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03-09-2020
यूरिया बिक्री में अनियमितता पाये जाने पर बीज भण्डार का पंजीयन किया गया निलंबित

कोरबा। कलेक्टर किरण कौशल के निर्देश पर जिले में यूरिया बिक्री में अनियमितता करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिले के किसानों को यूरिया पर्याप्त मात्रा में और सही दाम में उपलब्ध हो इसके लिए जिला प्रशासन सजग और गंभीर है। कटघोरा के मेसर्स केशरी बीज भण्डार पर यूरिया बिक्री में अनियमितता पाये जाने के कारण बीज भण्डार का उर्वरक पंजीयन प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया गया है। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले के टाॅप 20 यूरिया खरीदी करने वाले किसानों की जांच प्रतिवेदन के आधार पर मेसर्स केशरी बीज भण्डार कटघोरा उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के खण्ड 5 और 35 का उल्लंघन एवं अनियमितता का दोषी पाया गया जिसके कारण केशरी बीज भण्डार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस के जवाब में केशरी बीज भण्डार द्वारा स्पष्टीकरण दिया गया जो कि संतोष जनक नहीं पाया गया। उप संचालक कृषि ने बताया कि यूरिया बिक्री में अनियमितता पाये जाने के कारण मेसर्स केशरी बीज भण्डार कटघोरा का पंजीयन प्रमाण पत्र निलंबित किया गया है। निलंबन की अवधि में उक्त दुकान में उर्वरक का व्यवसाय करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।

18-08-2020
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 20 अगस्त को 19 लाख किसानों को मिलेगी 1500 करोड़ की दूसरी किश्त

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रदेश के 19 लाख किसानों को 1500 करोड़ की दूसरी किश्त की राशि का ऑनलाइन अंतरित करेंगे। इस अवसर पर तेंदूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2018 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में 232.81 करोड़ की राशि उनके खातों में और साथ ही गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को दूसरे पखवाड़े में बेचे गए गोबर की राशि भी मिलेगी।

बता दें कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रदेश के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ की अनुदान सहायता राशि दी जा रही है, जिसमें प्रथम किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि राजीव गांधी के शहादत दिवस 21 मई को दी गई थी। वहीं इस योजना के तहत दूसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि 20 अगस्त को प्रदान की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। इस योजना के तहत 2 अगस्त से 15 अगस्त तक खरीदे गए गोबर की राशि भी विक्रेताओं को उनके खातों में अंतरित की जाएगी।

14-08-2020
रमन ने पूछा : प्रदेश सरकार बताए, सुबह धान बेचे बिना किसानों को पैसा देने की घोषणा से शाम तक वह क्यों पलट गई?

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने किसानों को बिना धान बेचने 10 हजार रुपए देने की सरकार द्वारा सुबह की गई घोषणा को शाम को पलट देने पर प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। डॉ.सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साध छल-कपट की राजनीति कर लगातार अन्याय करने पर उतारू है। प्रदेश सरकार बताए कि आखिर सुबह किसानों को पैसा देने की घोषणा को शाम तक क्यों बदलना पड़ा? ऐसा करके सरकार किसानों के साथ एक बार फिर वादाखिलाफी की भूमिका तैयार कर रही है।
रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की नेतृत्वहीनता की इससे बड़ी मिसाल और क्या होगी कि प्रदेश सरकार के मंत्री सुबह जो घोषणा करते हैं, शाम को उससे मुकरने के लिए विवश हो जाते हैं। दरअसल कांग्रेस और प्रदेश सरकार में चल रहे गुटीय सत्ता संघर्ष के चलते प्रदेश सरकार दुविधाओं से घिरी हुई है और उसे यह सूझ ही नहीं रहा है कि वह सरकार चलाए कैसे? सुबह बिना धान बेचे किसानों को 10 हजार रुपए देने की घोषणा और शाम को उससे पलटना कांग्रेस के इसी अंतर्विरोध का परिणाम है। डॉ.सिंह ने कहा कि राजनीतिक व प्रशासनिक सूझबूझ और समझ के अभाव में चल रही यह सरकार प्रदेश का कोई भला कर ही नहीं सकती। जो सरकार किसानों का पैसा किश्तों में देने के लिए भी कर्ज पे कर्ज लेकर प्रदेश के अर्थतंत्र को ध्वस्त करने पर आमादा है, वह सरकार बस जुबानी जमाखर्च करके झूठी वाहवाही बटोरने की फिराक में ही लगी हुई है।

