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20-02-2021
स्वदेश में विकसित उन्नत टैंकरोधी गाइडेड मिसाइल हेलिना और ध्रुवास्त्र का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। भारत ने स्वदेश में विकसित टैंकरोधी गाइडेड मिसाइल प्रणालियों 'हेलिना' और 'ध्रुवास्त्र' का सफल परीक्षण किया। इसके साथ ही इन मिसाइलों के क्रमशः थल सेना और वायु सेना में शामिल किए जाने का रास्ता साफ हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। रक्षा मंत्रालय ने इन मिसाइलों को विश्व में सबसे उन्नत टैंक रोधी हथियारों में से एक बताया। इन मिसाइलों का राजस्थान के पोखरण रेगिस्तान में परीक्षण किया गया। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रणाली सभी मौसम में और दिन या रात में लक्ष्य साधने में सक्षम है और इससे टैंकों को निशाना बनाया जा सकता है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि न्यूनतम और अधिकतम रेंज में मिसाइलों की क्षमताओं के मूल्यांकन के लिए पांच मिशन संचालित किए गए। मिसाइल प्रणालियों को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन उपलब्धियों के लिए डीआरडीओ, सेना और वायु सेना को बधाई दी। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ.जी. सतीश रेड्डी ने भी सफल परीक्षणों में शामिल टीमों के प्रयासों की सराहना की।

 

 

30-10-2020
एंटी शिप मिसाइल का नौसेना ने किया सफल परीक्षण,अधिकतम सीमा तक लक्ष्य भेदने की क्षमता

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ओर से शुक्रवार को एंटी शिप मिसाइल दागी गई। नौसेना ने गाइडेड मिसाइल कार्वेट आईएनएस कोरा की मदद से मिसाइल को दागा। बंगाल की खाड़ी में भारतीय नौसेना ने अपना परीक्षण किया। यह मिसाइल सही सटीकता के साथ अधिकतम सीमा तक लक्ष्य को मारती है।बता दें कि इन दिनों भारत लगातार मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है। इससे पहले भारतीस नौसेना ने 28 अक्टूबर को भी एक एंटी शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया था।  उस समय एंटी शिप मिसाइल को भारतीय नौसेना के ‘फ्रंटलाइन कोरवेट आईएनएस प्रबल' से दागा गया था, जिसने अपने निशाने पर सटीकता से वार किया था। वहीं, 24 अक्तूबर को भारत ने पोखरण में तीसरी पीढ़ी के टैंक रोधी मिसाइल 'नाग' का सफल परीक्षण किया था। मारक क्षमता 4 से 5 किलोमीटर वाले इस मिसाइल में हवा से हवा में और जमीन से हवा में मार करने की क्षमता है। यह मिसाइल दिन और रात दोनों ही समय में सक्रिय है।

22-10-2020
सैन्य क्षमता में हुआ इजाफा, डीआरडीओ की बनाई एंटी टैंक मिसाइल नाग का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। भारत ने गुरुवार सुबह नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल के अंतिम चरण का सफल परीक्षण किया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा निर्मित इस मिसाइल का परीक्षण पोखरण में गुरुवार को किया गया। नाग मिसाइल पूरी तरह से देश में निर्मित है और इस तरह की मिसाइलों में भारत द्वारा निर्मित ये थर्ड जेनरेशन की है। डीआरडीओ की ओर से लगातार इसके अलग-अलग ट्रायल किए जाते रहे हैं।इस मिसाइल में 4 से 7 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के टैंक समेत अन्य सैन्य वाहनों को चंद सेकेंड में खत्म करने की क्षमता है। ये मीडियम और छोटी रेंज की मिसाइल होती हैं, जो फाइटर जेट, वॉर शिप समेत अन्य कई संसाधनों के साथ काम कर सकती है।अधिकारियों के अनुसार, नाग एंटी टैंक मिसाइल अब पूर्वी लद्दाख सेक्टर जैसे स्थानों पर शामिल होने के लिए तैयार है।

