GLIBS
30-01-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी पर लगाया 12 हजार रुपए लगाया हर्जाना

दुर्ग। पॉलिसीधारक की ओर से बीमा निराकरण संबंधी आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किये जाने का कारण बताते हुए बीमा कंपनी ने दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल की क्षति का दावा भुगतान नहीं किया, इसे निराधार पाते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर 11546 रुपये हर्जाना लगाया।

ग्राहक की शिकायत

खुर्सीपार भिलाई निवासी अधिवक्ता हेमंत कुमार मिश्रा की मोटरसाइकिल दिनांक 25 फरवरी 2017 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई,जिसके बाद बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर क्लेम रजिस्टर्ड कराने के बाद बीमा कंपनी के सर्वेयर रमेश कुमार पटेल ने सर्विस सेंटर में जाकर गाड़ी चेक की और परिवादी से गाड़ी के कागजात, इंश्योरेंस पेपर, आरसी बुक, ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी लेते हुए वाहन की फोटोग्राफी की और यह आश्वासन दिया कि जल्दी ही बीमा क्लेम मिल जाएगा परंतु परिवादी को बीमा क्लेम प्राप्त नहीं हुआ। सर्वेयर को फोन करने पर उसने परिवादी का फोन नहीं उठाया। बीमा कंपनी और सर्वेयर परिवादी को बार-बार घुमाते हुए दस्तावेजों की मांग करते रहे जबकि परिवादी ने पहले ही दस्तावेज दे दिए थे साथ ही सर्वेयर को व्हाट्सएप के द्वारा भी कागजातों की कॉपी भेजी गई थी। परिवादी ने दोबारा 11 अप्रैल 2017 को फिर से दस्तावेजों को जमा कराया, इसके बाद भी उसे दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

अनावेदक बीमा कंपनी का जवाब

अनावेदक बीमा कंपनी ने प्रकरण में यह बचाव लिया कि सर्वेयर ने बीमित वाहन की क्षति के आंकलन हेतु आवश्यक दस्तावेजों की मांग  परिवादी से की परंतु परिवादी ने सर्वेयर को दस्तावेज प्रदान नहीं किए इसके बाद लगातार बीमा कंपनी ने परिवादी को पत्र लिखे गए परंतु परिवादी ने फिर भी दस्तावेज नहीं दिए इसलिए आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में परिवादी का दावा बंद कर दिया।

फोरम का फैसला

प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उपभोक्ता के प्रति बीमा कंपनी द्वारा सेवा में निम्नता का कृत्य किया जाना प्रमाणित पाया। फोरम ने विचारण के दौरान यह पाया कि सर्विस सेंटर ईशान ऑटो वर्ल्ड के संचालक पंकज पांडे के शपथपत्र अनुसार उसके समक्ष ही परिवादी ने सर्वेयर को वाहन के समस्त आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए थे। प्रकरण में सर्वेयर के अनुपस्थित रहा, इस कारण उसके संबंध में परिवादी द्वारा लगाए गए आक्षेपों को सत्य माना गया और सर्विस सेंटर संचालक के सर्वेयर को संपूर्ण दस्तावेज प्रदान किए जाने संबंधी बयान के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि बीमा कंपनी के सर्वेयर को परिवादी ने संपूर्ण दस्तावेज प्रदान कर दिए थे, इसके बाद भी सर्वेयर ने ना तो वाहन का सर्वे किया और ना ही बीमा दावा संबंधी प्रक्रिया में कोई सहयोग किया।

इस कारण परिवादी अपनी दावा राशि से वंचित हो गया। सर्वेयर परिवादी के प्रति नहीं बल्कि बीमा कंपनी के प्रति उत्तरदायी है परंतु इससे ग्राहक को कोई सरोकार नहीं है। यदि परिवादी ने समुचित संपूर्ण दस्तावेज प्रदान कर दिए थे तो उससे बार-बार दस्तावेज मांगे जाने का कोई औचित्य नहीं था। अनावेदक बीमा कंपनी ने परिवादी के प्रति सेवा में निम्नता की है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने संयुक्त रूप से फैसला सुनाते हुए एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी पर 11546 रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत बीमा दावा राशि 8546 रुपये, मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप रु. 2000 तथा वाद व्यय के रुप में 1000 रुपये देना होगा एवं दावा राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा।

20-01-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने सहारा ग्रुप की कंपनियों पर लगाया 7.96 लाख रुपये हर्जाना  

दुर्ग। पाँच अलग-अलग परिवादियों की शिकायत पर सहारा ग्रुप की कंपनी सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड और सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा मैच्योरिटी राशि का भुगतान नहीं किया जाना प्रमाणित होने पर इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता करार देते हुए हर्जाना लगाया। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने सहारा ग्रुप की उक्त कंपनियों के विरुद्ध आदेश पारित करते हुए 7 लाख 96 हजार रुपये हर्जाना लगाया। 

