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17-03-2020
फर्जी राशन कार्ड मामले में ईओडब्ल्यू ने दर्ज की पहली एफआईआर

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित फर्जी राशन कार्ड घोटाले की जांच में अब ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की है। प्रदेश में बड़ी तादात में फर्जी राशन कार्ड बनाकर घोटाले का मामला सामने आया था। कहा जा रहा है कि एफआईआर होने के बाद प्रदेश के बड़े बड़े नाम इसकी जद में आएंगे। ईओडब्ल्यू ने मामले में अपराध क्रमांक 13/2020 दर्ज कर विवेचना में लिया है। ईओडब्ल्यू इसमें लोकसेवकों की भूमिका की जांच करेगा। बताया गया कि 1 जनवरी 2013 तक 48.39 लाख (1815 एपीएल मिलाकर) राशन कार्ड बनाए गए। 1 जनवरी 2014 तक 70.60 लाख राशनकार्ड बनाए गए। 1 जनवरी 2015 तक 64.78 लाख राशनकार्ड बनाए गए। 1 जनवरी 2016 तक 59.56 लाख राशनकार्ड बनाए गए। प्रदेश में वयस्क महिलाओं के नाम पर सितम्बर 2013 तक कुल 72.32 लाख राशनकार्ड बनाए गए थे। इसमें ही सारा खेल हुआ है। जांच में परिलक्षित हुआ कि 14.80 लाख राशन कार्ड बोगस बनाए गए। वहीं 2013 से 2016 तक कुल 11 लाख 8 हजार 515 टन चावल को निरस्त राशनकार्डों पर बांटा गया। इससे सरकार को 2718 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ। लगभग 15 लाख राशनकार्डों में जो चावल वितरित होना दिखाया गया वह खुले बाजार में ज्यादा कीमत में बिकवाया गया। 

बताया गया कि ईओडब्ल्यू ने जांच में यह पाया कि दिए गए खाद्यान्न के राशन दुकानों तक पहुंचाने और वितरण के सत्यापन का दायित्व संचालनालय खाद्य विभाग रायपुर के साथ-साथ विभिन्न जिलों में खाद्य विभाग के विभिन्न कर्मचारियों और अधिकारियों का है, वहीं पूरे प्रदेश में परिवहन एजेंसी का दायित्व है। इस प्रकार खाद्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों ने अपने अपने पद का दुरुपयोग कर आपराधिक षडयंत्र कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस राशनकार्ड का निर्माण करवाया। इन राशन कार्डों को असल बताकर इन पर खाद्यान्न का विवरण दर्शाया गया। राशनकार्ड हितग्राहियों को राशन कार्ड वितरण किए बिना शासन के साथ छल और कूट रचना के प्रयोजन से धोखाधड़ी कर शासन को करोड़ों रुपयों का आर्थिक नुकसान हुआ है। इस काम से आरोपियों ने आर्थिक लाभ प्राप्त किया। बताया गया कि आरोपियों का यह कृत्य भ्र.नि.अ. 1988 यथासंशोधित भ्र.नि.अ. (संशोधन) अधिनियम 2018 की धारा 7(सी) एवं धारा 420, 468, 471, 120बी आईपीसी के तहत दण्डनीय अपराध होना पाया गया।

26-02-2020
पूर्व सीएस अमन सिंह के खिलाफ ईओडब्ल्यू में एफआईआर, पीएमओ में शिकायत के आधार पर जांच के आदेश

रायपुर। ईओडब्ल्यू ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के पूर्व मुख्य सचिव के खिलाफ आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज की है। आरटीआई एक्टिविस्ट उचित शर्मा की शिकायत पर राज्य शासन ने एसीबी और ईओडब्ल्यू को जांच के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक जांच में ईओडब्ल्यू ने आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के मामले में पूर्व मुख्य सचिव अमन सिंह और उनकी पत्नी के विरूद्ध अपराध कायम किया है। अपराध क्रमांक 90/2020 धारा 13.1 बी,13.2,भ्र नि अधिनियम 1988 यथा संशोधित अधिनियम 2018 एवं 120 बी के तहत मामले की विवेचना कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पीएमओ में शिकायत के आधार पर राज्य शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग सचिव रीता शांडिल्य ने आदेश जारी कर ईओडब्ल्यू के महानिदेशक को पीएमओ से प्राप्त शिकायत के आधार पर पूर्व मुख्य सचिव के विरुद्ध आय से अधिक सम्पत्ति के मामले जांच के आदेश दिए हैं।

