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23-12-2020
बैंक सखियों के माध्यम से लाकडाउन से अब तक 20 करोड़ 80 लाख का हुआ बैंकिंग लेन देन

रायपुर/कोण्डागांव। बैंकिंग सेवाएं आज हर व्यक्ति के जीवन के अनिवार्य हिस्से में शामिल है और तो और बैंकिंग सेवाओं का विस्तार अब सुदूर बसे गांव गांव में किया जा रहा है ताकि अंतिम छोर में बसे ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक ही बैंकिंग सुविधा मुहैया कराई जा सके और इस कार्य में बैंक सखियां बखूबी अपने कार्य को अंजाम दे रहीं है।

बैंक सखी की अवधारणा
कुल मिलाकर बैंक सखी की अवधारणा मूलतः इस बात पर आधारित है कि ग्रामीणों के बीच बैंकिंग लेन देन सरल बने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्राप्त हो सके। आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ बनाना इसका प्रमुख उद्देश्य है। इसमें भी महिलाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बनाने के स्व सहायता समूह को जोड़ा गया हैए ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर सक्षम बने। जिले में आज भी ऐसे दूरस्थ क्षेत्र हैं जहां ग्रामीणों को बैंक संबंधी छोटे बड़े कार्य के लिए अक्सर मुख्यालयों में आना पड़ता है और इस आने जाने में दिक्कत होना स्वाभाविक है। इस परिस्थिति में बैंक सखी का कॉन्सेप्ट ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। बैंक सखी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की न्यूनतम पढ़ी लिखी महिलाओं का चयन किया जाता है, जिन्हें कम्प्यूटर, लैपटॉप पर बैंक संबंधी सामान्य जानकारी से प्रशिक्षित कर उन्हें बैंकों के माध्यम से एक निश्चित राशि उपलब्ध कराई जाती है और पीओएस के माध्यम से आधारकार्ड के माध्यम से अपने सामान्य आर्थिक जरूरत की राशि त्वरित प्राप्त कर सकते हैं और हर ट्रान्जेक्शन पर बैंक सखियों को एक निर्धारित राशि प्राप्त होती है।

आर्थिक सम्बल साबित हुआ महिलाओं के लिए

कोण्डागांव जिले में कुल 66 बैंक सखियां ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत् है। यह ऐसी ग्रामीण महिलाओं के लिए लाभदायक सिद्ध हुआ,जो शैक्षणिक योग्यता हासिल करने के बाद भी सिर्फ घर गृहस्थी में ही व्यस्त थीं और खेती किसानी करके परिवार का हाथ बटा रहीं थीं। विकासखण्ड बड़ेराजपुर के ग्राम भगदेवा की 35 वर्षीय चंद्रकुमारी यादव ने बताया कि उनके परिवार में सास ससुर और पति सहित तीन साल का पुत्र है, स्नातक होने के बावजूद उन्होंने नौकरी के लिए प्रयास किया था अंत में वर्ष 2018 में वे प्रगति स्व सहायता समूह की सदस्य बनी और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के माध्यम से बैंक सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया। चूंकि वे पहले से ही कम्प्यूटर साक्षर थीं अतः इस कार्य में उन्हें कभी कोई दिक्कत नही हुई। वे कहती हैं कि बैंक सखी बनने के पश्चात् लोगो के नजरिये में परिवर्तन आया है और सब उन्हें बैंक वाली मैडम के नाम से पुकारते हैं।

इसके अलावा आस.पास के रिश्तेदार और घर वाले भी उन्हें पहले कहा करते थे कि पढ़ी लिखी होने के बावजूद वह घर तक ही सीमित रहती है। इस प्रकार बैंक सखी ने उन्हें एक नई पहचान देने में मदद की है। इस क्रम में एक अन्य बैंक सखी विकासखण्ड केशकाल के ग्राम मस्सूकोकोड़ा की रहने वाली लता पाण्डे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बताया कि 12वीं पास होने के पश्चात् में उन्होंने कम्प्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा हासिल किया था उनके पति एक मैकेनिक का कार्य करते हैं। उन्होंने भी जय बालेश्वरी स्व सहायता समूह के माध्यम से बैंक सखी के रूप में वर्ष 2018 से अपनी सेवाएं दे रहीं है और अब तक वे हितग्राहियों के 45 बैंक खाता तथा कुल 19 करोड़ का ट्रान्जेक्शन कर चूकीं है और महिने में लगभग 4 हजार रूपए कमा लेतीं है। उनके पास लगभग प्रतिदिन 50 से 80 बैंक ग्राहक आते हैं। इस प्रकार उन्हें आमदनी का नया जरिया मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। उनका कहना है कि बैंक सखी बनने से पूर्व उन्हें गांव में कोई नहीं जानता था परन्तु आज उन्हें पूरा गांव जानता है और सभी सम्मान करते हैं। वे यह भी कहतीं है कि वे कभी भी बैंक में काम करना बंद नहीं करेंगी और यह उनका पसंदीदा कार्य है।

