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28-04-2020
उद्योगों को सरकार देगी हरसंभव मदद,भूपेश बघेल ने फिक्की के पदाधिकारियों को दिलाया भरोसा

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि कोरोना संक्रमण और लॉक डाउन की वजह से छत्तीसगढ़ के उद्योगों को उबरने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। राज्य के औद्योगिक संस्थाओं को कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उत्पादन एवं विक्रय की व्यवस्था बेहतर हो सके इसके लिए राज्य सरकार सभी जरूरी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंगलवार शाम अपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए फिक्की के पदाधिकारियों से चर्चा के दौरान यह बातें कहीं। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार यहां के उद्यमियों को कोरोना संक्रमण की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ही अपनी ओर से पहल की है। राज्य के लघु एवं मध्यम उद्योगों को विशेष राहत देने के लिए केन्द्र सरकार से सहायता का आग्रह किया गया है।छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योग पूरी क्षमता से संचालित हो तथा उनके उत्पादित माल के लिए इस मुश्किल घड़ी में भी बाजार उपलब्ध हो सके, सरकार द्वारा इसके लिए भी आवश्यक उपाय और पहल की जा रही है। इस अवसर पर उद्योग मंत्री कवासी लखमा, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बघेल ने राज्य में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी वर्गों और विशेषकर उद्योग जगत से मिले सहयोग के लिए सभी उद्यमियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की स्थिति में राज्य के उद्यमियों ने अपने यहां कार्यरत श्रमिकों के रहने एवं उनके भोजन की व्यवस्था की। यही वजह रही कि छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को परेशानी नहीं हुई जबकि अन्य राज्यों में उद्योगों के बंद होने की वजह से न सिर्फ अफरा-तफरी का माहौल रहा बल्कि श्रमिक अपने राज्य वापस लौटने के लिए सड़कों पर उतर आए और उन्हें बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ा।


मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि राज्य में उद्योगों के उत्पादित माल के परिवहन एवं बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने फिक्की के पदाधिकारियों से कहा कि देश के ग्रीन जोन के जिलों में वह अपने उत्पादित माल की सप्लाई आवश्यक एहतियात बरतते हुए करें। इसके लिए आवश्यक होने पर राज्य सरकार अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं अधिकारियों से भी चर्चा कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों से उद्योगों के संचालन के लिए आने वाले कच्चे माल एवं अन्य आवश्यक सामग्री बिना किसी अड़चन के छत्तीसगढ़ आ सके इस संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए है। उन्होंने राज्य के उद्यमियों से कहा कि अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ माल लेकर आने वाले मालवाहकों के चालक-परिचालक एवं हम्मालों के ठहरने एवं उनके भोजन की पृथक से व्यवस्था करें और यह भी सुनिश्चित करें कि वे स्थानीय लोगों के संपर्क में न आएं। इसी तरीके का एहतियात अन्य राज्यों में माल की सप्लाई के दौरान भी रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी उद्योगों में फिलहाल 80 प्रतिशत के आस-पास उत्पादन चालू है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में यहां के उद्योग शत-प्रतिशत प्रोडक्शन करने लगेंगे। मुख्यमंत्री ने वर्तमान स्थिति में उद्यमियों से यह भी आग्रह किया कि वे उद्योग संचालन के लिए स्थानीय श्रमिकों की सेवाएं ले ताकि कोरोना संक्रमण की स्थिति में राज्य में नियंत्रित रहे।

मुख्यमंत्री ने फिक्की के पदाधिकारियों से छत्तीसगढ़ राज्य में नवीन उद्योगों की स्थापना के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए अच्छा माहौल है यह इलाका प्राकृतिक आपदा से पूरी तरह सुरक्षित है। कनेक्टिविटी के भी बेहतर साधन राज्य में है। नए उद्योगों को राज्य सरकार द्वारा हर संभव मदद दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के श्रमिकों एवं ग्रामीणों को वृहद पैमाने पर गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा एवं अन्य शासकीय निर्माण कार्यों को शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में मनरेगा के जरिए राज्य में 13 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत हम किसानों को धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का भुगतान भी करने जा रहे हैं। लघु वनोपज की समर्थन मूल्य पर खरीदी भी राज्य में की जा रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में बाजार और क्रेता की स्थिति अन्य राज्यों से बहुत ही बेहतर है। यहां उद्योगों के उत्पादित माल की बिक्री के लिए किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क एवं भवन निर्माण के काम भी राज्य में शुरू कराए जा रहे है ताकि यहां के स्टील एवं सीमेंट उद्योग के उत्पादित माल की खपत हो सके।


