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08-09-2020
एथेनॉल निर्माण संबंधी 508 करोड़ की चार प्रस्तावों पर एमओयू, पहली बार स्थापित हो रहे एथेनॉल निर्माण की इकाईयां

रायपुर। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य की पूरे देश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनेगी। मुख्यमंत्री बघेल की उपस्थिति में आज यहां उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ में एथेनॉल निर्माण संबंधी 507 करोड़ 82 लाख रुपए के चार प्रस्तावों पर एमओयू संपन्न हुआ। इन इकाईयों की वार्षिक उत्पादन क्षमता एक लाख 17 हजार 500 किलोलीटर एथेनॉल निर्माण की है, जिसके लिए लगभग 3 लाख 50 हजार टन धान की आवश्यकता होगी। चारों इकाईयों में 583 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। इन इकाईयों में से दो इकाईयां मुंगेली और एक-एक इकाईयां जांजगीर-चांपा तथा महासमुंद में स्थापित होंगे। इन एमओयू पर राज्य शासन की ओर से उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ तथा संबंधित एथेनॉल निर्माण इकाई के उद्योगपतियों द्वारा हस्ताक्षर किया गया। 

मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर राज्य में एथेनॉल निर्माण इकाईयों के स्थापना के लिए बधाई तथा शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इन एथेनॉल निर्माण इकाईयों से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन आएंगी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है। यहां एथेनॉल निर्माण की इकाईयों की स्थापना होने से राज्य में धान के आधिक्य का पूरा-पूरा उपयोग होगा। इसका राज्य में गरीब आदिवासी किसानों सभी वर्ग के लोगों को भरपूर लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार की विशेष पहल से छत्तीसगढ़ में एथेनॉल निर्माण की इकाई की स्थापना संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की पहचान सीमेंट, बिजली और स्टील प्लांट आदि के रूप में तो विख्यात है ही, लेकिन अब यहां एथेनॉल निर्माण की इकाई से छत्तीसगढ़ की खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी नई पहचान बनेगी। इस अवसर पर कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि राज्य में एथेनॉल निर्माण इकाई की स्थापना यहां किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर राज्य सरकार द्वारा की गई है। राज्य में धान खरीदी, उत्पादन तथा निष्पादन की प्रक्रिया सतत् रूप से चलने वाली है। एथेनॉल निर्माण की इकाई स्थापित होने से राज्य की आर्थिक व्यवस्था को विशेष गति मिलेगी। इस दौरान एथेनॉल निर्माण की इकाई स्थापित करने वाले उद्योगपतियों से इकाईयों की स्थापना को शीघ्रता से पूर्ण करने के लिए भी कहा गया। इसमें राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग के लिए आश्वस्त किया गया। 

राज्य में एथेनॉल निर्माण के लिए एमओयू संपन्न हुए चार इकाईयों में से मेसर्स छत्तीसगढ़ डिस्टीलरीज लिमिटेड कुम्हारी द्वारा उक्त परियोजना में 157 करोड़ 50 लाख रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 100 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। उक्त इकाई द्वारा 36 हजार 500 किलोलीटर एथेनॉल और 1825 किलोलीटर अशुद्ध स्प्रीट के उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह मेसर्स चिरंजीवनी रियलकॉम प्रायवेट लिमिटेड बिलासपुर द्वारा उक्त परियोजना में 130 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 118 लोगों को रोजगार मिलेगा। इकाई द्वारा 1.80 करोड़ लीटर एथेनॉल, 1.80 करोड़ लीटर ई.एन.ए. तथा 14 हजार 400 टन डीडीजीएस वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह मेसर्स क्यूबिको केमिकल्स प्रायवेट लिमिटेड भिलाई द्वारा उक्त परियोजना में 122 करोड़ 32 लाख रूपए पूंजी निवेश किया जाएगा।

इससे 222 व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध होगा। इकाई द्वारा 33 हजार किलोलीटर एथेनॉल निर्माण का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेसर्स श्याम वेयरहाउसिंग एंड पावर प्रायवेट लिमिटेड द्वारा उक्त परियोजना में 98 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश किया जाएगा। इससे 93 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा। इकाई द्वारा 30 हजार किलोलीटर एथेनॉल निर्माण का वार्षिक लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव रश्मि आशीष सिंह, राज्य महिला आयोग की अघ्यक्ष  किरणमयी नायक, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, अपर मुख्य सचिव डॉ. आलोक शुक्ला, सचिव डॉ. एम.गीता, सचिव आर. प्रसन्ना, नीलेश क्षीरसागर सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

