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02-02-2020
शिक्षकों और व्याख्याताओं की रिकवरी आदेश पर रोक

रायपुर। प्रदेश के कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड में कार्यरत 6 शिक्षकों और व्याख्याताओं की रेट पर सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने बीते दिन जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी है। ब्लॉक के कई स्कूलों में कार्यरत किशोरी टोप्पो दशरू राम मंडावी, आनन्द राम नाग एवं अन्य शिक्षकों ने एडव्होकेट अनिल तावड़कर के माध्यम से  रिट लगाकर कर कहा है कि सभी कोंडागांव शिक्षा जिला विभाग के अंतर्गत आने वाले केशकाल विकासखंड के भिन्न-भिन्न गांवों के स्कूलों में कार्यरत हैं। रिट के मुताबिक जिला पंचायत के माध्यम से पंचायत विभाग में शिक्षाकर्मी के पदों पर हुई थी। सरकार ने निर्देश जारी कर बाद में शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने पत्र में इस बात की जानकारी नहीं दी है कि व्याख्याताओं और शिक्षकों को अधिक भुगतान करने का आधार क्या है।

14-01-2020
फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वाले शिक्षाकर्मी गिरफ्तार, राजनीतिक दबाव के चलते नहीं हुई थी जांच

महासमुन्द। जिले के पिथौरा थाना प्रभारी कमला पुसाम ने 2005 से विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त कर शिक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे सगे भाई बहनों को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी कर नौकरी पाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामला बड़ा ही हाई प्रोफाइल था, पिथौरा थानी प्रभारी पर मामले को दबाने के लिए क्षेत्र के बड़े बड़े नेताओं और अधिकारियों द्वारा दबाव बनाया गया था। इसके बाद भी थाना प्रभारी ने फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने वाले सगे भाई बहन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में एक आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश पिथौरा पुलिस कर रही है। पुलिस से प्राप्त जानकारी अनुसार पिथौरा ब्लॉक के राजाडेरा और सरकड़ा स्कूल में पदस्थ शिक्षाकर्मी राकेश सिन्हा और उसकी बहन रजनी सिन्हा ने फर्जी तरीके से विकलांग प्रमाण पत्र हासिल कर 2005 में नौकरी पाई थी। 2005 में ही शिक्षाकर्मी के गांव में रहने वाली हीरा निषाद जो उस वक्त पार्षद थी। उसने मामले की शिकायत पुलिस से की थी। लेकिन उस वक्त मामले में ना तो पिथौरा पुलिस ने जांच की और ना ही जनपद, जिला पंचायत ने इस शिकायात पर जांच की गई। दो माह पूर्व ही दानेश्वर पटेल नामक एक व्यक्ति ने  पिथौरा पुलिस से शिकायत की और मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी कमला पुसाम ने जांच शुरू की। जांच में यह जानकारी सामने आई की जिस दिनांक को शिक्षाकर्मियों ने विकलांगता प्रमाण पत्र नौकरी के लिए जमा किया था। इसके दो माह पहले और बाद में किसी भी जिला चिकित्सालय, सिविल सर्जन ने विकलांगता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया था। पुलिस की जांच में यह साफ हो गया कि शिक्षाकर्मी राकेश सिन्हा और रजनी सिन्हा ने फर्जी प्रमाण पत्र देकर नौकरी पाई थी। पुलिस ने जांच में यह भी पाया है कि इन दोनों भाई बहनों को नौकरी दिलाने में एक अन्य व्यक्ति का भी हाथ जो पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पिथौरा पुलिस ने मामले में 420 और 120 बी की धारा के तहत दोनों शिक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
गौरतलब है कि 2005 में जब दोनों भाई बहनों को जब फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी मिली तब उस वक्त हीरा निषाद ने मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते इस मामले को रफा दफा कर दिया गया। इसके कुछ दिनों बाद ही सरकड़ा निवासी हीरा निषाद की हत्या हो गई थी। हीरा निषाद के हत्या का आरोपी बहरहाल जेल में है।

 

