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01-08-2020
प्रदेश के 9 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी की सुविधा, दीर्घायु वार्ड में कैंसर पीड़ितों का निःशुल्क इलाज

रायपुर। प्रदेश के कैंसर पीड़ितों को अब कीमोथेरेपी के लिए बड़े शहरों में जाकर पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है। प्रदेश के नौ जिलों में दीर्घायु वार्ड के माध्यम से डे-केयर कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विभिन्न जिलों के 80 से ज्यादा मरीज़ों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत इस साल मार्च से दीर्घायु वार्ड के माध्यम से विभिन्न जिला अस्पतालों में डे-केयर कीमोथेरेपी सुविधा शुरू की गई है। पिछले पांच माह में अलग-अलग जिला अस्पतालों में कुल 80 मरीजों की कीमोथेरेपी की गई है। जशपुर में 26, जगदलपुर में 23, रायपुर में 11, सूरजपुर में नौ, नारायणपुर में तीन तथा दुर्ग, कांकेर, कोंडागांव और कोरिया में दो-दो कैंसर पीड़ितों को इस सुविधा का लाभ मिला है। मिशन द्वारा प्रदेश के अन्य जिला अस्पतालों में भी यह सुविधा जल्द शुरू की जाएगी।कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। रेडियोथैरेपी और सर्जरी के साथ ही शरीर में मौजूद सूक्ष्म कैंसर सेल को मारने के लिए कीमोथेरेपी दी जाती है। निजी कैंसर अस्पतालों में एक कीमोथेरेपी कराने में 30 हजार से 40 हजार तक खर्च आता है। कीमोथेरेपी में लगने वाली दवा की कीमत भी 21 हज़ार के करीब होती है।

साथ ही डॉक्टर की फीस,बेड चार्ज एवं रक्त जांच सहित अन्य खर्चों को मिलाकर इसमें बड़ी रकम खर्च हो जाती है। प्रदेश के दीर्घायु वार्ड वाले जिला अस्पतालों में यह सुविधा निःशुल्क है। कैंसर पीड़ित मरीज को स्मार्ट कार्ड या राशन कार्ड के साथ सिर्फ पूर्व में चल रहे उपचार के कागजात अपने साथ लाना पड़ता है।ऐसे कैंसर पीड़ित जो बाहर जाकर अपना इलाज करा पाने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें अब अपने ज़िले या पड़ोस के ज़िले के ज़िला अस्पताल में यह सुविधा मिल रही है। इन अस्पतालों में मुँह के कैंसर, ब्लड कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर व अन्य तरह के कैंसर से पीड़ित मरीज़ों को कीमोथेरेपी दी जा रही है। जशपुर जिला अस्पताल में कैंसर मरीजों का इलाज करने वाले डॉ. लक्ष्मीकांत बापट ने बताया कि वे दिल्ली और उज्जैन के डॉक्टरों से परामर्श कर कीमोथेरेपी दे रहे हैं। कीमोथेरेपी का पर्याप्त डोज़ जिला अस्पताल में मौजूद है। कीमीथेरेपी के पहले की जाने वाली सभी जांच की सुविधाएं भी जिला अस्पताल में ही मौजूद हैं।

03-06-2020
वीडियो छत्तीसगढ़ का नहीं, संक्रमित हर व्यक्ति का प्रदेश में हो रहा है निशुल्क इलाज

रायपुर। सोशल मीडिया में 2 जून को खुद को कोरोना पीड़ित बताकर मुख्यमंत्री से मदद की गुहार करती एक युवती का वीडियो वायरल हुआ था। इसे रायपुर के देवेन्द्र नगर का बताया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि यह वीडियो छत्तीसगढ़ का नहीं है। इस वीडियो को रायपुर का होने की दी गई जानकारी भी फेक है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को फेक वीडियो और खबरों से सावधान रहने की अपील की है। इस तरह के वीडियो और खबरों से न केवल भ्रम व डर की स्थिति बनती है, बल्कि आपाधापी की स्थिति भी निर्मित होती है। बताया गया कि प्रदेश में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जा रहे हर व्यक्ति का यहां के सर्वसुविधायुक्त कोविड अस्पतालों में निशुल्क इलाज किया जा रहा है। इसके संभावित मरीजों के सैंपल संकलित कर तत्काल जांच के लिए भेजा जा रहा है। शासन-प्रशासन की ओर से प्रदेश में कोविड-19 पीड़ितों और उनके परिवार को प्राथमिकता से चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही उन्हें हर तरह का सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

04-02-2020
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना: प्रदेश में 2.16 लाख लोगों का ​हुआ इलाज

