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25-07-2020
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने हाॅट-स्पाट बन चुके राजधानी में लाॅकडाउन बढ़ाने की मांग की

रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर वैश्विक महामारी कोविड-19 का संक्रमण  को देखते हुए हॉट स्पॉट रायपुर में लॉक डाउन 4 अगस्त तक बढ़ाने की मांग की है।
कमल वर्मा ने पत्र में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ते जा रहे संक्रमण पर चिंता जाहिर करते हुए इसे रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्धारा किये जा रहे प्रयास को सराहा है। प्रदेश के शासकीय सेवक नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने एक योद्धा की तरह मैदान में डटे हुए है। शासकीय कार्यालयों में आम लोगों के आने-जाने वाले आगंतुकों के कारण शासकीय सेवक भी संक्रमित हो रहे हैं। इसके कारण कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन स्वास्थ…

26-06-2020
छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन का 17वें दिन भी काली पट्टी धारण कर विरोध रहा जारी

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के प्रांतीय निकाय के आह्वान पर 3 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन आज 17वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारी काली पट्टी धारण करते हुए शासकीय कार्यों का निर्वाह एवं सरकार के कर्मचारी विरोधी नीतियों को लेकर अपना असंतोष एवं आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। सरकार वित्तीय संकट एवं वैश्विक महामारी के काल में शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों के समस्त संगठनों से बिना संवाद किए बिना किसी सहमति के 1 दिन का वेतन जून माह में भी देने का आदेश पुन: जारी कर दिया है। जो प्रदेश सरकार के कार्य करने की स्वेक्षाचारिता एवं अलोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का जीता जागता है। सरकार के इस आदेश का कर्मचारी जगत पूर्णत: विरोध कर रहा है इस विरोध के माहौल में भी कर्मचारी 1 दिन का वेतन कटौती कराना चाहते हैं उनसे लिखित सहमति के आधार पर वेतन कटौती की जाए।

छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ संघ ने इस बात पर खेद व्यक्त किया है की वित्तीय संकट के दौर में छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार द्वारा निगम मंडलों में भारी नियुक्ति, प्रदेश सरकार के अधिकारी कर्मचारियों का थोक भाव में तबादला, जनप्रतिनिधियों एवं मंत्री स्तर के लोगों द्वारा बड़े स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाना, शैक्षणिक जगत के संकट के बीच अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई को भी इसी वर्ष से लागू कराया जाना, मॉडल स्कूल की परिकल्पना इस बात को रेखांकित करता है की सरकार वित्तीय संकट के नाम पर केवल मगरमच्छी आंसू ही बहा रही है। छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में सरकार को एवं शासन को विनम्रता पूर्वक सलाह दी है कि अनेकों प्रकार की नकारात्मक आदेश जारी करने से बेहतर कि प्रदेश में इस वित्तीय वर्ष में सेवानिवृत्ति होने वाले अधिकारी कर्मचारियों की सेवा में 2 साल का विस्तार की जाए ताकि सेवानिवृत्ति के उपरांत दिए जाने वाले लाखों करोड़ों रुपए के तत्काल भुगतान से सरकार को राहत महसूस होगी।


छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संगठन अपने सहयोगी संगठनों एवं छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के साथ मिलकर संयुक्त रुप से 1 जुलाई 2020 को काला दिवस के रूप में विरोध कार्यक्रम आयोजित करेगी तत्पश्चात यदि परिस्थितियां आंदोलन एवं विरोध के अनुकूल रही तो 3 जुलाई को राष्ट्रव्यापी विरोध स्वरूप श्रमिक विरोधी, किसान विरोधी, कर्मचारी विरोधी एवं जन विरोधी नीतियों को लेकर एक बड़ा विरोध का आयोजन किया जाएगा। संगठन ने अभी भी प्रदेश की सरकार से निवेदन किया है अपने कर्मचारी विरोधी आचरणों को त्याग कर बड़े दिल का परिचय दें ताकि बढ़ते असंतोष एवं अप्रिय स्थिति को टाला जा सके एवं अनावश्यक आंदोलन के रास्ते से कर्मचारियों को बचाया जा सके। इस आशय की विज्ञप्ति छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ जिला शाखा अध्यक्ष अनंत सिन्हा ने जारी की है।

