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01-06-2020
तेन्दूपत्ता संग्रहण के जरिये जिले के 30 हजार 640 वनवासियों एवं ग्रामीणों को मिला आय का साधन

कोरिया। प्रदेश में तेन्दूपत्ता संग्रहण की शुरूआत हो चुकी है। चिलचिलाती धूप में जंगल के बीच जाकर पत्ते तोड़ना, लाकर उन पत्तों को सुखाना, बंडल बनाना और फिर विक्रय करना ये पूरी प्रक्रिया बेहद थका देने वाली होती है, पर अंत में जब इस अथक मेहनत से कमाई राशि हाथों में आती है तो सब दर्द-थकान मिट जाती है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वनवासियों एवं ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता का उचित दाम प्रदाय किया जा रहा है,जिससे इस संकट के समय में उन्हें आर्थिक परेशानियों से राहत मिली है।जब चारों ओर कोरोना संक्रमण के कारण पैदा हुई विषम परिस्थितियों में आर्थिक जनजीवन सुस्त हो गया है, ऐसे में तेन्दूपत्ता संग्रहण वनवासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए आय का बढ़िया साधन बना है। कोरिया वनमंडल अधिकारी  राजेश चंदेले ने बताया कि कोरिया जिले में कुल 17 संग्रहण समितियों के द्वारा तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य किया जा रहा है। जिले में अब तक 20905.75 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया जा चुका है। तेन्दूपत्ता संग्रहण के जरिये जिले के 30 हजार 640 वनवासियों एवं ग्रामीणों को रोजगार एवं आय का साधन मिला है। जिले के तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अब तक 1 करोड़ 46 लाख 65 हजार 360 रूपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है।तेन्दूपत्ता का संग्रहण करते हुए कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के उपायों एवं सावधानियों के बारे में उन्होंने कहा कि तेन्दूपत्ता तोड़ाई के दौरान कोरोना संक्रमण से बचाव का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। संग्राहकों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में जानकारी दी गई है। जिसका पालन करते हुए संग्राहक तेन्दूपत्ता तोड़ाई का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही मास्क पहनने एवं यथासंभव बार-बार हाथ धोने की भी जानकारी दी गई है।

 

18-04-2020
वन मंत्री अकबर ने प्रदेश में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य के सुचारू संचालन के दिए निर्देश

रायपुर। वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने राज्य में चालू वर्ष 2020 में तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस वर्ष लगभग 16 लाख 71 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित है। इससे लगभग 12 लाख 53 हजार वनवासी-ग्रामीण गरीब परिवार लाभान्वित होंगे। अकबर ने विभागीय अधिकारियों को तेन्दूपत्ता संग्रहण में शासन द्वारा जारी निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कर संग्राहकों को अधिक से अधिक लाभ दिलाए जाने के लिए भी कहा है। प्रदेश में वर्ष 2020 में शासकीय भूमि से तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा निर्धारित है। इस संबंध में प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ ने तेन्दूपत्ता संग्रहण के सुचारू संचालन के लिए शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों से राज्य के समस्त कलेक्टर और वन मंडलाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

इसके तहत उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने जिले तथा वन मंडलों में हर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। इनमें प्रत्येक फड़ पर शीघ्र फड़ अभिरक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसी तरह पोषण अधिकारी तथा जोनल अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इनमें पोषण अधिकारी की नियुक्ति 20 अप्रैल तक हर हालत में सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा शाखकर्तन कार्य का भली-भांति संचालन और वनों की अवैध कटाई तथा अग्नि से कोई हानि ना होने पाये, इसका विशेष रूप से ध्यान रखने के लिए निर्देश दिया गया है। जोनल अधिकारी, पोषक अधिकारी तथा फड़ अभिरक्षक यह सुनिश्चित करेंगे कि एक फड़ का पत्ता दूसरे फड़ पर कदापि ना जाए तथा कोई अवैध फड़ क्रेता अथवा किसी व्यक्ति के द्वारा ना लगाई जाए।

