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16-09-2020
लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मिला मध्यान्ह भोजन का लाभ, सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ टॉप पर 

रायपुर। कोरोना संकट काल में भी मध्यान्ह भोजन योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। प्रदेश में लॉक डाउन के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन का लाभ मिला है, जबकि इस दौरान अन्य राज्यों में मध्यान्ह भोजन वितरण की स्थिति काफी खराब रही। आक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार स्कूल बंद होने से देश के 27 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए हैं, जबकि नेशनल फूड सिक्यूरिटी एक्ट 2013 के तहत मध्यान्ह भोजन प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। लोकसभा में विगत 14 सितंबर को एक प्रश्न के उत्तर में केन्द्र सरकार ने यह माना कि, मध्यान्ह भोजन योजना के लाभ से बहुत से बच्चों को वंचित रहना पड़ा। आक्सफैम इंडिया के सर्वेक्षण में छत्तीसगढ़ का देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है। छत्तीसगढ़ में 90 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना का लाभ मिला है।

जबकि उत्तर प्रदेश में 92 प्रतिशत बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित रहे। सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि, उत्तर प्रदेश में जहां खाद्यान्न सुरक्षा भत्ता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। छत्तीसगढ़ में राशन की होम डिलिवरी पर ध्यान केन्द्रित किया गया। लॉक डाउन के दौरान पिछले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में स्कूलों के बंद होने के बीच मध्यान्ह भोजन की आपूर्ति तय करने के निर्देश दिए थे। इसके तारतम्य में छत्तीसगढ़ ने तत्काल कदम उठाते हुए स्कूली बच्चों को स्कूलों और बच्चों के घरों तक पहुंचाकर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने के इंतजाम किए। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 21 मार्च को सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों मध्यान्ह भोजन योजना के तहत स्कूली बच्चों को सूखा राशन वितरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे। गांव-गांव में इसकी मुनादी कराई गई। देश के अन्य राज्यों में सूखा राशन वितरण की प्रक्रिया काफी बाद में शुरू कराई गई। छत्तीसगढ़ में लॉक डाउन के पहले 40 दिनों के लिए स्कूली बच्चों को सूखा राशन दिया गया। इसके बाद एक मई से 15 जून तक 45 दिनों के लिए, 16 जून से 10 अगस्त तक 45 दिन का सूखा राशन वितरित किया गया। इस प्रकार अब तक 130 दिन का सूखा राशन वितरण किया जा चुका है। इस योजना से राज्य के लगभग 43 हजार स्कूलों में 29 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन वितरण से लाभ मिला है। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत सूखा राशन के घर-घर वितरण की व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से किया गया।

वितरित किए गए सूखा राशन पैकेट में चावल, तेल, सोयाबीन, दाल, नमक और अचार शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्थानीय स्तर पर स्कूली बच्चों और पालकों की सुविधा को देखते हुए यह व्यवस्था भी की गई कि, यदि माता-पिता पैकेट लेने के लिए स्कूल नहीं जा सकते हैं तो स्व-सहायता समूह और स्कूल स्टाफ के माध्यम से घर घर जाकर सूखा राशन के पैकेटों की होम डिलवरी की जाए। खाद्य सुरक्षा भत्ता के रूप में बच्चों को सूखा चावल और कुकिंग कास्ट की राशि से अन्य आवश्यक सामग्री दाल, तेल, सूखी सब्जी इत्यादि वितरित की गई। मध्यान्ह भोजन योजना की गाइडलाइन के अनुसार कक्षा पहलीं से आठवीं तक के उन बच्चों को जिनका नाम शासकीय शाला, अनुदान प्राप्त अशासकीय शाला अथवा मदरसा-मकतब में दर्ज है, उन्हें मध्यान्ह भोजन दिया गया।

04-04-2020
 स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के सूखा राशन का 90 प्रतिशत से अधिक वितरण

