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21-10-2020
कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने कई विभाग एक साथ,आपसी समन्वय के लिए की चर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास से कुपोषण मुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इन प्रयासों और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव प्रसन्ना आर. की अध्यक्षता में 21 अक्टूबर को विभिन्न सहयोगी विभागों के मध्य प्रभावी अभिसरण स्थापित कर कुपोषण के स्तर में कमी लाने ऑनलाइन बैठक हुई। बैठक में स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खाद्य, कृषि एवं उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण,समाज कल्याण, नगरीय प्रशासन विभाग के नोडल अधिकारियों सहित यूनिसेफ और स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ को कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त बनाने के लिए समन्वित प्रयासों, अपसी-तालमेल और सहयोग से लक्ष्य प्राप्ति पर चर्चा की गई।सचिव प्रसन्ना ने कहा कि कुपोषण, एनीमिया और जन्म के समय वजन के स्तर में निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कमी लाने के लिए प्रदेश में पोषण अभियान का संचालन किया जा रहा है।

पोषण अभियान के अंतर्गत अभिसरण एक मुख्य घटक है। सभी विभागों के साथ मिलकर काम करने से कुपोषण की दर में अपेक्षानुसार लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए सभी विभागों के मध्य डाटा और सूचनाओं के आदान प्रदान,संसाधनों का प्रभावी उपयोग और योजनाओं के समन्वित प्रयास की जरूरत है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों से योजनाओं के साथ क्रियान्वयन और समन्वय पर चर्चा की। उन्होंने प्रदेश के 10 आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान दिए जाने के लिए कहा। उन्होंने पोषण और स्वास्थ्य की प्रगति आधारित मासिक स्वास्थांक भी तैयार करने के निर्देश दिए जिससे कलेक्टर अपने जिले की मासिक समीक्षा कर सकें।सचिव प्रसन्ना ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्रचायत प्रतिनिधियों के लिए पोषण और स्वास्थ्य के मुद्दों पर ओरिएंटेशन प्रोग्राम करने और ग्राम सभाओं में पोषण संबंधी जानकारी देने और बुकलेट के माध्यम से जानकारी पहुंचाना तय किया जाना चाहिए। कुपोषण मुक्त पंचायत बनाने के लिए हमें उन्हें मोटिवेट करना पड़ेगा। उन्होंने मनरेगा से जुड़ी महिलाओं को उचित खान-पान की जानकारी देने कहा, जिससे पोषण संबंधी स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाया जा सके। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सभी आंगनबाड़ियों में पेयजल और शौचालय के लिए कार्यवाही करने के लिए कहा गया।

उन्हें शहरी इलाकों की बस्तियों और रेल्वे ट्रैक के आसपास की जगहों में अधिक फोकस करने कहा गया जिससे डिसेन्ट्री और डायरिया जैसी बीमारियों के होने का अधिक खतरा रहता है। उद्यानिकी विभाग को सभी आंगनवाड़ियों में शत प्रतिशत पोषण वाटिका निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने को कहा गया।खाद्य विभाग के नोडल अधिकारी ने कहा कि कोंडागांव जिले से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में फोटीफाइड चावल वितरण की योजना शुरू की जानी है। इसे जिले के आंगनबाड़ियों में भी दिया जाएगा। सचिव प्रसन्ना ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से महिलाओं और बच्चों को दिए जाने वाले पोषक आहार की पौष्टिकता में वृद्धि करने रागी,कोदो,कुटकी जैसे मिलेट्स मिलाने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने कृषि विभाग को मिलेट्स उपलब्ध कराने कहा है।बैठक में पोषण अभियान के नोडल अधिकारी नंदलाल चौधरी ने कहा कि कन्वर्जेंस के आधार पर 31 दिसंबर और उसके बाद 31 मार्च तक लक्ष्यों को निर्धारित कर कार्ययोजना बनाई जाएगी। योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम का साथ घर-घर विजिट और मॉनिटरिंग पर फोकस किया जाएगा। विभागों के मध्य डाटा के आदान-प्रदान से कमियों को दूर करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नियमित समीक्षा बैठक पर बल दिया जाएगा। इस दौरान यूनिसेफ और स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी प्रभावी अभिसरण के लिए अपने विचार रखे।

 