यदि समीपवर्ती समिति में अग्रिम में क्रेता नियुक्त हैं तो जिन समितियों में अग्रिम में क्रेता नियुक्त नहीं हैं इस पर विशेष ध्यान दिया जाए। इनको यह भी सुनिश्चित करना है कि अग्रिम में नियुक्त क्रेता केवल उसी मात्रा का उपचारण, बोरा भर्ती तथा परिवहन करे जो कि उसकी प्राथमिक समिति के द्वारा फड़ विशेष पर प्रदाय की गई है। यह भी अवगत कराया गया है कि संग्रहण वर्ष 2020 के लिए तेन्दूपत्ता संग्रहण से संबंधित विभिन्न कार्यों पर किये जाने वाले व्ययों के मापदण्ड संघ मुख्यालय से निर्धारित किए गए हैं। विगत वर्षों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के दौरान यह देखने में आया है कि जिला यूनियन से प्राथमिक वन समितियों के खातों में राशि के हस्तांतरण के उपरांत भी बहुत समय तक नकद राशि बैंक की स्थानीय शाखा में उपलब्ध नहीं हो पाती है। इस कारण भुगतान में विलम्ब होता है।

इसके मद्देनजर बैंकों से अपेक्षा की गई है कि उनके जिला स्थित मुख्यालय से बैंकों की स्थानीय शाखा तक नगद राशि की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए ताकि संग्राहकों को भुगतान में विलम्ब ना हो। शासन द्वारा जारी निर्देश में यह भी अवगत कराया गया है कि तेन्दूपत्ता क्रय करते समय तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी हालत में कटा-फटा, दाग वाला, बहुत छोटा तथा कच्चा पत्ता कदापि क्रय नहीं किया जाए। गड्डियों में पत्तों की संख्या भी 48 से कम तथा 52 से अधिक नहीं होनी चाहिए।  इसी तरह संग्रहण कार्य में लगे फड़ मुंशियों, कर्मचारियों तथा अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए तथा संग्राहकों को भी उचित मार्गदर्शन दिया जाए। तेन्दूपत्ता क्रय की प्रविष्टि संग्राहक कार्ड में प्रत्येक दिन अवश्य की जाए और भुगतान की प्रविष्टि भी संग्राहक कार्ड में की जाए। यह कार्ड संग्राहक के पास रहेगा।

इसके अलावा वर्तमान में लॉकडाउन के ध्यान में रखते हुए जारी निर्देशों का भी पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत समस्त फड़ मुंशियों तथा फड़ अभिरक्षकों को तेन्दूपत्ता संग्रहण के पूर्व कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार कर समस्त संग्राहकों को जागरूक करने के लिए कहा गया है। संग्राहक तेन्दूपत्ता संग्रहण के दौरान मास्क पहनकर कर तथा एक-दूसरे से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाकर संग्रहण करेंगे। उनके द्वारा संग्रहण पश्चात अनिवार्य रूप से साबुन से हाथ धोया जाएगा। संग्रहित पत्ता फड़ पर देते समय भी अनिवार्य रूप से मास्क को पहना जाना है।

14-02-2020
तेन्दूपत्ता संग्रहण की तैयारी शुरू, मो. अकबर ने सभी आवश्यक व्यवस्था पूरी करने के दिए निर्देश
   

