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10-08-2021
अंबिका सिंहदेव ने हितग्राहियों को बांटे जाति प्रमाण पत्र और वन अधिकार ऋण पुस्तिका

कोरिया। विकासखंड बैकुंठपुर के ग्राम सोरगा में संसदीय सचिव एवं बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने हितग्राहियों को जाति प्रमाण पत्र तथा ऋण पुस्तिका का वितरण किया। कार्यक्रम में एसडीएम बैकुण्ठपुर एसएस दुबे एवं तहसीलदार तथा ग्रामीणजन उपस्थित थे। शिविर में 1 हजार 268 जाति प्रमाण पत्र स्कूल शिक्षा विभाग को संकुलवार वितरण के लिए दिए गए। 500 वन अधिकार ऋण पुस्तिका का वितरण भी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किया गया। इसके साथ ही 17 शिशु जाति प्रमाण पत्र, 10 फौती नामांतरण एवं बी 1 राजस्व विभाग ने वितरित किए। 

 

05-08-2021
वन अधिकार समिति में 9 व्यक्तिगत और 7 सामुदायिक वन संसाधन के दावे सर्वसम्मति से किए गए अनुमोदित

धमतरी। कलेक्टर पीएस एल्मा की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय वन अधिकार समिति की बैठक हुई। बैठक में अनुसूचित जाति और अन्य परंपरागत वन निवासी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए पिछले जुलाई माह में बुलाई गई बैठक की कार्रवाई विवरण की जानकारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ.रेशमा खान ने दी। उन्होंने बताया कि ज़िला स्तरीय समिति को नौ नए व्यक्तिगत और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के आठ दांवे अनुभाग स्तर की समिति से मिले हैं। बैठक में नौ व्यक्तिगत और सात सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के मिले दांवे का सर्वसम्मति से अनुमोदन किया गया। बताया गया कि व्यक्तिगत वन अधिकार के जो नौ दावे मिले हैं वह सब नगरीय क्षेत्र नगरी के हैं। इसके अलावा सामुदायिक वन संसाधन के पांच दावे टाइगर रिजर्व क्षेत्र के हैं। बैठक में वनमंडलाधिकारी सतोविषा समाजदार, उप निदेशक उदंती सीता नदी टाईगर रिजर्व आयुष जैन, समिति के सदस्य और ज़िला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी, कांति कंवर, कुसुमलता साहू, विनीता कोठारी, टिकेश्वर ध्रुव, सत्यनारायण साहू इत्यादि उपस्थित रहे।

 

27-07-2021
वन अधिकार के दावे अब ऑनलाइन, धमतरी और कोरबा जिले में पायलट प्रोजेक्ट शुरू

रायपुर। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना वन अधिकार पत्र वितरण के दावें अब ऑनलाइन भी दायर हो सकेंगे। प्रदेश के दो जिले धमतरी और कोरबा के एक-एक विकासखण्ड में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वन अधिकार मान्यता पत्र से संबंधित ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर हितग्राहियों द्वारा दावा दायर करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो रही है। इसके अंतर्गत 27 जुलाई से 29 जुलाई तक धमतरी जिले के विकासखण्ड नगरी में और 2 अगस्त से 4 अगस्त तक कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखण्ड में वन अधिकार मान्यता पत्र के ऑनलाइन दावें दायर करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है।


आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने पायलट प्रोजेक्ट के प्रारंभ होने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि इससे हितग्राहियों को जटिलतम कागजी कार्यवाही से मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ही हितग्राहियों को उनके आवेदन पर की गई कार्यवाही की पूर्ण जारी ऑनलाइन प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि योजना के उत्साहवर्धक परिणाम मिलने पर शीघ्र ही अन्य जिलों में प्रारंभ किए जाने की मंशा है। विभागीय सचिव डीडी सिंह और आयुक्त शम्मी आबिदी स्वयं इस योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और उनके द्वारा संबंधित जिले के योजना प्रभारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।


मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि वन अधिकार मान्यता पत्र वितरण में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। राज्य में 31 दिसम्बर 2020 तक वन अधिकार के व्यक्तिगत दावों के लिए प्राप्त कुल 8 लाख 37 हजार 562 आवेदन पत्रों में से 4 लाख 36 हजार 619 वन अधिकार मान्यता पत्र का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा सामुदायिक वन अधिकार के प्राप्त 50 हजार 564 आवेदन पत्रों में से 44 हजार 938 वन अधिकार मान्यता पत्र वितरित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सभी निरस्त दावों पर पुनर्विचार और समीक्षा कर सभी पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पत्र दिलाए जाने की कार्यवाही की जा रही है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास विभाग द्वारा इसी चरण में सुधार करते हुए अब वन अधिकार मान्यता पत्र संबंधी ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है।


