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21-10-2019
बाल वैज्ञानिकों ने किया चम्पारण, मुक्तांगन और नवा रायपुर का भ्रमण

रायपुर। 46वीं जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी का आयोजन राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में किया गया। प्रदर्शनी का समापन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी और ग्रामोद्योग मंत्री गुरु रुद्रकुमार ने 19 अक्टूबर को किया। प्रदर्शनी में देशभर से आए 400 से अधिक बच्चों और शिक्षकों ने 20 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के धार्मिक और आध्यात्मिक स्थल चम्पारण, पुरखौती मुक्तांगन, अंतरराष्ट्रीय वीर नारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम और नवा रायपुर में मंत्रालय, संचालनालय (इन्द्रावती भवन) का अवलोकन किया। बाल वैज्ञानिक इन स्थलों को देखकर काफी प्रफुल्लित हुए और वे छत्तीसगढ़ से मीठी यादें लेकर लौट रहे हैं। रविवार को सभी बाल वैज्ञानिकों और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। 400 से अधिक बाल वैज्ञानिक और उनके मार्गदर्शक शिक्षकों को चम्पारण में हाई सेकेण्डरी स्कूल में देखकर गांव बच्चे वहां पहुंचे और सुआ नृत्य की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया। चम्पारण में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.श्री रूपधर दीवान शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय में सभी बच्चों और शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। चम्पारण स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों का स्वागत अभनपुर के बीईओ मोहम्मद इकबाल, बीआरसी चम्पारण और सीएसीसी ने किया। बाल विज्ञान प्रदर्शनी का पांच दिन में 30 हजार से अधिक नागरिकों ने अवलोकन किया। इनमें 24 हजार से अधिक स्कूली बच्चे और 6 हजार से अधिक कॉलेज के विद्यार्थी शामिल है। बाल विज्ञान प्रदर्शनी के अंतिम दिन सुकमा, बीजापुर एवं रायपुर जिले के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी में बस्तर संभाग से आए हुए सुकमा और बीजापुर के छात्रों में प्रदर्शनी को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया। छात्र-छात्राओं ने बताया कि वे इसके अलावा विज्ञान भवन विधानसभा भवन का भ्रमण करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग, एससीईआरटी के संयुक्त संचालक योगेश शिवहरे, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक संचालक प्रशांत पाण्डेय, एससीईआरटी के सहायक प्राध्यापक दीपांकर भौमिक,  संजय गुहे,  ज्योति चक्रवर्ती भी उपस्थित थीं। 

17-10-2019
गोठान से खुलीं नई राहें, आमदनी के साथ रोजगार से जुड़ीं महिलाएं  

रायपुर। अब तक गाय के गोबर को कण्डे के रूप में ही इस्तेमाल करती आई गाँव की महिलाओं को अब एक नया रोजगार मिल गया है। शासन द्वारा गाँव-गाँव गोठान बनाने की पहल ने सबकों एक नया रोजगार से जोड़ दिया है। गोठान से एक साथ निकलने वाला गोबर न सिर्फ उपयोगी हो गया है बल्कि गाँव की अनेक महिलाओं के खाली हाथों को काम देने के साथ उन्हें आमदनी भी देने लगा है। गोठान के गोबर से तैयार होने वाला जैविक खाद 10 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बनचरोदा ग्राम की महिलाओं ने तो महज दो माह के भीतर एक हजार किलो खाद बेच डाली है। केचुआं से तैयार इस जैविक खाद की उपयोगिता को जानने समझने के पश्चात लोग इसे लेने पहुंच रहे है। 10 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बेचने के बाद 20 क्विंटल खाद की फिर से मांग आई है। जैविक खाद की मांग बढ़ने से इस कार्य में संलग्न स्व सहायता समूह की महिलाओं में बहुत खुशी का माहौल है। अब वे 20 क्विंटल खाद की डिमांड पूरा करने के लिए गोठान में जुटी हुई हैं। शुरुआत में खाद निर्माण कर अटपटा से महसूस कर रही महिलाओं को लगता था कि इस खाद को कौन खरीदेगा, कही ये घाटे का सौदा न साबित हो। लेकिन अब जब डिमांड बढ़ने लगी है तो तैयार किया खाद खत्म हो चुका है।