19-12-2019
हार सामने देखकर कांग्रेस का नया हथकंडा: संजय श्रीवास्तव

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने अपने खिलाफ ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत को बदलापुर की राजनीति बताया है। श्रीवास्तव ने कांग्रेस नेताओं की इस शिकायत को झूठ का एक नया दस्तावेज बताया और कहा कि कांग्रेस निकाय चुनावों में भाजपा के प्रति बढ़ते जनसमर्थन और अपनी करारी हार को सामने देखकर चरित्र-हनन के शर्मनाक हथकंडों पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि वे हर स्तर पर अपने पूरे कार्यकाल की जांच कराने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार निष्पक्ष जांच की इच्छाशक्ति तो दिखाए। एक साल से कांग्रेस सरकार भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार पर घोटालों का आरोप लगा रही है और जांच के दौरान एक भी घोटाला प्रमाणित नहीं कर पाई है। इसका सीधा आशय यही है कि घोटालों का आरोप लगाकर चरित्र-हनन करना कांग्रेस की फितरत में है। चरित्र-हनन के हथकंडों की यह राजनीति कांग्रेस को भारी पड़ेगी। श्रीवास्तव ने कहा कि वास्तव में उनका कार्यकाल बेदाग रहा है और उनके खिलाफ की गई शिकायतें तथ्यहीन हैं। चूंकि प्रदेश और राजधानी में निकाय चुनाव होने जा रहे हैं, इसलिए कांग्रेस बेबुनियाद आरोप लगाकर झूठ-फरेब की राजनीति कर रही है। यदि उनके कार्यकाल में कोई घोटाला हुआ तो एक साल से प्रदेश की सरकार और कांग्रेस क्या सोई पड़ी थी? अब तक इस मामले में क्यों सरकार और कांग्रेस नेताओं ने जांच की पहल नहीं की?

12-12-2019
ईओडब्ल्यू ने कंसोल ग्रुप के खिलाफ किया मामला दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की जानी मानी पीआर कंपनी कंसोल ग्रुप के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज की गई है। सूत्रों की माने तो पीआर कंपनी कंसोल और जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण विंग में दर्ज शिकायत के अनुसार जनसंपर्क अधिकारियों ने 2016-2018 के बीच सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए टेंडर जारी किया था। लेकिन ठेके की शर्तों में बदलाव कर कंसोल ग्रुप को करोड़ों का लाभ पहुंचाने का आरोप है। एफआईआर में कंसोल ग्रुप का नाम उल्लेखित किया गया है।

07-12-2019
सीएस की अध्यक्षता में गठित जांच में पुनीत गुप्ता दोषी, ईओडब्ल्यू को सौपेंगे रिपोर्ट

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में बहुचर्चित राजधानी के डीकेएस अस्पताल मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित जांच रिपोर्ट में कई आश्चर्यजनक खुलासे हुए है। जांच रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को सौप दी गई है। इस जांच में पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान मे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमन सिंह के दामाद डॉ पुनीत गुप्ता को दोषी ठहराया गया है और पूर्व जांच रिपोर्ट जिसमें उन्हें 50 करोड़ रुपए के घोटाले के संबंध में सस्पेंट किया गया था, उस रिपोर्ट में मामला 50 करोड़ से ज्यादा बताया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार 50 करोड़ से अधिक की परियोजना होने के बाद भी विभाग द्वारा इस परियोजना का वित्तीय एवं अन्य कार्यों का किसी भी स्तर पर परीक्षण नहीं किया गया है। यही नही प्रक्रियाधीन कार्यों की समक्षा तक नहीं की गई है। नस्ती में संलग्न डीपीआर कब बनाया गया, यह जांच के बाद भी स्पष्ट नहीं हो पाया। जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि डीपीआर में राशि रू. 104 करोड़ का वर्णन है और लोन की राशि 64 करोड़ रुपए है जो 14 करोड़ रुपए अधिक है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्य सचिव के अध्यक्षता में गठित PFIC ( प्रोजेक्ट फॉर्मूलेशन एंड इंप्लीमेंटिंग कमेटी के समक्ष अनुमोदन हेतु प्रस्तुत नहीं किया गया। 

 

17-10-2019
पीएमसी घोटाला : पुलिस कस्टडी में भेजे गए पूर्व डायरेक्टर, पूर्व एमडी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

