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15-09-2020
औद्योगिक संस्थाओं और समाजसेवी संगठनों ने ली आइसोलेशन सेंटर में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी

जांजगीर चांपा।  कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए जिले में कोविड अस्पताल,आइसोलेशन सेंटर और कोविड केयर सेंटर में उपचार की व्यवस्था की गई है। कलेक्टर यशवंत कुमार के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल के अनुसार शुद्ध पेयजल, भोजन, उपचार आदि की समुचित व्यवस्था की जा रही है। जिले में संचालित विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं, समाजसेवी संस्थाओं, राइस मिलर्स, क्रेशर यूनियन, गल्ला व्यापारी, मंदीर ट्रस्ट के संगठनों ने जिला अस्पताल, आइसोलेशन सेंटर्स में गुणवत्ता युक्त भोजन, नाश्ता आदि नियमित उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ली है। भोजन व्यवस्था मे स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का कड़ाई पालन करने कहा गया है। कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोविड अस्पताल जांजगीर में हिंद एनर्जी एवं कोल बेनिफिकेशन लिमिटेड भिलाई द्वारा भोजन की नियमित व्यवस्था की जाएगी।

इसी प्रकार आईटीआई कुलीपोटा में अटल बिहारी बाजपेयी ताप विद्युत गृह मड़वा पावर प्लांट, आकांक्षा परिसर में न्यूवोको विस्टास कारपोरेशन लिमिटेड गोपाल नगर, दिव्यांग स्कूल पेंड्री एवं लाइब्रेरी भवन में आरकेएम पावर जनरेशन प्राइवेट लिमिटेड उच्चपिंडा, कृषि महाविद्यालय बालक छात्रावास भवन जर्वे में लायंस क्लब जांजगीर-नैला, शासकीय आईटीआई भवन महुदा-बलौदा में राइस मिल एसोसिएशन एवं गल्ला किराना संघ जांजगीर, आईटीआई भवन अकलतरा में केएसके महानदी पावर कंपनी लिमिटेड नरियरा, शासकीय एमएमआर स्नातकोत्तर महाविद्यालय चांपा में प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड चांपा, शासकीय क्रांति कुमार भारतीय महाविद्यालय जेठा में मां चंद्रहासिनी मंदिर एवं सार्वजनिक ट्रस्ट चंद्रपुर,एकलव्य अवासीय परिसर पलाड़ीखुर्द को के्रसर यूनियन अकलतरा एवं बाराद्वार और शासकीय अनुसूचित जाति बालक आश्रम धौराभाठा में डीबी पावर लिमिटेड ने भोजन नाश्ता की नियमित व्यवस्था की जिम्मेदारी ली है।

 

24-08-2020
कचरे की यार्ड में तब्दील हुई करोड़ों रुपए से बनी नगर पालिका...

कोरिया। कोरिया जिला के नगर पालिका बैकुंठपुर में ऐसा प्रतीत होता है कि स्वच्छता के नाम पर केवल कागजी कर्रवाई ही की जाती है। सफाई के लिए साल में करोड़ों रुपए की बजट होने के बावजूद भी नगर पालिका क्षेत्र में ऐसा कोई भी वार्ड नहीं है। वार्ड नंबर 10 में करोड़ों रुपए की लागत से बनी हुई नई सब्जी मंडी कचड़े यार्ड में तब्दील हो चुकी है। यहा पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई बार समाजसेवी अनुराग दुबे द्वारा शिकायत करने के बाद भी स्थिति बद से बदतर है।

23-07-2020
राखी पर सियासत : प्रकाशपुंज पाण्डेय

रायपुर। भाई-बहन के अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक, "राखी" का त्यौहार आने को है, लेकिन अब यह त्यौहार भी राजनीति से अछूता नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषक और समाजसेवी प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि छत्तीसगढ़ में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच अब "राखी" पर सियासत तेज़ हो गई है। छत्तीसगढ़ की बेटी, राज्यसभा सांसद और भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को "राखी" भेजी है, साथ ही एक पत्र भी जिसमें "राखी" के उपहार स्वरूप उन्होंने अपनी एक इच्छापूर्ति का वरदान मांगा है और वो है 'छत्तीसगढ़ में संपूर्ण शराबबंदी'। प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा है कि भाजपा नेत्री की मांग बिल्कुल ही जायज़ है क्योंकि शराब किसी भी प्रकार से समाज के लिए लाभदायक व लाभकारी नहीं है। इससे कई परिवार उजड़ जाते हैं और जनता के स्वास्थ्य की भी हानि होती है। उनकी इस मांग और "राखी" के बदले उपहार का छत्तीसगढ़ का प्रत्येक नागरिक समर्थन करता है क्योंकि उनकी मांग सर्वथा जायज़ है और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को उनकी इस मांग को पूरा भी करना चाहिए।

