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07-02-2020
निजी अस्‍पतालों में महंगी जांच व अंबेडकर अस्‍पताल में वेटिंग से राहत दे रहा डीकेएस

रायपुर। राजधानी में दाऊ कल्‍याण सिंह पीजीआई यानी डीकेएस अस्‍पताल में महंगे टेस्ट और डायग्नोस्टिकस की सुविधाएं सस्ती दर पर दी जा रही हैं। इनमें सीटी स्‍कैन, एमआरआई, सोनोग्राफी, एक्‍सरे व ब्‍लड जांच की सुविधाएं शामिल हैं। इसका लाभ प्रदेश के सरकारी व निजी अस्‍तपालों में इलाज कराने वाले मरीजों को दी जा रही है। डॉ. अंबेडकर अस्‍पताल में इलाज के लिए आने वाले ज्‍यादातर मरीजों को वेटिंग की समस्‍याओं से जूझना पड़ता है। वहीं शासकीय जिला अस्‍पताल में भी सीटी स्‍कैन व एमआरआई जैसी सुविधाएं नहीं होने से मरीजों को निजी डाइग्‍नोस्टिक सेंटरों में महंगे दामों में जांच करना पड़ता था। लेकिन अब डीकेएस अस्‍पताल में सातों दिन और 24 घंटे जांच की सुविधाएं मिलने से मरीजों को इलाज में होने वाली देरी से छुटकारा मिल रहा है।

डीकेएस सुपर स्पेश्यालिटी अस्‍पताल के उपअधीक्षक डॉ. हेमंत शर्मा ने बताया, लगभग 4 महीने से अस्‍पताल में जांच की सुविधाएं सभी अस्‍पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए शुरु की गई है। डीकेएस के ओपीडी व आईपीडी में भर्ती मरीजों को कई तरह की जांच कराने की सुविधाएं दी जा रही है, लेकिन प्रदेशभर से राजधानी में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को जानकारी नहीं होने से अब भी बाजार में महंगे दाम पर जांच करानी पड़ रही है। डॉ. शर्मा ने कहा डीकेएस अस्‍पताल में जांच की सुविधाएं 24 घंटे उपलब्‍ध रहती है। इमेंरजेंसी केस में भी मरीजों को जांच की व्‍यवस्‍था मिल रही है। उन्‍होंने कहा इस तरह शासकीय अस्‍पतालों में मध्‍यम वर्ग व गरीब वर्ग के मरीजों को इलाज की सुविधाएं मिलने से आर्थिक बोझ से राहत मिलती है।

अंबेडकर अस्पताल, एम्स व निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की तुलना में डीकेएस में एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे व सोनोग्राफी जांच बेहद कम कीमत पर की जा रही है। यहां मरीजों के लिए वेटिंग भी नहीं है। डा. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और आयुष्मान स्मार्ट कार्ड, संजीवनी कोष, स्‍मार्ट कार्ड जैसी स्कीम के दायरे में आने वाले भर्ती मरीजों की जांच फ्री में की जा रही है। रियायती दर पर जांच की सुविधा मिलने से नवंबर से फरवरी तक चार माह में 2675 लोगों की एमआरआई जांच की जा चुकी है। यानी प्रतिदिन औसतन 20 से 22 मरीजों की एमआरआई जांच की जा रही है। इसमें 8 से 10 मरीज निजी अस्‍पतालों के होते हैं। सीटी स्‍कैन जांच प्रतिदिन 18 से 20 मरीजों को होता है जिसमें 10 से 12 मरीज निजी अस्‍पतालों के पहुंच रहे हैं। डीकेएस अस्‍पताल में प्रति दिन ओपीडी 250 से 350 तक मरीज पहुंच रहा है।

डॉ. शर्मा ने बताया, सालभर में 9564 मरीजों का सोनोग्राफी जांच और 14568 मरीजों का एक्‍सरे जांच और 7 हजार मरीजों का हर महीने विभिन्‍न प्रकार के ब्‍लड सेंपल की जांच की जा रही है। मरीजों को जांच रिपोर्ट ईमेल के माध्‍यम से 3 से 4 घंटे में ही उपलब्‍ध कराई जा रही है। डीकेएस अस्‍पताल में प्रति दिन ओपीडी 250 से 350 तक मरीज पहुंच रहा है। डीकेएस में जांच शुल्क एमआरआई 1851रु., सीटी स्कैन  834रु., सोनोग्राफी 235रु., एक्सरे 55रु., थॉयराइड 300रु.की दर निधार्रित की गई है।