जैसा की सभी जानते हैं कि कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन के कारण वाणिज्यक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं और दूरस्थ क्षेत्रों में बैंको से नगद निकासी एक बड़ी समस्या बन गई थी, ऐसे विकट समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत बैंक सखियों के माध्यम से न केवल वनांचल क्षेत्रों में नगद निकासी की समस्या को हल किया गया बल्कि बुजुर्गो, दिव्यांगों और अन्य असहाय लोगों के घरों तक पहुंच कर अपनी सेवाएं दी गई। उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन से अब तक की अवधि में जिले में 20 करोड़ 80 लाख का वित्तीय लेन.देन बैंक सखियों के माध्यम से किया गया।

19-12-2020
प्रदीप शर्मा ने स्व सहायता समूह के किए उत्पादन कार्यों की ली जानकारी, लागत और बचत के बारे में पूछा

धमतरी। प्रदेश की महत्वाकांक्षी सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी प्रोजेक्ट के तहत जिले में चल रहे कार्यों व उपलब्धियों की जमीनी हकीकत जानने के लिए मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा एवं एनजीजीबी की राज्य नोडल अधिकारी तथा कृषि उत्पादन आयुक्त एम. गीता ने शनिवार को ग्राम भटगांव, खाड़ादाह तथा दुगली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य को टिप्स दिए, साथ ही समूहों की आय में वृद्धि के लिए कारगर उपाय करने के लिए निर्देशित किया।रायपुर से आई टीम ने सर्वप्रथम जिला मुख्यालय से लगे ग्राम भटगांव में बाड़ी प्रोजेक्ट के तहत महिला स्वसहायता समूहों के द्वारा संचालित कार्यों को देखा। यहां पर तीन एकड़ भूमि में समूह के द्वारा लेमनग्रास, एलोवेरा, गैंदा फूल के अलावा विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां उगाई गई थीं। समूह के कार्यों को देखकर अधिकारी काफी खुश हुए। सलाहकार प्रदीप शर्मा ने समूह की महिलाओं से रूबरू होकर उनके द्वारा किए जा रहे उत्पादन कार्यों की जानकारी ली, साथ ही लागत एवं बचत के बारे में पूछा। जय मां भवानी महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष किरणलता ने बताया कि यहां उत्पादित लेमनग्रास को छाती स्थित मल्टी युटिलिटी सेंटर में प्रसंस्करण किया जाता है, जिसके बाद इससे निर्मित उत्पादों को बेचा जाता है।

उन्होंने बताया कि लेमनग्रास से निर्मित चाय, मॉस्किटो लिक्विड सहित विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसी तरह गैंदा फूल, एलोवेरा के अतिरिक्त कुंदरू, भिण्डी, पुदीना, धनिया जैसी सब्जियों की भी खेती समूह के द्वारा सफलतापूर्वक की जा रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त ने समूह के कार्यों की सराहना की तथा इसे और बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर को कहा। यहां पर लगाए गए आंवले के पेड़ों से भी फल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रयास करने की भी बात उन्होंने कही।तत्पश्चात् नगरी विकासखण्ड के ग्राम खाड़ादाह में स्थित गौठान का अधिकारियों ने निरीक्षण किया। सलाहकार प्रदीप शर्मा एवं एपीसी ने पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर चौपाल लगाई तथा गौठान के आय व्यय की जानकारी ली। उन्होंने कोटना के स्थान पर डबरी बनाए जाने के निर्देश दिए। गौठान समिति के सदस्यों ने बताया कि ग्राम के तीन स्वसहायता समूहों के द्वारा यहां चार वर्मी कम्पोस्ट टांके तैयार किए गए हैं, जहां पर वर्मी खाद का उत्पादन हो रहा है। अब तक 235 क्विंटल गोबर की खरीदी की जा चुकी है। जागृति स्वसहायता समूह की महिला ने बताया कि यहां पैरादान की स्थिति बेहतर है। अब तक 11 ट्रॉली पैरादान किसानों के द्वारा किया जा चुका है। प्रदीप शर्मा ने गौठान के चारों ओर मिट्टी की बाउण्ड्री वॉल तैयार करने तथा अधिक से अधिक पशपालकों को इससे जोड़ने के लिए निर्देशित किया। इसके बाद अधिकारियों की टीम ने दुगली स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण केन्द्र का निरीक्षण किया। इस अवसर पर डीएफओ, जिला पंचायत की सीईओ नम्रता गांधी, कृषि विभाग के राज्य स्तर के अधिकारी,संचालक उद्यानिकी बी. माथेशरण सहित संबंधित विभाग के राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारी मौजूद थे।

