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19-08-2020
राजीव गांधी की जयंती पर किसानों, वनवासियों और गोबर विक्रेताओं को मिलेगी 1737.50 करोड़ की राशि

रायपुर। पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी की जयंती 20 अगस्त पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश के किसानों, तेंदूपत्ता संग्राहकों और गोबर बिक्रेताओं के खाते में 1737.50 करोड़ रुपए की राशि का सीधे अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री इस राशि में से धान, गन्ना और मक्का उत्पादक 19 लाख किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत 1500 करोड़ रुपए की दूसरी किश्त की राशि का आनलाइन अंतरण करेंगे। इसके अलावा बघेल गोधन न्याय योजना के तहत गोबर विक्रेताओं को 4 करोड़ 50 लाख रुपए की राशि और तेंदूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2018 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक के रूप में 232.81 करोड़ की राशि उनके खातों में अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में दोपहर 12.30 बजे आयोजित कार्यक्रम से सांसद सोनिया गांधी और राहुल गांधी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल के सदस्य उपस्थित रहेंगे।

छत्तीसगढ़ सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रदेश के 19 लाख किसानों को 5750 करोड़ की अनुदान सहायता राशि दी जा रही है। इसमें प्रथम किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि राजीव गांधी के शहादत दिवस 21 मई को प्रदान की गई थी वहीं इस योजना के तहत दूसरी किश्त के रूप में 1500 करोड़ की राशि 20 अगस्त को प्रदान की जा रही है। इस योजना से प्रदेश के धान, गन्ना और मक्का उत्पादक किसान लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। इस योजना में 20 जुलाई से 15 अगस्त तक 6 करोड़ 17 लाख रुपए मूल्य का 3 लाख क्विंटल से ज्यादा गोबर खरीदा जा चुका है। गोधन न्याय योजना का पहला भुगतान 5 अगस्त को एक करोड़ 65 लाख रुपए का किया जा चुका है। इस योजना के तहत 2 अगस्त से 15 अगस्त तक खरीदे गए सवा दो लाख क्विंटल गोबर की राशि 4 करोड़ 50 लाख रुपए का भुगतान विक्रेताओं को उनके खातों में किया जाएगा। प्रदेश के 4377 गौठानों में से 3205 क्रियाशील गौठान हैं, जहां गोबर खरीदी हो रही है। राज्य में 1 लाख 1919 पशुपालकों का पंजीयन किया गया है, इनमें से 63 हजार 942 पशुपालक योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। खरीदे गए गोबर से गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट तैयार की जा रही है, जिसकी बिक्री 8 रुपए प्रति किलो की दर पर सहकारी समिति के माध्यम से की जाएगी।

24-07-2020
बृजमोहन ने कहा- कांग्रेस सरकार, वन विभाग अपनी-अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नई-नई कहानी गढ़ रहे है

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश के वनमंत्री मो.अकबर के बयान पर पलटवार किया है। बृजमोहन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, सरकार, विभाग अपनी-अपनी नाकामी को छुपाने के लिए रोज नई-नई कहानी गढ़ रहे है। उन्होंने वन मंत्री को इस मुद्दे पर कहा कि अगर सरकार आदिवासियों के बीमा, बोनस, लाभांश, छात्रवृत्ति के मामले में सही है तो मीडिया व जनता के सामने श्वेतपत्र जारी कर दस्तावेज क्यों प्रस्तुत नहीं करती। बृजमोहन ने वन मंत्री से प्रश्न किया कि बीमा की नवीनीकरण की अंतिम तिथि क्या 31 मई 2019 थी। क्या 31 मई 2019 अंतिम तिथि को राज्य सरकार ने बीमा का नवीनीकरण करा लिया था। क्या दो सत्र का आदिवासियों का बोनस व लाभांश का पैसा बैंक में जमा कर ब्याज कमाया जा रहा है। क्या तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासी परिवार को दो सीजन का बोनस 597 करोड़ दे दिया है, नही तो क्यों? क्या आदिवासियों की सहकारी समितियों को लाभांश का 432 करोड़ वितरित कर दिया है, नहीं तो क्यों? क्या तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों के बच्चों को 2 सत्र की छात्रवृत्ति दे दी गई है, नहीं तो क्यों? बीमा योजना बंद करने से पहले दूसरी योजना लाई गई थी। बीमा योजना के बंद होने से व दूसरी योजना चालू नहीं कर पाने के कारण इस बीच जो हजारों संग्राहक प्रभावित परिवार हैं उसे कैसे व किस मद से सहायता करेंगे?
बृजमोहन ने कहा कि आखिर इन सब विषयों पर वन मंत्री चुप क्यों हैं? क्यों नहीं इस सब विषयों पर दस्तावेज सामने रखते। सिर्फ बयानबाजी कर अपनी गलतियों पर पर्दा नहीं डाल सकते। अगर सरकार आज ही तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीमा, बोनस, लाभांश छात्रवृत्ति के मामले व पूर्व बीमा व योजना व ये जो श्रम विभाग की योजना की बात कर रहे हैं। उनकी राशि सहित सभी अंतर को बताते हुए तत्काल श्वेत पत्र जनता के सामने जारी करे। दूध का दूध व पानी का पानी प्रदेश की जनता के सामने आ जायेगा। सरकार की लापरवाही से ही बीमा बंद हुआ है। सरकार को तो इस लापरवाही की जांच करवाकर दोषी सभी लोगो को दंडित करना चाहिए, जिन्होंने आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय किया है।