04-10-2020
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का एक साल : गरम पौष्टिक आहार और समुचित देखभाल से कुपोषण मुक्त हुए प्रदेश के 67 हजार बच्चे

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कुपोषण मुक्ति की पहल पर छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुए प्रदेशव्यापी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को एक साल पूरा हो गया है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया ने बताया है कि छत्तीसगढ़ में इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आये हैं। अभियान के साथ विभिन्न योजनाओं के एकीकृत प्लान और समन्वित प्रयास से बच्चों में कुपोषण दूर करने में बड़ी सफलता मिली है। योजना के शुरू होने के समय वजन त्यौहार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 4 लाख 92 हजार बच्चे कुपोषित थे, इनमें से 67 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों में लगभग 13.79 प्रतिशत की कमी आई है। जो कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक बड़ी उपलब्धि है। बहुत ही कम समय में ही प्रदेश में कुपोषण की दर में उल्लेखनीय कमी आई है, इसका श्रेय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कुशल नेतृत्व और उनकी दूरदर्शी सोच को जाता है।
छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों में महिलाओं और बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की दर को देखते हुए प्रदेश को कुपोषण और एनीमिया से मुक्त करने अभियान की शुरूआत की। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थे। इन आंकड़ों को देखे तो कुपोषित बच्चों में से अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचल इलाकों के बच्चे थे। राज्य सरकार ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और ‘कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ‘ की संकल्पना के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की। अभियान को सफल बनाने के लिए इसमें जन-समुदाय का भी सहयोग लिया गया।
 

प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में लइका जतन ठउर जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। जिला खनिज न्यास निधि का एक बेहतर उपयोग कर सुपोषण अभियान के तहत गरम भोजन प्रदान करने की व्यवस्था की गई। योजना की सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इसे पूरे प्रदेश में लागू किया। इस अभियान के तहत चिन्हांकित बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर निःशुल्क पौष्टिक आहार और कुपोषित महिलाओं और बच्चों को गर्म पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। अतिरिक्त पोषण आहार में हितग्राहियों को गर्म भोजन के साथ अण्डा, लड्डू, चना, गुड़, अंकुरित अनाज, दूध, फल, मूंगफली और गुड़ की चिक्की, सोया बड़ी, दलिया, सोया चिक्की और मुनगा भाजी से बनेे पौष्टिक और स्वादिष्ट आहार दिये जा रहे हैं। इससे बच्चों में खाने के प्रति रूचि जागृत हुई है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सब्जियों और पौष्टिक चीजों के प्रति भी जागरूकता बढ़ी है। इससे पोषण स्तर में सुधार आना शुरू हो गया है। स्वास्थ विभाग के सहयोग से एनीमिया प्रभावितों को आयरन फोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली दी जाती है। प्रदेश को आगामी 3 वर्षों में कुपोषण से मुक्त करने के लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा समन्वित प्रयास लगातार किये जा रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों को बंद होने पर भी बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के माध्यम से प्रदेश के 51 हजार 455 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लगभग 28 लाख 78 हजार हितग्राहियों को घर-घर जाकर रेडी-टू-ईट पोषक आहार का वितरण सुनिश्चित कराया गया है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती, शिशुवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को रेडी-टू-ईट का वितरण किया जा रहा है। कुपोषण पर मिल रही विजय को बनाय रखने और कोरोना का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर ना हो इसे देखते हुए प्रदेश में संक्रमण मुक्त स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और पालकों की सहमति से आंगनबाड़ी को खोला गया है। जहां सुरक्षा के प्रबंध के साथ फिर से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत हितग्राहियों को गर्म भोजन देने की व्यवस्था की गई है।

 

04-10-2020
मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की वर्षगांठ पर करेंगे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यूनिफॉर्म वितरण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य में कुपोषण मुक्ति के लिए संचालित मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की सफलता में सक्रिय भूमिका निभाने वाली राज्य की समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यूनिफॉर्म (साड़ी) वितरण का शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 5 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे से होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मौके पर मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान से संबंधित कॉफी टेबल बुक और महिला एवं बाल विकास विभाग पत्रिका का विमोचन करेंगे।

