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01-07-2020
6 साल के मोदी राज में जनता ने देख लिया भाजपा की कथनी और करनी का फर्क : राजेंद्र साहू

दुर्ग। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के फैसलों और नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। राजेंद्र ने कहा कि करोड़ों जनधन खाताधारकों के खाते में 5 सौ रुपए जमा करने वाली केंद्र सरकार महंगाई बढ़ाकर उनकी जेब से 5 हजार रुपए निकाल रही है। किसानों को 2 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि की किस्त देकर मोदी सरकार उनसे 20 हजार रुपए वसूल रही है। आम जनता से 6 साल से फरेब करेन वाली मोदी सरकार अब महंगाई बढ़ाने का नया फरेब शुरू कर दिया है।राजेंद्र ने कहा कि डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस के रेट बेतहाशा बढ़ने और आसमान छूती महंगाई के कारण किसानों, जनधन खाताधारकों सहित आम जनता पर कई गुना आर्थिक बोझ बढ़ा है। लोगों की जेब खाली हो रही है। मोदी सरकार आम जनता, बेरोजगारों, किसानों, मजदूरों और लघु उद्यमियों से जुमलेबाजी कर रही है। वादे पूरे करने में नाकाम रहने के बाद अब रोज महंगाई बढ़ाकर आम जनता का ध्यान इन जुमलों से हटाया जा रहा है।          
राजेंद्र ने कहा कि दो करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार, किसानों की आय दोगुना करने, पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के दाम कम करने और महंगाई कम करने का वादा कर भाजपा ने सत्ता हासिल की।

ये सभी वादे आज तक पूरे नहीं हुए। वादे पूरा करने में विफल रही मोदी सरकार की कथनी और करनी का फर्क जनता के सामने उजागर हो गया है।राजेंद्र ने कहा कि कोरोना संकट काल में लाखों मजदूरों को मजबूर होकर अपने गांव पैदल जाना पड़ा। किसानों की फसल को अतिवृष्टि, ओला वृष्टि से भारी नुकसान हुआ। लोग बेरोजगार हो गए। सरकार ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की जो धरातल से परे है। शायद पैकेज की बड़ी रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। इन मुद्दों से आम जनता का ध्यान हटाने केंद्र सरकार रोज पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा रही है। लगातार महंगाई बढ़ाकर मोदी सरकार मजदूर, किसान सहित आम जनता की जेब को दीमक की तरह खोखला कर रही है।

 

27-06-2020
पहुंच विहीन इलाकों में भी होगा उजियारा, नदी तट के विद्युत विहीन स्थानों में किसानों को दिए जाएंगे सोलर पंप

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में बैठक लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनियों और क्रेडा के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने क्रेडा के अधिकारियों से कहा कि पहुंच विहीन और दुर्गम इलाकों में सोलर के जरिए विद्युत की व्यवस्था की जाए। नदी किनारे जहां विद्युत लाइन नहीं हैं,उन स्थानों पर सोलर पंप किसानों को दिए जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर पानी में हैवी मेटल या खारे पानी होने की शिकायत है, वहां सतही जल (सरफेस वाटर) के माध्यम से जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए।मुख्यमंत्री ने गरियाबंद के सुपेबेड़ा में नदी के जल से और बेमेतरा, बालोद, धमधा, साजा और नवागढ़ में खारे पानी की शिकायत के कारण सरफेस वाटर का उपयोग कर जल आपूर्ति के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने विद्युत कंपनियों की विभिन्न योजनाओं और सीएसआर मद के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निजी विद्युत संयंत्रों से वेरिएबल कास्ट पर मिलने वाली बिजली की समीक्षा करते हुए कहा कि निर्धारित मात्रा में विद्युत प्रदाय नहीं करने वाले संयंत्र को नोटिस जारी किया जाए।  बैठक में सोलर पेयजल योेजना, सौभाग्य योजना, सौर सुजला योजना, सोलर कोल्ड स्टोरेज, शासकीय भवनों का सौर उर्जीकरण, सोलर विद्युत संयंत्र आदि योजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि सौर सुजला योजना के तहत अब तक 78 हजार 730 पम्प स्थापित किए गए है। इससे 2 लाख 46 हजार एकड़ में सिंचाई सुविधा मिल रही है। वर्ष 2020 -21 में 20 हजार सोलर पम्प स्थापित करने का लक्ष्य है। इससे लगभग 50 हजार एकड़ में सिंचाई हो सकेगी। सामुदायिक सिंचाई के 40 प्रोजेक्टों में 3450 एकड़ में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। प्रदेश में 5998 गांवों तथा बसाहटों में 11459 सोलर पेयजल पम्पों के माध्यम से 3.25 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार 281 सोलर जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित किए गए हैं।बैठक में मुख्य सचिव आरपीमंडल, विद्युत कंपनियों के चेयरमेन और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी के एमडी मो.अब्दुल कैसर हक, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी अशोक कुमार, ट्रेडिंग कंपनी के एमडी राजेश वर्मा, जनरेशन कंपनी के एमडी एनएल बिजौरा सहित विद्युत कंपनियों एवं क्रेडा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

