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26-11-2020
प्रसव से 10 मिनट पहले गर्भवती ने डॉक्टर के साथ किया डांस, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

कोरबा। किसी भी महिला के लिए मां बनना बहुत सुखद एहसास है। प्रसव से पहले और खासकर प्रसव के दौरान उसे जिस दर्द से गुजरना होता है उसे बयां करना मुश्किल है। पर माँ बनने की सुखद अनुभूति के साथ यह पीड़ा गायब हो जाती है। प्रसव पीड़ा कई बार गर्भवती महिला की मनोदशा को प्रभावित करती है,जिसे दूर कर एवं प्रसव पीड़ा को कम करने की जवाबदारी उसका प्रसव कराने वाले चिकित्सक की होती है। इस मामले में एनकेएच की महिला चिकित्सक ने अपने मरीज को बच्चे के जन्म के वक्त कम से कम लेबर पेन सहना पड़े, इसके लिए न सिर्फ उसे डांस कराया बल्कि खुद भी नाचीं। सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है,जिसमें एक महिला डॉक्टर अपनी गर्भवती महिला मरीज के साथ डिलीवरी के ठीक 10 मिनट पहले डांस कर रही है। गर्भवती महिला इस वीडियो में खुशी के साथ झूमते नजर आ रही है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर परिजनों के अलावा अन्य लोगों के द्वारा भी काफी शेयर किया जा रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर एन्जॉय भी कर रहे हैं। सोशल मीडिया में इस वीडियो की काफी चर्चा है। यह वीडियो एनकेएच हॉस्पिटल कोरबा का है। यहां की स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.ज्योति श्रीवास्तव अपनी मरीज विनीता सोनी के साथ डांस कर रही हैं। वह भी डिलीवरी के केवल 10 मिनट पहले। वैसे भी कहा जाता है कि डांस करना गर्भवती महिला के लिए अच्छी बात है। इससे डिलीवरी के समय दर्द से राहत मिलती है। परंतु इसमें भी काफी सावधानी जरूरी है। डॉक्टर के साथ उनके बताए अनुसार निगरानी में डांस के बाद प्रसव में विनीता को दर्द का अहसास अपेक्षाकृत काफी कम रहा और उसने भी डांस को काफी एन्जॉय कर इसे अपना नया अनुभव बताया।

 

22-11-2020
Breaking : आयुर्वेदिक डॉक्टरों की राह हुई आसान, अब कर पाएंगे सर्जरी

रायपुर। केंद्र सरकार ने आयुर्वेदिक डॉक्टरों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब आयुर्वेद की डिग्री प्राप्त डॉक्टर जनरल और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ ही आंख, कान और गले की सर्जरी भी कर पाएंगे। भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद के अनुसार सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद पीजी के स्टूडेंट्स को सर्जरी के बारे में गहन जानकारी दी जाएगी। गौरतलब है कि आयुर्वेद के स्टूडेंट्स को अभी सर्जरी के बारे में पढ़ाया तो जाता था लेकिन उन्हें सर्जरी करने या नहीं करने को लेकर संशय की स्थिति थी। सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद अब आयुर्वेद के डॉक्टर भी सर्जरी कर सकेंगे। सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार आयुर्वेद के पीजी के छात्रों को आंख, नाक, कान, गले के साथ ही जनरल सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। सरकार की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार इन छात्रों को ग्लुकोमा, मोतियाबिंद हटाने, स्तन की गांठों, अल्सर और पेट से बाहरी तत्वों की निकासी जैसा कई सर्जरी करने का अधिकार होगा।

21-11-2020
पत्नी के अवैध संबंध के कारण मानसिक रूप से परेशान डॉक्टर ने लगाया मौत को गले

