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09-05-2020
अपने स्वास्थ्य को लेकर अमित शाह ने किया ट्वीट, कहा- मैं स्वस्थ हूं,किसी बीमारी से पीड़ित नहीं

नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया, जो उनके स्वास्थ्य को लेकर फैलाई जा रही थीं। उन्होंने कहा, पिछले दिनों से कुछ मित्रों की ओर से सोशल मीडिया के माध्यम से मेरे स्वास्थ्य के बारे में कई मनगढ़ंत अफवाहें फैलाई जा रही हैं।अमित शाह ने आगे कहा, “देश इस समय कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़ रहा है और देश के गृह मंत्री के नाते देर रात तक अपने कार्यों में व्यस्त रहने के कारण मैंने इन सब पर ध्यान नहीं दिया। जब यह मेरे संज्ञान में आया तो मैंने सोचा कि यह सभी लोग अपने काल्पनिक सोच का आनंद लेते रहें, इसलिए मैंने कोई स्पष्टता नहीं की।”उन्होंने कहा, "परंतु मेरी पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं और मेरे शुभचिंतकों ने विगत दो दिनों से काफी चिंता व्यक्त की, उनकी चिंता को मैं नजरअंदाज नहीं कर सकता। इसलिए, मैं आज स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पूर्ण रुप से स्वस्थ हूं और मुझे कोई बीमारी नहीं है।"गृह मंत्री ने आगे कहा, "हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ऐसा मानना है कि इस तरह की अफवाह स्वास्थ्य को और अधिक मजबूत करती हैं।

इसलिए, मैं ऐसे सभी लोगों से आशा करता हूं कि वे यह व्यर्थ की बातें छोड़कर मुझे मेरा कार्य करने देंगे और स्वयं भी अपना काम करेंगे।" शाह ने कहा, "मेरे शुभचिंतकों और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं के मेरा हालचाल पूछने और मेरी चिंता करने के लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। जिन लोगों ने ये अफवाह फैलाई हैं उनके प्रति मेरे मन में कोई दुर्भावना या द्वेष नहीं है।"गृह मंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को फैलाई जा रही अफवाहों को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने निंदनीय करार दिया। उन्होंने कहा- “गृह मंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य को लेकर असंवेदनशील टिप्पणियां घोर निंदनीय है। किसी के स्वास्थ्य के बारे में इस तरह की गलत सूचना फैलाने से ऐसे लोगों की मानसिकता का पता चलता है। मैं इसकी कड़ी भर्त्सना करता हूं और भगवान से प्रार्थना करता हूं कि ऐसे लोगों को सदबुद्धि दें।”

07-05-2020
विशाखापट्टनम गैस हादसे पर टीएस सिंहदेव ने दु:ख व्यक्त किया

रायपुर। आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम गैस रिसाव मामले में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सिंहदेव ने कहा कि विशाखापट्टनम में गैस लीक का दुखद समाचार सुनकर व्याकुल हैं। पीड़ितों और उनके परिवार के लिए प्रार्थना करता हूं। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार वहां लोगों की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय कर रहे हैं।

 

 

23-04-2020
जगदलपुर विधायक रेखचन्द्र जैन ने गंभीर बीमारी से पीड़ित सात व्यक्तियों को दी सहायता राशि

रायपुर/जगदलपुर। विधायक रेखचन्द्र जैन ने शहर के सात गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों को स्वेच्छानुदान से सहयोग राशि का चेक प्रदान किया। विधायक ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री कवासी लखमा एवं मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देशानुसार डाॅ.राजेन्द्र नगर वार्ड क्रमांक-21 के गंभीर बीमारी से पीड़ित सात व्यक्तियों को स्वेच्छानुदान से 5-5 हजार रूपए का चेक प्रदान किया गया। इस अवसर पर वार्ड पार्षद कमलेश पाठक सहित वार्ड के अन्य नागरिक भी उपस्थित रहे। सहयोग राशि का चेक चंद्रावती संवरा, कमलू गावडे़, हमिदा बेगम, बबिता ठाकुर, फरीन बेगम, किशोर पटनायक और जुलेखा बेगम को प्राप्त हुआ।