उल्लेखनीय है कि पूर्व में इस योजना के अंतर्गत हितग्राहियों द्वारा कागजी प्रक्रिया के तहत वन अधिकार मान्यता पत्र के दावें भरे गए हैं, जिसके कारण प्रक्रिया के नियमानुसार क्रियान्वयन में व्यावहारिक समस्या सामने आई हैं। इन समस्याओं के निराकरण और वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा यू.एन.डी.पी. के तकनीकी सहयोग से वेब आधारित एमआईएस पोर्टल विकसित किया है। इसके द्वारा दावा दायर करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से पूर्ण किया जा सकेगा और आवेदक द्वारा भरे गए दावें पर की गई कार्यवाही की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दावा करने वाले को उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही जिलेवार वन अधिकार मान्यता पत्र दावों की वस्तुस्थिति भी पोर्टल पर सभी के लिए उपलब्ध होगी।

 

23-07-2021
वन अधिकार पत्र वितरण में अनियमितता, भाजपा ने कलेक्टर से की जांच की मांग

अंबिकापुर। वन अधिकार पत्र वितरण में अनियमितता, फर्जीवाड़ा और हेरफेर को लेकर भाजपा ने जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर सरगुजा से इसकी जांच की मांग की है। भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह के साथ त्रिलोक कपूर कुशवाहा, प्रबोध मिंज, आलोक दुबे अभिमन्यु गुप्ता, मधुसूदन शुक्ला एवं अजय सिंह ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही अंबिकापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बधियाचूआ तथा खैरबार में महामाया पहाड़ी आरक्षित वन भूमि कक्ष क्रमांक 2582 तथा 2583 में वन अधिकार पत्र वितरण में फर्जीवाड़ा की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अपात्र व्यक्तियों का अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निकासी अधिनियम 2006 तथा अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी नियम 2008 यथा संशोधित 2012 के प्रावधान के विपरीत वन अधिकार पत्र दिया गया तथा इस प्रकार अवैध प्राप्त वन अधिकार पत्र की भूमि की बिक्री की जा रही है। इस पूरे प्रक्रिया में  शासकीय अधिकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। वन अधिकार पत्र वितरण की प्रक्रिया अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी नियम 2008 तथा संशोधित 2012 में निहित है। बधिया चूआ एवं खैरबार पंचायत अंतर्गत वितरित वन अधिकार पत्र नियम एवं प्रक्रिया के विरुद्ध जारी किए गए हैं। प्रक्रिया में निहित कोई भी दस्तावेज तैयार नहीं किया गया है।


वन अधिकार पत्र वितरण की कानूनी प्रक्रिया एवं नियम पर बिंदुवार प्रश्न उठाते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि अधिनियम की धारा 4 ( 4) के अनुसार वन अधिकार पत्र वंशागत होगा किंतु संक्रमणीय या अंतरण योग्य नहीं होगा, लेकिन वन अधिकार पत्र धारकों की ओर से यह भूमि दूसरे व्यक्ति के नाम से अंतरित की जा रही है, बेधड़क बेची जा रही है, जो अधिनियम का उल्लंघन है। दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध अधिनियम अंतर्गत कठोरतम दंडात्मक कार्यवाही करने एवं समस्त अपात्र एवं अवैधानिक तरीके से वितरित वन अधिकार पत्रों को निरस्त करने की मांग की गई है और ऐसा नहीं करने पर जन आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इसकी पूरी जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।

15-06-2021
वन अधिकार पत्र से ग्रामीणों को मिला आजीविका का साधन, भूपेश बघेल ने दिए खेती-किसानी के टिप्स

रायपुर। राज्य सरकार की ओर से ग्रामीणों को वन अधिकार पत्र दिए जाने से उन्हें अपने जमीन पर अधिकार मिलने के साथ आजीविका के साधन के रूप में बड़ा सहारा मिला है। बलरामपुर जिले में विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को मुरका गांव के वनअधिकार पत्र प्राप्त करने वाले ग्रामीण फूूलसाय और राजाराम पोर्त से वर्चुअल माध्यम से बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना। मुख्यमंत्री बघेल ने दूरस्थ जिले के ग्रामीणों से न सिर्फ वन अधिकार पत्र से उनके जीवन में आए बदलाव और सहूलियत के संबंध में जानकारी ली, बल्कि अपने किसानी के अनुभव से उन्हें जमीन की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने सुझाव भी दिया।


