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Protection : आज अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस, छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या को लेकर संशय

रायपुर। बाघों के संरक्षण के लिए प्रतिवर्ष पूरी दुनिया में 29 अगस्त को वर्ल्ड टाइगर दिवस के रूप में मनाया जाता है। बता दें कि वर्ल्ड टाइगर डे के पूर्व संध्या पर केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने देश में बाघों की संख्या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। एनटीसीए की गिरानी में हर चार वर्ष में देश में बाघों की गणना होती है। प्रदेश में वन विभाग के रिकार्ड में बाघों की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृध्दी दर्ज की गई है। वहीं जानकार वन विभाग के आंकड़ों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। 

बता दें कि वर्ष 2006 और 2010  की गणना में  प्रदेश में 26 बाघ होने का दावा किया गया था। परंतु वर्ष 2014 की गणना में बाघों की संख्या 26 की जगह 46 होना बताया गया।  चार वर्षो ं में प्रदेश में आश्चर्यजनक रूप से बाघों की संख्या में बढ़ोतरी को देखकर वन्य जीव प्रेमी आश्चर्यचकित हैं। वन्य जीव प्रेमी बाघों की संख्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं, कि क्या प्रदेश में इन छह वर्षों में एक भी बाघ नहीं मरे। आखिर वन विभाग ने ऐसा क्या किया कि प्रदेश में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ। अगर औसत निकालें तो प्रदेश में छह वर्ष के भीतर 77 प्रतिशत बाघों की संख्या में वृध्दी दर्ज की गई। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की संख्या 28 प्रतिशत ही बढ़े हैं। 

गौरतलब है कि वर्ष 2010 की गणना में देश में 1945 बाघ थे जो वर्ष 2014 में  2491 हो गयी। जनकारों की मानें तो वन विभाग जैसे पहले की तरह बाघों के संरक्षण में मुस्तैदी दिखाई होगी तो प्रदेश में बाघों की संख्या 75 से 80 के आस-पास होना चाहिए। 

तीन साल में 17 बाघ के खाल जब्त 

वाइल्ड लाइफ के जानकार प्रदेश बाघ की संख्या  5-7  से ज्यादा नहीं होने का दावा कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि वर्ष 2014 में बाघों की गणना के दौरान वाह-वाही लुटने के लिए  वन अधिकारियों ने 46 बाघ बता दिये गये थे। बता दें कि वर्ष  2014 से 2017 के बीच प्रदेश में तस्करों के कब्जे से 17  बाघ के खाल जप्त किए गए हैं।  ऐसे में वन विभाग के दावे कितना सही है इस बात का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। 

दामन बचाने झूठ का साहरा 

फरवरी 2018 में गरियाबंद में बाघ के शिकार का एक मामला सामने आया है। जब्त बाघ की खाल को  वन विभाग के अधिकारी ओडिशा से बाघ का शिकार कर लाने का दावा किया था। इस बात का वन्य जीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने विरोध करते हुए उदंती नदी में मिले बाघिन के फोटो और जब्त खाल की धारी का मिलान करने एनटीसीए को पत्र लिखा। एनटीसीए के निर्देश पर जब खाल और बाघिन के धारी का मिलान किया गया तो वह उदंती सीतानदी के बाघिन का होना पाया गया। 

अचानकमार में 27 बाघ होने का दावा 

वर्ष 2014 की गणना में अचानकमार टाईगर रिजर्व में छत्तीसगढ़ के 27 बाघ बताये गये थे परंतु इन चार वर्षो में वन विभाग के अधिकारियों को छोड़कर शायद ही किसी पर्यटक या ग्रामीण को वहां बाघ दिखा हो। अचानकमार के  बाघ कहां चले गये इस संबंध में वन विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

 

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