20-04-2020
महानदी पार कर आरंग पहुंचे दोनों हाथी वापस लौटे, पीड़ित किसानों को मिलेगा मुआवजा

आरंग। बीती रात महानदी पार कर आरंग क्षेत्र में पहुंचे 2 हाथी वापस महानदी पार कर महासमुंद क्षेत्र के बड़गांव लौट गए है। वन विभाग के अनुसार 2 दोनों हाथी रात में महानदी को पार करके आरंग से 5 किलोमीटर दूर स्थित राटाकाट पहुँच गए थे। यहां दोनों हाथियों ने खेतों और बाड़ियों में घुसकर फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। हाथियों के वापस लौट जाने से ग्रामवासी और वन विभाग ने राहत की सांस ली है। इधर प्रशासन हाथियों द्वारा किये गए फसलों के नुकसान का आंकलन कर रही है। आरंग एसडीएम विनायक शर्मा ने बताया कि आरंग क्षेत्र में आए हाथियों के द्वारा किसानों के फसल की जो क्षति हुई है उसका सर्वे हल्का पटवारियों के माध्यम से कराया जा रहा है। सर्वे पूर्ण होते ही मुआवजा के लिए प्रकरण वन विभाग को प्रेषित किया जाएगा।

 

19-04-2020
थैलेसिमिया से पीड़ित को एम्बुचलेंस से लाकर डीकेएस अस्पताल में कराया इलाज

रायपुर। वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए प्रदेश में लॉक डाउन 2.0 के दौरान कोरिया जिले के ग्राम नागपुर निवासी थैलेसिमिया से पीड़ित एक 16 वर्षीय युवक को मध्य रात्रि को एम्बुलेंस से रायपुर इलाज के लिए लाया गया। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री टीएस सिंहदेव के पहल पर मरीज के हालात को देखते हुए विशेष एंबुलेंस से राजधानी के डीकेएस अस्पताल में लाकर विशेषज्ञ की देख-रेख में भर्ती कराकर इलाज जारी है। लॉक डाउन की स्थिति में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं मंत्री टीएस सिहदेव ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टीम को अलर्ट पर रखा है।इसी प्रकार राज्य सरकार द्वारा थैलेसिमिया से पीड़ित दो गर्भवती महिलाओं को विशेष जांच सीबीसी परीक्षण (कोरियोनिक विलस नमूना परीक्षण) की व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए डा. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से सुविधा प्रदान करने के लिए निर्देश दिया गया है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा थैलेसिमिया से पीडि़त मरीजों के लिए प्रत्येक जिले के जिला चिकित्सालय में आवश्यकतानुसार निशुल्क ब्लड ट्रांसफ्यूजन एवं दवाईयों की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।थैलेसिमिया के इन मरीजों को प्रत्येक 30 से 45 दिन पर खून की जरूरत पड़ती है। लेकिन कोरिया जिला अस्पताल में सरकारी स्तर पर खून की उपलब्धता नहीं होने से मरीज को राजधानी रेफर किया गया। एड्स कंट्रोल सोसायटी के एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ.एसके बिंझवार ने बताया, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के निर्देश पर तत्काल रात्रि कालीन इमेंरजेंसी सेवा के लिए ब्लड बैंक से मरीज के लिए ब्लड का इंतजाम कराया। डीकेएस के डॉक्टरों का कहना है,

