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06-07-2020
लोकजीवन की कृति ही हम सबकी साझा संस्कृति है : हरिहर वैष्णव 

रायपुर। बस्तर टॉक के पहले सीजन में लोक साहित्यकार, संस्कृति चिंतक और ब्लॉगर हरिहर वैष्णव ने 'बस्तर के साहित्य और लेखन' विषय पर विचार रखते हुए कहा कि हमारे जीवन की व्यथा और उसकी कथा को कहने की कला ही साहित्य है। बस्तर के लोक साहित्य को प्रकाश में लाने का थोड़ा सा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोक जीवन को माटी के मनीषियों ने अपनी उल्लेखनीय रचनाओं के माध्यम से समाज के बीच प्रस्तुत किया है। महान साहित्यकार पंडित केदार नाथ ठाकुर, ठाकुर पूरन सिंह, पं.बाल गंगाधर सामंत, पं. रघुनाथ महापात्र, लाला जगदलपुरी, जोगेंद्र महापात्र, लक्ष्मीनारायण परोधि व स्व. ठाकुर राम सिंह, स्व.डॉ.जयदेव बघेल सहित तमाम साहित्यकारों व लोक कलाकारों ने यहां के लोक जीवन की कृतियों को शाब्दिक-रूपंकर स्वरूप दिया है। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति के संरक्षण के लिए सरकारी सहभागिता से ज्यादा जरूरी सामाजिक सहयोग की है, ताकि हम अपनी कला-साहित्य के मूल स्वरूप को संरक्षित रख सकें। उन्होंने कहा कि हमारी बोली, हमारी भाषा, हमारी पहचान है।

एक समय में बस्तर में करीब 35 बोलियां यहाँ के आम जनमानस में बोली जाती थीं लेकिन अब धीरे-धीरे हमारी कुछ बोलियां विलुप्त होने के कगार पर है जो हम सब के लिए चिंता का विषय है। हमें अपनी भाषा-बोली से ममत्व भाव रखना होगा तभी हम अपने आने वाली पीढ़ियों को कुछ बेहतर दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन की कृतियां ही हमारी साझा संस्कृति है, जिसकी पहचान पूरी दुनियाँ में है और उसकी मौलिकता को बनाने बनाए रखने के लिए हम सबको एकजुटता के साथ आगे आना होगा। बस्तर के साहित्यकार हरिहर वैष्णव बस्तर के लोक जीवन पर अब तक 29 पुस्तक लिख चुके हैं। उन्हें आंचलिक साहित्यकार सम्मान, पंडित सुंदरलाल शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण, वेरियर एल्विन प्रतिष्ठा अलंकरण जैसे महत्वपूर्ण सम्मान प्रदान किया जा चुका है। उनके सहयोग से देश-दुनियाँ में कई टीवी प्रोग्राम बनाए गए हैं। बस्तर के सांस्कृतिक दूत के तौर पर वे आस्ट्रेलिया, स्वीटजरलैंड, इटली के प्रवास पर भी गए हैं। उनके सहयोग से स्कॉटलैंड में एनिमेशन फिल्म भी बनाई गई है। इस चर्चा का संचालन वर्षा मेहर ने किया व तकनीकी सहयोग अतुल प्रधान का रहा। कार्यक्रम में रमेश प्रधान, हबीब राहत, डॉ.परवीन अख्तर, श्रीकृष्ण काकूडे, पूनम विश्वकर्मा सहित आम दर्शक जुड़े।

04-07-2020
राज्य भर में जून महीने में अब तक दर्ज हो चुकी 304.7 मिमी वर्षा

रायपुर। राज्य भर में अब तक जून महीने में 304.7 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। कंट्रोल रूम के मुताबिक 1 जून से अब तक 304.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में आज सुबह रिकार्ड की गई वर्षा के अनुसार सरगुजा में 5.2 मिमी, बलरामपुर में 10.9 मिमी, जशपुर में 16.8 मिमी, कोरिया में 1.9 मिमी, रायपुर में 14.5 मिमी, बलौदाबाजार में 6.7 मिमी, गरियाबंद में 7.2 मिमी, महासमुन्द में 7.9 मिमी, धमतरी में 17.1 मिमी, बिलासपुर में 6.6 मिमी, मुंगेली में 16.7 मिमी, रायगढ़ में 1.8 मिमी, जांजगीर-चांपा में 15.1 मिमी और दुर्ग में 18.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। इसी प्रकार कबीरधाम में 13.4 मिमी, राजनांदगांव में 9.4 मिमी, बालोद में 21.3 मिमी, बस्तर में 22.9 मिमी, कोण्डागांव में 21.5 मिमी, कांकेर में 7.3 मिमी, नारायणपुर में 1.5 मिमी दंतेवाडा में 44.2 मिमी, सुकमा में 6.9 मिमी और बीजापुर में 17.9 मिमी औसत वर्षा आज रिकार्ड की गई।

