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02-12-2020
कौशिक ने कहा, किट्स परियोजना में ठगे गए बस्तर के आदिवासी किसान, केंद्र सरकार की राशि की हुई बंदरबांट

रायपुर। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने बस्तर में आदिवासी किसानों को सीधे-सीधे लाभ पहुँचाने वाली केंद्र सरकार की योजनाओं में बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार के ख़ुलासे पर हैरत जताते हुए प्रदेश सरकार और उसके प्रशासन तंत्र की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। कौशिक ने कहा कि आदिवासियों और किसानों के नाम पर घड़ियाली आँसू बहाने वाली प्रदेश सरकार की नाक के नीचे आदिवासी बहुल बस्तर में भ्रष्टाचार के कारण आदिवासी किसान खुलेआम ठगे गए हैं। कृषि और उद्यानिकी विभाग के साथ-साथ अब आदिवासी विकास विभाग और जनपद पंचायतों ने भी भ्रष्टाचार का सारी सीमाएँ लांघ दी हैं। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश के दावे करने वाली प्रदेश सरकार अब पूरी तरह से बेनक़ाब हो चुकी है। बस्तर में नेताओं,आपूर्तिकर्ताओं और अफ़सरों ने मिलकर कमीशनख़ोरी की ऐसी शर्मनाक मिसाल पेश की है कि किसानों को वितरित किए जाने वाले सब्जी बीज के किट्स तक को भी उन्होंने नहीं छोड़ा और 16.5 हज़ार रुपए मूल्य के इन किट्स पर कमीशनखोरों ने ऐसी नज़र गड़ाई कि आख़िर में इन सब्जी उत्पादक किसानों के हिस्से में सिर्फ़ एक हज़ार रुपए के बीज ही आ पाए। कौशिक ने कहा कि जिस सुनियोजित तरीके से इस ठगी को अंजाम दिया गया है, उससे यह संदेह पुख़्ता होता है कि भ्रष्टाचार के इस शर्मनाक सिलसिले को प्रदेश सरकार का राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, क्योंकि ये किट्स परियोजना सलाहकार मंडल के अध्यक्ष के नाते स्वयं कांग्रेस सांसद दीपक बैज ने मई-जून में बाँटे थे।

कौशिक ने कहा कि बस्तर में एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना मद में केंद्र सरकार से आने वाली राशि से आदिवासियों-किसानों के बजाय नेता-अफ़सर-सप्लायर अपनी तिजोरियाँ भरने में लगे हैं और प्रदेश सरकार और उसके सियासी मोहरों को न तो यह नज़र आया और न ही उनके कानों पर जूँ तक रेंगी। कौशिक ने कहा कि जिस परियोजना के सलाहकार मंडल के अध्यक्ष सांसद हो और विधायक सदस्य हो, उसमें इतने बड़े पैमाने पर मची लूट प्रदेश सरकार के कलंकित कार्यकाल का एक और काला अध्याय है। कौशिक ने कहा कि बस्तर ज़िले की सभी सात जनपद पंचायतों में लगभग 700 किसानों को 1.15 करोड़ रुपए के बीज बाँटे जाने की बात कही जा रही है, जबकि प्रति किसान दिए गए बीजों की कीमत बाज़ार में एक हज़ार रुपए आँकी जा रही है। इधर ये बीज 16.5 हज़ार रुपए में ख़रीदे जाने की बात सामने आई है। कौशिक ने कहा कि आदिवासी किसानों तक सिर्फ़ 10 लाख रुपए के बीज ही पहुँचे और और शेष एक करोड़ रुपए से ज़्यादा कमीशनखोरों ने हज़म कर लिया। भ्रष्टाचार को अंजाम देने सभी जनपदों में एक ही सप्लायर की दो फर्मों को यह काम सौंपा गया और उसमें भी तमाम क़ायदे-क़ानूनों को ताक पर रखा गया। कौशिक ने केंद्र सरकार से मिली राशि की इस बंदरबाँट को आदिवासी किसानों के साथ खुली धोखाधड़ी बताते हुए इसके बारे में तत्काल केंद्र सरकार को अवगत करा प्रदेश सरकार और उसके प्रशासन तंत्र के ख़िलाफ़ कारग़र कार्रवाई करने की बात कही है।