फिक्की के अध्यक्ष संगीता रेड्डी ने छत्तीसगढ़ में उद्योगों की बेहतरी के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसलों एवं नीतियों को उद्योगों के लिए हितकारी बताया। उन्होंने राज्य में कोरोना संक्रमण के प्रभावी नियंत्रण के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रयासों की सराहना की। फिक्की के पदाधिकारी वायके मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से देश और प्रदेश संकट में है। उद्योग जगत भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य के उद्योगों द्वारा उत्पादित माल के लिए वर्तमान समय में बाजार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से उद्योग आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। मोदी ने मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ राज्य के उद्योगों द्वारा उत्पादित माल के विक्रय के लिए अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा कर इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया। फिक्की के पदाधिकारी रूद्र चटर्जी एवं व्हीके शर्मा ने भी स्टील उद्योगों के उत्पादित माल की ट्रांसपोर्टिंग के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया। फिक्की के समन्यवक प्रदीप टंडन ने लॉकडाउन की स्थिति में भी उद्योगों के संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को और प्रभावी बनाने का आग्रह किया।

 

17-04-2020
कलेक्टर ने आवश्यक वस्तुओं से संबंधित उद्योगों के संबंध में अधिकारियों से किया विचार-विमर्श


राजनांदगाव। कलेक्टर  जयप्रकाश मौर्य ने निकट भविष्य में आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन से संबंधित उद्योगों को शुरू करने के राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में आज संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर जरूरी विचार-विमर्श किया। बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी तनुजा सलाम, एसडीएम राजनांदगांव मुकेश रावटे, महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापर केन्द्र राजनांदगांव जे. मेश्राम, श्रम पदाधिकारी अनिल कुजूर, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कुर्रे, जिला पंचायत और जिला कार्यालय में स्थापित कॉल सेन्टरों के प्रभारी अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।कलेक्टर ने बैठक में कहा कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं जैसे खाद्य प्रसंस्करण, चिकित्सा संबंधित आवश्यक दवाओं एवं उपकरणों से संबंधित औद्योगिक ईकाईयों को शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की ईकाईयों को शुरू करते समय वहां के कामगारों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए समुचित उपाय करना पड़ेगा।

जिलाधीश ने कहा कि जरूरी उद्योगों को शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाने तथा केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित करने के लिए सीईओ जिला पंचायत की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। इसमें संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, श्रम विभाग, उद्योग तथा हेल्थ एण्ड सेफ्टी विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। समिति पर शासन की गाइड लाइन का पालन कराने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने जरूरी सामग्री से संबंधित उद्योगों के प्रतिनिधियों की कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। कलेक्टर ने कहा जो श्रमिक एक बार काम करने अंदर जाएंगे वे 28 दिन तक वहीं रहेंगे। श्रमिकों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था परिसर में ही होगी। दूसरे राज्यों और अन्य जिलों के ऐसे श्रमिक,जो लॉकडाउन में राजनांदगांव जिले में फंस गए हैं, उन्हें इन औद्योगिक ईकाईयों में रखने के लिए कार्रवाई की जाए।

 

14-04-2020
मनोज पिंगुआ ने राज्य के उद्योगों के लिए केंद्र सरकार से मांगी राहत

रायपुर। देश में कोरोना के संक्रमण के कारण लाॅक डाउन से प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को पड़ने वाले आर्थिक बोझ कम करने का अनुरोध उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव ने केंद्र सरकार से किया। वीडियो कॉफ्रेंसिंग में उन्होंने केन्द्रीय विकास आयुक्त राममोहन मिश्रा से औद्योगिक गतिविधियों को गति देने के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का सरलीकरण करने की मांग की। उन्होंने एनएमडीसी,एसईसीएल के माध्यम से लौह एवं कोयला आपूर्ति के लिए 50 प्रतिशत अग्रिम राशि लेने की भी चर्चा की। इसके अलावा बहुत से मुद्दों पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की और महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। प्रदेश के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग में राज्य के उद्योगों को लाॅक डाउन अवधि के दौरान श्रमिकों को भुगतान करने से उद्योगों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार से मदद करने का अनुरोध किया।