 

07-12-2020
स्व सहायता समूह की महिलाओं ने खुद उठाई कास्ट वर्मी बेड तैयार करने की ज़िम्मेदारी

दुर्ग । पाटन के आर जामगांव की भारती सोनबेर,त्रिवेणी साहू,सुरूचि साहू चंदखुरी की संतोषी,रजनी और मालती देवांगन से मिली। ये मुलाकात कोई साधारण मुलाकात नहीं थी। इस मुलाकात का उद्देश्य था आपसी सहयोग से हुनरमंदी में निखार लाना। कहते हैं ज्ञान बांटने से बढ़ता है इसी सोच के साथ दुर्ग ब्लॉक के ग्राम चंदखुरी में बिहान समूह से जुड़ी दीदियों ने पाटन ब्लॉक के आर जामगांव से आई नई सहेलियों के साथ कम समय में डी कंपोजर की मदद से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने का अनुभव साझा किया। इतना ही नहीं कृषि विभाग की अर्चना चखियार की मदद से इन्होंने तकनीकी पहलुओं की बारीकी भी सीखी।

जोश और जुनून से एक ही दिन में बना लिया वर्मी बेड
आर जामगांव की महिलाओं ने सोचा था कि चंदखुरी आकर कुछ सीखेंगी ज़रूर लेकिन उनको ये नहीं मालूम था कि ये एक दिन उनकी ज़िंदगी में इतना कारगर सिद्ध होगा। यहाँ से जाने के बाद सभी गौठानों समिति के साथ मिलकर एक मीटिंग की और बड़ी बात तो तब हो गई चंदखुरी से लौटकर इन महिलाओं में ऐसा जोश और जुनून सवार हुआ कि एक ही दिन में इन्होंने भी वर्मी बेड तैयार कर डाले। इन महिलाओं ने ठान लिया है कि जब सरकार उनको इतनी मदद और मौके दे रही है तो उनको भी चूकना नहीं है। जय माँ कर्मा समूह की भारती सोनबेर कहती हैं अगर चंदखुरी की महिलाएं ये काम कर सकती हैं तो वो क्यों नहीं। आज की मेहनत कल रंग ज़रूर लाएगी। इसी सोच के साथ पंचायत की मदद से उन्होंने ये काम कर डाला। सरपंच  राजकुमार ठाकुर ने कहा कि महिलाओं को पंचायत से पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। अभी महिलाओं ने मिलजुल कर वर्मी बेड तैयार कर लिए हैं इसके बाद चंदखुरी में मिले प्रशिक्षण के अनुसार गोबर भराई का काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब गोबर खरीदी फिर से शुरू हो गई है इसलिए वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने में भी तेजी आएगी।

ये सब शुरू कैसे हुआ
आर जामगांव के सचिव नरेश महतो ने बताया कि जब उनके गांव की महिलाओं को यह पता चला कि उनकी चंदखुरी की बहनें इतना अच्छा काम कर रही है तो उन्होंने सोचा कि क्यों ना वह भी यह काम सीख कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने की राह पर चलें। हालांकि पहले इन महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया था मगर फिर भी कुछ तकनीकी पहलुओं को समझ नहीं पायीं थी।इसलिए उन्होंने इन सबकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनको चंदखुरी लाने का निर्णय लिया। महतो ने बताया कि आर जामगांव से जय माँ कर्मा, जय माँ बम्लेश्वरी, शिव शक्ति और प्रतिभा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने आकर चंदखुरी गौठान में डी कंपोजर की मदद से  कम समय में वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाना सीखा। चंदखुरी में सभी ने बहुत अच्छा सहयोग दिया।उन्होंने बताया कि यहां की सचिव कामिनी चंद्राकर,कृषि विस्तार अधिकारी अर्चना चखियार ,सिन्धुजा समूह की दीदियों सहित चंदखुरी के गौठान की पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

