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17-07-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड पर लगाया 1 लाख 54 हजार हर्जाना

दुर्ग। मकान की बुकिंग कराने के बाद निर्माण कार्य में विलंब होने से मकान की लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई, जिसके कारण ग्राहक ने मकान की बुकिंग कैंसिल करवाई, जिसके बाद नियमानुसार जमा राशि पर ब्याज दिया जाना था परंतु छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने कम ब्याज का भुगतान किया और बकाया ब्याज की मांग करने पर कोई कार्यवाही नहीं की। इसे सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत
बालोद शासकीय आदर्श उच्चतर माध्यमिक शाला में उप प्राचार्य राजेश्वरराव कृदत्त ने बालोद के ग्राम सिवनी स्थित अटल विहार योजना अंतर्गत विकसित की जाने वाली छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की आवासीय कॉलोनी में एमआईजी 1 श्रेणी के मकान के लिए 28 फरवरी 2013 को 3 लाख 38 हजार रुपये भुगतान कर बुकिंग कराई थी परंतु हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी की बुकिंग को एमआईजी 2 श्रेणी में बदल दिया, फिर भी परिवादी ने इसकी सहमति दे दी और बैंक से ऋण लेकर 13 अगस्त 2015 को 11 लाख 71 हजार रुपये भुगतान किया इसके बाद हाउसिंग बोर्ड द्वारा 2017 तक भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया और जनवरी 2018 में हाउसिंग बोर्ड ने 11 लाख 74 हजार रुपये का मांग पत्र परिवादी को देते हुए रकम भुगतान करने को कहा। मकान की कीमत में 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी होने के कारण परिवादी ने हाउसिंग बोर्ड के भवन आवंटन संबंधी नियम व शर्तों के तहत अपनी जमा रकम 1509500 को 7.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस मांगा, तब हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को दिनांक 27 अक्टूबर 2018 को 1813656 रुपये चेक द्वारा वापस किया। चेक लेने के बाद हिसाब किताब करने पर परिवादी को ज्ञात हुआ कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को ब्याज के रूप में कम राशि प्रदान की है, जिस पर परिवादी ने लिखित आवेदन द्वारा बकाया ब्याज की मांग की तो अनावेदकगण ने परिवादी को उसके बकाया ब्याज की राशि वापस नहीं की ना ही कोई जवाब दिया।

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का जवाब
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने प्रकरण में उपस्थित होकर कहा कि भवन का अंतिम मूल्य निर्धारण करने के लिए हाउसिंग बोर्ड पूर्ण रूप से स्वच्छंद है। परिवादी ने स्वेच्छा से पूर्ण रकम ब्याज सहित वापस पाने हेतु निवेदन किया जिस पर कार्रवाई करते हुए उसे पूर्ण संतुष्टि में रकम वापस की जा चुकी है।

फोरम का फैसला
प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों  के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। फोरम ने विचारण के दौरान यह पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने जमा बुकिंग रकम लौटते समय परिवादी द्वारा दी गई संतुष्टि अथवा सहमति संबंधी कोई दस्तावेज अथवा प्रमाण प्रकरण में प्रस्तुत नहीं किया और ना ही ब्याज की गणना संबंधी ऐसा कोई प्रपत्र या दस्तावेज प्रस्तुत किया है,जिसमें परिवादी ने संतुष्टि स्वरूप अपने हस्ताक्षर किए हो। हाउसिंग बोर्ड ने ब्याज गणना संबंधी कार्यवाही में परिवादी की सहमति अथवा संतुष्टि उसके हस्ताक्षर द्वारा प्राप्त करना आवश्यक नहीं समझा और एकपक्षीय रूप से ब्याज की गणना करते हुए राशि का भुगतान किया। फोरम ने यह प्रमाणित पाया कि हाउसिंग बोर्ड ने परिवादी को मकान बुकिंग की जमा राशि पर 127929 रुपये कम ब्याज दिया है।

हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के दुर्ग प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी, धमतरी प्रक्षेत्र के संपदा अधिकारी एवं रायपुर के मुख्य संपदा अधिकारी पर 1 लाख 54 हजार रुपये हर्जाना लगाया,जिसके तहत कम भुगतान किए गए ब्याज की राशि रुपए 127939, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा।

08-07-2020
किसान को नहीं दिया क्षतिग्रस्त ट्रैक्टर का दावा,जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी पर लगाया 4 लाख 81 हजार हर्जाना

दुर्ग। आगजनी से क्षतिग्रस्त हुए ट्रैक्टर का क्लेम बीमा कंपनी ने यह कहकर निरस्त कर दिया कि ट्रैक्टर का व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा था, इसे निराधार पाते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 4 लाख 81 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

ग्राम ठेंगाभाट, तहसील धमधा, जिला दुर्ग निवासी कृषक कमलेश कुमार चतुर्वेदी ने फाइनेंस करवा कर एक ट्रैक्टर सितंबर 2017 में खरीदा और उसका बीमा मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से करवाया। 26 नवंबर 2017 को कृषि कार्य में उपयोग करते समय ट्रैक्टर में आग लग गई। इसका बीमा दावा करने पर बीमा कंपनी ने परिवादी का बीमा दावा भुगतान करने से इंकार कर दिया