रायपुर। प्रदेश के स्कूलों में राज्य शासन के निर्देशानुसार मध्यान्ह भोजन के तहत 40 दिनों का सूखा राशन दाल और चावल का 90 प्रतिशत से अधिक का वितरण कर दिया गया है। योजना के तहत प्राथमिक शाला के प्रत्येक बच्चे के पालकों को 4 किलोग्राम चावल और 800 ग्राम दाल तथा उच्चतर माध्यमिक शाला के प्रत्येक बच्चे के पालकों को 6 किलोग्राम चावल और 1200 ग्राम दाल का वितरण किया जा रहा है।अबूझमाड़िया पालकों ने परम्परागत दोना में ग्रहण किया बच्चों का सूखा राशन और सोशल डिस्टेंसिंग का रखा पूरा ख्याल। नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर के 568 स्कूल, शाला आश्रमों के बच्चों के 22491 पालकों को 2,24,910 किलो चावल और 40,484 किलो दाल चालीस दिनों के लिए वितरण किया गया है। विकासखण्ड ओरछा (अबूझमाड़) मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर धुर नक्सल हिंसाग्रस्त गांव छोटेटोण्डाबेड़ा में संचालित शाला आश्रम में अध्यनरत बच्चों के अभिभावकों ने परम्परागत तरीके से सिहाड़ी पेड़ के पत्तों से तैयार किये दोना में सूखा राशन ग्रहण किया।रायपुर जिले के जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी आरंग अंतर्गत 207 शासकीय प्राथमिक शाला, 5 कन्या आश्रम शाला और 119 पूर्व माध्यमिक शाला में सूखा खाद्यान्न का वितरण किया जा चुका है। केवल 2 प्राथमिक शाला और 2 पूर्व माध्यमिक शाला में दर्ज संख्या अधिक होने के कारण यहां वितरण का कार्य 5 अप्रैल को भी किया जाएगा।राजधानी के संकुल केन्द्र रविशंकर के अंतर्गत 11 स्कूलों में कुल दर्ज संख्या 1514 में से 1438 बच्चों के पालकों को सूखा राशन का वितरण किया गया। इनमें प्राथमिक शाला रविशंकर परिसर में सभी 175, प्राथमिक शाला डोंगर तालाब में सभी 298, प्राथमिक शाला टाटीबंध में 32, प्राथमिक शाला रोटरी नगर टाटीबंध में 55, प्राथमिक शाला कोटा में दर्ज संख्या 221 में से 198, प्राथमिक शाला भवानी नगर कोटा में सभी 58, मिडिल स्कूल रविशंकर परिसर में दर्ज 193 में से 173, मिडिल स्कूल महोबा बाजार में दर्ज संख्या में 215 में से 200, मिडिल स्कूल टाटीबंध मंे 79, मिडिल स्कूल कोटा दर्ज संख्या 166 में से 158, एनआरएसटीसी केन्द्र शासकीय प्राथमिक शाला रविशंकर परिसर में 22 बच्चों के पालकों को निर्धारित मात्रा में सूखा राशन का वितरण किया गया।

03-04-2020
स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन का सूखा राशन वितरण शुरू

कांकेर। कोरोना वैश्विक महामारी को ध्यान में रखते हुए लॉक डॉउन के दौरान सभी शासकी स्कूलों की छुट्टी की घोषणा के बाद कोई भी बच्चा भूखा न रहे इसी के तहत राज्य शासन द्वारा दिए गए निर्देशानुसार प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन के सूखा राशन का वितरण आज से शुरू हो गया है। शिक्षकों द्वारा घर-घर जाकर अथवा स्कूलों में विद्यार्थियों के पालकों को 40 दिन का सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है। गौरतलब है कि जिले के 1596 प्राथमिक शालाओं के 52 हजार 361 बच्चों को प्रति छात्र 4 किलो ग्राम चावल एवं 800 ग्राम दाल तथा 615 माध्यमिक शाला के 32 हजार 951 बच्चों को 6 किलो ग्राम चावल और 01 किलो 200 ग्राम दाल का वितरण किया जा रहा है।

 

03-04-2020
स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन बांटने के बाद अब शिक्षकों को करना होगा कोरोना पीड़ितों की पहचान 

रायपुर/बिलासपुर। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन के तहत राशन बांटने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी है। इसके कारण लॉकडाउन के बीच भी शिक्षकों को घरों से निकलना पड़ रहा है। अब सरकार ने शिक्षकों से कोरोना पीड़ितों की पहचान करने के लिए कहा है, जिससे शिक्षक संगठनों में नाराजगी का माहौल है। अब शिक्षकों को राशन बाटने के बाद कोरोना पीड़ितों की भी पहचान करनी होगी।

02-04-2020
राज्य शासन के निर्देश: 40 दिनों के मध्यान्ह भोजन की सूखी सामग्री का वितरण