रायपुर। वन मंत्री मो. अकबर के मार्गदर्शन में वन विभाग की ओर से राज्य में चालू वर्ष 2020 में तेन्दूपत्ता संग्रहण की तैयारी के तहत शाख कर्तन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। वन मंत्री अकबर ने विभागीय अधिकारियों को तेन्दूपत्ता संग्रहण के सीजन में अच्छी गुणवत्ता का अधिक से अधिक तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए हर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में तेन्दूपत्ता का संग्रहण पारिश्रमिक वर्ष 2018 में दो हजार 500 रूपये प्रति मानक बोरा था, जिसे वर्तमान सरकार की ओर से वर्ष 2019 में बढ़ाकर चार हजार रूपये प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि वर्ष 2019 में 15 लाख 6 हजार 883 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक लगभग 603 करोड़ रूपये तेन्दूपत्ता संग्राहकों को वितरित किया गया है। इसके फलस्वरूप तेन्दूपत्ता संग्रहण में वर्ष 2018 की दर की तुलना में वर्ष 2019 में लगभग 226 करोड़ रूपये की अतिरिक्त आय तेन्दूपत्ता संग्राहकों को हुई है। प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला की ओर से हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समस्त क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों और 31 जिला यूनियनों के प्रबंध संचालकों को तेन्दूपत्ता संग्रहण के सुुचारू संचालन संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में 31 लघु वनोपज सहकारी यूनियनों के माध्यम से 901 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के जरिये तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य होता है। प्रदेश में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण के पूर्व क्षेत्र में शाख कर्तन का कार्य संचालित है। इसे आगामी माह मार्च के प्रथम सप्ताह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अच्छी गुणवत्ता का तेन्दूपत्ता संग्रहित होने से तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अधिक पारिश्रमिक के साथ-साथ उन्हें उनके द्वारा संग्रहित मात्रा के अनुपात में अधिक से अधिक प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) भी प्राप्त होता है। जिला यूनियनों को शाख कर्तन कार्य के सुचारू रूप से संचालन के लिए आवश्यक राशि लगभग 11 करोड़ रूपये उपलब्ध करायी गई है, ताकि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को शाख कर्तन कार्य का भुगतान समय से किया जा सके। इसी तरह तेन्दूपत्ता संग्रहण के पूर्व गोदामों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। इनमें गोदामों के मरम्मत संबंधी कार्य फरवरी माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देशित किया गया है। 

13-06-2019
जशपुर में तेन्दूपत्ता खरीदी का लक्ष्य अधूरा

पत्थलगांव। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इस वर्ष तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर में प्रति मानक बोरी में डेढ हजार रुपये की वृद्धि करने के बाद भी जशपुर वन मंडल में खरीदी का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। कुनकुरी से कांग्रेस विधायक यूडी मिंज ने वन मंडल के अधिकारियों पर गरीब परिवार के लोगों को लाभान्वित करने वाली इस कल्याणकारी योजना का क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्य लघु वनोपज संघ के निर्देश के बाद भी यहां तेन्दूपत्ता की समय पूर्व क्वालिटी सुधारे जाने में वन विभाग ने रूचि नहीं ली। इसी अव्यवस्था का खामियाजा सैकड़ों तेन्दूपत्ता संग्रहणकतार्ओं को भुगतना पड़ा है।

उन्होंने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये कर देने के बाद भी गरीब तबका के लोगों को इस योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा है। जशपुर जिले में 39 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य के विरूध्द यहां मात्र 27 हजार मानक बोरा की खरीदी की गई। उन्होंने कहा कि लक्ष्य से 30 प्रतिशत कम संग्रहण से सैकड़ों लोगों को अपनी आय से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने बताया कि जिले में लघु वनोपज से बेरोजगार युवकों को रोजगार देने की अच्छी पहल हो सकती है। लेकिन जशपुर वन मंडल में अधिकारियों की इस लापरवाही से जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। इस पर मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर उन्हें अवगत कराया है।

25-05-2019
राज्य में तेन्दूपत्ता संग्रहण जोरों पर, सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध तेन्दूपत्ता की धर-पकड़ तेज

 

रायपुर। राज्य में तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य सभी जिलों में तेजी से चल रहा है एवं 23 मई 2019 तक संग्रहण लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर 13 लाख 50 हजार मानक बोरों का संग्रहण कर लिया गया है। अभी तक अग्रिम में विकत 580 लाटों में लगभग 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करते हुए आठ लाख 75 हजार मानक बोरे संग्रहित किए जा चुके हैं। इसी तरह अविकित 374 लाटों में पांच लाख मानक बोरे संग्रहित किए जा चुके हैं। इस वर्ष तेन्दूपत्ते की दर में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण उत्साहपूर्वक ग्रामीणों के द्वारा तेन्दूपत्तें का संग्रहण किया जा रहा है। तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर 2500 रूपए से 4000 हजार रूपए प्रति मानक बोरा कर दिए जाने के कारण कई जिलों में नए संग्राहक संग्राहक कार्ड प्राप्त कर रहे हैं। लगभग 8 से 10 हजार अतिरिक्त संग्राहक कार्ड जिलों में जारी किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि ज्यादा से ज्यादा लोग तेन्दूपत्ता संग्रहण के कार्य में जुट रहे हैं।

