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19-02-2020
कन्हैया कुमार पर राजद्रोह के मुकदमे पर दिल्ली पुलिस ने कहा, अब तक मंजूरी नहीं मिली

नई दिल्ली। जेएनयू के छात्रनेता व बेगूसराय से विधानसभा चुनाव लड़ चुके कन्हैया कुमार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने को लेकर दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उन्हें अभी तक मंजूरी नहीं मिल पायी है। जिसके कारण कन्हैया कुमार के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा चलाने में वे समर्थ नहीं है। पुलिस ने आज दिल्ली की एक कोर्ट को बताया कि जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार व अन्य छात्रों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी अभी तक नहीं मिल पायी है। जिसके बाद दिल्ली की अदालत ने राज्य सरकार को 3 अप्रैल तक स्थिति स्पष्ट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। कोर्ट ने पुलिस को दिल्ली सरकार से फिर से मंजूरी लेने को कहा है।

मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (सीएमएम) पुरुषोत्तम पाठक ने दिल्ली पुलिस को यह निर्देश भी दिया कि दिल्ली सरकार को कुमार पर अभियोजन के लिए जरूरी मंजूरी के बारे में याद दिलाया जाए। पुलिस ने कन्हैया कुमार और जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में 14 जनवरी को आरोप पत्र दाखिल किया और कहा था कि उन्होंने 9 फरवरी, 2016 को परिसर में एक समारोह में लगाए गए देशद्रोह के नारों का समर्थन किया और जुलूस निकाला था।


 

05-02-2020
कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला, हुए घायल

नई दिल्ली। जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार हमले में घायल हो गए हैं। बिहार के सुपौल में बुधवार को उनके काफिले पर पथराव किया गया,जिसमें उनको चोटें आई हैं। सुपौल में कन्हैया कुमार के काफिले पर पथराव किया गया। पथराव में काफिले में मौजूद एक वाहन में सवार एक युवती सहित तीन लोगों को चोटें आईं हैं। घटना सदर थाना के मल्लिक चौक पर बुधवार शाम की है। सुपौल में जनसभा को संबोधित करने के बाद पूर्व छात्र नेता काफिले के साथ सहरसा के लिए निकले थे। पथराव में दो वाहनों के शीशे टूट गए। कन्हैया कुमार की बुधवार को किशनपुर प्रखंड के सिसौनी नेमनमा में सभा थी। कन्हैया कुमार अपने काफिले के साथ सहरसा के लिए निकले। काफिले के आगे पीछे कड़ी सुरक्षा भी थी।

शहर के सदर थाना के पास मल्लिक चौक पर पहले से 25-30 की संख्या में खड़े युवक सीएए, एनआरसी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। जैसे ही कन्हैया कुमार का वाहन आया, पहले कुछ लोगों ने उस पर काली स्याही फेंक दी। काफिला में शामिल वाहनों के रूकते ही वहां जाम लग गया। पुलिस निकल कर वाहनों को निकालने लगी। इस बीच पीछे से कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थर से जन मन गण यात्रा का रथ और एक अन्य वाहन का शीशा टूट गया। एक चालक सहित तीन लोगों को चोटें आई है। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता मांडवी भी शामिल है। बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच सभी वाहनों को सुरक्षित निकाला गया। घटना की सूचना मिलते ही डीएम महेन्द्र कुमार, एसपी सुधीर कुमार पोरिका भारी संख्या में पुलिस बल के साथ वहां पहुंचे। हालांकि कन्हैया कुमार का काफिला जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई। सदर थानाध्यक्ष ने बताया कि फिलहाल वहां माहौल शांत है। घटना को लेकर किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है।

 

30-01-2020
संविधान बचाओ नागरिकता बचाओ

नई दिल्ली। बिहार के बेतिया जिले के भितिहरवा आश्रम में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को हिरासत में लिया गया है। वह यहां "संविधान बचाओ-नागरिकता बचाओ" यात्रा की शुरूआत करने वाले थे। यह यात्रा पश्चिमी चंपारण के बापूधाम से शुरू होकर 29 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में खत्म होनी थी। इसी दिन सीएए-एनआरसी और एनपीआर के विरोध में गांधी मैदान में महारैली का आयोजन किया जाना था। यात्रा की शुरुआत में सीपीआई नेता कन्हैया एक सभा को संबोधित करने वाले थे। पश्चिमी चंपारण के एसडीएम का कहना है कि कन्हैया को सार्वजनिक बैठक की अनुमति नहीं दी गई है। जेएनयू के पूर्व छात्र को डीएम से भी इजाजत नहीं मिली थी। वह यात्रा की शुरुआत के लिए बेतिया पहुंचे थे जहां से उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

 

