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17-11-2020
महंगे गैजेट खरीदने युवक ने बेची किडनी और अब जिंदा रहने कराना पड़ रहा डॉयलिसिस

नई दिल्ली। महंगे गैजेट के शौक ने एक युवक की जान सांसत में डाल दी। अब युवक एक किडनी पर जिंदा तो है पर उसे जीने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। दरअसल किडनी बेचकर आईफोन खरीदना 25 वर्षीय चीनी व्यक्ति वांग शांगुन को महंगा पड़ गया। खबर के मुताबिक 2011 में, चीन के अनहुई प्रांत से आने वाले 17 वर्षीय शांगकुन ने आईपैड 2 और एक आईफोन खरीदने के लिए अपनी किडनी 3,273 डॉलर में बेच दी थी। इस मामले में उस समय वांग शांगुन के हवाले से कहा गया था,"मुझे दो गुर्दे क्यों चाहिए?" एक ही पर्याप्त है।" चूंकि वो एप्पल के गैजेट के लिए बहुत उत्सुक थे, इसलिए उन्होंने एक ऑनलाइन मार्केट रूम में एक ब्लैक मार्केट ऑर्गन पेडलर से बात की।

 इस चैट में पैडलर ने उन्हें बताया कि वह अंग बेचकर 3,000 डॉलर कमा सकते हैं। इस बातचीत के तुरंत बाद, 17 साल के वांग ने अपने दाहिने गुर्दे को बेचने के लिए हुनान प्रांत में एक अवैध सर्जरी करा ली। खबर के मुताबिक कुछ महीनों के भीतर, शेष किडनी में अनहाइजीनिक ऑपरेशन लोकेशन और पोस्ट-ऑपरेटिव केयर की कमी के कारण उन्हें संक्रमण हो गया। उसकी हालत बिगड़ती गई और वह अब गुर्दे की कमी के कारण बेहोश हो गया है और उसे नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। उसकी मां को उस समय संदेह हुआ जब उसने उसे एप्पल के महंगे उपकरणों के साथ घर में प्रवेश करते हुए देखा और फिर उसने सर्जरी के बारे में कुबूला। 

 

19-10-2020
बढ़ी चीन की चिंता, मालाबार युद्धाभ्यास में भारत के साथ पहली बार शामिल होगा ऑस्ट्रेलिया

नई दिल्ली। लद्दाख से सटी एलएसी पर भारत और चीन के बीच विवाद लगातार जारी है। इसी बीच भारत ने हिंद महासागर में अपना एक नया सहयोगी खोज लिया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने अगले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के साथ होने वाले वार्षिक मालाबार नौसैनिक अभ्यास के लिए ऑस्ट्रेलिया को आमंत्रित किया है। इस कदम से एक तरफ क्वाड (क्वाड्रिलेटरल-सिक्योरिटी डायलॉग) को मजबूती मिलेगी तो चीन की बेचैनी बढ़ेगी। यह पहली बार है जब क्वाड के सभी सदस्य एक साथ सैन्य अभ्यास में शामिल होंगे।
यह पहली बार है जब क्वाड समूह के चारों देश भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया इस तरह के युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इस युद्धाभ्यास में पहले अमेरिका और भारत ही हिस्सा लेते थे, लेकिन साल 2015 में इसमें जापान को भी जोड़ा गया और अब ऑस्ट्रेलिया के इस युद्धाभ्यास में शामिल हो रहा है। नौ सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, समुद्री क्षेत्र में अन्य देशों के साथ सहयोग बढाने और विशेष रूप से आस्ट्रेलिया के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग को पुख्ता करने की दिशा में आगे बढते हुए इस वर्ष होने वाले मालाबार अभ्यास में आस्ट्रेलियाई नौसेना की भी हिस्सेदारी का निर्णय लिया गया है। यह अभ्यास बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में होगा। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा,'भारत समुद्री सुरक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है और ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा सहयोग में वृद्धि को देखते हुए मालाबार 2020 में ऑस्ट्रेलियन नेवी की भी सहभागिता होगी। इस बार अभ्यास को 'नॉन कॉन्टैक्ट एट सी' फॉर्मेट में तैयार किया गया है।