मांग पूरी करने के लिए उन्हें खाद बनाने जुटना पड़ा है। गोठनों से निकलने वाला गोबर गाँव की अनेक महिलाओं को आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़ाने के साथ उनकी आमदनी भी बढ़ा रहा हैं। आरंग विकासखंड के अंतर्गत ग्राम बनचरौदा की पहचान एक स्वावलंबी गाँव के रूप में होने लगी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा नरवा,गरवा, घुरवा एवम बाड़ी विकास को बढ़ावा देने की पहल के साथ ही गाँव में आदर्श गोठान बनाकर यहाँ की सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर की राह में आगे बढ़ने का अवसर मिल गया है। गोठान के गोबर से सजावटी दीया के साथ अन्य उत्पाद तो यहाँ तैयार हो ही रहा है, यहां की धनलक्ष्मी महिला स्व सहायता समूह द्वारा गोबर से जैविक खाद एवम गौ मूत्र से औषधि का निर्माण कर बाजार में विक्रय किया जा रहा है। अपने घर का काम निपटाने के साथ गोठान के माध्यम से कुछ काम कर महिलाओं ने आमदनी का जरिया ढूंढ निकाला है। समूह की सदस्य गीता साहू ने बताया कि अब तक लगभग 10 क्विंटल जैविक खाद बेच चुके है। अभी 20 क्विंटल जैविक खाद की फिर से मांग आई है। उन्होंने बताया कि गोठन में अभी 8 बेड थे अब दो बेड और लगातार खाद का निर्माण किया जाएगा। जैविक खाद की मांग बढ़ने की बात कहते हुए उन्होंने बताया कि भविष्य में अधिकांश किसान जैविक फसल की ओर अग्रसर होंगे। जिस तरह से खाद की मांग बढ़ी है उसको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में तुरंत ही किसी को खाद की आपूर्ति नही हो पाएगी। बनचरौदा ग्राम की महिला समूह द्वारा गोठान में तैयार जैविक खाद की प्रदर्शनी बीटीआई मैदान में लगाई गई थी। यहाँ आयोजित 46 वी जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान,गणित और पर्यावरण प्रदर्शनी 2019 कार्यक्रम में स्टाल में इस जैविक खाद की खूब पूछ परख रही। एक दिन की प्रदर्शनी में सवा क्विंटल खाद शहरवासियों ने खरीदा। कुछ लोगों को खाद की कीमत बहुत कम भी लग रही थी।गाँव की महिलाओं ने उन्हें बताया कि यह गोठान से निः शुल्क में प्राप्त गोबर से तैयार जैविक खाद है और हर प्रकार की फसलों के लिए उपयोगी है। गौमूत्र से तैयार औषधि की भी है।  

गौमूत्र से तैयार औषधि की भी है डिमांड
धनलक्ष्मी स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा न सिर्फ गोबर से खाद का निर्माण कर बेचा जा रहा है। यहाँ गौ मूत्र से अलग-अलग औषधीय तैयार कर उसे बेचकर आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है। इनके द्वारा धान की फसलों को कीट से बचाने गौ मूत्र मिलाकर बेल पत्ती अर्क,पेट में कीड़ा मारने वाली दवा निमास्त्र, धान के पौधों में कनक छेदक से बचाने ब्रम्हास्त्र, अग्नास्त्र, दशपर्णी अर्क, बेल पत्ती, नीम पत्ती, यूरिया पोटाश आदि से नाडेप खाद का विक्रय किया जा रहा है।

 