क्या थी शिकायत 
पांच अलग-अलग मामलों में से बोरसी दुर्ग निवासी परिवादी जयप्रकाश साहू ने 77000 रुपये और पाटन निवासी देवकी बाई पटेल ने 1 लाख 12700 रुपये सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड में जमा कराए थे इसी प्रकार पद्मनाभपुर दुर्ग निवासी परिवादी बीना साहू और सेवालाल साहू ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में रिकरिंग डिपॉजिट प्लान के तहत 60 माह तक लगातार 1000 रुपये जमा कराए थे जबकि एक अन्य मामले में  शंकर नगर दुर्ग निवासी परिवादी बूंदकुंवर चंद्राकर ने सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में 1लाख रुपये के बांड लेकर राशि निवेश किया था। सभी परिवादियों ने परिपक्वता तिथि के पश्चात रकम वापसी के लिए सहारा ग्रुप की कंपनियों के चक्कर लगाए परंतु उन्हें उनकी परिवक्वता राशि प्रदान नहीं की गई। प्रकरण में अनावेदक कंपनियों की ओर से वकील और मैनेजर उपस्थित हुए परंतु उनकी ओर से कोई जवाब पेश नहीं किया गया।


फोरम का फैसला

प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता ने सभी पांचों प्रकरणों में यह प्रमाणित पाया कि अनावेदक कंपनियों के पास परिवादियों ने रकम जमा कराई थी और परिपक्वता अवधि व्यतीत होने के बाद भी अनावेदक द्वारा परिवादियों को उनकी रकम मय ब्याज नहीं लौटाई गई, यह कृत्य सेवा में निम्नता और व्यवसायिक कदाचरण का परिचायक है। जिला उपभोक्ता फोरम के जिला उपभोक्ता फोरम ने सहारा ग्रुप की अनावेदक कंपनियों पर 7 लाख 96 हजार 1 सौ 98 रुपये हर्जाना लगाते हुए  पांचों परिवादियों को अनुतोष अदा करने का आदेश पारित किया। साथ ही परिपक्वता राशि पर 6% वार्षिक दर से ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।

15-01-2020
जिला उपभोक्ता फोरम ने ठेकेदार पर लगाया 6 लाख का हर्जाना  

दुर्ग। उपभोक्ता से मकान निर्माण की रकम लेने के बाद आधा अधूरा निर्माण करके काम बंद करने को व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आने वाला कृत्य करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल और सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने ठेकेदार पर रुपए 6 लाख रुपए हर्जाना लगाया।

क्या है मामला
न्यू आदर्श नगर दुर्ग निवासी संतोष प्रसाद शर्मा ने अपने मकान में प्रथम तल पर 1665 वर्गफुट में निर्माण कार्य करने के लिए चौबे कॉलोनी रायपुर निवासी ठेकेदार प्रतीक शर्मा को सामग्री सहित 800 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से दिनांक 25 मार्च 2016 को ठेका दिया था, जिसके लिए ठेकेदार ने अलग-अलग तिथियों में परिवादी से कुल 14लाख् 69 हजार रुपये प्राप्त किए किंतु दीपावली 2017 के समय काम बंद कर दिया। परिवादी द्वारा निवेदन करने पर भी कार्य प्रारंभ नहीं किया। आर्किटेक्ट से मूल्यांकन कराने पर पता चला कि अनावेदक ठेकेदार ने केवल 900000 रुपये का ही काम किया था, जिसके बाद परिवादी ने अन्य दूसरे ठेकेदार से अपने मकान के प्रथम तल का निर्माण कार्य पूरा कराया।

फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेज एवं प्रमाणों के आधार पर विचारण करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने यह प्रमाणित पाया कि परिवादी ने अनावेदक ठेकेदार को नगद एवं बैंक द्वारा कुल 14 लाख 69 हजार रुपये का भुगतान किया है तथा आर्किटेक्ट की मूल्यांकन रिपोर्ट से यह प्रमाणित हुआ कि परिवादी के मकान में 900000 रुपये का निर्माण कार्य किया गया था इसलिए परिवादी अतिरिक्त ली गई राशि 5लाख 69 हजार रुपये अनावेदक से प्राप्त करने का अधिकार है। इसके अलावा अनावेदक ठेकेदार पर मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरुप 30000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये हर्जाना लगाया। अनावेदक द्वारा परिवादी को हर्जाना स्वरूप कुल 6 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया गया। 

 

13-01-2020
बुकिंग राशि लेकर निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया,बिल्डरों पर लगाया 5.48 लाख का हर्जाना

