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23-11-2020
ग्रामीणों की सोच से मानव-भालू द्वंद्व खत्म, वीरान पहाड़ी पर पौधारोपण कर वन्य प्राणियों का संरक्षण

रायपुर। प्राकृतिक संसाधनों, पारिस्थितिक तंत्र और जल, जंगल व जमीन को सहेजने में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, यह देखना हो तो मसनिया पहाड़ पर उगाए गए पेड़ों के बीच खेलते-कूदते भालूओं के आनंददायक दृश्य का साक्षात्कार करना चाहिए। मनरेगा और वन विभाग की योजनाओं के अभिसरण से वहां न केवल पहाड़ को वृक्षों से आच्छादित किया गया है, बल्कि जल संरक्षण के लिए कई चेकडेम भी बनाए गए हैं। मानव और वन्य प्राणी के सह-अस्तित्व को मानवीय कोशिशों से मजबूत करने का नायाब उदाहरण है। मसनिया पहाड़ और इसके आसपास के क्षेत्र में मनरेगा और वन विभाग से हुए काम। जांजगीर-चांपा जिले के सक्ती विकासखंड के मसनियाकला और मसनियाखुर्द गांव से लगे मसनिया पहाड़ पर कुछ साल पहले तक हरियाली का नामो-निशान तक नहीं था। पेड़-पौधों से वीरान इस पहाड़ी पर खाने-पीने की कमी हुई तो भालू एवं अन्य वन्य प्राणी गांव की तरफ खींचे चले आए। नतीजतन भालू और ग्रामीण बार-बार आमने-सामने होने लगे जिससे कभी भालू तो कभी ग्रामीण घायल हुए। भूख के कारण भालू फसलों को भी नुकसान पहुंचाने लगे। इससे ग्रामीणों में भय व्याप्त रहने लगा और वे इस समस्या से निजात पाने का रास्ता तलाशने लगे।

गांववालों ने आपस में चर्चा कर भालूओं को पहाड़ एवं जंगल में ही संरक्षित करने की योजना बनाई। मसनियाकला ग्राम पंचायत और आश्रित गांव मसनियाखुर्द में ऐसे पौधे लगाने पर विचार किया गया जिससे कि भालूओं को जंगल में ही खाने को मिल जाए और वे गांव की तरफ न आए। इसके लिए मनरेगा और वन विभाग की योजनाओं के अभिसरण से पहाड़ पर पौधारोपण का रास्ता निकाला गया। वर्ष 2017-18 में अगले पांच वर्षों के लिए योजना तैयार कर इसे अमलीजामा पहनाया गया। लगभग 25 एकड़ जमीन पर मिश्रित पौधों का रोपण किया गया जिसमें सागौन, डूमर, खम्हार, जामुन, आम, बांस, शीशु, अर्जुन, केसियासेमिया और बेर के 25 हजार पौधे शामिल थे। इस काम के लिए मनरेगा से 29 लाख 38 हजार रुपए स्वीकृत होने के बाद श्रमिकों ने अपनी सहभागिता निभाते हुए दुर्गम मसनिया पहाड़ी पर पौधे रोपने का काम शुरू किया। यह काम मुश्किल था क्योंकि पौधरोपण के बाद पानी की कमी के चलते अधिक समय तक वह जिंदा नहीं रह पाता था। पानी की समस्या को दूर करने मनरेगा और वन विभाग के अभिसरण से भूजल संरक्षण के लिए करीब दस लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इस राशि से ब्रशवुड चेकडेम, गाडकर चेकडेम, बोल्डर चेकडेक और कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया। श्रमिकों ने कड़ी मेहनत से लगातार पौधों को पानी देकर व फेंसिंग कर पौधों को सुरक्षित रखा।

