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16-10-2019
अयोध्या विवाद : सीजेआई रंजन गोगोई बोले, बहुत हो गया, दोनों पक्ष शाम 5 बजे तक पूरी करें बहस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने बुधवार को अयोध्या मामले में दोनों पक्षों को आज बुधवार शाम पांच बजे तक बहस खत्म करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “बहुत हो गया। अयोध्या मामले में दोनों पक्ष आज शाम पांच बजे तक बहस पूरी कर लें। बुधवार को जब सुनवाई शुरू हुई तो सभी पक्षकारों ने अपनी ओर से लिखित बयान अदालत में पेश किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान किसी भी टोका-टाकी पर मनाही की है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि अब बहुत हुआ, शाम 5 बजे तक इस मामले में पूरी सुनवाई पूरी होगी। और यही बहस का अंत होगा।

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आखिरी सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष की ओर से इस मामले में मध्यस्थता की खबरों का खंडन किया गया है। मुस्लिम पक्ष की ओर से पक्षकार इकबाल अंसारी के वकील एमआर शमशाद ने एक बयान जारी कर कहा है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन पर दावा छोड़ने की बात नहीं की है, ये सभी अफवाह हैं। मंगलवार को 39वें दिन सुनवाई हुई तो रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि उन्हें दलील पूरी करने के लिए बुधवार को एक घंटा चाहिए। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि बुधवार को 40वां दिन है और यह आप लोगों की दलीलों का आखिरी दिन है। आपने लिखित दलीलें हमें दे रखी हैं। जब वैद्यनाथन ने कहा कि मसला गंभीर है और आपको सुनना चाहिए तो चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह तो फिर दिवाली तक सुनवाई चलती रहेगी।

बुधवार को दोनों पक्षकारों के लिए टाइम स्लॉट मंगलवार को ही तय कर दिया गया है। अगर आज सुनवाई पूरी हो जाती है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित तारीख से एक दिन पहले पूरी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए 17 अक्टूबर का शेड्यूल तय कर रखा है। आज दोनों पक्षकारों की दलील के बाद मोल्डिंग ऑफ रिलीफ पर दलील पेश की जाएगी और इसके बाद फैसला सुरक्षित कर लिया जाएगा।

 

02-09-2019
मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद-पुराण के आधार पर नहीं

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने हिंदू पक्ष की तरफ  से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद और स्कंद पुराण के आधार पर नहीं। उन्होंने हिंदू पक्ष के परिक्रमा वाले दलील पर कहा कि लोगों का उस स्थान की परिक्रमा करना धार्मिक विश्वास को दिखाता है। यह कोई सबूत नहीं है। वर्ष 1858 से पहले के गजेटियर का हवाला देना भी गलत है। अंग्रेजों ने लोगों से जो सुना लिख लिया। इसका मकसद ब्रिटिश लोगों को जानकारी देना भर था। मुस्लिम पक्षकार के वकील ने रामायण को काल्पनिक काव्य करार दिया। राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा कि कहा जा रहा है कि विदेशी यात्रियों ने मस्जिद का जिक्र नहीं किया। लेकिन मार्को पोलो ने भी तो चीन की महान दीवार के बारे में नहीं लिखा था।

मामला कानून का है। हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते हैं। हम सभी अनुभवहीन ही हैं। इस पर कोर्ट ने राजीव धवन से कहा कि आपने भी हाईकोर्ट में ऐतिहासिक तथ्य रखे थे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आपने (राजीव धवन) भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं। कोई ऐसा साक्ष्य है, जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो? इससे पहले राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है। इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी। इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा। धवन ने दलील देते हुए कहा कि हम सिर्र्फ  इसलिए इस पक्ष को मजबूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था। इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी।

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