समय पर अस्पताल पहुंचने से मरीज के हालत में काफी सुधार आया है।डॉ.अंबेडकर अस्पताल के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ.अरविंद नेरलवार के बताया, थैलेसीमिया रक्त से संबंधित ऐसी आनुवंशिक बीमारी है,जो एक लाख की जनसंख्या में दो से तीन लोगों में होती है। थैलेसीमिया माइनर तब होता है, जब मरीज के माता-पिता में से केवल एक से दोषपूर्ण जीन प्राप्त करता है। अल्फा और बीटा थैलेसीमिया के माइनर रूप वाले लोगों में लाल रक्त कोशिकाएं छोटी होती  है। यह वैरिएंट या किसी जीन की अनुपस्थिति के कारण भी होती है, जो हीमोग्लोबिन प्रोटीन के निर्माण को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। हीमोग्लोबिन प्रोटीन एक ऐसी जरूरी चीज है,जो लाल रक्त कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने में मदद करती है। थैलेसीमिया के रोगियों में 6 माह के बच्चे् में पाए जाने वाला हिमोग्लोबिन होता है जो 180 दिन से पहले नष्टं हो जाता है। इस लिए ऐसे रोगियों को एक से डेढ महीने में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरुरत होती है। यह रोग कुछ ही समुदायों में पाया जाता है।थैले‍सीमिया और सिकल सेल के रोगियों में एनिमिया होना सामान्य लक्ष्ण होते लेकिन सिकल सेल के रोगी ज्यादा पाए जाते हैं। इसके प्रसार को रोकने के लिए शादी से पूर्व रक्तु परीक्षण जरुरी है। रक्त से संबंधित इस आनुवंशिक बीमारी का रोगियों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। जैसे उनमें आयरन का स्तर बढ़ जाता है, हड्डियों में विकृति आ जाती है और गंभीर मामलों में हृदय रोग भी हो सकते हैं। थैलेसीमिया मेजर के रोगियों के इलाज में क्रोनिक ब्लड ट्रांसफ्यूजन थेरेपी, आयरन कीलेशन थेरेपी आदि शामिल हैं। इसमें कुछ ट्रांसफ्यूजन भी शामिल होते हैं, जो मरीज को स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की अस्थायी रूप से आपूर्ति करने के लिए आवश्यक होते हैं, ताकि उनमें हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो सके और रोगी के शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम हो।

 

16-04-2020
सखी वन स्टॉप सेंटर से महिलाओं में जाग रही उम्मीद

दुर्ग। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टाॅप सेन्टर जिला दुर्ग में पीड़ित एवं शोषित महिलाओं को संरक्षण देने का कार्य किया जा रहा है। जहाॅ पूरे भारत में कोरोना वायरस का बढ़ते संक्रमण को मद्देनजर रखते हुए सखी वन स्टाॅप सेन्टर द्वारा पुलिस,स्वास्थ्य एवं विधि विभाग के साथ जिले में सखी केन्द्र द्वारा 22 मार्च से अब तक कुल 7 महिलाओं को आश्रय देते हुए अन्य संस्थाओं व उनके निवास स्थान पहुंचाने एवं घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं का व्यक्तिगत परामर्श देते हुए स्थिति सामान्य होने तक उचित स्थान में रहने की सलाह दी गई सहायता की गई है। उक्त आश्रित पीड़ितों की जानकारी निम्नानुसार है। इसमें थाना जामुल के द्वारा एक विदेशी महिला को 4 मार्च को चिकित्सा पश्चात् अस्थायी आश्रय हेतु सखी सेन्टर दुर्ग में लाया गया। इनके निर्वासन की कार्यवाही प्रदेश में चल रहे लाॅक डाउन की स्थिति में नही हो पाई हैं। पीड़िता का प्राथमिक उपचार के बाद 16 मार्च को स्थिति सामान्य होने तक स्थायी आश्रय के लिए उज्जवला होम बिलासपुर भेजा गया है।