29-01-2020
पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया शरजील इमाम

नई दिल्ली। देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार जेएनयू के शोधार्थी शरजील इमाम को शहर की एक अदालत ने बुधवार को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। उसके वकील ने यह जानकारी दी। इमाम की अधिवक्ता मिशिका सिंह ने कहा कि इमाम को कड़ी सुरक्षा के बीच शाम को मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक के आवास पर पेश किया गया। यहां जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ में भड़काऊ बयान देने के आरोप में इमाम को मंगलवार को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया गया था। उसे बुधवार को दिल्ली लाया गया था। पटियाला हाउस अदालत परिसर में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब दिल्ली पुलिस ने बताया कि इमाम को वहां मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जायेगा। कुछ वकीलों ने शरजील के खिलाफ नारेबाजी की और उनके हाथों में मौजूद पोस्टरों में उसे ‘देशद्रोही' कहा गया था। उन्होंने उसे फांसी देने की मांग की। अदालत परिसर के बाहर सीआरपीएफ कर्मियों समेत बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था। 

 

28-01-2020
Breaking: देशद्रोह के आरोप में शरजील गिरफ्तार

नई दिल्ली। देशद्रोह के आरोप में जेएनयू के पीएचडी स्कालर शरजील इमाम को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। शरजील को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया गया। शरजील को कई राज्यों की पुलिस तलाश कर रही थी। उन्हें दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया। बता दें की शरजीत ने आसाम को देश के काटने पर बयान दिया था। 

 

21-01-2020
इसका मतलब जेएनयू के सिर्फ 18% छात्र-छात्रों को परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं,सिर्फ इन्हें चाहिए आज़ादी

रायपुर। जेएनयू के वाइस चांसलर एम. जगदीश कुमार का बयान आया है कि 82% छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। यानी सिर्फ 18% छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया यानी उन्हें परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है मतलब परीक्षा से भी आजादी सिर्फ इसी 18% छात्र वर्ग को चाहिए। अगर 82% छात्र-छात्राएं रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें पढ़ाई से मतलब है, उन्हें करियर से मतलब है, उन्हें हड़ताल से कोई मतलब नहीं, उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग से कोई मतलब नहीं, उन्हें आजादी से कोई मतलब नहीं, वे अपने सुनहरे सपने सच करना चाहते हैं। पढ़-लिख कर अपना, अपने परिवार का और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करना चाहते हैं और इसलिए शायद उन्होंने आगे बढ़कर पंजीयन करा लिया। तमाम मारपीट, लड़ाई-झगड़े, पुलिस पहरा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अगर 82% छात्र आगे निकलकर विश्वविद्यालय के साथ रजिस्ट्रेशन करा कर खड़े हैं तो इसका मतलब गिनती के छात्र ही विश्वविद्यालय का नाम डुबोने पर तुले हुए हैं। आज फिर मारपीट हुई है मारपीट में फिर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं फिर 82% छात्रों के रजिस्ट्रेशन की तुलना में सिर्फ 18% फसादी लोगों को इतना तवज्जो दिया जाना हैरानी नहीं एक सोची समझी साजिश ही लगती है।

12-01-2020
208 विश्वविद्यालयों के कुलपति चिंता जाहिर कर रहे है लेफ्ट की हिंसक छात्र राजनीति पर, कुछ तो बात होगी

रायपुर। देश के जाने-माने 208 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हिंसक छात्र राजनीति पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने लेफ्ट की राजनीति में हिंसा घोलने पर चिंता जाहिर की है। और उनका चिंता जाहिर करना कहीं से गैर वाजिब नहीं लगता। जिस तरह से जेएनयू राजनीति का अखाड़ा हो गया है उससे वहां की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लेफ्ट और राइट इन दो पाटों के बीच में पीसकर पढ़ने लिखने वाले बच्चे बुरी तरह परेशान हो रहे हैं। फिर जेएनयू के अध्ययन का राजनीतिक संक्रमण धीरे धीरे और विश्वविद्यालयों तक फैल रहा है। यही 208 विश्वविद्यालय के कुलपति यों की चिंता का प्रमुख कारण हो सकता है। छात्र राजनीति छात्र हितों की रक्षा और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं के लिए संघर्ष तक सीमित रहने की वजह राजनीतिक पार्टियों के हथियारों की तरह इस्तेमाल हो रही है। जो देश के जाने-माने शिक्षाविदों के लिए चिंता का कारण है। जेएनयू की हिंसा उन सैकड़ों बच्चों के पालकों के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई है,जो अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए वहां भेज रहे हैं। जेएनयू देश के जाने-माने विश्वविद्यालयों में से एक होने के बावजूद अब वह शिक्षा के लिए कम राजनीतिक दंगलों के लिए ज्यादा पहचाना जा रहा है। फिर जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी भी कहीं न कहीं चिंता का विषय बनी हुई है। संभवत 208 विश्वविद्यालय के कुलपतियों की चिंता के पीछे भी यही सब कारण हैं,जो उन्होंने प्रधानमंत्री को खत लिखकर जाहिर किए हैं।

12-01-2020
जेएनयू हिंसा: कुलपतियों और शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, कही यह बात...