 

27-11-2020
अब कुंए तक नहीं जाना पड़ता सुलोचिनी देवी को, खुद कुंए को उसके पास जाना पड़ा, भूपेश बघेल है तो सम्भव है

रायपुर/बैकुण्ठपुर। गांव की मुख्य सड़क से दूर घर बनाकर रहने वाले एक आदिवासी परिवार के लिए दैनिक उपयोग का पानी और पेयजल की आपूर्ति दोनों एक बड़ी चुनौती बन गए थे। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2017 हमर गांव हमर योजना के तहत पहुंचे दल को समस्या बताकर उसका निदान पाने वाले इस परिवार को महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत मिले कुंए ने दोनों समस्याओं से निजात दिला दी। सुलोचिनी देवी का परिवार अब संयुक्त रूप से अपने दैनिक उपयोग के लिए कुंए का बारहमासी उपयोग कर रहा है  और अब यह परिवार अपने कुंए के आसपास के खेतों में मेहनत कर रबी की फसल में खाली रहने वाली बाड़ी व खेतों में आलू प्याज टमाटर मूली जैसी सब्जी लगाकर हर साल 25 से 30 हजार रुपए की अतिरिक्त आमदनी भी कमाने लगा है। मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांव बिछली जो कि ग्राम पंचायत डंगौरा का एक आश्रित गांव है वहां सुलोचिनी का परिवार रहता है। इस परिवार में सुलोचिनी देवी के पुत्र सुखीरामए गजरूप सिंह और रामधन का परिवार के कुल 17 सदस्य एक साथ रहते हैं। यहां उनके घर के आसपास लगभग 3.4 एकड़ कृषि भूमि है जो कि केवल बारिष पर ही आश्रित खेती के लिए है।

तीन वर्ष पूर्व ग्राम पंचायत में हमर गांव हमर योजना के तहत पहुंचे दल के सदस्यों को इस परिवार ने अपनी प्रमुख समस्या जल के बारे में अवगत कराया। ग्राम पंचायत में कार्यों की सूची बनाने के दौरान इस परिवार के लिए कुंए की मांग को सूचीबद्ध किया गया और ग्राम सभा के प्रस्ताव के आधार पर जिला पंचायत से वर्ष 2017 में ही इनके लिए एक लाख 80 हजार का कुंआ स्वीकृत किया गया। तकनीकी सहायक अंजु रानी के देखरेख में वर्ष 2018 में जनवरी माह से इस कुंए का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ और जून में पूरा कर लिया गया। उन्होने बताया कि इस परिवार के सदस्यों को मिलाकर कुल अलग अलग तीन जाब कार्ड हैं जिनमें से 8 सदस्यों ने इस कुंए में काम करते हुए लगभग 43 हजार सात सौ रूपए मजदूरी के रूप में भी प्राप्त किए। सुलेाचिनी देवी अब काफी वृद्ध हैं। उनके परिवार के बेटे सुखीराम ही खेती बाड़ी और घर की जिम्मेदारी सम्हालते हैं। सुखीराम ने बताया कि कुंए के बनने से बड़ा लाभ होने लगा। सबसे ज्यादा समस्या तो बरसात में पेयजल के लिए होती थी। वह अब कुंए के बन जाने से समाप्त हेा गई है। साथ ही पूरे परिवार के दैनिक उपयोग के लिए भरपूर पानी हमेषा उपलब्ध रहता है। धान की फसल के बाद हम कुछ नहीं कर पाते थे दूसरे के काम करने के लिए या फिर मनरेगा के तहत मजदूरी करने जाना ही एकमात्र विकल्प था। लेकिन कुंआ बन जाने से अब धान की फसल के ठीक बाद सरसाें आलू मटर जैसी कम पानी खपत वाली फसलें लगा लेते हैं। इसके साथ ही सब्जी की खेती करने से 25 से 30 हजार रुपए मिल जाते हैं। इस साल सुखीराम ने पहले ही मूली और लालभाजी की फसल लगा ली थी जिसे बेचकर वह 9 हजार रुपए कमा चुके हैं। साथ ही उनके दूसरे खेत में भी मूली की फसल तैयार हो रही है। मनरेगा के तहत कुंआ बन जाने से अब सुलोचिनी देवी का यह परिवार अब पेयजल और सिंचाई के छोटे से साधन के रूप में कुंए से अपनी दैनिक जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर हो गया है।