बीमा कंपनी का जवाब

बीमा कंपनी ने फोरम के समक्ष उपस्थित होकर कहा कि नियम और शर्तों के अधीन ट्रैक्टर का बीमा किया गया था। दुर्घटना के समय ट्रैक्टर का उपयोग 800 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से किराया में मिंजाई के काम के लिए किया जा रहा था जबकि ट्रैक्टर कृषि उपयोग के लिए बीमित था लेकिन उसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य से किया जा रहा था। बीमा शर्त का उल्लंघन होने के कारण बीमा दावा निरस्त किया गया है।

फोरम का फैसला

प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों  के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति बीमा कंपनी द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। फोरम ने विचारण के दौरान यह पाया कि सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में ऐसा का कोई उल्लेख नहीं किया है कि ट्रैक्टर परिवादी द्वारा 800 रुपये घंटे पर किराये में चलाया जा रहा था और ना ही ऐसा कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया है,जिसमें ट्रैक्टर के वाणिज्यिक उपयोग के लिए चलाए जाने का उल्लेख हो। साथ ही परिवादी ने खेत का रेगहानामा प्रकरण में पेश किया है, इस प्रकार बीमा कंपनियां प्रमाणित नहीं कर सकी कि परिवादी ने वाणिज्यिक उद्देश्य से ट्रैक्टर का उपयोग करके बीमा शर्तों का उल्लंघन किया है। फोरम ने कहा कि बीमा कंपनी ने क्लेम को त्रुटिपूर्ण आधार पर निरस्त किया है और परिवादी को मानसिक एवं आर्थिक क्षति पहुंचाई है।

हर्जाना राशि

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड पर 4 लाख 81 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत बीमा दावा राशि 430000 रुपये, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 50000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा एवं दावा राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

 

03-07-2020
वाहन बुकिंग की राशि लेकर संस्थान बंद किया,जिला उपभोक्ता फोरम ने डीलर पर लगाया 1 लाख 21 हजार रुपए हर्जाना

दुर्ग। नए वाहन की बुकिंग राशि प्राप्त करने के बाद ना तो वाहन दिया और ना ही बुकिंग राशि लौटाई, इस कृत्य को इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने विकॉन ऑटोमोबाइल्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के रायपुर निवासी डायरेक्टर वैभव जैन एवं विमल चंद श्रीश्रीमाल पर 1 लाख 21 हजार रुपये हर्जाना लगाया

ग्राहक की शिकायत

मोहन नगर दुर्ग निवासी रामेश्वर पांडे ने वाहन डीलर विकॉन टोयोटा (जेवरा सिरसा दुर्ग) से इनोवा वाहन दिनांक 21 अप्रैल 2016 को बुकिंग कर 1 लाख रुपये भुगतान किया था, तब अनावेदकगण द्वारा परिवादी को बुकिंग दिनांक से 2 माह के भीतर वाहन प्रदान करने का आश्वासन दिया गया लेकिन अनावेदकगण परिवादी को गुमराह करके झूठे बहाने बनाते रहे। वर्ष 2017 में अनावेदकगण ने अपने दुर्ग, भिलाई एवं रायपुर स्थित संस्थान को बंद कर दिया और बाद में बिलासपुर पुलिस द्वारा अन्य लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में अनावेदकगण गिरफ्तार कर लिया गया।

अनावेदकगण का बचाव

अनावेदकगण ने बचाव में यह तर्क दिया कि उनके प्रतिष्ठान से परिवादी को कोई रसीद जारी नहीं की गई है।

उपभोक्ता फोरम का फैसला

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तर्कों के आधार पर विचारण कर यह माना कि अनावेदकगण ने जो रसीद परिवादी को जारी की है उसमें टीन नंबर अंकित है,जिससे अनावेदकगण ने इंकार नहीं किया है और यदि अनावेदकगण के प्रतिष्ठान से कोई रसीद जारी नहीं की गई थी तो उन्हें उनके प्रतिष्ठान के नाम से जारी तथाकथित फर्जी रसीद के संबंध में पुलिस में शिकायत करनी थी परंतु ऐसा नहीं किया, इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि भुगतान रसीद अनावेदकगण के संस्थान द्वारा ही जारी की गई है। वाहन की बुकिंग के लिए 1 लाख रुपये प्राप्त करने के बावजूद परिवादी को ना तो वाहन प्रदान किया गया और ना ही बुकिंग राशि वापस की गई, अनावेदकगण का यह कृत्य व्यवसायिक कदाचरण की श्रेणी में आता है।

हर्जाना राशि

जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने विकॉन टोयोटा के रायपुर निवासी डायरेक्टर वैभव जैन एवं विमल चंद श्रीश्रीमाल पर  कुल 1 लाख 21 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें वाहन की बुकिंग राशि 100000 रुपए, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप रुपए 20000 एवं वाद व्यय के लिए रुपए 1000 भुगतान करने का आदेश दिया। तथा 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज पृथक से देय होगा।

16-06-2020
साख सहकारी समिति ने नहीं लौटाई जमा रकम,जिला उपभोक्ता फोरम ने लगाया 1 लाख 44 हर्जाना

दुर्ग। साख सहकारी समिति द्वारा मंथली इनकम प्लान में रकम जमा कराने के बाद स्कीम के अनुसार भुगतान नहीं किया। इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने अर्थतत्व क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी रायपुर के शाखा प्रबंधक मो. इदरीस अहमद पर 1 लाख 44 हजार रुपये हर्जाना लगाया