उन्होंने केन्द्रीय विकास आयुक्त से अनुरोध किया कि प्रदेश के उद्योगों के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों जैसे- भिलाई इस्पात संयंत्र, एनएमडीसी,एनटीपीसी,रेलवे आदि को सप्लाई किए गए ऑडर का लंबित भुगतान तत्काल करने की व्यवस्था की जाए। भविष्य के वर्क आर्डर के साथ 30 प्रतिशत राशि अग्रिम भुगतान करने की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी प्रकार प्रदेश के उद्योगों द्वारा लिए गए टर्म लोन एवं कार्यशील पूंजी ऋण पर बैंकों की ब्याज दरों को आधा करने एवं मासिक किश्तों की वसूली को कम से कम 6 माह के लिए स्थगित करने का अनुरोध भी किया। वीडियो काॅफ्रेसिंग में पिंगुआ ने यह भी अनुरोध किया कि प्रदेश के उद्योगों को एसईसीएल, एनएमडीसी से मिलने वाले कोयला एवं लौह अयस्क के लिए पूरी राशि एडवाॅस में भुगतान की वर्तमान व्यवस्था को बदल कर प्रतिमाह आवश्यक कच्चे माल की राशि का 50 प्रतिशत राशि एडवाॅस भुगतान पर कच्चा माल प्रदान कर शेष राशि कच्चा माल प्रदाय के 15 दिनों बाद लिए जाने की व्यवस्था की जाए। पिंगुआ ने यह भी सुझाव दिया कि केन्द्र सरकार बुनियादी अधोसंरचना निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करे,ताकि कोर सेक्टर के उद्योगों के उत्पादों की मांग में वृद्धि हो। केन्द्रीय विकास आयुक्त की ओर से राज्य शासन के सुझावों पर विचारोपरांत उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया गया।

12-04-2020
मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कवासी लखमा को लिखा पत्र, कहा -उद्योगों में जन-स्वास्थ्य संबंधी आकलन जरूरी 

रायपुर।  प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उद्योग मंत्री कवासी लखमा को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उद्योगों की स्थापना से पहले यह आकलन किया जाना चाहिए कि लगाये जाने वाले उद्योग से स्थानीय आमजन का स्वास्थ्य प्रभावित तो नहीं हो, इस पर जरूर विचार किया जाना चाहिए। इसी तरह जयसिंह अग्रवाल ने राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र एस.एच.आर.सी. की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि कोरबा के औद्योगिक क्षेत्र की करीब 12 प्रतिशत आबादी औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित है जिसके कारण लोग अस्थमा और ब्रोकाइटिस की बीमारी से पीड़ित हो रहे है। 

मंत्री अग्रवाल ने वर्तमान में कोरोना संक्रमण संकट से निपटने के लिए इस समय उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को तत्काल रोके जाने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह उद्योग मंत्री से किया है। मंत्री मोहम्मद अकबर से भी पत्र के माध्यम से आग्रह किया है कि जन-स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभागीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने का कष्ट करें। जयसिंह अग्रवाल ने जिला प्रशासन कोरबा को निर्देश दिए है कि कोरबा में जन-स्वास्थ्य से जुड़े सभी कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता से कराया जाए।

23-01-2020
औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नई औद्योगिक नीति लागू