साथ ही इस अभियान पर तैयार डॉक्यूमेंट्री और कुपोषण की रोकथाम के लिए व्यवहार परिवर्तन के लिए सामाजिक संदेश देने  बनाई गई फिल्म का अवलोकन करेंगे। मुख्यमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुपोषण अभियान से लाभांवित हितग्राहियों से चर्चा भी करेंगे। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया और सचिव प्रसन्ना आर. मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत बीते एक वर्ष में हासिल उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण देंगे।

 

26-05-2020
जयप्रकाश मौर्य होंगे धमतरी जिले के नए कलेक्टर

धमतरी। धमतरी कलेक्टर रजत बंसल का तबादला हो गया है। उनके स्थान पर  जयप्रकाश मौर्य को धमतरी का नया कलेक्टर बनाया गया है, और रजत बंसल को बस्तर का नया कलेक्टर बनाया गया है। धमतरी में रहते हुए कलेक्टर रजत बंसल ने बेहतर काम कर दिखाया, जिसमें कोरोना रोकथाम, जबर्रा, नरहरा का विकास, कुपोषण मुक्ति समेत अन्य कार्य शामिल है।

 

18-03-2020
गरीबी उन्मूलन के लिए पूरा ध्यान केंद्रित करें : आरपी मंडल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप गरीबी उन्मूलन अभियान के लिये कारगर कार्ययोजना तैयार कर उसे बेहतर ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। इसके साथ ही मलेरिया और कुपोषण मुक्ति के लिए सार्थक पहल किया जाये। उक्त निर्देश मुख्य सचिव आरपी मण्डल ने दन्तेवाड़ा कलेक्टोरेट के दन्तेवाड़ा एवं बीजापुर जिले के जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक के दौरान दिये। आरपी मण्डल ने कहा कि राज्य शासन ने आगामी चार वर्षो में दन्तेवाड़ा जिले में गरीबी के औसत को राष्ट्रीय औसत से कम करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है,इस लक्ष्य को हासिल करने के लिये मिशन मोड में काम करना होगा। सभी विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर निर्धन तबके के लोगों की आय संवृद्धि के लिए पहल करना होगा। आरपी मंडल ने गरीबी उन्मूलन अभियान के लिये सबसे पहले बेस लाइन सर्वेक्षण कर कार्ययोजना तैयार कर क्रियान्वयन पर पूरा फोकस किये जाने अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने गरीबी उन्मूलन अभियान के लिये कृषि, उद्यानिकी, सिंचाई,पशुपालन, मत्स्यपालन, ग्रामोद्योग इत्यादि सेक्टरों को समाहित कर कारगर कार्ययोजना तैयार करने अधिकारियों को निर्देशित किया।

आरपी मण्डल ने कहा कि बस्तर में कुपोषण मुक्ति के लिए बेहतर कार्य हो रहा है, यहां बच्चों, शिशुवती एवं गर्भवती माताओं सहित शाला त्यागी किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक गर्म भोजन के साथ ही अतिरिक्त आहार के रूप में अंडा और मूंगफली-फूटा चना एवं गुड़ का लड्डू उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम परिलक्षित होने लगा है लेकिन अभी इस दिशा में अधिक मेहनत करना है और बस्तर के बच्चों,माताओं और किशोरी बालिकाओं को कुपोषण से निजात दिलाना है।  बैठक में लोक निर्माण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सिदार्थ कोमल परदेशी, संस्कृति विभाग के सचिव पी.अनबलगन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी,प्रबन्ध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला, कमिश्नर बस्तर संभाग अमृत कुमार खलखो,मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर वृत्त मो.शाहिद सहित दन्तेवाड़ा एवं बीजापुर जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक,डीएफओ, सीईओ जिला पंचायत तथा विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

 

16-01-2020
छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति के प्रयासों को यूनिसेफ ने फिर सराहा 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किए जा रहे समन्वित अभिनव प्रयासों को लोगों की लगातार सराहना और सहयोग मिल रहा है। आज एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ ने छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। यूनिसेफ इंडिया ने अपने ट्वीटर हैण्डल से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के शुभारंभ की पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि 'खून की कमी और कुपोषण रोकने के लिए मलेरिया की रोकथाम बहुत जरूरी कदम है। जिससे बस्तर के आदिवासी इलाकों में महिलाओं और बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यह छत्तीसगढ़ सरकार का महत्वपूर्ण कदम है।’ इससे पहले भी यूनिसेफ ने अपने ट्वीटर और फेसबुक एकाउंट पर दंतेवाड़ा जिले के प्राथमिक शाला बेंगलुरू की फोटो साझा कर स्कूलों में चल रहे किचन गार्डन बागवानी की सराहना करते हुए इसे बच्चों के पोषण के लिए अनूठी राह बताया था। राज्य सरकार द्वारा आकांक्षी जिलों और कुपोषण से ग्रसित आदिवासी बहुल इलाकों में खासतौर पर कुपोषण मुक्ति के प्रयास किए जा रहे है। इसके सुखद परिणामस्वरूप विगत दिनों सुपोषण अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि और नयी पहल के लिए 115 आकांक्षी जिलों में से दंतेवाड़ा जिले को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया है। 