ग्राहक की शिकायत
सेक्टर 7 भिलाई  निवासी वाईआर दामले ने  हित कुमार खरे के माध्यम से अर्थतत्व क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी रायपुर में मंथली इनकम प्लान में 100000 रुपये दिनांक 8 दिसंबर 2015 को जमा किया था, जिसकी अवधि 36 माह की थी और 36 माह तक प्रतिमाह 1000 रुपये परिवादी को भुगतान मिलना था। किंतु प्लान के मुताबिक परिवादी को भुगतान नहीं किया गया और परिवादी को उसकी मूल राशि भी वापस नहीं की गई।

अनावेदकगण का बचाव
चिटफंड सोसायटी की ओर से प्रकरण में कोई कोई जवाब नहीं दिया गया। जबकि कथित एजेंट रोहित कुमार खरे ने कहा कि उसने परिवादी को कोई दस्तावेज या रसीद जारी नहीं की थी ना ही वह संस्था का कर्मचारी या एजेंट है। संबंधित संस्था की अचल संपत्ति को अटैच करने की कार्यवाही दुर्ग जिलाधीश द्वारा प्रारंभ की जा चुकी है।

उपभोक्ता फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तर्कों के आधार पर विचारण कर यह माना कि अनावेदक संस्था ने परिवादी से मंथली इनकम प्लान के लिए 100000 रुपये प्राप्त किया था और मंथली इनकम के 36000 रुपये के स्थान पर केवल 12442 भुगतान किया इसीलिए परिवादी अंतर की राशि 23558 रुपये एवं मूल राशि 100000 रुपये मिलाकर कुल 123558 रुपये प्राप्त करने का अधिकारी है।

हर्जाना राशि
जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने अनावेदक संस्था अर्थतत्व साख सहकारी समिति के मैनेजर इदरीश अहमद पर  कुल 1.44 लाख रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें कुल परिपक्वता राशि 123558 रुपये, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप रु. 20000 एवं वाद व्यय के लिए रु. 1000 भुगतान करने का आदेश दिया। इसमें 7.50 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज पृथक से देय होगा। एजेंट के रूप में प्रकरण में  पक्षकार बनाए गए रोहित कुमार खरे के विरुद्ध शिकायत प्रमाणित नहीं होने पर उसके खिलाफ प्रकरण खारिज किया गया।

13-06-2020
बिक्री से मिली अतिरिक्त रकम ग्राहक को नहीं लौटाई, जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक पर लगाया हर्जाना

दुर्ग। सोने के गहने गिरवी रखकर ऋण लेने वाले ग्राहक का सोना बेचने के बाद ऋण राशि से अधिक रकम बैंक को मिली लेकिन बैंक ने उस अतिरिक्त रकम को ग्राहक को नहीं लौटाया। इस आचरण को जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता माना और आईसीआईसीआई बैंक के पावर हाउस भिलाई शाखा के मैनेजर एवं बड़ौदा (गुजरात) स्थित बैंक मुख्यालय के जनरल मैनेजर पर 51 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

सुंदर नगर चरोदा भिलाई निवासी संजीव जायसवाल ने दिनांक 21 सितंबर 2015 को आईसीआईसीआई बैंक पावर हाउस भिलाई शाखा में सोने के गहने गिरवी रखकर 103800 रुपये का ऋण 1 वर्ष के लिए लिया था। बाद में बैंक शाखा जाने पर उसे बताया गया कि गिरवी रखे आभूषणों को विक्रय कर दिया गया है जबकि इसकी कोई लिखित सूचना उसे नहीं दी गई।

अनावेदकगण का जवाब

बैंक ने यह जवाब दिया कि परिवादी को ऋण राशि की डिमांड नोटिस पंजीकृत डाक से भेजी गई थी तथा नीलामी के पूर्व भी पंजीकृत नोटिस दी गई थी,जो कि परिवादी के अधूरे पते के कारण नोटिस वापस आ गई। इसके बाद दो समाचार पत्रों में नीलामी के लिए सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की गई, इसके बाद भी परिवादी ने ऋण के एवज में किसी राशि का भुगतान नहीं किया तब दिसंबर 2016 में नीलामी का ऋण की वसूली की गई।

फोरम का फैसला

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये एवं लता चंद्राकर ने प्रकरण में पेश दस्तावेजों और तर्कों के आधार पर यह पाया कि परिवादी ने ऋण राशि अदा करने का प्रयास किया था ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। परिवादी ने नीलामी से पहले बैंक को ऋण की कोई भी राशि अदा नहीं की थी, तब बैंक ने आभूषणों को विक्रय किया और इससे बैंकों 162306 रुपये प्राप्त हुए,जिसे ऋण में समायोजित करने के बाद शेष अतिरिक्त राशि 40562 रुपये बची, जिसे परिवादी प्राप्त करने का अधिकारी है लेकिन बैंक ने नीलामी के पश्चात मिली राशि में से अतिरिक्त बची राशि 40562 रुपये परिवादी को वापस करने का कोई प्रयास नहीं किया। बैंक का यह आचरण सेवा में निम्नता एवं घोर व्यवसायिक दुराचरण की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये एवं लता चंद्राकर ने आईसीआईसीआई बैंक की स्थानीय शाखा और मुख्यालय पर 51562 रुपये हर्जाना लगाया,जिसके तहत गहने बेचने के बाद शेष अतिरिक्त राशि 40562 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 10000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये देना होगा साथ ही फोरम ने दिनांक 8 दिसंबर 2016 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देने का आदेश दिया।