ऐसे ही दूसरे मामले में 14 मार्च को राज्य मानसिक चिकित्सालय सेन्दरी, जिला बिलासपुर के द्वारा विक्षिप्त महिला की मानसिक स्थिति सामान्य होने के पश्चात् सखी टीम द्वारा सखी वन स्टाॅप सेन्टर जिला दुर्ग में लाया गया, उक्त पीड़िता विदेशी होने के कारण निर्वासन कार्यवाही पूर्ण नहीं हुई है जिनका प्राथमिक उपचार के उपरान्त दिनांक 16 मार्च को नारी निकेतन जिला रायपुर को सुपुर्द किया गया। 22 मार्च को सिटी कोतवाली दुर्ग द्वारा महिला व उनके लगभग 6 माह के बच्चे के साथ स्वास्थ्य परीक्षण कर सखी सेन्टर दुर्ग अस्थायी आश्रय के लिए लाया गया। पीड़िता के कथानुसार उनके निवास स्थान ले जाया गया जहाॅ उनके परिजनों व गांव वालों के द्वारा रखने से इंकार कर दिया गया व पीड़िता स्वयं भी अपने परिजनों के साथ नहीं रहना चाहती थी, अतः पीड़िता को पुनः सखी सेन्टर आश्रय केे लिए लाया गया, उक्त पीड़िता का प्राथमिक उपचार के उपरान्त सखी टीम के द्वारा 16 अप्रैल को नारी निकेतन जिला रायपुर के सुपुर्द किया गया। 8 अप्रैल को महिला आरक्षक थाना उतई, जिला दुर्ग द्वारा पीड़ित महिला जिसे उनका प्रेमी शादी का प्रलोभन देकर करीब 8 माह से शोषण करता रहा, पीड़िता 2 अप्रैल को कथित प्रेमी के निवास स्थान पर जाकर 5 दिन तक इंतजार करती रही परन्तु कथित प्रेमी के ना आने पर पीड़िता थाना उतई आई जहां से प्राथमिक उपचार कर सखी सेन्टर दुर्ग अस्थायी आश्रय हेतु लाया गया।

उक्त पीड़िता को आगे की कार्यवाही हेतु 13 अप्रैल को थाना उतई के सुपुर्द किया गया। 14 अप्रैल को रात्रि 9 बजे दूरभाष से सूचना मिलने पर सखी टीम दुर्ग द्वारा के.पी.एस. स्कूल स्मृति नगर के पास बैठी विक्षिप्ति महिला का रेस्क्यू किया गया। एवं 108 के माध्यम से जिला चिकित्सालय दुर्ग में स्वास्थ्य परीक्षण कर सखी सेन्टर दुर्ग अस्थायी आश्रय के लिए लाया गया। 15 अप्रैल को पीड़िता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने कारण मानसिक चिकित्सा कराते हुए मुख्य न्यायायिक मजिस्टेट से रिसेप्शन आर्डर के पश्चात 16 अप्रैल को सखी टीम द्वारा सेन्दरी बिलासपुर रिफर किया गया। 14 अप्रैल को रात्रि लगभग 10 बजे थाना सिटी कोतवाली दुर्ग के द्वारा 112 के माध्यम से बस स्टैण्ड दुर्ग में भटकती हुई महिला को सखी सेन्टर दुर्ग में अस्थायी आश्रय हेतु लाया गया। पीड़िता के कथनानुसार वह भिलाई में घरेलु कार्य करती है। जिन्हें दिनांक 14 अप्रैल शाम उनके मालिक के द्वारा दुर्ग बस स्टैण्ड में घर जाने के लिए छोड़ दिया गया, पीड़िता रात 10 बजे तक बस स्टैण्ड पर ही बैठी हुई थी। वह अपने निवास स्थान जाना चाहती थी। अतः 15 अप्रैल को सखी टीम के द्वारा सखी सेन्टर जिला बेमेतरा सुपुर्द किया गया, जहां से पीडिता को उनके गृहग्राम पहुंचाया गया है। 15 अप्रैल को पीड़िता को थाना मोहन नगर के द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण कराकर सखी सेन्टर दुर्ग में अस्थायी आश्रय हेतु लाया गया, आगे की कार्यवाही हेतु दिनांक 16 अप्रैल को दोपहर में थाना मोहन नगर के सुपुर्द किया गया।

16-04-2020
अमेरिका में कोरोना से 24 घंटे में 2600 लोगों की गई जान...