अभ्यास से शामिल देशों के नेवी के बीच सहयोग और समन्वय मजबूत होगा। चीन की अपना प्रभुत्व बढाने की रणनीति पर अंकुश लगाने के लिए भारत,अमेरिका,जापान और आस्ट्रेलिया के 'क्वाड' की लामबंदी आज और अधिक मजबूत हो गयी है। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, मालाबार अभ्यास दो हिस्सों में होगा। अभ्यास पहले 3-6 नवंबर और फिर 17-20 नवंबर के बीच होगा। चारों देशों का साझा उद्देश्य मुक्त और स्वतंत्र हिंद प्रशांत क्षेत्र है। भारत और अमेरिका की द्विपक्षीय नौसेना सहयोग के तहत मालाबार युद्धाभ्‍यास वर्ष 1992 में शुरू किया गया था। वर्ष 2018 में यह वार्षिक युद्धाभ्‍यास फिलीपींस की गुआम के तट पर और 2019 में जापान के तट पर हुआ था। हिंद-प्रशांत क्षेत्र महासागर में परेशानी का सबब बने चीन को रोकने के लिए चार बड़ी शक्तियां पहली बार मालाबार में साथ युद्धाभ्यास करती दिखेंगी। इसके साथ ही पहली बार अनौपचारिक रूप से बने क्वॉड ग्रुप को सैन्य मंच पर देखा जाएगा। क्वाड मालाबार पहले एक सीमित नौसैनिक युद्धाभ्यास हुआ करता था लेकिन अब इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन की विस्तार नीति को रोकना है।

 

17-09-2020
चीन ने की एलएसी की यथास्थिति बदलने की कोशिश : राजनाथ सिंह

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन राज्यसभा में भारत-चीन सीमा विवाद पर बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन ने एलएसी की यथास्थिति बदलने की कोशिश की है। रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन पर भारत बड़ा और कड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है। भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है। यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है।” रक्षा मंत्री ने कहा,“चीन मानता है कि बाउंड्री अभी भी औपचारिक तरीके से निर्धारित नहीं है। उसका मानना है कि हिस्टोरिक्ल जुरिस्डिक्शन के आधार पर जो ट्रेडिश्नल कस्टमरी लाइन है उसके बारे में दोनों देशों की अलग व्याख्या है। 1950-60 के दशक में इस पर बातचीत हो रही थी पर कोई समाधान नहीं निकला।

” राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “सदन को जानकारी है कि पिछले कई दशकों में चीन ने बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी शुरू की है, जिससे बॉर्डर एरिया में उनकी तैनाती की क्षमता बढ़ी है। इसके जबाव में हमारी सरकार ने भी बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का बजट बढ़ाया है, जो पहले से लगभग दोगुना हुआ है।” राजनाथ सिंह ने कहा, “यह सच है कि हम लद्दाख में एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं लेकिन साथ ही मुझे भरोसा है कि हमारा देश और हमारे वीर जवान इस चुनौती पर खरे उतरेंगे। मैं इस सदन से अनुरोध करता हूं कि हम एक ध्वनि से अपनी सेनाओं की बहादुरी और उनके अदम्य साहस के प्रति सम्मान प्रदर्शित करें। इस सदन से दिया गया, एकता और पूर्ण विश्वास का संदेश, पूरे देश और पूरे विश्व में गूंजेगा, और हमारे जवान, जो कि चीनी सेनाओं से आंख से आंख मिलाकर अडिग खड़े हैं, उनमें एक नए मनोबल, ऊर्जा व उत्साह का संचार होगा।”

 

14-09-2020
चीन की नापाक हरकत, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री सहित बड़ी हस्तियों की कर रहा जासूसी

नई दिल्ली। चीन की नापाक हरकत को लेकर एक और खुलासा हुआ है। बताया गया है कि चीन की कुछ कंपनियों द्वारा भारत में जासूसी की जा रही है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री तक, मुख्यमंत्री से लेकर सेना के वरिष्ठ अफसरों तक की जासूसी की जा रही है। इसके अलावा, देश के प्रमुख उद्योगपतियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारी भी चीन के निशाने पर हैं।  एक अंग्रेजी अखबार ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि शेनजेन बेस्ड चीनी कंपनी 'झेनझुआ डाटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड' भारत में करीब दस हजार लोगों की निगरानी कर रही है। इस कंपनी का चीन की सरकार और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से सीधा संबंध है। इस चीनी कंपनी की करीब दस हजार भारतीयों पर नजर है, जिसमें प्रधानमंत्री से लेकर एक मेयर तक शामिल है। 