इसने हथियार को खोजने और फिर लक्ष्य को मारने के 10 ट्रायल पूरे कर लिए हैं। नाग एंटी टैंक मिसाइल के आखिरी परीक्षण का मतलब है कि भारतीय सेना को अब इस हथियार को इजराइल या अमेरिका से आयात नहीं करना पड़ेगा। इससे पहले हाल में एंटी-टैंक हथियार की अनुपलब्धता के कारण भारत को लद्दाख में चीनी सेना की हरकतों के बाद आननफानन में इज़राइल से 200 स्पाइक एंटी-टैंक स्पाइक मिसाइलों को खरीदना पड़ा था।15 जून को गालवान में हिंसा भड़कने के बाद स्पाइक मिसाइलों की खरीद की गई थी। भारत के लिए एंटी टैंक मिसाइल की जरूरत हाल में चीन के कब्जे वाले अक्साई चीन में पीएलए के टैंक, रॉकेट आदि की तैनाती के बाद और बढ़ गई थी।

 

18-10-2020
नौसेना की ताकत में हुआ इजाफा, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। भारत ने रविवार को नौसेना के स्वदेश निर्मित स्टील्थ विध्वंसक से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। अरब सागर में आईएनएस चेन्नई से मिसाइल को दागी गई, जिसनें  उच्चस्तरीय और बेहद जटिल युद्धाभ्यास करने के बाद लक्ष्य को सटीकता से लक्ष्य को भेदा। यह जानकारी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने दी।
डीआरडीओ ने कहा कि ब्रह्मोस प्राइम स्ट्राइक हथियार के रूप में नौसेना की सतह के लक्ष्यों को लंबी दूरी परकी निशाना बनाकर युद्धपोत की अजेयता सुनिश्चित करेगा। इस तरह की विध्वंसक मिसाइल भारतीय नौसेना को और अधिक ताकत देगा। ब्रह्मोस को भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया गया है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल प्रक्षेपण के लिए डीआरडीओ, ब्रह्मोस और भारतीय नौसेना को बधाई दी।

 

05-10-2020
एसएमएआरटी के सुपरसोनिक मिसाइल का डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को टॉरपीडो, एसएमएआरटी के सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।यह पनडुब्बी रोधी युद्ध में स्टैंड-ऑफ क्षमता के लिए एक प्रमुख प्रौद्योगिकी सफलता साबित होगी। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा,‘मैं डीआरडीओ और अन्य हितधारकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं।’ रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, ‘टॉरपीडो (एसएमएआरटी) के सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज को ओडिशा तट से दूर व्हीलर द्वीप से सोमवार सुबह 11:45 बजे सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह प्रक्षेपण पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता स्थापित करने में महत्वपूर्ण है।’

 

 

30-09-2020
विस्तारित रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण, मारक क्षमता 400 किमी से अधिक

नई दिल्ली। विस्तारित रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक  परीक्षण बुधवार को किया। मिसाइल 400 किमी से अधिक दूरी पर लक्ष्य को मार सकती है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की पीजे-10 परियोजना के तहत मिसाइल को स्वदेशी बूस्टर के साथ लॉन्च किया गया था। पहले 300 किमी. तक मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल में डीआरडीओ ने पीजे-10 परियोजना के तहत स्वदेशी बूस्टर बनाकर इसकी मारक क्षमता बढ़ा दी है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के विस्तारित रेंज संस्करण का दूसरा परीक्षण था। ब्रह्मोस एक कम दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है।

ब्रह्मोस के समुद्री तथा थल संस्करणों का पहले ही सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है तथा भारतीय सेना एवं नौसेना को सौंपा जा चुका है। ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी बना दिया है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और रडार की पकड़ में भी नहीं आती। ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस प्रक्षेपास्त्र को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण किया गया है,जिससे इस मिसाइल की मारक क्षमता में और भी बढोत्तरी हुई है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस परियोजना में प्रक्षेपास्त्र तकनीक उपलब्ध करवा रहा है और उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता भारत ने विकसित की है। तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की तकनीक के आगे दुनिया का कोई भी प्रक्षेपास्त्र नहीं टिकता।