25-11-2020
सरकार का आदिवासी विरोधी चरित्र फिर जगजाहिर, न्यायिक जांच कर दोषियों को सख्त सजा दिलाएं : विष्णुदेव साय

रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने पुलिस हिरासत में एक आदिवासी सब इंजीनियर पूनम कतलाम की हुई मौत के लिए प्रदेश सरकार और पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है। साय ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार और उसकी पुलिस संवेदनशून्य व निरंकुश होती जा रही है। आदिवास्यों के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ सेंक रही प्रदेश सरकार का आदिवासी विरोधी चरित्र इस घटना से एक बार फिर जगजाहिर हो गया है।  साय ने पुलिस हिरासत में हुई युवा इंजीनियर की संदिग्ध मौत की न्यायिक जाँच कर दोषियों पर हत्या का मामला चलाकर उन्हें सख़्त सजा दिलाने की मांग की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि जबसे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं जिन पर अंकुश पाने में प्रदेश का समूचा पुलिस तंत्र नाकारा साबित हो रहा है और दूसरी तरफ़ जाँच और पूछताछ के नाम पर संदेहियों के साथ पुलिस इस तरह पेश आ रही है कि संदेहियों को अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ रहा है।

साय ने कहा कि प्रदेश में गरीब, मजदूर, आदिवासी और महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों पर पुलिस काबू नहीं पा सक रही है और आम निर्दोष लोगों के साथ ही संदेह के आधार पर पूछताछ के नाम पर पुलिस संगठित प्रताड़ना का ऐसा दौर चला रही है कि प्रदेश एक तरफ़ अपराधियों और दूसरी तरफ़ पुलिस की दहशत के साए में जीने को मज़बूर नज़र आ रहा है। साय ने कहा कि सूरजपुर ज़िले की लटोरी पुलिस चौकी में मृत सब इंजीनियर कतलाम के परिजनों ने पुलिस पर संदेही कतलाम के साथ बेदम पिटाई करने का आरोप लगाया है जबकि पुलिस अब इस मामले पर भी लीपापोती करने में जुट गई है। पुलिस मृतक को पहले से ही बीमार होना बताकर अपना पल्ला झाड़ रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष साय ने कहा कि प्रदेश सरकार और उसकी नौकरशाही ने हाल के महीनों में घटी आत्महत्या या आत्मगात की कोशिश के मामलों में मृतकों या पीड़ितों के बीमार व मानसिक असंतुलन की बात करके ऐसे मामलों की गंभीरता को कम करके आँका है। यह रवैया सरकार की जनविरोधी कार्यप्रणाली का परिचायक है और भाजपा सरकार के इस नज़रिए को निंदनीय मानती है। साय ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी व परिजनों की मौज़ूदगी में मृतक के पोस्टमार्टम पर ज़ोर देकर कहा कि इस घटना की परिस्थितियों के मद्देनज़र जाँच कर पीड़ित परिवार को मुआवजा, एक सदस्य को तत्काल सरकारी नौकरी देने और न्याय दिलाने की मांग की है।

06-11-2020
गोबर के दीयों से घर होगा रोशन,महिला समूह आमदनी बढ़ाने बना रहे गोबर के दीये

