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03-12-2019
नान घोटाले की जांच रोकने चार्टर्ड प्लेन से लाये गए थे नामी-गिरामी वकील : भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज कोरबा दौरे पर हैं। उन्होंने कोरबा रवाना होने से पहले पुलिस लाइन स्थित हेलीपैड में मीडिया से चर्चा की। चर्चा के दौरान अंतागढ़ टेप कांड मामले में वाइस सैंपल को लेकर सीएम ने कहा कि देखो ये लोग कितना भी रोके, कल ही विधानसभा में प्रश्न लगाए थे कि वकील बाहर से क्यों लाए ? जबकि भाजपा के कार्यकाल में सारे वकील लगाए गए थे और नान घोटाला की जांच मत हो इसलिए देश के नामी गिरामी वकीलों को चार्टर्ड प्लेन से लाया गया था। इसके लिए पैसा कहां से आया था ? इसका जवाब उनको देना चाहिए। सीएम बघेल ने कहा कि इसलिये वकीलों को लगाया गया था कि इस मामले का जांच नहीं होना चाहिए।  उन्होंने कहा कि मैंने तो आज तक नहीं देखा कि पीआईएल जांच नहीं होने के लिए लगाया गया हो, अभी तक पीआईएल इसलिए लगता है कि जांच हो। ये शायद  प्रदेश ही नहीं देश में भी पहली बार हुआ होगा। राष्ट्रीय पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक विधायक दल के नेता चाहते थे कि जांच नहीं होनी चाहिए, और कहते हैं कि वकील क्यो लगाया गया।

सीएम बघेल ने कहा कि रमन सिंह को बताना चाहिए कि सीएम सर कौन है और सीएम मैडम कौन है कि पैसा कहां गया। इनके वकील कौन है जो गिरीश शर्मा, जिनके पास सबसे ज्यादा पैसा पकड़ा गया उनको वकील बना कर लाया गया।सीएम बघेल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव समिति की दो दिन तक लगातार बैठक है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया आ रहे हैं।  बहुत सारे जगह से सिंगल नाम आए हैं, बहुत जल्दी लिस्ट फाइनल कर दी जाएगी। जहां से दो से तीन नाम आए हैं उसमें वरिष्ठ लोगों से रायशुमारी करके बहुत जल्दी आपके सामने लिस्ट होगी।  प्रदेश में हो रहे गैंगरेप हत्या मामले में सीएम ने कहा कि पुलिस तत्परता से काम कर रही है, ये सभी मामले बहत दु:खद है।  पूरा विश्वास है कि पुलिस गुनाहगारों को जल्द ही ढंूढ निकालेगी।  सीएम बघेल ने कहा कि तमिलनाडु के किसान मिलने पहुंचे थे।  छत्तीसगढ़ में किसानों से 25 सौ रुपए क्विंटल में धान खरीदी सुन कर कलेक्ट्रेट में मिठाई बांटी थी।  निश्चित रूप से पूरे देश के किसान खुश हैं कि छत्तीसगढ़ में किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल रहा है। वे लोग धान खरीदी केन्द्र भी गए थे और गोठान भी देखने जा रहे हैं। 

07-11-2019
पुलिस ने की ताबड़तोड़ कार्यवाही, नशेड़ी समेत लाखों का जुआ पकड़ाया

कोरबा। बीती रात पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से नशे में मदहोश, संदिग्ध गतिविधियों के साथ ही जुआ जैसी सामाजिक बुराई को अंजाम देने वालों में हड़कंप मच गया। पुलिस की संयुक्त टीम ने पहले तो हेलीपैड में दबिश दी जंहा कार में दो लोग बोमफिक्स का नशा कर रहे थे, उन्हें तत्काल हिरासत में लिया गया। महाराणा प्रताप नगर दुर्गा व दशहरा मैदान में दो नाबालिग लड़का व लड़की पकड़े गए, जबकि बालको थाना क्षेत्र में लाखो के जुए की फड़ पर पुलिस ने छापा मारा। बालको इलाके के फुटहामुड़ा जंगल में जुआ खेल रहे 5 बालको कर्मी सहित 11 लोग पकड़े गए। जुआ फड़ से पुलिस ने 1 लाख 41 हजार की रकम जब्त की है और जुआ एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। तीनो ही मामलों में पकड़े गए लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है। उक्त कार्रवाई मे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन पर डीएसपी रामगोपाल करियारे के मार्ग दर्शन मे थाना प्रभारी बाल्को लखन पटेल के नेतृत्व मे सब इंस्पेक्टर धारी सहित पूरे थाना स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

11-09-2019
स्कूटी पर सवार मंत्री सिंहदेव की सरलता व सादगी ने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में भर दिया जोश

