत्र दिवस करीब आने के साथ ही सरकार की चिंताएं भी बढ़ गई है। अब वह लगातार आंदोलन खत्म कराने का प्रयास कर रही है। सरकार के रुख में आई नरमी भी किसान आंदोलन की आग को शांत नहीं कर पा रही है। सरकार ने कल किसान आंदोलन को डेढ़ साल ओल्ड करने का जो प्रस्ताव दिया था उसे किसानों ने सिरे से खारिज कर दिया है। किसान अब इस बात पर अड़े है कि वह अपनी मांगों से टस से मस नहीं होंगे। हालांकि आज विज्ञान भवन में 11वें दौर की बातचीत किसानो और सरकार के बीच होनी है। लेकिन कुछ किसान नेताओं का रवैया साफ संकेत नहीं दे रहा है। किसानों के रवैये से यह साफ नजर आ रहा है कि वे अपनी मांगों से 1 इंच भी हटने को तैयार नहीं है। हालांकि सरकार इस मामले में लगातार लचीला रुख अपनाए हुए है फिर भी बात बनती नजर नहीं आ रही है।

21-01-2021
छत्तीसगढ़ के किसानों का सिंधु बार्डर पर प्रदर्शन जारी, आज 5 किसान करेंगे भूख हड़ताल

रायपुर। कृषि कानूनों के विरोध में देशभर के किसानों के साथ छत्तीसगढ़ के किसान भी डटे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के किसानों ने सिंधु बार्डर पर रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। आंदोलन के 57वें दिन गुरुवार को छत्तीसगढ़ के 5 किसान भूख हड़ताल करेंगे। भूख हड़ताल करने वालों में तेजराम विद्रोही, सौरा यादव, मदन लाल साहू, राधेश्याम शर्मा, वेणुगोपाल शामिल है।  कृषि कानून को रद्द करने व न्यूनतम समर्थन मूल्य गारण्टी कानून लागू करने की मांग मनवाने दिल्ली के विभिन्न सीमाओं में प्रदर्शन जारी है। किसान आंदोलन के समर्थन में छत्तीसगढ़ से गए किसानों ने सिंधु बार्डर में रैली निकाल कर प्रदर्शन किया। रैली की अगुवानी अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के सचिव व छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के संचालक मंडल सदस्य तेजराम विद्रोही, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष मदन लाल साहू, आदिवासी भारत महासभा के संयोजक सौरा यादव, क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के संयोजक तुहीन देब, क्रांतिकारी विद्यार्थी संगठन के संयोजक टिकेश कुमार, प्रमोद कुमार,  क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा के वेणुगोपाल, क्रांतिकारी महिला संगठन के उपाध्यक्ष उर्मिला, सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने की। आदिवासी भारत महासभा के संयोजक सौरा यादव ने कहा कि देश के अन्नदाताओं के सँघर्ष को दो माह पूरे होने जा रहा है। अब तक 131 किसान शहीद हो चुके हैं, किसानों का मांग बहुत ही स्पष्ट है। तीन कृषि कानून की वापसी और एमएसपी पर कानून बनाना है।

20-01-2021
बदल रही तकदीर किसानों की,बस्तर के भैंसगांव के किसान महादेव भी हुए मालामाल भूपेश बघेल है तो सब सम्भव है

जगदलपुर/ रायपुर। राज्य में सत्ता संभालने के बाद से भूपेश बघेल सरकार किसानों के उत्थान के लिए और आर्थिक उन्नति के लिए लगातार प्रयास करते आ रही है। उसकी योजनाओं का  किसान भरपूर लाभ उठा रहे हैं जिसके परिणाम अब सामने आते जा रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं बस्तर जिले के बस्तर विकासखंड के गांव भैंसगांव के महादेव। वे 19 सालो से परंपरागत वर्षा आधारित खेती कर रहे थे। महादेव को कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों ने संपर्क कर समय-समय पर तकनीकी सलाह दी। महादेव ने उन तकनीकी सलाह का पालन किया। वैज्ञानिक  तरीके से खेती की ओर भरपूर उत्पादन भी लिया। अब महादेव को कम कम लागत में अधिकतम लाभ मिल रहा है। महादेव ने कृषि विभाग द्वारा संचालित किसान समृद्धि योजना के अनुदान पर नलकूप भी खुदवाया है। 2019 में 1 एकड़ में महादेव ने धान की खेती की और उस पर उसे 120000 की शुद्ध आय प्राप्त हुई, महादेव बेहद खुश है।महादेव ने इस साल कतार पद्धति से धान लगाया था जिसमें उसे 180000  की शुद्ध आय प्राप्त हुई। महादेव वर्तमान में 2 एकड़ में मटर गोभी और अन्य सब्जियों की फसल ले रहा है। जिससे उसे अतिरिक्त आय की प्राप्ति होगी। महादेव ने गोधन न्याय योजना के तहत 20 क्विंटल गोबर भी बेचा।कुल मिलाकर देखा जाए तो महादेव की जिंदगी अब खुशहाल नजर आ रही है। उसकी तकदीर बदलती नजर आ रही है। और वह कह रहा है कि ये भूपेश बघेल की सरकार है भूपेश है तो सब संभव है।