29-08-2020
Video: आजादी के बाद भी खाट में मरीज को लेकर नदी पार कर रहे लोग

कवर्धा। समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण एक युवक की मौत हो गई। भोरमदेव थाना के ग्राम केशदाझंडी में एक अठारह वर्षीय आदिवासी युवक तुकाराम बैगा का तबियत बिगड़ी और स्वास्थ्य अमले को इसकी सूचना दी गई लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा वाहन नहीं पहुंचने का हवाला दे दिया गया। ऐसे में बीमार युवक को खाट में लिटाकर बैगा समाज के जिलाध्यक्ष कामू और युवक के परिजन खाट पर लिटाकर गांव से निकल पड़े। सरौधा जलाशय के पास कमर तक भरे पानी में कड़ी मशक्कत के बाद मरीज को जलाशय पार कराया गया। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को फिर से मौके पर बुलाया गया लेकिन एम्बुलेंस के इंतजार में युवक ने दम तोड़ दिया और अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। बता दें कि बारिश के कारण सरोधा जलाशय लबालब भर गया है, जिसके कारण जलाशय से 5 फीट ऊपर पानी बह रहा है।

 

28-08-2020
थाना से महज 2 किमी की दूरी पर नक्सलियों ने लगाए बैनर पोस्टर

कांकेर। कोयलीबेड़ा के छोटेबेठिया थाना अंतर्गत ग्राम पी,व्ही 92 (धरमपुर) छोटेबिठिया थाना से महज 2 किलोमीटर की दूरी में नक्सलियों द्वारा भारी मात्रा में बैनर पोस्टर लगा एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इससे क्षेत्र को लोगों में दहशत का माहौल है। नक्सलियों द्वारा लगाये बैनर में पुलिस जवानों को वापस जाने को कहा गया। एनपीआर,एनआरसी,सीईए का भी विरोध किया गया। आदिवासी के अस्तित्व, अस्मिता, आत्मसम्मान के लिए सघर्ष करने जैसी बातें लिखी गई है। वहीं कोविड 19 से सावधान पुलिस बल वापस जाओ कोरोना को मत फैलाव जैसे संदेश भी लिखे गए है। विदित हो कि इन दिनों परलकोट क्षेत्र में छुट्टी से वापस कैम्प लौट रहे बीएसएफ के जवानों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ रही है। इसका जिक्र नक्सलियों द्वारा किया गया है।

 

28-07-2020
बृजमोहन का आरोप, वन और श्रम विभाग के बीच पिस रहे आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहक, नहीं कोई संवैधानिक संरक्षण

रायपुर। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस सरकार पर प्रदेश के भोले-भाले आदिवासियों के साथ छल, कपट एवं अन्याय करने का आरोप लगाया है। बृजमोहन ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीमा में भाजपा सरकार में जहां उन्हें सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए और दुर्घटना मृत्यु पर 4 लाख रुपए देने का प्रावधान था। उसमें कटौती कर वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार की श्रम विभाग की प्रस्तावित योजना अर्थात असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना में मृत्यु होने पर 1 लाख व दिव्यांग होने पर 50 हजार देने का प्रावधान है। यह सीधे-सीधे गरीब आदिवासियों के आर्थिक कमर तोड़ने वाला काम है। अग्रवाल ने राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता श्रमिकों के लिए श्रम विभाग द्वारा प्रस्तावित  किए जा रहे योजना को नाकाफी बताते हुए कहा कि श्रम विभाग की योजना असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना सहायता योजना है जबकि पूर्व शासन में जो बीमा होता था वह बीमा-सुरक्षा योजना है। सहायता योजना शासन के परिस्थितियों पर निर्भर है जबकि बीमा योजना विधि अधिनियम अनुसार संचालित है जिसमें बीमित को संवैधानिक संरक्षण है। उन्होंने प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि नवीनीकरण के चलते बीमा नहीं होने के कारण अभी तक घटित घटनाओं पर पीड़ित संग्राहकों का क्या होगा ? सरकार जवाब क्यों नहीं देती।

अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार बार-बार श्रम विभाग की असंठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा योजना को लागू करने की बात कर रही है वह योजना पूर्व में भी वन विभाग की बीमा योजना के साथ ही साथ लागू था, और प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहक जिन्होंने श्रम विभाग में भी पंजीयन कराया था, उसे इस योजना का वन विभाग की योजना के साथ ही लाभ मिल रहा था। अब अधिकारी वन विभाग, आदिवासियों तथा जनता के दबाव में अपने बचाव के लिए जो यह प्रस्तावित  योजना जो बता रहे है, उसमें जिन आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ता की मौत होगी उसे एक लाख रुपए देने का प्रावधान रखा गया है, दिव्यांग होने पर 50 हजार रुपए देने का प्रावधान रखा गया है। पहले भाजपा सरकार में तेंदूपत्ता संग्राहकों का जो बीमा था, उसमें आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहक की सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख रुपए और दुर्घटना मृत्यु होने पर 4 लाख रुपए देने का प्रावधान था, श्रम विभाग के माध्यम से जो आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं को योजना के लिए सूची देने का निर्णय लिया गया है, उसमें एक षड्यंत्र के तहत साईकिल देने का भी प्रावधान रखा गया है।

अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। बहुत जल्द 13 लाख तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं को उनके बीमा कराने के लिए श्रम विभाग के माध्यम से प्रक्रिया प्रारंभ करने की बात कह रहे हैं, जबकि श्रम विभाग के पास पहले ही अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले असंगठित मजदूर लोगों का 12 लाख लोगों का बीमा करने की प्रक्रिया चालू है, और उसमें भी 1000 असंगठित मजदूरों की मृत्यु हो चुकी है, अभी हाल ही में श्रम विभाग की हुई एक बैठक में उन मृतक श्रमिकों का जो भुगतान शेष है, वह नहीं होने के कारण बैठक में नाराजगी व्यक्त की गई थी। 12 लाख असंगठित मजदूरों के बीमा के लिए विभिन्न कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किया गया है। जो विचाराधीन है। श्रम विभाग तो अपना ही मूल कार्य नहीं कर पा रहा है। फिर इन आदिवासी तेंदूपत्ता संग्राहकों का क्या होगा?

27-07-2020
ग्राम मयूरडोंगर एवं चारगांव में वनाधिकार पट्टे से प्राप्त 283 एकड़ की भूमि में साकार हुई विकास की परिकल्पना

कोण्डागांव। सघन वनों से घिरे हुए आदिवासी बहुल गांव मयूरडोंगर और चारगांव में दो या तीन वर्ष पहले वनाधिकार पट्टेधारी कृषक अपने पट्टे से प्राप्त कृषि भूमियों में पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही धान की काश्तकारी एवं वनोपज पर निर्भर होकर अपना जीवन यापन कर रहे थे। यूं तो स्थानीय ग्रामीणों का जल एवं जंगल से प्राकृतिक नाता सदियों से है। इन्हीं वनों और वनाधिकार से प्राप्त कृषि भूमि में विकास की सम्भावनाओं को देखकर स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा वर्ष 2017-18 में चारगांव एवं मयूरडोंगर को वृहत्तर कार्ययोजना में शामिल किया गया। इसके अन्तर्गत इन दोनो ग्रामोें में वनाधिकार पट्टाधारी कृषकों को कृषि, उद्यानिकी, क्रेडा, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग की समस्त योजनाओं से एक साथ लाभांवित करने का निर्णय लिया गया ताकि वनाधिकार पट्टों के तहत् विकास के नये माॅडल के रूप में इन्हें स्थापित किया जा सके।