 

02-12-2020
गोबर के विभिन्न उत्पादन कोरिया जिले के स्व सहायता समूहों के लिए बना आजीविका का जरिया

रायपुर/कोरिया। जिले में स्व सहायता समूहों ने गोबर से विभिन्न उत्पाद का निर्माण कर रहे हैं, जो उनके आजीविका का जरिया बना है। इसमें गोबर के दीये एवं शुभ-लाभ और ओम का निर्माण समूह द्वारा किया गया है। दीपावली त्यौहार के दौरान स्व सहायता समूहों के द्वारा गोबर के बने दिये एवं अन्य उत्पादों का विक्रय किया गया। जिन्हें खरीदने में जिले के आम नागरिकों ने भी खासा उत्साह दिखाया। इन उत्पादों के विक्रय से समूह की महिलाओं को कुल 1 लाख 40 हजार रुपए की आमदनी हुई है। कोविड महामारी से लड़ने के लिए मास्क, सैनिटाइजर, हैण्डवाश, हर्बल फिनाईल एवं हैण्ड मेड साबुन सहित अन्य उत्पाद भी समूह द्वारा बनाये गए हैं। बता दें कि बैकुण्ठपुर मात्र में ही इस बाजार में महिलाएं गोबर से बने रंग-बिरंगे दिए व टेराकोटा की कलाकृतियों के साथ ही बांस से बने एवं अन्य हस्त निर्मित उत्पाद विक्रय से स्व सहायता समूहों की 56 हजार रुपए की कमाई हुई। सोनहत में 16 हजार, मनेन्द्रगढ़ में 40 हजार तथा भरतपुर में 28 हजार की कमाई हुई है। इस तरह स्थानीय स्तर पर महिलाओं को ना सिर्फ स्वरोजगार मिल रहा है बल्कि वे आर्थिक तौर पर सशक्त और आत्मनिर्भर भी हो रही हैं। कलेक्टर एसएन राठौर के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ तूलिका प्रजापति के सहयोग से जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अन्तर्गत गठित महिला स्व सहायता समूहों के द्वारा हस्त निर्मित उत्पादों का बाजार लगाया गया।

जहां दीपावली त्यौहार के दौरान बैकुण्ठपुर में लगाये गये बिहान बाजार में संसदीय सचिव व बैकुंठपुर विधायक अम्बिका सिंहदेव ने पहुंचकर महिलाओं का उत्साहवर्धन किया। बैकुण्ठपुर स्थित जिला सत्र न्यायालय के नजदीक यह बाजार बिहान बाजार के नाम से राज्य स्थापना दिवस से प्रारंभ हुआ और यही नहीं अन्य विकासखंडों में भी समूहों के द्वारा हस्त निर्मित उत्पादों का विक्रय किया गया। गौरतलब है कि स्वसहायता समूहों व स्थानीय शिल्पियों को आर्थिक मजबूती देने एवं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए गोबर, मिट्टी, बांस आदि से बने सामग्रियों के उपयोग हेतु अपील की जा रही है। जिले में स्व सहायता समूहों द्वारा बनाये गये उत्पादों में टेरा कोटा के साथ साथ घरेलु उपयोग के सामान जैसे- हर्बल साबुन, हैंडवाश, फिनॉल, हार्पिक, डिटर्जेंट पावडर, डिश वॉश लिक्वीड एवं अन्य उत्पाद शामिल हैं। इतना ही नहीं यहां साज सजावट के सामान जैसे- झुमर, पैरदान, थाल पोस, गुलदस्ता, माईक्रोम से बने उत्पाद भी स्वसहायता समूहों से संपर्क कर प्राप्त किये जा सकते हैं। खास बात ये है कि गोबर से बने इकोफ्रेंडली हैं जो बाद में मिट्टी में आसानी से मिल कर खाद का रूप ले लेते हैं। गार्डनिंग करने वालों के लिए बहुत ही उपयोगी हैं, दिए जलाने के बाद इसे खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता हैं।