अच्छी देखभाल से पौधे दो साल में ही वृक्ष की तरह लहलहाने लगे। वहां सागौन के 8015, डूमर के 2975, खम्हार के 1815, जामुन के 2445, आम के 2075, बांस के 1425, शीशु के 1245, अर्जुन के 1275, केसियासेमिया के तीन हजार तथा बेर के 730 पौधों को मिलाकर कुल 25 हजार पौधे रोपे गए। मजदूरों ने कांवर एवं डीजल पंप के माध्यम से इन पौधों की सिंचाई की। पौधों की सुरक्षा के लिए सीमेंट पोल चैनलिंक से 716 मीटर फेंसिंग की गई। पांच सालों की इस कार्ययोजना में पहले साल पौधारोपण और उसके बाद के तीन वर्षों में पौधों के संधारण एवं सुरक्षा कार्य में अब तक कुल 7851 मानव दिवस सीधे रोजगार का सृजन भी हुआ है। इसके लिए श्रमिकों को करीब 14 लाख रुपए का मजदूरी भुगतान किया गया है। वहां मनरेगा अभिसरण से ही निर्मित ब्रशवुड चेकडेम, गाडकर चेकडेम, बोल्डर चेकडेक व कंटूर ट्रेंच से पौधों को भरपूर पानी मिलने से उनकी अच्छी बढ़ोतरी हुई। अभी 10 से 12 फीट तक के पेड़ वहां नजर आने लगे हैं। भू-जल संरक्षण से अब भालूओं को पहाड़ी पर ही पानी मिलने लगा है। 

जामवंत परियोजना से भालू रहवास एवं चारागाह विकास : राज्य कैम्पा मद से जामवंत परियोजना के तहत क्षेत्र को विकसित करने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में 48 लाख रुपए स्वीकृत किए गए। इस राशि से वहां जलस्रोत के विकास के लिए तालाब एवं डबरी बनाया गया है। भालू रहवास एवं चारागाह विकास के लिए छायादार व फलदार 13 हजार 200 पौधे रोपे गए हैं। इनमें बेर, जामुन, छोटा करोंदा, बेल, गूलर, बरगद, पीपल, सतावर, केवकंद, जंगली हल्दी और शकरकंद के पौधे शामिल हैं। भालूओं को दीमक अति प्रिय है। इसलिए क्षेत्र में दीमक सिफिंटग (भालू के लिए उपयोगी) को भी यहां स्थापित किया गया है। वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव कहती हैं कि जल, जंगल और जमीन को बचाने से ही प्रकृति का संतुलन बना हुआ है। मनरेगा और वन विभाग के तालमेल से मसनिया पहाड़ी में इस दिशा में अहम काम हुआ है। पहाड़ पर पौधारोपण और जल संग्रहण से वन्य प्राणी खासकर भालू स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। 

मानव-भालू द्वंद्व के बजाय सह-अस्तित्व : मसनियाकला के सरपंच संजय कुमार पटेल बताते हैं कि पौधरोपण के बाद से इस क्षेत्र की रंगत बदल गई है। मनरेगा तथा वन विभाग के संयुक्त कार्यों से मानव व भालू के बीच द्वंद्व अब समाप्त हो गया है और वे सह-अस्तित्व की भावना से एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाए बिना साथ मिलकर रहवास कर रहे हैं। फलदार और छायादार पेड़ों ने पहाड़ को न केवल हरियाली की चादर ओढ़ाई है, बल्कि भालूओं को भी संरक्षण प्रदान किया है। भालूओं को किसी से, किसी तरह का कोई नुकसान न हो, इसके लिए गांव में भालू मित्र दल का गठन किया गया है। इस दल की सदस्या भगवती पटेल बताती हैं कि गांव में भालूओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। मसनिया पहाड़ के नीचे पेड़ों के पास भालू अकसर दिख जाते हैं।

08-05-2020
14-15वें वित्त की राशि में बंदरबांट, सीईओ की भूमिका पर उठे सवाल, कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश

बीजापुर। जिले के चारों विकासखंडों में 14-15वें वित्त राशि में बंदरबांट की शिकायत सही पाए जाने पर कलेक्टर केडी कुंजाम ने भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है। इसके साथ ही राशि की वसूली करने और थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, ग्राम पंचायतों में सामाग्री खरीदी के बिल रायपुर,जगदलपुर,दंतेवाड़ा,गीदम व बीजापुर के व्यपारियो द्वारा एडवांस बिल देकर प्रस्ताव मंगाये जा रहे थे। इसमें स्थानीय ठेकेदार,फार्म और जिला पंचायत सीईओ की भूमिका और संलिप्ता बताई गई थी। सीईओ जिला पंचायत ने तमाम आरोपों को बेबुनियाद और झूठा करार दिया है।6 मई 2020 को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2020 से 14-15वें वित्त आयोग अंतर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों को प्राप्त होने वाली राशि का 50 फीसदी निम्न कार्यों में व्यय करने की अनुशंसा की गई है। इसमें 1-पेयजल व्यवस्था, 2-स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, 3- लघु-सिंचाई, 4- सामुदायिक प्रणाली का रखरखाव शामिल है।कलेक्टर बीजापुर ने पत्र के माध्यम से स्पष्ट लिखा है कि कई ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिवों के द्वारा उपरोक्त मद में राशि व्यय न करते हुए क्रिकेट किट, स्पोर्ट्स किट, फोटोकॉपी मशीन इत्यादि में अनावश्यक व्यय कर शासकीय धन का दुरुपयोग कर रहे हैं।