 

03-02-2020
युवक का दिमाग बना कीड़ों का घर, 14 साल से पल रहे थे टेपवॉर्म

नई दिल्ली। अमेरिका के टेक्सास से एक बड़ा चौंका देने वाला मामला सामने आया है। यहां के रहने वाले गेरार्डो मॉक्टेजुमा को 14 साल से तेज सिरदर्द होता था और उसे ज़रा भी अंदाजा नहीं था कि उसके दिमाग में कीड़ों ने घर बना लिया है। डॉक्टर्स ने जब उसके दिमाग का एमआरआई किया तो पता चला उसमें लगभग 14 साल से कीड़े (टेपवॉर्म) पल रहे थे, जो अब धीरे-धीरे उसे मौत की तरफ लेकर जा रहे थे। बर्दाश्त के बाहर इस दर्द के साथ उन्हें उल्टियां होती थी और तेज चक्कर आता था। इस दर्द से राहत पाने के लिए जब गेरार्डो ने डॉक्टर्स से इसकी जांच कराई तो उन्हें पहली बार इसकी वजह पता चली।

दरअसल, गेरार्डो के दिमाग में कीड़े प्रवेश कर चुके थे और उनके अंडे देने से उसकी समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही थी। एसेंशन सेटन मेडिकल सेंटर के न्यूरॉलॉजिस्ट जॉर्डन अमाडियो ने बताया कि हमें समय रहते गेरार्डो की जान बचा ली। एमआरआई के जरिए पता चला कि कीड़े उसके दिमाग की चौथी वेंट्रिकल में दाखिल हो चुके हैं जिससे दिमाग को वो हिस्सा सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड से भर गया था। दिमाग में कीड़े पड़ने या कीड़ों की अंडे देने की इस अवस्था को मेडिकल साइंस की भाषा में न्यूरोसिस्टीसरकोसिस कहा जाता है। जॉर्डन अमाडियो के अनुसार, अगर गेरार्डो का इलाज न किया जाता तो जल्दी ही उसकी मौत भी हो सकती थी। जॉर्डन अमाडियो ने बताया कि गेरार्डो के दिमाग में यह कीड़ा काफी वक्त से था। यह कीड़ा पहले शरीर में दाखिल हुआ होगा और फिर दिमाग तक पहुंचा होगा। उनके दिमाग में कीड़ा उस वक्त दाखिल हुआ होगा जब वह मेक्सिको में रहते थे। यहां इलाज के लिए आने से करीब 14 साल पहले ही वह अमेरिका आए थे। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक, न्यूरोसिस्टीसरकोसिस के बेहद कम मामले सामने आते हैं, लेकिन अमेरिका में हर साल इसके करीब 1000 मरीज देखने को मिलते हैं।

बता दें कि कुछ समय पहले भारत में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था जहां 8 साल की एक बच्ची के माता-पिता तब हैरान रह गए, जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी का ब्रेन टेपवॉर्म अंडे से संक्रमित है। बच्ची को करीब 6 महीनों से सिर में बहुत तेज दर्द होता था और मिर्गी के दौरे आ रहे थे। इसके बाद उसे फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। सीटी स्कैन में पता चला कि उसके ब्रेन में 100 से ज्यादा सिस्ट्स थे जो टेपवॉर्म एग्स ही थे। टेप वॉर्म एग उसके पेट से होते हुए खून के प्रवाह के जरिए ब्रेन तक पहुंच गए थे। डॉक्टरों के मुताबिक, शुरुआती लक्षणों से न्यूरोसिस्टीसरकोसिस बीमारी का पता चला। इससे दिमाग में सूजन आ गई थी। उसका वजन 20 किलो तक बढ़ गया था। वह ना तो ठीक से सांस ले पा रही थी और ना ही चल पा रही थी। बीमारी का पता चलने के बाद ऑपरेशन कर उसके ब्रेन से अंडे बाहर निकाले जिसके बाद उसकी हालत में सुधार हो सका। यह इन्फेक्शन टेपवर्म संक्रमित खाना खाने से हुई थी। नर्व सिस्टम के जरिए अंडे दिमाग में पहुंच जाने पर वह न्यूरो-सिस्टीसरकोसिस से ग्रस्त हो गई, जिससे उसे गंभीर सिरदर्द, मिर्गी के दौरे महसूस होने लगे। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गैनाइजेशन (WHO) ने केंद्रीय नर्वस सिस्टम में टेपवर्म इन्फेक्शन के ने को मिर्गी की सबसे बड़ी वजह बताया है।