31-12-2019
भूपेश सरकार नए साल में शिक्षाकर्मियों को देने जा रही तोहफा, देखिए आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार नए साल में शिक्षाकार्मियों को तोहफा देने जा ही है। दरअसल सरकार ने शिक्षक ( पंचायत/ नगरीय निकाय) संवर्ग का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आज स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार ने समस्त कलेक्टर, समस्त आयुक्त छत्तीसगढ़, समस्त मुख्य नगर पालिका/नगर पंचायत अधिकारी छत्तीसगढ़, समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत छत्तीसगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी छत्तीसगढ़ को आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार 1 जनवरी 2020 को 8 साल या उससे अधिक की सेवा पूर्ण कर चुके पंचायत या नगरीय निकाय शिक्षकों का विभिन्न स्तर पर समय सीमा में चरणबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजने के लिए कहा गया है।

03-12-2019
इस दिव्यांग के हौंसले को सलाम, शिक्षक के रूप में गढ़े रहे हैं देश का भविष्य

कोरिया। अगर हौंसले बुलंद हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता। कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ निवासी पवन दुबे,जो दिव्यांग होने के बावजूद शिक्षक के रूप में समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। पवन बचपन से दिव्यांग है लेकिन उनके मन में हमेशा समाज में कुछ करने की इच्छा थी। यही वजह है कि आज वह एक सफल शिक्षक के रूप में समाज में ज्ञान का उजियारा फैला रहे हैं और बच्चों को शिक्षित कर देश का भविष्य तैयार कर रहे हैं। वे समाज में मिसाल बनकर उभरे हैं। बता दें कि पवन दुबे बचपन से चलने फिरने में असमर्थ थे। इसके बाद भी वह रोजाना रिक्शे से स्कूल जाते थे और तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी की। वे मनेंद्रगढ़ विकासखंड के प्राथमिक शाला शंकरगढ़ में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 के तौर पर पदस्थ होकर समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं। वे शिक्षाकर्मियों के लिए कार्य करने वाले संगठन शालेय शिक्षाकर्मी संघ के ब्लाक अध्यक्ष के साथ ही प्रांतीय प्रवक्ता भी है। पवन ने कई बार शिक्षाकर्मियों के हक में ब्लाक से लेकर जिले और राजधानी रायपुर तक आवाज बुलंद की हैं।

 

28-11-2019
सदन से शिक्षाकर्मियों के लिए आई बुरी खबर, 8 साल में होगा संविलियन

रायपुर। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद संविलियन का इंतजार कर रहे शिक्षाकर्मियों के लिए एक बुरी खबर है। संविलियन पूर्व की भांति 8 साल या उससे अधिक की सेवा पूर्ण कर चुके शिक्षाकर्मियों का होगा। पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव ने ये जवाब विधानसभा में अतरांकित सवाल के जवाब में दिया है। लालजीत सिंह राठिया के सवाल का जवाब देते हुए सिंहदेव ने कहा है कि प्रदेश में पंचायत विभाग के अंतर्गत संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों की संख्या 16 हजार 366 है। व्याख्याता पंचायत की संख्या 8903, शिक्षक पंचायत की संख्या 2224 और सहायक शिक्षक पंचायत की संख्या 5239 है। लालजीत सिंह राठिया ने सवाल पूछा था कि प्रदेश में अभी संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों की संख्या कितनी है और उन शिक्षाकर्मियों का संविलियन कब तक कर दिया जायेगा। जवाब में मंत्री सिंहदेव ने संविलियन से वंचित शिक्षाकर्मियों की संख्या 16 हजार 366 बतायी है। संविलियन की अवधि के बारे में कहा है कि 8 साल या उससे अधिक की सेवा पूर्ण करने पर संवलियन की प्रक्रिया निर्धारित है, उसी के अनुरूप कार्रवाई की जायेगी।

बता दें कि शिक्षाकर्मियों के लिए कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में ऐलान किया था कि 2 साल की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर दिया जायेगा। इस घोषणा के बाद शिक्षाकर्मी गदगद हो गये थे। हालांकि इस जवाब के बाद शिक्षाकर्मियों में निराशा बढ़ सकती है। क्योंकि शिक्षाकर्मी को इस बात की उम्मीद थी कि राज्य सरकार भले ही पहले साल किसानों की कर्जमाफी की वजह से उनसे किया वादा पूरा नहीं कर पायी हो पाया, लेकिन अगले साल उनकी मांगें जरूर पूरी हो जायेगी। हालांकि इस जवाब के बाद अब वो निराश हो सकते हैं। उसी तरह संविदा कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर भी लिखित जवाब मंत्री टीएस सिंहदेव का आया है। उन्होंने लालजीत सिंह राठिया के ही एक अन्य सवाल के जवाब में बताया है कि प्रदेश के चिकित्सा विभाग में अभी संविदा पर 1112 कर्मचारी-अधिकारी तैनात हैं। संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के नियमितिकरण को लेकर समय बता पाना संभव नहीं है।