04-02-2019
बीटीआई मैदान ग्राऊंड का व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध की मांग करने कुलदीप जुनेजा ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

रायपुर। बीटीआई मैदान का व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर सोमवार को विधायक कुलदीप जुनेजा शंकरनगर रहवासियों के साथ मिलकर कलेक्टरेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सोंपा। बता दे कि बीटीआई मैदान को 1-1 माह के लिए व्यावसायिक उपयोग के लिए देने पर वहां के आसपास के निवासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं व्यावसायिक उपयोग करने वाले लोग मैदान में कुड़ा-कचरा व गंदगी फैलाकर चले जाते हैं। विधायक कुलदीप जुनेजा शंकरनगर रहवासियों के साथ मिलकर कलेक्टर एस.बसव राजू को ज्ञापन सौंपा। इस पर कलेक्टर बसव राजू ने व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आश्वासन भी दिया है।

26-10-2018
International Exhibition : बीटीआई मैदान में राइस एक्सपो की अंतरार्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, रमेश मोदी ने किया लोकापर्ण 

रायपुर। रायपुर शंकर के बीटीआई मैदान में राइस एक्सपो प्रदर्शनी लगाई गई है। इसमें देशभर के कई राज्यों से प्रदर्शनी में शामिल हैं और अंतरार्राष्ट्रीय शिविर है। इसमें मिलर्स को 50 हजार से लेकर 50 लाख तक मशीनें है। यह प्रदर्शनी लगने से राइस मिलर्स को काफी फायदा होगा। विदेश की मशीन छत्तीसगढ़ में लाकर बेचा जा रहा। जबकि यह मशीन विदेश में जाकर लेंगे को काफी महंगा मिलेगा और लाने का चार्ज भी अतिरिक्त होगा। लेकिन राइस मिलर्स एसोसिएशन की ओर से प्रदेशवासियों के लिए छत्तीसगढ़ में प्रदर्शनी लगाई गई है। 

बता दें कि विश्व हिन्दू परिसर के अंतरराष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रमेश मोदी ने आज रायपुर बीटीआई मैदान में लगे राइस एक्सपो का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी प्रदेशवासियों के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक लगाई गई  है। इसमें प्रदेशभर के राइस मिलर्स जुटे हैं। यहां राइस मिल मशीनरी की अंतरार्राष्ट्रीय प्रदर्शनी लगाई है। इस एक्सपो में देशभर के राइस उत्पादक तथा मिलर्स इस बात पर मंथन करेंगे कि मशीनरी के इस्तेमाल से धान की उत्पादन लागत तथा चावल की क्वालिटी किस तरह सुधारी जा सकती है। इसे लेकर भी राइस मिलर्स एसोसिएशन मंथन करेंगे। 

छत्तीसगढ प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में धान उत्पादन, लक्ष्य, चुनौतियों और महत्व पर चर्चा होगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल तथा सचिव प्रमोद जैन ने बताया कि ये तकनीक का समय है। इसका इस्तेमाल कर लागत घटाई जा सकती है और चावल में गुणवत्ता लाई जा सकती है। चावल की गुणवत्ता बढ़ने से राज्य इस तरह का राष्ट्रीय स्तर का एक्सपो पिछले एक दशक से किया जा रहा है। इसका लाभ लोगों को मिल रहा है। आज लोकापर्ण कार्यक्रम में राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल, सचिव प्रमोद जैन, देवराज, विजय तायल, राजीव अग्रवाल, संदीप, विवेक शर्मा, अंकित अग्रवाल, लाला भाई, रौशन चंद्राकर मनोज अग्रवाल समेत अन्य लोग शामिल थें।

30-09-2018
SCERT Counseling : बीएड के अभ्यर्थियों ने बीटीआई मैदान में मचाया हंगामा, तोड़े वाहनों के कांच
मौके पर पहुंची सिविल लाइन थाने की पुलिस, समझाने पर शांत हुआ युवकों का गुस्सा
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