रायपुर। राज्य शासन ने मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में नया आयाम जोड़ा है। स्लम क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल टीम के नियमित शिविर के साथ ही अब विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ भी लोगों का निःशुल्क इलाज कर रहे हैं। प्रदेश के 13 नगर निगमों में 12 अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। योजना के अंतर्गत निजी एवं सरकारी क्षेत्र के नामी विशेषज्ञों ने अब तक 229 शिविरों में मरीजों को निःशुल्क ओपीडी सेवाएं दी हैं। स्लम क्षेत्रों के मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा मुहैया कराने स्वास्थ्य विभाग अधिक से अधिक विशेषज्ञों को इस योजना से जोड़ रहा है।  
 
सभी नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही लोगों के बीच भी पहुंचकर जांच व उपचार कर निःशुल्क दवाईयां दे रही हैं। जिला अस्पतालों में ख्याति प्राप्त सुपरस्पेश्लिस्टों की ओपीडी सेवा के बाद अब मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में भी लोगों को विशेषज्ञों द्वारा चिकित्सीय परामर्श सुलभ हो रही है। योजना शुरू होने के बाद से अब तक तीन हजार 233 शिविरों में प्रदेश के करीब दो लाख 16 हजार शहरी आबादी को चिकित्सा सेवा मुहैया कराई गई है। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीम एक हजार 628 स्लम्स में इलाज के लिए नियमित पहुंच रही है।   

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना में नगर निगम वाले 13 शहरों में सरकारी और निजी अस्पतालों के अस्थि रोग, त्वचा रोग, हृदय रोग, स्त्री रोग, नेत्र रोग, शिशु रोग, दंत रोग, मधुमेह, कान-नाक-गला, कैंसर व न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ तथा एम.डी. मेडिसीन की निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्लम क्षेत्रों में आयोजित शिविरों में मलेरिया, एचआईव्ही, मधुमेह, एनिमिया, टीबी, कुष्ठ, उच्च रक्तचाप, नेत्र विकार व गर्भवती महिलाओं की जांच के साथ ही बच्चों का टीकाकरण भी किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पिछले चार महीनों में कुल आठ हजार 723 लोगों की मलेरिया जांच की गई है। स्लम क्षेत्रों में आयोजित शिविरों में 49 हजार 517 लोगों के उच्च रक्तचाप, 29 हजार 042 लोगों की मधुमेह, 16 हजार 617 लोगों की रक्त-अल्पता (एनिमिया), तीन हजार 851 लोगों के नेत्र विकार, 351 लोगों की टीबी, 391 लोगों की कुष्ठ और एक हजार 753 लोगों की एचआईव्ही जांच की गई है। मोबाइल मेडिकल दलों ने इस दौरान तीन हजार 852 गर्भवती महिलाओं की जांच और 936 शिशुओं का टीकाकरण किया है। डायरिया पीड़ित दो हजार से अधिक मरीजों का उपचार भी इन शिविरों में किया गया है। जांच एवं उपचार के बाद कुल एक लाख 15 हजार लोगों को निःशुल्क दवाईयां दी गई हैं।  गांधी जयंती के मौके पर पिछले साल 2 अक्टूबर को योजना की शुरूआत से अब तक कुल दो लाख 15 हजार 777 लोगों का इलाज किया गया है।
 

04-01-2020
 नई स्वास्थ्य योजनाओं से शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध इलाज, निजी अस्पतालों में नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना लागू होने के बाद यूनिवर्सल हेल्थ केयर की दिशा में कदम और तेज कर लिए हैं। ट्रस्ट मोड पर संचालित इन दोनों योजनाओं के माध्यम से शासकीय अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही लोगों के निःशुल्क इलाज, जांच और दवाईयों की व्यवस्था के लिए आर्थिक मजबूती का रास्ता खोला गया है। इन दोनों योजनाओं में शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध इलाज के लिए निजी अस्पतालों की सेवाएं नहीं ली जाएंगी। इलाज के एवज में शासकीय अस्पतालों को मिलने वाली राशि से वहां की व्यवस्थाओं का सुदृढ़ीकरण और विस्तार किया जाएगा। प्रदेश में 1 जनवरी 2020 से डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना लागू की गई है। पहले ही दिन से मरीजों को इनका लाभ मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा, संजीवनी सहायता कोष, मुख्यमंत्री बालहृदय सुरक्षा, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) एवं मुख्यमंत्री बाल श्रवण जैसी पूर्ववती योजनाओं की कमियों और खामियों को इन योजनाओं में दूर किया गया है।