29-06-2020
मुख्यमंत्री ने बस्तर के तीन जिलों में तेंदूपत्ता संग्राहकों को नगद भुगतान करने दी अनुमति

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र के सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर वनमंडल के तेंदूपत्ता संग्राहकों को, तेंदूपत्ता संग्रहण के पारिश्रमिक की राशि का नगद भुगतान करने की स्वीकृति प्रदान की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने सोमवार को  मुख्यमंत्री को तेन्दूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक की राशि के नगद भुगतान के लिए पत्र लिखकर अनुरोध किया था। इस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मंत्री लखमा ने लिखा है कि वनमंडल सुकमा, वनमंडल दंतेवाड़ा और वनमंडल बीजापुर तीनों घोर संवेदनशील और नक्सल प्रभावित जिलों में हैं। इन जिलों के तेंदूपत्ता संग्राहकों और जनप्रतिनिधियों ने तेंदूपत्ता पारिश्रमिक का नगद भुगतान कराने का आग्रह किया है। इन तीनों जिलों में भी तेंदूपत्ता का भुगतान बैंक के माध्यम से करने का प्रावधान है। परंतु संग्राहकों के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता नहीं होने के कारण बैंक के माध्यम से भुगतान में काफी दिक्कत होती है। एक तो यह क्षेत्र संवेदनशील है और अंदरूनी गांवों से बैंक की दूरी 70 से 80 किलोमीटर तक है। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों और इन जिलों के जनप्रतिनिधियों के आग्रह पर तेंदूपत्ता संग्राहकों को बैंक से पारिश्रमिक से भुगतान के आदेश को निरस्त करते हुए सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर तीनों वनमंडलों में तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारिश्रमिक की राशि का नगद भुगतान कराने के निर्देश दिए हैं।

 

 

23-06-2020
बस्‍तर में कोरोना वारियर बने एम्‍बुलेंस 102 महतारी एक्‍सप्रेस के पायलट व ईएमटी

जगदलपुर। वैश्विक महामारी के लगातार बढ़ रहे संक्रमण ने महतारी एक्सप्रेस 102 कर्मचारियों का कार्य भी बढ़ा दिया है। आजकल कोरोना संक्रमण के डर से लोग अस्पताल और स्वास्थ्य केन्द्रों में जाने से कतरा रहे हैं तो कर्मचारियों को पहले उनकी समझाइश भी करनी पड़ रही है |  बस्‍तर के दूरस्‍थ क्षेत्रों में कार्यरत महतारी एक्सप्रेस 102 के कर्मचारी कोरोना वारियर बनकर अपनी विशेष भूमिका निभा रहे हैं। यहां 102 के कर्मचारी संक्रमित क्वारंटाइन सेंटरों में भी पहुंचकर मरीजों सहित गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में जुटे है। साथ ही अस्पतालों में उपचार के बाद स्वस्थ्य होने पर उन्हें घर तक पहुंचाकर अपनी जिम्मेदारी  का बखूबी निर्वहन करने में जुटे हैं।महतारी एक्सप्रेस 102 के पायलट और ईएमटी की टीम 24 घंटे सेवा दे रहे हैं। कोरोना वायरस से बचाव में महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी हर बार उपयोग में लाने से पहले एम्‍बुलेंस को सैनिटाइज कर साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते है। साथ ही डिलेवरी महिलाओं के अलावा क्वारंटाइन मरीज को अस्पताल पहुंचाने व घर पहुंचाते समय 102 महतारी एक्सप्रेस को प्रत्येक बार सैनिटाइज किया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक मरीजों को संक्रमण की रोकथाम व बचाव के लिए समझाइश देते हुए ग्लब्स व मास्क पहनाया जाता है।बस्‍तर जिला मुख्‍यालय से 50 किमी दूर भानपुरी सीएचसी के अंतर्गत आने वाले मुंडागांव  प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में तैनात महतारी एक्‍सप्रेस के पायलट रामफल बंजारे ने बताया सूदूर जंगल के इलाकों में पहुंचविहिन मार्गों से होकर डिलवरी के लिए गर्भवती महिला का लेबर पेन होने की सूचना कॉल सेंटर से मिलने पर एम्‍बुलेंस लेकर 30 मिनट में हितग्राही के घर पहुंचने की कोशिश रहती है। पायलट बंजारे ने बताया प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र से 20 से 25 किमी की दूर गांव होता है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 12 घंटे की डयूटी करते हैं। वे चार साल से पायलट यानी एम्‍बुलेंस के ड्राइवर की नौकरी कर रहे हैं।

