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09-11-2020
गोधन न्याय योजना: सूरज को गोबर बेचकर करीब 47 हजार रूपयें का मिला अतिरिक्त लाभ

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना ग्रामीणों, किसानों, गौपालकों के साथ-साथ गौठानों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आमदनी में इजाफे का सबब बन गई है। इस योजना के तहत गौठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीणों एवं पशुपालकों, चरवाहों को हर पखवाड़े  अच्छी खासी आमदनी हो रही है, जिसके चलते उनकी दैनिक जीवन की जरूरतें सहजता से पूरी होने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस बहुआयामी एवं लाभकारी योजना ने देश-दुनिया को आकर्षित किया है। गोधन न्याय योजना से हो रही अतिरिक्त आय से पशुपालक व किसानों के चेहरे पर खुशी का माहौल है। गोबर से हो रही अतिरिक्त आमदनी से किसानों में समृद्धि आयी है। आर्थिक समृद्धि से खेती-बाड़ी के विस्तार के  हौसलें बढ़े है। वे अपने सुख सुविधाओं और अपने खेती-बाड़ी को विस्तार करने मे रूची ले रहें हैं। गाय, भैंस पालने वाले पशुपालकों को पहले केवल दूध व खाद से ही आमदनी होती थी। अब हर पंद्रह दिनों में गोबर बेचने का पैसा भी मिल रहा हैं। राज्य सरकार ने गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदना प्रारंभ किया है। इसी कड़ी में नवागढ़ विकासखंड के ग्राम पचेड़ा के युवा कृषक सूरज कश्यप ने बताया कि उसे गोधन न्याय योजना से अतिरिक्त लाभ होने लगा है। इससे वे धान की खेती के साथ-साथ सब्जी भाजी उत्पादन के लिए भी तैयारी कर रहें है।

गोधन न्याय योजना से उसे अब तक करीब 47 हजार रूपयें की आमदनी हुई है। इससे वे अपने खेतों में सिचाई सुविधा के लिए बोर खुदवाने की तैयारी कर रहें हैं। वे खेती-बाड़ी की सुरक्षा के लिए 05 एकड़ खेत में तार घेरा का कार्य धान कटाई के बाद शुरू करेंगें। सूरज ने बताया कि पैसों के अभाव के कारण सब्जी-भाजी उत्पादन के लिए बोर व तार घेरा नहीं करवा पा रहे थे। गोधन न्याय योजना से गोबर से नकदी आय होने लगी है। खेती किसानी के विस्तार के लिए हिम्मत बढ़ी है। अपनी इच्छा अनुसार अब अपने खेत पर धान के अलावा सब्जी भाजी मसाला आदि की भी खेती कर सकेंगें। उन्होने गोधन न्याय योजना की तारीफ करते हुए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया हैं। उल्लेखनीय है कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास से गौठान और गोधन न्याय योजना का राज्य में सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है और इसका लाभ ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों सहित समाज के गरीब तबके के लोगों को मिलने लगा है। वर्मी कम्पोस्ट सहित अन्य सामग्रियों के निर्माण के लिए महिला समूहों को प्रशिक्षित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। सुराजी गांव , गोधन न्याय  और राजीव गांधी किसान न्याय योजना  से किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है इसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।

 

31-10-2020
गौठानों से जुड़ी महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं की आमदनी बढ़ाने का जरिया बन गई है गोधन न्याय योजना