22-09-2020
देश की रक्षा प्रणाली होगी मजबूत, डीआरडीओ ने किया 'अभ्यास' का सफल परीक्षण

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को रक्षा क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल कर ली। डीआरडीओ ने ओडिशा के बालासोर में 'अभ्यास' का सफल परीक्षण किया। मंगलवार को हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टार्गेट (HEAT) 'ABHYAS'का सफल परीक्षण हुआ। यह परीक्षण ओडिशा के बालासोर टेस्ट रेंज में किया गया। परीक्षण में विभिन्न रडारों और इलेक्ट्रो ऑप्टिक प्रणाली के जरिये इसकी निगरानी की गई। अभ्यास के टेस्ट को कई रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम की मदद से चैक किया गया। इस दौरान इसकी परफॉर्मेंस पूरी तरह से सही रही। बताया जा रहा है कि इस बिना पायलट के एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कई तरह की मिसाइल्स को टेस्ट करने में किया जाएगा। साथ ही इसका इस्‍तेमाल अलग अलग तरीके की मिसाइल और एयरक्राफ्टस का पता लगाने के लिए हो सकता है।

अभ्यास एक छोटे गैस टरबाइन इंजन पर काम करता है और यह एमईएमएस नेविगेशन सिस्टम पर काम करता है। डीआरडीओ के अनुसार यह एक बेहतरीन एयरक्राफ्ट है,जो नवीन तकनीक का उदाहरण है और देश की रक्षा प्रणाली को मजबूती देगा। अभ्यास एडीई में विकसित किया जा रहा एक हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) है। यह हथियार प्रणालियों के अभ्यास के लिए एक यथार्थवादी खतरा परिदृश्य प्रदान करता है। इसके सफल परीक्षण पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'अभ्यास- आईटीआर बालासोर से हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट के सफल परीक्षण के साथ ही डीआरडीओ ने आज एक मील का पत्थर हासिल किया है। इसका उपयोग विभिन्न मिसाइल प्रणालियों के मूल्यांकन के लिए एक लक्ष्य के रूप में किया जा सकता है। इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और को बधाई।

 

07-09-2020
ओडिशा तट पर एचएसटीडीवी का सफल परीक्षण,राजनाथ ने कहा- आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम

नई दिल्ली। हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल(एचएसटीडीवी) का भारत ने सोमवार को सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा तट पर कलाम द्वीप से किया गया। स्वदेशी तौर पर विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग करना सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां अगले चरण में प्रगति के लिए मान्य हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ.जी.सतीश रेड्डी ने राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अपने दृढ़ और अटूट प्रयासों के लिए सभी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और इस मिशन से जुड़े अन्य कर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस मिशन के साथ डीआरडीओ ने अत्यधिक जटिल प्रौद्योगिकी के लिए क्षमताओं का प्रदर्शन किया है,जो उद्योग के साथ साझेदारी में नेक्स्टजेन हाइपरसोनिक वाहनों के लिए बिल्डिंग ब्लॉक के रूप में काम करेगा। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ को बधाई देते हुए कहा कि आज स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रोपल्शन प्रणाली का उपयोग कर हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंट्रेटर वाहन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इस सफलता के साथ, सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां अब अगले चरण की प्रगति के लिए स्थापित हो गई हैं। मैं इस महान उपलब्धि के लिए बधाई देता हूं,जो पीएम के 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में है। मैंने परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों से बात की और उन्हें इस महान उपलब्धि पर बधाई दी। भारत को उन पर गर्व है।

 

 

04-08-2019
भारत की फिर बढ़ी ताकत : क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल का सफल परीक्षण

भुवनेश्वर। ओडिशा में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने आज बालासोर उड़ान परीक्षण रेंज में जमीन से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा तट से किया गया। इस मिसाइल ने सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य को भेद दिया है। बता दें कि क्विक रिएक्शन मिसाइल को डीआरडीओ ने ही विकसित किया है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण को डीआरडीओ की बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। 

 

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