ईएमटी घनश्‍याम बर्मन ने कहा ये उनका सौभाग्‍य है ऐसे दुरस्‍थ अंचल में जरुरत मंदों तक दिन रात कभी भी इमेंरजेंसी सेवा देते हैं। जब किसी गांव में पहुंचते हैं तो लोग डॉक्‍टर साहब कहकर पुकारने लगते हैं। मरीज की गंभीर हालत में लोगों उनकों किसी फिल्‍म नायक की तरह समझ कर सम्‍मान देते हैं।लॉकडाउन के दौरान मई महीने में पारापुर भंडामपुर ( चित्रकोट) निवासी फूलो बाई (28) के प्रसव पीड़ा का कॉल आया। जैसे ही महतारी एक्‍सप्रेस की टीम पहुंची इमेंरजेंसी मेडिकल टेक्‍निशयन घनश्‍याम बर्मन ने महिला की जांच की। प्रसव पीड़ा ज्‍यादा होने की वजह से मितानिन और स्‍थानीय महिलायों की मदद से घर पर ही डिलवरी करवाई गई। प्रसूता ने जुड़वा बच्चों को जन्‍म दिया। बच्‍चा व जच्‍चा स्‍वस्‍थ्‍य होने पर एम्‍बुलेंस की टीम लोहांडीगुड़ा अस्‍पताल लेकर आयी जहाँ प्रभारी चिकित्‍सक द्वारा जांच व प्रसव बाद की दवाईयां दी गई। दूसरी टीम में गजेंद्र सिंह ईएमटी व पायलट मयाराम धुव्र महतारी एक्‍सप्रेस में सेवा देते हैं।वहीं हेल्‍थ एवं वेलनेस सेंटर मुंडागांव पीएचसी के प्रभारी चिकित्‍सक रोशन वर्मा (आरएमओ) ने बताया रेफरल केस में 50 किमी दूरी के दायरे में जिला मुख्‍यालय जगदलपुर में सिविल अस्‍पताल व मेडिकल कॉलेज तक इमेंरजेंसी में सेवा देकर मरीजों की जान बचाने का कार्य करते हैं। इन एम्बुलेंस से गर्भवती महिलाओं के उपचार के लिए उन्हें हॉस्पिटल तक मुफ्त लाया जाता है और वापस घर तक छोड़ा जाता है। महिने में 10 से 12 नार्मल डिलवरी कराया करवाई जाती है। डिलवरी के बाद जच्‍चा–बच्‍चा की जांच के बाद टीकाकारण भी किया जाता है।आरएमओ रोशन वर्मा ने बताया पिछले साल 179 सुरक्षित डिलवरी करवाई गयी थी। एम्‍बुलेंस की सुविधा मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के हाई रिस्‍क प्रेग्‍नेंसी की 2 प्रतिशत मामलों को रेफर किया जाता है। वर्मा ने बताया कोरोना संक्रमण को लेकर सहमें लोग जब अस्‍पताल आने से कतरा रहे हैं तब महतारी एक्‍सप्रेस की टीम ने मोर्चा संभाला और गर्भवती महिलाओं को समझाकर अस्‍पताल में संस्‍थागत डिलवरी कराने प्रोत्‍साहित किया।