27-06-2020
खरीफ फसल के लिए 7.65 किसानों को मिला 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त ऋण

रायपुर। राज्य सरकार प्रदेश में खेती किसानी को बढ़ावा देने और किसानों को समय पर खाद, बीज सहित अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। इस वर्ष खरीफ में राज्य के किसानों को 4 हजार 600 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के  विरुद्ध चालू खरीफ फसल के लिए अब तक 7.65 लाख किसानों को 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित किया गया है। जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक एक हजार 538 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया गया था। इस प्रकार किसानों को इस खरीफ में अब तक 1183 करोड़ रुपए का अधिक ऋण वितरण हो चुका है।मुख्यमंत्री बघेल के निर्देश पर किसानों को ऋण और खाद-बीज के वितरण के लिए सहकारी समितियों में बेहतर व्यवस्था तय की गई है। खरीफ फसलों के लिए सहकारिता के माध्यम से कुल 6.35 मीट्रिक टन रासायनिक खाद के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। 26 जून तक सहकारी समितियों में 5.77 लाख मी.टन खाद का भंडारण किया जा चुका है,जो कि कुल लक्ष्य का 90.81 प्रतिशत है। सहकारी समितियों की ओर से 4.53 लाख टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 71 प्रतिशत है। जबकि पिछले साल इसी समय तक सहकारी समितियों की ओर से 2.43 लाख मी.टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया था।

गत वर्ष की तुलना में इस साल 2.10 लाख टन अधिक खाद का वितरण सहकारी समितियों की ओर किया गया है।खरीफ फसल के लिए  बीज निगम की ओर से सहकारी समितियों के माध्यम से 5.88 लाख क्विंटल उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज का भंडारण कराया गया है। 26 जून की स्थिति में कुल 4.52 लाख क्विंटल का उठाव किसानों ने कर लिया है। गत वर्ष इसी अवधि में सहकारी समितियों में 4.98 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण और 2.88 लाख क्विंटल का वितरण किसानों को किया गया था। इसी अवधि की तुलना में गत वर्ष से 1.64 लाख क्विंटल का प्रमाणित बीज अधिक वितरित किया गया है।इस वर्ष राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भी छत्तीसगढ़ राज्य को अब तक 1150 करोड़ रुपए की विशेष और अतिरिक्त साख सीमा स्वीकृत की गई है। इसके विरुद्ध अब तक 740 करोड़ रुपए का आहरण राज्य सहकारी बैंकों ने कर लिया है। राज्य सरकार की किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 18.35 लाख किसानों के खाते में 1492 करोड़ रुपए जमा किए जाने से खेती के प्रति किसानों में रूझान और भी बढ़ा है।देश में जारी कोविड-19 महामारी के दौर में भी राज्य के कृषि क्षेत्र में हुई वृद्धि सुखद और सुकूनदायक है। मानसून के समय पर आगमन एवं कृषि आदान की समय पर अच्छी व्यवस्था से राज्य में इस वर्ष खरीफ फसल के अच्छे उत्पादन की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में और भी सुधार होने के अच्छे संकेत दिख रहे हैं। सहकारी समितियों की कृषि आदान व्यवस्था को चुस्त एवं गतिशील करने के लिए कृषि विभाग के साथ ही सहकारिता विभाग, पंजीयक सहकारी संस्थाएं, छत्तीसगढ़ प्रबंध संचालक विपणन संघ एवं छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की भी अहम भूमिका रही है। राज्य स्तर पर प्रतिदिन कृषि आदानों की मॉनिटरिंग किए जाने से ही कृषि आदान के क्षेत्र में अच्छी स्थिति निर्मित हुई है।