दुर्ग। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने दो अलग-अलग मामलों में रजत डेवलपर्स के संचालक अंजू उर्फ अंजय सुराना पर 3 लाख 21 हजार रुपये और लैंडमार्क एसोसिएट्स के संचालक सुभाष कुशवाहा पर 2 लाख 27 हजार रुपये हर्जाना लगाया। दोनों बिल्डरों ने परिवादी ग्राहकों से बुकिंग राशि लेने के बाद ना तो फ्लैट का निर्माण शुरू किया और ना ही उनकी बुकिंग राशि वापस लौटाई, इस कृत्य को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता का परिचायक मानते हुए हर्जाना लगाया गया। पहले मामले में रजत डेवलपर्स के संचालक अंजू उर्फ अंजय सुराना के खिलाफ सुंदर नगर भिलाई निवासी विजय नागदेव ने यह शिकायत की थी कि रजत डेवलपर्स ने शांति नगर भिलाई स्थित अपने प्रोजेक्ट रजत हाइट का नक्शा दिखाकर फ्लैट की बुकिंग की। बुकिंग राशि 3 लाख रुपये लेकर 18 महीने के भीतर सर्व सुविधायुक्त फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया किंतु संबंधित फ्लैट के स्ट्रक्चर निर्माण एवं फर्निशिंग आदि में कोई रुचि नहीं ली, राशि लेने के बाद एग्रीमेंट भी नहीं बनाया।

दूसरे मामले में लैंडमार्क एसोसिएट्स के संचालक सुभाष कुशवाहा के खिलाफ जामगांव एम, तहसील पाटन निवासी सरोज वर्मा की यह शिकायत थी कि लैंडमार्क एसोसिएट्स के संचालक सुभाष कुशवाहा ने आनंद विहार फेस वन बोरसी दुर्ग स्थित अपने प्रोजेक्ट में 4 बीएचके फ्लैट के लिए परिवादिनी से अग्रिम राशि 201000 रुपये दिनांक 20.10.2015 को प्राप्त किया और इकरारनामा किया किंतु मकान बनाना प्रारंभ ही नहीं किया और लगातार परिवादिनी को गुमराह करता रहा। राशि वापसी की मांग करने पर बार-बार चक्कर लगवाए किंतु बुकिंग राशि भी वापस नहीं की। दोनों प्रकरणों में यह तथ्य प्रमाणित हुआ कि अनावेदक बिल्डरों ने बुकिंग राशि लेने के बाद भी ना तो फ्लैट का निर्माण किया और ना ही परिवादियों को उनकी बुकिंग राशि वापस लौटाई। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने रजत डेवलपर्स के संचालक अंजू उर्फ अंजय सुराना पर हर्जाना लगाते हुए परिवादी की बुकिंग राशि 300000 रुपये, मानसिक परेशानी की क्षतिपूर्ति स्वरुप 20000 रुपये तथा वाद व्यय के रुप मे 1000 रुपये परिवादी को अदा करने का आदेश दिया। इसी प्रकार लैंडमार्क एसोसिएट्स के संचालक सुभाष कुशवाहा पर फ्लैट बुकिंग की राशि 201000 रुपये, मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति स्वरूप 25000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये हर्जाना लगाया।

 

13-01-2020
निवेश की मैच्योरिटी रकम नहीं दी, सहारा ग्रुप कंपनी पर लगा 3.38 लाख रुपये हर्जाना

दुर्ग। निवेशक को मैच्योरिटी राशि का भुगतान नहीं करने को व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने 3 लाख 38 हजार रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

क्या है मामला

विद्युत नगर दुर्ग निवासी परिवादी भोला प्रसाद चंद्राकर ने सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट्स रेंज लिमिटेड की पदमनाभपुर दुर्ग शाखा से क्यू शॉप प्लान एच स्कीम की छह पॉलिसियाँ वर्ष अक्टूबर 2012 में 134300 रुपये जमा करके ली थी। अनावेदक कंपनी के बताए अनुसार 6 वर्ष बाद अक्टूबर 2018 में ब्याज सहित परिपक्वता राशि 3 लाख 17 हजार रुपये दी जानी थी। परिपक्वता पश्चात परिवादी ने कई बार अपनी मैच्योरिटी रकम की मांग की, लेकिन अनावेदक कंपनी के शाखा कार्यालय ने लगातार टाल मटोल किया, अधिवक्ता से नोटिस भी भिजवाया परंतु मैच्योरिटी रकम का भुगतान नहीं किया गया।

अनावेदक का जवाब

अनावेदक ने प्रकरण में जवाब दिया कि परिवादी ने जिस स्कीम में राशि जमा की थी वह ब्याज प्रदान करने वाली स्कीम नहीं है बल्कि कंपनी का उत्पाद क्रय करने वाली स्कीम है। परिवादी द्वारा स्कीम अवधि 6 वर्ष में कोई उत्पाद क्रय नहीं किया गया, उत्पाद क्रय नहीं करने के कारण परिवादी को लायल्टी बोनस प्वाइंट नहीं मिला जिसके लिए परिवादी स्वयं जिम्मेदार है।