रायपुर। कोरोना काल की परिस्थितियों का डटकर मुकाबला करने वाली महिला समूहों ने अपनी आमदनी जुटाने के लिए गोबर से नये विकल्प तलाश लिए हैं। किसी ने गोबर से इतने बेहतर उपयोग सामग्री के बनाने के बारे में सोचा भी न होगा, जो इन ग्रामीण महिलाओं ने कर दिखाया है। प्रदेश के सुदूर आदिवासी जिले नारायणपुर में महिमा स्वच्छता समूह की महिलाओं ने दीपावली में घरों को रोशन करने हाथों से तराश कर इकोफ्रेंडली गोबर के दीये तैयार किये हैं। इन दीयों को जलने के बाद गमलों में डालकर खाद की तरह भी उपयोग किया जा सकता है। गोबर से बने दीये को बेचने कलेक्टोरेट में स्टॉल लगते ही बड़ी संख्या में लोगों इन दीयों की खरीदारी की। समिति की महिलाओं ने बताया कि वे दीये के अलावा गमला, खाद एवं गोबर के लकड़ी बनाने के काम में भी जुटी हुई है। उन्होंने अभी तक 15 हजार दीये तैयार किये है, जिन्हें बाजारों में विक्रय किया जाएगा।

दीपावली की सामग्री स्थानीय छोटे-छोटे विक्रेताओं से खरीदकर जरूरतमंदों की मदद की जा सकती है। छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना और गोधन न्याय योजना से भी महिलाओं को काफी मदद मिली है। गांव में ग्रामीणों एवं महिलाओं को रोजगार के साथ ही उनकी आय में इजाफा होने लगा है। गौठानों से जुड़ी महिला समूह अब बड़े पैमाने पर वर्मी खाद के उत्पादन के साथ साथ अब गोबर से अन्य उत्पाद बनाने लग गए हैं और विक्रय कर इससे आमदनी अर्जित करने लगी है। गोधन न्याय योजना के कारण अब गौठानों में गोबर की आवक बढ़ गई है। इसका लाभ गौपालकों, किसानों और ग्रामीणों को भी मिलने लगा है। गाय के गोबर से शुद्धता के साथ बनाये गये ये सभी सामान पूजा के लिए उपयोगी हैं। नगरपालिका और गांवों की कई महिलाएं इस कार्य मे जुटी है। उन्होंने अब धीरे धीरे बाजार में अपनी धाक जमाना शुरू कर दिया है।

 

23-10-2020
जनसमस्याओं को लेकर क्षेत्रवासियों ने राज्यपाल के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। जिले के कुटरू क्षेत्र की जनसमस्याओं को देखते हुए समस्त क्षेत्रवासियों ने राज्यपाल के नाम बीजापुर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इसमें 14 क्षेत्रीय जनसमस्या का निराकरण की मांग की गई। क्षेत्रवासियों ने कहा कि कुटरू क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। आदिवासी बहुल इलाकों में होने वाले काम सिर्फ कागजों में ही किए जाते हैँ। बुनियादी सुविधाएं क्षेत्र को नहीं मिल रही। क्षेत्रवासियों ने कहा कि हमारी मांगे शासन प्रशासन द्वारा पूर्ण नहीं किये जाने पर मजबूर होकर आंदोलन के बाध्य होंगे,जिसकी पूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होंगी। ज्ञापन सौंपने के दौरान ज़िला सीपीआई सचिव कमलेश झाडी,कोवाराम,प्रकाश कुमार,रमेश कुमार पोंदी व बोज्जा राम, सोमनपल्ली व लोकेश कुमार बारसे आदि उपस्थित थे।

 

22-10-2020
जिंदगी को रेशम की तरह बना रहे रेशमी, कोसाफल उत्पादन से कमाए ढाई लाख रुपए