नई दिल्ली। गुरुग्राम के एक नामी अस्पताल के डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डॉक्टर अपने परिवार के साथ सेक्टर 49 ऑर्चिड पेटल्स सोसायटी में रहते थे। इनकी एक बेटी जोधपुर में पढ़ाई करती है। फिलहाल आधिकारिक तौर पर अभी इस मामले में कोई कुछ नहीं बोल रहा है।मृतक डॉक्टर के पिता ने इस बारे में अपनी बात कही है। उनका कहना है कि उनका बेटा पत्नी के अवैध संबंधों से परेशान था और अक्सर इस मामले को लेकर दोनों में मनमुटाव भी हो जाता था। पिता ने बहू पर आरोप लगाते हुए कहा है कि बहू की वजह से ही उनके बेटे ने आत्महत्या की है। पिता ने बहू के खिलाफ शिकायत भी दर्ज करा दी है।मृतक के पिता बुजुर्ग विनोद सोढ़ी ने बताया कि वह पत्नी के साथ भिवाड़ी में रहते हैं। जबकि बेटा मनुज सोढ़ी अपनी पत्नी के साथ गुड़गांव में ऑर्चिड पेटल्स सोसायटी में रहता था। वो कई साल से मेदांता में डॉक्टर था। मोनिका भी एक निजी स्कूल में टीचर है। अगस्त महीने में बेटा उनके पास भिवाड़ी आया और खूब रोया। पोती जोधपुर में पढ़ रही है। पोती ने बेटे को बताया था कि मां के किसी के साथ अवैध संबंध है। 

पत्नी का अवैध संबंध बीते तीन साल से चल रहा था, जिसके चलते डॉक्टर मानसिक तौर पर वह परेशान था। इसी के चलते बेटी को पढ़ाई के लिए घर से दूर भेज दिया। शनिवार सुबह बेटे के पड़ोसी ने उन्हें कॉल कर बताया कि आपके बेटे की तबियत खराब है। इसके बाद वे गुड़गांव पहुंचे। बेटे ने कोई इंजेक्शन खुद को लगा लिया था, जिससे उसकी तबियत बिगड़ी। हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सूचना पर सेक्टर-50 थाना पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई की। बुजुर्ग ने अपनी बहू के खिलाफ बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते हुए शिकायत पुलिस को दी है। पुलिस प्रवक्ता सुभाष बोकन ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जा रही है।

 

21-11-2020
जिला अस्पताल के वाहन स्टैण्ड मामले में एनएसयूआई ने सौंपा ज्ञापन

दुर्ग। एनएसयूआई के शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा द्वारा जिला चिकित्सालय दुर्ग में हुई घटना को लेकर दुर्ग सीएसपी विवेक शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। इसमें अवगत कराया 19 नवंबर को लगभग रात्रि 9.30 बजे डॉ.जयंत चंद्राकर के द्वारा तेज रफ्तार दो पहिया वाहन में जिला चिकित्सालय परिसर में प्रवेश कर रहा था। उसे अस्पताल परिसर के पार्किंग के कर्मचारियों द्वारा रोकने की कोशिश कि गई। किन्तु उसके द्वारा बाइक कि रफ्तार को और तेज करते हुए अस्पताल के अंदर ले जाकर खड़ी कर दिया गया। इसे पार्किंग के कर्मचारियों के द्वारा समझाया गया तो उनके द्वारा अस्पताल परिसर में गाली गलौज करने लगा,जिससे वहां पर अन्य लोगों को बहुत बुरा लगा,तब कर्मचारियों के द्वारा उससे कहा गया कि अपनी वाहन स्टैंड पर लगाओ तब उसके द्वारा कहा गया कि में यहां स्टाफ का आदमी हूं तुम लोगों को जो करना करो तुम लोग मुझे अभी जानते नहीं हो।

बहुत समझाइश देने के बाद भी उसके द्वारा कुछ अन्य लोगों को बुलाकर पार्किंग में अस्थाई रूप से बनाए गए गुमटी में तोड़ फोड़ की गई। वहां पर रखे पार्किंग के हिसाब किताब के रुपए पैसे को भी ले गया। इसके पूर्व भी एनएसयूआई के द्वारा शासकीय चिकित्सालय के कुछ कर्मचारियों व डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत की गई थी। जिला चिकित्सालय दुर्ग में लगे सीसीटीवी फुटेजों को निकलवाकर देखा जाए व घटनाओं को निष्पक्ष जांच करवाते हुए आरोपी डॉ जयंत चंद्राकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने वालों में शहर अध्यक्ष हितेश सिन्हा,अमोल जैन,विनिश साहू,हरीश देवांगन,विकाश राजपूत,विकास साहू,सोनू यादव,गोल्डी कोसरे,नैमुर सहित एनएसयूआई के कार्यकर्ता मौजूद थे।