नई दिल्ली। दुनियाभर में कोरोना वायरस से 20 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए हैं। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश भी इस महामारी के आगे बेबस दिखाई दे रहा है। अमेरिका में भी कोरोना का कहर जारी है। अमेरिका में कोरोना के काऱण स्थिति और गंभीर होती जा रही है। अमेरिका में कोरोना वायरस से मौतों के मामले में बढ़ोतरी जारी है। यहां गुरुवार को संक्रमण से होने वाली मौतों का रिकॉर्ड एक बार फिर टूट गया। पिछले 24 घंटे में यहां 2600 लोगों की जान चली गई। अमेरिका में कोरोना वायरस से 24 घंटे के भीतर बुधवार को करीब 2,600 लोगों की मौत हो गई जो किसी भी देश में इस संक्रामक रोग से मरने वाले लोगों की सर्वाधिक संख्या है। इसके साथ ही अमेरिका में मरने वाले लोगों की कुल संख्या 28,326 पहुंच गई है जो किसी भी देश के मुकाबले मृतकों की सबसे अधिक संख्या है।

ट्रम्प से पीड़ित की गुहार :

कोरोना वायरस को वुहान की एक प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से तैयार किए जाने का आरोप लगाते हुए इस जानलेवा विषाणु के संक्रमण से उबरे एक भारतीय-अमेरिकी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस वायरस के कारण हजारों लोगों की मौत और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होने के एवज में चीन से मुआवजा मांगने का अनुरोध किया।

04-04-2020
राजस्थान में कोरोना पीड़ित महिला की मौत, प्रदेश में 12 नए मामले आए सामने, संक्रमितों की संख्या हुई 191

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या देश में लगातार बढ़ती जा रही है। राजस्थान में भी कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कोरोना वायरस के कहर के बीच राजस्थान में कोविड-19 संक्रमित एक महिला की मौत हो गई है। राजस्थान के बीकानेर अस्पताल में कोरोना वायरस संक्रमित 60 वर्षीय महिला की मौत हो गई। अधिकारी ने कहा कि महिला ने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। वहीं राजस्थान में शनिवार को कोरोना वायरस के 12 नए मामले आए हैं, इनमें से आठ लोगों का संबंध तबलीगी जमात से है। इस तरह से राज्य में संक्रमण के मामले बढ़कर 191 हो गए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) रोहित कुमार सिंह ने बताया कि इन नए मामलों में से आठ लोगों का संबंध तबलीगी जमात के कार्यक्रम से है। इनमें से छह झुंझुनू और दो चुरू के हैं। उन्होंने कहा बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में पिछले चार दिन से भर्ती एक बुजुर्ग महिला (60) की आज मौत हो गई। उसने हाल में कोई यात्रा नहीं की थी। महिला दिव्यांग थी। बता दें कि राजस्थान में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 191 हो गई है। इसमें से 40 संक्रमित तबलीगी जमात के हैं, यानी दिल्ली के निजामुद्दीन में आयोजित मरकज में शामिल होकर लौटे थे। शनिवार सुबह 8.30 बजे तक 12 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। इनमें से दो बांसवाड़ा, दो चूरू (तबलीगी जमात), एक भीलवाड़ा और छह झुन्झुनू (तबलीगी जमात) में पाए गए हैं।

25-03-2020
लॉक डाउन में मानसिक रोगियों का रखें विशेष ध्यान,मानसिक तनाव से पीडित को अकेला ना छोड़ें

रायपुर। अगर लॉक घर पर है कोई मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित तो लॉक डाउन में उसका विशेष ध्यान रखना होगा। बहुत से लोग मानसिक रोग के शिकार होते हैं और इसका असर उनके साथ साथ उनके पूरे परिवार पर भी पड़ता है। दुनिया-भर में इस रोग की सबसे बड़ी वजह है, निराशा। लॉकडाउन के दौरान ऐसे लोग और परेशान हो सकते हैं। तब ऐसा क्या करें जिससे मानसिक रोग के शिकार लोगों को बेहतर माहौल मिले ।
चिकित्सा मनोवैज्ञानिक राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय,सेन्द्री,बिलासपुर के डॉ. दिनेश कुमार लहरी ने बताया बदलते माहौल में शरीर और मन पर जो असर पड़ता है,उसे तनाव कहते है। तनाव दो तरह का होता है। पहला–अच्छा तनाव और दूसरा–बुरा तनाव। जहां अच्छे तनाव की वजह से लोग पुरस्कार पाते है,वहीं बुरे तनाव में गुस्से में बहस कर लेते है। मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं, तनाव, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, और गुस्सा इसी के अंतर्गत आते हैं।
"मानसिक रोग के लक्षण, हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं। मानसिक रोगी से अच्छे से बात करें उसकी बात पूरी सुनें और उसका समाधान उसी की मदद से करें। अगर उसकी समस्या हल नही होगी तो समस्या बढ़ सकती है।

