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03-03-2021
वन विभाग के दो अधिकारियों को शो काज नोटिस जारी, जवाब नहीं देने पर होगी कार्रवाई 

रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत उप वनमंडलाधिकारी एके तिवारी और वनक्षेत्रपाल मोहर सिंह मरकाम को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण शो काज नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब निर्धारित समय-सीमा देने के निर्देश दिए गए हैं। अन्यथा संबंधित के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। बताया गया कि दोनों अधिकारियों ने कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत कैम्पा योजना में स्वीकृत राशि से जटगा परिक्षेत्र के स्टापडेम क्रमांक-1 टेटी नाला, स्टापडेम क्रमांक-3 सोढ़ीनाला व स्टापडेम क्रमांक-5 के निर्माण कार्य में लापरवाही बरती है।

02-02-2021
मुख्यमंत्री ने बेमेतरा जिले में 158.43 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को बेमेतरा जिले के नगधा-परसदा प्रवास के दौरान 158 करोड़ 43 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। उन्होंने124 करोड़ 81 लाख 39 हजार रुपए की लागत के16 कार्यों का लोकार्पण किया। साथ ही 33 करोड़ 61 लाख 77 हजार रुपए की लागत के 37 कार्यों का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने की। विशिष्ट अतिथि संसदीय सचिव व क्षेत्रीय विधायक गुरुदयाल सिंह बंजारे उपस्थित थे। इस दौरान बेमेतरा विधायक आशीष छाबड़ा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी, पीसीसीएफ पीवी नरसिंह राव, राज्य जैवविविधता बोर्ड के सदस्य सचिव  अरुण पाण्डेय, पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग विवेकानंद सिन्हा, कलेक्टर बेमेतरा शिव अनंत तायल, मुख्य वनसंरक्षक दुर्ग वृत्त शालिनी रैना, डीएफओ धम्मशील गनवीर, एसपी दिव्यांग कुमार पटेल सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे।

28-03-2020
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए गांवों की निगरानी के दिए निर्देश

रायपुर। प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने सभी विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदेश की 7876 वन समितियों वाले गावों में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सतत निगरानी के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी मुख्यालय में रहे और बिना सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के मुख्यालय ना छोड़ें। उन्होंने कोरोना संक्रमण को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने कहा है। उन्होंने वनों को वन अपराध से सुरक्षा और वन्य- प्राणियों द्वारा जनहानि की सतत निगरानी के लिए अपील की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा है कि वनोपज जाँच नाका,डिपो एवं रोपणियों में पौधों की सुरक्षा के लिए पाली बांधकर न्यूनतम श्रमिक रखें जाए। कार्यरत लोगों को मास्क और सेनिटाइजर उपलब्ध कराया जाए। काम करते समय इस बात का विशेष ध्यान रख जाए कि लोग दूरियां बनकर रखे।

18-02-2020
 मादा वन भैंसा ‘आशा’ की मृत्यु वृद्धावस्था के कारण प्राकृतिक

गरियाबंद। राज्य के उदंती सीता नदी टायगर रिजर्व गरियाबंद के अंतर्गत वन भैंस संरक्षण संवर्धन केन्द्र जुगाड़ में मादा वन भैंसा ‘आशा’ की मृत्यु 18 फरवरी को सुबह 6 बजे हुई। इसकी सूचना मिलते ही प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अतुल शुक्ला तथा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरूण कुमार पाण्डेय द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर उसकी मृत्यु के बारे में जानकारी ली गई। इस मौके पर उनके साथ उपस्थित समस्त वन अधिकारियों द्वारा मादा वन भैंसा की मृत्यु पर उसे श्रद्धांजलि भी दी गई। इस दौरान मादा वन भैंसा आशा का पोस्टमार्टम तथा दफनाने की कार्रवाई की गई। लगभग 17 वर्षीय मादा वन भैंसा आशा का वन अधिकारियों की उपस्थित में पशु चिकित्सालय पाण्डुका, गरियाबंद, छुरा, जंगल सफारी और बारनवापारा के पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। पशु चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम के उपरांत बताया गया कि मादा वन भैंसा आशा की मृत्यु वृद्धावस्था में होने के कारण एक प्राकृतिक मृत्यु है। इसके पूर्व चिकित्सकों के दल द्वारा मादा वन भैंसा के सम्पूर्ण शरीर का परीक्षण किया गया। उनके द्वारा मादा वन भैंसा के शरीर में कोई चोट अथवा घाव के निशान संबंधी असामयिक मृत्यु जैसे कोई लक्षण नहीं पाए गए।