तेन्दूपत्ता संग्रहण में सबसे अच्छी प्रगति बस्तर संभाग के सभी जिलों में देखी जा रही है। बस्तर संभाग के जगदलपुर वृत्त में अग्रिम में विकित लाटों में निर्धारित लक्ष्य से अधिक संग्रहण हुआ है। जगदलपुर वृत्त के अंतर्गत सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा एवं जगदलपुर जिलों में अग्रिम में विकित 70 लाटों में संग्रहण लक्ष्य एक लाख 11 हजार मानक बोरे के विरूद्ध एक लाख 26 हजार मानक बोरे एकत्र कर लिए गए हैं। इसी तरह कांकेर वृत्त के कांकेर, नारायणपुर एवं कोण्डागांव जिलों में विकित 126 लाटों में संग्रहण लक्ष्य दो लाख 14 हजार मानक बोरे के विरूद्ध दो लाख 16 हजार मानक बोरे तेन्दूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। 

जहां एक ओर बस्तर के जनजातीय इलाकों में तथा राज्य के अन्य क्षेत्रों में तत्परतापूर्वक एवं अत्यधिक उत्साह से तेन्दूपत्ते का संग्रहण प्रगति पर है। वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती इलाकों में तेन्दूपत्ते की अवैध आवक की धर-पकड़ जोरों पर है, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक राकेश चतुर्वेदी ने इस संबंध में बैठक लेकर तथा वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी सभी वनमंडलाधिकारियों को समय पर पूर्व से ही सचेत कर दिया गया था। फलस्वरूप सभी जिलों में जहां छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा अन्य राज्यों से मिलती है। रात्रि गश्त लगाकर की जा रही है। 

17 एवं 18 मई की दरम्यानी रात बलरामपुर जिले के रघुनाथपुर रेंज में उत्तरप्रदेश की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में उत्तरप्रदेश से अवैध रूप से राज्य में तेन्दूपत्ते लाते हुए 25 से अधिक लोगों को पकड़ा गया एवं 10 से अधिक मोटर सायकिलें जप्त की गई है। पुनः 21 मई को बलरामपुर जिले की धमनी रेंज के तारकेश्वर फड़ के पास उत्तरप्रदेश से टाटा मैजिक से 52 हजार गड्डियां अवैध रूप से परिवहन करते हुए पकड़ी गई। जिनका मूल्य दो लाख रूपए से भी अधिक है। इसी तरह बलरामपुर जिले के बलरामपुर रेंज के रामनगर कला गांव के पास झारखण्ड सीमा पर कन्हर नदी के पास अवैध रूप से तेन्दूपत्ता झारखण्ड से छत्तीसगढ़ लाते हुए 5 मोटर सायकिलें जप्त की गई है। इन सभी प्रकरणों में नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। वनमंडलाधिकारी बलरामपुर विवेकानंद झा तथा अन्य अधिकारियों के द्वारा तेन्दूपत्ते के अवैध परिवहन को रोकने हेतु लगातार रात्रि गश्त किया जा रहा है। 

राज्य में तेन्दूपत्ता संग्रहण समाप्ति की ओर है तथा आगामी एक सप्ताह के अंदर संग्रहण का कार्य पूर्ण होने की संभावना है। साथ ही साथ उपचारण एवं परिवहन का कार्य भी प्रगति पर है। प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ राकेश चतुर्वेदी से सभी वनमंडलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि परिवहन तथा गोदामीकरण के दौरान तेन्दूपत्ते को किसी भी प्रकार से नुकसान से बचाने के सम्पूर्ण प्रयास किया जाए, ताकि अविकित तेन्दूपत्ते का अधिक से अधिक मूल्य प्राप्त हो सके।

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