रायपुर। भूपेश भघेल की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना ग्रामीणों, किसानों, गौपालकों के साथ-साथ गौठानों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं की आमदनी में सहारा बन गई है। इस योजना के तहत गौठानों में गोबर बेचने वाले ग्रामीणों व पशुपालकों, चरवाहों को हर पखवाड़े में अच्छी खासी आमदनी हो रही है, जिसके चलते उनकी दैनिक जीवन की जरूरतें सहजता से पूरी होने लगी है। छत्तीसगढ़ सरकार की इस बहुआयामी व लाभकारी योजना ने देश-दुनिया को आकर्षित किया है। छत्तीसगढ़ राज्य में पशुपालन व जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना वर्तमान में ग्रामीणों के बीच सर्वाधिक लोकप्रिय हो गई है। इस योजना का लाभ उठाकर प्रदेश के पशुपालक, चरवाहा और स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्व-रोजगार एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर होने लगे हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में सक्रिय सहभागिता निभाने वाले जिला प्रशासन द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित करने का सिलसिला भी शुरू किया गया है। आज बेमेतरा के कृषि महाविद्यालय ढोलिया में आयोजित ई-मेगा कैम्प में जिला सत्र न्यायाधीश एवं कलेक्टर शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर पशुपालकों और चरवाहों को बधाई और शुभकामनाएं दी तथा योजना की सफलता के लिए सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। इस मौके पर उन्होंने ग्राम रामपुर (भांड) के चरवाहा और पशुपालक रमेश यादव व घनश्याम को योजना से हुए लाभ का प्रमाण पत्र प्रदान किया।
गोधन न्याय योजना के माध्यम से बेमेतरा जिले के गाम रामपुर के चरवाहा रमेश यादव को अब तक कुल 55 हजार रूपए से अधिक की राशि गोबर बेचने के एवज में मिल चुकी है, जिससे उन्होंने नई मोटरसाइकिल क्रय करने के साथ ही अपने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 भैंसें खरीदी हैं। चरवाहा  रमेश यादव दुग्ध व्यवसाय से जुड़े हैं, जिससे उन्हें हर महीने अच्छी खासी आमदनी होने लगी हैं। गोधन न्याय योजना शुरू हो जाने से उन्हें गोबर बेचने से अतिरिक्त लाभ होने लगा है। रामपुर गांव के ही प्रगतिशील कृषक घनश्याम यादव ने 35 भैंसें पाल रखी हैं, दूध बेचकर वह रोजाना अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। गोधन न्याय योजना से अब तक घनश्याम को कुल 26 हजार रूपए से अधिक का लाभ हुआ। इस राशि से वह नई कुट्टी-दाना मशीन खरीदने की योजना बनाए हैं। चरवाहा रमेश व कृषक घनश्याम के पशुपालन व्यवसाय से प्रभावित होकर रामपुर गांव सहित आसपास के ग्रामीण भी पशुपालन व दुग्ध व्यवसाय को अपनाने लगे हैं।

28-07-2020
ट्री गार्ड पेड़ों की सुरक्षा के साथ बन रहे हैं कमाई का जरिया भी

रायपुर। महिला स्व-सहायता समूह अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण सुधारने और पेड़ों की सुरक्षा का नैतिक दायित्व भी निभा रही है। जिले दस से अधिक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की ओर से अपनी मेहनत और लगन से पौधो की सुरक्षा के लिए बांस के आकर्षक व मजबूत ट्री-गार्ड बनाए जा रहे हैं। इन ट्री-गार्डो को समूह द्वारा साढ़े चार सौ रूपए प्रति नग के हिसाब से वन विभाग को बेचा जा रहा है। चालू मानसून मौसम में किए जा रहे वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत लगाए जा रहे पौधों को पशुओं की चराई से बचाने के लिए वन विभाग इन ट्री-गार्डो का उपयोग कर रहा है। जिले स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने अब तक छह हजार दो सौ तीस ट्री-गार्ड बना लिए है और लगभग एक हजार ट्री-गार्ड वन विभाग को उपलब्ध करा दिए है। अभी तक लगभग एक हजार ट्री-गार्डो को वन विभाग को बेचकर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने तीन-चार महीने में ही साढ़े चार लाख रूपए से अधिक का व्यवसाय कर लिया है। महिला समूहों ने कटघोरा विकासखण्ड में साढ़े चार सौ, करतला विकासखण्ड में लगभग पांच हजार, पाली विकासखण्ड में चार सौ अस्सी, कोरबा विकासखण्ड में दौ सौ और पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड में एक सौ ट्री-गार्ड अभी तक बनाए है।