 

19-01-2021
किसान आंदोलन के समर्थन में 25 जनवरी को मुंबई में प्रदर्शन, शामिल होंगे शरद पवार और उद्धव ठाकरे

मुंबई। किसान आंदोलन के समर्थन में मुंबई के आजाद मैदान में 25 जनवरी को होने वाले प्रदर्शन में एनसीपी चीफ शरद पवार और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे हिस्सा लेंगे। इस बात की जानकारी एनसीपी के प्रवक्ता और राज्य के मंत्री नवाब मलिक ने दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विकास अघाड़ी की तरफ से कुछ किसान संगठनों की तरफ से आयोजित किए जा रहे प्रदर्शन का समर्थन किया जाएगा। नवाब मलिक ने आगे कहा कि किसानों की तरफ से नए कृषि कानूनों के विरोध में राजभवन तक मार्च भी निकाला जाएगा। गौरतलब है कि शरद पवार इससे पहले भी इन कृषि संबंधी कानूनों का विरोध कर इसे केन्द्र सरकार से वापस लेने की मांग कर चुके हैं।  उधर, केन्द्र सरकार और किसान संगठनों के बाच दसवें दौर की बातचीत होने जा रही है।  ये बातचीत ऐसे वक्त पर होगी जब किसान संगठनों ने 26 जनवरी को लालकिला से इंडिया गेट तक परेड निकालने की धमकी दी है। किसानों की मांग है कि सरकार एमएसपी को कानून का हिस्सा बनाने के साथ ही तीनों नए कृषि कानूनों को वापस ले। जबकि, सरकार का यह तर्क है कि इन नए कानूनों के जरिए कृषि क्षेत्र में निवेश के अवसर खुलेंगे और किसानों की आमदनी बढ़ेगी। लेकिन किसानों को डर है कि इन कानूनों के जरिए सरकार एमएसपी खत्म कर उन्हें उद्योगपतियों को भरोसे छोड़ देगी।

18-01-2021
भाजपा नेता स्वयं का धान बेचकर किसानों के नाम से राजनीति कर रहे : धनंजय ठाकुर

रायपुर। भाजपा के किसान आंदोलन को कांग्रेस ने राजनीतिक स्टंट करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि भाजपा के नेता स्वयं का धान बेचने के बाद फुर्सत मिलने पर अब किसानों के नाम से राजनीतिक स्टंट बाजी करने में लगे हुए हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला और मंडल अध्यक्ष,भाजपा किसान मोर्चा के प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, भाजपा सांसद विजय बघेल, गोमती साय,भाजपा के विधायक रजनीश सिंह सहित भाजपा के पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व सांसदों ने अपने धान को राज्य सरकार के उपार्जन केंद्रों में बेचकर धान का भुगतान खाता में प्राप्त कर लिया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह व भाजपा नेताओं को वास्तविक में किसानों की चिंता है तो उन्हें दिल्ली में आंदोलनरत किसानों के समर्थन में जेल भरो आंदोलन करना चाहिए।

मोदी सरकार किसानों की समस्या सुनने के बजाय गूंगी बहरी बनकर बैठी सरकार को जगाना चाहिए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार धान बेचने पंजीकृत 21 लाख 50 हजार किसानों से 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य निर्धारित की है। 1 दिसंबर से आज तक लगभग 85 प्रतिशत से अधिक किसानों से धान की खरीदी की जा चुकी है। किसानों के बैंक खाता में लगभग 12500 करोड़ सेअधिक की राशि भुगतान कर दिया है। धान खरीदी के निर्धारित समय के पहले 90 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के लक्ष्य को पूरा कर लेगी।

 

18-01-2021
छत्तीसगढ़ में 18 जनवरी तक 78.50 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी,18.62 लाख किसानों ने बेचा धान