18-11-2019
आईपीएस भोजराम ने कहा-मां के त्याग ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया

कांकेर। कांकेर जिले के नये पुलिस कप्तान युवा आईपीएस भोजराम पटेल ने आज प्रेसवार्ता में पत्रकारों को बताया कि कैसे अपने स्कूली छात्र जीवन में गरीबी के बीच पढ़ाई कर पहले शिक्षाकर्मी बने फिर कड़ी मेहनत से भारतीय पुलिस सेवा में चयन होकर आज कांकेर जिले में एसपी के रूप में पदस्थ हुए हैंं। बहुत ही कम उम्र में जिले की कमान सम्भालने वाले भोजराम पटेल रायगढ़ जिले के हैं। उन्होंने बताया कि वे कृषक परिवार से हैं और शुरुआती दिनों में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचाने में उनकी माता का  महत्वपूर्ण योगदान रहा। एसपी की मां को अक्षर ज्ञान नहीं था लेकिन धार्मिक, पौराणिक ग्रंथों में उनको रुचि थी जहां से जो ज्ञानवर्धक बातें वह सुनतीं उसे आकर अपने पुत्र को बताती थीं। मां के बताये रास्ते ने आज उन्हे यहां तक पहुंचाया  है। नये पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गरीबी के चलते कई बार पेट भर भोजन तक नहीं मिलता था। मां आधा पेट भोजन कर सो जाती थीं तो मैं भी आधा पेट भोजन कर सो जाता था। मां अपनी इच्छा को मारकर त्याग करती थीं। लेकिन मां पढ़ाई के लिए उस समय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराती गईं और उन्हीं की त्याग ने आज उन्हें यहां तक पहुंचाया है।

 

13-11-2019
मुख्यमंत्री की जनचौपाल में बेटे का ट्रांसफर रायपुर करने की फरियाद लेकर पहुंची बुजुर्ग मां

रायपुर। बुढ़ापे में बच्चे ही माता-पिता का सहारा होते हैं। ऐसे में यदि बच्चे मां-पिता से दूर हों तो उन्हें बुढ़ापे में सहारे की कमी खलती है। आज यह भी देखने को मिलता है कि माता-पिता को बुढ़ापे में जब अपने बच्चों की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है तो बच्चे उन्हें अपने से दूर कर वृद्धाश्रम में छोड़ कर आ जाते हैं। इसके उलट आज एक मां अपने शिक्षाकर्मी बेटे का ट्रांसफर रायपुर कराने की फरियाद लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जनचौपाल-भेंट मुलाकात-कार्यक्रम में पहुंची थीं। रायपुर की सुमित्रा साहू ने चर्चा के दौरान कहा कि उनका बेटा बलौदाबाजार में शिक्षा विभाग में पदस्थ है। बेटे के  बच्चे भी बड़े हो गए हैं और हम भी बुजुर्ग हो गए हैं। ऐसे में अब बेटे का साथ घर में ही चाहते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से फरियाद करने पहुंची इस मां ने कहा कि बेटे का ट्रांसफर रायपुर में हो जाए तो हम सभी साथ रहेंगे।

इसी तरह ग्राम तुलसी पाटन से पहुंचे रामाधर कौशल ने जमीन के मामले में आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि जमीन खरीदी थी, पटवारी ने जो नकल दिया उस हिसाब से रजिस्ट्री करवाई थी। अब कहा जा रहा है कि पटवारी रिकॉर्ड में जमीन कम है, 15 डिसमिल जमीन काट दी गई है। पटवारी के मुताबिक ही रजिस्ट्री करवाई थी, तहसील में 3 साल तक और एसडीएम में 6 माह तक पेशी में गया, वहां खारिज कर दिया गया है। अब मुख्यमंत्री को इस संबंध में आवेदन दिया हूं। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।  

रायपुर कोटा क्षेत्र की सांईनाथ कॉलोनी की चित्रकला यादव भी जनचौपाल में पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि नई-नई कॉलोनी बसी है। चार-पांच साल हो गए, हम भूमिस्वामी हैं। कॉलोनी में लेआउट नहीं है इसलिए घर बनाने में कठिनाई हो रही है। प्राइवेट दर से अधिक ब्याज दर पर लोन लेकर सबने घर बनाया है, इसलिए आर्थिक कठिनाई हो रही है। मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है। उम्मीद है कि हमारी मांग पूरी होगी।