02-12-2020
धान खरीदी केन्द्रों पर किसानों की सुविधा के लिए स्व सहायता समूह ने खोली कैंटीन

कोरिया। राज्य शासन के निर्देशानुसार मंगलवार से राज्य के सभी धान उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो गई है। जिले में धान खरीदी का कार्य 33 केंद्रों के माध्यम से हो रहा है। विधायक गुलाब कमरो ने डोड़की और बंजी, संसदीय सचिव एवं विधायक बैकुण्ठपुर अंबिका सिंहदेव ने बड़े कलुआ तथा विधायक मनेंद्रगढ़ डाॅ. विनय जायसवाल ने कौडीमार में नवीन धान खरीदी केंद्रों का शुभारंभ कर किसानों से धान खरीदी पर चर्चा की। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य नीति के तहत जिले के पंजीकृत किसानों से कुल 2251.6 क्विटंल धान की आवक विभिन्न उपार्जन केन्द्रों में दर्ज की जा चुकी है।

पहले दिन उपार्जन केन्द्र केल्हारी में 12.80 क्विंटल, घुटरा में 289.60 क्विंटल, चैनपुर में 40 क्विंटल, बंजी में 32 क्विंटल, बंजारीडांड में 112.40 क्विंटल, जामपारा में 516.40 क्विंटल, झरनापारा में 87.60 क्विंटल, धौराटिकरा में 338 क्विंटल, पटना में 174.40 क्विंटल, बरबसपुर में 146 क्विंटल, रजौली में 86.40 क्विंटल, सरभोका में 416 क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई है। दूरदराज से आने वाले किसानों की सुविधा के लिए धान खरीदी केंद्रों में छाया की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही बिहान योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं ने कैंटीन का भी संचालन शुरू किया गया है। इस वर्ष अच्छी किस्म के धान (ग्रेड ए) 1888 रुपए और काॅमन धान 1868 रुपए प्रति क्विटंल समर्थन मूल्य निर्धारित की गई है।

23-11-2020
गौठान में चार समूहों को मिला काम, सब्जी भाजी और जैविक खाद उत्पादन से बढ़ी आमदनी

जांजगीर चांपा। राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी के तहत जिले के विभिन्न गांवों में गौठान प्रारंभ किया गया है। सुव्यवस्थित संचालन के लिए गौठान समिति को जिम्मेदारी दी गई है। अब यह गौठान आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। स्थानीय स्व सहायता समूह को रोजगार मिलने से वे आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के औराईकला गौठान में गांव के ही चार स्व-सहायता समूहों को काम मिल रहा है। अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नही है। गौठान से जुड़े समूहों  को मिनी राइस मिल, मशरूम उत्पादन, सब्जी-भाजी और जैविक खाद के माध्यम से रोजगार का अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। औराईकला की जय मां वैष्णो देवी महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष पार्वती साहू ने बताया कि जैविक पद्धति से खाद तैयार कर सोसाइटी को अब तक गौठान के माध्यम से 48 क्विंटल जैविक खाद 8 रूपए प्रति किलो की दर से दे चुके हैं।  इससे स्व सहायता समूह के सदस्यों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि प्रथम बार उन्होंने 40 क्विंटल जैविक खाद उद्यानिकी विभाग को सहकारी सोसाइटी के माध्यम से बेचा था। आज कृषि विभाग के माध्यम से 8 क्विंटल जैविक खाद बेचा है। बेचे गए जैविक खाद की राशि सोसाइटी के द्वारा समिति  के बैंक अकाउंट में भुगतान की जाती है।

