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01-08-2020
भूपेश बघेल ने डॉक्टरों से की चर्चा,कहा-प्रदेश की मेडिकल टीम ने देश के समक्ष पेश किया उदाहरण

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को एम्स सहित प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के डॉक्टरों से चर्चा की। उन्होंने कोविड-19 के संक्रमण व उपचार की व्यवस्था, उपलब्ध संसाधन, संसाधनों की आवश्यकता, मरीजों आदि की मैदानी स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अपने निवास से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डॉक्टरों से कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने के लिए सुझाव भी लिए।  मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से चर्चा के दौरान कहा कि, डॉक्टरों सहित मेडिकल टीम की कुशलता, अनुभव, विशेषज्ञता और समर्पण के कारण हम इस संक्रमण का मुकाबला कर पा रहे हैं। जनता में भी हौसला इससे बना हुआ है। विश्वव्यापी महामारी कोरोना की इस लड़ाई में डॉक्टरों सहित पूरी मेडिकल टीम प्रथम पंक्ति के योद्धा हैं। हमारी आशाएं आपके प्रयासों पर टिकी हुई हैं। मेडिकल टीम दिन-रात मरीजों के उपचार में लगी हैं। छत्तीसगढ़ की मेडिकल टीम ने इस संकट के दौरान जो काम किया है, वह पूरे देश के लिए उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से अस्पतालों में भर्ती मरीजों स्वस्थ हो चुके मरीज,मरीजों में सामान्यत: दिखने वाले लक्षणों, ट्रीटमेंट के प्रोटोकाल, आईसीयू में भर्ती मरीजों की संख्या, टेस्टिंग आदि की जानकारी ली। उन्होंने डॉक्टरों से यह भी पूछा कि, यदि उन्हें कोई दिक्कत है, तो बताएं उनका समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री बघेल ने ऐसे कोविड-19 मरीज जिनमें कोई लक्षण नहीं है उनके लिए राज्य सरकार की ओर से जारी होम आइसोलेशन की गाइडलाइन के संबंध में सुझाव भी लिए। उन्होंने रायपुर, जगदलपुर, बिलासपुर,अंबिकापुर,रायगढ़,राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर,गरियाबंद और बलौदाबाजार के जिला अस्पतालों के डॉक्टरों से चर्चा की। एम्स रायपुर के निदेशक डॉ.नितिन एम.नागरकर ने बताया कि एम्स में अब तक 1452 मरीज भर्ती हुए,जिनमें से 1086 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। जिन मरीजों की मृत्यु हुई है उन मरीजों को पहले से ही कैंसर,रीनल फेल्वर,अनियंत्रित डायबिटीज और टीबी जैसी गंभीर बीमारियां थी। उनकी इम्युनिटी कम थी। अभी वर्तमान में 339 मरीज भर्ती हैं, एम्स में कोविड-19 मरीजों के लिए 500 बिस्तरों की व्यवस्था है। हाल ही में मरीजों की संख्या बढ़ी है, उनके लिए भी व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

डॉ. नागरकर ने कहा कि बिना लक्षण वाले मरीजों को, जिनके घरों में अलग से कमरे में वाशरूम की व्यवस्था है, उन मरीजों को होम आईसोलेशन में रखा जा सकता है। यह भी ध्यान रखना होगा कि, उन्हें कड़ाई से गाइडलाइन का पालन करना होगा, इससे अस्पतालों पर कम बोझ होगा और डॉक्टर और मेडिकल टीम गंभीर मरीजों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में मोर्टेलिटी रेट एक प्रतिशत से भी कम है। छत्तीसगढ़ में कोविड-19 मरीजों की रिकवरी रेट अच्छी है। मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि होम आइसोलेशन वाले मरीजों की ट्रेकिंग करनी होगी। मोबाइल से उनके लोकेशन पर नजर रखनी होगी और इस काम के लिए पुलिस, विभिन्न विभागों के लोगों और पड़ौसियों की मदद लेनी होगी। स्वास्थ्यकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, नगर निगम के कर्मियों को इनकी जिम्मेदारी देनी होगी। पूरी मेडिकल टीम समर्पण से काम कर रहें है। लोगों को जागरूक करना होगा कि,यदि उनमें सर्दी, खांसी, बुखार के लक्षण दिखे तो जांच अवश्य कराएं। मुख्यमंत्री ने होम आइसोलेशन के संबंध में कहा कि लोगों में विश्वास होना चाहिए कि जरूरत पड़ने पर उन्हें डॉक्टरों की सलाह और इलाज की सुविधा उपलब्ध मिलेगी। होम आइसोलेशन वाले मरीजों के पास थमार्मीटर और आक्सीमीटर होना चाहिए।

रायपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को चर्चा के दौरान बताया कि पिछले एक सप्ताह से मरीजों की संख्या बढ़ी है। सर्दी, खांसी, बुखार होने पर मरीजों को तुरंत अस्पताल आकर कोविड-19 परीक्षण कराना चाहिए, ताकि पॉजीटिव मरीजों को जल्द उपचार मिल सके। राजनांदगांव के डॉक्टरों ने बताया कि, लखौली हॉटस्पॉट में जांच की संख्या बढ़ाई गई, जिससे डायग्नोसिस जल्द हो सका और मरीजों का उपचार हो सका। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मरीज पैरामिलिट्री फोर्स के थे। स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक सिंह ने इस संबंध में बताया कि, जो जवान बाहर से आ रहे हैं उन्हें आइसोलेशन में रखा जा रहा है और सोमनी में एक आइसोलेशन सेंटर जवानों के लिए हैण्डओवर किया जा रहा है। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बताया कि, टेस्टिंग बढ़ाने के लिए वायरोलाजी लैब बन गई है और इस लैब में भी एक सप्ताह में टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। इससे टेस्टिंग की संख्या बढ़ेगी। आईएमए के डॉ.राकेश गुप्ता ने सुझाव दिया कि होम आइसोलेशन के लिए सामाजिक भवनों में व्यवस्था की जा सकती है। सामाजिक संगठनों को जागरूक करने के काम में लगाया जा सकता है। इसी तरह मेडिकल, आयुर्वेदिक और नर्सिंग स्टूडेंस को इस कार्य में लगाने सहित विभिन्न सुझाव दिए। बलौदाबाजार जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने बताया कि लवन सामुदायिक केन्द्र में कोविड मरीज की डिलवरी कराई गई। बिलासपुर जिला अस्पताल की डॉ.मधुलिका सिंह ने बताया कि अस्पताल की पूरी टीम मन से मरीजों की सेवा कर रही है। यहां 30 बिस्तरों का आईसीयू है, आईसीयू में एक भी मरीज नहीं है। सिम्स बिलासपुर के डॉक्टरों ने बताया कि टेस्टिंग की संख्या बढ़ाने के लिए पीसीआर टेस्टिंग लैब तैयार हो गया है।

 

04-01-2020
19 जनवरी से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

रायपुर। राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान 19 से 21 जनवरी तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष के बच्चाें को पल्स पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। अभियान के प्रथम दिन पोलियो बूथ, दूसरे और तीसरे दिन स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को दवा पिलाएंगी। राज्य नोडल अधिकारी डॉ. अमर सिंह ठाकुर ने बताया, इस अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। राज्य के लगभग 35 लाख बच्चों को प्लस पोलियो अभियान के तहत 19 जनवरी को आंगनबाड़ी केंद्रों, प्राथमिक शाला, उपस्वस्थ्य केंद्रों से लेकर प्राथमिक, सामुदायिक, जिला अस्पतालों, मातृ शिशु अस्पतालों में पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। 

19 जनवरी को छूटे हुए बच्चों को 20 और 21 जनवरी को डोर टू डोर पिलाया जाएगा । पोलियो की ड्रॉप प्रदेश के 35 लाख बच्चों को पोलियो जनित विकलांगता से बचाने के लिए वैक्सीन की खुराक दी जाएगी। शहरी क्षेत्रों के बूथों की मॉनिटरिंग के लिए 5 अधिकारी व जिलों को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 15 अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। बूथ में किसी प्रकार की लापरवाही न हो इसके लिए मॉनिटरिंग अधिकारी लगातार बूथों का मुआयना करते रहेंगे। इसके लिए राज्य के सभी जिलों में विभिन्न सार्वजनिक भवनों, बस स्टैण्ड आदि में लगभग 15000 टीकाकरण केन्द्र बनाए गए हैं। इन केन्द्रों में बच्चों को पोलिया वैक्सीन की दो-दो बूंद पिलाने के लिए शासकीय कर्मचारियों और मितानिनों सहित अन्य कर्मियों को मिलाकर 30000 टीकाकरण दलों का गठन किया गया है। 

डॉ सिंह ने बताया, इस अभियान के तहत सभी जिले के पहुंच विहीन दूरस्थ क्षेत्रों, झुग्गी झोपड़ी, मलीन बस्ती, ईट भट्ठा, अस्थाई बसाहटों आदि क्षेत्रों के बच्चों को दवा पिलायी जायेंगी। इसके साथ ही चलित जनसंख्या के हितग्राही बच्चों को बस स्टैंड व रेल्वे स्टेशन आदि स्थानों पर ट्रांजिट दलों के माध्यम से बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जायेगी। मेला व हॉट बाजारों में भी दवा पिलाने के लिये दलों को तैनात किया जावेगा। शहर के बडे़ आवासीय क्षेत्रों में ही पोलियो बूथ सेंटर बनाया गया है। प्रदेश में पोलियो के एक भी प्रकरण नहीं मिला है, लेकिन आगामी कुछ साल तक बच्चों को पोलियो की दवा नियमित देना जरूरी है। ताकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

17-12-2019
बहरेपन से प्रभावितों को घर-घर तलाशेंगी मितानीन, आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य कार्यकर्ता 