पहले मलेरिया, डायरिया, टाइफाइड एवं  टिटनेस जैसी बहुत सी बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में होता था जिनका इलाज शासकीय अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध है। अब इस तरह के सभी उपचार शासकीय अस्पतालों में ही होंगे। पूर्ववर्ती योजनाओं के अंतर्गत निजी क्षेत्र में होने वाले 180 उपचार और प्रक्रियाएं ऐसी हैं जिनकी सुविधाएं शासकीय अस्पतालों में भी मौजूद हैं। इन उपचारों व प्रक्रियाओं के पैकेज को शासकीय अस्पतालों के लिए आरक्षित किया गया है। नई योजनाओं के तहत ये सभी इलाज सरकारी अस्पतालों में होने से निजी क्षेत्र को मिलने वाली राशि अब शासकीय अस्पतालों को मिलेगी। इससे उन्हें एक बड़ा बजट मिलेगा।

एएसडी, वीएसडी के उपचार में समस्या नहीं, कुछ और अस्पतालों में भी जल्द शुरू होगी सुविधा

पूर्व में मुख्यमंत्री बाल हृदय  सुरक्षा योजना के माध्यम से हृदय में छेद संबंधी (एएसडी, वीएसडी) बीमारियों का उपचार निजी अनुबंधित अस्पतालों में कराया जा रहा था। अब इन दोनों बीमारियों का उपचार रायपुर मेडिकल कॉलेज, एम्स रायपुर और नवा रायपुर के सत्य सांई अस्पताल में होगा। इलाज में ज्यादा खर्च आने पर मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से पूरी राशि उपचार के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। पहले निर्धारित पैकेज से अधिक खर्च आने पर अन्य राज्यों में उपचार की स्थिति में राशि दिलाने में दिक्कत आती थी। रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के साथ ही प्रदेश के छह अन्य शासकीय चिकित्सालयों में भी एएसडी और वीएसडी के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही डीकेएस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में भी यह सुविधा शुरू होगी।

आपात स्थिति का पूरा ध्यान, मरीजों को नहीं होगी परेशानी

डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत शासकीय अस्पतालों के लिए पैकेज आरक्षित करते समय आपात स्थिति का पूरा ध्यान रखा गया है। हर तरह की आपात स्थिति पर अच्छी तरह विचार कर शासकीय अस्पतालों के लिए 180 पैकेजों को आरक्षित किया गया है। इससे मरीजों को कोई परेशानी नहीं होगी। शासकीय अस्पतालों में इलाज के लिए की गई तथा की जा रही आरक्षित बीमारियों में आपात स्थिति वाली बीमारियां नहीं के बराबर है।

08-11-2019
मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना: एक महीने में 34 हजार लोगों का इलाज

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जन-जन तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए गांधी जयंती 2 अक्टूबर से शुरू मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत महीने भर में करीब 34 हजार लोगों को निःशुल्क इलाज मुहैया कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल टीम ने इस दौरान प्रदेश के सभी 13 नगर निगमों में 445 स्लम क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जांच एवं उपचार कर दवाईयां दी हैं। नगर निगम वाले प्रदेश के 13 शहरों की कुल एक हजार 567 स्लम क्षेत्रों में लगभग 16 लाख आबादी रहती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव की पहल पर इनके इलाज की सुदृढ़ व्यवस्था के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित अस्पतालों के साथ ही मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना शुरू की गई है। शुरूआत से ही इस सुविधा को लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। योजना के तहत पिछले एक महीने में कोरबा में आठ हजार 601, रायपुर में छह हजार 124, जगदलपुर में तीन हजार 066, भिलाई में दो हजार 528, बीरगांव में दो हजार 222, भिलाई-3-चरोदा में एक हजार 897, धमतरी में एक हजार 676, दुर्ग में एक हजार 674, राजनांदगांव में एक हजार 509, बिलासपुर में एक हजार 402, अंबिकापुर में एक हजार 342, चिरमिरी में एक हजार 035 और रायगढ़ नगर निगम में 897 लोगों का निःशुल्क इलाज किया गया है। मोबाइल मेडिकल टीमों ने इस दौरान कोरबा नगर निगम में 108, रायपुर में 83, भिलाई में 42, चिरमिरी में 38, भिलाई-3-चरोदा में 36, धमतरी में 28, बीरगांव में 27, दुर्ग में 21, जगदलपुर में 19, अंबिकापुर में 13, बिलासपुर में 11, रायगढ़ में 10 तथा राजनांदगांव में नौ स्लम क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जांच व उपचार कर निःशुल्क दवाईयां दी हैं।

 

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