03-10-2019
डीकेएस अस्पताल में 1850 रूपए में होगी एमआरआई, स्वास्थ्य मंत्री ने किया मशीन का लोकार्पण

रायपुर। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने गुरुवार को डीकेएस अस्पताल में अत्याधुनिक नई एमआरआई मशीन का लोकार्पण किया। आधुनिक तकनीकों से लैस तीन टेसला क्षमता की इस मशीन से लोगों को काफी कम दर पर एक हजार 850 रूपए में एमआरआई की सुविधा मिलेगी। डीकेएस अस्पताल के साथ ही बाहर के मरीज भी यहां आकर एमआरआई करवा सकते हैं। नई मशीन के उद्घाटन के अवसर पर विधायक सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, स्वास्थ्य विभाग की सचिव निहारिका बारिक सिंह और संचालक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. एसएल आदिले मौजूद थे।

डीकेएस अस्पताल में अत्याधुनिक एमआरआई मशीन का लोकार्पण करते हुए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि आज इस मशीन के शुरू होने से लोगों को काफी कम दर पर एमआरआई की सुविधा मिलेगी। इस गुणवत्ता और क्षमता की रायपुर में बहुत कम मशीनें हैं। डीकेएस अस्पताल में इलाज करा रहे लोगों के साथ ही बाहर के मरीज भी यहां आकर एमआरआई सुविधा का लाभ ले सकते हैं। शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ, सस्ता और बेहतर बनाने की दिशा में हम लगातार काम कर रहे हैं। करीब 11 करोड़ रूपए की लागत से स्थापित यह अत्याधुनिक मशीन इसी दिशा में एक कोशिश है। एमआरआई मशीन का उद्घाटन करने आए मंत्री सिंहदेव ने यहां इलाज के लिए पहुंचे मरीजों से बातकर उनका हाल-चाल पूछा। स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे यहां उपचार की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली।

15-09-2019
अमित जोगी के स्वास्थ्य में हो रहा सुधार, एक या दो दिनों में मिल सकती है अस्पताल से छुट्टी

रायपुर। बालाजी ग्रुप ऑफ मेडिकल मोवा के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. देवेन्द्र नायक ने रविवार को मेडिकल बुलेटिन जारी कर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक अमित एश्वर्य जोगी के स्वास्थ्य में सुधार होने की बात कही है। डॉ नायक के मुताबिक अमित जोगी 11 सितंबर को रात्रि 10.45 बजे से बालाजी हॉस्पिटल मोवा में भर्ती है। उन्हें कमजोरी, सांस लेने तकलीफ, सर दर्द, यूरीन रिटेंशन, इलेक्ट्रोलाईट इनबैलेंस, अनइजिनेस, ब्रेडी कार्डिया के लिए बालाजी अस्पताल मोवा में लाया गया है। उन्हें यूरोलॉजी संबंधी एपिलेप्टिक सीजर डिसऑर्डर है। यहां इनके इलाज के दौरान जो जांच की गई प्रमुखता से उसमें एमआरआई एवं होल्टर मानेटरिंग की रिपोर्ट नॉर्मल है। कैरोटिड डाप्लर में स्मॉल क्लेसीफाईड प्लाक्वा है। अमित एश्वर्य जोगी के स्वास्थ्य में सुधार है। दवाईयां शुरू कर दी गई है। डॉ. देवेन्द्र नायक ने बताया कि उन्हें पहले चल रही दवाईयों का साइड इफेक्ट भी था, जिन्हें अब बदल दिया गया है। नई दवाईयां चालू की गई है। जिसमें उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। आने वाले एक या दो दिनों में अगर इनकी स्थिति में सुधार रहता है तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है। अमित जोगी के स्वास्थ्य की देखरेख में लगातार डॉ. देवेन्द्र नायक, न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. के के भोई, कर्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. बविंदर चुघ लगे हुए है।

 

13-09-2019
मनेंद्रगढ़ में जल्द बनेगा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, महानगरों की तर्ज पर होंगी सारी सुविधाएं