उल्लेखनीय है कि बस्तर को मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण से मुक्त करने के संकल्प के साथ 15 जनवरी से संभाग के सातों जिलों में मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घरों के साथ ही स्कूलों, आश्रम, छात्रावासों और पैरा मिलिट्री कैम्पों में जाकर मलेरिया की जांच कर रही है। इसके साथ ही हाट-बाजारों में लोगों की जागरूकता के लिए अभियान चलाया जा रहा है। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के अंतर्गत मलेरिया उन्मूलन के साथ ही एनीमिया, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण दूर करने पर भी फोकस किया जा रहा है। इसके साथ ही कुपोषण और एनीमिया मुक्ति को ध्यान में रखते हुए बस्तर संभाग के साढ़े छह लाख से अधिक गरीब परिवारों के लिए ’मधुर गुड़ योजना’ शुरू की गई है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पूरे प्रदेश में सुपोषण अभियान शुरू किया गया है।  

12-01-2020
नक्सली क्षेत्रों में हम लोगों को खेती, रोजगार से जोड़ रहे हैं, नहीं तो वे बंदूक पकड़ेंगे : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार की पिछले एक वर्ष की योजनाओं से छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत में नया उछाल आया है। छत्तीसगढ़ मंदी के प्रभाव से अछूता रहा है। छत्तीसगढ़ के व्यापार और उद्योग जगत में नहीं, बल्कि नक्सलियों की भर्ती में मंदी आई है। उन्हें भर्ती के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति का विकास है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाओं के साथ सुरक्षा देने का काम राज्य सरकार कर रही है। हम लोगों को रोजगार से जोड़ रहे हैं। उन्हें हल पकड़ा रहे हैं, नहीं तो वे बंदूक पकड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने इस आशय के विचार आज यहां एक निजी होटल में एक टीवी चैनल के कार्यक्रम देश का नया विश्वास छत्तीसगढ़ में व्यक्त किए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सरकार के गठन के बाद किसानों के कर्ज माफ किए गए, 2500 रुपए प्रति क्विंटल पर धान की खरीदी की गई, तेंदूपत्ता संग्रहण की पारिश्रमिक बढ़ाकर चार हजार रुपए प्रति मानक बोरा किया गया। 15 लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रारंभ की गई। लोगों को छोटे-छोटे रोजगारों से जोड़ने का काम किया गया। बिजली बिल हाफ किया गया, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में 200 स्कूल प्रारंभ किए गए, दूरस्थ अंचलों में स्थित हाट बाजारों में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य क्लिनिक योजना प्रारंभ की गई, महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर पूरे प्रदेश में सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया।  उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन और कौशल विकास के क्षेत्र में देश के आंकांक्षी जिलों में छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला प्रथम स्थान पर है। नीति आयोग द्वारा माह नवंबर 2019 के लिए जारी डेल्टा रेंकिंग में नारायणपुर सहित छत्तीसगढ़ के तीन जिले टाप पांच जिलों में शामिल हैं। नीति आयोग की डेल्टा रेंकिंग में राजनांदगांव जिला तीसरे और सुकमा जिला पांचवें स्थान पर है। कुपोषण मुक्ति की दिशा में किए गए विशेष प्रयास से कुपोषण मुक्ति अभियान में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए देश के 115 आकांक्षी जिलों में से दन्तेवाड़ा जिले को सिल्वर स्कॉच अवार्ड से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं से प्रदेश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में 25 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है, जबकि पूरे देश में इस सेक्टर में 19 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी प्रकार रियल इस्टेट में दोगुनी, सराफा में 84 प्रतिशत और टेक्सटायील सेक्टर में 30 प्रतिशत की ग्रोथ हुई है। इसका कारण यह है कि आम आदमी, किसान, आदिवासी और मजदूरों की जेब में पैसा आया, जिससे छत्तीसगढ़ में व्यापार और उद्योग जगत फल-फूल रहा है। प्रदेश में बेरोजगारी में भी कमी आयी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नई उद्योग नीति में प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर अनेक रियायतें और सुविधाएं देने के प्रावधान किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की प्राचीन और गौरवशाली संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों से लोगों को पिछल 19 वर्षों में पहली बार यह लग रहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य उनका है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव के आयोजन से छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश और दुनिया में पहचान मिली।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कामों से लोगों में राज्य सरकार के प्रति विश्वास कायम हुआ है। राज्य सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का विश्वास हासिल करने के साथ-साथ, उस क्षेत्र के विकास और लोगों को सुरक्षा प्रदान करने की नीति पर काम कर रही है। राज्य में नक्सल घटनाओं में 40 प्रतिशत की कमी आयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इस्पात संयंत्र के लिए लगभग 1700 आदिवासियों और किसानों से अधिग्रहित की गई 4200 एकड़ जमीन उन्हें वापस कर दी है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में छोटे-छोटे अपराधों में जेलों में बंद किए गए लोगों को रिहा करने के लिए जस्टिस पटनायक की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसकी अनुशंसा पर लोगों को लोगों को रिहा करने की कार्रवाई प्रारंभ की गई है। बस्तर में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय युवाओं की भर्ती का निर्णय लिया गया है। वन अधिकार कानून के तहत वन क्षेत्रों के निवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार पट्टे देने का काम प्रारंभ किया गया है।