इन लोगों की हो रही जासूसी

रिपोर्ट में बताया गया है 'झेनझुआ डाटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड' की ओर से जिन भारतीयों पर नजर रखी जा रही है। उनमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, नवीन पटनायक और शिवराज सिंह शामिल हैं।  इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी और पीयूष गोयल सहित अन्य लोग शामिल हैं। वहीं, सीडीएस बिपिन रावत और सेना, नौसेना और वायुसेना के 15 पूर्व प्रमुख समेत आला अधिकारी भी चीन की निगरानी में हैं।  बीजिंग की तरफ से कंपनी के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे, जज एएम खानविल्कर, लोकपाल जस्टिस पीसी घोष और नियंत्रक और महालेखा परीक्षक जीसी मुर्मू तक की जासूसी करवाई जा रही है। वहीं, भारत पे के संस्थापक निपुण मेहरा, रतन टाटा और गौतम अडानी सरीखे लोग भी चीन की नापाक निगरानी पर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन के निशाने पर नेताओं के अलावा सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी, फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल, सोनल मानसिंह जैसे लोग भी हैं। इस सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनका भारत में क्राइम का रिकॉर्ड है। ये सूची और भी बड़ी है, जिसमें 10 हजार के करीब प्रमुख लोग शामिल हैं। 

चीन के साथ मिलकर हो रहा नापाक काम

अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी कंपनियों द्वारा सभी प्रमुख लोगों की निजी जिंदगी को उनके सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म द्वारा फॉलो किया जा रहा है। इनकी नजर में परिजन से लेकर समर्थक तक हैं। चीनी कंपनियों द्वारा इन लोगों का रियल टाइम डाटा इकट्ठा किया जा रहा है, जिसे चीनी सरकार के साथ साझा किया जा रहा है। बताया गया है कि इस पूरी जासूसी के लिए 'झेनझुआ डाटा इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड' ने चीनी सरकार और कम्युनिष्ट पार्टी के साथ मिलकर विदेशों से सूचनाओं को इकट्ठा करने के लिए एक डाटा बेस तैयार किया है, जिसके तहत इस नापाक मंसूबे को अंजाम दिया जा रहा है। कंपनी की तरफ से इकट्ठा किए जा रहे डाटा को 'हाइब्रेड वॉर' की संज्ञा दी गई है, जिसमें किसी के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उसकी निजी जिंदगी की जानकारी को खंगाला जाता है। एक तरफ जहां चीन के साथ सीमा पर तनाव है और चीनी सेना घुसपैठ की कोशिश कर रही है, दूसरी तरफ चीन भारत के प्रमुख लोगों पर आंखें गड़ाए हुए है। 

03-09-2020
चीन से तनाव के बीच लद्दाख पहुंचे थलसेना अध्यक्ष, तैयारियां का लिया जायजा

श्रीनगर। चीनी सैनिकों की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए लद्दाख सेक्टर में तैयार बैठी सेना का हौसला बढ़ाने के लिए थलसेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को लद्दाख पहुंचे। वे दो दिनों के दौरे के लिए लेह पहुंचे।  नाध्यक्ष ने पैगांग झील के करीब चीन सेना की घुसपैठ को नाकाम बनाने के बाद एलएसी पर पैदा हुए माहौल का जायजा लिया। उन्होंने सेना की उत्तरी कमान के आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, लद्दाख की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सेना की 14वीं कोर के कोर कमांडर व अन्य फील्ड कमांडरों से सेना की आप्रेशनल तैयारियों की भी जानकारी ली। दरअसल यह खबरें आ रही हैं कि बुलंद हौसले के साथ चीन के सामने खड़ी भारतीय सेना ने पैगांग झील के निकट रणनीतिक रूप से अहम ब्लैक टाप चोटी पर पर कब्जा कर लिया है। फिलहाल इसके प्रति सेना ने कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया है। न ही पुष्टि की है और न ही खंडन। जून महीने से अब तक सेनाध्यक्ष 4 बार लद्दाख का दौरा कर चुके हैं। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी पूर्वी लद्दाख में आकर चीन को स्पष्ट संकेत दिया है कि अब पहले से कई गुणा मजबूत हो गई भारतीय सेना देश की एक इंच जमीन पर भी दुश्मन को कब्जा नही करने देगी।