 

12-06-2020
निम्न स्तर के सामानों से बनाया मॉड्यूलर किचन,जिला उपभोक्ता फोरम ने सुधार करने का आदेश देते हुए लगाया 21000 हर्जाना

दुर्ग। बड़ी रकम लेने के बाद डीलर ने खराब एवं निम्न कोटि के सामान लगाते हुए मॉड्यूलर किचन बनाया,जो कुछ दिनों बाद ही समस्याएं देने लगा,इसे ग्राहक के प्रति व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने रायपुर स्थित डीलर एडवांस इंटरनेशनल पर 21000 हजार रुपये हर्जाना भी लगाया साथ ही मॉड्यूलर किचन में सुधार करने का आदेश दिया और यदि सुधार कार्य नहीं किया तो ऐसी दशा में 60000 रुपये पृथक से क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।  

ग्राहक की शिकायत

विद्या विहार कॉलोनी नेहरू नगर भिलाई निवासी यशजीत चौहान ने अनावेदक डीलर के विज्ञापन से आकर्षित होकर अपने नवनिर्मित मकान में मॉड्यूलर किचन लगाने का काम 26 सितंबर 2017 को सौंपा। लेकिन 1 लाख 20 हजार रुपये लेने के बाद भी डीलर ने मॉड्यूलर किचन में तयशुदा इनर फिटिंग और सॉफ्ट ड्रॉर नहीं लगाए, न ही वादे के अनुसार मोल्डेड फिटिंग की। पैनल के कलर में भी अंतर था। खराब और निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग करने के कारण कुछ ही दिनों में मॉड्यूलर किचन में लगाए हुए पैनल भी उखड़ गए। परिवादी ने जब अनावेदक को समस्या के बारे में बताया तो उसने ध्यान नहीं दिया और परिवादी का फोन भी नहीं उठाया।
जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा भेजी गई रजिस्टर्ड नोटिस को अनावेदक ने लेने से इंकार कर दिया और प्रकरण में अनुपस्थित रहा।

फोरम का फैसला

प्रकरण में पेश दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने विचारण करने पर यह प्रमाणित पाया कि अनावेदक डीलर ने परिवादी के मॉड्यूलर किचन के निर्माण कार्य में कमियां और त्रुटियाँ की थी जिसे परिवादी ने इंस्टॉलेशन फार्म में दर्ज भी किया था। मॉड्यूलर किचन बनाने के बदले बड़ी राशि लेने के बाद भी गुणवत्तायुक्त कार्य नहीं करके निर्माण में गंभीर त्रुटियाँ की गई, जिससे परिवादी समस्याग्रस्त रहा और शिकायत करने पर अनावेदक अपनी जिम्मेदारियों से विमुख हो गया। अनावेदक का यह आचरण व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने आदेशित किया कि अनावेदक डीलर वायदे के अनुसार परिवादी के किचन में 45 दिनों के भीतर तयशुदा आवश्यक सुधार कार्य करेगा साथ में मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप परिवादी को 20000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 1000 भी भुगतान करेगा। यदि अनावेदक डीलर एडवांस इंटरनेशनल रायपुर द्वारा परिवादी के किचन में आदेशित आवश्यक सुधार कार्य नहीं किया जाता है तो ऐसी दशा में वह परिवादी को 60000 रुपये पृथक से क्षतिपूर्ति स्वरूप भुगतान करेगा।

11-06-2020
ऑनलाइन शॉपिंग से खरीदा नया मोबाइल वारंटी अवधि में हुआ खराब,जिला उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना


दुर्ग। ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी से खरीदा गया मोबाइल वारंटी अवधि में खराब हुआ तो उसे सुधारा नहीं गया। समस्याग्रस्त मोबाइल बेचने और उसमें सुधार नहीं करने के लिये निर्माता कंपनी पैनासोनिक इंडिया, ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट एवं सुपेला भिलाई स्थित सर्विस सेंटर आरवी सोलुशन को जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता का जिम्मेदार माना और 15 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

परिवाद के मुताबिक कैंप 1 भिलाई निवासी ओमप्रकाश साहू ने पैनासोनिक इंडिया कंपनी का मोबाइल ऑनलाइन शॉपिंग के माध्यम से  23 अप्रैल 2017 को 8999 रुपये में खरीदा था, जिसमें कंपनी द्वारा 1 वर्ष की वारंटी प्रदान की गई थी लेकिन मोबाइल में खरीदने के बाद ही समस्या आनी शुरू हो गई। मोबाइल हैंग हो जाता था और अपने आप बंद हो जाता था, जिससे परेशान होकर परिवादी ने उसे भिलाई स्थित सर्विस सेंटर आरवी सोलुशन के पास दिखाया तब सर्विस सेंटर द्वारा मोबाइल का सॉफ्टवेयर अपडेट कर परिवादी को वापस कर दिया गया। मोबाइल में बार-बार खराबी आने लगी मोबाइल की समस्या लेकर परिवादी 12 जून 2017, 22 जून 2017, 09 जुलाई 2017 तथा 28 जुलाई 2017 को सर्विस सेंटर गया लेकिन कुछ दिन चलने के बाद मोबाइल पुनः खराब हो जाता था। अंत में दिनांक 20 सितंबर 2017 को मोबाइल के टच पैनल ने काम करना बंद कर दिया और मोबाइल हैंग होने लगा, जिसके बाद सर्विस सेंटर ने मोबाइल को सुधारने के लिए अपने पास रखा लेकिन कोई समाधान नहीं किया। जिसके बाद परिवादी ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली।

