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11-01-2021
एलएसी पार कर भारतीय सीमा में आये चीनी सैनिक को भारत ने वापस लौटाया

रायपुर/लद्दाख। शुक्रवार 8 जनवरी को चीनी सैनिक नियंत्रण रेखा को पार करते हुए भारतीय इलाके में आ गया था। भारतीय सेना के जवानों ने इस चीनी सैनिक को पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी छोर के पास पकड़ा था।सेना ने बताया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का ये सैनिक एलएसी पार कर भारत के लद्दाख में आ गया था और उसे वहां तैनात भारतीय सैनिकों ने हिरासत में ले लिया। उस सैनिक का कहना था कि वो रास्ता भटक गया था। बता दें की चीनी सैनिक को भारत ने सोमवार को वापस लौटा दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, चीन की लाख मिन्नतों के बात उसके सैनिक को भारत ने छोड़ा है। भारतीय सेना की तरफ से बताया गया कि चीनी सैनिक को सोमवार को सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर चुशूल-मॉल्डो पाइंट से चीन के हवाले किया गया। 

09-01-2021
भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाले चीनी सैनिक को आर्मी जवानों ने लिया हिरासत में

नई दिल्ली। लद्दाख में भारत के सीमा क्षेत्र में पैंगोंग झील क्षेत्र में एक चीनी सैनिक घूम रहा था, जिसे आर्मी के जवानों ने दबोच लिया। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक चीन का सैनिक शुक्रवार को पैंगोंग झील के दक्षिणी क्षेत्र में शुक्रवार तड़के पकड़ा गया। भारतीय सेना ने कहा कि चीनी सेना पीएलए को इस संबंध में सूचना भेज दी गई है। दोनों पक्ष इस मामले में एक दूसरे के संपर्क में हैं। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को पीएलए का सैनिक एलएसी को पार कर आ गया और भारतीय सैनिकों ने उसे हिरासत में ले लिया। लद्दाख क्षेत्र चीन की पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी को उनके जवान की रेजांग ला हाइट्स इलाके में कस्‍टडी को लेकर सूचना दे दी गई। आर्मी के अधिकारी ने का है कि पीएलए के पकड़े गए सैनिक के साथ तय प्रक्रियाओं के मुताबिक व्यवहार किया जा रहा है। इस बात की जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में उसने एलएसी पार की। सूत्रों के मुताबिकए चीनी सैनिक ने पूछताछ के दौरान बताया है कि वह भूलवश इस क्षेत्र में घुस आया है। सेना अभी चीनी जवान से पूछताछ कर रही है। भारतीय सेना ने कहा है कि पीएलए सैनिक ने जिन परिस्थितियों में सीमा रेखा पार की है, उसकी निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार मामले को निपटाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष इस मामले में एकदूसरे के संपर्क में हैं।

 

19-10-2020
एलएसी पर जासूसी करते चीनी सैनिक पकड़ाया, भारतीय सेना ने बरामद किए दस्तावेज

नई दिल्ली। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) से एक चीनी सैनिक को जासूसी करते भारतीय सैनिकों ने सोमवार को सीमा पर पकड़ा है। बताया गया है कि हिरासत में लिया गया चीनी सैनिक कॉरपोरल रैंक का है। अधिकारियों ने उसे पकड़ने के बाद जासूसी मिशन के एंगल से उससे हर तरह से पूछताछ की है। उसके बाद उसे वापस चीनी सेना को लौटा दिया है।
सेना को उसके पास से कई तरह के दस्तावेज भी मिले हैं। सेना को उसके पास से सिविल और मलिट्री डॉक्यूमेंट बरामद मिले,जिसकी सभी तरह से जांच पड़ताल की गई। अधिकारी चीन के शांगजी इलाके का रहने वाला था। फिलहाल भारत ने उसे चीन को वापस भेज दिया है।  
सूत्रों के अनुसार मिली जानकारी के अनुसार चीनी सैनिक गलती से भारतीय सीमा में घुस आया था। वह अपने याक बरामद करने के लिए भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया। उसके पास उसके हथियार भी नहीं थे। भारतीय सेना उसे तय प्रोटोकॉल के तहत बात कर रही है। सेना अभी औपचारिक बयान तैयार करके जल्दी ही जारी करने वाली है।

06-07-2020
गलवान घाटी में 2 किमी पीछे हटे चीनी सैनिक

नई दिल्ली। भारत चीन सीमा पर एक सप्ताह से चल रहे तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी सेना गलवान घाटी से 2 किलोमीटर पीछे हट गई है। पूर्वी लद्दाख के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 15 जून की घटना के बाद चाइनीज पीपल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिक उस स्थान से इधर आ गए थे,जो भारत के मुताबिक एलएसी है। भारत ने भी अपनी मौजूदगी को उसी अनुपात में बढ़ाते हुए बंकर और अस्थायी ढांचे तैयार कर लिए थे। दोनों सेनाएं आंखों में आंखें डाले खड़ी थीं।कमांडर स्तर की बातचीत में 30 जून को बनी सहमति के मुताबिक चीनी सैनिक पीछे हटे या नहीं,  इसको लेकर रविवार को एक सर्वे किया गया। अधिकारी ने बताया, चीनी सैनिक हिंसक झड़प वाले स्थान से दो किमी पीछे हट गए हैं। अस्थायी ढांचे दोनों पक्ष हटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बदलवा को जांचने के लिए फिजिकल वेरीफिकेशन भी किया गया है।

वहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक जिस गलवान घाटी पर अपना दावा जताकर चीन भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रहा है, उसी गलवान नदी के तट पर अब चीनी सेना की मुश्किलें बढ़ गईंं हैं। गलवान नदी के किनारे चीन की तैनाती नहीं हो पा रही है, क्योंकि नदी का जल स्तर तेज गति से बढ़ने के कारण गलवान के किनारों पर लगे चीनी सेना के कैम्प बह गए हैंं।ड्रोन की तस्वीरों से पता चलता है कि चीनी पीएलए के टेंट गलवान के बर्फीले बढ़ते पानी में पांच किलोमीटर गहराई में बह गए हैंं। काफी तेजी से बर्फ पिघलने के कारण नदी के तट पर इस समय स्थिति खतरनाक है। चीन यहां से पीछे हटने के बाद अधिक से अधिक नई तैनाती करने में जुट गया है लेकिन गलवान, गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग झील में मौजूदा स्थिति के चलते चीनी सेना की तैनाती लंबे समय के लिए अस्थिर हो गई है।

21-06-2020
अब चीनी सैनिकों को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब, एलएसी पर तैनात कमांडरों को मिली छूट, नियमों में हुआ बदलाव

नई दिल्ली। लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। गलवान घाटी में चीन की सेना के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद सेना ने युद्ध के नियम में एक अहम बदलाव किया है। इस बदलाव के बाद अब एलएसी पर तैनात सभी कमांडरों को हालात को संभालने के लिए सामरिक स्तर पर कोई भी कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी गई है। पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में 15-16 की दरमियानी रात को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (आरओई) में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। गलवां घाटी की झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तैनात कमांडर्स को पूरी छूट दी गई है ताकि वे सामरिक स्तर पर स्थिति को संभाल सकें। इसकी जानकारी नाम न बताने की शर्त पर दो अधिकारियों ने दी।

भारत और चीन के सैनिकों के बीच गलवां घाटी में सात घंटे तक हिंसक झड़प हुई थी। भारतीय सेना ने अपने बयान में कहा था कि दोनों ही पक्षों को नुकसान हुआ है। 1975 के बाद यह पहली बार था जब एलएसी पर कोई जवान शहीद हुआ। दूसरे अधिकारी ने कहा कि आरओई में परिवर्तन सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद आवश्यक थे। सेना ने आखिरकार 15 जून की झड़प के बाद अपने सैनिकों की प्रतिक्रिया के दायरे को सीमित न करने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘15 जून से पहले पांच-छह मई को पेंगोंग त्सो और गलवां घाटी (मई मध्य) में हुई हिंसक झड़प हुई थी। सभी मौकों पर वे भारी संख्या में आए और हमारे सैनिकों पर लोहे की रॉड में कील और बेंत में लगे नुकीले तारों से हमला किया। हमारे सैनिकों ने निडर होकर लड़ाई लड़ी लेकिन आरओई पर गौर करना जरूरी था।’ उत्तरी सेना के पूर्व सेनानिवृत्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल ने कहा, ‘चूंकि एलएसी पर गश्त के दौरान सैनिकों को हथियार ले जाने की अनुमति है। यह अंतर्निहित है कि वे गलवां घाटी में हुए हमले जैसी अभूतपूर्व स्थिति में हथियारों का उपयोग कर सकते हैं।’ बता दें कि पेट्रोलिंग के दौरान फॉरवर्ड सैनिक पीठ पर टंगी अपनी बंदूक की नली को जमीन की ओर और गोलियों को जेब में रखते हैं।

18-06-2020
राहुल गांधी ने किया केंद्र से सवाल, कहा-बिना हथियारों के जवानों को भेजा ही क्यों

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने को लेकर गुरुवार को फिर से सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि हमारे सैनिकों को शहीद होने के लिए निहत्थे क्यों भेजा गया। उन्होंने एक पूर्व सैन्य अधिकारी के साक्षात्कार का उल्लेख करते हुए ट्वीट किया,'चीन की हिम्मत कैसे हुई उसने हमारे निहत्थे सैनिकों की हत्या की? हमारे सैनिकों को शहीद होने के लिए निहत्थे क्यों भेजा गया?'कांग्रेस नेता ने बुधवार को भी इस मामले पर सवाल किया था, 'प्रधानमंत्री खामोश क्यों हैं? वह छिपे हुए क्यों हैं? अब बहुत हो चुका। हमें यह जानने की जरूरत है कि क्या हुआ है।' उन्होंने कहा था, 'हमारे सैनिकों की हत्या करने की चीन की हिम्मत कैसे हुई? हमारी भूमि पर कब्जा करने की उनकी हिम्मत कैसे हुई?'

 

 

10-05-2020
उत्तरी सिक्किम में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प, दोनों देशों के जवान घायल

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक बार फिर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प की खबर सामने आई है। उत्तरी सिक्किम में शनिवार को भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए और टकराव हुआ है। भारतीय सेना के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है। इस क्षेत्र में सड़क परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। हेलीकॉप्टर सेवाओं के माध्यम से इसका रख-रखाव किया जाता है। भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि उत्तरी सिक्किम इलाके में भारत और चीन के सैनिकों में टकराव हुआ। दोनों ओर से भारी तनाव और बहसबाजी हुई। इस घटना में दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें भी आई हैं। हालांकि इस झगड़े को स्थानीय स्तर के हस्तक्षेप और बातचीत के बाद सुलझा लिया गया।

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