रायपुर। बहरेपन जैसी गंभीर विकृति शिुशओं के जन्‍म से लेकर सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए यह कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अब मितानीनों द्वारा अन्‍य कार्यक्रतों के साथ ही गृह भ्रमण के दौरान समुदाय के लोगों का चिन्हीकरण करने में अपनी भागीदारी निभाएंगे। मितानीन और आंगनबाड़ी की पहुंच समुदाय में सीधे संपर्क होते हैं। इस लिए ऐसे लोगों की पहचान कर जिला अस्‍पताल में जांच कर इलाज भी कराने के लिए परामर्श कर सकते हैं। राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीपीसीडी) के तहत प्रदेश के सभी जिले के विकासखण्ड स्तर से आरएचओ (महिला एवं पुरूष), आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मितानीनों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यक्रम अंतर्गत एक दिवसीय विकासखंड स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन रायपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अभनपुर में प्रशिक्षण आज प्रदान किया गया। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के मैदानी अमले के साथ ही टीम के साथ कर्मी गांव-गांव पहुंचकर इस विकृति से पीडि़त बच्चों से लेकर बुजुर्गों का भी व्‍यापक स्‍तर पर अभियान चलाकर चिन्हीकरण करेंगे।

बहरेपन से प्रभावितों की तलाश कर चिंहांकित कर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा निशुल्क इलाज भी करेगा। एनपीपीसीडी के स्‍टेट नोडल अधिकारी डॉ क‍मलेश जैन ने बताया, बहरेपन यानी सुनाई नहीं देने की कान संबंधित विकृति की पहचान कर लोगों को इलाज की सुविधाएं प्रदान की जाएगी। डॉ. जैन ने बताया अप्रैल 2019 से लेकर अक्‍टूबर 2019 तक कान से संबंधित 5663 रोगियों की जांच की गई जिसमें 5225 बधिर रोग से ग्रसित मिले। जांच के बाद 1377 रोगियों की माइनर सर्जरी तथा 116 रोगियों की मेजर सर्जरी किया गया। 2115 लोगों को हियरिंग ऐड तथा 1149 लोगों को स्‍पीच थैरपी दी गई। उन्‍होंने बताया प्रदेश चिंहाकित 27 जिला अस्‍पतालों में कर्ण यानी कान से संबंधित रोग के उपचार के लिए निर्माण कार्य एवं ईयर केयर उपकरण प्रदाय करने की स्‍वीकृति भारत सरकार से मिली हुई है। प्रदेश के 15 जिलों में ईएनटी कीट , 12 जिलों में बेरा मशीन और 16 जिलों साउंड प्रूफ रूम की सुविधा प्रदान की जा रही है। ताकि लोगों को कान से संबंधित रोगों का इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज स्‍तर में जाने की जरुरत नही पड़े।

इसके लिए सभी जिलों में एक साथ स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानीनों को भी इस कार्यक्रम से जोड़कर प्रभावित लोगों का इलाज कराया जाएगा। प्रशिक्षण के जरिए मैदानी अमले को जानकारी प्रदान कर एनपीपीसीडी कार्यक्रम के उन्मुखीकरण, बधिरता संबंधीकरणों की शीघ्र पहचान एवं निदान के बारे में कार्यशाला आयोजित की जा रही है। साथ ही साथ बच्चों में स्पीच थेरेपी के महत्व संबंधी विषयों पर कार्यशाला में चर्चा की गई।
राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम और नियंत्रण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोगों में जनजागरूकता लाने रैली, सम्‍मेलन आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बीमारी अथवा चोट के कारण सुनने की क्षमता की कमी की रोकथाम,सुनने को कम करने वाली कान की समस्याओं की शीघ्र पहचान एवं उपचार करना, बहरापन से पीड़ित समस्त लोगों का पुनर्वास एवं उपकरण सामग्री उपलब्‍ध कराने के लिए समाज एवं कल्‍याण विभाग से समन्‍वय स्‍थापित कर हितग्राहियों को प्रदान किया जाता है। तथा ट्रेनिंग देकर संस्थागत क्षमता का विकास करना है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मीरा बघेल के निर्देशानुसार व जिला अस्‍पताल के सिविल सर्जन डॉ.रवि तिवारी, जिला नोडल अधिकारी डॉ.श्‍वेता बाखरू, डीपीएम मनीष कुमार मेजरवार के मार्गदर्शन में मास्टर ट्रेनर खुशबू भूआर्य,ऑडियोलॉजिस्ट व ऑडियोमेट्रिक असिस्‍टेंट विणा के सहयोग से प्रशिक्षण कराया  गया।
 
विश्व में 6.3 करोड़ लोग बहरेपन से प्रभावित
वहीं डब्ल्यूएचओ के अनुसार 6.3 करोड़ लोग इस विकृति से प्रभावित हैं। बहरापन आमतौर पर सेंसरी डिफेक्ट विकृति है। यह जन्म से 14 वर्ष तक के बच्चों में बहुतायत में पाया जाता है। अब ऐसे चिन्हित लोगों को जागरूक एवं स्पीच थैरेपी देकर, बालिका विद्यालय में बधिरता की पहचान कर विकलांगता प्रमाण पत्र जारी कर, अभिभावकों की काउंसलिंग कर, ईएनटी ओपीडी में बधिर रोगियों की पहचान कर एवं बधिरों की सूची बनाकर कार्यक्रम को सफल बनाया जाएगा।

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