 

20-11-2020
जिला अस्पताल के डॉक्टर से मारपीट, गाड़ी पार्किंग को लेकर हुआ विवाद

दुर्ग। जिला अस्पताल के डॉक्टर से मारपीट का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार विवाद गाड़ी पार्किंग को लेकर हुआ था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। शासकीय जिला अस्पताल दुर्ग में बीती रात स्टाफ पार्किंग में दोपहिया वाहन खड़ा कर रहे मेडिकल ऑफिसर के साथ पार्किंग संचालक एवं कर्मियों ने वाद विवाद किया और मारपीट की। मारपीट में डॉक्टर को चोट आई। वहीं कोतवाली पुलिस ने पार्किंग संचालक सहित सात लोगों के खिलाफ बलवा का मामला दर्ज कर पूछताछ की। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार डॉ.जयंत चन्द्रकार, जो कि जिला अस्पताल दुर्ग में मेडिकल आफिसर की ईमरजेंसी ड्यूटी शिशु वार्ड में लगी थी। इस दौरान स्टाफ पार्किंग के पास एमसीएच बील्डिंग के अंदर गाड़ी खडा कर रहा था। इस बीच पार्किंग संचालक सहित अन्य सात लोगों ने डॉक्टर से वाद विवाद किए और मारपीट शुरू कर दी। वारदात में डॉक्टर को चोट आई। वहीं डॉक्टर ने तत्काल कोतवाली पुलिस को घटना की जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

 

16-11-2020
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टॉफ की लापरवाही से जन्म से पहले हुई दो बच्चों की मौत

दुर्ग। जिला चिकित्सालय में विगत रात्रि से लेकर सुबह 12 बजे तक डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही का खामियाजा दो परिवारों को भुगतना पड़ा। लापरवाही के चलते दो मासूमों ने जन्म लेने से पहले ही मां के गर्भ में दम तोड़ दिया। इस मामले में पीड़िता की मां ने बताया कि उनकी बेटी ने रात में दर्द होने की शिकायत की किंतु अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के चलते डॉक्टरों से नहीं मिलने दिया गया। सुबह जब शिफ्ट चेंज हुई तो दूसरे स्टाफ ने कहा कि आपका बच्चा खत्म हो गया है और आप लोग रायपुर मेकाहारा जाइए। वहीं दूसरे पीड़ित पक्ष चंदखुरी निवासी के परिजन ने बताया कि उनका मरीज 5 दिनों से यहां भर्ती था। रोज यह कहकर कि अभी टाइम नहीं हुआ है कहकर हटा दिया जाता था और परिजनों को मरीज से दूर रखा जाता था। वहीं उन से पैसों की मांग भी की गई। शिकायत में परिजनों का कहना था कि यहां पर डॉक्टर समय पर मौजूद नहीं रहते,जिसका खामियाजा भुगतना पड़ा और आज बच्चे की जान चली गई। जब इस पूरे मामले में जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ.पी.बालकिशोर  से जानकारी चाही गई तो उन्होंने कहा कि वह शहर से बाहर है और कल ही उपलब्ध हो पाएंगे। पूरे मामले में उन्होंने साफ कहा कि उनके कर्मचारी व स्टॉफ की कोई लापरवाही नहीं है और पूरे मामले को सिरे से नकार दिया।

 

12-11-2020
जागरुकता से बच सकती है कई जिंदगियांं,सर्दी और बुखार जैसे मामूली लक्षणों को हल्के में न लें

रायपुर। कोरोना संक्रमण के संबंध में डॉक्टर अनेक सलाह देते हैं। इसे अगर अमल में लाया जाए तो इस बीमारी के घातक परिणामों से बचा जा सकता है। डॉक्टर बार-बार कहते हैं कि दवाई दुकान से खुद से दवाइयां खरीद कर नहीं खाना चाहिए। यदि परिजनों को भी कोई दवाइयां दे रहे हैं संक्रमण से बचाव के लिए ,उसको भी बिना डॉक्टर से पूछे  नही खाना चाहिए। जागरुकता के अभाव में लापरवाही के कारण मृत्यु अधिक हो रही है। संक्रमित मरीज या उसके परिजन भी यदि जागरूक हों तो कई जिंदगियां बच सकती हैं।स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक डेथ आडिट में यह बात सामने आई है कि रायगढ़ जिले के एक 40 वर्ष के पुरूष को 24 अक्टूबर से लक्षण दिखाई दे रहे थे।

