GLIBS
24-07-2020
विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत और चीन में बनी सहमति, लद्दाख सीमा से पीछे हटाएंगे सेना

नई दिल्ली। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के संघर्ष वाले क्षेत्र से ‘पूरी तरह और जल्द’ सैनिक पीछे हटने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण विकास के लिये पूर्ण रूप से शांति बहाली जरूरी है। दोनों देशों ने सीमा के मामलों पर विचार विमर्श एवं समन्वय के कार्यकारी ढांचे के तहत आज आनलाइन माध्यम से हुई ताजा राजनयिक वार्ता के दौरान क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की। दोनों देशों की यह बैठक ऐसे समय हुई जब इस तरह की खबरें आ रही थी कि पीछे हटने की प्रक्रिया आगे की ओर नहीं बढ़ पा रही है, जैसा कि 14 जुलाई की कोर कमांडर स्तर की पिछले दौर की वार्ता के बाद उम्मीद की जा रही थी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार की बैठक के बाद दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि त्वरित ढंग से पूरी तरह से पीछे हटने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिये आगे के कदम तय करने के वास्ते वरिष्ठ सैन्य कमांडरों की एक और बैठक हो सकती है।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा,‘इन्होंने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि द्विपक्षीय समझौते और प्रोटोकाल के अनुरूप वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों का पूरी तरह से पीछे हटना और भारत चीन सीमा पर तनाव समाप्त करना तथा शांति स्थापित करना द्विपक्षीय संबंधों का सम्पूर्ण विकास सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है।’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने कहा कि यह पांच जुलाई को दो विशेष प्रतिनिधियों के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान बनी सहमति के अनुरूप है। गौरतलब है कि पांच जुलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने टेलीफोन पर करीब दो घंटे तक पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिये चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने इस वार्ता के बाद छह जुलाई के बाद पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की थी। बहरहाल, विदेश मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार की बातचीत में दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि अब तक वरिष्ठ कमांडरों की बैठक में बनी सहमति को गंभीरता से लागू किया जाए।

21-07-2020
भारत-चीन सीमा विवाद: सेना तैनात करेंगी उत्तरी सेक्टर में मिग- 29K फाइटर एयरक्राफ्ट

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारत सीमा पर लगातार अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है। अब भारतीय नौसेना के समुद्री फाइटर जेट मिग-29के (MiG-29K) को उत्तरी सेक्टर में तैनात करने का फैसला लिया है। नौसेना के पी-82 निगरानी विमान पहले ही पूर्वी लद्दाख सेक्टर में तैनात किए जा चुके हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'मिग-29के फाइटर एयरक्राफ्ट को उत्तरी सेक्टर में भारतीय नौसेना के बेस पर तैनात करने की योजना बनाई जा रही है। इनका इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अभियानों को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है।'डोकलाम विवाद के दौरान इन निगरानी विमानों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया था। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के बीच भारतीय नौसेना अहम भूमिका निभा रही है। नौसेना के विमानों का एलएसी पर चीनी गतिविधियों और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए  इस्तेमाल किया जा रहा है। 

 

15-07-2020
भारत ने चीन को दिया स्पष्ट संदेश, कहा- एलएसी पर शांति के लिए सभी प्रोटोकॉल फॉलो करने होंगे

नई दिल्ली। भारत-चीन विवाद के बाद से एलएसी पर तनाव बढ़ गया है। ऐसे में सीमा पर तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर की वार्ता भी हुई है। इसमें दोनों देशों की तरफ से सीमा पर तनाव कम करने की बात कही गई है। इस बीच  भारतीय सेना ने चीनी सेना को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखनी है तो सभी प्रयास करने होंगे। तनाव के बीच भारतीय सेना और चीन की सेना के बीच करीब 15 घंटे तक चली बातचीत में चीनी सेना को यह ‘स्पष्ट संदेश’ दिया है कि पूर्वी लद्दाख में आवश्यक तौर पर पहले जैसी स्थिति बहाल की जाए। साथ ही एलएसी पर शांति एवं स्थिरता वापस लाने के लिए सभी प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। सरकारी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों की थल सेनाओं के वरिष्ठ कमांडरों के बीच गहन एवं जटिल बातचीत में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को ‘लक्ष्मण रेखा’ से भी अवगत कराया और कहा कि क्षेत्र में संपूर्ण स्थिति बेहतर करने की व्यापक रूप से जिम्मेदारी चीन पर है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाने के अगले चरण के तौर तरीके पर सहमत हुए और सहमति वाले बिंदुओं पर दोनों पक्षों के उच्च प्राधिकारियों के बीच चर्चा के बाद एक-दूसरे से संपर्क में रहने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के चौथे चरण की वार्ता एलएसी के भारतीय सीमा के अंदर चुशुल में एक निर्धारित बैठक स्थल पर मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई थी। हालांकि, वार्ता के नतीजों के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भारत की तरफ से इस बैठक में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जो लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर हैं। जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व मेजर जनरल लियु लिन ने किया, जो दक्षिण शिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं। थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को बातचीत के विवरण से अवगत कराया गया, जिसके बाद उन्होंने वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की। 