कोरबा जिले में रोशनी महिला स्व-सहायता समूह जेंजरा, जयगुरूदेव स्व-सहायता समूह बतारी, लक्ष्मी स्व-सहायता समूह उड़ता, मड़वारानी स्व-सहायता समूह बक्साही, जयसत्य कबीर समूह बिरदा, काव्य स्व-सहायता समूह देवलापाट, जैसे दस से अधिक समूहो की महिलाएं बांस से ट्री-गार्ड बनाने के काम में लगी है। करतला विकास खण्ड के देवलापाट के काव्या स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष  रूकमणी बाई बताती है कि महिला समूहों को ट्री-गार्ड बनाने के इस काम में अच्छा फायदा हो रहा है। बांस के एक ट्री-गार्ड को बनाने में औसतन ढाई सौ रूपए की लागत आती है। साढ़े चार सौ रूपए में बेचने से लगभग दो सौ रूपए का फायदा हो जाता है। ऐसे में तीन चार महीने बरसात के मौसम में ट्री-गार्ड बनाने के काम से डेढ़-दो लाख रूपए का फायदा समूहों को हो रहा हैै। वन प्रबंधन समितियों द्वारा भी वन विभाग से बांस खरीदकर ट्री-गार्ड बनाए जा रहे है। वन प्रबंधन समितियों द्वारा अभी तक चार हजार दो सौ से अधिक ट्री-गार्ड कटघोरा वनमंडल में उपलब्ध कराए गए है। इसके साथ ही रोपे गए पौधों को बचाए रखने में भी महिलाओं की अप्रत्यक्ष भागीदारी भी सुनिश्चित हो रही है।

काव्या स्व-सहायता समूह की सचिव गीता साहू पूरे काम का हिसाब किताब रखती है। वे बताती है कि एक साथ पांच सौ ट्री-गार्ड कटघोरा वन विभाग को बेचकर अभी तक लगभग एक लाख रूपए का फायदा समूह को हो गया है। आगे भी कोरबा के वन विभाग को भी देने के लिए ट्री-गार्ड बनाने का काम तेजी से किया जा रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य शासन की ओर से वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत इस साल लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाने के निर्देश वन विभाग को दिए गए है। सड़क किनारे, शासकीय परिसरों में होने वाले वृक्षारोपण के पौधों को पशुओं से नुकसान पहुंचाने या चर लेने से बचाने के लिए ट्री-गार्ड लगाना अनिवार्य किया गया है। वन विभाग ने बांस से बने चौकोर आकार के ट्री-गार्ड की कीमत साढ़े चार सौ रूपए प्रति नग तय की है। ट्री-गार्ड बनाने के काम में वन प्रबंधन समितियों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को लगाया गया है। रियायती दरों पर वन विभाग के निस्तार डिपो से बांस पर्याप्त मात्रा में समूह और समितियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

 

25-07-2020
रक्षाबंधन पर भाईयों की कलाईयों पर बंधेगी महिला स्व-सहायता समूह की बनाई आकर्षक राखियां

कांकेर। जिले के अन्तागढ़, दुर्गूकोन्दल, दशपुर, धनेलीकन्हार एवं कोकपुर की महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा राखियां तैयार की जा रही है। बिहान के अंतर्गत कार्यरत 13 महिला स्व-सहायता समूह की 90 महिलाओं द्वारा अब तक 21 हजार 500 नग राखियां बनाई गई है। इसमें से 2180 नग राखी बेचकर 44 हजार 880 रूपये की आमदनी भी प्राप्त की जा चुकी है। वर्तमान में कोरोना के संक्रमण को देखते हुए चीन व बाहर से राखियों की आवक नहीं होने से स्थानीय बाजारों में स्व-सहायता समूह के द्वारा बनायी गयी राखियों की मांग बढ़ी है। महिला स्व-सहायता समूह के द्वारा बनाये गये राखी आकर्षक, सुन्दर व कम दर पर उपलब्ध होने से लोगों को लुभा रही है।जिला पंचायत के सीईओ डॉ संजय कन्नौजे ने ग्राम दशपुर में कोयतूर महिला स्व-सहायता समूह व कोकानपुर में जय भवानी समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियों का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।

उन्होंने जय भवानी महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष नीता से 250 रूपये का राखी खरीदकर उन्हें प्रोत्साहित किया गया। ग्राम दशपुर के कोयतूर महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष सत्रो ठाकुर से बातचीत करने पर बताया कि उनके द्वारा निर्मित राखी को अपने गांव में तथा ग्राम संगठन में बेची जा रही है। इस पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत सीईओ ने बीपीएम कांकेर साहू व डीपीएम तिवारी को महिला समूह द्वारा तैयार की गई राखियों को बिहान गढ़िया बाजार कांकेर में बेचने के लिए सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिये।