25-06-2020
किसानों के बनाएं जाएं क्रेडिट कार्ड, स्वरोजगार योजनाओं की पहल के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश

बीजापुर। जिले में शासन की स्वरोजगार योजनाओं का कारगर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ पहल किया जाये। इस दिशा में विभागीय अधिकारियों सहित बैंकर्स आपसी समन्वय के साथ स्वरोजगारियों के लाभान्वित करने के लिये सक्रिय सहभागिता निभायें।जिले में किसानों को खेती-किसानी कार्य के लिए फसल ऋण प्रदान करने के लिए सभी किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाए। इसके साथ ही पशुपालन कुक्कुटपालन, मछलीपालन,साग-सब्जी उत्पादन ईत्यादि कृषि के अनुशांगिक गतिविधियों के लिए कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया जाये। उक्त निर्देश कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय साख  समन्वय समिति की बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों सहित बैंकर्स को दिये।कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने बैठक में वित्तीय वर्ष 2019-20 के तहत स्वरोेजगार योजनाओं के क्रियान्वयन ऋण-अनुदान स्वीकृति एवं वितरण स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए स्वीकृत सभी प्रकरणों के स्वरोजगारियों को आगामी 30 जून तक ऋण-अनुदान वितरित सुनिश्चित किये जाने अधिकारियो को निर्देशित किया। उन्होनें बैंकों के ऋण-जमा अनुपात सहित प्राथमिकता प्राप्त सेक्टरों में ऋण वितरण स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिले की अधिकांश आबादी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग की है। इन जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता प्राप्त सेक्टरों में ऋण मुहैय्या कराये जाने संवेदनशीलता के साथ पहल किया जाये।इसके लिए बेरोजगार युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाये।कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने बैंकर्स को  बैंक सखी, कियोस्क,सीएसपी के जरिये मनरेगा मजदूरी,पेंशन भुगतान,तेन्दूपत्ता पारीश्रमिक भुगतान में प्रगति लाये जाने के निर्देश दिए। बैठक में खादी एवं ग्रामोद्योग, जिला व्यापार एवं उद्योग,राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति ईत्यादि की स्वरोजगार योजनाओं के तहत वर्ष 2020-21 के लिए आवंटित लक्ष्य के अनुरूप प्रकरण तैयार कर 15 जुलाई तक बैंकों में प्रस्तुत किये जाने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत पोषणलाल चन्द्राकर,अग्रणी बैंक प्रबंधक प्रतीक अग्निहोत्री सहित विभागीय अधिकारी तथा बैंकर्स उपस्थित थे।

 

24-06-2020
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा, सोयाबीन की बोनी जुलाई के दूसरे सप्ताह के बाद करने से उत्पादन में आती है गिरावट  