 

 

31-08-2020
लद्दाख के पैंगोंग झील के पास भारत-चीन सैनिकों में हुई झड़प, चीन ने फिर की घुसपैठ की कोशिश

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच बॉर्डर पर जारी तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। भारत सरकार द्वारा चीन के खिलाफ किये गए एक्शन के बाद चीन पूरी तरह से बौखलाया हुआ है। इसी कड़ी में के एक बार फिर चीन ने बॉर्डर पर घुसपैठ की कोशिश की है। लद्दाख के पैंगोंग झील इलाके के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई है। बता दें कि ईस्टर्न लद्दाख में पैंगोंग झील इलाके के पास भारत-चीन के सैनिक 29-30 अगस्त की रात को आमने-सामने आ गए थे। हालांकि इस दौरान कितना नुकसान हुआ है इसे लेकर और कोई जानकारी सामने नहीं आई है। सेना ने एक बयान के जरिए चीन द्वारा घुसपैठ की कोशिश करने की पुष्टि की है। बता दे कि इससे पहले भारत-चीनी सैनिकों के बीच लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में सेना के 20 जवान शहीद हुए थे। साथ ही चीन को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा था।

 

 

25-08-2020
भारत-चीन सीमा विवाद: सेना ने ऊंची चोटियों पर मिसाइलों से लैस जवानों को किया तैनात

नई दिल्ली। भारत अब चीन की किसी भी हरकत को नजरअंदाज नहीं करना चाहता और ना ही वह उसके लिए किसी तरह की तैयारी को बाकी रहने देना चाहता। इसी सोच को ध्यान में रखते हुए अब वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास ऊंची चोटियों पर कंधे से दागी जाने वाली एयर डिफेंस सिस्टम से लैस जवानों को तैनात कर दिया गया है। ताकि अगर दुश्मन किसी भी फाइटर जेट या हेलीकॉप्टर ने भारतीय वायु क्षेत्र के उल्लंघन की कोशिश की तो उसे मौके पर ही मार गिराया जा सके। ये जवान 'इग्ला एयर डिफेंस सिस्टम' से लैस हैं, जिसका इस्तेमाल आर्मी और एयरफोर्स भी करते रहे हैं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण के करीब चाइनीज हेलीकॉप्टरों की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर भारतीय सेना ने अब कंधे पर रखकर हवा में दागी जाने वाली मिसाइलों से लैस जवानों को तैनात कर दिया है। ये मिसाइलें ऊंचाई वाले स्थानों से एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए बहुत ही कारगर मानी जाती है। सूत्रों के मुताबिक, 'रूसी मूल के इग्ला एयर डिफेंस सिस्टम से लैस भारतीय जवानों को सीमा के पास महत्वपूर्ण चोटियों पर तैनात किया गया है, ताकि भारतीय एयर स्पेस के उल्लंघन की कोशिश करने वाले दुश्मन के किसी भी एयरक्राफ्ट पर ध्यान रखा जा सके।'

 

 

16-08-2020
कैट ने नए तरीके से गणेश चतुर्थी मनाने लिया निर्णय,चीन को होगा 40 हजार करोड़ रुपए का नुकसान