मुंगेली। स्वास्थ्य एवं पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव की सरलता किसी से छिपी नहीं है। टीएस बाबा सिर्फ प्रदेश में हैं नहीं, बल्कि पूरे देश में अपने सहज, सरल व सौम्य स्वभाव से जाने जाते हैं। यही वजह है कि लोगों में उनकी लोकप्रियता भी कुछ जुदा किस्म का है। टीएस बाबा का सरल और दिलचस्प अंदाज मुंगेली में आज उस वक्त देखने को मिला, जब वे स्कूटी पर सवार होकर हेलीपैड से कलेक्ट्रेट पहुंचे। फिर क्या था, बाबा साहब के पीछे-पीछे अधिकारी और कांग्रेसी नेता भी बाइक पर सवार होकर चलने लगे। बता दें कि मंत्री टीएस सिंहदेव मुंगेली जिले के प्रभारी मंत्री हैं। प्रभारी मंत्री होने के नाते आज वे डीएमएफ को लेकर अधिकारियों की बैठक लेने हेलीकॉप्टर से मुंगेली पहुंचे थे। हेलीपैड पर प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में कांग्रेसियों की भीड़ प्रभारी मंत्री टीएस सिंहदेव का स्वागत करने पहुंची थी। स्वागत के बाद बाबा कलेक्ट्रेट जाने के लिए लक्जरी कार की बजाय एक स्थानीय कांग्रेसी नेता की स्कूटी पर सवार होकर करीब एक किलोमीटर का सफर तय कर मीटिंग लेने कलेक्ट्रेट पहुंचे। इसके बाद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जोश और दोगुना हो गया। इधर मंत्रीजी को बाइक पर सवार होते देख अधिकतर अधिकारी व कांग्रेसी कार्यकर्ता भी बाइक पर सवार होकर चलने लगे।

 

  सुशील शुक्ला की रिपोर्ट 

25-04-2019
मायावती के हेलीपैड पर घुसे सांड ने सफाईकर्मी और पुलिसकर्मी को किया घायल

कन्नौज। कन्नौज में राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लिए बनाए गए हेलीपेड पर उस वक्त भगदड़ मच गई जब वहां एक सांड घुस गया। यहां अखिलेश यादव और मायावती की रैली होने वाली थी।  कुछ देर के लिए रैली स्थल पर अशांति फैल गई। पुलिस जवानों ने सांड को भगाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि सांड को भगाने में एक सफाई कर्मचारी और एक पुलिसकर्मी घायल हो गए। बता दें कि कन्नौज में गठबंधन प्रत्याशी डिंपल यादव के प्रचार के लिए रैली का आयोजन किया गया था। बसपा सुप्रीमो मायावती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक साथ जनसभा को संबोधित करने वाले थे। इसके लिए जनसभा स्थल पर हेलीपैड बनाया गया था। दोनों नेताओं के आने से पहले ही वहां एक सांड घुस गया। भीड़ में सांड के घुसने से रैली स्थल पर भगदड़ मच गई। पुलिस जवानों ने काफी मशक्कत के बाद सांड को काबू में किया। इस बीच अपने भाषण में अखिलेश यादव ने कहा कि भीषण गर्मी में के बाद भी जनता की यह भीड़ बता रही है कि कन्नौज से बड़ा परिणाम आएगा। अखिलेश ने कहा कि मैं और डिंपल यहां आने से पहले मां अन्नपूर्णा मंदिर गए थे। मालूम हो कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रैली में हेलीपैड पर सांड घुस गया था।

 

13-10-2018
BSP: हाथी और हल की सियासी साझेदारी, विरोधियों पर पड़ेगी कितनी भारी 

रायपुर। बसपा सुप्रीमो मायावती बस कुछ ही देर में  बिलासपुर एस सीसी एल के हेलीपैड पर लैंड करने वाली हैं। उनके साथ अशोक सिद्धार्थ, ओपी वाजपेयी, प्रदीप कुमार भी हैं। राजनीतिक गलियारों के जानकारों की अगर मानें तो आज की सभा में 5 लाख लोगों की भीड़ जुटाई गई है। बसपा और जकांछ जे दोनों के सुप्रीमो खुद को आदिवासी समाज का खैरख्वाह मानते हैं। ऐसे में मायावती जहां अपनी वोटकटवा की छवि को बदलने की कोशिश करेंगी। तो वहीं जकांछ जे के अधिस्थापक अजीत जोगी खुद को बीजेपी की बी टीम होने के दावों को झुठलाएंगे। दोनों का गठजोड़ यहां की  35 और 55 सीटों का है। ये गठजोड़ भाजपा और कांग्रेस का सियासी समीकरण बिगाड़ने की जीतोड़ कोशिश करेगा। तो आइए नजर डालते हैं कुछ बनते-बिगड़ते सियासी समीकरणों पर....!