22-07-2020
महिला स्व-सहायता समूह ने बेची 15 हजार रूपए की कलात्मक राखियां

रायपुर। रक्षाबंधन पर्व के मौके पर बेमेतरा जिले की बिहान महिला स्व-सहायता समूह द्वारा सुंदर, आकर्षक, रंग-बिरंगी राखियां तैयार की जा रही है। समूह ने अब तक लगभग 15 हजार रूपए की राखी बेच चुकी है। समूह द्वारा निर्मित आकर्षक राखियों की 2 हजार रूपए की बिक्री जिला पंचायत बेमेतरा के अधिकारियों-कर्मचारियों को की है। इसी तरह जिले की महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित राखियों की बिक्री स्थानीय हाट बाजार और शासकीय कार्यालयों में सस्ते दामों पर की जा रही है। जिले में गंगा महिला स्व-सहायता समूह बिलई और जय महालक्ष्मी स्व-सहायता समूह जेवरा एस द्वारा भी राखी बनाने का कार्य किया जा रहा है।

 

 

13-07-2020
गोधन न्याय योजना में कलेक्टरों की भूमिका होगी अत्यंत महत्वपूर्ण, गांवों में गोबर खरीदेगी गौठान समितियां

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन में कलेक्टरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। मुख्यमंत्री ने सोमवार को अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन के लिए की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री बघेल ने बैठक में कहा कि जिन गौठानों में अब तक गौठान समितियां नहीं बनी है, वहां गठन तत्काल किया जाए। गौठान समितियों का गठन प्रभारी मंत्रियों के अनुमोदन से किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना में गांव के चरवाहों को अनिवार्य रूप से भागीदार बनाया जाए। उन्हें वर्मी कम्पोस्ट की बिक्री से होने वाले लाभांश का एक हिस्सा मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गांवों में गोबर खरीदने का कार्य गौठान समितियां करेगी। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह और युवा समूह की ओर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य किया जाएगा। इसी प्रकार वर्मी कम्पोस्ट के भंडारण के लिए गौठानों में कमरा निर्माण किया जाए। गौठानों में आने वाले पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट के पैकेजिंग बैग पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादित करने वाले गौठान समिति का नाम भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। 
मुख्यमंत्री ने गौठानों में गौ-सेवकों को जोड़ने और पशु चिकित्सकों का भ्रमण तय करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों को वर्मी कम्पोस्ट निर्माण के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाए। इस काम में एनजीओ को भी जोड़ा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी गोधन न्याय योजना से क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तैयारी करने कहा। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में स्थापित निजी डेयरियों से भी गोबर की खरीदी की जाए तथा वर्मी कम्पोस्ट निर्माण में शहरी क्षेत्र के महिला समूहों को जोड़ा जाए।
 
प्रथम चरण में 2200 गौठानों में गोबर खरीदी : 
कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता ने पावरप्वाइंट के प्रेजेन्टेशन के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गोधन न्याय योजना के प्रथम चरण में 2200 गौठानों में गोबर खरीदी और वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य शुरू होगा। कलेक्टर जिले में स्थित सभी गौठानों में गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग करेंगे। इसके साथ ही वे वर्मी खाद बनाने वाले समूहों का गौठान समितियों की ओर से चयन में सहयोग करेंगे। कलेक्टरों को मनरेगा से गौठानों में वर्मी टैंक बनवाने और वर्मी खाद प्रसंस्करण के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व दिया गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला स्तर पर गोधन न्याय योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने का काम करेंगे।  गौठान समितियों की ओर से पशुपालकों से गोबर की खरीदी की जाएगी। प्रतिदिन इसका लेखा-जोखा रखा जाएगा। स्व-सहायता समूह की ओर से तैयार किए गए वर्मी खाद के गुणवत्ता परीक्षण के बाद इसकी पैकेजिंग और भंडारण गौठानों में किया जाएगा। सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को वर्मी कम्पोस्ट का विपणन किया जाएगा। गौठानों में तैयार वर्मी कम्पोस्ट कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, वन विभाग और शहरी विकास विभाग द्वारा अपनी जरूरत के अनुसार खरीदा जाएगा।

11-07-2020
महिला स्व-सहायता समूह का रूझान बढ़ा मक्के की खेती में, हो रहा अच्छा मुनाफा