रायपुर। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सोयाबीन की प्रमुख किस्में जिसमें जे.एस.-335, जे.एस.-93-05, जे.एस.-97-52, जे.एस.-95-60, आर.के.एस.-18, एन.आर.सी.-37, अहिल्या-4 का उपयोग करें। सोयाबीन मुख्यत खरीफ की फसल है, इसकी बोनी का उचित समय जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के द्वितीय सप्ताह तक का होती है। जुलाई द्वितीय सप्ताह के बाद बोनी करने पर उत्पादन में गिरावट आती है।खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करने के लिए किसानों को भूमि का चयन, भूमि की तैयारी, उन्न्त किस्म के बीज और  उचित समय पर बीज की बुआई से उत्पादन में अच्छा वृद्धि होती है। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ में सोयाबीन के क्षेत्रफल में निरंतर वृद्धि हो रही है। छत्तीसगढ़ में सोयाबीन मुख्य रूप से राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, मुंगेली और कवर्धा जिलों में उगाया जाता है। सोयाबीन के लिए अच्छे  जल निकास वाली डोरसा और कन्हार प्रकार की जमीन उपयुक्त होती है। सोयाबीन के लिए सबसे अच्छी भूमि कन्हार भर्री पाई गई है। धनहा खेतों में जल निकास की उचित व्यवस्था करके सोयाबीन की खेती की जा सकती है।

 

19-06-2020
रविंद्र चौबे ने ग्रामीणों से कहा, एक रुपये में 75 पैसे किसानों के लिए दिए

दुर्ग। कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने शुक्रवार को ग्राम टेकापार में रोका छेका के अवसर पर ग्रामीणों से गौठान को आगे बढ़ाने के संबंध में चर्चा की। कृषि मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने सबसे ज्यादा ध्यान किसानों पर दिया है। यदि सरकार का बजट एक रुपये है तो हमने इस बजट में 75 पैसे किसानों के कल्याण पर खर्च किए हैं। लगभग 53000 करोड़ रुपए कर्ज माफी और धान खरीदी में खर्च किए। राजीव किसान योजना के माध्यम से कोरोना काल में किसानों को राहत पहुंचाई है। कृषि मंत्री ने कहा कि रोकाछेका के मौके पर सरकार ने किसानों को बढ़ावा देने के लिए घोषणाएं की हैं। मंत्री ने कहा कि धमधा क्षेत्र में हमारी सबसे ज्यादा कोशिश सिंचाई योजनाओं को आगे बढ़ाने की है। लगभग 150 करोड़ से अधिक की सिंचाई योजनाओं पर कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन सिंचाई योजनाओं से धमधा ब्लॉक की तस्वीर बदलेगी। जिन महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं पर कार्य होगा उनमें से आमनेर मोती नाला में 19 गांव के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। लिफ्ट इरिगेशन के अनेक कार्य स्वीकृत किए गए हैं। कृषि मंत्री ने इस अवसर पर रोकाछेका अभियान की महत्वपूर्ण बातों पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों से कहा कि रोकाछेका इस मामले में अहम है कि हमने इसे अभी आरंभ किया है अगर यह कार्य कुछ दिन बाद होता तो खरीफ फसल का समय कुछ आगे बढ़ जाता। मान लीजिए आप धान की ऐसी वैरायटी ले रहे हैं जिसमें 145 दिन का समय लगता है कि जो कि अधिकतम समय होता है। उस वैरायटी के धान को लेने के बाद भी आपके पास इतना समय बचेगा कि आप सब्जी के लिए या दलहन फसलों के लिए पर्याप्त समय ले सकें इस मायने में अभी किया जाने वाला रोकछेका बहुत अहम है चरी चरागन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाएगा। कृषि मंत्री ने इस अवसर पर पौधरोपण भी किया। उन्होंने कहा कि गौठान में हरियाली संवर्धन भी बहुत ही महत्वपूर्ण है।

19-06-2020
कलेक्टर ने अनियमितता बरतने वाले लैम्पस प्रबंधकों को शो-काॅज नोटिस जारी करने दिए निर्देश