फोरम का फैसला

प्रकरण में पेश दस्तावेजों एवं प्रमाणों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने यह प्रमाणित पाया परिवादी द्वारा अनावेदक कंपनी के पास 1 लाख 34 हजार 300 रुपये जमा किए गए थे। अनावेदक कंपनी ने परिवादी के निवास स्थान वाले शहर में किसी प्रकार के प्रोडक्ट बेचने के लिए स्टोर खोला है यह प्रमाणित नहीं हुआ, ऐसे में कोई व्यक्ति ऐसे किसी प्रोडक्ट को खरीदने हेतु भला क्यों एडवांस राशि जमा करेगा जो उसे उपलब्ध ही नहीं कराई जा सकती, इसलिए यही माना जाएगा कि परिवादी ने जमा योजना के तहत ही 6 वर्ष के लिए अनावेदक के पास रकम निवेश की थी। अनावेदक कंपनी इस प्रश्न पर भी मौन रही कि क्या उसने परिवादी को स्वयं द्वारा बेचे जा रहे प्रोडक्ट की सूची प्रदान की थी या फिर उसके द्वारा दुर्ग जिले की सीमा में प्रोडक्ट बेचे जाने संबंधी कोई स्टोर संचालित किए जाते हैं? फोरम ने यह माना कि व्यवसायिक दुराचार के साथ रकम प्राप्त की जाए तो जमा योजना के नियम एवं शर्तें ग्राहक पर लागु नहीं होती । जिला उपभोक्ता फोरम के जिला उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने कंपनी पर 3 लाख 28 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसमें परिपक्वता राशि 3 लाख 17 हजार रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 20 हजार रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये देने का आदेश दिया, उक्त राशि पर 6% वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

 

08-01-2020
बुकिंग राशि लेकर निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया,जिला उपभोक्ता फोरम ने लगाया हर्जाना

दुर्ग। अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा छावनी भिलाई में अपने प्रोजेक्ट आम्रपाली वनांचल सिटी में फ्लैट बुक करने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं किया, जिसे व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नता करार देते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने बिल्डर संस्थान के अधिकृत प्राधिकारी और प्रोजेक्ट मैनेजर पर 1 लाख 18 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

परिवादीगण की शिकायत
अनावेदक बिल्डर कंपनी अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड एवं छत्तीसगढ़ राज्य इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन के मध्य लीज डीड के निष्पादन के चलते बिल्डर कंपनी को 99 वर्षीय पट्टे पर भूमि प्रदान की गई थी, इस भूमि पर बिल्डर कंपनी द्वारा विभिन्न लोगों को आवासीय उद्देश्य से उप पट्टे पर मकान बना कर अस्थाई कब्जा प्रदान किया जाना था। इस आम्रपाली वनांचल सिटी प्रोजेक्ट में बालाघाट निवासी परिवादीगण हरजीत कौर उदय और उदय प्रकाश सिंह ने फ्लैट नंबर डी-291 बुक करवाया, जिसकी कीमत 4141800 रुपये थी। परिवादियों ने फ्लैट की बुकिंग राशि 107000 रुपये भुगतान किया और उसके बाद लगातार निर्माण कार्य के संबंध में जानकारी लेते रहे परंतु अनावेदक बिल्डर द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ ही नहीं किया गया जबकि 2 वर्ष के भीतर यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। परिवादियों ने फ्लैट हेतु बैंक से ऋण भी स्वीकृत कराया था, जिसे निरस्त करवाना पड़ा।
फोरम द्वारा बिल्डर के दिल्ली स्थित मुख्य कार्यालय एवं भिलाई स्थित शाखा कार्यालय में नोटिस भेजी गई। नोटिस मिलने के बाद भी अनावेदक बिल्डर कंपनी प्रकरण में उपस्थित नहीं हुई और ना ही उसके द्वारा जवाब पेश किया गया।

फोरम का फैसला
प्रकरण में विचारण के पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये द्वारा यह आदेश पारित किया गया कि फ्लैट के संबंध में परिवादियों और अनावेदक बिल्डर कंपनी के बीच अनुबंध निष्पादित हुआ था, अनुबंध निष्पादित होने के बाद ना तो फ्लैट का निर्माण प्रारंभ किया गया और ना ही परिवादियों को उनकी रकम लौटाई गई, यह कृत्य स्पष्ट रूप से व्यवसायिक दुराचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आने वाला कृत्य है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने अनावेदक बिल्डर कम्पनी पर 118000 रुपये हर्जाना लगाया, जिसके अंतर्गत जमा राशि 107000 रुपये और उस ब्याज, मानसिक कष्ट की क्षतिपूर्ति 10000 रुपये एवं वाद व्यय के लिए 1000 रुपये अनावेदक बिल्डर द्वारा परिवादियों को अदा किया जाएगा।

 

01-01-2020
स्टार मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पर उपभोक्ता फोरम ने लगाया 4.41 लाख रुपए हर्जाना

दुर्ग। दो अलग-अलग मामलों में उपभोक्ता के साथ व्यवसायिक कदाचरण और सेवा में निम्नतापूर्ण आचरण के लिए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल और सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने सहारा ग्रुप की संस्था स्टार मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के हैदराबाद मुख्य कार्यालय और पद्मनाभपुर दुर्ग स्थित शाखा कार्यालय के खिलाफ आदेश पारित किया और 4 लाख 41 हजार रुपये हर्जाना लगाया।