रायपुर। शासन की ओर से मक्के की खेती को दिए जाने वाले प्रोत्साहन के साथ ही समर्थन मूल्य पर मक्के की खरीदी है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने मक्के की खेती को लेकर किसानों का उत्साह और बढ़ा दिया है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ राज्य में इस साल खरीफ में मक्के की खेती का रकबे में लगभग 50 हजार हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। बीते साल राज्य में 2 लाख 80 हजार 850 हेक्टेयर में मक्के की खेती हुई थी। इस साल इसका रकबा बढ़कर लगभग 3 लाख 30 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है। मक्के की खेती के मुनाफे को देखते हुए अब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत गठित अनेक महिला स्व सहायता समूह भी मक्के की खेती करने लगे हैं। इससे महिला समूहों को अच्छा खासा मुनाफा होने लगा है। बेमेतरा जिले के साजा विकासखण्ड की पंचायत बेलगांव के जय बजरंग महिला स्व-सहायता समूह  की ओर से भी मक्के की खेती की जा रही है।स छत्तीसगढ़ राज्य में सुराजी गांव योजना शुरू होने के बाद से सब्जी की सामूहिक खेती की शुरूआत के बाद अब महिला समूहों ने मक्के की सामूहिक खेती भी शुरू कर दी है। मक्के की सामूहिक खेती होना मक्के की खेती के प्रति लोगों के बढ़ते रूझान का संकेत है। मक्का कम लागत में उपजायी जाने वाली बारहमासी फसल है। छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर अंचल और सरगुजा में मक्के की खेती बड़े पैमाने पर होने लगी है।

पौष्टिकता से भरपूर और बहुपयोगी है मक्का

राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में मक्का की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने लागू की गई राजीव गांधी किसान न्याय योजना में मक्का उत्पादक किसानों को 4 किश्तों में 10 हजार रूपए प्रति एकड़ के मान से प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया है। मक्का एक बहुपयोगी फसल है, क्योंकि मनुष्य और पशुओं के आहार का प्रमुख अवयव होने के साथ ही औद्योगिक दृष्टिकोण से भी यह महत्वपूर्ण है। इसका प्रमुख कारण भारत की जलवायु की विविधता है। कार्बोहाईड्रेट, प्रोटीन और विटामिनों से भरपूर मक्का शरीर के लिए ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत है, साथ ही बेहद सुपाच्य भी। इसके साथ मक्का शरीर के लिए आवश्यक खनिज तत्वों जैसे कि फास्फोरस, मैग्निशियम, मैगनिज, जिंक, कॉपर, आयरन इत्यादि से भी भरपूर फसल है। भारत में मक्का की खेती तीन ऋतुओं में की जाती है, खरीफ जून से जुलाई, रबी अक्टूबर से नवम्बर एवं जायद फरवरी से मार्च। यह समय मक्का की बुआई के लिए खेतों को तैयार करने का उचित समय है।

 

11-07-2020
आश्रम-छात्रावासों के लिए अब महिला स्व-सहायता समूहों से खरीदी जाएगी सामग्री

कांकेर। जिले के सभी 188 आश्रम-छात्रावासों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार की गई सामग्रियों को खरीदा जायेगा। कलेक्टर केएल चौहान की अध्यक्षता में शनिवार को जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिले के सभी मंडल संयोजक और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बीपीएम की बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों से खरीदी की जाने वाली सामग्रियों के दर निर्धारित की गई। उक्त निर्धारित दर पर महिला स्व-सहायता समूहों से सरसों तेल, अरहर, मूंग, चना, मसूर इत्यादि के दाल,आम एवं नीबू के अचार, रखिया एवं उड़द बड़ी, मूंग बड़ी, गरम मसाला, हल्दी, धनिया, बेसन, मुनगा पत्ती के पाउडर, देशी एवं बायलर मुर्गी, मछली, अण्डा, झाडू, वाशिंग पाउडर, नील, सेनेटरी नेपकीन, मास्क, पैरदान, मोमबत्ती, पोहा, सेवई, गेहू आटा सहित अन्य सामाग्रियों की खरीदी की जा सकेगी। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ.संजय कन्नौजे,आदिवासी विकास विभाग के उपायुक्त विवेक दलेला, महिला एवं बाल विकास अधिकारी सीएस मिश्रा, अंकित पिंगले, नेहा सिंह,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के डीपीएम ममता प्रसाद सभी बीपीएम एवं मण्डल संयोजक उपस्थित थे।