रायपुर। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) अपने चीनी वस्तुओं के बहिष्कार के राष्ट्रीय अभियान"भारतीय सामान-हमारा अभिमान" के तहत 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी नए तरीके से मनाने जा रही है। कैट ने रविवार को मिट्टी, गोबर और खाद से बनी "पर्यावरण मित्र गणेश " की कुछ प्रतिमाएं जारी की हैं। इन प्रतिमाओं को देशभर के व्यापारी और अन्य लोग इस गणेश चतुर्थी को अपने-अपने घर में स्थापित कर पूजा करेंगे। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा है कि इन वस्तुओं से बनी  गणेश प्रतिमा का उद्देश्य पर्यावरण और जल को प्रदूषित होने से बचाना है। इस त्यौहार को सही अर्थों में पूर्ण भारतीयता के साथ मनाना है। इस क्रम में 6 इंच, 9 इंच और 12 इंच की गणेश प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। अनेक प्रतिमाओं में तुलसी के बीज सहित विभिन्न सब्जियों के बीज भी डाले जा रहे हैं। इससे प्रतिमा जल में विसर्जित करने के बाद यह बीज मिट्टी में दबकर पौधों का रूप ले सकेंगे। ये प्रतिमाएं घर में ही किसी बर्तन के कुंड में विसर्जित की जा सकती हैं।  इससे पर्यावरण और जल को दूषित होने से बचाया जा सकेगा।

पारवानी ने कहा है कि,पिछले वर्ष तक चीन से आए गणेश बड़ी मात्रा में देश भर में बिका करते थे, लेकिन इस वर्ष कैट ने देश भर में फैले व्यापारी संगठनों को सलाह दी है कि वो अपने शहर या राज्य में  कलाकृतियां बनाने वाले, कुम्हार आदि  स्थानीय लोगों से गणेश प्रतिमाएं मिट्टी, गोबर और खाद का उपयोग कर बनवाएं। साथ ही अपने व्यापारिक संगठनों के माध्यम से कर्मचारियों और अन्य लोगों तक बिक्री कर पहुंचाएं। इस प्रकार से कैट के बैनर तले देशभर के व्यापारी उन लोगों को रोजगार देने का काम कर रहे हैं,जिनके पास वर्तमान में या तो रोजगार की कमी है या कोरोना के कारण जिनका रोजगार छिन गया है। ऐसे लोगों की सहायता कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत में कैट के नेतृत्व में व्यापारी भी अपना योगदान देंगे।  

पारवानी ने कहा है कि अब से लेकर दिवाली तक देश में त्यौहारों का सीजन है। चीन से आयात हुआ लगभग 35 से 40 हजार करोड़ रुपए तक का सामान इस सीजन में बिकता है, जिनमें खास तौर पर भगवान की मूर्तियां, अगरबत्ती, खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, बिजली  के बल्बों की झालर, बल्ब, सजावटी सामान, पीतल और अन्य धातुओं के दीपक, फर्निशिंग फैब्रिक, किचन इक्विप्मेंट, पटाखे, आदि शामिल हैं। इस वर्ष देशभर के व्यापारियों ने यह तय किया है कि, इस त्यौहारी सीजन में चीन का सामान न बेचेंगे बल्कि अपने देश में ही बना हुआ सामान बेच कर चीन को राखी के बाद, अब त्यौहारी सीजन का 40 हजार करोड़ रुपए का झटका देंगे।

09-08-2020
भारत चीन सीमा विवाद: हेरॉन ड्रोन होगा लेजर गाइडेड बम और मिसाइलों से लैस, तैयारी में लगी सेना