31-12-2019
सीएम भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को दी नए वर्ष की शुभकामनाएं, कहा वर्ष 2019 छत्तीसगढ़ के लिए रहा उपलब्धियों भरा

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को नए वर्ष 2020 की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं । मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के लिए वर्ष 2019 उपलब्धियों भरा रहा। चाहे किसानों की कर्ज माफी हो,  2500 प्रति क्विंटल पर धान खरीदी, सभी परिवारों को 35 किलो चावल, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ, जैसे बड़े फैसले लिए गए, साथ ही लोहंडीगुड़ा के किसानों को उनकी जमीन लौटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया और उस पर अमल किया गया। शहरी क्षेत्रों में छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री प्रारंभ की गई। कलेक्टर दर में 30 प्रतिशत की कमी की गई, भूखंडों को फ्री होल्ड करने का निर्णय किया गया। गुमाश्ता एक्ट में संशोधन किया गया। स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच लोगों तक बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना, शहरी क्षेत्रों में मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना, कुपोषण मुक्ति के लिए सुपोषण अभियान प्रारंभ किए गए। वन अधिकार पट्टा देने का काम छत्तीसगढ़ में फिर से प्रारंभ किया गया। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना प्रारम्भ की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक वर्ष में छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन के कार्य भी किए गए। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी त्योहारों पर न सिर्फ अवकाश की घोषणा की गई, अपितु बड़े ही उत्साह से इस वर्ष पोला-तीजा, हरेली त्यौहार मनाया गया। राजधानी रायपुर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन भी इसी दिशा में किया गया एक छोटा सा प्रयास था। राज्य सरकार ने इस एक वर्ष में सभी वर्गो की उन्नति और विकास के लिए बड़े फैसले लिए हैं और उन पर अमल भी किया है। आने वाले वर्षों में भी हम इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ की सेवा करेंगे और प्रदेश के विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे ताकि भारत के मानचित्र में छत्तीसगढ़ का स्थान सर्वोपरि हो। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को नए वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि नया वर्ष सभी लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि हम सब मिलकर अपने पुरखों के सपनों के अनुरूप स्वास्थ्य, खुशहाल और समृद्ध ’गढ़वो नवा छत्तीसगढ़’ का सपना साकार करेंगे, जिसमें किसान, मजदूर, गरीब, पिछड़े, युवा और महिलाएं सहित समाज के सभी वर्गों के लोग खुशहाल हो।

 