रायपुर। राज्य शासन द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों को अधिक्रमित करते हुए यह निर्देश जारी किए हैं कि 40 दिनों के मध्यान्ह भोजन की सूखी सामग्री के वितरण की व्यवस्था सभी कलेक्टर स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए करेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि लॉकडाउन तथा सोशल डिस्टेंसिंग के सभी नियमों का पूर्णतः पालन हो तथा सभी विद्यार्थियों के पालकों को 40 दिनों के मध्यान्ह भोजन की सूखी सामग्री भी मिल जाए। पूर्व में मध्यान्ह भोजन की सूखी सामग्री का वितरण स्कूलों से ही करने के निर्देश जारी किए गए थे। मंगलवार 31 मार्च को जारी निर्देशों में कहा गया था कि मध्यान्ह भोजन की सूखी सामग्री का वितरण घर पहुंचाकर किया जाए। इन निर्देशों का उद्देश्य लॉकडाउन की अवधि में सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्णतः पालन कराना है। अलग-अलग स्थानों में अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती है। इनके कारण वितरण की व्यवस्था का निर्धारण स्थानीय रूप से किए जाने की आवश्यकता है।

 

31-03-2020
स्कूल अवकाश अवधि : 40 दिन का सूखा दाल और चावल मिलेगा 3 और 4 अप्रैल को

रायपुर। नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से राज्य शासन ने सभी स्कूल लॉक-डाउन की स्थिति में 14 अप्रैल 2020 तक बंद कर दिए हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर अवकाश अवधि में स्कूली बच्चों को मध्यान्ह भोजन दिए जाने का निर्णय लिया है। यह मध्यान्ह भोजन मार्च एवं अप्रैल 2020 के लिए 40 दिन का सूखा दाल और चावल बच्चों के पालकों को स्कूल से प्रदाय किया जाएगा। प्राथमिक शाला के प्रत्येक बच्चे को 4 किलोग्राम चावल और 800 ग्राम दाल तथा उच्चतर माध्यमिक शाला के प्रत्येक बच्चे को 6 किलोग्राम चावल और 1200 ग्राम दाल प्रदाय किया जाएगा।

संचालक लोक शिक्षण संचालनलाय जितेन्द्र शुक्ला की ओर से इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि खाद्यान्न सामग्री के वितरण के लिए 3 और 4 अप्रैल की तिथि निर्धारित की गई है। निर्धारित तिथि के पूर्व ग्राम में मुनादी के द्वारा पालकों को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए है। निर्धारित तिथि को स्कूल के सामान्य समय में खाना बनाने वाली एजेंसी के प्रतिनिधि के समक्ष शाला प्रमुख द्वारा निर्धारित मात्र अनुसार खाद्यान्न का वितरण बच्चों के पालकों को किया जाए। वितरण के समय बच्चों के पालकों से बच्चों की उपस्थिती पंजी के मार्च माह के पृष्ट में ही बच्चों के नाम के सम्मुख हस्ताक्षर लेते हुए चावल और दाल कि मात्रा का उल्लेख किया जाए। निर्देश में यह भी कहा गया है कि वितरण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि शाला में भीड़ इकट्ठी न हो। इसके लिए सुविधानुसार अलग-अलग कक्षा के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया जाए।

17-02-2020
कमलनाथ 20 फरवरी को करेंगे चंदनगांव में प्रदेश के पहले केन्द्रीकृत रसोईघर का भूमिपूजन

छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री कमलनाथ आगामी 20 फरवरी को दोपहर एक बजे भरतादेव चंदनगांव में प्रदेश के पहले केन्द्रीकृत रसोईघर 'अक्षय पात्र मेघा किचन' का मुख्य अतिथि के रूप में भूमिपूजन करेंगे। अक्षय पात्र फाउण्डेशन द्वारा संचालित किये जाने वाले इस रसोईघर के माध्यम से आगामी शिक्षण सत्र से जिले की शासकीय शालाओं के 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उत्तम गुणवत्ता का स्वादिष्ट मध्यान्ह भोजन वितरित किया जायेगा। इस कार्यक्रम में जिले के सांसद नकुलनाथ और प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जिले के प्रभारी मंत्री सुखदेव पांसे विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उल्लेखनीय है कि अक्षय पात्र फाउण्डेशन 12 राज्यों में 13 हजार 800 से अधिक स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 16 लाख विद्यार्थियों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन प्रदान कर रहा है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गजेंद्र सिंग नागेश ने बताया कि राज्य शासन द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यान्ह भोजन प्रदाय किया जा रहा है। नगर पालिक निगम छिन्दवाड़ा के क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शालाओं के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने और एक स्वस्थ संतुलित भोजन प्रदाय किये जाने का कार्य अब अक्षय पात्र फाउण्डेशन बैंगलूरू द्वारा किया जायेगा। इस फाउण्डेशन द्वारा हाईटेक किचन में भोजन तैयार कर प्रतिदिन एक निश्चित समय पर मीनू के अनुसार उत्तम गुणवत्ता का स्वादिष्ट भोजन विद्यार्थियों को वितरित किया जायेगा।