कोरिया। औद्योगिक निवेश के लिए विभिन्न उद्योगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। इसके तहत सूक्ष्म,लघु,मध्यम,मेगा एवं अल्ट्रा मेगा उद्योगों को औद्योगिक नीति 2019-24 अथवा औद्योगिक नीति 2014-19 का विकल्प लेने की व्यवस्था है। इन पात्र सूक्ष्म, लघु, मध्यम, मेगा एवं अल्ट्रा मेगा उद्योगों के द्वारा औद्योगिक नीति 2014-19 के अन्तर्गत उद्योग स्थापना के लिए कार्यवाही आरंभ की जा चुकी है किन्तु वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नही हुआ है, उन्हें औद्योगिक नीति 2014-19 का औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन प्राप्त किये जाने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। इसके लिए उद्यम आंकाक्षा व आईएम जारी होने की तिथि से सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के मामले में 2 वर्ष,मध्यम उद्योग के मामले में 3 वर्ष,वृहद उद्योग के मामले में 4 वर्ष एवं अन्य उद्योगों के मामले में अधिकतम 5 वर्ष के भीतर प्रस्तावित परियोजना को पूर्ण करना होगा। औद्योगिक नीति 2014-19 अथवा 2019-24 का विकल्प पत्र इकाईयों द्वारा 90 दिवस के भीतर संबंधित जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र में प्रस्तुत करना होगा। अधिक जानकारी के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र,मनेन्द्रगढ़ से कार्यालयीन समय में संपर्क कर सकते हैं।

 

 

06-11-2019
कृषि और लघु वनोपज आधारित उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा : भूपेश बघेल

रायपुर। राजधानी में नई औद्योगिक नीति पर उद्योगपतियों के साथ चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए हमें व्यवसायिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। सिंगल विंडो प्रणाली को वास्तविक रूप में लागू करना होगा। एक बार आवेदन करने के बाद सारी प्रक्रिया पूर्ण करानी होगी। तभी हम दूसरे राज्यों के उद्योगपतियों को उद्योग लगाने के लिए आकर्षित कर पाएंगे। राज्य में इससे उद्योग के लिए नया वातावरण बनेगा और अधिक से अधिक निवेश होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लोहा, कोयला, बाक्साइट आदि की उपलब्धता के कारण उद्योग लगे, लेकिन कई ऐसे क्षेत्र जैसे-लघु वनोपज और कृषि आदि क्षेत्र उद्योग से अछूते रहे हैं, इन क्षेत्रों में हमें आगे औद्योगिकीकरण की दिशा में बेहतर ढंग से काम करना हैं। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर में उद्योग विभाग द्वारा आयोजित नई उद्योग नीति पर परिचर्चा संबंधी कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला में कार्यक्रम की अध्यक्षता उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ’गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ के नारे को सार्थक रूप देने के लिए प्रदेश के नए क्षेत्रों में उद्योगों को ले जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 10 आकांक्षी जिलों में जो देश के अति पिछड़े 110 जिलों में शामिल है। इन क्षेत्रों में विकास के लिए कृषि और उद्यानिकी तथा लघु वनोपज पर आधारित बस्तर से लेकर सरगुजा क्षेत्र में नए उद्योग लगाने के लिए पहल की जाएगी। कम प्रदूषण फैलाने वाले छोटे और मझोले उद्योग उन क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि नई उद्योग नीति यद्यपि पांच साल के लिए बनाई गई है। जरूरत पड़ने पर संशोधन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास के लिए हम समावेशी विकास पर बल दे रहें है। यहां रहने वाले लोगों को यह लगना चाहिए कि यदि सड़क बनती है या उद्योग लगते है तो यह उनके विकास के लिए लगाए जा रहे हैं। 
 

  

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरा अमूल्य प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण है। यहां एक तरफ लोहा, कोयला तथा बॉक्साइट आदि महत्वपूर्ण खनिज संसाधन भरे पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर वन तथा विविध फसल उत्पादों से भी छत्तीसगढ़ समृद्ध है। इस तरह राज्य में उद्योग के लिए एक उपयुक्त और बेहतर वातावरण है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में उद्योगों को भी बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक पहल कर नई औद्योगिक नीति 2019-24 तैयार की गई है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति में समावेशी विकास, आत्मनिर्भर तथा परिपक्व अर्थव्यवस्था के निर्माण को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। उन्होंने उद्योगपतियों की सराहना करते हुए कहा कि वे राज्य को राजस्व देते है वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासियों को उद्योग के जरिए रोजगार भी देते है। उनसे बढ़कर छत्तीसगढ़िया और कोई नहीं हो सकता। उद्योगपति एक-दूसरे से जुड़े उद्योग लगाए इससे व्यापार और राजस्व में वृद्धि होगी और हमारे पुरखों ने जो छत्तीसगढ़ को खुशहाल और समृद्ध बनाने का सपना देखा था वह पूरा हो सकेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में बहुत ही कम समय में नई औद्योगिक नीति बनायी गई है। इनमें अब तक के उद्योग विहीन वाले क्षेत्रों में वहां उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्राथमिकता से उद्योग लगाए जाएंगे। कार्यक्रम को प्रमुख सचिव उद्योग मनोज पिंगुआ, सीआईआई के अध्यक्ष अमित अग्रवाल, फिक्की के अध्यक्ष प्रदीप टंडन, उरला इंडस्ट्रियल एसोसिऐशन के उपाध्यक्ष अश्विन गर्ग ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर विभिन्न औद्योगिक संगठानों के पदाधिकारी और उद्योगपति उपस्थित थे। 