29-06-2020
तेंदूपत्ता संग्राहकों ने कलेक्टोरेट का किया घेराव

रायपुर। बीजापुर में तेंदूपत्ता के तत्काल भुगतान के लिए 5000 आदिवासियों ने बीजापुर कलेक्टर का घेराव किया है। प्रदेश में जहां मंत्री और पार्टी अध्यक्ष एक साल के कार्यकाल का जश्न मना रहे हैं, वहीं गरीब आदिवासियों का भुगतान नहीं होना सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है। छत्तीसगढ़ स्वाभिमान संस्थान के अध्यक्ष डॉ.उदयभान सिंह चौहान ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है कि वे गरीब आदिवासियों को तत्काल भुगतान कर उन्हें राहत प्रदान करें। 

 

22-05-2020
तेंदूपत्ता संग्राहकों की बीमा योजना बंद करना आदिवासियों के साथ अन्याय : बृजमोहन अग्रवाल

रायपुर। विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने तेंदूपत्ता संग्राहकों और उनके परिवार के लिए प्रारंभ की गई बीमा योजना बंद किये जाने पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यह बीमा और उससे लाभ आदिवासियों का अधिकार था। इस अधिकार के हनन से सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। बृजमोहन ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लगभग 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए लागू की गई बीमा योजना का लाभ राज्य सरकार की ओर से प्रीमियम की राशि भुगतान नहीं किए जाने के कारण अब उन्हें नहीं मिल रहा है। 2 लाख रुपए की इस बीमा योजना के तहत मृतक तेंदूपत्ता संग्राहक का परिवार मुआवजे से वंचित है। यहां सरकार ने वनवासियों के साथ अन्याय करते हुए असंवेदनशीलता का परिचय दिया है।बृजमोहन में महासमुंद जिले का जिक्र करते हुए कहा कि 140 संग्राहक मुखिया और 23 समूह परिवार ने बीमा के लिए भुगतान का दावा किया है पर उन्हें राशि नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को वनवासियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

 

12-12-2019
नगद भुगतान की व्यवस्था से 26.97 प्रतिशत बढ़ी तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या

छिंदवाड़ा। प्राचीनकाल से मानव समुदाय वृक्षों से जुड़ा हुआ है एवं इसकी महत्ता मानव जीवन के प्रत्येक पहलू से जुडी हुई है। पौधों की पत्तियां, जड़ो एवं मूलकंदों को अपने आहार के रूप में तथा वृक्षों की छाल एवं पत्तियों से अपना तन ढांकने में किया करते थे। प्राचीनकाल में आवश्यकतायें सीमित थी एवं वनों का उपयोग नगण्य था, किंतु वर्तमान परिदृश्य में वनों की महत्ता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए वन प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की गई और मनुष्य एवं पादप समुदाय के बीच सह-अस्तित्व के संबंध के साथ बढ़ती हुई जनसंख्या की आवश्यकता की पूर्ति के लिए वन संपदाओं का सुनियोजित उपयोग की प्रभावी कार्ययोजना बनी। इसी का एक ताजा उदाहरण है मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा वन संपदाओं के समुचित उपयोग व विशेषकर तेंदूपत्ता संग्राहकों को नगद भुगतान की व्यवस्था शुरू करना। इसके कारण जिले में 30 समितियों द्वारा 774 तेंदूपत्ता फड़ों के माध्यम से वर्ष 2019 में 56 हजार 812 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया, जबकि वर्ष 2018 में 52 हजार 308 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया था। कार्डधारक तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या वर्ष 2018 में 32 हजार 331 थी, जबकि 2019 में 40 हजार 924 हो गई। तेंदूपत्ता संग्राहकों की संख्या में एक साल में 8 हजार 690 की संख्या में बढोत्तरी तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में नगद भुगतान व्यवस्था के कारण ही हुई। संग्रहण वर्ष 2019 में तेंदूपत्ता मजदूरी 2 हजार रूपये से बढ़ाकर 2500 रूपये प्रति मानक बोरा की दर से मजदूरी का नगद भुगतान किया गया। मुख्यमंत्री कमलनाथ के जनहितैषी कार्यो में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में नगद भुगतान व्यवस्था से 26.97 प्रतिशत लोगों की मौसमी बेरोजगारी दूर हुई और इसका दूरगामी परिणाम यह हुआ कि इस तेंदूपत्ता संग्रहण की अवधि में तेंदूपत्ता संग्राहकों को पलायन नहीं करना पड़ा और पलायन के कारण उत्पन्न समस्याओं का सामना करने से बच गये। जिले में तेंदूपत्ता संग्राहकों को 1399.64 लाख रूपये का भुगतान किया गया,जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में परिवर्तन स्पष्ट रूप दिखाई देने लगा है। इसके साथ ही लघु वनोपज,आचार,गुठली,लाख,हर्रा,महुआ फूल,गुल्ली,बहेडा,आंवला,अचार,शहद आदि का 1298.90 लाख रूपये का टर्न ओवर बढ़ा।

अरविंद वर्मा की रिपोर्ट

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