पीड़ित को हो सकती है यह समस्या

सिरदर्द व पीठदर्द
दूसरों को नज़रअंदाज़ करना
नींद न आना
गुस्सा और हताश होना
रोना
किसी एक चीज़ पर ध्यान न लगा पाना

कैसे करें हल
नियमित रूप से कुछ देर शारीरिक व्यायाम (चलना, दौड़ना या उठना बैठना) करवायें । इससे उसके दिमाग को सोचने का वक्त मिलेगा। मेडिटेशन करवायें (ध्यान लगाइए) राहत भरा संगीत सुनवायें। कुछ देर तक आंखें बंद करके शांति का अनुभव करवायें। गहरी सांस ले को कहें। दिमाग को शांत करवायें, और तनाव भरी बातें दिमाग से निकलवानें में मदद करें । भावनाओं को समझने का प्रयास करें और बातचीत कीजिए। उदासी से दूर करें। बेचैनी ना होने दें। किसी भी वजह से मूड खराब ना होने दें। रोगी के पसंदीदा कामों में रुचि पैदा करवायें। मन में उत्साह भरें। पीड़ित के मानसिक डॉक्टर के सम्पर्क में भी रहें और पीड़ित कि गतिविधि से अवगत कराते रहें। लम्बे समय तक चलने वाले लॉक डाउन में परिवार में भी सकारात्मक व्यवहार एक दूसरे के साथ करें। ताकि कोई भी सदस्य की भावनाओं का हनन ना हो।

 

23-03-2020
प्रोटोकॉल: पश्चिम बंगाल में कोरोना पीड़ित की मौत,फरवरी में आया था बिलासपुर,रिश्तेदार निगरानी में

रायपुर। पश्चिम बंगाल में कोरोना पीड़ित की मृत्यु के बाद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रह रहे उसके रिश्तेदारों को स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी में ले लिया है। मृतक ने फरवरी माह में बिलासपुर की यात्रा की थी। राज्य शासन को इस बात की जानकारी मिलते ही कि मृतक ने फरवरी में बिलासपुर की यात्रा की थी, उसके रिश्तेदारों की पहचान कर कोरोना वायरस के बचाव के प्रोटोकॉल के तहत उन्हें निगरानी में रख उनके सैम्पल आदि ले लिए है। पश्चिम बंगाल के  नार्थ 24 परगना जिला के दमदम के 57 वर्षीय कोरोना पीड़ित की आज सोमवार को एक निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी।

04-03-2020
कोरोना वायरस के संदेह में आए नोएडा के 6 लोगों के सैंपल निगेटिव

नई दिल्ली। नोएडा में कोरोना वायरस के संदेह में तीन बच्चों समेत जिन छह लोगों के नमूने लिए गए थे, उनकी जांच नेगेटिव पाई गई है। इन सभी को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया था। बता दें कि दिल्ली में कोरोना वायरस की दस्तक के साथ पीड़ित हुए पहले शख्स के संपर्क में आने से नोएडा के छह लोगों की जांच कराई गई थी। रिपोर्ट में उनकी जांच नेगेटिव पाई गई है। ये छह लोग दिल्ली के एक व्यक्ति द्वारा दी गई पार्टी के दौरान उसके संपर्क में आ गए थे। इस व्यक्ति में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। जिला मजिस्ट्रेट बी एन सिंह ने एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस मामले में नोएडा के छह लोगों के नमूने जांच में नेगेटिव पाए गए लेकिन उन्हें अगले 14 दिनों के लिए अपने घर में अलग-थलग रहना होगा और लक्षण नजर आने पर उनकी फिर से जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है। साथ ही कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। 

 

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