मुख्यमंत्री बघेल से बात करते हुए राजाराम पोर्ते ने बताया कि उन्हें 2 एकड़ जमीन का पट्टा मिला है,जिसमें डबरी और कुआं भी है। कुंआ के पानी का उपयोग वे साग-सब्जी लगाने में करते हैं। डबरी से गेहूं, सरसों बोते हैं और उसमें मछली पालन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल की ओर से सब्जी के उत्पादन के संबंध में पूछने पर राजाराम ने बताया कि दो से ढाई क्विंटल सब्जी उन्होंने बेची है। इस पर बघेल ने सब्जी का उत्पादन कम होने का कारण पूछा तो  राजाराम ने नई जमीन और उपजाऊ नहीं होना बताया। इस पर मुख्यमंत्री बघेल ने उन्हें खेती-किसानी का गुर बताते हुए जमीन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उसमें वर्मी कम्पोस्ट डालने की सलाह दी। इसी तरह फूल साय ने बताया कि उन्हें ढाई एकड़ का वन अधिकार पत्र मिला है,जिसमें एक डबरी और एक कुआं है। मुख्यमंत्री बघेल कुआं में पानी होने संबंधी जानकारी लेने पर फूलसाय ने बताया कि उनके कुआं में पानी है। इससे वे सिंचाई करते हैं और डबरी में मछली पालन करते हैं। मुख्यमंत्री के पूछने पर उन्होंने बताया कि रोहू मछली का पालन कर रहे हैं।

 

24-03-2021
वन अधिकार और पेसा अधिनियम पर जानकारी के लिए हुई कार्यशाला

कोरिया। संचालक आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर के तत्वाधान में वन अधिकार अधिनियम 2006, पेसा अधिनियम एवं अनुसूचित क्षेत्र में भूमि क्रय-विक्रय के संबंध में राजस्व भू-संहिता की धारा 170(ख) का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन को दृष्टिगत रखते हुए पंचायत के सभाकक्ष में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण सह-कार्यशाला में वन अधिकार अधिनियम एवं पेसा अधिनियम के प्रावधानों पर चर्चा की गई। जिसमें वन अधिकार अधिनियम 2006, नियम 2007 तथा संशोधित नियम 2012 में विहित प्रावधानों एवं विभिन्न धाराओं के अधीन वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन, ग्राम सभा, वन अधिकारी समितियों, उपखंड स्तरीय एवं जिला स्तरीय समिति के गठन तथा उनके कृत्यों के साथ साथ व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक वन अधिकार एवं सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों, पेसा अधिनियम एवं अनुसूचित क्षेत्र में भूमि क्रय-विक्रय के संबंध में राजस्व भू-संहिता की धारा 170(ख) पर राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स  प्रखर एवं  विभोर के द्वारा विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों द्वारा अधिनियमों से संबंधित शंकाओं के निवारण के लिए कई सवाल पूछे गए, जिनका राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनरों के द्वारा विस्तारपूर्वक चर्चा कर उनके प्रश्नों का युक्तियुक्त समाधान किया गया। उपस्थित जनजाति समाज प्रमुखों एवं जन-प्रतिनिधियों ने कहा कि शासन द्वारा आयोजित उक्त प्रशिक्षण सह-कार्यशाला के आयोजन से जनजाति समुदायों को उनके अधिकारों के संबंध में जागरूकता लाने का शासन द्वारा यह एक सराहनीय प्रयास है, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर जनजाति समाज के उत्थान एवं अपने अधिकारों के लिए अग्रसर हो सकें।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रेणुका सिंह, कलेक्टर  एसएन राठौर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुणाल दुदावत, अपर कलेक्टर सुखनाथ अहिरवार, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त डाॅ.ललित शुक्ला सहित जिला एवं उपखण्ड स्तरीय वन अधिकार समिति के सभी सदस्यगण, समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, समस्त जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सभी वन क्षेत्रपाल, जनजाति समाज प्रमुख एवं प्रत्येक विकासखण्ड से एक-एक सरपंच एवं प्रशासन अकादमी निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त जिले के मास्टर ट्रेनर्स उपस्थित रहे।