13-07-2020
चीन और भारत के बीच हुई वार्ता में बैन किए ऐप्स मुद्दे पर भारत ने दिया दो टूक जवाब  

नई दिल्ली। भारत-चीन के बीच सीमा पर तनातनी में आई कमी के बाद चीन ने नई दिल्ली के साथ 59 चीनी ऐप्स के बैन किए जाने का मुद्दा उठाया है। भारत के साथ हाल में हुई द्विपक्षीय वार्ता में यह मुद्दा उठाया गया है। भारत ने पिछले दिनों टिकटॉक समेत 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकारी सूत्रों ने बताया कि राजनयिक स्तर की एक बैठक के दौरान, चीनी पक्ष ने भारत में अपनी मोबाइल ऐप्स पर बैन का मुद्दा उठाया है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय पक्ष ने चीन को यह स्पष्ट कर दिया कि कार्रवाई सुरक्षा मुद्दों को देखते हुए की गई थी और वह नहीं चाहता था कि भारत के नागरिकों से जुड़े डाटा से छेड़छाड़ हो। भारत ने हाल ही में 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनपर सुरक्षा और भारतीय यूजर्स के डाटा का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। बैन की गईं ऐप्स में टिकटॉक, वीचैट, हेलो आदि शामिल हैं। चीनी ऐप्स पर यह प्रतिबंध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत लगाया गया है। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति शत्रुता रखने वाले तत्वों द्वारा इन आंकड़ों का संकलन, इसकी जांच-पड़ताल और प्रोफाइलिंग, आखिरकार भारत की संप्रभुता और अखंडता पर आघात है, यह बहुत अधिक चिंता का विषय है, जिसके लिए आपातकालीन उपायों की जरूरत है। गृह मंत्रालय के तहत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने इन दुर्भावनापूर्ण एप्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी की थी।'वहीं, प्रतिबंध के बाद, चीनी विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करना भारत का कर्तव्य है।

11-07-2020
चीनी वायरोलॉजिस्ट ने किया खुलासा,चीन ने छिपाई कोरोना की जानकारी, जान बचाकर हांगकांग से पहुंची अमेरिका

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर दुनिया में बरकरार है। लेकिन दिसंबर से लेकर अब तक इस वायरस को लेकर इतने तरह के खुलासे हुए हैं कि अब भी असमंजस की स्थिति बरकरार है। अमेरिका और यूरोप के कई देशों ने चीन पर बार-बार ये आरोप लगाए हैं कि उसने सही समय पर इस वायरस के फैलने की जानकारी विश्व समुदाय को नहीं दी। अपने ऊपर उठ रहे सवालों को चीन ने हमेशा झुठलाया है। चीन का दावा है कि जैसे ही उसे इस वायरस की गंभीरता का पता चला, उसने फौरन विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत दुनिया के कई देशों को इसकी जानकारी दी। लेकिन अब हांगकांग की एक वायरलोलॉजिस्ट ने चीन के इस दावे को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया है। हांगकांग से जान बचाकर अमेरिका पहुंचीं एक वैज्ञानिक ने खुलासा किया है कि कोरोनावायरस को लेकर चीन उससे काफी पहले से जानता था, जब इसने दुनिया को बताई। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सरकार के सर्वोच्च स्तर पर किया गया। हांग-कांग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी की विशेषज्ञ लि-मेंग यान ने इंटरव्यू में कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने कहा कि महामारी की शुरुआत में उनकी रिसर्च को उनके सुपरवाइजर्स ने भी इग्नोर किया, जोकि इस फील्ड के दुनिया के टॉप एक्सपर्ट हैं। वह मानती हैं कि इससे लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती थी।