 नई दिल्ली। चीन के साथ जारी सीमा तनाव के बीच भारतीय सशस्त्र बल अपने हेरॉन ड्रोन को लेजर गाइडेड बम और एंटी टैंक मिसाइल जैसी क्षमताओं से लैस करने की योजना बना रहे हैं। इससे सुरक्षा बलों को दुश्मन के नापाक इरादों से निपटने में और अपनी सीमा पर अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। बता दें कि इन इस्रायली हेरॉन ड्रोन का इस्तेमाल वर्तमान में भारत की तीनों सेनाएं कर रही हैं। सशस्त्र बलों ने इसके लिए 'प्रोजेक्ट चीता' नाम के प्रस्ताव को फिर शुरू किया है। यह प्रस्ताव काफी समय से लंबित है और इस पर 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत आने का अनुमान है।  सूत्रों ने बताया, 'इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग तीनों सेनाओं के 90 हेरॉन ड्रोन को लेजर गाइडेड बम, हवा से जमीन में और हवा में मार कर सकने वाली एंटी टैंक मिसाइलों से लैस कर अपग्रेड किया जाएगा।' इस प्रोजेक्ट में सशस्त्र बलों ने ड्रोन को मजबूत निगरानी सिस्टम से लैस करने का प्रस्ताव रङा है। इससे भारतीय बलों को दुश्मन की स्थिति जानने में मदद मिलेगी और इसमें लैस हथियारों से जरूरत पड़ने पर उन्हें तबाह भी किया जा सकेगा। भारत के मध्यम ऊंचाई वाले  और लंबी क्षमतओं वाले ड्रोन या अनमैन्ड एरियल व्हीकल के बेड़े में मुख्यत: इस्राइली हेरॉन ड्रोन और उकरण शामिल हैं।  इन ड्रोन्स को थल सेना और वायु सेना दोनों ने ही चीन के साथ सीमा के पास लद्दाख सेक्टर में अग्रिम स्थानों पर तैनात किया है। ये ड्रोन चीनी सेना के पीछे हटने की स्थिति को पुष्ट करने में और गहराई वाले इलाकों में उनके द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों की जानकारी पाने में भी मदद कर रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि इन अपग्रेडेड ड्रोन का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य गतिविधियों और भविष्य में आंतक के खिलाफ भी किया जा सकेगा।

 

 

24-07-2020
विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत और चीन में बनी सहमति, लद्दाख सीमा से पीछे हटाएंगे सेना

नई दिल्ली। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के संघर्ष वाले क्षेत्र से ‘पूरी तरह और जल्द’ सैनिक पीछे हटने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण विकास के लिये पूर्ण रूप से शांति बहाली जरूरी है। दोनों देशों ने सीमा के मामलों पर विचार विमर्श एवं समन्वय के कार्यकारी ढांचे के तहत आज आनलाइन माध्यम से हुई ताजा राजनयिक वार्ता के दौरान क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की। दोनों देशों की यह बैठक ऐसे समय हुई जब इस तरह की खबरें आ रही थी कि पीछे हटने की प्रक्रिया आगे की ओर नहीं बढ़ पा रही है, जैसा कि 14 जुलाई की कोर कमांडर स्तर की पिछले दौर की वार्ता के बाद उम्मीद की जा रही थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि त्वरित ढंग से पूरी तरह से पीछे हटने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिये आगे के कदम तय करने के वास्ते वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की एक और बैठक हो सकती है।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा,‘इन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय समझौते और प्रोटोकाल के अनुरूप वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों का पूरी तरह से पीछे हटना और भारत चीन सीमा पर तनाव समाप्त करना तथा शांति स्थापित करना द्विपक्षीय संबंधों का सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है।’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने कहा कि यह पांच जुलाई को दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान बनी सहमति के अनुरूप है। गौरतलब है कि पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर करीब दो घंटे तक पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिये चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने इस वार्ता के बाद छह जुलाई के बाद पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की थी। बहरहाल, विदेश मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार की बातचीत में दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अब तक वरिष्ठ कमांडरों की बैठक में बनी सहमति को गंभीरता से लागू किया जाए।

21-07-2020
भारत-चीन सीमा विवाद: सेना तैनात करेंगी उत्तरी सेक्टर में मिग- 29K फाइटर एयरक्राफ्ट

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारत सीमा पर लगातार अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। अब भारतीय नौसेना के समुद्री फाइटर जेट मिग-29के (MiG-29K) को उत्तरी सेक्टर में तैनात करने का फैसला लिया है। नौसेना के पी-82 निगरानी विमान पहले ही पूर्वी लद्दाख सेक्टर में तैनात किए जा चुके हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'मिग-29के फाइटर एयरक्राफ्ट को उत्तरी सेक्टर में भारतीय नौसेना के बेस पर तैनात करने की योजना बनाई जा रही है। इनका इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभियानों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।'डोकलाम विवाद के दौरान इन निगरानी विमानों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारतीय नौसेना अहम भूमिका निभा रही है। नौसेना के विमानों का एलएसी पर चीनी गतिविधियों और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए  इस्तेमाल किया जा रहा है। 

 

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