इस आदेश के माध्यम से कलेक्टर ने जनपद पंचयय एवं ग्राम पंचायतों का 14-15वें वें वित्त आयोग योजना के तहत जारी की गई राशि को तत्काल रोक लगाई है और जिन जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों के द्वारा शासकीय धन का दुरुपयोग किया है, उनसे राशि की वसूली करने के साथ-साथ उनके विरुद्ध पुलिस थाने में प्रथम सूचना ( FIR) दर्ज कराते कलेक्टर कार्यालय को अवगत कराने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बीजापुर को पत्र जारी किया गया है।मामले का खुलासा होने के बाद कांग्रेस व भाजपा के नेताओं ने भी तेवर कड़े कर दिए है। कांग्रेस नेता अजय सिंह ने बताया कि राशि की हेराफेरी मामले पर मैंने कलेक्टर को शिकायत की है। कलेक्टर ने मामले को संज्ञान में लेकर 14-15वें वित्त की आहरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। अपने आदेश में कहा कि जहां भी जिस पंचायत में 14वें वित्त की राशि का दुरुपयोग हुआ है। वसूली कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर अवगत कराएं। इससे साफ होता है कि प्रशासन ने माना कि गड़बड़ी हुई है या होने की संभावना थी। भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीनिवास मुदलियार ने कलेक्टर के आदेश को सही माना है। भ्रष्ट्राचार को रोकने और प्राथमिकी दर्ज कराया जाना अनिवार्य है। किसी अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतों के हक को मारना न्यायोचित नहीं है।

 

 

01-05-2020
लॉक डाउन में बैंक सखिया निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका,अब तक 5.35 करोड़ का हो चुका  ट्रांजेक्शन

रायपुर। कोरोना के संक्रमण के डर से शहर और गांव थम से गए हैं। इस आपदा की वजह से लॉक डाउन के कारण लोग घर से नहीं निकल पा रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में भी छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की बैंक सखी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं हैं। राजनांदगांव जिले में लॉक डाउन के दौरान इन बैंक सखियों की ओर से अब तक कुल 5 करोड़ 35 लाख 47 हजार 760 का लेन-देन किया गया है। इसके लिए कुल 32 हजार 748 ट्रांजेक्शन किया गया। इन बैंक सखियों की ओर से फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक सावधानी को अपनाते हुए ग्राम स्तर पर ही ग्रामवासियों को घर पहुंच बैंकिंग सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत जिला राजनांदगांव के 9 विकासखंडों के ग्रामों में कुल 117 बैंक सखी (कियोस्क, मार्को एटीएम एवं डीजीपे) कार्यरत हैं, जिनकी ओर से ग्रामवासियों को ग्राम स्तर पर ही राशि आहरण, जमा, फण्ड ट्रांसफर के साथ-साथ शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत पेंशन हितग्राहियों को पेंशन भुगतान, मनरेगा मजदूरों को मजदूरी भुगतान, जनधन खाता हितग्राहियों, किसान सम्मान निधि के हितग्राहियों और  अन्य हितग्राहियों को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। हितग्राहियों को कोरोना से सतर्कता बरतने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

 

30-04-2020
लॉक डाउन में रिश्तेदारों की भूमिका निभाई स्वास्थ्य अमले ने, जच्चा बच्चा को दे रहे शिशु सुरक्षा किट