उसने 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक दवाई दुकान से दवाई खरीद कर खाई। 31 अक्टूबर को टेस्ट कराया तो पॉजिटीव आने पर पहले कोविड केयर केन्द्र भर्ती हुआ। फिर उसी दिन जिला अस्पताल में रात को भर्ती कराया गया। ऑक्सीजन लेवल एकदम कम होता गया और भर्ती होने के 1 घंटे के अंदर उसकी मृत्यु हो गई। इस प्रकरण में मृतक ने अगर 24 अक्टूबर को लक्षण दिखने के बाद जांच कराई होती तो उसकी जान बच सकती थी। छोटी सी लापरवाही ,गैर जिम्मेदार व्यवहार से एक जान चली गई। यदि उसके परिजन भी जागरूक होते और टेस्ट कराने का दबाव डालते तो भी स्थिति शायद अलग होती। एक परिवार बेसहारा नहीं होता, इसलिए अभी सतर्कता अत्यधिक जरूरी है।

 

12-11-2020
सचिन पायलट पाए गए कोरोना संक्रमित

जयपुर। राजस्थान में लगातार कोरोना के बढ़ते संक्रमणों के बीच कांग्रेस विधायक और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि मेरी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है, जो कोई भी पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आया हो, कृपया अपना परीक्षण करवा लें। डॉक्टर की सलाह ले रहा हूं। जल्द ठीक होने की उम्मीद है। गुरुवार को ही गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैंसला भी कोरोना संक्रमित पाए गए। बैंसला जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती हैं। 

 

31-10-2020
ट्रैक्टर की ठोकर लगने से बाइक सवार  की मौत....

धमतरी। जिले के रत्नाबांधा रोड में ट्रैक्टर की ठोकर लगने से एक बाइक सवार की मौत हो गई है। ठोकर लगने से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते वक्त मौत हो गई। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आमदी के रहने वाले मुकेश तिवारी 46 वर्ष अपनी बाइक से धमतरी की ओर आ रहा था।  इसी दौरान रत्नाबांधा रोड आरामिल के पास पीछे से आ रही ट्रैक्टर ने चपेट में ले लिया। गंभीर अवस्था में मुकेश को ऑटो से जिला अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि मुकेश पंडिताई का काम करता था। पुलिस मर्ग कायम कर आगे की कार्यवाही में जुट गई है।

 

30-10-2020
झाड़ फूंक छोड़ डॉक्टरी सलाह और उपचार को प्राथमिकता दे रहे मानसिक रोगी

रायपुर/दुर्ग। मानसिक रोगों के प्रति समाज में अब जागरूकता देखने को मिल रही है। पहले की अपेक्षा अब लोग झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़ कर उपचार को प्राथमिकता दे रहे हैं,जिस कारण जिला चिकित्सालय स्थित स्पर्श क्लीनिक में आने वाले मानसिक रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। विगत पांच वर्षों में स्पर्श क्लीनिक में इलाज़ कराने आये मानसिक रोगियों की संख्या पर गौर किया जाए तो यह पता चलता है कि यह संख्या प्रतिवर्ष लगभग 68 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ी है। मानसिक बीमारी किसी व्यक्ति के  महसूस करने, सोचने  एवं काम  करने के यह रोग व्यक्ति के मनोयोग,स्वभाव, ध्यान एवं बातचीत करने की क्षमता में समस्या पैदा करता है। अंतत: व्यक्ति असामान्य व्यवहार का शिकार हो जाता है। उसे दैनिक जीवन के कार्यकलापों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। इसलिए स्वयं को मानसिक तौर पर स्वस्थ रखना जरूरी है। राज्य सरकार मानसिक रोगियों का उपचार निशुल्क करती है। मनोरोग का उपचार जितना जल्दी शुरू किया जाए उतना जल्दी व्यक्ति स्वस्थ्य हो सकता है। यह धारणा बिलकुल गलत है की मानसिक रोगों का उपचार नहीं हो सकता है। स्वास्थ और परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक विकारों , तनाव व अवसाद को कम करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम संचालित कर रहा है। इनमें जिला अस्पतालों में स्थापित स्पर्श क्लिनिक भी एक है। क्लिनिक में मानसिक रोगियों का निशुल्क उपचार होता है और उनका नाम भी सार्वजनिक नहीं किया जाता है। इसके अलावा प्रदेश के सभी 27 जिलों में काउंसिलिंग सेंटर भी हैं,जिनके जरिए मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की पहचान कर मानसिक स्वास्थ की सेवाएं दी जा रही हैं।