दो वर्षों में बदल गयी ग्रामों की तस्वीर
वर्तमान में इन ग्रामों को देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि जो गांव पहले बीहड़ की श्रेणी में आते थे आज वहां जगह-जगह मत्स्य पालन के लिए तालाब, कुकुट एवं पशुपालन के लिए शेड, सिंचाई के लिए सोलर ऊर्जा की ईकाईयों की एक श्रृंखला क्रमवार परिलक्षित होती है। इस क्रम में वृहत्तर कार्ययोजना के तहत् ग्राम चारगांव के 27 वनाधिकार पट्टाधारी कृषक परिवारों का चयन करके उनके 168 एकड़ भूमि में फैन्सिंग तार से घेराव कर बोरवेल खनन कराये गये ताकि सभी कृषक परिवारों के पास कम से कम तीन फसलीय कृषि का विकल्प रहे। साथ ही उद्यानिकी विभाग के माध्यम से खेतों के मेड़ो में मुनगा, नारियल, आम के पौधों का रोपण भी किया गया। इसी प्रकार ग्राम मयूरडोंगर में भी चयनित वनाधिकार पट्टाधारी 28 कृषक परिवारों के 115 एकड़ भूमि को तारों द्वारा सुरक्षित कर 08 बोरवेल खनन किया गया। साथ ही इसी भूमि में 10 तालाब और 37 भूमि मरम्मत के कार्य भी प्रारम्भ हुये। वर्तमान में यहां 20 तालाब और 25 कुकुट शेड का निर्माण हो चुका है। साथ ही सिंचाई के लिए ट्यूबवेल बोरखनन, ड्रिप स्प्रिंकलर के माध्यम से आधुनिक खेती की शुरूआत भी की जा चुकी है। साथ ही इन वनाधिकार पट्टाधारी चयनित परिवार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से पोल निर्माण जैसे रोजगार परक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस संबंध में ग्राम मयूरडोंगर के कृषक जयसिंह का कहना था कि सौर ऊर्जा पम्प के कारण उसके खेत आज सिंचाई सुविधा से युक्त हुये और उसकी वर्षो की साध पूरी हुई। क्योंकि गर्मियों में जो खेत सूखे और बंजर रहते थे अब उन्हीं खेतों में खरीफ के बाद रबी की फसल भी हो सकेगी। इसके लिये उसे उद्यानिकी विभाग से मुनगा और आम के उन्नत पौधे एवं कृषि विभाग की ओर से निःशुल्क दिये गये। इसके साथ ही उसके जैसे अन्य वनाधिकार पट्टाधारी 13 कृषकों के खेत में भी सौर सुजला योजना के तहत् सोलर पम्प लगाये गये हैं। इसी प्रकार ग्राम चारगांव में भी माॅ शीतला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष सुमित्रा बाई की अगुवाई में समूह द्वारा हरी सब्जियों के उत्पादन का जिम्मा उठाया गया है। और कृषि विभाग की सहायता से मूंगफल्ली, धनिया जैसे हरी सब्जियों की क्यारियां लगाई गई है।

21-07-2020
मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक स्थगित

रायपुर। मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक स्थगित कर दी गई है। प्राधिकरण की बैठक 22 जुलाई को शाम चार बजे चिप्स कार्यालय रायपुर में होनी थी। वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग से होने वाली यह बैठक अपरिहार्य कारणों से स्थगित कर दी गई है।

19-07-2020
सरकार के निकम्मेपन के कारण राज्यपाल को हस्तक्षेप करना पड़ा : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य सरकार पर आदिवासी, जनजाति विरोधी होने का आरोप लगाया है। बृजमोहन ने कहा है कि, कांग्रेस सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाले सुरक्षा और सुविधा मूलक योजनाओं को एक-एक कर  बंद कर दिया है। बीमा की अनेक योजनाएं बंद कर दी गई हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनका हक उनका खुद का पैसा 2 सीजन का बोनस नहीं दिया गया है। प्राथमिक समितियों को लाभांश नहीं दिया गया है। दो सत्रों से छात्रवृत्ति योजना की राशि बच्चों को नहीं मिली है। प्रदेश में 13 लाख 50 हजार संग्राहक संख्या है। संग्राहक परिवारिक सदस्यों की संख्या 18 लाख 38 हजार है। इसमें सर्वाधिक संख्या वनांचल में रह रहे आदिवासी समाज के लोग हैं। इन सब के लिए कांग्रेस सरकार ने एक भी बीमा योजना चालू नहीं की है, बल्कि पूर्व में भाजपा सरकार में चल रही योजनाए भी इस सरकार की लापरवाही की बलि चढ़ गई व बंद हो गई है। शासन, आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं और संस्थाओं के 1000 करोड़ से भी अधिक की राशि बैंक में जमा कर ब्याज कमा रही है।