बीजापुर। करीब 6 साल पहले बीजापुर जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय कोसा बीज केन्द्र, नैमेड़ में लगे साजा और अर्जुन के पेड़ों पर रेशम के कीड़ों का पालन और कोसाफल उत्पादन का काम करने वाले आयतू कुड़ियम कुछ साल पहले तक अपने खेत में खरीफ की फसल लेने के बाद सालभर मजदूरी की तलाश में लगे रहते थे फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। यही वजह रही कि आज वह न सिर्फ कुशल कीटपालक के तौर पर कोसाफल उत्पादन कर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं, बल्कि गांव के 4 अन्य मनरेगा श्रमिकों को भी रेशम कीटपालन में दक्ष बनाकर कोसाफल उत्पादन से उनके जिंदगी को रेशम की तरह रेशमी बना रहे हैं।छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले का यह आदिवासी किसान अब ग्राम पंचायत नैमेड़ में स्थित रेशम विभाग के शासकीय कोसा बीज केन्द्र कीटपालक समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए कीटपालन और कोसाफल का उत्पादन व संग्रहण  का कार्य कर रहा है।

कुशल कीटपालक बनने के बाद पिछले 3 सालों में आयतू को लगभग ढाई लाख रूपए की अतिरिक्त आमदनी हुई है। रेशम विभाग के सहायक संचालक राम सूरत बेक बताते हैं कि शासकीय कोसा बीज केन्द्र नैमेड़ में वर्ष- 2008-09 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत 3 लाख 44 हजार रूपए की लागत से 28 हेक्टेयर में लगभग 16 हजार 800 साजा और इतनी ही संख्या में अर्जुन के पौधे रोपे गए थे। आज ये पौधे लगभग 10 फीट के हरे-भरे पेड़ बन चुके हैं।बेक आगे बताते है कि विभाग के द्वारा यहां रेशम के कीड़ों का पालन कर कोसाफल उत्पादन का कार्य करवाया जा रहा है। साल 2015 में आयतू ने विभागीय कर्मचारी की सलाह पर यहां श्रमिक के रूप में काम करना शुरू किया था और अपनी सीखने की ललक के दम पर धीरे-धीरे कोसाफल उत्पादन का प्रशिक्षण लेना भी शुरू कर दिया था।

सालभर में वह इसमें पूरी तरह से दक्ष हो चुका था। वर्ष 2016 में उसने गांव के चार मनरेगा श्रमिकों को अपने साथ समूह के रूप में जोड़ा और यहां पेड़ों का रख-रखाव के साथ कीटपालन और कोसाफल उत्पादन का कार्य शुरू कर दिया। इनके समूह के द्वारा उत्पादित कोसाफल को विभाग के कोकून बैंक के माध्यम से खरीदा जाता है। जिससे इन्हें सालभर में अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। कुशल कीटपालक बनने के बाद कोसाफल उत्पादन से मिली नई आजीविका से जीवन में आये बदलाव के बारे में आयतू कहते हैं कि आगे बढ़ने के लिए मेने मन में खेती-किसानी या मजदूरी के अलावा कुछ और भी करने का मन था। रेशम कीटपालन के रूप में मुझे रोजी-रोटी का नया साधन मिला है। मनरेगा से यहां हुए वृक्षारोपण से फैली हरियाली ने मेरी जिंदगी में भी हरियाली ला दी है। कोसाफल उत्पादन से जुड़ने के बाद अब मैं अपने परिवार का भरण-पोषण अच्छे से कर पा रहा हूं और अपने 3 बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रहा हूँ।

 

18-10-2020
आदिवासी कांग्रेस प्रमुख ने नकली प्रमाण पत्र वालों के नामांकन निरस्त करने का किया स्वागत