पार्वती साहू ने बताया कि उनकी समिति  8 वर्ष पुरानी है। गौठान प्रारंभ होने से अब उन्हें काम के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें जैविक खाद तैयार करने के लिए गौठान से ही गोबर मिल जाता है।  शासन की योजना के तहत केंचुआ भी उपलब्ध कराया गया है एवं समूह के सदस्यों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। गौठान परिसर में ही वर्मी टांका व वर्मी बेड तैयार किया गया है। समूह के सदस्यों में लाभ मिलने से उत्साह का माहौल है। इसी गौठान से जुड़े मिनीमाता महिला स्व सहायता समूह के  सदस्यों ने चरागाह परिसर पर सब्जी-भाजी लगाया है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ शुरू हो गया है। समूह की अध्यक्ष बहोरीन बाई ने बताया कि वे अभी लाल भाजी, पालक भाजी, गोभी, मूली आदि लगाए हैं। इसके बाद  बाद वे धनिया, भिंडी, लौकी, मेथी, खीरा भी लगाएंग। वे स्थानीय बाजार एवं समीप के शहरों से को सब्जी भाजी की सप्लाई कर रहे हैं। पिछले फसल में सब्जी भाजी का मूल्य कम होने के कारण केवल लागत और समूह के सदस्यों को मजदूरी मिल गई थी। इस मौसम में सब्जी भाजी की कीमत अच्छी मिलने से और अधिक लाभ मिल रहा है। जय मां संतोषी महिला स्व सहायता समूह के सदस्य उमा पटेल ने बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए गौठान परिसर में ही स्थान दिया गया है। निशुल्क प्रशिक्षण भी प्राप्त कर चुके हैं। वह अब मशरूम उत्पादन की तैयारी में लगे हुए हैं। इसी प्रकार गौठान से जुड़े एक अन्य समूह को सरकार की योजना के तहत मिनी राइस मिल अभी कुछ दिन पहले ही उपलब्ध कराया गया है। इससे अतिशीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।

 

05-11-2020
डॉ. किरणमयी नायक ने स्व सहायता समूहों की शिकायत पर दर्ज किया प्रकरण,हथकरघा संघ के सचिव हटाए गए

रायपुर। एक ओर समाज महिलाओं के समान दर्जे और समान अधिकार की बात करता है, वहीं दूसरी ओर हथकरघा संघ में महिलाओं को उनकी कमजोरी का अहसास कराने से भी अफसर परहेज नहीं कर रहे हैं। राज्य महिला आयोग के सामने ऐसा ही एक मामला सामने आया है। आरोप है कि हथकरधा संघ के सचिव रहते हुए बीपी मनहर ने सिलाई आवंटन कार्य में महिलाओं से अभद्र व्यवहार और भेदभाव पूर्ण कार्य आवंटन किया है। मामले की शिकायत विभागीय मंत्री गुरु रूद्र कुमार से भी की गई है। इसके बाद सचिव बीपी मनहर को संघ से हटा दिया गया है। महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा कि 150 स्व. सहायता समूह की महिलाओं ने राज्य महिला आयोग को आवेदन देकर हथकरघा संघ के सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस प्रकरण को पंजीबद्ध कर जांच शुरू कर दिया है।  बीपी मनहर के विरुद्ध स्व सहायता समूह की महिलाओं ने धरना दिया था। राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में कहा गया था कि बीपी मनहर ग्रामोद्योग विभाग के कर्मचारी हैं। तीन साल पहले उन्हें प्रतिनियुक्ति पर हथकरघा विभाग में सचिव पद पर लाया गया था, तब से वह इस पद पर जमे हुए हैं। महिला स्व सहायता समूहों ने बीपी मनहर पर सिलाई कार्य को ठेका आवंटित किए जाने में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। राज्यपाल के आश्वासन पर महिलाओं ने धरना खत्म कर दिया था।

 

 

05-11-2020
नवागांव के गौठान निरीक्षण के दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया कलेक्टर कार्तिकेय गोयल ने

रायपुर/महासमुंद। गौठानों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने जोर दिया है। कलेक्टर कार्तिकेया गोयल ने कल बसना विकासखण्ड के मॉडल गौठान नवागांव का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन का जायजा लिया और गौठानों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर देते हुए आजीविका के संभावना पर अधिकारियों से चर्चा किया। अधिकारियों ने बताया कि यह गौठान 13 एकड़ क्षेत्र पर स्थित हैं, जिसमें 3 एकड़ पशुओं के लिए बनाया गया है तथा 10 एकड़ चारागाह जमीन हैं। यहां 11 पक्की वर्मी बेड बनाया गया है। जिससे वर्मी कम्पोस्ट खाद निकालने की शुरूआत महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा किया जा रहा है। इसके अलावा यहां वर्मी वॉश भी निकाले जा रहे है। जिसे प्रति लीटर 25 रुपए की दर से विक्रय किया जाता है। यह फसलों के लिए काफी लाभदायक हैं। इस राशि को गौठान समिति के खातें में ही जमा किया जाता है।  