अनावेदकगण का जवाब

प्रकरण में ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट ने कहा कि उसका काम विक्रेताओं से सामान लेकर क्रेता तक पहुंचाने का है। मोबाइल में यदि कोई त्रुटि थी तो उसके लिए निर्माता कंपनी के सर्विस सेंटर से संपर्क किया जाना था। सर्विस सेंटर ने लिखित जवाब दिया कि परिवादी जितनी बार मोबाइल लेकर सर्विस सेंटर आया उसे उतनी बार भली-भांति सुधार कर दिया गया था। ऑनलाइन शॉपिंग के माध्यम से क्रय किए गए मोबाइल की जवाबदारी ऑनलाइन विक्रेता कंपनी तथा निर्माता कंपनी की होती है।

फोरम का फैसला

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये एवं लता चंद्राकर ने प्रकरण में पेश दस्तावेजों और तर्कों के आधार पर यह पाया कि मोबाइल सुधार के समय जारी किए गए कस्टमर डिटेल से मोबाइल के सर्विस सेंटर में बनने के लिए बार-बार दिए जाने की पुष्टि होती है। मोबाइल में हैंग होने और बार-बार बंद होने जैसी समस्याएं थी। कंपनी द्वारा परिवादी को नया मोबाइल प्रदान करने की पेशकश से भी इस बात की पुष्टि होती है कि परिवादी द्वारा खरीदे गए मोबाइल में निर्माणगत त्रुटि थी। जिसका निदान करने में अनावेदकगण असफल रहे थे। मोबाइल खरीदने के 3 महीने में वारंटी अवधि में ही हैंग होने लगा था,जिसे सुधार कर देने में अनावेदकगण असफल रहे। कंपनी द्वारा किए गए दावे के अनुसार मोबाइल नहीं था, परिवादी के साथ व्यवसायिक कदाचरण किया गया है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये एवं लता चंद्राकर ने मोबाइल की कीमत 8999 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 5000 रुपये, तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये कुल मिलाकर 14999 रुपये निर्माता कंपनी पैनासोनिक इंडिया, ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट एवं सुपेला भिलाई स्थित सर्विस सेंटर आरवी सोलुशन पर हर्जाना लगाते हुए एक माह के भीतर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित परिवादी को अदा करने का आदेश दिया।

 

08-06-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने विद्युत कंपनी के अधिकारियों पर लगाया 6 लाख 5 हजार का हर्जाना

दुर्ग। विद्युत कंपनी ने परिवादी संस्थान के प्लॉट से 33 केव्ही विद्युत पोल हटाने के लिए बड़ी राशि जमा कराई और पूरी राशि मिलने बाद भी ना तो पोल हटाया और ना ही परिवादी संस्था को उसकी राशि वापस की। इस आचरण को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

परिवादी संस्था की शिकायत
परिवादी संस्था जुग महादेव एजुकेशनल सोसायटी के सचिव सुशील चंद्राकर ने उपभोक्ता फोरम के समक्ष ये परिवाद दायर किया कि पुलगांव चौक पर उनके संस्थान द्वारा निर्माण कराए जा रहे कालेज के प्लॉट से 33 केवी पोल लगा हुआ है,जिसके ऊपर से हाईवोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन गुजरती है। पत्र व्यवहार करने पर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने कहा कि 554076 रुपये भुगतान करने पर उक्त पोल को परिवादी के प्लॉट से हटा दिया जाएगा, जिस पर सहमत होते हुए परिवादी ने दिनांक 31 मार्च 2008 को 554076 रुपये भुगतान कर दिया परंतु संपूर्ण राशि प्राप्त होने के बाद भी अनावेदकों द्वारा ना तो 33 केवी पोल को हटाया गया और ना ही राशि वापस की गई। इस बाबत लगातार पत्राचार किया गया परंतु अनावेदकगण ने कोई जवाब नहीं दिया।

अनावेदकगण का जवाब
अनावेदकगण ने लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा कि परिवादी के प्लाट में लगे विद्युत पोलों को हटाने के लिए दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी किया गया था और विद्युत पोल हटा दिया गया है। परिवादी ने समयसीमा के बाद प्रकरण पेश किया है इसीलिए प्रकरण खारिज किया जाए।

फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह निष्कर्षित किया कि अनावेदकगण ने पोल हटाने संबंधी कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है, पोल शिफ्टिंग का जो कार्य हुआ है वह पूर्व में किए गए शिफ्टिंग के संबंध में है ना कि वर्तमान शिफ्टिंग के संबंध में है। दिनांक 28 अप्रैल 2008 को वर्क आर्डर जारी करने के पश्चात शिफ्टिंग का कोई कार्य किया गया था यह प्रमाणित नहीं होता है। अनावेदकगण ने 554076 रुपये जमा करवाने के बावजूद परिवादी के परिसर से 33 के.वी. विद्युत पोल नहीं हटाया, जो व्यवसायिक कदाचार एवं सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के पद्मनाभपुर दुर्ग कार्यालय के कार्यपालन यंत्री एवं सहायक अभियंता पर 6 लाख 5 हजार 76 रुपये हर्जाना अधिरोपित किया, जिसके तहत अनावेदकगण को परिवादी की जमा राशि 554076 रुपये, मानसिक परेशानी की क्षतिपूर्ति स्वरूप 50000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये का भुगतान करना होगा, साथ ही जमा राशि पर 31 मार्च 2008 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