क्या है मामला
पुलिस लाइन निवासी जस्मिका कुम्हारे द्वारा अनावेदक संस्थान में कुल राशि रु. 235000 रुपये जमा किया गया था, जिसकी शर्तों के अनुसार 30 माह के पश्चात परिवादी को प्रत्येक 1 लाख रुपये पर 43240 की लाभ पात्रता के साथ निवेशित राशि प्राप्त होनी थी और परिवादी को क्यू सेंटर एवं क्यू जॉय योजना के 1400 से 1600 रुपये प्रति माह के अतिरिक्त कूपन प्राप्त करने की भी पात्रता थी, लेकिन निवेशित राशि पर क्यू सेंटर व क्यू जॉय योजना में कितनी मात्रा में निवेश किया गया इसकी कोई जानकारी कई बार मौखिक रूप से मांगे जाने पर भी नहीं दी गई इस प्रकार परिवादी के साथ सेवा में कमी एवं व्यवसायिक कदाचरण किया गया। एक दूसरे मामले में इसी प्रकार शिक्षक नगर दुर्ग निवासी सुनील कुमार शर्मा ने भी अनावेदक संस्थान में 32000 रुपये जमा किये थे। दोनों मामलों में अनावेदकगण फोरम के समक्ष उपस्थित हुए परंतु उनकी ओर से लिखित जवाब विलंब से प्रस्तुत किया गया,जिसके कारण उन पर हर्जाना लगाया गया। हर्जाना राशि अदा नहीं करने पर उनका लिखित जवाब फोरम द्वारा स्वीकार नहीं किया गया।

फोरम का फैसला
प्रकरण में पेश दस्तावेजों के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल और सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने यह प्रमाणित पाया कि अनावेदकगण ने परिवादिनी जस्मिका कुम्हारे और सुनील शर्मा के प्रति व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आने वाला कृत्य किया है। दोनों मामलों में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल और सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने सहारा ग्रुप की संस्था स्टार मल्टीपरपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड पर 441951 रुपये हर्जाना लगाया। जिसके तहत अनावेदक संस्थान द्वारा परिवादिनी जस्मिका कुम्हारे को परिपक्वता राशि 336614 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 47500 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये देना होगा एवं परिवादी सुनील कुमार शर्मा को परिपक्वता राशि 45837 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति स्वरूप 10000 रुपये तथा वाद व्यय 1000 रुपये भुगतान करना होगा।

 

26-12-2019
उपभोक्ता फोरम ने रेलवे पर लगाया हर्जाना, जानिए क्यों...

दुर्ग। एसी 2 के आरक्षित कोच के टॉयलेट में पानी की सुविधा प्रदान नहीं किए जाने को सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने डीआरएम रायपुर पर 6000 रुपये हर्जाना लगाया।

परिवादी की शिकायत
सुभाष नगर दुर्ग निवासी जसवंत सिंह ने सुरेमनपुर से दुर्ग वापसी के लिए अपना एवं अपनी पत्नी का रिजर्वेशन ट्रेन क्रमांक 15159 की एसी 2 श्रेणी में कोच संख्या एचए1 में कराया, कोच में परिवादी को सीट क्रमांक 7 और 8 आवंटित की गई। परिवादी ने सही ढंग से सुविधा पाने, असुविधा से बचने व यात्रा को सुगम बनाने के लिए अतिरिक्त चार्ज भुगतान करते हुए वातानुकूलित श्रेणी में यात्रा के लिए रिजर्वेशन करवाया था। यात्रा प्रारंभ करने के बाद परिवादी ने ट्रेन के टॉयलेट में पानी होना सोचकर टॉयलेट का उपयोग किया परंतु उसमें पानी नहीं आ रहा था, जिसके कारण परिवादी को असुविधा का सामना करना पड़ा, इसकी शिकायत परिवादी द्वारा अडियार स्टेशन तथा बलिया स्टेशन में की गई जिस पर कोच अटेंडेंट एवं टीटीई ने समस्या हल करने का आश्वासन देते हुए दूसरे कोच का टॉयलेट यूज करने को कहा। परिवादी द्वारा इलाहाबाद स्टेशन में भी शिकायत की परंतु कोई समाधान नहीं हुआ इसके अलावा परिवादी ने मोबाइल पर एसएमएस से भी शिकायत की जिसके जवाब में रेलवे द्वारा एक अन्य नंबर दिया गया। ट्रेन के टॉयलेट में पानी की सप्लाई नहीं होने के कारण परिवादी को 30 घंटे की कष्टप्रद यात्रा करनी पड़ी। अनावेदक रेलवे के अधीनस्थ कर्मचारियों को बार-बार समस्या से अवगत कराने के बाद भी परिवादी की समस्या का निराकरण नहीं किया गया।

रेलवे का जवाब
ट्रेन रवानगी के पूर्व पानी आदि की जांच की जाती है तथा टॉयलेट व बेसिन में पानी सप्लाई की कोई समस्या या शिकायत नहीं थी। परिवादी ने उक्त ट्रेन के कोच में पानी ना होने की शिकायत कर लालचपूर्ण आशय से रेल प्रशासन से क्षतिपूर्ति प्राप्त करने केलिए झूठा परिवाद पेश किया है। परिवादी के अलावा किसी अन्य व्यक्ति ने कोई शिकायत नहीं की है।