रायपुर। छत्तीसगढ़ आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने मरवाही विधानसभा उपचुनाव में नकली प्रमाण पत्र वालों के नामांकन निरस्त किए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। अमरजीत भगत सहित शिक्षा मंत्री डॉक्टर प्रेमसाय सिंह, उद्योग मंत्री कवासी लखमा और कांकेर विधायक शिशुपाल शोरी ने कहा है कि आदिवासी समाज लगातार इस बात के लिए मांग करता रहा। असली आदिवासियों को ही आदिवासियों के हितों का लाभ मिले। विश्व आदिवासी दिवस और आदिवासी समाज के अनेक सम्मेलनों और कार्यक्रमों में आदिवासी समाज लगातार मांग करता रहा है कि वास्तविक आदिवासियों को ही आदिवासियों के लिए हितों का लाभ मिलना चाहिए। जो नकली आदिवासी आदिवासियों के हितों पर नौकरी से लेकर राजनीति तक नाजायज रूप से लाभ लेते रहे हैं, उस पर रोक लगनी चाहिए। आज मरवाही उपचुनाव में नकली जाति प्रमाण पत्र वालों के नामांकन रद्द किए जाने की घटना इस दिशा में एक बड़ा फैसला है, जिसका आदिवासी समाज स्वागत करता है।

16-10-2020
वनाधिकार आवेदनों की पावती नहीं दिए जाने पर सैकड़ों आदिवासियों ने किया पंचायत का घेराव 

कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के बैनर तले कोरबा जिले के पाली विकासखंड के रैनपुर खुर्द ग्राम पंचायत का घेराव करके सैकड़ों आदिवासी धरने पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि वनाधिकार दावे का आवेदन लेकर उन्हें पावती दी जाए और पंचायत, सरपंच व सचिव न आवेदन लेने को तैयार है, न पावती देने को। ग्रामीणों ने इस इंकार को लिखित में देने की मांग को भी नकार देने के बाद ये ग्रामीण पंचायत कार्यालय का घेराव करके धरने पर बैठ गए हैं। पंचायत के अंदर न किसी को जाने दिया जा रहा है, न कार्यालय से किसी को बाहर निकलने दिया जा रहा है। ग्रामीण जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाने की मांग कर रहे हैं। सुबह 11 बजे से जारी किसान सभा का घेराव इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जारी है और आवेदन लेकर पावती मिलने पर ही आदिवासी ग्रामीण घेराव खत्म करने की बात कह रहे हैं।

पंचायत के इस घेराव का नेतृत्व प्रशांत झा, जवाहर कंवर, दीपक साहू आदि कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि एक ओर जहां राज्य सरकार ने आदिवासियों को वनाधिकार देने के बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं, वहीं वास्तविकता यह है कि वनाधिकार दावों के आवेदन तक नहीं लिए जा रहे हैं या फिर उन्हें पावती ही नहीं दी जा रही है। जबकि वनाधिकार कानून के तहत आवेदन लेना, उसकी पावती देना और दावेदारी निरस्त होने पर आवेदनकर्ता को लिखित सूचना देना अनिवार्य है, लेकिन जिले में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। रैनपुर ग्राम पंचायत का घेराव इसका जीता-जागता सबूत है।

12-10-2020
धान कटाई के पहले मनाया गया चरू त्यौहार

रायपुर/कोंडागांव। जिले के ग्राम बांसकोट में चरू त्यौहार के नाम से यह प्रतिवर्ष धान कटाई के पूर्व मनाया जाता है। इस दौरान गांव के सभी किसान मैदानी जगह पर एकत्र हुए जहां यह त्यौहार मनाया गया। जहां गांव के सभी किसान देवताओं को खुश करने के लिए अपने साथ फूल, चावल, नारियल अगरबत्ती लेकर पहुंचे, कई किसान मुर्गी एवं सूअर भी लेकर आए थे। उल्लेखनिय है कि चरू त्यौहार धान कटाई से पूर्व प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इन दिनों धान की फसल में बालियां निकल चुकी हैं और मरहान की फसल पकने को तैयार है, जिसकी कटाई की तैयारी चल रही है। लेकिन जब तक देवी-देवता का पूजा पाठ नहीं होगा, तब तक धान को खलिहान तक पहुंचाना वर्जित है। इस त्यौहार में आदिवासी ही नहीं बल्कि अन्य समाज के किसान भी शामिल होते हैं।