रायपुर। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 18 जनवरी तक 78 लाख 50 हजार 249 मीट्रिक धान की खरीदी की गई है। अब तक राज्य के 18 लाख 62 हजार 507 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा। राज्य के मिलरों को 27 लाख 34 हजार 188 मीट्रिक टन धान का डीओ जारी किया गया है। इसके विरुद्ध मिलरों ने अब तक 23 लाख 81 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव कर लिया गया है।
राज्य के बस्तर जिले में एक लाख 8 हजार 294 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। इसी प्रकार बीजापुर जिले में 52 हजार 546 मीट्रिक टन, दंतेवाड़ा जिले में 12 हजार 127 मीट्रिक टन, कांकेर जिले में 2 लाख 44 हजार 662 मीट्रिक टन, कोण्डागांव जिले में एक लाख 15 हजार 917 मीट्रिक टन, नारायणपुर जिले में 15 हजार 890 मीट्रिक टन, सुकमा जिले में 30 हजार 802 मीट्रिक टन, बिलासपुर जिले में 4 लाख 7 हजार 769 मीट्रिक टन, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 59 हजार 974 मीट्रिक टन, जांजगीर-चांपा जिले में 7 लाख 36 हजार 121 मीट्रिक टन, कोरबा जिले में एक लाख 4 हजार 590 मीट्रिक टन, मुंगेली जिले में 3 लाख 24 हजार 841 मीट्रिक टन खरीदी की गई है।
इसी तरह रायगढ़ जिले में 4 लाख 62 हजार 645 मीट्रिक टन, बालोद जिले में 4 लाख 68 हजार 84 मीट्रिक टन, बेमेतरा जिले में 5 लाख 42 हजार 655 मीट्रिक टन, दुर्ग जिले में 3 लाख 57 हजार 693 मीट्रिक टन, कवर्धा जिले में 3 लाख 69 हजार 531 मीट्रिक टन, राजनांदगांव जिले में 6 लाख 52 हजार 965 मीट्रिक टन, बलौदाबाजार जिले में 5 लाख 49 हजार 764 मीट्रिक टन, धमतरी जिले में 3 लाख 80 हजार 736 मीट्रिक टन, गरियाबंद जिले में 2 लाख 75 हजार 40 मीट्रिक टन, महासमुंद जिले में 5 लाख 68 हजार 85 मीट्रिक टन, रायपुर जिले में 4 लाख 35 हजार 689 मीट्रिक टन, बलरामपुर जिले में एक लाख 22 हजार 128 मीट्रिक टन, जशपुर जिले में 90 हजार 859 मीट्रिक टन, कोरिया जिले में 95 हजार 882 मीट्रिक टन, सरगुजा जिले में एक लाख 22 हजार 128 मीट्रिक टन और सूरजपुर जिले में एक लाख 42 हजार 608 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है।

 

16-01-2021
भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश कार्यसमिति और जिला अध्यक्षों सूची जारी, देखे सूची ..

रायपुर। भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्यामबिहारी जायसवाल ने प्रदेश कार्यसमिति और जिला अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कई दिग्गज नेताओ के नाम शामिल है। देखें सूची 

 

15-01-2021
जिले में अब तक 7 लाख 13 हजार 760 टन धान की खरीदी, 1 लाख 66 हजार 519 किसानों ने बेचा धान

जांजगीर-चांपा। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में अब तक जिले के एक लाख 66 हजार 519 किसानों ने 7 लाख 13 हजार 760 टन धान समर्थन मूल्य पर बेच चुके हैं। छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग की वेबसाइट के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में 196 समितियों के द्वारा 230 धान उपार्जन केन्द्रों के माध्यम किसानों से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। जिले में इस वर्ष 1,87,077 किसानों ने पंजीयन कराया है, जिनके द्वारा बोये गए धान का रकबा 2,17,709.927 हेक्टेयर से अधिक है। इस वर्ष  80.55 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। कलेक्टर यशवंत कुमार के मार्गनिर्देशन में धान उपार्जन, टोकटन जारी करने, खरीदे गए धान के उठाव आदि की व्यवस्था की गई है। धान खरीदी में सतत् निगरानी के लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। खरीदे गए धान की सुरक्षा के लिए डबल लेयर तिरपाल, ड्रेेनेज आदि की व्यवस्था के लिए भी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में अब तक 82 प्रतिशत पंजीकृत किसान अपना धान का विक्रय कर चुके हैं। राज्य सरकार द्वारा धान खरीदी हेतु निर्धारित अंतिम तिथि तक शेष किसानों से धान उपार्जन की प्रक्रिया जारी रहेगी। धान बेचने वाले किसानों को विक्रय किये गये धान के एवज में अब तक 1334 कारोड रूपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

 

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