 

09-11-2020
मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह ने कहा,वन अधिकार मान्यता पत्रधारियों को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाएं

रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम सोमवार को  वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय योजनाओं और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने व्यक्तिगत वन अधिकार मान्यता पत्रधारियों को शासन की सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए। मंत्री टेकाम ने वनभूमि पट्टाधारियों को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लाभ देने के साथ ही उन्हें नगदी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। वन अधिकार के संबंध में गांव की परम्परागत सीमा को ही मान्य करने तथा दो या दो से अधिक गांवों के मध्य सीमा-विवाद के मामलों का निराकरण ग्रामवासियों के सामंजस्य से करने के निर्देश दिए। इस दौरान आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास सचिव डीडी सिंह, संचालक शम्मी आबिदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि विभाग के द्वारा मुख्य रूप से छात्रावास, आश्रम, एकलव्य विद्यालय, प्रयास विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। साथ ही वन अधिकार पट्टा के वितरण में विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि वन अधिकार पट्टों के वितरण में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्देशों के परिणाम स्वरूप आज छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी कार्यवाही करने वाले राज्यों की सूची में शामिल है। समीक्षा के दौरान बताया गया कि व्यक्तिगत वन अधिकार में स्वीकृत दावों की संख्या 4 लाख 50 हजार 504 है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत वन अधिकार दावों के निराकरण के संबंध में वन अधिकार समिति को शामिल किया जाए। संबंधित व्यक्ति को उसके द्वारा उचित अभिलेख, गवाह, दस्तावेज प्रस्तुत करने का मौका दिया जाए। डॉ.टेकाम ने कहा कि रायगढ़, कोरबा और अन्य जगह जहां माईनिंग क्षेत्र प्रस्तावित हैं वहां भी वन अधिकार पत्र दिया जाना है। उन्होंने सामुदायिक दावों में नजरी नक्शे और चौहद्दी की शिकायत के निराकरण के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने के निर्देश दिए। डॉ.टेकाम ने कहा कि वन अधिकार देने के साथ भूमि का कब्जा भी दिलाना सुनिश्चित करें और शासन की योजनाओं का लाभ संबंधितों को दिया जाए। डॉ.टेकाम ने कहा कि प्रदेश में मॉडल छात्रावासों का निर्माण किया जाना है। बस्तर संभाग में मॉडल छात्रावासों के लिए 25 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है।

उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं के अपने-अपने भवन है,जिसमें मॉडल छात्रावास बनाने के लिए अन्य कार्य कराया जाना है। जिससे छात्र-छात्राओं को वहां का वातावरण अच्छा लगे, साफ पानी, लाइब्रेरी, गार्डन, सीसी टी.व्ही. कैमरा, सुविधायुक्त शौचालय आदि को व्यवस्थित करना है। डॉ. टेकाम ने बस्तर संभाग सहित धमतरी के छात्रावासों के कार्य जल्द से जल्द शुरू करने और इस संबंध में कलेक्टर से चर्चा करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने नवीन स्वीकृत भवनों के निर्माण कार्य को शुरू कराए जाने से पूर्व निर्माण स्थल का मौका-मुआयना किए जाने के निर्देश विभाग के मुख्यअभियंता एवं कार्यपालन अभियंता को संयुक्त रूप से करने के निर्देश दिए।डॉ. टेकाम ने कहा कि निकट भविष्य में जब भी छात्रावास-आश्रम खुलेंगे वहां दैनिक स्वच्छता और सेनिटाइजेशन के लिए राष्ट्रीय रोड नियंत्रक केन्द्र द्वारा जारी गाईडलाईन के आधार पर मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि छात्रावास-आश्रम, एकलव्य और अन्य संस्थाओं के सभी कर्मचारियों को मानक संचालन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाए तथा इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर पुनर्प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्योंकि कोरोना का प्रकोप अभी समाप्त नहीं हुआ है उससे बचने के लिए सभी उपाये निरंतर करते रहना पड़ेगा। अधिकारी विभागीय गतिविधियों का मैदानी क्षेत्र में भ्रमण कर अवलोकन करते रहें।डॉ. टेकाम ने कहा कि सभी एकलव्य विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किए जाने की योजना है। इसको ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को आवश्यक अधोसंरचना एवं अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