फोरम का फैसला
प्रकरण में विचारण पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने यह प्रमाणित पाया कि परिवादी ने कोच में पानी नहीं होने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। अनावेदक ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिस बोगी में परिवादी यात्रा कर रहा था उसमें बिलासपुर से पहले पानी उपलब्ध था। फोरम ने यह भी कहा कि किसी अन्य व्यक्ति के शिकायत न करने से अनावेदक अपने दायित्व से नहीं बच सकता है। चाहे सामान्य बोगी हो, आरक्षित बोगी हो या वातानुकूलित बोगी हो सभी बोगियों में यात्रा के दौरान वॉशरूम में पानी एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अनावेदक रेलवे की है और यदि वह सुविधाओं को उपलब्ध नहीं करा पाता है, जिसके कारण यात्रियों को यात्रा के दौरान असुविधा का सामना करना पड़े, तो ऐसी असुविधा के लिए अनावेदक जिम्मेदार है।

जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल व सदस्य राजेन्द्र पाध्ये ने रेलवे डीआरएम रायपुर को सेवा में निम्नता का जिम्मेदार मानते हुए  6000 रुपये हर्जाना लगाया जिसके तहत मानसिक पीड़ा की क्षतिपूर्ति स्वरूप 5000 रुपये तथा वाद व्यय के लिये 1000 रुपये रेलवे द्वारा परिवादी को भुगतान करना होगा।

19-12-2019
स्पीड पोस्ट का आर्टिकल गुमाने पर डाक विभाग के अधिकारियों पर लगा हर्जाना

दुर्ग। पोस्ट ऑफिस से बुक कराए गए स्पीड पोस्ट आर्टिकल के परिवहन के दौरान गुम हो जाने को उपभोक्ता के प्रति सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल,सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने मुख्य डाकपाल राजनांदगांव, स्पीड पोस्ट प्रभारी रायपुर एवं प्रवर अधीक्षक डाक विभाग सिविक सेंटर भिलाई के खिलाफ आदेश पारित किया,जिसके तहत विभाग के उक्त अधिकारियों पर 3,152 रुपये हर्जाना लगाया गया है।  

क्या है मामला

भारतीय डाक विभाग के अधिकारियों के खिलाफ राजनांदगांव निवासी लूणकरण सिंघवी द्वारा जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया गया था। इसके अनुसार परिवादी लूणकरण सिंघवी ने मुख्य डाकघर राजनांदगांव के माध्यम से दिनांक 31 अगस्त 2017 को मालेगांव महाराष्ट्र स्थित मुथा एंड कंपनी को स्पीड पोस्ट से केसर भेजा था, जो कि अपने गंतव्य स्थल मालेगांव तक नहीं पहुंचा। पता करने पर परिवादी को जानकारी दी गई कि उसके द्वारा भेजा गया आर्टिकल ट्रेस नहीं हो पा रहा है, इसके बाद आर्टिकल गुम होने की सूचना दी गई।

अनावेदक का जवाब
अनावेदक डाक विभाग की ओर से प्रकरण में उपस्थित होकर यह कहा गया कि विभागीय जांच में पता चला कि उक्त पार्सल अपने भेजे गए पते पर प्राप्त नहीं हुआ था और परिवहन के दौरान कहीं गुम हो गया था। कोई भी पार्सल गुम होने पर विभागीय नियमानुसार क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है। अनावेदकगण ने जानबूझकर स्पीड पोस्ट आर्टिकल को नहीं गुमाया है वह परिवहन के दौरान कहीं गुम हुआ है इसलिए किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति देने हेतु डाक विभाग बाध्य नहीं है।

फोरम का फैसला

प्रकरण पर विचारण पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने पाया कि अनावेदकगण शुल्क लेकर डाक सेवा प्रदान करने वाली संस्था है जब कोई भी व्यक्ति डाक विभाग द्वारा अपनी डाक भिजवाता है तो इस विश्वास के साथ भिजवाता है कि समय पर गंतव्य स्थान पर डाक पहुंचेगा और इसीलिए यह विभाग बना भी है यदि डाक गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंचती है तो यह स्पष्ट रूप से सेवा में निम्नता है। परिवादी द्वारा स्पीड पोस्ट आर्टिकल बुक करवाया जाना तो प्रमाणित हुआ परंतु प्रकरण में परिवादी यह प्रमाणित नहीं कर सका कि उसके द्वारा भेजी गई स्पीड पोस्ट आर्टिकल में केसर नामक वस्तु थी, इस कारण जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने उसे डाक गुमने पर नियमानुसार दी जाने वाली क्षति राशि 142 रुपये पाने का हकदार माना साथ ही उसके द्वारा प्रेषित डाक के गुम होने से पहुंची मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरुप 2000 रुपये एवं वाद व्यय के लिए 1000 रुपये सहित कुल 3142 रुपये हर्जाना अनावेदकगण पर लगाया।

16-12-2019
स्पीड पोस्ट का आर्टिकल गुमाने पर डाक विभाग के अधिकारियों पर लगा हर्जाना

