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26-11-2020
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के लिए जिम्मेदार सरकार या खुद हम?

रायपुर। आजकल जगह जगह इतती भीड़ देखने को मिल रही है की काबू करना ही मुशकिल हो गया है। सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन नहीें कर रहा है न सरकार का बनाया कोई नियम पालन कर रहा। वहीं प्रदेश भर में 1877 लोग से ज्यादा संक्रमित पाए गए हैं। कोरोना के बढ़ते आंकड़े और लोग बिना खौफ के घूम रहे हैं, जैसे उन्हें इसका भय ही नहीं है। केंद्र ने शासित प्रदेशों को कड़ाई से कोरोना वायरस के रोकथाम के उपाय, विभिन्न गतिविधियों पर एसओपी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अनिवार्य उपाय करने का निर्देश दिया है और साथ ही सरकार ने नाइट कर्फ्यू लगाने के फैसले के लिए राज्य सरकारों को पूरी छूट दे दी है। सरकार अपनी ओर से पूरी कोशिश में लगी है कोरोना को खत्म करने लेकिन लोग क्यों नियम का पालन नहीं कर रहे हैं, क्या उन्हें खुद कि जान कि परवाह नहीं है?

24-11-2020
बृजमोहन के बयान पर विकास उपाध्याय का पलटवार, कहा- दूसरे के भरोसे नहीं चला रहे हैं सरकार

रायपुर। संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने बृजमोहन अग्रवाल के बयान पर पलटवार किया है। विकास उपाध्याय ने कहा कि, छत्तीसगढ़ राज्य की जनता के समस्त दायित्व का निर्वहन भूपेश की कांग्रेस सरकार ही कर रही है। पिछले 22 माह में मोदी की भाजपा सरकार का रत्तीभर भी छत्तीसगढ़ की उन्नति में कोई योगदान नहीं रहा है और ये बात छत्तीसगढ़ के एक-एक व्यक्ति को जानना जरूरी है।

विकास उपाध्याय ने पूर्व मंत्री बृजमोहन के उस बयान पर की जिसमें उन्होंने ये कहा, अगर शादी आपने की है, तो पालने की जिम्मेदारी भी आप की ही है, कोई दूसरा पालने नहीं आएगा पर त्वरित पलटवार किया है। उन्होंने कहा, ये बात सच है कि आपदा से निपटने केंद्रीय सहायता नहीं मिल रही है और यह बात छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ जनता को पता होना चाहिए। पर इसका मतलब ये नहीं कि हमारी सरकार कोरोना से निपटने पीछे है। बल्कि जिन परिस्थितियों में छत्तीसगढ़ का पूरा परिक्षेत्र प्रवासी मजदूरों के बहुतायत से प्रभावित हुआ था। उसे नियंत्रण में कर छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार ने पूरे देश में एक मिशाल कायम किया है।  

विकास उपाध्याय ने भूपेश सरकार की क्षमता को लेकर  सवाल उठाये जाने पर कहा, हम दूसरे के भरोसे सरकार नहीं चला रहे हैं, अपने दम पर पूरी व्यवस्था के साथ चला रहे हैं। अपने कांग्रेस सरकार के खुद की क्षमताएं इतनी व्यापक है कि इन 22 माह में आपने इसके कई उदाहरण देख चुके हैं। विकास ने कहा, हमारी क्षमताएं देख जनता की अपेक्षाएं जरूर बढ़ गईं हैं। जनता को लग रहा है कि भूपेश सरकार में हम अनाथ नहीं हैं। मोदी सरकार भले राज्य के उत्थान में सहयोग न करे पर राज्य की कांग्रेस सरकार छत्तीसगढ़ का विकास अब रुकने नहीं देगी।

 

 

24-11-2020
अलोकतांत्रिक तरीके से विपक्ष की आवाज को कुचल रही सरकार : महेश गागड़ा

बीजापुर। किसानों की समस्या को लेकर पूर्व वनमंत्री महेश गागड़ा के नेतृत्व में किसान रैली और धरना कार्यक्रम होना था। प्रशासन ने कोविड-19 का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। साथ ही जिला मुख्यालय की ओर आने वाले सभी मुख्य सड़कों पर सघन जांच कर लोगों को वापिस लौटाया। धरना रैली की अनुमति नही मिलने से पूर्वमंत्री महेश गागड़ा ने बीजापुर भाजपा कार्यालय में पत्रकारवार्ता ली,जिसमे सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करते विपक्ष की आवाज को कुचलने का आरोप लगाया है। पत्रकारवार्ता में पूर्वमंत्री महेश गागड़ा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान का बेटे का ढोंग कर रहे हैं। भूपेश बघेल  किसानों के दर्द को नही समझते हैं। किसान का दर्द समझने के लिए किसान होना ही जरूरी नही है।  रैली की अनुमति नही मिलने से किसानों और भाजपाइयों में खासा रोष दिखा। सरकार के इशारे पर अधिकारियों ने रैली धरना की अनुमति नहीं देने और पार्टी के एजेंट की तरह काम न करने की अधिकारियों को नसीहत दे डाली। भाजपा ने आरोप लगाया कि पूछ पूछकर कार्यकर्ताओं को आने से रोका,जनप्रतिनिधियों को वापिस लौटाया।