 

31-10-2020
वन अधिकार अधिनियम क्या है ये बताएंगे ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव कल रेडियो पर

रायपुर। 1 नवम्बर को रेडियो पर वन अधिकार अधिनियम की जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव देंगे। वे कल शाम साढ़े सात बजे से आठ बजे तक आकाशवाणी रायपुर से प्रसारित विशेष कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ में इसके विभिन्न प्रावधानों और ग्राम सभा को दिए गए अधिकारों के बारे में बताएंगे। वे इस दौरान श्रोताओं के पूछे गए सवालों के जवाब भी देंगे। इस कार्यक्रम को मीडियम वेब 981 किलोहर्ट्ज पर सुना जा सकता है। प्रदेश में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्र एक साथ इस कार्यक्रम को रिले करेंगे। उल्लेखनीय है कि विभागीय योजनाओं की जानकारी देने और इनका लाभ उठाने लोगों को प्रेरित करने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ठाकुर प्यारेलाल राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान, निमोरा द्वारा तैयार साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम ‘हमर ग्रामसभा’ का आकाशवाणी रायपुर से हर रविवार शाम साढ़े सात बजे से आठ बजे तक प्रसारण किया जाता है।

22-10-2020
पट्टाधारकों की धान खरीदी के लिए पंजीयन शुरू, कलेक्टर ने 31 अक्टूबर तक पूरा करने दिए निर्देश

कोरबा। राज्य शासन ने वन अधिकार पट्टे की जमीन पर उगाये धान को भी समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है। अब वन अधिकार पट्टे पर धान की फसल ले रहे किसान अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। कलेक्टर किरण कौशल ने वन अधिकार पट्टे प्राप्त सभी किसानों जो धान की फसल ले रहे हैं उनका पंजीयन 31 अक्टूबर तक करवाने के निर्देश राजस्व अधिकारियों को दिए हैं। खाद्य विभाग द्वारा वन अधिकार पट्टा वाले किसानों के पंजीयन के लिए साफ्टवेयर में आवश्यक प्रावधान किया गया है। जिले में कृषि कार्य के लिए 709 ग्रामों के कुल 45 हजार 218 किसानों को वन अधिकार पट्टा वितरित किया गया है। इसके अन्तर्गत 33 हजार 270 हेक्टेयर से अधिक का रकबा शामिल है। वन अधिकार पट्टे की जमीन में जो किसान धान की फसल ले रहे हैं वह अब अपना फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। विकासखंड कोरबा के 11 हजार 327 किसानों को कृषि कार्य के लिए पांच हजार 493 हेक्टेयर जमीन का मालिकाना हक वन अधिकार पट्टे के रूप में दिया गया है। इसी प्रकार करतला के दो हजार 845 किसानों को छह हजार 214 हेक्टेयर, पाली के नोै हजार 650 किसानों को एक हजार 578 हेक्टेयर, कटघोरा के दो हजार 736 किसानों को 615 हेक्टेयर और विकासखंड पोंड़ी उपरोड़ा के 18 हजार 660 किसानों को 19 हजार 367 हेक्टेयर रकबे से अधिक जमीन का वन अधिकार पट्टा प्रदान किया गया है।

 

06-10-2020
वन अधिकार मान्यता पत्र बनाने की धीमी गति पर कलेक्टर ने जताई नाराजगी,एक सप्ताह में भेजने के दिए निर्देश

कोरबा। कलेक्टर किरण कौशल ने मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई समय सीमा की साप्ताहिक बैठक में वन अधिकार मान्यता पत्र बनाने की धीमी गति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों, राजस्व एवं वन अमले के साथ-साथ आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त को सभी पात्र हितग्राहियों के वन अधिकार मान्यता पत्र बनाने के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। किरण कौशल ने अगले एक हफ्ते में हर गांव में ग्राम सभाओं का आयोजन कर वन अधिकार पट्टे के लिए प्राप्त आवेदनों का परीक्षण-निरीक्षण करके पात्र हितग्राहियों के प्रस्तावों का अनुमोदन सुनिश्चित कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। जिले में लक्ष्य अनुसार तीन हजार 960 सामुदायिक पट्टे वितरित होने हैं, जिनमें से अभी तक केवल एक हजार 35 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। कलेक्टर ने सामुदायिक पट्टों के प्रकरण लक्ष्य अनुसार तैयार करने के निर्देश दिए और व्यक्तिगत पट्टों के लिए पात्र सभी हितग्राहियों के प्रकरणों को ग्राम सभाओं में अनुमोदन कराकर विकासखंड स्तरीय समिति को भेजने के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत कुंदन कुमार, नगर निगम आयुक्त एस.जयवर्धन, संयुक्त कलेक्टर सूर्यकिरण तिवारी सहित सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे। वीडियो कांफे्रंसिंग के माध्यम से सभी एसडीएम तथा ब्लाक स्तरीय अधिकारी भी समय सीमा की बैठक में शामिल रहे।