जनचौपाल में युवा भी पहुंचे थे। विवेक गांगुली स्टूडेंट रायपुर ने कहा कि पीएससी के नोटिफिकेशन को लेकर मुख्यमंत्री की जन चौपाल में आवेदन दिए हैं। मांग है कि जैसे मध्यप्रदेश में हुआ है वहां पर आरक्षण का आंकड़ा बढ़ाया गया है, हम चाहते हैं कि कोर्ट के स्टे के कारण व्यापम का नोटिफिकेशन न अटके, जैसे भी सरकार को उचित लगे नोटिफिकेशन निकाला जाए।  हॉस्टल वार्डन, फूड इंस्पेक्टर का एग्जाम अटका हुआ है, ढाई से तीन लाख लोग इससे प्रभावित हैं। केशव कुमार साहू का कहना है सरकार उचित कार्यवाही करें, यही मांग है। पहले भी मंत्री ताम्रध्वज साहू से मुलाकात हो चुकी है। संतोषजनक जवाब अब तक नहीं मिला है। आरक्षक का पद आया था, वह निरस्त कर दिया गया और कहा गया था कि हो जाएगा लेकिन वह भी आरक्षण के नाम पर रुका है।

 

23-10-2019
शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा : 11 फर्जी शिक्षाकर्मियों को ढाई - ढाई साल की सजा

धमतरी। धमतरी जिले के मगरलोड जनपद पंचायत में वर्ष 2008 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़ा मामले में 11 फर्जी शिक्षाकर्मियों को दो ढाई-ढाई साल की कठोर सजा प्रथम श्रेणी व्यवहार न्यायालय कुरुद ने सुनाई है। बता दें कि वर्ष 2008 में शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की नौकरी के लिए अभ्यर्थियों की भर्ती की गई थी। धमतरी जिले के मगरलोड जनपद पंचायत में भी विज्ञान एवं कला विषय के लिए 211 पदों पर भर्ती हुई थी। इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का आरोप ग्राम चंदना निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू ने लगाया था। उसने सूचना के अधिकार के तहत तमाम दस्तावेज हासिल करने के बाद 3 जून 2006 को धमतरी कलेक्टर और एसपी के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर मगरलोड थाना में 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 34 के तहत अपराध पंजीबद्ध हुआ था। शिकायत करने के करीब 9 साल बाद 6 अगस्त 2018 को न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कुरुद में शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार साहू का बयान दर्ज किया गया। सभी पक्ष को सुनने के बाद न्यायाधीश महेश बाबू ने आरोप को सही पाते हुए सभी 11 शिक्षाकर्मियों को धारा 420 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपए अर्थदंड, धारा 467 के तहत 2 वर्ष 6 माह कठोर कारावास व 1000 रुपए अर्थदंड, धारा 468 के तहत 2 वर्ष कठोर कारावास व 500 रुपए अर्थदंड और धारा 471 के तहत 1 वर्ष कठोर कारावास व 500 अर्थदंड की सजा सुनाया है।

इन फर्जी शिक्षाकर्मियों को हुई सजा
जिन अभ्यर्थियों ने फर्जी दस्तावेज के जरिए शिक्षाकर्मी वर्ग 3 की नौकरी हासिल की थी, उनमें सुबोध कुमार साहू, शिवकुमार सोनकर, देवेंद्र कुमार साहू, गीता साहू, योगेश कुमार साहू, देवबती साहू, बसंत पटेल, टेमन लाल विश्वकर्मा, हीरालाल साहू, मनोज कुमार सिन्हा, तोरण सिन्हा शामिल हैं, जिन्हें न्यायालय ने कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

सीईओ के खिलाफ  भी हुई थी शिकायत
आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू का कहना है कि शिक्षाकर्मी फर्जीवाड़ा में जनपद सीईओ समेत छानबीन समिति की भी मुख्य भूमिका रही है, क्योंकि छानबीन समिति के द्वारा फर्जी दस्तावेजों को भी सही बताते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को शिक्षाकर्मी की नौकरी दिलाने का काम किया गया। इस मामले में करीब 20 शिक्षाकर्मियों के अलावा जनपद सीईओ और छानबीन समिति के विरुद्ध भी थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने सिर्फ 11 शिक्षाकर्मियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया, बाकी लोगों के खिलाफ  अपराध पंजीबद्ध करने के बजाय उन्हें छोड़ दिया गया। अब जब न्यायालय ने भी आरोप को सही पाते हुए फर्जी शिक्षाकर्मियों को सजा दे दी है, तब यह स्पष्ट हो चुका है कि छानबीन समिति में शामिल लोगों के द्वारा इस फर्जीवाड़े को अमलीजामा पहनाया गया था, लिहाजा उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जानी चाहिए।