गौरतलब है कि वन भैंसा संरक्षण एवं संवर्धन केन्द्र जुगाड़ में ‘आशा’ को वर्ष 2005-06 में लाई गई थी। विगत 15 वर्षों में आशा ने छह बच्चों को जन्म दिया, जिसमें एक मादा तथा शेष वन भैंसे हैं। आशा से उत्पन्न समस्त बच्चे स्वस्थ अवस्था में है। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) शुक्ला ने अपनी श्रद्धांजलि देते हुए ‘आशा’ को इस केन्द्र की कुल माता बताया और वन भैंसा के संवर्धन में योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने सभी वन अधिकारियों से आव्हान किया कि वे राज्य वन पशु जंगली वन भैंसा के संवर्धन तथा संरक्षण में हर संभव प्रयास करे। साथ ही ग्रामवासियों को भी इस दिशा में जागरूक करें। वन भैंसा संरक्षण एवं संवर्धन केन्द्र के नियमों तथा कार्य विधियों के अनुसार केन्द्र में रखे गए सभी भैंसों के गतिविधियों की प्रतिदिन रिकॉर्डिंग की जाती है। कल 17 फरवरी को केन्द्र प्रभारी तथा वन अधिकारियों द्वारा यह देखा गया कि आशा सुस्त अवस्था में बैठी है। तत्काल ही मौके पर पहुंचकर वन अधिकारियों और चिकित्सकों द्वारा उसका उपचार कर आवश्यक दवाईयां दी गई। इस अवसर पर शुक्ला और पाण्डेय सहित उप निदेशक उदंती सीतानदी टायरग रिजर्व गरियाबंद के उप निदेशक विष्णुराज नायक, उप वन मंडलाधिकारी शशिकानंदन तथा वन विभाग के अन्य अधीनस्थ अधिकारी तथा कर्मचारीगण उपस्थित थे।

03-01-2020
जंगलों से आय बढ़ेगी तो वनवासियों का जंगल से प्रेम और भी बढ़ेगा: भूपेश बघेल
 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि जंगलों में रहने वाले वनवासियों की जंगल से आय बढ़ेगी, तो उनका जंगलों के प्रति प्रेम और भी बढ़ेगा। आज हमें जंगलों को ऐसी फलदार प्रजातियों के वृक्ष और पौधे से समृद्ध करने की आवश्यकता है, जिनसे एक ओर वनवासियों की आय बढ़े और दूसरा वहां रहने वाले पशु पक्षियों की आवश्यकताएं पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि आदिवासी ही वनों के मालिक हैं, वन विभाग का काम वनों का प्रबंधन करना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में 'वन आधारित जलवायु सक्षम आजीविका की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव' विषय पर आयोजित एक दिवसीय परिचर्चा को संबोधित किया। आदिमजाति विकास मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा और  विनोद वर्मा, वन विभाग के प्रमुख सचिव  मनोज कुमार पिंगुवा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी सहित वन विभाग के अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और ग्रामीण बड़ी संख्या में इस अवसर पर उपस्थित थे। परिचर्चा का आयोजन वन विभाग और ऑक्सफेम संस्था के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगलों को बचाने के लिए वनवासियों से ज्यादा पढ़े लिखे लोगों की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार का फोकस इस बात पर होना चाहिए कि वनवासियों का जीवन कैसे सुखमय बन सके। जंगलों को बचाने के साथ-साथ वनवासियों की आय कैसे बढ़ाई जा सके इस पर ध्यान देना होगा। इसके साथ ही लघु वनोपजों में वैल्यू एडिशन की दिशा में भी काम करना होगा। सीएम बघेल ने कहा कि आज प्रदेश के ऐसे जिलों में जहां जंगल ज्यादा है, वहां सिंचाई का प्रतिशत शून्य से लेकर 5 प्रतिशत तक है। सिंचाई की सुविधा नहीं होने से यदि बारिश नहीं होती है तो फसल तो बर्बाद होती है, साथ ही वहां जल स्तर भी कम होता है। यदि फरवरी माह में हम नगरी क्षेत्र के जंगलों में जाते हैं तो अधिकांश वृक्षों के पत्ते झड़ जाते हैं इसका सबसे बड़ा कारण जंगलों में गिरता जल स्तर है। उन्होंने कहा कि जंगली क्षेत्रों के विकास के लिए वन अधिनियम और पर्यावरण अधिनियम के क्रियान्वयन के प्रति हमें व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। वहां कम से कम सिंचाई परियोजनाओं की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे वहां बांध बन सकें, बैराज और एनीकट बन सके। सिंचाई नहरों से जब पानी गांव में ले जाया जाता है, तो उस पूरे क्षेत्र में जल स्तर बना रहता है। इसका प्रभाव वनस्पतियों पर भी पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राज्य सरकार आदिवासियों और वनवासियों को उनके अधिकार देने के लिए तत्पर है, एनजीओ को भी इस कार्य में राज्य सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकार सहयोग करना चाहिए।