 

04-06-2020
हॉलीडे रिसॉर्ट में छुट्टी मनाने की मेंबरशिप बेचने के बाद नहीं दी सुविधा,कंपनी पर लगा 28 हजार रुपये हर्जाना

दुर्ग। हॉली डे रिसॉर्ट में रुकने संबंधी पैकेज सुविधा की मेंबरशिप बेचने के बाद ना तो हिल स्टेशन के रिसॉर्ट में ठहराया और ना ही मेंबरशिप रद्द करवाने पर रकम वापस लौटाई, इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने चेन्नई की कंपनी स्टर्लिंग हॉलीडे रिसॉर्ट इंडिया लिमिटेड पर 28 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

परिवादिनी की शिकायत
आदर्श नगर दुर्ग निवासी परिवादिनी विधि हिरवानी ने स्टर्लिंग हॉलीडे रिसॉर्ट लिमिटेड द्वारा दी जा रही हॉलिडे पैकेज सुविधा लेते हुए 27605 रुपये देकर 11 मार्च 2016 को मेंबरशिप ली। इसके बाद कंपनी ने यह आश्वासन दिया कि 4 रात और 5 दिन के लिए उसके किसी भी हॉलीडे रिसॉर्ट में ठहरने की सुविधा दी जाएगी, तब परिवादिनी विधि हिरवानी और उसके पति अभिषेक हिरवानी ने 2 दिन मनाली और 2 दिन धर्मशाला में हॉलीडे मनाने की इच्छा व्यक्त की परंतु मनाली और धर्मशाला पहुंचने पर रिसोर्ट में रुकवाने की सुविधा नहीं दी गई। टूर से वापस लौटकर परिवादिनी ने मेंबरशिप निरस्त करके अपनी जमा रकम वापस मांगी लेकिन कंपनी ने परिवादिनी को उसकी राशि वापस नहीं की।    

अनावेदक का जवाब
अनावेदक ने प्रकरण में उपस्थित होकर जवाब दिया कि परिवादिनी ने खुद ही दिलचस्पी लेकर सदस्यता ली थी। परिवादिनी ने मेंबरशिप लेकर केवल 27605 रुपये डाउन पेमेंट किया था जबकि शर्त के मुताबिक 7959 रुपये की 48 ईएमआई तय हुई थी,जिसमें से कम से कम 4 ईएमआई का भुगतान करने के बाद ही परिवादिनी को रिसॉर्ट संबंधी सुविधा दी जा सकती थी। परिवादिनी ने कंपनी के साथ पैकेज पॉलिसी संबंधी जो अनुबंध किया था उसका स्वयं ही उल्लंघन किया है।

फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल,सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह निष्कर्ष निकाला कि परिवादिनी और अनावेदक कंपनी के बीच हुए अनुबंध के नियम एवं शर्तों के मुताबिक यदि 60 दिन के भीतर मेंबरशिप कैंसिल करने का अनुरोध ग्राहक द्वारा किया जाए तो 25 प्रतिशत कटौती कर शेष राशि का भुगतान किया जाना है और परिवादिनी ने 56 दिनों में अपने राशि की मांग की है इसलिए वह 20704 वापस प्राप्त करने की अधिकारी है। राशि की मांग का अनुरोध प्राप्त होने के बाद भी अनावेदक कंपनी ने परिवादिनी को इस राशि का भुगतान नहीं कर व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता की है।जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने स्टर्लिंग हॉलीडे रिसॉर्ट इंडिया लिमिटेड पर 28 हजार 7 सौ 4 रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत डाउन पेमेंट की राशि 20704 रुपए, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 7000 रुपए, वाद व्यय के रूप में 1000 रुपए देना होगा। साथ ही 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी भुगतान करना होगा।

02-06-2020
दुर्ग नगर निगम पर जिला उपभोक्ता फोरम ने लगाया 6 लाख 43 हजार का हर्जाना

दुर्ग। नीलामी में अधिक ऑफर मूल्य होने के बाद भी दुर्ग नगर पालिका निगम द्वारा परिवादियों को दुकान का आवंटन नहीं किया गया और जमा की गई अमानत राशि की मांग करने पर अमानत राशि का भुगतान भी नहीं किया। इसे आचरण को व्यवसायिक कदाचार ठहराते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने दो अलग-अलग मामलों में नगर पालिक निगम दुर्ग के आयुक्त पर 6 लाख 43 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