नई दिल्ली। पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक के पूर्व एमडी जॉय थॉमस तथा पूर्व डायरेक्टर एस.सुरजीत सिंह अरोड़ा को गुरुवार को मंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया। जहां कोर्ट ने पूर्व एमडी जॉय थॉमस को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा तथा साथ ही पूर्व डायरेक्टर एस. सुरजीत सिंह अरोड़ा को 22 अक्तूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा दिया है। इससे पहले मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की विशेष जांच टीम ने बुधवार को सुरजीत सिंह से पूछताछ की थी। इस पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। पीएमसी बैंक के पूर्व चेयरमैन वारयाम सिंह, प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस और एचडीआईएल के मालिक राकेश और सारंग वाधवन को भी गिरफ्तार किया गया था।

पीएमसी बैंक में घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके तहत बैंक से छह महीने की अवधि में 40 हजार रुपये तक ही धन निकाले जाने की सीमा निर्धारित किए जाने के बाद से करीब 15 लाख ग्राहक परेशान हैं। पहले यह सीमा एक हजार रुपयेे थी, जिसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये कर दी गई। 

16-10-2019
नॉन घोटाले में डॉ.आलोक शुक्ला को मिली अग्रिम जमानत

रायपुर। नॉन घोटाले में आरोपी आलोक शुक्ला को बुधवार को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। जानकारी के अनुसार विभिन्न कारणों से जमानत पर सुनवाई टल रही थी। प्रदेश में चर्चित नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले में आईएएस अफसर आलोक शुक्ला आरोपी बनाए गए हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू)ने पूर्व में अफसर आलोक शुक्ला को फरार बताते हुए विशेष जज लीना अग्रवाल की कोर्ट में पूरक चालान पेश किया था। कोर्ट ने पूर्व में आलोक शुक्ला को हाजिर होने का नोटिस भी जारी किया था,लेकिन वे अनुपस्थित रहे। पूरक चालान में ईओडब्ल्यू ने घोटाले में आलोक शुक्ला के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने का दावा किया था। नान घोटाले में फरवरी 2015 में ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने छापा मारा था। शुक्ला तब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव थे। छापे में नान से 1.60 करोड़ रुपए जब्त किए गए थे, साथ ही नान के दर्जनभर अफसरों की भी गिरफ्तारी हुई थी।

14-10-2019
नॉन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चिंतामणि की याचिका की खारिज

रायपुर। साल 2015 में नागरिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी और अनियमितता के बाद पर्दे पर आए नॉन घोटाला मामले मे सुप्रीम कोर्ट ने चिंतामणि चंद्राकर की याचिका खारिज कर दी है। छत्तीसगढ़ में स्कीम के तहत सरकार गरीबों को एक रुपए किलो के हिसाब से चावल बांटती है। ईओडब्ल्यू और एसीबी टीम ने फरवरी 2015 में नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें 36 हजार करोड़ की आर्थिक अनियमितता की जानकारी मिली। इसी गड़बड़ी की अब प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार नए सिरे से जांच करवा रही है।

वर्ष 2015 में उजागर हुए नान घोटाले के दौरान चिंतामणि चंद्राकर वहीं पदस्थ थे। आरोप है कि उस दौरान सांठगांठ कर चंद्राकर ने खुद की नियुक्ति कई महत्वपूर्ण पदों पर कराई और रैकेट बनाकर अपने और परिवार वालों के नाम पर करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके बाद से ही ईओडब्ल्यू की नजर आय से अधिक संपत्ति के मामले में इसके ऊपर थी। टीम ने कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद सोमवार तड़के एक साथ चंद्राकर के चार ठिकानों पर दबिश दी। चंद्राकर फ़िलहाल स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन लिमिटेड में उप लेखाधिकारी के पद पर तैनात है। ऐसे में टीम ने कांकेर स्थित उसके कार्यालय सहित दुर्ग के आदर्श नगर स्थित घर और ससुराल में छापा मारा। वहीं उसी समय एक टीम ने बैंगलुरू में बेटे हर्ष चंद्राकर के फ्लैट पर छापेमारी की। जांच टीम को यहां से करोड़ो की चल अचल संपत्ति की जानकारी मिली है। शाखा के अधिकारियों का कहना है कि चंद्राकर शुरू से संदेह के घेरे में था, लेकिन अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर बचता रहा। 

02-10-2019
शराब के समुद्र मंथन से करोड़ों बटोरने वाले समुद्र सिंह को अग्रिम जमानत नहीं