02-10-2018
Federation : सम्मेलन की असफलता को लेकर फेडरेशन का आयोजकों पर बड़ा हमला

रायपुर। 30 सितंबर को जिस तरीके से शिक्षक महासम्मेलन को वह आशातीत सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उम्मीद में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था और रही सही कसर पंचायत मंत्री अजय चंद्राकर के डांट डपट ने पूरी की, इसने उसी दिन कार्यक्रम के रूप में धिक्कार रैली का आयोजन करने वाले फेडरेशन के नेताओं को सम्मेलन के आयोजकों वीरेंद्र दुबे और केदार जैन पर बड़ा हमला करने का मौका दे दिया है और फेडरेशन इसका भरपूर लाभ भी उठा रहा है । सोशल मीडिया में यह जंग खुले तौर पर जारी है जहां सम्मेलन के आयोजक वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने तो शालीनता से चुप्पी ओढ़ ली है लेकिन कार्यक्रम के पूरी तरह असफल होने के बावजूद उनके कुछ पदाधिकारी उस कार्यक्रम को सफल बताने में जुट गए थे जिसके बाद तो फेडरेशन को और खुला हमला करने का मौका मिल गया और वह मौके को जबरदस्त तरीके से भूना भी रहे है। फेडरेशन के संयोजक जाकेश साहू ने व्हाट्सएप पर पोस्ट डाल कर सम्मेलन के दोनों आयोजकों वीरेंद्र दुबे और केदार जैन पर चुटकी ली है।

दरअसल राजधानी रायपुर के इनडोर स्टेडियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया था उसके दर्शक दीर्घा की कुल क्षमता पवेलियन के तौर पर केवल 4000 की है जो मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान पूरी तरह से खाली थी और नीचे अलग से जिन कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी वह भी पूरी तरह से नहीं भर पाई थी इस लिहाज से कार्यक्रम में 1000 से 1500 की ही भीड़ थी जो मीडिया के कैमरे में भी कैद हुई जिसे बड़े नेताओं ने तो स्वीकार कर लिया लेकिन उनके संघ के छोटे नेता इसे झूठलाने लगे और  स्टेडियम में  6000 की भीड़ पतला ने लगे जबकि  जितने भी पत्रकार वहां उपस्थित थे उन्हें भी हजार पंद्रह सौ से अधिक की भीड़ दिखाई नहीं दी जिसने वहां मुख्यमंत्री और मंत्री के साथ उपस्थित सभी लोगो को चौंकाया भी और एक बार फिर विरोधी संगठनों को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया।

बहरहाल दोनों तरफ से हमला जारी है लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान आम शिक्षाकर्मियों को हो रहा है क्योंकि दोनों ही कार्यक्रम से शिक्षाकर्मियों को किसी प्रकार का कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिला है। न तो सम्मेलन में किसी प्रकार की कोई घोषणा हुई उल्टे डांट डपट से जो बेइज्जती हुई वह अलग वहीं फेडरेशन का आंदोलन तो भीड़ के लिहाज से पूरी तरह सफल रहा लेकिन जिस तरीके से कार्यक्रम की समाप्ति की गई वह भी प्रश्नचिन्ह खड़े कर गया कि क्या केवल और केवल अपनी जमीन तैयार करने के लिए शिक्षाकर्मियों के आक्रोश का उपयोग किया जा रहा है। 

19-09-2018
Shikshakarmi : मोर्चा की राह पर चला फेडरेशन, अब आभार जताने के लिए मांगा सरकार से समय