 

28-07-2020
किसानों के लिए राहत की खबर, गंगरेल से छोड़ा गया 500 क्यूसेक पानी, इस साल जल भराव की स्थिति है बेहतर

रायपुर। खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए किसानों की मांग और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सिंचाई जलाशयों से जलापूर्ति किए जाने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले पर जल संसाधन विभाग ने अमल शुरू कर दिया है। गंगरेल बांध सहित कई सिंचाई जलाशयों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ दिया गया है। गंगरेल से आज 500 क्यूसेक पानी सिंचाई के लिए छोड़ा गया। बस्तर, राजनांदगांव, कबीरधाम, दुर्ग, महासमुंद, बलौदाबाजार, धमतरी, गरियाबंद आदि जिलों में सिंचाई जलाशयों से खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए जलापूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में 27 जुलाई को उच्च स्तरीय बैठक में खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए जलाशयों से जलापूर्ति किए जाने के फैसले से किसानों को बड़ी राहत मिली है। सिंचाई जलाशयों से जलापूर्ति होने से राज्य के उन इलाकों में जहां लगभग एक पखवाड़े से कम वर्षा हुई है, उन इलाकों में खरीफ फसलों की सिंचाई हो सकेगी। राज्य के बड़े एवं मध्यम सिंचाई जलाशयों में इस साल जल भराव की स्थिति बीते साल की तुलना में लगभग दोगुना है। मनियारी और खारंग जलाशय वर्तमान स्थिति में लबालब है, जबकि मिनी माता बांगो, दुधावा, सोंढूर जलाशय में जल भराव की स्थिति 80 फीसद से अधिक है। गंगरेल जलाशय की सिंचाई क्षमता 2 लाख 64 हजार 311 हेक्टेयर है। इस जलाशय से धमतरी, बालोद, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में सिंचाई होती है।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता महानदी गोदावरी कछार आरके नगरिया ने कहा कि गंगरेल बांध से पानी छोड़ने की मात्रा किसानों की मांग और आवश्यकता को देखते हुए बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बस्तर स्थित कोसारटेडा जलाशय से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। इस जलाशय से बस्तर जिले में 7360 हेक्टेयर में सिंचाई होती है। मुख्य अभियंता डीसी जैन ने बताया कि कबीरधाम जिले में छीरपानी जलाशय, सरोदादादर जलाशय और सुतियापाठ जलाशय से सिंचाई के लिए जलापूर्ति की जा रही है। राजनांदगांव जिले में पिपरिया जलाशय और सुरही जलाशय सहित मोंगरा बैराज से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। बलौदाबाजार के जोंक व्यपवर्तन, धमतरी एवं गरियाबंद जिले में पैरी परियोजना से जलापूर्ति की जा रही है। महासमुंद जिले में कोडार जलाशय, दुर्ग जिले में खपरी जलाशय और बालोद जिला स्थित गोंदली जलाशय से किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है। वर्तमान में मुंगेली जिले का मनियारी जलाशय और बिलासपुर जिले का खारंग जलाशय लबालब है, जबकि कोरबा जिला स्थित मिनीमाता बांगो सिंचाई परियोजना में 86.49, कांकेर स्थित दुधावा जलाशय में 80.74, गरियाबंद जिले के सिकासेर जलाशय में 63.33, धमतरी जिले के सोंढूर जलाशय में 86.90 प्रतिशत एवं माडमसिल्ली जलाशय में 62.36 प्रतिशत, कोडार में 61.56 प्रतिशत  जल भराव है। वर्तमान में उक्त बड़े जलाशयों में 76.17 प्रतिशत जल भराव है, जबकि बीते वर्ष इसी अवधि तक इन जलाशयों में मात्र 40.39 प्रतिशत जल भराव था। इसी तरह राज्य के 33 मध्यम सिंचाई जलाशयों में आज की स्थिति में 58.54 प्रतिशत जल भराव है,जो बीते वर्ष इसी अवधि में 26.60 प्रतिशत जल भराव से लगभग 32 प्रतिशत अधिक है।

 