10-10-2019
फूड बास्केट और प्रोटीन पाउडर से सुपोषित हो रहे कबीरधाम जिले के बच्चे

रायपुर। टीबी और कुपोषण मुक्ति की जंग अब साथ-साथ लड़ी जा रही है। इससे मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान को अतिरिक्त बल मिल रहा है। कबीरधाम जिले ने स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री सुपोषण योजना और मुख्यमंत्री हाटबाजार क्लीनिक योजना के शुभारंभ के पहले ही कुपोषण मुक्ति और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अपनी लड़ाई तेज कर दी और विभिन्न नवाचार के माध्यम से इस दिशा में प्रयास किये जाने लगे। इसी कड़ी में कवर्धा जिले में इस साल अगस्त माह से सभी आवश्यक पोषक तत्वों का समावेश कर कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने फूड बास्केट दिया जा रहा है। इसके साथ ही कुपोषित और टीबी से ग्रसित 60 बच्चों को फूड बास्केट में अलग से प्रोटीन पाउडर वितरित किया रहा है। प्रोटीन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। खासकर टीबी बीमारी के चलते बच्चे कमजोर हो जाते हैं। टीबी से पीड़ित बच्चों के विकास के लिए पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसे देखते हुए कवर्धा जिला क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य पोषक तत्वों के साथ ही जिले के टीबी से ग्रसित में 0-14 वर्ष के बच्चों को प्रोटीन पाउडर दिया जा रहा है। पिछले वर्ष जिले में 663 टीबी के मरीज चिन्हांकित हुए थे वहीं इस वर्ष जनवरी 2019 से अगस्त 2019 के मध्य कुल 493 टीबी के मरीज पाए गए हैं। इनमें 60 बच्चे शामिल हैं। जिनका उपचार और देखरेख जिला क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हो रहा है। शासन के प्रयासों से मरीजों की संख्या में कमी आई है। इस दिशा में तेजी से काम करते हुए टीबी और कुपोषण से मुक्ति के प्रयास किये जा रहे हैं। जिला क्षय नियंत्रण समिति द्वारा टीबी से बचाव और जन जागरूकता के लिए एक खास तरह का बैग भी तैयार किया गया है। बैग से चाहिए नेतृत्व अपार, टीबी मुक्त हो संसार स्लोगन के सहारे टीबी बीमारी के लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है।

06-10-2019
प्रोटीन पाउडर से सुपोषित हो रहे बच्चे, पिछले वर्ष मिले थे 493 टीबी के मरीज

कवर्धा। कुपोषण मुक्ति की ओर सरकार अग्रसर है। सभी आवश्यक पोषक तत्वों का समावेश कर कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने फूड बास्केट तो दिया जा रहा है। सुपोषण की ओर एक कदम बढ़ाते हुए कवर्धा जिले ने अनूठी पहल करते हुए कुपोषित और टीबी से ग्रसित बच्चों को सुपोषित करने फूड बास्केट में अलग से प्रोटीन पाउडर वितरित कर रहा है। अनूठी पहल के साथ कवर्धा प्रदेश का पहला जिला है, जहां टीबी और कुपोषण मुक्ति की जंग साथ-साथ लड़ी जा रही है। प्रोटीन बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। खासकर टीबी बीमारी के चलते बच्चे कमजोर हो जाते हैं। इस दौरान यदि पोषक आहार उन्हें ना दी जाए तो उनका विकास रुक जाता है। इसे देखते हुए कवर्धा जिला क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष व्यवस्था की गई है। बीते अगस्त माह से जिले में सुपोषण फूड बास्केट के साथ-साथ प्रोटीन पाउडर वितरित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सुपोषण और टीबी के इलाज के साथ-साथ बच्चों का संपूर्ण विकास सुनिश्चित करना है। संदीप चंद्राकर जिला क्षय नियंत्रण कार्यक्रम कार्डिनेटर के मुताबिक फूड बास्केट के साथ-साथ जिले के 0-14 साल के बच्चे जो टीबी से ग्रसित हैं उन्हें प्रोटीन पाउडर दिया जा रहा है।