दुर्ग। पोस्ट ऑफिस से बुक कराए गए स्पीड पोस्ट आर्टिकल के परिवहन के दौरान गुम हो जाने को उपभोक्ता के प्रति सेवा में निम्नता मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने मुख्य डाकपाल राजनांदगांव, स्पीड पोस्ट प्रभारी रायपुर एवं प्रवर अधीक्षक डाक विभाग सिविक सेंटर भिलाई के खिलाफ आदेश पारित किया, जिसके तहत विभाग के उक्त अधिकारियों पर 3,152 रुपये हर्जाना लगाया गया है।  

क्या है मामला
भारतीय डाक विभाग के अधिकारियों के खिलाफ राजनांदगांव निवासी लूणकरण सिंघवी द्वारा जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया गया था। इसके अनुसार परिवादी लूणकरण सिंघवी ने मुख्य डाकघर राजनांदगांव के माध्यम से दिनांक 31 अगस्त 2017 को मालेगांव महाराष्ट्र स्थित मुथा एंड कंपनी को स्पीड पोस्ट से केसर भेजा था,जो कि अपने गंतव्य स्थल मालेगांव तक नहीं पहुंचा। पता करने पर परिवादी को जानकारी दी गई कि उसके द्वारा भेजा गया आर्टिकल ट्रेस नहीं हो पा रहा है, इसके बाद आर्टिकल गुम होने की सूचना दी गई।

अनावेदक का जवाब
अनावेदक डाक विभाग की ओर से प्रकरण में उपस्थित होकर यह कहा गया कि विभागीय जांच में पता चला कि उक्त पार्सल अपने भेजे गए पते पर प्राप्त नहीं हुआ था और परिवहन के दौरान कहीं गुम हो गया था। कोई भी पार्सल गुम होने पर विभागीय नियमानुसार क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है। अनावेदकगण ने जानबूझकर स्पीड पोस्ट आर्टिकल को नहीं गुमाया है वह परिवहन के दौरान कहीं गुम हुआ है इसलिए किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति देने हेतु डाक विभाग बाध्य नहीं है।

फोरम का फैसला
प्रकरण पर विचारण पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने पाया कि अनावेदकगण शुल्क लेकर डाक सेवा प्रदान करने वाली संस्था है जब कोई भी व्यक्ति डाक विभाग द्वारा अपनी डाक भिजवाता है तो इस विश्वास के साथ भिजवाता है कि समय पर गंतव्य स्थान पर डाक पहुंचेगा और इसीलिए यह विभाग बना भी है यदि डाक गंतव्य स्थान पर नहीं पहुंचती है तो यह स्पष्ट रूप से सेवा में निम्नता है। परिवादी द्वारा स्पीड पोस्ट आर्टिकल बुक करवाया जाना तो प्रमाणित हुआ परंतु प्रकरण में परिवादी यह प्रमाणित नहीं कर सका कि उसके द्वारा भेजी गई स्पीड पोस्ट आर्टिकल में केसर नामक वस्तु थी, इस कारण जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने उसे डाक गुमने पर नियमानुसार दी जाने वाली क्षति राशि 142 रुपये पाने का हकदार माना साथ ही उसके द्वारा प्रेषित डाक के गुम होने से पहुंची मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरुप 2000 रुपये एवं वाद व्यय के लिए 1000 रुपये सहित कुल 3142 रुपये हर्जाना अनावेदकगण पर लगाया।

 

13-12-2019
हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए जमा योजना चलाने वाली महिला डॉक्टर पर हर्जाना

दुर्ग। राधिका नगर भिलाई के श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए रकम निवेश करवाने के बाद तय समय में परिपक्वता राशि वापस नहीं किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने हॉस्पिटल की प्रोप्राइटर डॉ. नीता सोनी के खिलाफ आदेश पारित किया है,जिसके तहत डॉ. नीता सोनी पर 1 लाख 83 हजार रुपये हर्जाना लगाया गया है।  

क्या है मामला
श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में बोरसी दुर्ग निवासी प्रवीण कुमार साहू ने परिवाद दायर किया था। इसके अनुसार अनावेदक महिला डॉ  नीता सोनी ने अपने हॉस्पिटल प्रोजेक्ट के लिए परिवादी से 1 लाख 50 हजार रुपये का निवेश करवाकर दिनांक 7 फरवरी 2014 को डिपाजिट सर्टिफिकेट जारी किया था। जमा योजना की शर्त अनुसार 2 प्रतिशत ब्याज 36 माह दिए जाने का प्रमाण पत्र हॉस्पिटल प्रोपराइटर द्वारा प्रदान किया गया था, जिसकी अवधि 06 फरवरी 2017 तक थी। लेकिन परिपक्वता पश्चात मूल रकम लौटाने के लिए टालमटोल किया जाता रहा। मूल रकम व बकाया ब्याज की रकम के लिए परिवादी ने  महिला डॉक्टर को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भी भिजवाया लेकिन इसके बाद भी अनावेदक ने रकम नहीं लौटाई, तब परिवादी ने जिला उपभोक्ता फोरम दुर्ग के समक्ष शिकायत पेश की।
 