रायपुर/सुकमा। जिला अस्पताल सुकमा में माताओं को नवजात शिशु सुरक्षा किट उपहार स्वरूप दिया गया। जैसा कि परंपरा है शिशु के जन्म पर रिश्तेदार, मित्रगण शगुन के रूप में उपहार देते हैं जो शिशु की मंगल कामना के रूप में दिए जाते हैं। इसी तरह नवजात शिशु सुरक्षा किट भी उपहार स्वरूप जिला प्रशासन के स्वास्थ्य अमले की ओर से दिया जाएगा। इससे बच्चे के माता-पिता एक सुखद अनुभव लेकर स्वास्थ्य केंद्र से घर जाएंगे। साथ ही अन्य लोगों को भी संस्थागत प्रसव के अपने इस सुखद अनुभव की जानकारी देंगे। इस नवाचार के तहत जिला अस्पताल सुकमा में स्वास्थ्य सेवाएं बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक डॉ. विवेक जोशी की ओर से माताओं को नवजात शिशु सुरक्षा किट उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। इस अवसर पर जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर सी बी बंसोड़, डीपीएम रोहित कुमार वर्मा सहित अन्य चिकित्सा कर्मी उपस्थित थे।


नवजात शिशु सुरक्षा किट के संबंध में जानकारी देते हुए जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सी बी बंसोड़ ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सूचकांकों को बेहतर करने और संस्थागत प्रसव में वृद्धि के लिए यह नवाचार कलक्टर चन्दन कुमार के मार्गदर्शन में प्राम्भ किया जा रहा है। डॉ. बंसोड़ ने बताया कि गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण जांच, उपचार तथा संस्थागत प्रसव में वृद्धि लाने हेतु यह नवाचार प्रारंभ किया गया है। इसके तहत जिला प्रशासन की ओर से  संस्थागत प्रसव होने पर सभी माताओं को एक नवजात शिशु सुरक्षा किट प्रदान किया जाएगा जिसमें गरम कपड़े, मच्छरदानी, बेबी सोप, तेल, तोलिया और खिलौना आदि रहेगा। इस प्रकार इस किट की सहायता से नवजात शिशु का अच्छे से देखभाल किया जा सकेगा एवं उन्हें किसी प्रकार की संक्रमण से बचाया जा सकेगा। इससे जनमानस में गर्भवती जांच और  संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी, साथ ही जच्चा बच्चा दोनों का सही तरीके से देखभाल किया जा सकेगा।

27-03-2020
लॉक डाउन को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के युवकों ने दिखाई सख्ती,बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध

कांकेर। कोरोना वाईरस को लेकर देश में लॉक डाउन है,जिसका जनता को कड़ाई से पालन कराने कोई कोर कसर जिला प्रशासन द्वारा नहीं छोड़ा रहा है। इसके तहत जिला पुलिस एवं प्रशासनिक अमला सख्त नजर आ रहा तो वहीं आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी गांव के युवक गंभीर नजर आ रहे। इसको लेकर कोदागांव में कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रवेश न करे चार स्थानों में नाकेबंदी की गई।

इसका लोगों को कड़ाई से पालन करने की समझाइश भी दी जा रही है। युवकों द्वारा बताया गया कि गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश करने पर पूरी तरह पाबंदी है। इमरजेंसी में ही गांव के व्यक्ति समय सीमा पर जाकर वापस आ रहे हैं। आने जाने वालों को सेनेटाइजर व हेण्डवाश का भी इस्तेमाल कराया जा रहा है। इस सराहनीय पहल को कोदागांव के जागरूक नवयुवक उप सरपंच बलराम घरत, हेमराज साहू, कुलेश्वर साहू, शैलेन्द्र पटेल, पुष्पेन्द्र साहू, नरेश तुलावी, डिकेश्वर भुआर्य, कौशल गवर्णा,बीरेंद्र रजक, मुकेश साहू,पवन उईके, नारद तेता की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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26-03-2020
कोरोना के खिलाफ जंग में स्वच्छता दीदियों की भूमिका महत्वपूर्ण

अम्बिकापुर। कोरोना वायरस से संक्रमण के खौफ के बीच अम्बिकापुर नगर निगम की स्वच्छता के लिए स्वच्छता दीदियाँ प्रतिबद्ध हैं। वे प्रतिदिन की भाँति सुबह से ही डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए निकल जाती हैं। कोरोना वायरस से बचाव के लिए नगर निगम के द्वारा उन्हें समस्त आवश्यक सेफ्टी किट दिया गया है। सुबह घर से निकलते हुए मास्क, हैंडग्लोवस, हैंडवाश, सैनिटाइजर के साथ पूर्ण सुरक्षा में निकलती हैं। जिला प्रशासन के द्वारा उन्हें आईडी कार्ड के साथ विशेष सुरक्षा प्रदान किया गया है। सुरक्षा की दृष्टि से डस्टबिन को एक-एक मीटर की दूरी में रखने तथा प्रत्येक डस्टबिन उठाने के बाद सैनिटाइजर से हाथ को 20 सेकंड तक धोकर अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख रही हैं। स्वच्छता दीदी जिला प्रशासन द्वारा दिया गया मूलमंत्र स्वच्छता सही तो कोरोना नहीं के तर्ज पर कार्य करते अपना दायित्व बखूबी निभा रही हैं। जिला प्रशासन द्वारा कोरोना वायरस से बचाव एवं रोकथाम के लिए आम जनता को भीड़ भाड़ से दूर रहने, बाहर निकलने पर हैंड सैनिटाइजर, मास्क का उपयोग करने लगातार समझाईश दी जा रही है।