क्या थे मुद्दे
 1. किसानों को किए वादे के अनुसार समर्थन मूल्य पर खरीदी हो।
 2.धान खरीदी के तीन दिवस के अंदर किसान के खाते में पूरा भुगतान एक साथ किया जाए, जैसा पूर्ववर्ती सरकार में किया जाता था।
3. गिरदावर के नाम पर रकबा कम किया जा रहा है उसे खत्म किया जाए।

 

23-11-2020
रमन सिंह की तरह मोदी सरकार भी किसानों से किए वादे से मुकर गई : धनंजय ठाकुर

रायपुर। धान खरीदी के मुद्दे पर भाजपा की ओर से की जा रही बयानबाजी पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि रमन सिंह की तरह ही मोदी सरकार भी किसानों से किए वादे से मुकर गई। डॉ.रमन सिंह ने सरकार बनने पर एक-एक दाना धान खरीदी का वादा किया लेकिन सरकार बनने के बाद किसानों से प्रति एकड़ 10 क्विंटल धान खरीद रहे थे। कांग्रेस ने विरोध किया तब किसानों से प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान की खरीदी शुरू की गई। किसानों को सताने परेशान करने काम 15 साल तक हुआ। रमन भाजपा के किसान विरोधी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ के किसान खेती किसानी से मुंह मोड़ लिए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने किसानों को धान की कीमत 2500 रुपए क्विंटल दिया। उस दिन से किसान वापस खेती की ओर लौटे। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार बनने पर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुसार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिया जाएगा। किसानों को सस्ते दरों पर रसायनिक खाद व डीजल की आपूर्ति की जाएगी। किसानों की आय दुगुनी करने की बात करने वाली मोदी सरकार बीते 7 साल में किसान से किए वादे को पूरा करने कोई ठोस कदम नहीं उठाए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ के किसानों को धान की कीमत 2500 रुपए क्विंटल दिए जाने पर मोदी सरकार ने रोक लगा दी। सेंट्रल पुल में चावल लेने पर नियम शर्ते थोप दी गई। केंद्र की मोदी सरकार तो किसानों की धान की सरकारी खरीदी करना ही नहीं चाहती। किसानों को धान का समर्थन मूल्य देना नहीं चाहती। न ही गरीबों को निशुल्क अनाज देने के पक्ष में है,इसीलिए तीन किसान विरोधी काले कानून बनाकर किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाना चाहती है।

23-11-2020
सरकार की लापरवाही के कारण बारिश में किसानों का धान हुआ खराब : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। पूर्व मंत्री व विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने भूपेश सरकार की ओर से 1 नवंबर से धान खरीदी न करने पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों से कम से कम धान खरीदना पड़े, इसलिए रोज नए-नए षड़यंत्र रच रही है। सरकार धान खरीदने की व्यवस्था के लिए नहीं बल्कि धान कैसे कम से कम खरीदना पड़े इसके लिए रोज बैठक कर रही है। बृजमोहन अग्रवाल ने एक बयान जारी कर कहा है कि भूपेश सरकार 2500 रुपए क्विंटल में एक-एक धान खरीदी के अपने वादे से मुकर रही है। किसान के धान का पैसा साल-साल भर, घूमा घूमाकर किसानों को दिया जा रहा है। धान की खरीदी कम करना पड़े इसलिए अधिकारियों के माध्यम से किसानों पर दबाव बनाकर खेत का रकबा मेड़, पढार, पंप हाउस के नाम पर कम किया जा रहा है। बार-बार गिदावरी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है।  भाजपा व किसान संगठनों और किसानों ने बार-बार 1 नवंबर से धान खरीदी चालू करने की मांग की। किंतु सरकार अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए 1 नवंबर से धान खरीदी चालू नहीं की। धान खरीदी की तिथि 1 माह बढ़ा दी। किसानों के सामने परेशानी खड़े कर दी है। अभी हुई बेमौसम बारिश में एक ओर जहां किसानों के कटे हुए धान कोठार में खराब हो गए तो वहीं अनेक किसानों के धान बारिश के कारण खेत में सो गए हैं। पानी से खराब हो गए हैं। आखिर इसके लिए जिम्मेदार ये सरकार की लापरवाह व्यवस्था ही है। अगर सरकार ने समय रहते तैयारी कर 1 नवंबर से धान खरीदी चालू कर देती तो बहुत सारे किसान इस आपदा में बच सकते थे। एक सप्ताह बाद पूरे प्रदेश में धान की खरीदी होनी है, पर सरकार ने पर्याप्त बारदाने सहित अन्य व्यवस्था अभी तक नहीं की है। प्रदेश के अनेक समितियों में पिछले धान खरीदी का धान अभी तक नहीं उठाया गया है। अनेक भंडारण स्थलों पर खराब हो चुके धान भारी तादात में अभी भी रखे हुए हैं।