22-06-2020
राजमार्गों के दोनों किनारों पर किया जा रहा है तीन स्तरीय पौधरोपण

रायपुर/जगदलपुर। जिला प्रशासन के द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्यीय राजमार्ग, जिला मार्ग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मार्गो के दोनों किनारों पर तीन स्तरीय पौधरोपण किया जाना है। इसी तारतम्य में बस्तर जनपद पंचायत द्वारा आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग-43 किनारे पौधरोपण कार्यक्रम में कलेक्टर रजत बंसल शामिल होकर पौधरोपण किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ एसडीएम बस्तर गोकुल रावटे, सीईओ जनपद जेएस राठौर ने भी पौधरोपण किए। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के दोनों किनारे ग्राम पंचायत कुदालगांव से फरसागुड़ा (भानपुरी) तक 3168 नग पौधारोपण का कार्य जनपद पंचायत बस्तर द्वारा किया जा रहा है।

 

20-06-2020
बोधघाट ऐसा प्रोजेक्ट है,जिसका लाभ सिर्फ बस्तर के लोगों को मिलेगा :भूपेश बघेल

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को अपने निवास कार्यालय में बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर बस्तर के जनप्रतिनिधियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना के सबंध में एक-एक कर सभी जनप्रतिनिधियों से उनकी राय लेने के बाद बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बोधघाट ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसका लाभ सिर्फ और सिर्फ बस्तर के लोगों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब तक बस्तर में जितने भी उद्योग और प्रोजेक्ट लगे हैं, उसका सीधा फायदा बस्तर के लोगों को नहीं मिला है। यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो बस्तर के विकास और समृद्धि के लिए है। इसका सीधा फायदा बस्तरवासियों को मिलेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि 40 वर्षों से लंबित इस प्रोजेक्ट को बस्तर की खुशहाली को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से तैयार किया किया गया है। बोधघाट परियोजना पहले मुख्य रूप से जल विद्युत उत्पादन के लिए थी, जो बस्तर और वहां के लोगों के जरूरतों के अनुकूल नहीं थी। इस परियोजना में आमूलचूल परिवर्तन कर इसे सिंचाई परियोजना के रूप में तैयार किया गया हैै। जिसका लाभ बस्तर संभाग के अधिकांश क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों को मिलेगा। इस सिंचाई परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले में नहरों के माध्यम से तीन लाख 66 हजार 580 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जलापूर्ति होगी। इसमें लिफ्ट इरीगेशन को भी शामिल कर बस्तर के शेष जिलों को भी सिंचाई एवं निस्तार के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा।

बोधघाट परियोजना बस्तर की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोधघाट परियोजना बस्तर की जरूरत है। पूरे बस्तर संभाग में एक भी सिंचाई का बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है। बस्तर संभाग का सिंचाई प्रतिशत न्यूनतम है। वनों की अधिकता के बावजूद भी मानसून यदि थोड़ा भी गड़बड़ाता है, तो सूखे से सबसे ज्यादा बस्तर अंचल ही प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंद्रावती नदी के जल का सदुपयोग कर बस्तर को खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए बोधघाट परियोजना जरूरी है। अब समय आ गया है, बस्तर के विकास और वहां के लोगों की बेहतरी के लिए काम होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को यदि सिंचाई की सुविधा मिल जाए, तो वह रोजगार खुद पैदा कर लेंगे।


अंचल में खेती किसानी समृृद्ध होगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक यही सुनते आए हैं कि बस्तर के लोग अपना घर परिवार छोड़कर अन्यत्र रोजी-रोजगार के लिए नहीं जाते हैं परंतु कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की अवधि में बस्तर वापस लौटने वालों के जो आंकड़े आए हैं उसे देखकर यह पता चलता है कि बस्तर के नौजवान रोजी-रोजगार की तलाश में देश के विभिन्न राज्यों में जाने लगे हैं। बस्तर की नौजवान पीढ़ी को बस्तर में ही रोजगार का अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। बोधघाट सिंचाई परियोजना से बस्तर अंचल में खेती किसानी समृृद्ध होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था बेहतर होगी।
 
पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की बेहतर व्यवस्था की जाएगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वास, विकास और सुरक्षा हमारा मूल मंत्र है। सरकार इसको ध्यान में रखकर ही जन हितकारी कामों को अंजाम दे रही है। उन्होंने कहा कि बोधघाट परियोजना के प्रभावितों के लिए पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। प्रभावितों का किसी भी तरह का नुकसान न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की नीति लोगों से चर्चा कर तैयार की जाएगी। विस्थापितों को उनकी जमीन के बदले बेहतर जमीन, मकान के बदले बेहतर मकान दिए जाएंगे। हमारी यह कोशिश होगी कि इस प्रोजेक्ट के नहरों के किनारे की सरकारी जमीन प्रभावितों को मिले, ताकि वह खेती-किसानी बेहतर तरीके से कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तरवासियों के हितों की रक्षा, राज्य सरकार की प्राथमिकता है। बस्तर के लोगों के जीवन में खुशहाली आए, इसको ध्यान में रखकर उनकी सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि एक निजी इस्पात संयंत्र के लिए अधिग्रहित की गई जमीन की वापसी का मामला हो या लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी हो। सरकार ने बस्तर के लोगों के हितों का हमेशा ध्यान रखा है।

बस्तर अंचल के समग्र विकास के लिए सिंचाई जरूरी : रविन्द्र चौबे

कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि बस्तर अंचल के समग्र विकास के लिए सिंचाई जरूरी है। इससे बस्तर की अर्थव्यवस्था में बदलाव आएगा। उन्होंने इस परियोजना के क्रियान्वयन से पहले आकर्षक पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की नीति तैयार करने और उसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने की बात कही। मंत्री चौबे ने कहा कि इस परियोजना से प्रभावित परिवारों को लाभ मिले, यह हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में सिंचाई सुविधा को बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि इससे जीवन में बदलाव आता है।

 परियोजना से बस्तर के विकास का नया रास्ता खुलेगा: लखमा
वन एवं पर्यावरण मंत्री मो.अकबर ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरा कराए जाने का सुझाव दिया, जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताते हुए इसका परीक्षण कराए जाने की बात कही। उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि बोधघाट परियोजना से बस्तर के विकास का नया रास्ता खुलेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से प्रभावित लोगों को क्या लाभ मिलेगा, इसे स्पष्ट रूप से बताना होगा तथा उनसे चर्चा करनी होगी। मंत्री लखमा ने कहा कि प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले व्यवस्थापन के लिए जमीन का चिन्हांकन किया जाना चाहिए। राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने भी पुनर्वास एवं व्यवस्थापन की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आम जनता से चर्चा कर पुनर्वास की नीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से बस्तर के विकास को गति मिलेगी। खेती-किसानी और उससे जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

 जनसामान्य का विश्वास अर्जित करना होगा : अरविन्द नेताम
पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविन्द नेताम ने कहा कि इस परियोजना के लाभ के बारे में लोगों को बताना होगा। जनसामान्य का विश्वास अर्जित करना होगा। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में वन अधिनियम, पेसा कानून एवं वनांचल के लोगों के हितों को ध्यान में रखने की बात कही। नेताम ने इस प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले गांवों एवं परिवारों की सही-सही जानकारी संधारित की जानी चाहिए। बैठक में सांसद दीपक बैज, राज्य सभा सांसद फूलोदेवी नेताम सहित सभी विधायकगणों एवं जिला पंचायत के अध्यक्षों ने भी इस प्रोजेक्ट को बस्तर अंचल के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कई उपयोगी सुझाव दिए। सभी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए बस्तर के लोगों से रायशुमारी और लोगों की मंशा के अनुरूप ही इसका निर्माण हो।

बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में विधायक राजमन बेंजाम, विक्रम मंडावी, मनोज मंडावी, संत नेताम, शिशुपाल सोरी, रेखचंद जैन, मोहन मरकाम, देवती कर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष बीजापुर शंकर खुडियाम, जिला पंचायत अध्यक्ष सुकमा हरीश लखमा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अपर मुख्य सचिव जल संसाधन अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सचिव जल संसाधन अविनाश चम्पावत, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