अनावेदक का जवाब
फोरम के समक्ष अनावेदक महिला डॉक्टर की ओर से जवाब दिया गया कि परिवादी उसके हॉस्पिटल में रकम प्राप्त करने हेतु नहीं आया जबकि नियम के अनुसार हॉस्पिटल में आकर आवेदन प्रस्तुत करना था और सुरक्षा के रूप में दिए गए चेक एवं प्रमाण पत्र को मूलतः वापस करना था।
फोरम का फैसला
प्रकरण पर विचारण पश्चात जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने  नियत अवधि के बाद निवेश की गई रकम वापस नहीं करने को ग्राहक के प्रति सेवा में कमी तथा व्यवसायिक दुराचरण की श्रेणी में आने वाला कृत्य मानते हुए श्रीहरि देवांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रोप्राइटर डॉ.नीता सोनी पर 1 लाख 83 हजार रुपये हर्जाना लगाया, जिसके तहत एक माह के भीतर निवेश की गई रकम 1 लाख 50 हजार रुपये, बकाया ब्याज राशि 12 हजार रुपये, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति के रुप में 20 हजार रुपये व वाद व्यय की राशि 1 हजार रुपये तथा जमा रकम पर परिवाद प्रस्तुति दिनांक से 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।

12-12-2019
शादी का एलबम बनाकर नहीं देने पर फोटोग्राफर दुकान संचालक पर लगा हर्जाना

दुर्ग। शादी में फोटोग्राफी की पूरी रकम लेने के बाद भी फोटो एलबम बना कर नहीं देने को व्यावसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता का कृत्य मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये और लता चंद्राकर ने अलका डिजिटल वीडियो शूटिंग एवं फोटोग्राफी के संचालक गोपाल निर्मलकर पर 16 हजार रुपये हर्जाना लगाते हुए आदेश पारित किया।
क्या है मामला
गया नगर दुर्ग निवासी ललित शर्मा ने अपनी पुत्री के विवाह कार्यक्रम की वीडियो शूटिंग और फोटोग्राफी के लिए केलाबाड़ी दुर्ग स्थित अलका डिजिटल वीडियो शूटिंग एवं फोटोग्राफी के संचालक गोपाल निर्मलकर से संपर्क कर 22000 रुपये में सौदा किया और बतौर एडवांस नगद 2000 रुपये तथा चेक द्वारा 15000 रुपये प्रदान किए, इसके बाद 1 दिसंबर 2016 को विवाह कार्यक्रम में अनावेदक द्वारा वीडियो शूटिंग एवं फोटोग्राफी की गई। अनावेदक ने दिनांक 2 दिसंबर 2016 को सगाई का एलबम एवं दो नग फोटो फ्रेमिंग करके परिवादी को दिया और ये आश्वासन देकर बकाया 5000 रुपये का भुगतान भी प्राप्त कर लिया कि 400 फोटो रंगीन सेट वाला शादी का एलबम बाद में लाकर देगा परंतु परिवादी को एलबम तैयार कर प्रदान नहीं किया और लगातार टालमटोल करने लगा। जिला फोरम द्वारा अनावेदक को नोटिस भेजी गई परंतु नोटिस मिलने के बाद भी अनावेदक दुकान संचालक प्रकरण में अनुपस्थित रहा एवं उसने कोई जवाब भी नहीं दिया।
फोरम का फैसला
प्रकरण में अनावेदक की अनुपस्थिति एवं परिवादी द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाणित पाया गया कि परिवादी एवं अनावेदक के बीच विवाह कार्यक्रम में वीडियो शूटिंग एवं फोटोग्राफी के लिए सौदा हुआ था। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने यह माना कि सेवायें देने के नाम पर पूरी राशि प्राप्त कर लेना परंतु दिए गए आश्वासन के अनुसार सेवायें प्रदान नहीं करना उपभोक्ता के प्रति व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आता है। अनावेदक ने संपूर्ण राशि प्राप्त करने के बाद भी परिवादी को शादी का एलबम तैयार कर प्रदान नहीं किया है, यह स्पष्ट रूप से व्यवसायिक कदाचरण एवं सेवा में निम्नता की श्रेणी में आने वाला गंभीर कृत्य है। पुत्री के विवाह जैसे जीवन के अनमोल प्रसंग को यादगार बनाने के उद्देश्य से ही अनावेदक जैसे सेवाप्रदाता की सेवाएं ली जाती है ताकि परंतु अनावेदक जैसे सेवाप्रदाता की लापरवाही से परिवादी और उसके परिवारजन अपनी पुत्री के विवाह जैसे अनमोल प्रसंग को जीवंत रखने से वंचित रह गये। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लवकेश प्रताप सिंह बघेल, सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने अनावेदक पर 16 हजार रुपये हर्जाना लगाया,जिसमें विवाह का एलबम नहीं देने के एवज में 10000 रुपये, मानसिक वेदना की क्षतिपूर्ति स्वरूप 5000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 1000 रुपये अदा करने का आदेश दिया, साथ ही 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा।

 

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