यान कहती हैं कि कोविड-19 पर स्टडी करने वाली वह दुनिया के पहले कुछ वैज्ञानिकों में से एक थीं। उन्होंने हा, 'चीन सरकार ने विदेशी और यहां तक की हांगकांग के विशेषज्ञों को रिसर्च में शामिल करने से इनकार कर दिया।' यान ने कहा कि बहुत जल्द पूरे चीन के उनके साथियों ने इस वायरस पर चर्चा की लेकिन जल्द ही उन्होंने टोन में बदलाव को नोटिस किया। डॉक्टर और शोधकर्ता जो खुले रूप से वायरस पर चर्चा कर रहे थे उन्हें चुप करवा दिया गया। वुहान के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं ने चुप्पी साध ली है और दूसरों को चेतावनी दी गई कि उनसे ब्योरा ना मांगें। यान के मुताबिक, डॉक्टरों ने कहा कि हम इसके बारे में बात नहीं कर सकते हैं, लेकिन मास्क पहनने की जरूरत है। उनके सूत्रों के मुताबिक फिर मानव से मानव संक्रमण तेजी से बढ़ने लगा। इसके बाद यान ने वहां से निकलने का फैसला किया। उनका कहना है कि उस वक्त उनके पास केवल पासपोर्ट और पर्स था, बाकी सब छोड़ना पड़ा। यदि वह पकड़ी जातीं तो जेल में डाल दी जातीं या गायब कर दी जातीं। यान ने कहा कि चीन की सरकार उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश कर रही है और सरकार के गुंडे उन्हें चुप करने के लिए साइबर अटैक कर रहे हैं। यान ने मीडिया को बताया कि हांगकांग सरकार ने गृहनगर में उनके छोटे से अपार्टमेंट को तोड़ दिया और उसके माता-पिता से पूछताछ की। वह कहती हैं कि अब भी उनकी जान को खतरा है। उन्हें यह भी डर है कि दोबारा कभी अपने घर जाकर दोस्तों और परिवार के लोगों से नहीं मिल पाएंगी।

10-07-2020
वायुसेना की ताकत में इजाफा, बोइंग ने की 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकाप्टरों की आपूर्ति

नई दिल्ली। चीन के साथ सीमा पर तनावपूर्ण गतिरोध के बीच प्रमुख अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने 22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से अंतिम पांच हेलीकाप्टर पिछले महीने भारतीय वायुसेना को सौंप दिए और यह पूरी फ्लीट अब वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास प्रमुख हवाई ठिकानों पर तैनात विमानों एवं हेलीकाप्टरों का हिस्सा बन गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। बोइंग ने कहा कि उसने सभी 22 अपाचे और 15 चिनूक सैन्य हेलीकाप्टरों की भारतीय वायुसेना को आपूर्ति पूरी कर दी है और वह भारतीय सशस्त्र बलों की संचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। एएच-64ई अपाचे दुनिया के सबसे उन्नत बहुद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकाप्टरों में से एक है और इसे अमेरिकी सेना द्वारा उड़ाया जाता है। चिनूक एक बहुद्देश्यीय वर्टिकल लिफ्ट हेलीकाप्टर है,जिसका उपयोग मुख्य रूप से सैनिकों, तोपखाने, उपकरण और ईंधन के परिवहन के लिए किया जाता है। भारत ने सितंबर 2015 में भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलीकाप्टर और 15 चिनूक हेलीकाप्टरों की खरीद के लिए बोइंग के साथ कई अरब डॉलर के एक अनुबंध को अंतिम रूप दिया था। वहीं भारतीय सेना के लिए छह अपाचे हेलीकाप्टरों की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर गत फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान किये गए थे।