लेकिन उससे पहले एक बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि क्या इन भाजपा नेत्री ने अपने शेष भाइयों से भी कभी इस उपहार की मांग है? मेरा संदर्भ है छत्तीसगढ़ की सत्ता पर 15 सालों तक राज करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से, मेरा संदर्भ है 7 सालों से देश की सत्ता पर राज करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से, मेरा संदर्भ है देश के गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से! क्या बहन सरोज पांडे ने कभी इन लोगों से "रक्षाबंधन" पर "शराबबंदी" का उपहार मांगा है? और अगर नहीं तो क्यों? यह जवाब तो जनता पूछेगी और उनको जवाब भी देना चाहिए, क्योंकि अगर वह एक भाई से उपहार मांग रही हैं तो दूसरे भाई से आज तक इस उपहार क्यों नहीं मांगा? और अगर मांगा है तो क्या उन भाइयों ने उन्हें ये उपहार क्यों नहीं दिया? मतलब क्या उन्होंने अपने भाई होने का कर्तव्य नहीं निभाया? सवाल तो बनता है और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ. रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है, तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से ही क्यों? और अगर भाजपा नेत्री सरोज पांडे ने अपने शेष भाइयों अमित शाह, नरेंद्र मोदी और डॉ. रमन सिंह से इस उपहार को नहीं मांगा है तो क्या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जो कि अभी डेढ़ साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता में हैं, उनसे यह उपहार मांगना राजनीति से प्रेरित नहीं है? जनता यह सवाल पूछ रही है माननीय सांसद महोदया। आपको उचित लगे तो जवाब जरुर दीजिए।

18-07-2020
भारतीय युवा काँग्रेस की सक्रियता सुनिश्चित करने के साथ ही युवाओं को ज़िम्मेदारी सौंपी जाए : चंद्रशेखर शर्मा 

रायपुर। छत्तीसगढ़ निवासी काँग्रेसी चिंतक और समाजसेवी चंद्रशेखर शर्मा ने एक बार फिर से काँग्रेस पार्टी को मज़बूती देने वाले अपने सुझाव में एक कड़ी और जोड़ते हुए मीडिया के माध्यम से कहा है कि कांग्रेस पार्टी को अपनी इकाई, "भारतीय युवा कांग्रेस" को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। क्योंकि आज का भारत युवाओं का भारत है और कांग्रेस पार्टी में इस सदी के युवाओं की अत्यधिक आवश्यकता है। क्योंकि युवा ही देश का भविष्य है और अगर कांग्रेस पार्टी को भारतीय राजनीति में अपने आपको पहले की तरह मजबूत करना है, तो आज उसे युवाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। क्योंकि आज जो पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी वर्ग के युवा हैं उन्हें राजनीति के प्रति उनके कर्तव्यों का एहसास कराते हुए उन्हें सक्रिय राजनीति में लाने की ओर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस पार्टी को युवतियों पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए ताकि वह समाज की मुख्यधारा में आकर अपने आप को समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने योग्य बना सकें। कांग्रेस पार्टी को चाहिए अब जो वरिष्ठ लोग कांग्रेस पार्टी में हैं उन्हें सम्मानित करते हुए एवं मार्गदर्शक मंडल में शामिल करें और उनकी जगह नए युवाओं को पार्टी में स्थान दें जिससे पार्टी का जनाधार बढ़े और ये युवा लोग इन वरिष्ठ काँग्रेस नेताओं के अनुभव का ज्ञान लेते हुए बेहतरीन प्रदर्शन कर पाएं, जिससे पार्टी को सभी चुनाव में भी फायदा होगा।

चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि भारतीय युवा कांग्रेस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की युवा शाखा है। भारतीय युवा कांग्रेस 1947 में भारत के विभाजन के ठीक बाद की अवधि से 1960 के दशक के अंत तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक विभाग थी। प्रधानमंत्री रहते हुए, इंदिरा गांधी ने सामाजिक कार्य करने और दक्षिणपंथी दलों के ख़िलाफ़ बहस करने के उद्देश्य से, कांग्रेस पार्टी के एक फ्रंटल संगठन के रूप में स्थापित करके युवा कांग्रेस को एक नया आयाम दिया। 1970 के दशक के दौरान, संजय गांधी के नेतृत्व में, यूथ कांग्रेस ने पौधारोपण, परिवार नियोजन जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया और घरेलू हिंसा और दहेज़ हत्याओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी। संजय गांधी की मृत्यु के बाद, राजीव गांधी ने युवा कांग्रेस का प्रभार संभाला। 1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद, राजीव गांधी ने मतदान की आयु 18 वर्ष कर दी। राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2007 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया और उन्हें राष्ट्रीय छात्रों के साथ भारतीय युवा कांग्रेस का प्रभार दिया गया। भारत भर में इसके 20,000,000 से अधिक सदस्य हैं।