रायपुर। रमन सरकार में आबकारी विभाग के अघोषित सरकार समुद्र सिंह को उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत नहीं मिली। ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार के मामले में निचली अदालत से अग्रिम जमानत नहीं मिलने पर समुद्र सिंह ने उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी लेकिन विद्वान न्यायाधीश आरसीएस सामन्त ने याचिका खारिज कर दी। यहां ये बताना गैर जरूरी नहीं होगा कि रमन सिंह सरकार में आबकारी आयुक्त के पद से रिटायर होने के बाद 9 साल तक आबकारी विभाग का संविदा में ओएसडी बने रहने का समुद्र सिंह ने रिकार्ड बनाया था। उन्हें आबकारी विभाग का अघोषित सरकार माना जाता था। सत्ता परिवर्तन के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का अमला दर्ज कर अनूपपुर में छापे मारे तब 70 एकड़ के फार्म हाउस समेत छत्तीसगढ़ एमपी, हिमाचल प्रदेश में नौकरी के नाम बेनामी सम्पति के अलावा पेट्रोल पंप का भी पता चला था। तब के आबकारी सरकार पर भूपेश बघेल सरकार में अब गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

19-08-2019
नान घोटाला : ईओडब्ल्यू ने नान प्रबंधक चिंतामणि चंद्राकर के ठिकानों पर की छापामार कार्रवाई 

रायपुर। ईओडब्ल्यू की टीम ने नान घोटाले मामले में सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन नान प्रबंधक चिंतामणी चंद्राकर के ठिकानों पर छापा मारा है। टीम ने चिंतामणी चंद्राकर के दुर्ग, कांकरे और बैंगलूरु स्थित घर में छापा मारा है। ईओडब्ल्यू टीम ने चिंतामणि के बेटे के ठिकाने पर भी छापेमार कार्रवाई की है।  जानकारी के अनुसार जांच में चिंतामणि के खिलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग और भारी संख्या में नगदी के लेनदेन के सबूत मिले हैं। टीम मकान और आफिस के कागज और दस्तावेजों की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि इस जांच के बाद शाम तक संपत्ति के बारे में बड़ा खुलासा हो सकता है। 

नान घोटाले में ईओडब्ल्यू ने 2015 में जब छापा मारा तो चिंतामणि चंद्राकर रायपुर में पदस्थ थे। नई सरकार बनने के बाद उनका तबादला कांकेर किया गया। यहां वे नान के जिला प्रबंधक है। नान डायरी में चिंतामणि का नाम सामने आया था। इससे पहले चिंतामणी को लंबे समय से ईओडब्ल्यू में बयान देने बुलाया जा रहा था। 8 से ज्यादा नोटिस जारी किया जा चुका था। ईओडब्ल्यू की टीम को उम्मीद है कि छापेमारी के बाद कुछ अहम तथ्य मिल सकते हैं।

08-08-2019
ईओडब्ल्यू की टीम ने दी नान कार्यालय में दबिश, घोटाले से संबंधित दस्तावेजों की कर रही जांच

रायपुर। नागरिक आपूर्ति कार्यालय नवा रायपुर में ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने गुरुवार को दबिश दी है। बता दें कि ईओडब्ल्यू की टीम दूसरी बार नान दफ्तर पहुंची हैै। मिली जानकारी के अनुसार ईओडब्ल्यू की टीम दस्तावजों की जांच कर रही है। ईओडब्ल्यू के आधा दर्जन अधिकारी नान घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी जाचं कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार नान घोटाले से संबंधित फाइल देख रहे हैं। इसके पहले भी 6 अगस्त को भी ईओडब्ल्यू की टीम  नान दफ्तर पहुंची थी और घोटालों से जुड़ी कई फाइलों को जब्त किया था। बता दें कि कांग्रेस ने बहुचर्चित नान घोटाला मामले में नए सिरे से जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है, जो मामले की जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों को नान घोटाला मामले में साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ और उसे नष्ट किए जाने के संबंध में जानकारी मिली थी।

 

08-08-2019
मुकेश गुप्ता को देश बदर कर देना चाहिए : ननकीराम कंवर

रायपुर। प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने निलंबित आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुकेश गुप्ता को देश बदर कर देना चाहिए। कंवर ने मुकेश गुप्ता के खिलाफ ईओडब्ल्यू की चल रही धीमी गति जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अधिकारी मुकेश गुप्ता के खिलाफ बहुत धीमी गति से जांच की जा रही है। श्री कंवर ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के कारण ही पिछली सरकार चली गई। ऐसे भ्रष्ट अधिकारी को जिला की तरह देश बदर कर देना चाहिए।

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