मिले थे 493 टीबी मरीज 60 के आसपास चिन्हांकित
सीएमएचओ डॉ. एसके तिवारी ने बताया टीबी से पीड़ित बच्चों के विकास के लिए पोषक तत्वों की जरूरत होती है। बच्चों के मानसिक विकास के लिए भी प्रोटीन सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसे देखते हुए अन्य पोषक तत्वों के साथ ही जिले के टीबी से ग्रसित में 0-14 वर्ष के बच्चों को प्रोटीन पाउडर भी दिया जा रहा है। जिला टीबी नियंत्रण कार्यक्रम अधिकारियों के मुताबिक बीते वर्ष 663 टीबी के मरीज चिन्हांकित हुए थे वहीं इस वर्ष जनवरी 2019 से अगस्त 2019 के मध्य 493 टीबी मरीज मिले थे। इनमें से लगभग 60 बच्चे शामिल हैं जिनका उपचार और देखरेख जिला क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत हो रहा है।

बैग से टीबी बचाव का संदेश

पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला क्षय नियंत्रण समिति द्वारा टीबी से बचाव के लिए जागरूकता के लिए एक खास तरह का बैग भी तैयार किया गया है। “चाहिए नेतृत्व अपार, टीबी मुक्त हो संसार” स्लोगन के सहारे बैग में टीबी बीमारी के लक्षण और बचाव के बारे में जानकारी दी जा रही है। दो हफ्ते से ज्यादा खांसी टीबी हो सकती है, इसका संदेश बैग के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

30-09-2019
प्रभारी मंत्री लखमा ने योजनाओं के जरिए हितग्राहियों को लाभान्वित करने पर दिया जोर 

 

धमतरी। जिले के 122 गांवों के चयनित 155 आंगनबाडिय़ों में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत कुपोषण मुक्ति की पहल की जाएगी। इस अभियान के जरिए आंगनबाड़ी आने वाले तीन से छह साल तक की आयु के 4044 बच्चे, 1182 गर्भवती माताओं को अतिरिक्त आहार के रूप में पौष्टिकता से भरपूर अण्डा अथवा सोयाबीन की बड़ी दी जाएगी। इस अभियान में जिले की अनूठी पहल के तौर पर 1042 शिशुवती माताएं, जिनके छह माह तक की आयु के बच्चे हैं, उन्हें भी एक वक्त का गर्म पका हुआ भोजन दिया जाएगा। साथ में अण्डा अथवा सोयाबीन की बड़ी आहार के रूप में परोसी जाएगी। कलेक्टोरेट सभाकक्ष में दोपहर 12 बजे से आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के वाणिज्यिक कर (आबकारी), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा ने आगामी दो अक्टूबर से शुरू होने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का जिले में सही तरीके से संचालन करने के निर्देश दिए। कलेक्टर रजत बंसल ने बैठक में बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी का प्रयास किया गया है। इसके मद्देनजर जिले के राइस मिलर्स, विभिन्न व्यापारिक संगठन इत्यादि ने सहयोग राशि प्रदान की है। इसके साथ ही जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी अपने एक दिन का वेतन इस अभियान के लिए सहर्ष देने का फैसला लिया है। प्रभारी मंत्री ने इन सभी प्रयासों को बैठक में काफी सराहा। उन्होंने आगामी दो अक्टूबर से सर्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत एपीएल परिवारों को प्रदान किया जाने वाले राशन कार्डों की जानकारी ली।  साथ ही आगामी दो अक्टूबर से जिले में मुख्यमंत्री शहरी स्लम क्लिनिक योजना की शुरूआत होने जा रही है। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा बताया गया कि जिले में बस्तर तथा दन्तेवाड़ा की तर्ज पर मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लीनिक योजना जून माह से संचालित है। सितंबर माह में 23 हाट-बाजारों में 2352 मरीजों का उपचार किया गया है। प्रभारी मंत्री ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर आगामी दो अक्टूबर से शुरू होने वाले इन योजनाओं के जरिए हितग्राहियों को सही तरीके से लाभान्वित करने पर जोर दिया। बैठक में प्रभारी मंत्री ने जिले के एकल शिक्षकीय स्कूलों की जानकारी लेते हुए वहां पढ़ाने के लिए डीएमएफ से अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, बिहान योजना सहित अन्य विषयों पर भी अधिकारियों से जानकारी ली। बैठक में सिहावा विधायक डॉ.लक्ष्मी ध्रुव, विधायक धमतरी रंजना साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष  रघुनंदन साहू, कुरुद विधायक प्रतिनिधि  प्रवीण चन्द्राकर, पुलिस अधीक्षक  बालाजी राव सोमावार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत विजय दयाराम के., वनमण्डलाधिकारी अमिताभ बाजपेयी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

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