20-06-2020
भूपेश बघेल ने बस्तर के जनप्रतिनिधियों की ली बैठक, बोधघाट परियोजना पर हुई चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को अपने निवास कार्यालय में बोधघाट बहुउद्देश्यीय परियोजना के क्रियान्वयन के विषय पर बस्तर अंचल के जनप्रतिनिधियों की बैठक ली। बैठक में जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, बस्तर सांसद दीपक बैज, राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम, विधायक राजमन बेंजाम, विक्रम मंडावी, मनोज मंडावी, संत नेताम, शिशुपाल सोरी, रेखचंद जैन, मोहन मरकाम, देवती कर्मा, पूर्व सांसद अरविंद नेताम, जिला पंचायत अध्यक्ष बीजापुर शंकर खुडियाम, जिला पंचायत अध्यक्ष सुकमा हरीश लखमा मौजूद थे। साथ ही बस्तर अंचल के जिला पंचायत अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव जल संसाधन अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, सचिव जल संसाधन अविनाश चम्पावत, मुख्यमंत्री सचिवालय में उप सचिव सौम्या चौरसिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

17-06-2020
भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प में बस्तर का एक जवान शहीद

रायपुर/कांकेर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले का एक जवान भारत-चीन सीमा पर सोमवार की रात हुई झड़प में 20 जवान शहीद हो गए। इसमें कांकेर के चारामा ब्लॉक के कुररूटोला ग्राम पंचायत के ग्राम गिधाली निवासी जवान गणेश कुंजाम इस झड़प में शहीद हो गये हैं। मंगलवार की शाम सेना ने फोन पर गणेश के परिजनों को सूचित किया जिसके बाद गांव में मातम पसर गया है। मिली जानकारी के अनुसार भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प में सेना के जवानों के शहीद होने की खबर आई। इसमें कांकेर जिले का जवान गणेश कुंजाम भी शामिल है। हालांकि प्रशासन और पुलिस को अब तक जवान के शहीद होने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन कांकेर पुलिस ने जवान के गांव के लिए टीम रवाना कर दिया है, ताकि सेना से आए फोन के बारे में जानकारी ली जा सके। शहीद गणेश के चाचा ने बताया कि मंगलवार शाम उन्हें फोन से गणेश की शहीद होने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि शहीद गणेश कुंजाम ने 2011 में सेना ज्वाइन की थी। एक महीने पहले ही उसकी चीन बॉर्डर पर तैनाती हुई थी। शहीद गणेश की दो बहनों का एकलौता भाई था। शहादत की खबर के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार का बुरा हाल है।

14-06-2020
'मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान' को मिली सफलता, 67 हजार से अधिक बच्चे हुए कुपोषण से मुक्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ‘मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान‘ और विभिन्न योजनाओं के एकीकृत प्लान से बच्चों में कुपोषण दूर करने में बड़ी सफलता मिली है। वर्ष 2019 में किये गये वजन त्यौहार से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 9 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषित थे, इनमें से मार्च 2020 तक 67 हजार 889 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो गए हैं। इस तरह कुपोषित बच्चों की संख्या में लगभग 13.79 प्रतिशत की कमी आई है। जो कुपोषण के खिलाफ शुरू की गई जंग में एक बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय परिवार सर्वेक्षण-4 के अनुसार प्रदेश के 5 वर्ष से कम उम्र के 37.7 प्रतिशत बच्चे कुपोषण और 15 से 49 वर्ष की 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थे। इन आंकड़ों को देखे तो प्रदेश में 9 लाख 70 हजार बच्चे कुपोषित थे। इनमें से अधिकांश आदिवासी और दूरस्थ वनांचल इलाकों के बच्चे थे। इन आंकड़ों को नई सरकार एक चुनौती के रूप में लिया और  ‘कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ‘ की संकल्पना के साथ महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 2 अक्टूबर 2019 से पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरूआत की है। अभियान की सफलता के लिए इसमें जन-समुदाय को भी शामिल किया गया है।