कोरिया। मनेंद्रगढ़ की जनता को विधायक के रुप में एक डॉक्टर को चुनने का फायदा किस कदर मिल रहा है। जहां क्षेत्र के मरीजो को विधायक डॉ. विनय जायसवाल की पहल पर रायपुर के निजी चिकित्सालयों में किफायती दर पर इलाज होता है। वहीं गंभीर अवस्था के मरीजो को विधायक निधि व मुख्यमंत्री कोष से भी सहायता विधायक द्वारा निरन्तर की जा रही है। स्वास्थ्य के प्रति विधायक जायसवाल कितने चिंतित रहतें हैं इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को जब उनकी मीटिंग एसईसीएल के सीएमडी और कार्मिक निदेशक से बिलासपुर में हुई तो उन्होंने भरतपुर-सोनहत के विधायक गुलाब कमरों के साथ मिल कर मनेंद्रगढ़ में एक मल्टी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल एसईसीएल के सहयोग से खोले जाने पर जोर दिया। जिसके लिए सीएमडी 10 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी देने को तैयार हैं।

इसके बाद मनेंद्रगढ़ को आने वाले समय मे महानगरों की तर्ज पर सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल मिलना तय है। इस हॉस्पिटल में ट्रॉमा यूनिट, एमआरआई, सिटी स्कैन, बर्न यूनिट, बच्चो का एनआईसीयू यूनिट, उच्च क्वालिटी की मशीनों से हर प्रकार की जांच के अलावा स्त्री रोग, हार्ट, मेडिशिन के स्पेशलिस्ट की भी सुविधा रहेगी। मनेंद्रगढ़ में सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की स्वीकृति की ख़बर से लोगो मे काफी हर्ष भी है। विधायक डॉ. विनय जायसवाल की पहल पर चिरमिरी के हल्दीबाड़ी, डोमनहिल या गोदरीपारा एसईसीएल के कोई भी एक हॉस्पिटल को सीएमडी ने जिला प्रशासन को देने की स्वीकृति दे दी है। अब विधायक विनय जायसवाल मिले इनमें से एक हॉस्पिटल को डीएमएफ मद से पीपीपी मॉडल के अनुरूप शानदार बनाने की कार्य योजना बना रहे हैं। जिसके बाद इस हॉस्पिटल में यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी सुविधा के साथ जटिल ऑपरेशन किए जाने की सुविधा भी रहेगी।

30-05-2019
मेकाहारा में गंभीर बीमारी का इलाज तीन महीने बाद होगा, एमआरआई कराने वालों को मिलती है वेटिंग लिस्ट 

रायपुर। मेकाहारा में मरीज गंभीर बीमारी का इलाज कराने पहुंचे हैं तो जरा संभल जाएं क्योंकि यहां एमआरआई कराने के लिए तीन महीने का वेटिंग लिस्ट दी जा रही है। ऐसे में सामान्य मरीज की बीमारी गंभीर होने लगी है। मेकाहारा के डॉक्टर गंभीर बीमारी पता करने के लिए मरीजों को एमआरआई कराने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां तो तीन महीने का वेटिंग लिस्ट थमायी जा रही है। इससे मरीजों की जान आफत में है। 

ग्लिब्स टीम जब रायपुर के अंबेडकर अस्पताल पहुंची तो इस दौरान मरीजों के परिजनों ने बताया कि एमआरआई कराने के लिए अस्पताल में दो से तीन महीने तक वेटिंग लिस्ट दी जा रही है। इससे मरीजों की बीमारी और भी बढ़ने लगी है। जबकि विशेषज्ञों की माने तो मरीज को गंभीर बीमारी होने पर ही रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है। ताकि शरीर के भीतर की बीमारी का पता लगा सके। लेकिन रेडियोलॉजी विभाग में कंट्रलास की कमी होने की वजह से भी एमआरआई नहीं की जा रही है। पूरे मामले को लेकर जब ग्लिब्स टीम ने अंबेडकर अस्पताल के सहायक अधीक्षक डॉ. अंबिका प्रसाद पडराहा से बात की तो उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है और एमआरआई जांच सावधानी पूर्वक की जाती है, इसी वजह से समय लगता है। वैसे भी अंबेडकर अस्पताल में निजी अस्पताल, डीकेएस और सरकारी अस्पताल से मरीज आते हैं। क्योंकि यहां निशुल्क एमआरआई जांच की सुविधा है, इसी वजह से मरीजों का वेटिंग लिस्ट बढ़ने लगी है।

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