बैठक में कलेक्टर ने जिले में सड़कों के मरम्मत के कामों की भी जानकारी लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री से ली। उन्होंने पाली से डूमरकछार के बीच सड़क मरम्मत का काम नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए कटघोरा एसडीएम को सत्त मानिटरिंग करने के निर्देश दिए। कलेक्टर कौशल ने सड़क मरम्मत के कामों में लगे ठेकेदारों सहित निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों और सभी सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों की भी बैठक आहूत करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिले के ग्रामीण इलाकों में लगने वाले पारंपरिक हाट-बाजारों की भी जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने ऐसे सभी हाट-बाजारों को पूर्व की तरह ही संचालित कराने के इंतजाम कराने के निर्देश सभी अनुविभागीय राजस्व अधिकारियों को दिए। उन्होंने हाट-बाजारों में कोविड प्रोटोकाॅल के पालन के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनना भी सुनिश्चित कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। कलेक्टर ने बाजारों में आने वाले ग्राहकों और दुकान लगाने वाले सभी दुकानदारों को मास्क पहनना अनिवार्य करने के निर्देश दिए। किरण कौशल ने बाजारों में पहले की तरह ही चलित मेडिकल टीम के भी उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए। किरण कौशल ने सभी जनपदों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में प्रतिदिन की जा रही गोबर खरीदी का सतत निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए।

 

18-08-2020
वन अधिकार मान्यता पत्र देने में देश का अग्रणी राज्य बना छत्तीसगढ़, वनवासियों के चेहरे पर खुशियां अपार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं वन अधिकार मान्यता अधिनियम-2006 के कार्यों की समीक्षा करने के साथ पूर्व में निरस्त दावों की त्रुटियों को सुधार कर वनवासियों को उनके पर्यावास से जोड़ रहे हैं। तब से वन अधिकार पट्टा वितरण के कार्यों में प्रगति आई है। अब परम्परागत वनवासियों, अनुसूचित जनजातियों को अपना घरौंदा टूटने का भय, बेदखल होने का डर नहीं सताता। शासन द्वारा वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वितरित भूमि में समतलीकरण एवं मेड़ बंधान कार्य, खाद एवं बीज, कृषि उपकरण, सिंचाई के लिए नलकूप, कुआं, स्टापडैम, प्रधानमंत्री आवास से भी लाभान्वित किया जा रहा है। व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने से वनग्रामों में निवास करने वाले वनवासी निश्चिंत होकर रहने लगे हैं। इनकी प्रगति के द्वार भी खुल गए हैं। अधिनियम-2006 के अंतर्गत प्रदेश का पहला सामुदायिक वन संसाधन अधिकार मिलने के बाद गांव की सीमा से लगे वन पर गांववालों का अधिकार हो गया है। धमतरी जिले के विकासखण्ड नगरी के अंतर्गत आने वाला ग्राम जबर्रा औषधीय पौधों के लिए पहले से विख्यात है। इस गांव को वन संसाधन अधिकार के रूप में मान्य किया गया है। इस अधिकार के बाद ग्रामसभा के पारम्परिक सीमा के भीतर स्थित जंगल के सभी सामुदायिक संसाधनों का संरक्षण, पुनरुत्पादन तथा प्रबंधन जैसे पौधरोपण, जंगल का रखरखाव, वन्यप्राणियों, जैव विविधता की सुरक्षा गांववासी करने लगे हैं। उन्हें जंगल पर नैसर्गिक अधिकारों की मान्यता मिल गई है। यहां 5,352 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार की मान्यता दी गई है। ग्रामसभा अधिनियम की धारा 5 के अनुसार वन संसाधनों तक पहुंच को भी विनियमित किया जा सकता है। यह देश में किसी एक गांव को मान्य किए जाने वाला सर्वाधिक क्षेत्र है। यह वन विभाग के 17 कम्पार्टमेंट में तथा 3 बीट में फैला है। यहां वन प्रबंधन समिति बनाकर देख-रेख के लिए नियम बनाए गए हैं।

वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ आगे

वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य अन्य प्रदेशों की तुलना में आगे है। यहां 4 लाख 41 हजार व्यक्तिगत वन अधिकर दावे स्वीकृत हैं। जून 2020 की स्थिति में प्रदेश में 8 लाख 9760 व्यक्तिगत दावे प्राप्त हुए जिनमें से 4 लाख 22 हजार 539 वितरित किए गए। सामुदायिक वन अधिकार के 35 हजार 558 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 30 हजार 941 वितरित किए गए। कुल 4 लाख 53 हजार  480 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। मध्यप्रदेश में 2 लाख 56 हजार 997, महाराष्ट्र में एक लाख 72 हजार 116, ओड़िशा में 4 लाख 43 हजार 761 और गुजरात में 93 हजार 704 सामुदायिक तथा व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 39 लाख 12 हजार 228 एकड़ भूमि वन भूमि के रूप में मान्य किए गए हैं।

बस्तर संभाग में सबसे अधिक वन अधिकार पत्र वितरित

बस्तर के आदिवासियों की परंपराएं, कला व संस्कृति, रहन-सहन, भाषा, बोली की अपनी अलग पहचान है। ऐसे में वन अधिकार मान्यता पत्र बस्तर के वनवासियों को अधिक से अधिक संख्या में मिले, यह शासन-प्रशासन की प्राथमिकता में है। प्रदेश में वन अधिकार पत्र का वितरण सबसे अधिक बस्तर संभाग में हुआ है। यहां एक लाख 45 हजार 699 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। सामुदायिक वन अधिकार के 14405 अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। सरगुजा संभाग में एक लाख 9 हजार 22 व्यक्तिगत, 8 हजार 755 सामुदायिक वन अधिकार, बिलासपुर संभाग में 85 हजार 292 व्यक्तिगत और 3256 सामुदायिक वन अधिकार, रायपुर संभाग में 51 हजार 523 व्यक्तिगत और 2179 सामुदायिक, दुर्ग संभाग में 31 हजार तीन व्यक्तिगत और 2346 सामुदायिक वन अधिकार पत्र का वितरण किया गया है।

जगदलपुर देश का पहला नगर निगम जहां शहरी लोगों को मिला वन अधिकार पत्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर राज्य में वनवासियों की खुशहाली और वनांचल के गांवों को स्वावलंबी बनाने के उद्ेदश्य से इंदिरा वन मितान योजना शुरू किए जाने की भी घोषणा की है। इस योजना के तहत राज्य के आदिवासी अंचल के दस हजार गांव में युवाओं के समूह गठित कर उनके माध्यम से वन आधारित  समस्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इसी तरह छत्तीसगढ़ का जगदलपुर देश का पहला नगर निगम बन गया है जहां शहरी लोगों को वन भूमि का अधिकार पत्र प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 4 लोगों को वन अधिकार पत्र देकर इस अभियान की शुरुआत की। यहा 1777 लोगों ने आवेदन किया है। जिस पर कार्यवाही चल रही है। इस तरह देखा जाए तो छत्तीसगढ़ के सरगुजा से लेकर बस्तर तक लगभग सभी जिलों में वन अधिकार मान्यता पत्र मिलने की खुशी वनवासी व परम्परागत निवासियों में है।

वनभूमि अधिकार पत्र के साथ योजनाओं का दिया जाता है लाभ

राज्य शासन द्वारा कई पीढ़ी या वर्षों से काबिज भूमि पर वन अधिकार मान्यता पत्र दिए जाने के साथ ही लाभान्वित हितग्राहियों को शासन की अनेक योजनाओं का लाभ देकर आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया जाता है। वितरित भूमि में भूमि समतलीकरण, मेड़ बंधान, खाद-बीज, कृषि उपकरण, सिंचाई सुविधा का लाभ तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से भी लाभान्वित किया जाता है। प्रदेश में भूमि समतलीकरण एवं मेड़ बंधान से 1 लाख 49 हजार 762, खाद-बीज से 1 लाख 84 हजार 311, कृषि उपकरण से 11 हजार 40 तथा सिंचाई सुविधा नलकूप, कुआं, स्टापडैम से 41 हजार 237 हितग्राही लाभान्वित किए गए हैं।

 

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