08-07-2020
मुख्यमंत्री का साहू समाज ने किया सम्मान,योजना के लिए जताया आभार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बुधवार को उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। साहू समाज ने गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सुराजी योजना के तहत गांव-गांव में गौठानों के निर्माण और गोधन न्याय योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री का सम्मान किया। उन्हें अभिनंदन पत्र तथा गाय और बछड़े की एक मूर्ति भेंट की। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कहा कि गौवंश के धार्मिक महत्त्व के साथ ही अब हमें पशुधन के आर्थिक महत्व को भी समझने की जरुरत है। गोधन न्याय योजना के अंतर्गत गोबर संग्रहण कर वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार की जाएगी। इससे किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होगी और इसके उपयोग से जमीन की उर्वरा क्षमता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेली त्योहार से इस बार गोबर क्रय करने की शुरुआत होगी। उन्होंने सभी पशुपालकों एवं किसानों से इस योजना में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आव्हान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना से हमने किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किसानों का सक्षम होना जरूरी है। हमारी यह कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के किसान, मजदूर और सभी वर्ग के लोग आर्थिक रूप से सक्षम बनें। इनकों ध्यान में रखकर ही राज्य सरकार आवश्यक कदम उठा रही है। इस दौरान अर्जुन हिरवानी, थानेश्वर साहू, शांतनु साहू, महेश साहू, तुलसी दास साहू सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

08-07-2020
मोदी कैबिनेट का फैसला सिर्फ दिखावा, आर्थिक व्यवस्था कृत्रिम उपायों से सुधरने वाली नहीं : मोहन मरकाम

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने मोदी कैबिनेट के आज के फैसलों को मजदूर, किसानों, व्यापार जगत, नौजवानों और मजदूरों के लिए सिर्फ दिखावा कहा है। इसे औपचारिकता का निर्वहन निरूपित करते हुए मरकाम ने कहा है कि देश की बिगड़ी आर्थिक व्यवस्था इन कृत्रिम उपायों से सुधरने वाली नहीं है। नोटबंदी, गब्बर सिंह टैक्स, जीएसटी, बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम, बढ़ती महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था कर्ज बांटने वाले लोन मेलों की निरंतरता से सुधरने वाली नहीं है। कर्ज से प्रधानमंत्री मोदी के नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, विजय माल्या जैसों की स्थिति सुधर गई। देश को आज गंभीरता से काम करने वाले अर्थशास्त्री की आवश्यकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और कोविड महामारी से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बार-बार अनुरोध और सकारात्मक लिखित सुझावों के बावजूद, मोदी सरकार अपने अहंकार में कुछ भी करने में विफल रही है ।  
मरकाम ने कहा है कि मोदी सरकार अपनी अहंकारकारी निद्रा से जागे और इन महत्वपूर्ण घरेलू मुद्दों को हल करें। देश और विदेश में भारतीयों के रोजगार पर खतरों को दूर करें और लगातार डाउन स्लाइड पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। आज युवाओं के हाथ में रोजगार नहीं है। मोदी सरकार बनने के बाद हर साल दो करोड़ नौकरियों की दर से 6 साल में 12 करोड़ नौकरियां तो दूर की बात है,जिनके हाथ में मोदी सरकार बनने के पहले नौकरियां, स्वरोजगार था वह भी नोटबंदी और जीएसटी जैसे मोदी की उद्योग-व्यापार विरोधी नीतियों के कारण आज बेरोजगारी के दौर से गुजर रहे है। पढ़े-लिखे युवाओं को पकौड़ा तलने, पंचर बनाने की सलाह देने वाले भाजपा रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी तरह से नाकाम है।

 

01-07-2020
6 साल के मोदी राज में जनता ने देख लिया भाजपा की कथनी और करनी का फर्क : राजेंद्र साहू