प्रदेश के नक्सल प्रभावित बस्तर सहित वनांचल के कुछ ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सुपोषण अभियान की शुरूआत की गई। दंतेवाड़ा जिले में पंचायतों के माध्यम से गर्म पौष्टिक भोजन और धमतरी जिले में लइका जतन ठउर जैसे नवाचार कार्यक्रमों के जरिए इसे आगे बढ़ाया गया। जिला खनिज न्यास निधि का एक बेहतर उपयोग सुपोषण अभियान के तहत गरम भोजन प्रदान करने की व्यवस्था की गई। इसकी सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने इस अभियान को 2 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में लागू किया। इस अभियान के तहत चिन्हांकित बच्चों को आंगनवाड़ी केन्द्र में दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार के अतिरिक्त स्थानीय स्तर निशुल्क पौष्टिक आहार और कुपोषित महिलाओं और बच्चों को गर्म पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई है। एनीमिया प्रभावितों को आयरन पोलिक एसिड, कृमिनाशक गोली दी जा रही है। प्रदेश को आगामी 3 वर्षों में कुपोषण से मुक्त करने का लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य विभागों की ओर से समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं। कुपोषण प्रभावित बच्चों और महिलाओं को निशुल्क काउंसलिंग और परामर्श सेंवाएं देने के साथ नियमित मॉनिटरिंग भी की जा रही है। सुपोषण रथ, शिविरों और परिचर्चा के माध्यम से जनजागरूकता के प्रयास भी हो रहे हैं। इसी की एक कड़ी के रूप में एनीमिया के स्तर और स्वास्थ्य सुधार के लिए बस्तर जिले में शुरू किये गए मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान और स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत किचन गार्डन बागवानी को पोषण के लिए अनूठी राह बताते हुए यूनिसेफ ने सराहना की है।

14-06-2020
लघु वनोपजों और वनौषधियों में वेल्यू एडीशन करने वाले उद्योगों को हरसंभव मदद देगी सरकार

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को अपने निवास कार्यालय में बस्तर,धमतरी, महासमुंद,कांकेर, बालोद के उद्योगपतियों और व्यापारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि राज्य सरकार लघु वनोपजों और वनौषधियों में वेल्यू एडीशन करने वाले उद्योगों को हरसंभव मदद देगी। वेल्यू एडीशन से न केवल वनवासियों को लाभ होगा, अपितु उद्योगपतियों और व्यवसायियों को भी अच्छा फायदा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के अधिकांश उद्योगपति और व्यापारी वर्तमान में लघु वनोपजों की खरीदी करके बड़ी कंपनियों को सप्लाई करते हैं। यदि वे लघु वनोपजों का वेल्यू एडीशन करें, तो इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। साथ ही व्यापारियों को भी अच्छा लाभ होगा। राज्य सरकार के राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी। वेल्यू एडीशन के लिए आगे आने वाले उद्योगपतियों और व्यापारियों को अड़चन आने पर उसे दूर करने के लिए राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता से मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए उद्योगपति और व्यवसायी लघु वनोपज का संग्रह करने वाली समितियों से गुणवत्ता और मूल्य के बारे में चर्चा करें। वेल्यू एडीशन के प्लांट में इन लोगों को काम दें। फिनिशड प्रोडक्ट तैयार कर बड़ी कंपनियों को दें या व्यापारिक संस्थाओं के माध्यम से इसकी मार्केटिंग कराएं। अपनी फैक्ट्री में स्थानीय संग्राहकों को काम दें, इससे उन्हें रोजगार और आय का एक नया जरिया मिलेगा और व्यापारियों को भी लाभ होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों और वनवासियों को सतत रूप से आय का जरिया देने वन विभाग को जंगलों में इमारती लकड़ी की जगह चार चिरौंजी, इमली जैसे लघु वनोपज के वनों का रोपण करने के निर्देश दिए गए हैं। वन अधिकार पट्टा प्राप्त हितग्राहियों की जमीन में भी ऐसे पौधों का रोपण करने को कहा गया है। इन पौधों के बीच इंटर क्रॉपिंग के जरिए हल्दी, अदरक, तिखुर की खेती की जा सकती है। इससे वनवासियों को वर्ष भर आमदनी मिलती रहेगी। आंवला और चिरौंजी के वृक्ष को बिना नुकसान पहुंचाए आंवला और चिरौंजी की तोड़ाई के लिए तकनीक विकसित करनी होगी। इससे इनके वृक्ष भी बचे रहें। उन्होंने कहा कि हर गांव में 3 से 5 एकड़ की जमीन पर गौठान विकसित किए जा रहे हैं। यहां फलदार वृक्षों के साथ-साथ लघु वनोपज और वन औषधियों के पौधे भी लगाए जा रहे हैं। गौठानों को राज्य सरकार आजीविका केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। व्यवसायी इन केंद्रों से जुड़कर वहां काम कर रहे समूहों की सहायता से प्रोसेसिंग का काम प्रारंभ कर सकते हैं। गौठान आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में बड़े बदलाव का माध्यम बनेगा। खुले में मवेशी नहीं रहने से किसानों को दोहरी फसल लेने में भी सुविधा होगी। गौठानों में पशु पालन और डेयरी का काम भी किया जा रहा है। गौठानों के प्रबंधन और संचालक के लिए व्यवसायी और उद्योगपति अपने अनुभव और ज्ञान से ग्रामीणों की मदद कर सकते हैं। चर्चा के दौरान उद्योगपतियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने उन पर गंभीरता पूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। इस दौरान मोहन भाई पटेल, मुकेश ढोलकिया, जीतेन्द्र चंद्राकर, सुरेश जैन, रोशन अग्रवाल, प्रमोद चंद्राकर और दीपक उपाध्याय सहित अनेक उद्योगपति उपस्थित थे।