बिलासपुर। शिक्षाकर्मी संगठनों की राजनीति भी बड़ी गजब है। पहले जिन चीजों के लिए दूसरे संगठनों को गाली देने और कोसने में उतारू रहते हैं। बाद में वही चीज स्वयं करते हुए नजर आने लगते हैं। संविलियन में रह गई विसंगतियों को लेकर आंदोलन के दौरान दूरी बनाए रखने वाले कुछ संगठनों के पदाधिकारी ने छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन के नाम से एक नए संगठन का निर्माण किया और  सहायक शिक्षकों के वेतन में विसंगति और संविलियन से वंचित रह गए शिक्षकों के हक के लिए लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। आधे अधूरे संविलियन से नाराज प्रदेश के शिक्षाकर्मियों ने फेडरेशन को भरपूर साथ दिया।

फेडरेशन के नेताओं ने भी मौके को खूब भुनाया और पुराने नेताओं पर चंदा वसूली से लेकर सरकार से सांठगांठ करके हड़ताल वापस लेने का गंभीर आरोप लगाया। लेकिन कुछ समय बाद ही फेडरेशन वह सभी दांवपेच अजमाते हुए नजर आया जिसे लेकर जिसका विरोध करते हुए उसने अपनी जमीन तैयार की थी यानी शिक्षाकर्मियों से हर आंदोलन के लिए सहयोग राशि वसूली और भाजपा नेताओं को गुलदस्ता देते हुए भी नजर आए। यही नहीं 5 अगस्त को अनिश्चितकालीन हड़ताल की बात कहकर उससे भी पैर पीछे खींच लिया।

आभार को शिक्षकों के पीठ पर छुरा भोंकना कहने वाले अब आभार जताने के लिए मांग रहे है समय पूर्व में बड़ा आदोंलन और गर्मियों की छुट्टी में भी नए नए तरीकों से सरकार को परेशानी में डाल के निर्णय लेने को मजबूर करने वाले संगठनों ने संविलियन के बाद सरकार का आभार व्यक्त करते हुए बची हुई विसंगतियों को सामने लाने की रणनीति बनाई तो फेडरेशन के शीर्ष नेताओं ने उन पर जमकर कीचड़ उछाला और इसे शिक्षाकर्मियों के साथ विश्वासघात बताया... बकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि जब तक शिक्षा कर्मियों की मांग पूर्ति नहीं हो जाती तब तक किसी प्रकार का कोई आभार प्रदर्शन या सम्मेलन नहीं होना चाहिए। लेकिन बदलते दौर में जहां फेडरेशन के नेताओं ने अनिश्चितकालीन आंदोलन से पलटी मार ली वहीं अब स्वयं पुराने संगठनों के राह पर ही चल निकले हैं । छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ जहां कई जिलों में सरकार का आभार प्रदर्शन करते हुए अपनी मांग रख रहा है और बिलासपुर में तो उन्होंने बकायदा मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए मांग पत्र सौंपा जिसके तरीके की स्वंय मुख्यमंत्री ने प्रशंसा की, वहीं मोर्चा के ही दो घटक दल शालेय और संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ 30 सितम्बर को आभार प्रदर्शन करने की घोषणा कर चुके हैं और इसके लिए तैयारी चल रही है।

अब फेडरेशन ने भी पत्र लिखकर प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में संविलियन के लिए आभार व्यक्त करने के साथ मांग पत्र रखने के लिए समय देने की मांग की है और इसके लिए उनके प्रांतीय संयोजक शिव सारथी ने पत्र जारी किया है यानि अब फेडरेशन भी छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय शिक्षक संघ के तर्ज पर ही आभार सह मांग की रणनीति पर चलने लगा है तो सवाल यह उठ रहा है कि जब उन्हें भी यही काम करना है तो दूसरों को कोसने की रणनीति क्यों अपनाई जा रही है क्योंकि 30 सितम्बर के शालेय और संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ के प्रदर्शन के खिलाफ भी फेडरेशन ही आग उगलते नजर आ रहा है तो क्या कुल मिलाकर यह सभी कृत्य दूसरे संगठनों को नीचा दिखाने और खुद को बड़ा बताने के लिए किया जा रहा है या फिर वास्तव में संगठनों को शिक्षाकर्मियों की भी चिंता है।

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