इसके अतरिक्त कोरोना के दौर में मानसिक रोगियों को उपचार एवं परामर्श देने मेंटेली मेडिसिन सुविधा भी एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरी है,जिस पर लोग अपनी समस्या का निदान पा रहे हैं। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए लोगों को टोलफ्री नंबर 104 पर कॉल करना पड़ता है तत्पश्चात विशेषज्ञों द्वारा उनको परामर्श दिया जाता है। इस सम्बन्ध में जिला चिकित्सालय में तैनात मनोरोग चिकित्सक डॉ.आकांक्षा ने बताया,अब लोग झाड़ फूँक के अतिरिक्त इलाज़ को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस कारण मानसिक रोग के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं और उनको समय से उचित उपचार एवं परामर्श दिया जा रहा है। उन्होंने कहा लोगों को झाड़ फूँक में समय न बर्बाद करके मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति का तुरंत इलाज़ शुरू कराना चाहिए क्योंकि जितनी जल्दी इलाज़ शुरू होगा उतनी ही जल्दी मरीज़ रिकवर होगा।

ऐसे बचें मानसिक अवसाद से

रोज व्यायाम या योग करें, हल्का व पौष्टिक भोजन करें, भरपूर नींद लेना एवं अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। दोस्तों और परिवार के संपर्क में रहें, नकारात्मक सोच से बचें बल्कि कुछ नया करने की सोचें।

 

19-10-2020
कलेक्टर ने कहा, कोरोना मरीजों की देखभाल में न हो कोताही, उपचार के लिए डॉक्टरों की लगाएं रिजर्व में ड्यूटी

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर यशवंत कुमार ने सोमवार को जिला कार्यालय में कोविड-19 कोर कमेटी की बैठक में कहा कि कोविड अस्पताल सहित कोविड केयर सेंटर्स में डॉक्टरों की रिजर्व में ड्यूटी लगाएं। किसी डॉक्टर के आपातकालीन अवकाश में जाने की स्थिति में  रिजर्व स्टाफ की ड्यूटी लगाई जा सके। कलेक्टर ने कहा कि सैंपल कलेक्शन का कार्य लक्ष्य के अनुसार प्रतिदिन पूरा करें। किसी भी स्थिति में कोविड जांच की संख्या मे कमी नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन के मरीजों के स्वास्थ्य की जानकारी टेलीफोन के माध्यम से नियमित लेते रहे। लक्षण पाए जाने पर उसे तत्काल जिला अस्पताल अथवा कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट करने की कार्रवाई करें। होम आइसोलेशन के मरीजों को डॉक्टरों की निगरानी में अनुमति दी गई है। संबंधित डॉक्टर से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी संधारित करवाएं। कलेक्टर ने बैठक मे ऑक्सीजन पाइप लाइन, आक्सीजन बेड,  दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता, कोविड केयर सेंटर की व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पुष्पेंद्र लहरे ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार स्वस्थ राज्य योजना के तहत अब प्रत्येक बुधवार और गुरुवार को संबंधित गांव के मितानिनों द्वारा घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा। लक्षण वाले व्यक्तियों की जांच के लिए सैंपल कलेक्शन के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। बैठक में जिला पंचायत सीईओ तीर्थराज अग्रवाल, अपर कलेक्टर लीना कोसम सहित कोर कमेटी के सदस्य उपस्थित थे।

 

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