26-09-2019
ठेेकेदारों को आसानी से मिलेगा लाइसेंस, सीएम की पहल पर प्रक्रिया हुई सरल व पारदर्शी

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उद्योगों में कार्यरत ठेकेदारों को अब आसानी से न केवल लाइसेंस मिलेगा बल्कि लाइसेंस का हर साल नवीनीकरण कराने से मुक्ति मिलेगी। छत्तीसगढ़ में उद्योग और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के तहत श्रम विभाग द्वारा विभागीय प्रक्रियाओं की जटिलता को समाप्त करते हुए लाइसेंस प्राप्त करने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अब प्रमुख नियोजकों और ठेकेदारों को कार्यालय में जाकर आवेदन नही देना पड़ेगा बल्कि वे अपने संस्थान से ही ऑनलाइन आवेदन कर आवश्यक फीस, प्रतिभूति राशि ई-भुगतान के माध्यम से कर सकेंगे।  ठेकेदारों एवं नियोजकों को पंजीयन प्रमाण-पत्र और लाइसेंस ऑनलाइन ही प्राप्त हो जाएगा। इस नई व्यवस्था के लिए श्रम मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया के मार्गनिर्देशन पर संविदा श्रमिक (विनियमन और उत्पादन) अधिनियम 1970 के तहत निर्मित संविदा श्रमिक (विनियमन और उत्पादन) छत्तीसगढ़ नियम 1973 में आवश्यक संशोधन करते हुए प्रारूप का प्रकाशन राजपत्र में कर दिया गया है और इस संबंध में 30 दिवस के भीतर सुझाव आमंत्रित किए गए है। अब इस नई व्यवस्था से ठेकेदारों को न केवल लाईसेंस लेने में आसानी होगी बल्कि उन्हें अब लाइसेंस का हर साल नवीनीकरण कराने के लिए कार्यालयों का चक्कर नही लगाना पड़ेगा। श्रम विभाग के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश के उद्योगों में कार्यरत सभी छोटे-बड़े ठेकेदारों को श्रम विभाग से प्रतिवर्ष संविदा श्रमिक (विनियमन और उत्पादन) अधिनियम के तहत लाइसेंस नवीनीकरण कराना अनिवार्य था, जिससे बड़ी संख्या में ठेकेदारों को हर साल एक दिसंबर के पहले लाइसेंस का नवीनीकरण कराने के लिए कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता था। नए प्रारूप में अब प्रमुख नियोजक के द्वारा लिए जाने वाले पंजीयन और ठेकेदारों द्वारा लिए जाने वाले लाइसेंस लेने की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाना प्रस्तावित किया गया है जिससे कामकाज में पारदर्शिता और सुगमता होगी। उन्होंने बताया कि अभी तक अधिनियम के तहत लाईसेंस की वैधता 31 दिसंबर को समाप्त हो जाती थी, नवीन प्रस्तावित संशोधन के परिणामस्वरूप एक बार ठेका लाइसेंस लेने पर उसकी वैधता आवेदक द्वारा आवेदित अवधि तक के लिए मान्य रहेगी। इससे ठेकेदारों को लाइसेंस का नवीनीकरण की आवश्यकता नही होगी। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार ठेकेदारों को आवेदित श्रमिक संख्या और अवधि के हिसाब से अनुज्ञप्ति शुल्क जमा करना होगा। 

 

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