 

 

17-11-2020
लक्ष्मी विलास बैंक संकट में,खाताधारक नहीं निकाल पाएंगे 25 हजार से ज्यादा, सरकार ने मोराटोरियम में डाला

बेंगलुरु। प्राइवेट सेक्टर के एक और संकटग्रस्त बैंक को सरकार ने मोराटोरियम में डाल दिया है। लक्ष्मी विलास बैंक पर 16 दिसंबर तक कई पाबंदियां लगा दी गई हैं। इसके तहत खाताधारक 25 हजार रुपए से अधिक की निकासी नहीं कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से यही जानकारी दी गई है। इससे पहले यस बैंक और पीएमसी बैंक के मामले में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था। बीआर एक्ट की धारा 45 के तहत आरबीआई की ओर से आवेदन के आधार पर मोराटोरियम लगाया गया है। मोराटोरियम लागू रहने तक बैंक जमाकर्ता को 25 हजार रुपए से अधिक का पेमेंट नहीं कर सकता है, जब तक रिजर्व बैंक की ओर से कोई लिखित आदेश ना हो। हालांकि, जमाकर्ता के इलाज, उच्च शिक्षा की फीस, शादी जैसे कामों के लिए जमाकर्ता 25 हजार रुपए से अधिक निकासी कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए रिजर्व बैंक से अनुमति लेनी होगी। लक्ष्मी विलास बैंक के लिए मुश्किलें 2019 में शुरू हो गई थीं, जब रिजर्व बैंक ने इंडिया बुल्स हाउजिंग फाइनेंस के साथ मर्जर के इसके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। सितंबर में शेयर होल्डर्स की ओर से सात डायरेक्टर्स के खिलाफ वोटिंग के बाद रिजर्व बैंक ने नकदी संकट से जूझ रहे प्राइवेट बैंक को चलाने के लिए मीता माखन की अगुआई में तीन सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया था। 

 

 

17-11-2020
भूपेश बघेल लोकवाणी में अपनी सरकार के विषय में करेंगे बात, सवाल रिकाॅर्ड कराने नंबर जारी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकवाणी में इस बार "छत्तीसगढ़ सरकार दो वर्ष का कार्यकाल" विषय पर प्रदेशवासियों से बात करेंगे। इस संबंध में कोई भी व्यक्ति आकाशवाणी रायपुर के दूरभाष नंबर 0771-2430501, 2430502, 2430503 पर 25, 26 और 27 नवंबर को अपरान्ह 3 से 4 बजे के बीच फोन करके अपने सवाल रिकाॅर्ड करा सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मासिक रेडियो वार्ता लोकवाणी की 13वीं कड़ी का प्रसारण 13 दिसंबर को होगा। लोकवाणी का प्रसारण छत्तीसगढ़ स्थित आकाशवाणी के सभी केंद्रों, एफएम रेडियो और क्षेत्रीय समाचार चैनलों से सुबह 10:30 से 11 बजे तक होगा।