10-10-2019
अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगो को लेकर नेता प्रतिपक्ष से की मुलाकात

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक से अतिथि शिक्षकों ने नौकरी से निकाले जाने और उनके सामने रोजी-रोटी के संकट खड़ा किए जाने की शिकायत की है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा है कि राजधानी रायपुर में प्रदर्शन कर रहे प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों की मांग जायज है, जिसे जल्द ही पूरा किया जाना चाहिए। बस्तर से लेकर सरगुजा तक कार्यरत ऐसे अतिथि शिक्षकों के मसले पर कांग्रेस सरकार को जल्द ही फैसला लेना चाहिए। उन्होने कहा कि समय रहते मांगे पूरी नही की गई तो इस मुद्दे को वे विधानसभा में बड़े जोर-शोर से उठाएंगे।

28-08-2019
फर्जी अंकसूची बनवाकर नौकरी करने वाले शिक्षाकर्मी को पुलिस ने किया गिरफ्तार 

कवर्धा। पुलिस ने फर्जी शिक्षाकर्मी को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वह फर्जी अंकसूची बनवाकर शिक्षाकर्मी की नौकरी करता था। आरोपी शिक्षक का नाम मदनलाल धरमगढ़े बताया जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में अंकसूची बनावाने वाले मास्टर माइंड युवक सुमन लाल बघेल को भी गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक आरोपी ने 2005 से लेकर अब तक लगभग 19 वर्षों तक नौकरी की है। रेंगाखार पुलिस ने यह कार्रवाई की है। इस मामले की शिकायत  शिकायत लगातार पुलिस को मिल रही थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया है। वहीं जिले में अब भी फर्जी शिक्षाकर्मी नौकरी कर रहे है। इस मामले की भी शिकायत पुलिस से की जा चुकी है l


 

10-05-2019
शराबी शिक्षक की हरकत से बच्चे व अभिभावक परेशान, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही 

कोरबा। प्राथमिक शाला में पदस्थ एक शराबी शिक्षक की हरकतों से पढ़ने वाले बच्चे, अभिभावक सहित ग्रामीण खासे परेशान हैं। उक्त शिक्षक को स्कूल से हटाने ग्रामीणों द्वारा बीईओ से शिकायत के बाद भी आज पर्यन्त तक कोई कार्यवाही ना होने से शिक्षक के हौसले बुलंद हैं और अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत पटुवा में संचालित प्राथमिक शाला के एक शिक्षक के शराबखोरी व उल्टे सीधे हरकतों के कारण विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे व उनके अभिभावक सहित ग्रामीण त्रस्त है। कृपाल सिंह मरकाम यहां शिक्षाकर्मी के पद पर पदस्थ है। तथा आए दिन शराब के नशे में धुत्त होकर स्कूल पहुंचता है और बच्चों को पढ़ाने-लिखाने के बजाय उल्टे सीधे हरकत करते रहता है। कभी-कभी तो उक्त शिक्षाकर्मी विद्यालय भवन को ही मयखाना बना लेता है और छक्कर शराब पीने के बाद नशा सर चढ़ने पर जमीन पर लोटने लगता है।

इस शिक्षाकर्मी के हरकतों से जहां एक ओर पढ़ाई प्रभावित होता है। वहीं दूसरी ओर बच्चों के मानसिकता पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। अभिभावकों व ग्रामीणों द्वारा शराबी शिक्षक को अनेकों बार शराब ना पीकर स्कूल आने की समझाईस दी गई लेकिन शिक्षक पर ग्रामीणों के समझाईस का कोई भी असर नहीं दिखा। लिहाजा शिक्षाकर्मी के शराबखोरी हरकतों से परेशान ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड शिक्षाधिकारी अशोक कुमार चंद्राकर से भी की। लेकिन उक्त शिक्षाकर्मी पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही आज पर्यन्त तक नहीं हुई। लिहाजा ग्रामीण अब कलेक्टर के पास शिकायत लेकर जाने की योजना बना रहे हैं। इस मामले पर बीईओ अशोक चंद्राकर से 7697492950 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। जिसके कारण उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।

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