 

17-02-2020
14 साल का वनवास ख़त्म कर घर लौटे बाबूलाल मरांडी, अमित शाह ने माला पहनाकर किया स्वागत

रांची। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी सोमवार को 14 साल का 'वनवास' खत्म कर 'घर वापसी' करते हुए भाजपा में शामिल हो गए। इसके अलावा उन्होंने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) का भाजपा में विलय भी कर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को माला पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। माना जा रहा है कि मरांडी को भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। बता दें कि 2006 में बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में मतभेद होने के बाद पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देकर झारखंड विकास मोर्चा का गठन कर अपनी अलग पार्टी बना ली थी। 14 साल बाद मरांडी सोमवार को दोबारा भाजपा में शामिल हुए।

मरांडी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
विलय के बाद संगठन के स्वरूप और उसमें बाबूलाल मरांडी की भूमिका पर भी चर्चा हो रही है। भाजपा नेताओं ने मरांडी को महत्वपूर्ण दायित्व देने की बात कही, पर मरांडी ने कहा कि वे एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में भाजपा में शामिल होंगे। उन्हें पद की कोई लालसा नहीं। सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व बाबूलाल मरांडी को झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बना सकता है।
 
झाविमों के दो निष्कासित विधायक कांग्रेस में होंगे शामिल
झारखंड विकास मोर्चा से निकाले गए दोनों विधायक प्रदीप यादव और बंधु तीर्की आज कांग्रेस में शामिल होंगे। दिल्ली में कांग्रेस दफ्तर में करीब 3.30 बजे दोनों कांग्रेस में शामिल होंगे। झारखंड कांग्रेस के प्रभारी आरपीएन सिंह की मौजूदगी में दोनों विधायक कांग्रेस का हाथ थामेंगे। हलांकि कांग्रेस में प्रदीप यादव के शामिल होने का विरोध भी हो रहा है। इरफान अंसारी ने प्रदीप यादव के विरोध में कार्यकारी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने का एलान किया है।

05-02-2020
31 मार्च से पहले संपत्ति और जल कर जमा करके बचे अधिभार से : प्रकाश चंद्राकर

महासमुंद। नगर पालिका के राजस्व विभाग में इन दिनों लोग अपने-अपने संपत्ति कर जमा करने स्वस्पूर्त पहुंचने लगे हैं। नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर ने नागरिकों से संपत्तिकर और जल कर 31 मार्च से पहले जमा कर के अधिभार से बचने की अपील की है। चंद्राकर ने कहा कि शहर के विकास में आम जनता की अहम भूमिका होती है। विभिन्न टैक्स से ही शहर में मूलभूत सुविधा जैसे— सड़क, पानी, बिजली सहित सफाई की व्यवस्था की जाती है। बता दें कि राजस्व विभाग की ओर से डोर टू डोर संपर्क कर रहे हैं और संपत्ति कर डिमांड बिल दिया जा रहा है। राजस्व विभाग के प्रभारी देवकुमार निर्मलकर ने बताया कि संपत्ति कर के बड़े बकायादारों की सूची तैयार किया गया है और नियमित रूप से उनसे संपर्क किया जा रहा है। राजस्व प्रभारी निर्मलकर ने कहा कि 31 मार्च 2020 के पहले संपत्ति कर जमा करने से अतिरिक्त अधिभार से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2020 के बाद संपत्ति कर में 10 प्रतिशत और जलकर में 7 प्रतिशत पेनल्टी अधिक लग जाता है, जिससे समय रहते बचा जा सकता है। प्राता साढ़े 10 बजे से लेकर दोपहर तक राजस्व अमला कार्यालय में पश्चात सारा राजस्व अमला वार्डों में घर—घर जा कर लोगों को संपत्ति कर जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

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