अरविंद वर्मा की रिपोर्ट

 

04-01-2020
मध्यान्ह भोजन के मामले में भी लापरवाह सरकार : भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की सरकारी स्कूलों में परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। भाजपा प्रवक्ता श्रीचंद सुन्दरानी ने कहा कि प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना में लापरवाही खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सुन्दरानी ने कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक के एक स्कूल के प्रकाश में आए मामले का हवाला देकर कहा कि अमूमन प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना में अफसरों के साथ ही स्कूल कर्मचारियों व संचालन समितियों की मिलीभगत और उदासीनता के चलते भरार्शाही चल रही है।

नरहरपुर ब्लॉक के ग्राम मांडाभर्री स्थित स्कूल में तो कीड़ायुक्त भोजन तक परोसे जाने की शिकायत प्रकाश में आना इस योजना के उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न से कम नहीं है। इतना ही नहीं, प्रदेशभर में स्कूली बच्चों को निर्धारित मात्रा में गुणवत्तायुक्त पौष्टिक भोजन देने के आदेशों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही है। एक तरफ प्रदेश सरकार शालेय विद्यार्थियों के लिए सुपोषण के दावे कर रही है, वहीं गुणवत्ताहीन कीड़ायुक्त भोजन उन्हें परोसा जा रहा है। इसकी शिकायत करने पर विद्यालयों के प्रधानाध्यापक पालकों से ही दुर्व्यवहार करने पर उतारू हो जाते हैं। सुन्दरानी ने प्रदेश सरकार से इस मामलों पर संजीदा होकर कारगर कार्रवाई की मांग की है, क्योंकि गुणवत्ताहीन और कीड़ायुक्त मध्याह्न भोजन परोसा जाना प्रदेश के भविष्य की पीढ़ियों से खतरनाक खिलवाड़ है।

16-12-2019
नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास का नया अध्याय गढ़ रहीं महिलाएं  

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिला दंतेवाड़ा की महिलाएं विकास की दौड़ में अपने कदम बढ़ा रही हैं। दंतेवाड़ा में ई रिक्शा चलाकर यात्रियों को मंजिल तक पहुंचाने वाली महिलाओं की तारीफ तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कर चुके हैं। आत्मनिर्भरता का पर्याय बन चुकी महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं यहां ई-रिक्शा चलाने के साथ कड़कनाथ मुर्गी पालन, सेनिटरी पैड निर्माण, मध्यान्ह भोजन जैसे कई कार्य कर अपने परिवार को संबल प्रदान कर रहीं हैं। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा शुरू किये गए 'मेहरार चो मान' कार्यक्रम के तहत किशोरियों और ग्रामीण महिलाओं को निःशुल्क सेनिटरी पैड वितरण कर जागरूक कर रहीं है। नई दिशा महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष निकिता मरकाम ने बताया कि ग्राम संगठन के माध्यम से सेनिटरी पैड का निर्माण का काम किया जाता है, ग्राम संगठन में कुल 19 महिला स्व-सहायता समूह जुड़े हैं। उनके समूह की10 महिलाएं सेनेटरी पैड बनाने का काम करती है, अन्य महिलाएं कड़कनाथ मुर्गीपालन, मध्यान भोजन और चूड़ी खरीद कर बेचने का काम करती है, जिससे उन्हें 5 से 6 हजार महीने की कमाई हो जाती है। उन्होंने बताया कि उनके समूह ने बैंक लिंकेज के माध्यम से पहले 3 लाख, उसके बाद दोबारा 1 लाख रूपए का लोन लिया था जिसका पूरा भुगतान कर दिया है। अब काम के लिए वो फिर से 3 लाख रूपये लेने की योजना बना रहीं हैं। निकिता कहती हैं कि पहले थोड़ी घबराहट थी पर अब उन्हें विश्वास है कि वो मिलकर बैंक का पूरा पैसा समय पर वापस कर देंगी। 12 वीं तक पढ़ी निकिता ने बताया कि उसके समूह की 3-4 महिलाएं ही 8वीं से 12 वीं तक पढ़ी लिखी हैं। कम पढ़ी लिखी होने के कारण उनके पास रोजगार की समस्या थी लेकिन समूहों और ग्राम संगठन से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है और महिलाएं बहुत खुश हैं।