अधिकारियों ने कहा कि अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों, दोनों को ही पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के मद्देनजर वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगे क्षेत्रों में भारतीय वायुसेना की तैनाती के तहत सेवा में लगाया गया है। हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से पूर्वी लद्दाख में अग्रिम स्थानों पर सैनिकों को पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, जहां भारत और चीन की सेनाओं के बीच आठ सप्ताह से गतिरोध था। दोनों पक्षों ने इस सप्ताह तीन प्रमुख गतिरोध वाले स्थानों से सैनिकों को कम किया है। बोइंग डिफेंस इंडिया के प्रबंध निदेशक सुरेंद्र आहूजा ने कहा, सैन्य हेलीकाप्टरों की इस आपूर्ति के साथ ही हम इस साझेदारी का पोषण करना जारी रखे हुए हैं। हम भारत के रक्षा बलों की संचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें उपयुक्त क्षमताएं उपलब्ध कराने के लिए उनके साथ नजदीकी तौर पर काम काम करने को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। भारत अपाचे का चयन करने वाले 17 देशों में से एक है और इसका सबसे उन्नत संस्करण एएच-64ई अपाचे है। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और प्रतिरक्षा संबंध पिछले छह वर्षों से और प्रगाढ़ हुए हैं। द्विपक्षीय रक्षा व्यापार 2019 में 18 अरब अमरीकी डॉलर पर पहुंच गया जो दोनों पक्षों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। बोइंग ने एक बयान में कहा कि एएच-64ई अपाचे में लक्ष्य का पता लाने की एक आधुनिक प्रणाली लगी है, जो दिन और रात दोनों समय काम करती है। उसने कहा कि दुनिया भर में 20 रक्षा बलों के पास या तो चिनूक सेवा में हैं, या उन्हें प्राप्त करने के लिए अनुबंध पर हैं। हैदराबाद में टाटा के साथ बोइंग का संयुक्त उद्यम अमेरिकी सेना और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों, दोनों के लिए एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर के लिए एयरो-संरचनाओं का निर्माण कर रहा है। 

 

03-07-2020
राहुल गांधी ने कहा, लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और पीएम इंकार करते हैं, कोई तो झूठ बोल रहा है

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ तनाव को लेकर शुक्रवार को दावा किया कि लद्दाखवासियों का कहना है कि चीनी सैनिकों ने भारतीय जमीन ले ली है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे इनकार करते हैं और ऐसे में कोई तो झूठ बोल रहा है। उन्होंने लेह के एक निवासी का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘लद्दाखवासी कहते हैं कि चीन ने हमारी जमीन ले ली है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि किसी ने हमारी जमीन नहीं ली है। निश्चित तौर पर कोई तो झूठ बोल रहा है।’ कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर उस दिन निशाना साधा है जब मोदी लद्दाख दौरे पर पहुंचे हैं। पूर्वी लद्दाख में भारतीय एवं चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को अचानक लेह पहुंचे। यहां उन्होंने थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों से बातचीत की।

 

03-07-2020
लेह में गरजे मोदी, कहा-भारतीय जवानों ने दुनिया को दिखाई अपनी बहादुरी

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को लद्दाख पहुंचकर जवानों से मुलाकात की। उन्होंने जवानों को संबोधित करके उनका हौसला बढ़ाया और चीन पर जमकर निशाना साधा। इस दौरान लेह में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जवानों ने दुनिया को अपनी बहादुरी का नमूना दिखा दिया है। लद्दाख में चीनी हरकतों पर तंज सकते हुए मोदी ने कहा कि अब विस्तारवाद का जमाना चला गया है, विकासवाद का वक्त है। मोदी ने चीन को चेताया कि ऐसी ताकतें मिट जाया करती हैं। मोदी चीन को सुनाते हुए बोले कि विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है और अब विकासवाद का है। तेजी से बदलते समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए असवर हैं यह ही विकास का आधार हैं। बीती शताब्दी में विस्तारवाद ने ही मानव जाति का विनाश किया। किसी पर विस्तारवाद की जिद सवार हो तो हमेशा वह विश्व शांति के सामने खतरा है। मोदी ने कहा कि इतिहास गवाह है कि ऐसी ताकतें मिट जाती हैं।  


पीएम मोदी ने कहा कि जब-जब वह राष्ट्र रक्षा से जुड़े फैसले के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले दो माताओँ को याद करते हैं। पहली हमारी भारत माता, दूसरी वे वीर माताएं जिन्होंने सैनिकों को जन्म दिया। इसके बाद पीएम ने कहा कि जवानों के सुरक्षा उपकरणों और हथियारों की हरसंभव मदद की कोशिश सरकार कर रही है। मोदी बोले हम सशस्त्र बलों की जरूरतों पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उनकी भुजाएं चट्टान जैसी हैं। इसके बाद पीएम मोदी बोले कि दुश्मनों ने जवानों का जोश और गुस्सा देख लिया है। जवानों की तारीफ में मोदी ने कहा कि आपने जो वीरता हाल ही में दिखाई उससे विश्व में भारत की ताकत को लेकर एक संदेश गया है। मोदी ने आगे कहा कि आपके (जवानों) और आपके मजबूत संकल्प की वजह से ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनने का हमारा (देश) संकल्प और मजबूत हुआ है। मोदी बोले, 'आपकी इच्छाशक्ति हिमालय की तरह मजबूत और अटल है, देश को आप पर गर्व है।