दरअसल मायावती और जोगी के बीच हुए गठबंधन में 35 सीटें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खाते में आई हैं और 55 सीटों पर जनता कांग्रेस को मिली है।

दलित-आदिवासी गठजोड़ :

जातिगत समीकरण के लिहाज से देखा जाए तो जोगी के पास जहां आदिवासी वोट की ताकत है, वहीं बसपा के पास दलित मतदाताओं का खासा समर्थन है।  ऐसे में ये कांग्रेस को बसपा से अलग चुनाव लड़ने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, इस बात की भी प्रबल आशंकाएं हैं।  सियासी गलियारों में चर्चा ये भी है कि कांग्रेस को इस गठजोड़ से एक-डेढ़ दर्जन सीटों पर नुकसान पहुंचने की आशंका है।

छत्तीसगढ़ से ही कांशीराम ने की थी राजनीति की शुरुआत :

बीएसपी संस्थापक कांशीराम ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत छत्तीसगढ़ से ही की थी।  1984 के आम चुनाव में कांशीराम ने जांजगीर लोकसभा सीट पर एक निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था।  इस चुनाव में उन्हें सिर्फ 8। 81 फीसदी वोट मिले था और उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी थी।  जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रभात कुमार मिश्रा ने 58। 61 फीसदी वोट पाते हुए जीत हासिल की थी।

क्या कहता है सियासी  समीकरण:

1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ ने नए राज्य के रूप में जन्म लिया।  2003 में हुए पहले राज्य विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने 54 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें उसे सिर्फ 2 सीटों पर ही जीत हासिल हुई और महज 4. 45 फीसदी वोट मिले।  सिर्फ 54 सीटों की बात करें तो यहां बीएसपी को 6.11 फीसदी वोट प्राप्त हुए।

2013 में सभी सीटों पर लड़ी बीएसपी :

2013 के चुनाव में बीएसपी ने सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन इस चुनाव में उसका वोट प्रतिशत और भी कम हो गया।  बीएसपी को महज 4.27 फीसदी मत मिले और उसके टिकट पर एक ही विधायक निर्वाचित हो पाया।

अब इसको यूं  समझें:

दरअसल मायावती और अजीत जोगी दोनों ही खुद के अनुसूचित जातियों के मसीहा होने का दावा करते हैं।  इस बार दोनों ने हाथ मिलाया है।  छत्तीसगढ़ की जनसंख्या के आधार पर देखा जाए तो यहां 10 सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं।  इन 10 सीटों में से 9 पर मौजूदा समय में कमल खिला हुआ है।  बची हुई एक सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार जीता था। जानकारों का मानना है कि नया गठबंधन कोई फायदा कर सकता है तो वह बीजेपी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाकर ही संभव है

क्या कहता है जातिगत समीकरण :

छत्तीसगढ़ में 31. 8 फीसदी मतदाता आदिवासी समुदाय से हैं और 11. 6 फीसदी वोटर दलित हैं।  दोनों समुदाय के मिलकर करीब 43. 4 फीसदी वोट होते हैं, जो किसी भी पार्टी को सत्ता में पहुंचाने के लिए काफी अहम हैं।  इसी के मद्देनजर बसपा और अजीत जोगी ने आपस में गठबंधन किया है।  एक दिलचस्प आंकड़ा ये भी है कि कांग्रेस पिछले तीन चुनाव में महज एक से डेढ़ प्रतिशत वोटों के अंतर से ही सत्ता गंवाती रही है।

आरक्षित सीटों का समीकरण :

दरअसल, 2003 के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने एससी की 4-4 सीटें जीती थीं।  जबकि बीएसपी ने एससी के लिए आरक्षित 2 सीटों पर कब्जा किया था।  इसी तरह 2008 के चुनावों में बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस ने 4 सीटें जीती थीं।  इस चुनाव में बीएसपी को केवल एक ही विधायक एससी सीट से जीता था।

2003 के चुनाव में पूर्व नेता विद्या चरण शुक्ला ने चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के खिलाफ बगावत करते हुए एनसीपी ज्वॉइन कर ली थी।  उन्होंने 7. 09 फीसदी वोट हासिल किए थे, क्योंकि शुक्ला की वजह से कांग्रेस ये चुनाव हार गई और पिछले 15 सालों से विपक्ष में बैठ रही है।

कांग्रेस भाजपा दोनों के लिए बढ़ा खतरा:

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अजीत जोगी को छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि उनके पास पर्याप्त सपोर्ट भी नहीं था।  यही वजह थी कि शुक्ला ने बगावत कर दी थी।  इसके बाद हुए 3 चुनावों में बीजेपी के हाथों कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा।

राज्य के कांग्रेस नेतृत्व ने लगातार हुई हार के लिए जोगी के तीन साल की सरकार को जिम्मेदार ठहराया।  अब एक बार फिर उनका मायावती से हाथ मिलाना, कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बन सकता है।  गठबंधन समझौते के मुताबिक 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए बसपा 35 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि जेसीसीजे 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।  अजित जोगी को गठबंधन में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया है।

06-10-2018
Helipad: राज्य में नाइट लैंडिंग के लिए तैयार हैं 30 हेलीपैड
कभी कारों की हेड लाइट की रौशनी में कराना पड़ा था चौपर को टेकआॅफ
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