20-06-2020
ग्रामीण महिलाएं घुरवा से पा रही है आर्थिक लाभ


रायपुर /महासमुंद। महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं लगातार लाभान्वित हो रही है। ऐसे ही जिला मुख्यालय महासमुंद के निकटस्थ ग्राम बरोण्डा बाजार के महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं घुरवा से आर्थिक लाभ प्राप्त कर रही है। कामधेनु महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने शनिवार को यहां जिले के प्रवास पर पहुंचे प्रभारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात कर बताया कि वे कृषि विभाग के सहयोग से गौठान के गोबर एवं अपशिष्ट पदार्थ का उपयोग कर जैविक खाद का उत्पादित कर रही हैं। महिला समूह के सदस्यों ने बताया कि यह कार्य उनके समूह ने दिसम्बर 2019 से प्रारम्भ किया था। उन्होंने बताया कि राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी के अंतर्गत निर्मित बने इस गौठान में आने वाले पशुओं के उत्सर्जित अपशिष्ट पदार्थ से अब तक 35 क्विंटल जैविक खाद का उत्पादित किया जा चुका हैं। उत्पादित खाद जैविक खाद को प्रति क्विंटल 800 रूपए की दर से विक्रय किया जाता हैं। इससे उन्हें फायदा मिल रहा हैं। उत्पादित खाद को स्थानीय स्तर पर भी विक्रय किया जाता हैं। इस पर प्रभारी मंत्री लखमा ने उनके इन कार्याें की सराहना करते हुए उनका हौसला अफजाई किया।

 

09-06-2020
महिला स्व सहायता समूह ने दी सीएम रिलीफ फंड में सहयोग राशि, मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने किया आभार व्यक्त

रायपुर। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रूद्रकुमार ने कोरोना संक्रमण से बचाव के कार्यों में महिला समूहों के योगदान की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाएं संक्रमण से बचाव के लिए सैनिटाइजर और मास्क तैयार कर सार्थक भूमिका अदा कर रही हैं। मंत्री गुरू रूद्रकुमार सेे मंगलवार को उनके निवास सतनाम सदन में धमतरी, रायपुर और महासमुंद जिले से पहुंची महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों से सौजन्य मुलाकात की और उनका उत्साहवर्धन किया। मुलाकात के दौरान महिला समूहों ने कोरोना संक्रमण से बचाव और जरूरतमंदों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष के लिए 1 लाख 45 हजार 303 रूपए की राशि का चेक और सरस्वती एवं शुभकामना महिला स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार किए गए 1500 नग मास्क सौंपा। मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने महिलाओं के हौसले और जज्बे की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री सहायता कोष में दिए गए धन राशि के लिए धन्यवाद दिया।

मंत्री गुरू रूद्रकुमार से मुलाकात के दौरान रायपुर जिले की धान्य महिला स्व सहायता समूह की माधुरी यदु ने बताया कि सभी महिलाएं गणवेश सिलाई का कार्य करती हैं। लॉकडाउन में हम महिलाओं को हाथकरघा संघ ने मास्क तैयार करने का कार्य मिलने से हमें रोजगार के साथ-साथ हमारी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है। माधुरी यदु ने स्व-सहायता समूह को कोरोना संक्रमण से बचाव से कार्यों में जिम्मेदारी देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री सहायता कोष में 25 स्व-सहायता समूहों ने 1 लाख 45 हजार 303 रूपए की राशि दी है। इनमें मुख्य रूप से धान्य महिला स्व-सहायता समूह 31 हजार, रामावतार महिला स्व-सहायता समूह 3100 हजार, सरस्वती एवं शुभकामना सहायता समूह 14 हजार, पहचान महिला स्व-सहायता समूह 11 हजार, कादंबरी महिला स्व-सहायता समूह 10 हजार रूपए शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत हाथकरघा संघ से जुड़ी 650 स्व-सहायता समूह की लगभग 7000 महिलाओं द्वारा 3 लाख 80 हजार मास्क तैयार कर विभिन्न विभागों को आपूर्ति की है।

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