दुर्ग। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के फैसलों और नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। राजेंद्र ने कहा कि करोड़ों जनधन खाताधारकों के खाते में 5 सौ रुपए जमा करने वाली केंद्र सरकार महंगाई बढ़ाकर उनकी जेब से 5 हजार रुपए निकाल रही है। किसानों को 2 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि की किस्त देकर मोदी सरकार उनसे 20 हजार रुपए वसूल रही है। आम जनता से 6 साल से फरेब करेन वाली मोदी सरकार अब महंगाई बढ़ाने का नया फरेब शुरू कर दिया है।राजेंद्र ने कहा कि डीजल-पेट्रोल-रसोई गैस के रेट बेतहाशा बढ़ने और आसमान छूती महंगाई के कारण किसानों, जनधन खाताधारकों सहित आम जनता पर कई गुना आर्थिक बोझ बढ़ा है। लोगों की जेब खाली हो रही है। मोदी सरकार आम जनता, बेरोजगारों, किसानों, मजदूरों और लघु उद्यमियों से जुमलेबाजी कर रही है। वादे पूरे करने में नाकाम रहने के बाद अब रोज महंगाई बढ़ाकर आम जनता का ध्यान इन जुमलों से हटाया जा रहा है।          
राजेंद्र ने कहा कि दो करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष रोजगार, किसानों की आय दोगुना करने, पेट्रोल-डीजल-रसोई गैस के दाम कम करने और महंगाई कम करने का वादा कर भाजपा ने सत्ता हासिल की।

ये सभी वादे आज तक पूरे नहीं हुए। वादे पूरा करने में विफल रही मोदी सरकार की कथनी और करनी का फर्क जनता के सामने उजागर हो गया है।राजेंद्र ने कहा कि कोरोना संकट काल में लाखों मजदूरों को मजबूर होकर अपने गांव पैदल जाना पड़ा। किसानों की फसल को अतिवृष्टि, ओला वृष्टि से भारी नुकसान हुआ। लोग बेरोजगार हो गए। सरकार ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की जो धरातल से परे है। शायद पैकेज की बड़ी रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। इन मुद्दों से आम जनता का ध्यान हटाने केंद्र सरकार रोज पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा रही है। लगातार महंगाई बढ़ाकर मोदी सरकार मजदूर, किसान सहित आम जनता की जेब को दीमक की तरह खोखला कर रही है।

 

27-06-2020
पहुंच विहीन इलाकों में भी होगा उजियारा, नदी तट के विद्युत विहीन स्थानों में किसानों को दिए जाएंगे सोलर पंप

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में बैठक लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनियों और क्रेडा के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने क्रेडा के अधिकारियों से कहा कि पहुंच विहीन और दुर्गम इलाकों में सोलर के जरिए विद्युत की व्यवस्था की जाए। नदी किनारे जहां विद्युत लाइन नहीं हैं,उन स्थानों पर सोलर पंप किसानों को दिए जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर पानी में हैवी मेटल या खारे पानी होने की शिकायत है, वहां सतही जल (सरफेस वाटर) के माध्यम से जल आपूर्ति की व्यवस्था की जाए।मुख्यमंत्री ने गरियाबंद के सुपेबेड़ा में नदी के जल से और बेमेतरा, बालोद, धमधा, साजा और नवागढ़ में खारे पानी की शिकायत के कारण सरफेस वाटर का उपयोग कर जल आपूर्ति के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने विद्युत कंपनियों की विभिन्न योजनाओं और सीएसआर मद के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निजी विद्युत संयंत्रों से वेरिएबल कास्ट पर मिलने वाली बिजली की समीक्षा करते हुए कहा कि निर्धारित मात्रा में विद्युत प्रदाय नहीं करने वाले संयंत्र को नोटिस जारी किया जाए।  बैठक में सोलर पेयजल योेजना, सौभाग्य योजना, सौर सुजला योजना, सोलर कोल्ड स्टोरेज, शासकीय भवनों का सौर उर्जीकरण, सोलर विद्युत संयंत्र आदि योजनाओं की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि सौर सुजला योजना के तहत अब तक 78 हजार 730 पम्प स्थापित किए गए है। इससे 2 लाख 46 हजार एकड़ में सिंचाई सुविधा मिल रही है। वर्ष 2020 -21 में 20 हजार सोलर पम्प स्थापित करने का लक्ष्य है। इससे लगभग 50 हजार एकड़ में सिंचाई हो सकेगी। सामुदायिक सिंचाई के 40 प्रोजेक्टों में 3450 एकड़ में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। प्रदेश में 5998 गांवों तथा बसाहटों में 11459 सोलर पेयजल पम्पों के माध्यम से 3.25 लाख परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार 281 सोलर जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित किए गए हैं।बैठक में मुख्य सचिव आरपीमंडल, विद्युत कंपनियों के चेयरमेन और मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, मुख्यमंत्री के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी के एमडी मो.अब्दुल कैसर हक, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी अशोक कुमार, ट्रेडिंग कंपनी के एमडी राजेश वर्मा, जनरेशन कंपनी के एमडी एनएल बिजौरा सहित विद्युत कंपनियों एवं क्रेडा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