20-09-2020
राज्यपाल का आग्रह माना कीर्तिश फाउंडेशन की कीर्ति सुधांशु ने,जल्द बाटेंगे छत्तीसगढ़ में निशुल्क सेनेटरी नैपकिन

रायपुर। कीर्तिश केयर फाउंडेशन की ओर से महिलाओं पर केन्द्रित प्रथम प्रोजेक्ट यूनिकॉर्न क्लब के वर्चुअल कार्यक्रम का शुभारंभ किया राज्यपाल अनुसुईया उइके ने। राज्यपाल ने इस कार्य के लिए संस्था को बधाई देते हुए कहा कि इसे एक क्षेत्र में सीमित न रखकर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में भी क्रियान्वित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि मीडिल स्कूल और हाईस्कूल में छात्राओं को महिलाओं के स्वास्थ्यगत समस्याओं और सेनेटरी नेपकिन के उपयोग की जानकारी स्कूली शिक्षा के दौरान देनी चाहिए इससे वे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगी और अपने आप को स्वस्थ रखेंगी। यह अच्छी बात है कि कीर्तिश केयर फाउंडेशन द्वारा शहरी इलाकों के स्लम एरिया और ग्रामीण-आदिवासी इलाकों में सेनेटरी पेड का निशुल्क वितरण किया जाएगा,जो एक महत्वपूर्ण कार्य होने के साथ-साथ मानवीय कार्य भी है।राज्यपाल ने कहा कि वे राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य थी तो आयोग द्वारा देश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सर्वे करने पर यह ज्ञात हुआ था कि उस क्षेत्र में महिलाओं मासिक धर्म के दौरान पुराने कपड़े का उपयोग करती हैं,जिससे उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए जब राष्ट्रीय जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष बनी तब उन्होंने ओएनजीसी संस्था से सीएसआर मद से सेनेटरी नेपकिन का वितरण करने का आग्रह किया।

उन्होंने मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों और स्कूलों में 56 हजार सेनेटरी नेपकिन का वितरण किया।उन्होंने कहा कि गत दिनों फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म पेडमेन के बारे में हमने सुना और देखा भी। वास्तव में यह मुवी रियल हीरो कोयंबटुर निवासी अरूणाचलम मुरूगनाथम की जिंदगी पर बनी थी,जिन्होंने अपने घर और गांव की महिलाओं की परेशानियों को समझा। प्रारंभ में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, कई परेशानियों का सामना करना पड़ा, परन्तु वे हिम्मत नहीं हारे और ऐसी मशीन बनाई, जिससे सस्ती दरों पर सेनेटरी नेपकिन बनाई गई। इससे उन्होंने गरीब और पिछड़े इलाकों में सेनेटरी नेपकिन मुहैया करा सके। वे ऐसा इसलिए कर सके क्योंकि उनके मन में आम व्यक्तियों की पीड़ा को समझने और मदद करने की भावना थी।राज्यपाल उइके ने कहा कि आज हमारा समाज शिक्षित हो रहा है लेकिन यह दुख की बात है कि समाज का एक हिस्सा है,जो ऐसी जानकारियों से अनभिज्ञ है और इस प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए हमें सिर्फ सरकार की ओर ही नहीं देखना चाहिए बल्कि हम सिविल सोसायटी की भी जिम्मेदारी है कि वे आगे आएं और कार्य करें। मैं कीर्तिश केयर फाउंडेशन की संस्थापक कीर्ति सुधांशु को साधुवाद देती हूं, जिनका जन्म स्थान छिंदवाड़ा है और जो विदेश में कार्यरत होने के बावजूद अपने देश के लिए यह कार्य करने का बीड़ा उठाया।कीर्तिश केयर फाउंडेशन की संस्थापक कीर्ति सुधांशु ने संस्था के कार्यों की जानकारी दी और राज्यपाल के आग्रह पर कहा कि उनकी संस्था जल्द ही छत्तीसगढ़ में भी निशुल्क सेनेटरी नेपकिन वितरण और अन्य कार्यों को क्रियान्वित करेगी।

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