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तीन गोले दागे लेकिन एक भी नहीं फटा, वरना ये होती नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता

रायपुर। किस्टारम नक्सली हमले में बड़ा खुलासा हुआ है कि इस हमले में जवानों की शहादत की बड़ी वजह सीआरपीएफ के यूबीजीएल से दागे गए तीन गोलों का न फटना था। अगर ये गोले फट जाते तो ये उस इलाके में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी के तौर पर दर्ज होती।

ये खुलासा एक मैसेज से हुआ है जिसे पेलोदी में तैनात जवानों की ओर से अपने अधिकारियों को रिपोर्टिंग करते हुए भेजा गया है। इसी संदेश के साथ नक्सलियों से बरामद सामान की पहली तस्वीर आई थी।अधिकारी को भेजे गए इस संदेश में कहा गया कि अगर 3 यूबीजीएल के गोले फट जाते तो ये घटना बड़ी कामयाबी के तौर पर दर्ज होती। दरअसल जब किस्टारम के जवान सैकडों की संख्या में तैनात नक्सलियों के एंबुश में फंस गए तो उन्होंने पेलोदी के जवानों को मदद के लिए बुलाया। इस संदेश के मुताबिक जब पेलोदी के जवान वहां पहुंचे तो किस्टारम के जवान एंबुश में फंसे थे। जब इन लोगों ने फायरिंग की तभी नक्सली वहां से जंगल में भागे. संदेश में इस बात का खुलासा हुआ है कि शुरुआत में हमारी पार्टी ने नक्सलियों पर तीन यूबीजीएल के गोले दागे लेकिन वे फटे नहीं अन्यथा ये बड़ी कामयाबी होती।  मैसेज में ये भी लिखा है कि कोबरा पार्टी बहुत अच्छा लड़ी और नक्सलियों का 300 मीटर तक पीछा किया। नक्सलियों से कुछ सामान इस पार्टी ने जब्त किया। जिसमें पेट्रोल बम, पिट्ठु, टिफिन हैं। इसके बाद इसी पार्टी ने रेडियो में नक्सलियों का संदेश सुना कि 1 नक्सली मारा गया है जबकि 5 घायल हुए हैं।

उठ रहे हैं कई सवाल

इस घटना ने कई तरह के सवाल उठा दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल कि आखिर जवानों को जो यूजीबीएल दिए गए हैं वो क्यों नहीं फटे. क्या उसकी क्वीलिटी खराब थी या कोई और वजह. अगर जवानों को ऐसे गोले बारुद दिए जाएं जो वक्त पर काम ना आए तो फिर जवान नक्सलियों के खिलाफ कैसे लड़ रहे हैं. आखिर ये किसकी चूक है.  कैसे जवानों को ऐसे गोले देकर भेज दिए गए जो फटे ही नहीं. ये खरीद में चूक है या रखरखाव की ?

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