बीजापुर। जिले में खरीफ फसल सीजन 2020 के लिए किसानों को पर्याप्त बीज-खाद की सुलभता सुनिश्चित किया जाये। वहीं किसानों को खेती-किसानी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से फसल ऋण उपलब्ध कराया जाये। जिले के धान खरीदी केन्द्रों पर वर्तमान में संचालित चबूतरा निर्माण कार्य की मानिटरिंग कर गुणवत्ता का ध्यान रखा जाये। वहीं उचित मूल्य दुकानों से खाली बारदाना का संग्रहित कर लैम्पस समितियों में सुरक्षित रखने की व्यवस्था किया जाये। उक्त निर्देश कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने कलेक्टोरेट के समाकक्ष में कृषि-सहकारिता तथा खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिये।कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 के तहत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन में अनियमितता बरतने के कारण 11 लैम्पस प्रबंधकों को शो-काॅज नोटिस जारी करने अधिकारियों को निर्देशित किया। कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि खरीफ फसल सीजन के लिए जिले के सभी लैम्पस समितियों द्वारा पर्याप्त बीज-खाद किसानों को उपलब्ध कराया जाये। इसके लिए कृषि तथा सहकारिता विभाग द्वारा आपसी समन्वय कर कृषकों की मांग के अनुरूप बीज एवं खाद का भंडारण एवं वितरण व्यवस्था किया जाये।

17-06-2020
बस्तर से सूरजपुर तक मक्का की खेती को लेकर किसानों में बढ़ा रूझान

रायपुर। राज्य में मक्का की खेती को लेकर किसानों में दिनों-दिन रूझान बढ़ता जा रहा है। बस्तर अंचल में होने वाली मक्का की फायदेमंद खेती अब धीरे-धीरे राज्य के अन्य इलाकों में भी विस्तारित होने लगी है। समर्थन मूल्य पर मक्का की खेती और नगदी फसल के रूप में इससे होने वाली आय को देखते हुए राज्य के सीमावर्ती जिले सूरजपुर के किसान भी अब बढ़-चढ़कर मक्का की खेती करने लगे है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की वजह से भी मक्का की खेती को बढ़ावा मिल रहा है। सूरजपुर जिले के सभी विकासखंडों में किसानों को मक्का की खेती के लिए किसानों को मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को मक्का की फसल से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी देने के साथ ही इसके लिए कृषि विभाग की ओर से प्रदाय की जाने वाली सहायता के बारे में भी किसानों को बता रहे है। यहीं वजह है कि सूरजपुर जिले में किसान मक्का की खेती को अपनाने लगे है। सूरजपुर जिले के विकासखंड प्रतापपुर के ग्राम धोंधा के कृषक कमला यादव ने बताया कि कृषि विभाग से मिले मार्गदर्शन और सहयोग की बदौलत वह मक्का की खेती कर रहे हैं। कृषक यादव ने बताया कि मक्का की खेती मुनाफे वाली है। इससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। बीते वर्ष मक्के की खेती से हुए लाभ की वजह से उन्होंने इस साल भी मक्के की खेती की है, साथ ही खेती का रकबा भी बढ़ाया हैं। मक्के की खेती से होने वाले लाभ के बारे में कृषक यादव बताते है कि मक्का खरीफ की फसल है। इसकी खेती रबी मौसम में भी की जाती है। जहॉ पर सिंचाई का साधन है वहॉ पर खरीफ में मक्का की फसल लेने के बाद रबी में भी दूसरी फसल जैसे सरसों, गेहूं की खेती की जा सकती है। यह नगदी फसल है। इसे भुट्टे के रूप में भी बेच कर अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। मक्का का उपयोग पशु चारा के रूप में और कुक्कुट आहार के रूप में किया जाता है। मक्के की बुआई के लिए प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम हाईब्रिड बीज की जरूरत पड़ती हैै, जिससे लगभग 50 से 60 क्विंटल मक्का की उपज प्राप्त होती है।