नई दिल्ली। जेएनयू हिंसा पर जारी हंगामे के बीच देश की 208 यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में कुलपतियों और शिक्षाविदों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में वाम प्रायोजित हिंसा का मामला उठाया है। पत्र में लिखा गया है कि छात्र राजनीति के नाम पर विघटनकारी वामपंथी एजेंडा फैलाया जा रहा है। हाल के दिनों में जेएनयू से जामिया,अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से लेकर जादवपुर यूनिवर्सिटीज तक वामपंथी कार्यकर्ताओं के कुछ छोटे गुटों द्वारा शिक्षा का माहौल बिगाड़ा जा रहा है। इसके चलते संस्थानों में शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

पत्र में लिखा गया है कि छात्रों को कम उम्र में ही कट्टरपंथी बनाकर उनकी मुक्त सोच और रचनात्मकता को कुंद किया जा रहा है। राजनैतिक गतिविधियों के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। विचारधारा के नाम पर छात्र बहुलतावाद के खिलाफ असहिष्णु हो रहे हैं। पत्र के अनुसार, इससे छात्रों के विभिन्न गुटों के बीच हिंसा हो रही है और अध्यापकों और बौद्धिक लोगों के खिलाफ असहिष्णुता बढ़ रही है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि वामपंथी राजनीति की सेंसरशिप के चलते सार्वजनिक मीटिंग और खुलकर बोलने की आजादी मुश्किलों में आ गई है। वामपंथी दलों के गढ़ में हड़ताल, धरना और बंद आम बात है। वामपंथ की इस राजनीति का सबसे ज्यादा शिकार छात्र हैं। इसके चलते वह पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। पत्र में लोकतांत्रिक ताकतों से अपील की गई है कि वह साथ आएं और शैक्षिक संस्थानों की आजादी, बोलने की आजादी और बहुलतावाद की सोच की रक्षा करें।

 

11-01-2020
जेएनयू के छात्रों पर हमले के खिलाफ वामपंथी पार्टियों ने किया प्रदर्शन

रायपुर। जेएनयू के प्रशासन द्वारा की गई भारी फीस वृद्धि के खिलाफ माकपा ने प्रदर्शन किया। माकपा नेता प्रशांत झा ने कहा कि वहां के छात्रसंघ के नेतृत्व में आम छात्रों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चलाए जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस प्रशासन, केंद्र सरकार और जेएनयू प्रशासन की सरपरस्ती में नकाबधारी और हथियारबंद संघी गुंडों द्वारा  किये गए हमले के विरोध में आज कोरबा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा ने मिलकर ट्रांसपोर्ट नगर चौक पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया और समूची फीस वृद्धि वापस लेने औऱ जेएनयू के कुलपति को हटाने की मांग की और जेएनयू प्रशासन, दिल्ली पुलिस और मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सभा को संबोधित करते हुए माकपा नेता प्रशांत झा ने इस सुनियोजित हमले की तीखी निंदा करते हुए कहा कि हमलावरों को बचाने और हमले के शिकार छात्र-छात्राओं पर ही मुकदमा दर्ज करने की घटिया हरकत इस सरकार को महंगी पड़ेगी। आज देश की समूची जनता और छात्र जगत जेएनयू के साथ है। उन्होंने कहा कि इस सरकार और जेएनयू प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि हथियारबंद गुंडे शिक्षा परिसर में कैसे घुसे और ऐसी हालत में पूरे समय कुलपति सोये क्यों रहे? सभा को माकपा के जनक दास, धनबाई कुलदीप, डॉ. तान्या घोष, गया बैस और माकपा पार्षद श्रुति कुलदीप और राजकुमारी कंवर; भाकपा के हरीनाथ सिंह ,एम एल रजक,आर पी खांडे, संतोष सिंह ने भी संबोधित किया। सभा के बाद महामहिम राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।

11-01-2020
एबीवीपी पर झूठा आरोप लगाना उजागर करता है वामपंथियो की असली विचारधारा  : विभोर ठाकुर

रायपुर। जिस प्रकार से जेएनयू में वामपंथियो द्वारा छात्रों को मारा गया सर्वर रूम में घुस कर सर्वर को तोड़ा गया छात्र फॉर्म भर रहे थे उनके ऊपर हमला करके फॉर्म नहीं भरने दिया गया व झूठ बोलकर आरोप एबीवीपी पर लगा दिया गया।  कल दिल्ली पुलिस की प्रेसवार्ता से ये साफ़ होता है कि लेफ़्ट के संघठनो ने  छात्रों को मारा व झूठा आरोप एबीवीपी पर लगाया, जबकि पुरा षड्यंत्र जेएनयु छात्रसंघ द्वारा रचा गया था। इसी से वामपंथियो की असली विचारधारा उजागर होती है, जिसके विरोध में शनिवार को अभाविप रायपुर महानगर ने वामपंथियो का पुतला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्विद्यालय में जलाया जिसमें प्रमुख रूप से विकास मित्तल, विभोर ठाकुर, यश गुप्ता, आकाश शर्मा, अमन यादव, पारस नाथ, शेखर झा, ऋषभ दुबे, लक्की दीवान, अजय सजिदा, सौरभ शुक्ला, विशाल आदित्य, सौरभ शर्मा, मयंक तिवारी, सतीश, निशांत, शुभम, जय, सूर्यप्रकाश समेत बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

 

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