 

03-07-2020
पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया, देश की बागडोर सही हाथों में है : डॉ. रमन सिंह

रायपुर। भारत-चीन तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जवानों का हौसला बढ़ाने लेह पहुंचे। उनके साथ सीडीएस जनरल बिपिन रावत सहित अन्य सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री के इस दौरे पर भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री की तारीफ की है। रमन सिंह ने ट्वीट कर कहा कि वर्षों तक माँ भारती प्रतीक्षा करती है तब कहीं जाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा नेतृत्वकर्ता पाती है। इस तनाव के समय में लद्दाख पहुँच मोदी जी ने एडीजीपीआई के जवानों का हौंसला बढ़ाकर देश को विश्वास दिलाया है कि भारत की बागडोर सही हाथों में है।बता दें कि प्रधानमंत्री ने सीमा पर अग्रिम मोर्चे निमू का जायजा लिया। यहां पहुंचकर पीएम मोदी ने थलसेना, वायुसेना और आईटीबीपी के जवानों से मुलाकात की। निमू करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है जो सबसे कठिन परिस्थिति वाली जगह मानी जाती है। ये जगह जांस्कर रेंज से घिरी हुई है।

01-07-2020
चीन से तनाव के बीच रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख करेंगे लेह का दौरा

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी आक्रामकता को देखते हुए शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के लिए लेह का दौरा करेंगे।
बता दें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच मंगलवार को चुशुल सेक्टर में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी।  सैन्य अधिकारियों के बीच इस बैठक का तीसरा दौर 12 घंटे तक चला और रात 11 बजे खत्म हुआ। सैन्य सूत्रों ने बताया कि चीन के अड़ियल रवैये के चलते एलएसी पर गतिरोध को खत्म करना एक जटिल प्रक्रिया हो गई है।  शीर्ष सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख सेक्टर में एलएसी के पास लगभग दो डिवीजनों (लगभग 20,000) की तैनाती की है। इसके अलावा चीन ने एक और टुकड़ी (10,000 सै क) को उत्तरी शिनजियांग प्रांत में तैनात किया है, जो लगभग 1,000 किलोमीटर की दूरी पर है और समतल इलाका होने के कारण उसे हमारे मोर्चे तक पहुंचने में अधिकतम 48 घंटे का समय लगेगा।

01-07-2020
चीन की कायरना हरकत, सीमा पर तैनात किए 10 हजार सैनिक

नई दिल्ली। भारत और चीन की सेनाओं के बीच मंगलवार को करीब 10 घंटे तक कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई,जिसके केंद्र में पूर्वी लद्दाख के टकराव वाले क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था। लेकिन इसी बीच खबर मिली है कि चीन ने सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती को बढ़ाकर 10 हजार कर दिया है। यह तैनाती चीन लम्बी योजना के तहत कर रहा है,जिससे इस वार्ता पर पानी फिरते दिख रहा है। इसके जवाब में भारत ने भी सीमा पर 2 नई डिविजन की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इसी के साथ भारत ने भी चीन के बराबर सैनिकों की तैनाती कर रखी है। इससे पहले बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इलाके में चीन के नये दावे पर चिंता जताई है और पुरानी स्थिति बहाल करने और तत्काल चीनी सैनिकों को गलवान घाटी, पेंगोंग सो और अन्य इलाकों से वापस बुलाने की मांग की। सरकारी सूत्रों ने बताया कि वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चुशूल सेक्टर में भारत की तरफ हुई।

वार्ता में भारतीय  तिनिधिमंडल का नेतृत्व 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिले के मेजर जनरल लियु लिन ने किया। सूत्रों ने बताया कि भारतीय पक्ष ने सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि बातचीत के केंद्र में तनाव को कम करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देना था। सूत्रों ने बताया कि विश्वास बहाली के उपायों पर भी चर्चा हुई।

Advertise, Call Now - +91 76111 07804