इसमें 597 करोड़ रुपए आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहणकर्ताओं को वितरित करने वाली राशि है,लेकिन कांग्रेस सरकार आदिवासी तेंदूपत्ता संग्रहकों को न तो बोनस दे रही है, न उनका बीमा करा रही है और न ही उनके बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति जारी कर रही है। अपने हक के पैसे के लिए आदिवासी समाज दर दर भटक रहा हैं। पूरी सरकार मूकदर्शक की भूमिका में है। सरकार के निकम्मेपन के कारण  इस विषय में राज्यपाल को नाराजगी व्यक्त करनी पड़ी है। संस्था के उन समितियों और संग्राहकों को कम से कम अभी तो कोविङ आपदा के समय में मानवीय आधार पर बोनस राशि का वितरण तत्काल प्रभाव से कर देना चाहिए। सिर्फ ब्याज प्राप्त करने के लिए राशि रोककर रखना उचित नहीं है। प्राथमिक समितियों को लाभांश की राशि भी सरकार नहीं दे रही है। 31 मार्च 2019 की स्थिति में उक्त राशि 432 करोड़ रुपए है। बीमा योजना के संबंध में जानबूझ कर की गई लापरवाही के कारण लाखों आदिवासी संग्राहक परिवारों का भी हित प्रभावित हुआ है। तेंदूपत्ता के बोनस नहीं मिल पाने के कारण आदिवासी परिवारों के सामने इस कोरोना काल में आर्थिक संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। आदिवासी हितों का ढ़िढोरा पीटने वाली कांग्रेस सरकार प्रदेश के आदिवासी, जनजाति परिवार के साथ अन्याय कर रही है। आदिवासी हितों के लिए भाजपा की पूर्व सरकार की सारी योजनाएं बंद कर दी गई है।

24-06-2020
छात्रों को अब नहीं होगी रहने की असुविधा, नगरी में बन रहा है आदिवासी छात्रवास

 धमतरी। कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य ने बुधवार को नगरी विकासखंड के विभिन्न क्षेत्र का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने नगरी में बनाए जा रहे 250-250 सीटर आदिवासी कन्या और बालक छात्रावास का निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग द्वारा 7 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे तीन मंजिला आदिवासी कन्या छात्रावास का मुआयना कर इस भवन के डिजाइन को काफ़ी सराहा। यहां कुल 125 कमरे, एक डाईनींग कक्ष, एक किचन, एक रिक्रिएशन कक्ष है। इसके साथ ही वाश बेसिन इत्यादि स्थल भी काफ़ी अच्छे से बनाया गया है। इसे कलेक्टर ने काफी सराहा। इसके साथ ही दो मंजिला आदिवासी बालक छात्रावास का भी मुआयना कलेक्टर ने कर , इसकी भी सराहना की। यह दोनों भवन 7-7 करोड़ की लागत से तैयार किए गए हैं। दोनों भवनों के निकट में स्टाफ कक्ष भी बनाया गया है। इससे पहले कलेक्टर ने मुकुंदपुर में हाउसिंग बोर्ड द्वारा बनाए जा रहे जी ए डी कॉलोनी का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश अधिकारियों को दिए। यहां एफ टाइप 6, जी टाइप 18 और एच टाइप 20 क्वार्टर बनाए गए हैं। कलेक्टर ने जल्द से जल्द इसे लोक निर्माण विभाग को हैंड ओवर करने के निर्देश दिए। मौके पर एसडीएम नगरी सुनील शर्मा, कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण श्री ध्रुव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

11-06-2020
राज्यपाल ने प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों से कहा, आदिवासी वनों के संरक्षक है

रायपुर।  अखिल भारतीय वन सेवा (2018 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राज्यपाल अनुसुईया उइके से राजभवन में भेंट की। राज्यपाल ने कहा कि आदिवासियों की आजीविका वनों से जुड़ी हुई है और वे वनों के संरक्षक भी हैं। अतः उनके साथ अत्यंत संवेदशीलता और सकारात्मक सोच के साथ व्यवहार किया जाना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के साथ ही अत्यधिक वनाच्छादित प्रदेश भी है। राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य में वन अधिकार मान्यता पत्र देने में अच्छा कार्य हुआ है। साथ ही सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र दिये जाने के संबंध में भी और ठोस कार्य किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में अनेकानेक वनौषधियां पाई जाती हैं। इनका संरक्षण किया जाना चाहिए। इसे आदिवासियों के आय का जरिया भी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुछ क्षेत्र पांचवी अनुसूची के तहत भी आते हैं। अतः अधिकारियों के समक्ष वनवासियों का जीवन बेहतर करने और वनों को संरक्षित करने की चुनौतियां भी रहेंगी। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के जरिए वनों के संरक्षण और संवर्धन अच्छे प्रयास किये जा रहे हैं। राज्यपाल को प्रशिक्षु अधिकारियों ने बागवानी संबंधी पुस्तकें भेंट की। अधिकारियों को राजभवन की काफी टेबल बुक ‘नई सोच-नई पहल’ की प्रति भेंट की गई। इस अवसर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राज्यपाल के सचिव सोनमणि बोरा उपस्थित थे।

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