 निकिता ने बताया कि हमारे समूह को जिला पंचायत की तरफ से ई-रिक्शा मिला हुआ है। रिक्शे के लिए सिर्फ 50 हजार रूपए ही किश्तों में जमा करना है। जिला पंचायत की ओर से लाइवली हुड कॉलेज की से हमें ई रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। दो-चार महिलाओं के सीखने के बाद उन लोगों ने खुद एक दूसरे को रिक्शा चलाना सिखा दिया। ई रिक्शा मिल जाने से हमारी बहुत सी मुश्किलें आसान हो गई हैं। अब वे यात्रियों को लाने ले जाने के साथ ही, सामान लाने ले जाने के लिए भी रिक्शे का उपयोग करती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ग्राम संगठन के माध्यम से 1 प्रतिशत की दर से और समूह के द्वारा महिलाओं को 2 प्रतिशत की दर से लोन उपलब्ध कराया जाता है। इससे समूह की आय भी होती है और जरूरत के समय महिलाओं को पैसे भी मिल जाते हैं। मां दंतेश्वरी स्व-सहायता समूह की सदस्य अनिता ठाकुर ने बताया कि जिले के सेनेटरी पैड निर्माण से महिलाएं हर माह 4-5 हजार रूपए की कमाई कर लेती हैं। समूह की दूसरी महिलाएं ईंट बनाने, साग-सब्जी उत्पादन और बेचने, मध्यान भोजन और कड़कनाथ मुर्गी पालन का काम करती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से उन्हें मुर्गी पालन के लिए शेड निर्माण करके दिया गया है। उनके द्वारा लगभग 300 मुर्गे बेचे गए। कड़कनाथ मुर्गी पालन से लगभग उन्हें लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए की आमदनी हुई है।

11-12-2019
संचालक स्कूल शिक्षा ने किया स्कूलों का औचक निरीक्षण  

रायपुर। शिक्षा गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन का नवाचारी कार्यक्रम राज्य स्तरीय आकलन के तहत आज पूरे प्रदेश में पहली से आठवीं के एक साथ हो रहे आकलन का जायजा लेने स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का दल संचालक सी एस प्रकाश के नेतृत्व में 40 टीमों में विभक्त होकर कर सभी शैक्षणिक जिलों के अलग-अलग स्थानों का दौरा किया। सभी स्कूलों में निरीक्षण के दौरान किचन गार्डन 3 दिन के भीतर बनाने के निर्देश दिए वही मध्यान्ह भोजन, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों के आकलन के चार्ट भी स्कूलों में लगाए जाने के निर्देश दिए गए। राज्य स्तरीय आकलन के तहत धमधा ब्लाक के मुरमुंडा, सोनपार, धमधा व बरहापुर में डायरेक्टर ने औचक निरीक्षण किया जहां उन्होंने पढ़कर सुनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया वहीं कमजोर बच्चों को प्रोत्साहित किया। सभी जगह उन्होंने कक्षा की स्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति, मध्यान्ह भोजन और बच्चों को उनके अंक बताए जाने एवं बच्चों की स्थिति के अनुसार रणनीति बनाकर उन्हें उनकी गुणवत्ता सुधारने का निर्देश दिया। उन्होंने सर्वाधिक महत्त्व स्कूल के खाली पड़े जगहों में किचन गार्डन बनाने पर जोर दिया।

 खैरागढ़ के ऐतिहासिक सवा सौ साल पुराने स्कूल पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का भी आज आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस स्कूल की विशेषता यह है कि यहां अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल हेड मास्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वहीं पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी भी यहां अध्यापन कर चुके हैं। इस स्कूल में उचित रखरखाव के दिशा निर्देश देते हुए यहां परीक्षा का अवलोकन किया। राजनांदगांव जिले के बढ़ाई टोला स्कूल में जहां प्राइमरी, मिडिल, हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल है। वहां के बीच के स्थान में बनाए गए उद्यान की प्रशंसा करते हुए यह निर्देश दिए गए कि सभी स्कूलों द्वारा सम्मिलित रूप से कल से यहां एक किचन गार्डन तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान संचालक के साथ राज्य साक्षरता मिशन के असिस्टेंट डायरेक्टर प्रशांत पांडे व डीपीआई के असिस्टेंट डायरेक्टर महेश नायक भी उपस्थित थे।

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