कलेक्टर ने स्व सहायता समूह की महिलाओं और चरवाहों से चर्चा की। इस दौरान स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि गौठान में उनके द्वारा वर्मी कम्पोस्ट के अलावा सब्जी उत्पादन और घर के पुरानी साड़ियों से पैरदान एवं अन्य अनुपयोगी सामग्रियों से झालर एवं सजावटी सामग्रियां बनाई जाती है। इस पर कलेक्टर ने उनके द्वारा बनाए गए सामग्रियों की बिक्री के लिए मार्केट उपलब्ध कराने को कहा। गोबर विक्रेता मदन पटेल से पूछा कि उन्हें गोबर का पैसा खातें में मिला है या नहीं। इस पर उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्व में बेचे गए गोबर का एक हजार रूपए की राशि प्राप्त हो चुका हैं। गोयल ने अधिकारियों को गौठान के गोबर खाद को गोबर खाद एप्प पर ऑनलाइन एण्ट्री कराने तथा स्व-सहायता समूह की सदस्यों को रजिस्टर में रिकॉर्ड अपडेट रखनें और वर्मी कम्पोस्ट को समिति में ही बेचनें को कहा। गौठानों में ग्रामीणों द्वारा लाए जाने वाले गोबर को सुरक्षित तरीके से रखने के उपायों पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने गांव पर 5 एकड़ में बनाए जा रहे ऑक्सीजोन का भी अवलोकन किया। इस पर उन्होंने ऑक्सीजोन में और अधिक पेड़-पौधे लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा ग्रामीणों ने ऑक्सीजोन में फिसल पट्टी, ओपन जिम एवं तालाब में प्रकाश व्यवस्था करने का अनुरोध किया।

05-11-2020
पयर्टन केंद्र चित्रधारा में आवश्यक व्यवस्थाएं करने की ज़िम्मेदारी स्व सहायता समूह को सौंपी कलेक्टर रजत बंसल ने

रायपुर/जगदलपुर। पर्यटन केंद्र चित्रधारा में आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए कलेक्टर रजत बंसल ने स्थानीय स्व-सहायता समूह को दायित्व दिया। जनपद पंचायत तोकापाल क्षेत्रान्तर्गत ग्राम पंचायत रानसरगीपाल के पर्यटन केंद्र चित्रधारा को पर्यटन क्षेत्र में अधिक से अधिक पहचान दिलाने के साथ-साथ स्थानीय स्व-सहायता समूह को पर्यटन क्षेत्र से जोड़कर उनके आय में वृद्धि करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए चमेली स्व-सहायता समूह रानसरगीपाल को टिकट कांउटर, नूनम स्व-सहायता समूह रानसरगीपाल को स्वच्छता साफ-सफाई एवं जागृति स्व-सहायता समूह रानसरगीपाल को सामूहिक किराना दुकान चलाने नियुक्त किया गया है। स्वच्छता संबंधि नियमों का पालन करने पर्यटकों को मार्गदर्शन के लिए समस्त समूहों को अलग-अलग दायित्व सौंपा गया है। सभी समूह चित्रधारा पर्यटन समिति के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे।

साथ ही आगामी सप्ताह से पर्यटकों को सभी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने एवं भविष्य में बाहर से आने वाले पर्यटको को ग्रामवासियों के द्वारा अपने निवास में ठहराने के लिए आवश्यक सुविधाओं का इंतजाम करने का भी प्रयास किया जाएगा। इसी परिपेक्ष्य में 3 नवम्बर 2020 को ग्राम पंचायत रानसरगीपाल, पोटानार व टाहकापाल के जनप्रतिनिधियों एवं स्व-सहायता समूहों के साथ बैठक किया गया। जिला प्रशासन की ओर से क्षेत्र के चित्रधारा जलप्रपात को विगत कुछ माहों से कोरोना के चलते प्रतिबंधित किया गया था। कलेक्टर बंसल के आदेशानुसार 1 नवम्बर से समस्त पर्यटन स्थल पर्यटनों के लिए खोल दिया है।

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