बघेल ने कहा की राज्य सरकार ने वनवासियों को व्यक्तिगत और समुदायिक वन अधिकार पट्टे देने की शुरुआत की है। इसमें कुछ समय के लिए अवरोध उत्पन्न हो गया। उन्होंने कहा कि कोंडागांव जिले के 9 गांवों में 8000 एकड़ में और धमतरी जिले के जबर्रा गांव में 12500 एकड़ में सामुदायिक वन अधिकार पट्टा दिया गया है। उन्होंने कहा कि जंगल आज असंतुलित विदोहन की वजह से वनवासियों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। अब तो हाथी, शेर और बंदर जैसे वन्य प्राणी  जंगल छोड़कर शहरों की ओर जा रहे हैं। इससे बचने के लिए जंगलों को फिर से समृद्ध बनाना होगा, जिससे पशु-पक्षी और वनवासियों की हर जरूरत जंगलों से पूरी हो सके। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44 प्रतिशत भू-भाग में वन है, जो पूरे देश के जंगलों का 12 प्रतिशत हिस्सा है। छत्तीसगढ़ पूरे देश को ऑक्सीजन दे रहा है, लेकिन बदले में यहां के आदिवासियों को गरीबी और अशिक्षा का दंश मिल रहा है।

मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने परिचर्चा में नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में वनवासियों की 52 प्रतिशत आजीविका वनों पर आधारित है। वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने कहा वन अधिकार कानून को लेकर अलग-अलग विभागों का अलग अलग नजरिया है, लेकिन सबका उद्देश्य वनवासियों की समृद्धि से है।  प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि आदिकाल से मानव का प्रकृति के साथ सहअस्तित्व है। संयुक्त प्रबंध समितियों के माध्यम से वनों के संरक्षण और उनके प्रबंधन में वनवासियों की सहभागिता और वनों से होने वाली आय से उन्हें लाभान्वित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

14-10-2019
14 अक्टूबर से सतत मानव विकास में वानिकी का योगदान विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला 

रायपुर। राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर में 14 से 15 अक्टूबर को भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारियों के लिए ‘सतत मानव विकास में वानिकी का योगदान’ विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है। समापन सत्र में मुख्यअतिथि के रूप में वन, पर्यावरण एवं आवास तथा परिवहन मंत्री, मो. अकबर उपस्थित में होगा। प्रशिक्षण में देश के विभिन्न राज्यों तमिलनाडू, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, गुजरात, केरल, मणिपुर, मेघालय, मध्यप्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक तथा उड़ीसा राज्य के कुल 22 भारतीय वन सेवा के उच्च अधिकारी भाग ले रहे है। कार्यशाला में वानिकी संबंधी महत्वपर्ण तकनीकी सत्रों के साथ-साथ प्रदेश में वानिकी के क्षेत्रा में किए जा रहे नवाचारों तथा छत्तीसगढ़ शासन की अतिमहत्वपूर्ण योजना ‘छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी-नरवा, गरूवा, घुरवा बाडी-ऐला बचाना है संगवारी’ का अध्ययन भी कराया जाएगा।  
कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) निदेशक मुदित कुमार सिंह द्वारा किया गया। कार्यशाला में प्रथम दिवस, तकनीकी सत्र में सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं सदस्य राज्य योजना आयोग डॉ.के. सुब्रमणियम द्वारा ‘छत्तीसगढ में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन- अवसर एवं चुनौतियां’, कार्यकारी निदेशक, छग राज्य लघु वनोपज संघ बी. आनंद बाबू द्वारा ‘सतत मानव विकास के लिए स्वा सहायता समूहो के माध्यम से लघुवनोपज उत्पादों का मूल्य वर्धन’ विषय पर प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित संजीवनी मार्ट एवं प्रसंस्करण यूनिट, नया रायपुर में स्थित जंगल सफारी, म्यूजिकल फाउंटेन का भ्रमण किया। राज्य में वानिकी के क्षे़त्र में किए जा रहे नवाचार एवं विकास कार्यों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला के दूसरे दिन तकनीकी सत्र में भारतीय जैव-सामाजिक शोध एवं विकास संस्थान, कलकत्ता के प्रोफेसर एसबी राय द्वारा ‘सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एकीकृत वन मोजेक लैण्डस्कैप प्रबंधन’, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा द्वारा ‘छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी-नरवा, गरूवा, घुरवा बाडी-ऐला बचाना है संगवारी-छत्तीसगढ़ में सतत विकास के लिए एक अभिनव परियोजना’, प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुदित कुमार सिंह द्वारा‘सतत मानव विकास में वानिकी का योगदान-राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना एवं प्रमाणीकरण’ तथा सेवानिवृत्त अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीसी मिश्रा द्वारा ‘स्थानीय स्वयंसेवी संस्थानों की वानिकी आधारीत सतत मानव विकास में भूमिका’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला में तकनीकी सत्र में ’सतत मानव विकास में वानिकी का योगदान एवं अनुशंसा’ विषय पर चर्चा के लिए पैनल डिस्कशन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें पैनल अध्यक्ष के रूप में अपर मुख्य सचिव, वन विभाग आरपी मंडल, सह अध्यक्ष के रूप में सेवानिवृत्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. आरके सिंह, पैनल विशेषज्ञ के रूप में सचिव राज्यपाल एवं संसदीय कार्य सोनमणी बोरा रहेंगे।

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