16-06-2020
किसानों को चना फसल की क्षति का मुआवजा दिलाने, जनता कांग्रेस ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कवर्धा। जिले में चना फसल के किसानों को अधिक परेशानी का सामना इस बार करना पड़ा। चना फसल मौसम के कारण तहस नहस हो गई। इस पर जोगी कांग्रेस कवर्धा के जिला अध्यक्ष आनंद सिंह ने कहा कि जिले के किसानों को इस सत्र होने वाली बारिश व ओले पड़ने से चने की फसल से बरबाद हो गई। उक्त स्थिति को देखते शासन द्वारा फसल बीमा की मुआवजा राशि दिलाने के लिए सर्वे भी कराया गया था। परन्तु 3 माह बीत जाने के बाद भी किसानों को उनकी मुआवजा राशि प्रदान नहीं की गई है। चना की फसल बुवाई करने वाले लगभग 3000 किसानों को आज तक अपने हक़ की राशि के इंतजार में हैं। जोगी कांग्रेस के सदस्यों द्वारा कलेक्टर से किसानों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तत्काल मुआवजा राशि प्रदान करने की मांग की गई। मांग पर त्वरित संज्ञान लेते हुए बहुत जल्द मुआवजा किसानों को देने की बात जिलाधीश द्वारा कही गई। ज्ञापन सौंपने वाले में आनन्द सिंह,अश्वनी यदु,शिव गायकवाड़, रवि चंद्रवंशी, चंदन मानिकपुरी, रंजीत वर्मा, चेतन वर्मा, जित्तू, कामेश, परमानंद सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

 

16-06-2020
खरीफ की बम्पर फसल लेने के लिए कमर कस ली किसानों ने

रायपुर। आगामी खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार लेने के लिए प्रदेश के किसानों ने आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी है। फसल की उपज के लिए उत्तम किस्म के प्रमाणित बीज और गुणवत्ता युक्त उर्वरक का उठाव किसान अपनी मांग और जरूरत के अनुसार कर रहे हैं। खेती-किसानी  और उत्पादकता में वृद्धि के लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को हरसंभव मदद कर रही है। इसी कड़ी में सहकारी समितियों के माध्यम से बिलासपुर जिले के किसानों को 15 जून की स्थिति में 15 हजार 472 क्विंटल विभिन्न किस्म के धान बीज के साथ-साथ 2 क्विंटल अरहर बीज 225 क्विंटल ढेंचा और 14 हजार 260 मीट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है।उप संचालक कृषि बिलासपुर से मिली जानकारी के अनुसार आगामी खरीफ सीजन में किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने के लिये बीज निगम और सेवा सहकारी समितियों में किसानों के मांग के अनुरूप विभिन्न फसलों के बीजों का भंडारण किया गया है। वर्तमान में विभिन्न सेवा सहकारी समितियों में धान बीज 21743.40 क्विंटल, अरहर 26 क्विंटल, ढेंचा 235 क्विंटल का भंडारण किया जा चुका है। धान की एमटीयू-1010, एमटीयू-1001, राजेश्वरी, पीकेवी-एचएमटी, स्वर्णा सब-1, महामाया स्वर्णा, अरहर कीराजीव लोचन, उड़द कीप्रताप-1, कुलथी की बिलासा आदि किस्में समितियों में उपलब्ध है।उन्होंने बताया कि जिले में खरीफ 2020 के लिए निर्धारित 30625 टन उर्वरक के लक्ष्य के विरूद्ध सहकारी समिति और विपणन संघ के माध्यम से 25730 मैट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया जा चुका है। जिसके विरूद्ध 14260 मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किसानों को किया गया है।कृषि विभाग द्वारा किसानों से अनुरोध किया गया है कि मानसून प्रारंभ हो चुका है इसलिए बोनी के समय खेतों में 125 किलोग्राम सुपर फॉस्फेट और 10 किलोग्राम पोटॉश प्रति एकड़ उर्वरक का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।

 

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