 

14-06-2020
लगता तो ऐसा ही है इस बार मानसून सरप्राइज देने के मूड से आया है...

रायपुर। लगता तो ऐसा ही है, इस बार छत्तीसगढ़ में मानसून सरप्राइज देने के मूड से ही आया है। बस्तर में अपने संभावित तिथि से 1 दिन देर और सामान्य तिथि से 4 दिन पूर्व ही 11 जून को पहुंचकर इसने सभी को सरप्राइज दिया था और इसके 24 घण्टे में ही रायपुर पहुंचकर। जबकि मानसून के रायपुर पहुंचने की सामान्य तिथी 15 जून निर्धारित थी। अपने सामान्य तिथि से 3 दिन पूर्व ही 12 जून को रायपुर पहुंचे मानसून ने तन और मन को भींगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके बाद मानसून की अम्बिकापुर पहुंचने की सामान्य तिथि 21 जून संभावित थी, लेकिन फिर एक बार सरप्राइज देते हुए इसने सप्ताह भर पूर्व ही अम्बिकापुर में दस्तक दे दी है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्र ने कहा कि प्रदेश में मानसून पश्चिमी भाग में पेंड्रा तक, उत्तर में अंबिकापुर तक लगभग 1 सप्ताह पूर्व पहुंच गया है। अभी फिलहाल कोरिया और बिलासपुर जिले के कुछ भाग में ही मानसून पहुंचने में बचा हुआ है। मानसून के मूड को देंखे तो शायद पूरे छत्तीसगढ़ को अधिक समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पूरे छत्तीसगढ़ में इसकी दस्तक जल्द ही हो सकती है।

13-06-2020
रविवार को फिर भिंगाने आएंगे काले बादल, जानिए अगले 4 दिनों तक आपके जिले में मौसम का हाल

रायपुर। बस्तर और रायपुर में मानसून ने प्रवेश करते ही अच्छी बारिश की शुरुआत हो चुकी है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह भी राजधानी में बारिश हुई। अब मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों तक जिलेवार वर्षा के पूर्वानुमान जारी किया है। विशेषकर रविवार 14 जून को प्रदेश के कई स्थानों में मध्यम और उत्तर छत्तीसगढ़ में बारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा है कि निम्न दाब का क्षेत्र खत्म हो गया है, परंतु इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक उत्तर अंदरूनी ओड़िशा और इसके आस-पास स्थित है। एक द्रोणिका उत्तर पश्चिम राजस्थान से उत्तर अंदरूनी ओड़िशा तक, उत्तर मध्य प्रदेश, उत्तर छत्तीसगढ़ होते हुए 1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। उपरोक्त मौसमी तंत्र के कारण 14 जून रविवार को प्रदेश के उत्तरी भाग के अधिकांश स्थानों, मध्य भाग के कुछ  स्थान और दक्षिण भाग के अनेक स्थान पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। उत्तर छत्तीसगढ़ के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। उन्होंने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मानसून और आगे बढ़ते हुए मध्य महाराष्ट्र के कुछ और भाग मराठवाड़ा के अधिकांश भाग और विरार, छत्तीसगढ़ के कुछ और भाग, ओड़िशा के शेष हिस्से, पश्चिम बंगाल ,झारखंड के अधिकांश भाग और बिहार के कुछ भाग तक पहुंच गया है। इसकी उत्तरी सीमा हरनोई, अहमदनगर, औरंगाबाद, गोंदिया, चांपा, रांची और भागलपुर तक है।  जिलेवार वर्षा का पूर्वानुमान देखने यहां क्लिक करें  

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