27-06-2020
खरीफ फसल के लिए 7.65 किसानों को मिला 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त ऋण

रायपुर। राज्य सरकार प्रदेश में खेती किसानी को बढ़ावा देने और किसानों को समय पर खाद, बीज सहित अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। इस वर्ष खरीफ में राज्य के किसानों को 4 हजार 600 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के  विरुद्ध चालू खरीफ फसल के लिए अब तक 7.65 लाख किसानों को 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित किया गया है। जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक एक हजार 538 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया गया था। इस प्रकार किसानों को इस खरीफ में अब तक 1183 करोड़ रुपए का अधिक ऋण वितरण हो चुका है।मुख्यमंत्री बघेल के निर्देश पर किसानों को ऋण और खाद-बीज के वितरण के लिए सहकारी समितियों में बेहतर व्यवस्था तय की गई है। खरीफ फसलों के लिए सहकारिता के माध्यम से कुल 6.35 मीट्रिक टन रासायनिक खाद के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। 26 जून तक सहकारी समितियों में 5.77 लाख मी.टन खाद का भंडारण किया जा चुका है,जो कि कुल लक्ष्य का 90.81 प्रतिशत है। सहकारी समितियों की ओर से 4.53 लाख टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य का 71 प्रतिशत है। जबकि पिछले साल इसी समय तक सहकारी समितियों की ओर से 2.43 लाख मी.टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया था।

गत वर्ष की तुलना में इस साल 2.10 लाख टन अधिक खाद का वितरण सहकारी समितियों की ओर किया गया है।खरीफ फसल के लिए  बीज निगम की ओर से सहकारी समितियों के माध्यम से 5.88 लाख क्विंटल उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज का भंडारण कराया गया है। 26 जून की स्थिति में कुल 4.52 लाख क्विंटल का उठाव किसानों ने कर लिया है। गत वर्ष इसी अवधि में सहकारी समितियों में 4.98 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण और 2.88 लाख क्विंटल का वितरण किसानों को किया गया था। इसी अवधि की तुलना में गत वर्ष से 1.64 लाख क्विंटल का प्रमाणित बीज अधिक वितरित किया गया है।इस वर्ष राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भी छत्तीसगढ़ राज्य को अब तक 1150 करोड़ रुपए की विशेष और अतिरिक्त साख सीमा स्वीकृत की गई है। इसके विरुद्ध अब तक 740 करोड़ रुपए का आहरण राज्य सहकारी बैंकों ने कर लिया है। राज्य सरकार की किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 18.35 लाख किसानों के खाते में 1492 करोड़ रुपए जमा किए जाने से खेती के प्रति किसानों में रूझान और भी बढ़ा है।देश में जारी कोविड-19 महामारी के दौर में भी राज्य के कृषि क्षेत्र में हुई वृद्धि सुखद और सुकूनदायक है। मानसून के समय पर आगमन एवं कृषि आदान की समय पर अच्छी व्यवस्था से राज्य में इस वर्ष खरीफ फसल के अच्छे उत्पादन की संभावना बढ़ गई है, जिससे किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में और भी सुधार होने के अच्छे संकेत दिख रहे हैं। सहकारी समितियों की कृषि आदान व्यवस्था को चुस्त एवं गतिशील करने के लिए कृषि विभाग के साथ ही सहकारिता विभाग, पंजीयक सहकारी संस्थाएं, छत्तीसगढ़ प्रबंध संचालक विपणन संघ एवं छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों की भी अहम भूमिका रही है। राज्य स्तर पर प्रतिदिन कृषि आदानों की मॉनिटरिंग किए जाने से ही कृषि आदान के क्षेत्र में अच्छी स्थिति निर्मित हुई है।

25-06-2020
किसानों के बनाएं जाएं क्रेडिट कार्ड, स्वरोजगार योजनाओं की पहल के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश

बीजापुर। जिले में शासन की स्वरोजगार योजनाओं का कारगर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशीलता के साथ पहल किया जाये। इस दिशा में विभागीय अधिकारियों सहित बैंकर्स आपसी समन्वय के साथ स्वरोजगारियों के लाभान्वित करने के लिये सक्रिय सहभागिता निभायें।जिले में किसानों को खेती-किसानी कार्य के लिए फसल ऋण प्रदान करने के लिए सभी किसानों का किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाए। इसके साथ ही पशुपालन कुक्कुटपालन, मछलीपालन,साग-सब्जी उत्पादन ईत्यादि कृषि के अनुशांगिक गतिविधियों के लिए कृषकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया जाये। उक्त निर्देश कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में आयोजित जिला स्तरीय साख  समन्वय समिति की बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों सहित बैंकर्स को दिये।कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल ने बैठक में वित्तीय वर्ष 2019-20 के तहत स्वरोेजगार योजनाओं के क्रियान्वयन ऋण-अनुदान स्वीकृति एवं वितरण स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए स्वीकृत सभी प्रकरणों के स्वरोजगारियों को आगामी 30 जून तक ऋण-अनुदान वितरित सुनिश्चित किये जाने अधिकारियो को निर्देशित किया। उन्होनें बैंकों के ऋण-जमा अनुपात सहित प्राथमिकता प्राप्त सेक्टरों में ऋण वितरण स्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिले की अधिकांश आबादी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति वर्ग की है। इन जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता प्राप्त सेक्टरों में ऋण मुहैय्या कराये जाने संवेदनशीलता के साथ पहल किया जाये।इसके लिए बेरोजगार युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाये।कलेक्टर रितेश अग्रवाल ने बैंकर्स को  बैंक सखी, कियोस्क,सीएसपी के जरिये मनरेगा मजदूरी,पेंशन भुगतान,तेन्दूपत्ता पारीश्रमिक भुगतान में प्रगति लाये जाने के निर्देश दिए। बैठक में खादी एवं ग्रामोद्योग, जिला व्यापार एवं उद्योग,राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन,जिला अंत्यावसायी सहकारी विकास समिति ईत्यादि की स्वरोजगार योजनाओं के तहत वर्ष 2020-21 के लिए आवंटित लक्ष्य के अनुरूप प्रकरण तैयार कर 15 जुलाई तक बैंकों में प्रस्तुत किये जाने के निर्देश सम्बन्धित अधिकारियों को दिये। बैठक के दौरान सीईओ जिला पंचायत पोषणलाल चन्द्राकर,अग्रणी बैंक प्रबंधक प्रतीक अग्निहोत्री सहित विभागीय अधिकारी तथा बैंकर्स उपस्थित थे।

 

24-06-2020
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा, सोयाबीन की बोनी जुलाई के दूसरे सप्ताह के बाद करने से उत्पादन में आती है गिरावट  

रायपुर। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि सोयाबीन की प्रमुख किस्में जिसमें जे.एस.-335, जे.एस.-93-05, जे.एस.-97-52, जे.एस.-95-60, आर.के.एस.-18, एन.आर.सी.-37, अहिल्या-4 का उपयोग करें। सोयाबीन मुख्यत खरीफ की फसल है, इसकी बोनी का उचित समय जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के द्वितीय सप्ताह तक का होती है। जुलाई द्वितीय सप्ताह के बाद बोनी करने पर उत्पादन में गिरावट आती है।खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती करने के लिए किसानों को भूमि का चयन, भूमि की तैयारी, उन्न्त किस्म के बीज और  उचित समय पर बीज की बुआई से उत्पादन में अच्छा वृद्धि होती है। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ में सोयाबीन के क्षेत्रफल में निरंतर वृद्धि हो रही है। छत्तीसगढ़ में सोयाबीन मुख्य रूप से राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, मुंगेली और कवर्धा जिलों में उगाया जाता है। सोयाबीन के लिए अच्छे  जल निकास वाली डोरसा और कन्हार प्रकार की जमीन उपयुक्त होती है। सोयाबीन के लिए सबसे अच्छी भूमि कन्हार भर्री पाई गई है। धनहा खेतों में जल निकास की उचित व्यवस्था करके सोयाबीन की खेती की जा सकती है।

 

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