पहला मामला
कादंबरी नगर दुर्ग निवासी नेत्र चिकित्सक डॉ. प्राची अरोरा ने दिनांक 13 सितंबर 2011 को दुर्ग नगर निगम द्वारा आमंत्रित निविदा में भाग लेते हुए दो दुकानों के लिए निविदा भरकर प्रति दुकान 243175 रुपये के हिसाब से कुल रकम 486350 रुपये अमानत राशि के रूप में जमा कराई। निविदा खोलने पर परिवादिनी का ऑफर मूल्य सबसे अधिक था और उसे दुकान पाने की पात्रता थी। परिवादिनी द्वारा बार-बार दुर्ग नगर निगम से संपर्क करने पर भी मात्र आश्वासन दिया जाता रहा लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई और दिनांक 28 मई 2012 को दुकानों की दर कम होने के आधार पर निविदा अस्वीकार कर दी गई। इसके बाद 6 जून 2012 को परिवादिनी को यह जानकारी दी गई कि लिपिकीय त्रुटिवश निवेदन निरस्त होने की सूचना जारी हो गई थी, अब दुकान आवंटन का निर्णय एवं विचार एमआईसी में किया जाएगा। 25 जून 2012 को परिवादिनी की निविदा अस्वीकार कर दी गई। परिवादिनी ने 12 सितंबर 2012 को नगर निगम की अपील समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत की,जिसका निराकरण लंबे समय तक नहीं किए जाने के कारण परिवादी ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका प्रस्तुत की,जिसमें उच्च न्यायालय ने अपील कमेटी के समक्ष मामले का निराकरण कराने के निर्देश दिए। 30 अक्टूबर 2015 को परिवादिनी की अपील को नगर निगम की अपील समिति ने निरस्त कर दिया किंतु परिवादिनी द्वारा जमा कराई गई अमानत राशि 486350 को वापस नहीं किया।

दूसरा मामला
इसी प्रकार दूसरा मामला परिवादिनी अनीता अरोरा का है जिसने सुभाष नगर प्राथमिक शाला दुर्ग स्थित दुकान क्रमांक 9 के संबंध में अमानत राशि 125000 जमा करके दिनांक 22 जून 2011 को नगर निगम द्वारा आमंत्रित निविदा में भाग लिया था। इस मामले में भी पहले मामले की तरह ही नगर निगम द्वारा व्यवहार किया गया।

अनावेदक का जवाब
नगर पालिक निगम दुर्ग ने सिर्फ परिवादिनी डॉ.प्राची मिश्रा के मामले में ही अपना जवाब प्रस्तुत किया,जिसमें उसने कहा कि परिवादिनी ने अपनी जमा राशि जानबूझकर वापस नहीं ली है और वह किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति राशि पाने की हकदार नहीं है।

फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों तथा दोनों पक्षों के तर्को के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल,सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह सिद्ध पाया कि परिवादिनी द्वारा प्रस्तुत निविदा को मेयर इन काउंसिल द्वारा दिनांक 20 जून 2012 को निरस्त करके इसकी सूचना परिवादिनी को दी गई तब परिवादिनी ने छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम 1956 के तहत अपील प्रस्तुत की जिसका निराकरण दिनांक 30 अक्टूबर 2015 को किया गया और परिवादिनी ने इसके बाद 27 अगस्त 2016 को आयुक्त नगर निगम दुर्ग के समक्ष पुनर्विचार आवेदन दायर किया और दिनांक 3 नवंबर 2017 को अपनी अमानत राशि की मांग की। मांगे जाने पर भी अमानत राशि का भुगतान ना कर अनावेदक ने व्यवसायिक कदाचार किया है और परिवादिनी को क्षति पहुंचाई गई है।
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने नगर निगम दुर्ग आयुक्त पर 6 लाख 43 हजार रुपये हर्जाना अधिरोपित किया, जिसके तहत पहले मामले में अमानत राशि 486350 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 20000 रुपये, वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये देना होगा और दूसरे मामले में अमानत राशि 125000 रुपये, मानसिक कष्ट के एवज में 10000 रुपये एवं वाद व्यय के रुप में 1000 देना होगा। साथ ही अमानत राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी भुगतान करना होगा।

 

16-03-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने वाहन डीलर पर लगाया 50 हजार हर्जाना

दुर्ग। वाहन डीलर ने एक तरफ ग्राहक से नई मोटरसाइकिल की पूरी कीमत ले ली और दूसरी तरफ उसी गाड़ी के लिए बैंक से फाइनेंस करवाकर फाइनेंस की रकम भी ले ली, इसे ग्राहक के प्रति व्यवसायिक कदाचार और अनुचित व्यापार प्रथा का कृत्य मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम ने सरस्वती मोटर्स जामुल के प्रोपराइटर  सत्यप्रकाश बंजारे पर 50149 रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत
जेवरा सिरसा निवासी महेंद्र निषाद की ओर से पेश परिवाद के अनुसार परिवादी मत्स्य पालक है, जिसके कारण उसे उप संचालक मछली पालन विभाग द्वारा मोटरसाइकिल खरीदने के लिए अनुदान राशि 30000 रुपये प्राप्त हुई थी और शेष राशि उसके द्वारा नगद भुगतान कर मोटरसाइकिल क्रय किया जाना था। परिवादी द्वारा खरीदी जा रही मोटरसाइकिल की कीमत 62851 रुपये थी जिसमें से उप संचालक मछली पालन विभाग द्वारा वाहन डीलर के नाम से 30000 चेक द्वारा प्रदान किया गया एवं परिवादी ने अपनी ओर से 35000 रुपये नगद भुगतान किया। मोटरसाइकिल की संपूर्ण राशि का भुगतान परिवादी की ओर से हो चुका था किन्तु कुछ दिनों बाद इंडसइंड बैंक सुपेला ब्रांच से परिवादी को फोन आया कि उसे मोटरसाइकिल की किस्त 3870 रुपये प्रतिमाह 11 महीने तक भुगतान करनी है। वाहन डीलर ने परिवादी के कम पढ़े लिखे और ग्रामीण परिवेश के होने का नाजायज फायदा उठाते हुए उसे अनावश्यक रूप से बैंक का कर्जदार बनाया और बैंक से फाइनेंस कराई गई राशि 32000 रुपये को नाजायज रूप से प्राप्त कर लिया। प्रकरण में वाहन डीलर उपस्थित नहीं हुआ और उसने कोई जवाब नहीं दिया

फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने प्रकरण में प्रस्तुत रसीदों व दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाणित पाया कि वाहन डीलर ने शासकीय अनुदान के साथ नगद राशि मिलाकर 65000 रुपये परिवादी से प्राप्त कर लिए और दूसरी तरफ से बैंक का कर्जदार बनाते हुए 32000 रुपये भी प्राप्त कर लिए इस प्रकार वाहन डीलर ने वाहन की कुल कीमत 62851 रुपये के विरुद्ध 97000 रुपये वसूल लिये अर्थात मोटरसाइकिल के एवज में 34149 रुपये अतिरिक्त प्राप्त कर लिए जो कि स्पष्ट रूप से व्यावसायिक कदाचरण और अनुचित व्यापार प्रथा की पराकाष्ठा है। फोरम ने कहा कि ग्रामीण परिवेश के कम पढ़े लिखे व्यक्ति को शासन की योजना का लाभ मिलने की स्थिति का अनावेदक जैसे वाहन डीलर अनुचित लाभ उठाते हैं जबकि शासन ऐसे मत्स्य कृषकों हेतु योजना बनाकर उनके जीवनयापन की स्थिति सुधारने हेतु मोटरसाइकल जैसे परिवहन का साधन उपलब्ध कराने हेतु अनुदान देता है और उन्हें आत्मनिर्भरता देने का प्रयास करता है परंतु अनावेदक जैसे विक्रेता व्यवसायिक कदाचरण करते हैं और उन्हें अनावश्यक रूप से बैंक का कर्जदार बनाते हैं

जिला उपभोक्ता फोरम ने व्यवसायिक कदाचरण के लिए वाहन डीलर सरस्वती मोटर्स जामुल के प्रोपराइटर सत्यप्रकाश बंजारे पर 50149 रुपये हर्जाना लगाया, जिसके अंतर्गत वाहन की अधिक ली गई राशि 34149 रुपये, मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति स्वरूप 15000 रुपये एवं वाद व्यय के रूप में 1000 देना होगा साथ ही वाहन की अधिक ली गई राशि पर वाहन खरीदी दिनांक से अंतिम भुगतान तिथि तक 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

02-03-2020
रकम लेकर बिल्डर नहीं बनाया मकान, उपभोक्ता फोरम ने लगाया 4.58 लाख हर्जाना 

दुर्ग। बिल्डर ने जमीन सहित मकान के लिए उपभोक्ता से इकरारनामा किया और जमीन की कीमत पूरी प्राप्त कर ली लेकिन ना तो जमीन की रजिस्ट्री की और ना ही मकान का निर्माण शुरू किया। इसे उपभोक्ता के प्रति व्यावसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने बहुत भोंसलेस प्रॉपर्टीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड रायपुर के डायरेक्टर राजीव भोंसले एवं राहुल भोंसले पर 4.58 लाख रुपये  हर्जाना लगाया। 

ग्राहक की शिकायत
अंबिकापुर जिला सरगुजा निवासी परिवादिनी रंजना सिंह ठाकुर ने कुम्हारी स्थित लोटस साईं सिटी ड्रीम्स कैवल्यधाम के पास जमीन सहित मकान के लिए 21 लाख रुपये में भोंसलेस प्रॉपर्टीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड रायपुर के डायरेक्टर राजीव भोंसले एवं राहुल भोंसले के साथ इकरारनामा करके 432100 रुपये भुगतान किया, जिसके तहत भूमि की रजिस्ट्री 60 दिन में करने के बाद मकान का निर्माण शुरू किया जाना था परंतु बिल्डर ने ना तो जमीन की रजिस्ट्री कराई और ना ही मकान का निर्माण शुरू करवाया और परिवादी से बकाया रकम की मांग भी नहीं की। परिवादिनी ने मकान के लिए ऋण लिया था जिस पर उसके द्वारा प्रतिमाह ब्याज भी दिया जा रहा था। प्रकरण में अनावेदक बिल्डर कंपनी के डायरेक्टर बचाव के लिए उपस्थित नहीं हुए।

फोरम का फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्य एवं दस्तावेजों आधार पर विचारण पश्चात यह सिद्ध पाया कि अनावेदक बिल्डर कंपनी ने परिवादिनी से रकम लेने के बाद भी तय शर्त के अनुसार भूमि की रजिस्ट्री नहीं कराई ना ही मकान का निर्माण कार्य शुरू किया। अधिवक्ता नोटिस के माध्यम से राशि की मांग किए जाने पर राशि भी नहीं लौटाई। यह व्यवसायिक दुराचरण और सेवा में निम्नता की श्रेणी में आने वाला कृत्य है। 

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व  लता चंद्राकर ने बिल्डर पर 4लाख 58 हजार 100 रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत अनावेदक कंपनी के डायरेक्टर राजीव भोंसले एवं राहुल भोंसले को जमा राशि 4 लाख 32 हजार 100 रुपये, मानसिक व आर्थिक कष्ट की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये देना होगा। इसके साथ ही जमा राशि पर दिनांक 14 जुलाई 2015 से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

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