16-11-2020
सरकार के पास नक्सलियों पर नकेल कसने की कोई ठोस योजना नहीं  : कौशिक

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा है कि प्रदेश में नक्सली लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। प्रदेश सरकार के पास नक्सलियों पर नकेल कसने की कोई ठोस योजना नहीं है। केवल पत्र लिखकर सियासत करना प्रदेश का सरकार एक मात्र मकसद है। माओवाद पर काबू पाने के लिए इस सरकार के पास कोई स्पष्ट और सख़्त रणनीतिक कार्ययोजना नहीं है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा है कि नक्सली जन अदालत लगाकर बेगुनाहों की हत्या कर रहे हैं। इन सब पर प्रदेश की सरकार मौन है, जो कई सवालों को जन्म देता है। कौशिक ने तंज कसा है कि प्रदेश सरकार केवल केन्द्र से मदद चाहती है लेकिन जमीन पर कोई भी कारगर योजना पर वह कोई काम नहीं कर रही है। केन्द्र सरकार को पत्र केवल आर्थिक मदद के लिये चिठ्ठी लिखना और केंद्र से मिली मदद का सही खर्च नहीं होना कई सवालों को जन्म देता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को प्रदेश मुख्ममंत्री की ओर से नक्सलवाद के उन्मूलन को लेकर लिखे गए पत्र में नक्सलवाद के खात्मे के लिए कोई भी सकरात्मक सुझाव नहीं है। मुख्यमंत्री बघेल को यह पता होना चाहिए कि केन्द्र की सरकार नक्सलवाद के समूल उन्मूलन को लेकर गंभीर है। स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री शाह रायपुर में एक उच्चस्तरीय बैठक भी ले चुके हैं। प्रदेश की जनता के समक्ष नक्सलवाद उन्मूलन को लेकर प्रदेश की सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए। ताकि भय का वातावरण  बनता जा रहा है, उस पर अंकुश लग सके।

 

16-11-2020
भूपेश बघेल सक्षम हैं, पूर्ण बहुमत वाली सरकार अपने सुझावों पर खुद ठोस पहल करें : विष्णुदेव साय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे गए पत्र पर कटाक्ष किया है। साय ने कहा है कि चिट्ठियां लिखने के बजाय मुख्यमंत्री बघेल खुद उन अनेक मुद्दों पर पहल कर सकने में सक्षम हैं, जिनके संबंध में उन्होंने अपने पत्र में लिखा है। सत्ता में आने के बाद से ही मुख्यमंत्री बघेल जब-तब चिट्ठियां ही लिखने का काम कर रहे हैं। कोई ठोस काम करने की उनकी नीयत उनके अब तक के कार्यकाल में कभी नजर नहीं आई। मुख्यमंत्री बघेल राजनीति के नित-नए वामपंथी पैंतरे आजमाने के बजाय काम करने पर ध्यान दें। साय ने कहा है कि बघेल नक्सली उन्मूलन के प्रति कभी गंभीर नहीं दिखे और अब वे केंद्रीय गृह मंत्रालय का सलाहकार बनने का हास्यास्पद उपक्रम कर रहे हैं। प्रदेश में जब से कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, नक्सली गतिविधियों में इजाफा हुआ है। प्रदेश सरकार को अपनी सरकार बताते हुए निर्दोषों का खून बहाकर नक्सलियों ने अपना समानांतर आतंकराज चला रखा है। नक्सलवाद की समस्या को समूल नष्ट करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में काफी काम हो रहे हैं। मुख्यमंत्री बघेल उन्हें सुझाव देकर सलाहकार बनने की चेष्टा करने के बजाय सुझावों पर खुद ठोस पहल करें। पूर्ण बहुमत वाली सरकार के एक मुख्यमंत्री होने के नाते वे काफी कुछ कर सकने में सक्षम हैं।

 

16-11-2020
छत्तीसगढ़ में भी उत्तरप्रदेश की तरह पेंशनर दिवस मनाएं सरकार : वीरेन्द्र नामदेव

रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री व छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और मुख्यमंत्री कार्यालय को ट्वीट किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को संलग्न कर पेंशनर दिवस के अवसर पर आगामी 17 दिसंबर को छत्तीसगढ़ में भी सभी तहसील/विकासखंड में शासकीय स्तर पर कार्यक्रम करने की मांग की है। उन्होंने विगत 20 वर्षों से लंबित पेंशनर्स की प्रमुख मांग राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 को हटाकर, दोनों राज्यों के पेंशनरी दायित्व का विभाजन करने और गोविंदपुरा भोपाल स्थित स्टेट बैंक से सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल को रायपुर छत्तीसगढ़ में स्थानांतरण करने संबंधी निर्णय लेकर छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को मध्यप्रदेश की आर्थिक गुलामी से मुक्ति दिलाने का आग्रह किया है। वीरेन्द्र नामदेव ने कहा है कि पेंशनरों के आर्थिक भुगतान में 74:26 के अनुपात लागू रहने के कारण मध्यप्रदेश के सहमति और सेन्ट्रल पेंशन प्रोसेसिंग सेल स्टेट बैंक भोपाल के अनुमति के बिना कोई भी राशि पेंशनर के खाते भुगतान नहीं हो सकता। इससे छत्तीसगढ़ राज्य सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों और मृत पेंशनर्स के परिवार पेंशनरों को महंगाई राहत या अन्य कोई भी राशि के लिए कई महीने इंतजार करना होता है। जल्दी भुगतान के चक्कर में दलालों के चंगुल में फंसकर रकम गंवाने को मजबूर होना पड़ता है।

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