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04-07-2020
भाजयुमो राज्य सरकार की तानाशाही का तीखा प्रतिकार कर रही,एफआईआर निंदनीय : बृजमोहन

रायपुर। प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने पर भाजयुमो कार्यकर्ताओं पर हुई एफआईआर के मामले में विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने सवाल उठाया है। उन्होंने इस संबंध में ट्वीट कर कहा कि प्रदेश भर में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के 3000 पुतला दहन मामले में भाजयुमो कार्यकर्ताओं के ऊपर दमनात्मक कार्यवाही, दबाव व एफआईआर दर्ज करवाने के सरकार के कार्यवाही की तीखे शब्दों में निंदा करता हूं। भाजयुमो कार्यकर्ता सरकार से डरने वाले नहीं हैं। डेढ़ साल में प्रदेश की जनता भी सरकार से उब गई है और जनता सड़क पर उतर रही है। भाजयुमो राज्य सरकार की तानाशाही का तीखा प्रतिकार कर रही है, भाजयुमो को बधाई।

 

31-01-2020
उर्मिला मातोंडकर ने सीएए के विरोध में दिया बयान, बताया ''काला कानून''

नई दिल्ली। देशभर में जहां सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, वहीं इस सब के बीच एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर ने एक बड़ा बयान दिया  है। उर्मिला ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करते हुए इसे काला कानून कहा है। उर्मिला ने कहा कि 'ये कानून गरीबों और मुस्लिमों का विरोधी है'।

उर्मिला का बयान

अंग्रेज जानते थे कि 1919 में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद भारत में विरोध बढ़ेगा। इसलिए वो रॉलेट एक्ट लेकर आ गए। 1919 का वह कानून और नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, दोनों ही को इतिहास में काले कानून के रूप में दर्ज किया जाएगा। उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि कथित देशभक्त देश पर इस प्रकार की तानाशाही करना चाहते हैं। यहां आपको बता दें कि पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला था, वहीं दूसरा विश्वयुद्ध 1938 से 1945 तक लड़ गया था. पहले विश्वयुद्ध के बाद 1919 में अंग्रेज रॉलेट एक्ट लेकर आए थे।

क्यों हो रहा विरोध?

इस कानून में छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी, लेकिन इसमें मुसलमानों की बात नहीं कही गई है। विरोधियों का कहना है कि यह भारत के मूलभूत संवैधानिक सिद्धांत के विरुद्ध है और यह विधेयक मुसलमानों के ख़िलाफ़ है। ये भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 जो कि एक मौलिक अधिकार है उसका (समानता का अधिकार) उल्लंघन करता है। सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि इस बिल में मुस्लिम धर्म के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

20-07-2019
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को रोका जाना यूपी सरकार की तानाशाही: सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत 

रायपुर। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन विवाद को लेकर आदिवासियों की हुई हत्या और सोनभद्र दौरे पर जा रहे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी को रोके जाने के बाद गिरफ्तार करने की घटना की कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने कड़े शब्दों में निंदा की है। 
श्रीमती महंत ने अपने बयान में कहा है कि घटना को चार दिन के बाद भी उत्तर प्रदेश की सरकार इस पर किसी भी प्रकार की कड़ी कार्यवाही न कर घटना की जानकारी व पीड़ित परिवारों से मिलने जा रही प्रियंका गांधी सहित राजनीतिक दल के नेताओं को वहां जाने से रोका जाना यूपी सरकार की तानाशाही रवैया है जिसकी मैं कड़ी शब्दों में निंदा करती हूं। श्रीमती महंत ने कहा कि कानून व्यवस्था के नाम पर राजनीतिक दल के नेताओं को जिस तरह यूपी के साथ-साथ भाजपा शासित राज्यों में बर्ताव किया जा रहा है वह पूरी तरह अलोकतांत्रिक हैं। श्रीमती महंत ने कहा कि सोनभद्र की घटना दुर्भाग्यजनक है लेकिन मामले में यूपी सरकार और वहां का प्रशासन जिस तरह राजनीतिक दलों के लोगों को पीडि़त परिवारों से मिलने को रोकने का प्रयास कर रही है वह अनेक संदेहों को जन्म देता है?

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