10-07-2020
वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप निगम की जयंती पर वृद्धाश्रम में पौधरोपण और गायत्री यज्ञ

रायपुर। वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी स्व.कुलदीप निगम की 56वीं जयंती के अवसर पर माना कैम्प स्थित कुलदीप निगम वृद्धाश्रम में शुक्रवार को गायत्री यज्ञ हुआ। इस दौरान मौजूद अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष महेन्द्र छाबड़ा ने कुलदीप निगम की समाजसेवा और पत्रकारिता को याद किया। स्व.कुलदीप निगम की स्मृति में महेन्द्र छाबड़ा ने पौधरोपण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में प्रेम मुंडेजा ने स्व. कुलदीप के जीवन पर आधारित  अपनी स्वरचित कविता का पठन किया। नागपुर की प्रज्ञा निमोणकर ने स्व. निगम को याद करते हुए अपनी भावनाओं को एक कविता के माध्यम से भेजा,जिसे उनकी सहपाठी कल्पना श्रीवास्तव ने सुनाया। कार्यक्रम में महेन्द्र छाबड़ा का सम्मान कृष्णकुमार निगम ने किया। वृद्धजनों को चरण पादुका का वितरण किया गया। इस दौरान वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राजेंद्र निगम, सचिव बिमल घोषाल, नरेश श्रीवास्तव, विनय निगम, स्व. निगम के परिजन और गायत्री परिवार के लोग शामिल हुए।

24-06-2020
जाएँ तो कहाँ जाएँ? आखिर अभिभावक किससे लगाएँ गुहार? : प्रकाशपुंज पाण्डेय 

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने पुनः एक बार वर्तमान स्थिति को देखते हुए मीडिया के माध्यम से आम जनता, प्रशासन और शासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि जहाँ एक ओर नोटबंदी के बाद से ही देश की जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारणवश अब ये आर्थिक स्थिति बद से बदत्तर हो चुकी है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इस विपरीत स्थिति में भी कुछ लोग, कुछ संस्थान और कुछ संगठन, मानवता और संवेदनशीलता पूरी तरह से भूल चुके हैं। यहां तक की यह लोग, यह संगठन और यह संस्थान सरकारी नियमों का भी पालन नहीं कर रहे हैं और पूरी तरह से केवल पैसे के लिए सरकारी फ़रमान की अनदेखी कर रहे हैं और लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने और सभी प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने देशवासियों को आश्वस्त किया था की कोरोनावायरस के कारण हुए देशव्यापी लॉक डाउन में कोई किसी से किराया नहीं लेगा, कोई किसी पर दबाव नहीं डालेगा, कोई सरकारी या गैर सरकारी स्कूल या कॉलेज अभिभावकों पर फीस के लिए कोई दबाव नहीं डालेंगे ना ही कोई मैसेज या कॉल करेंगे, लोग वर्क एट होम कर पाएंगे लेकिन उनकी पगार नहीं कटेगी। लेकिन ज़मीनी हकीक़त कुछ और ही है। असल बात यह है कि लोगों की नौकरियाँ चली गईं, किरायेदारों ने मकान मालिकों के दबाव के कारण या तो अपने सामान बेचकर किराया दिया या तो घर छोड़कर जाने को मजबूर हुए, बैंकों ने ईएमआई सुचारू रूप से वसूल की नहीं तो लोगों को भारी भरकम पेनल्टी भरने की चेतावनी दी, मजदूर काम नहीं होने के कारण अपने अपने घरों को जाने के लिए जूझते रहे जो कि पूरे देश ने देखा और स्कूल व कॉलेज अभिभावकों को निरंतर मैसेज भेजते रहे और आज भी भेज रहे हैं कि वह स्कूल की फीस जमा करवाएं। इन स्कूल व कॉलेजों में न केवल प्राइवेट बल्कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूल भी अभिभावकों को मैसेज व कॉल कर रहे हैं।     

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि अब प्रश्न यह उठता है कि यह अभिभावक किस से गुहार लगाएं, किसकी शरण में जाएं, क्योंकि सरकारें अपने अधिकारियों को आदेश तो जारी करने के लिए बोलती हैं लेकिन कभी यह नहीं देखतीं कि क्या उन आदेशों का सुचारू रूप से पालन हो रहा है? देश में यह जो स्थिति उत्पन्न हुई है उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ना सरकारी नीति सही है ना नियम सही है और सरकारी नियमों और आदेशों का क्रियान्वयन सही प्रकार से हो रहा है या नहीं उस पर ना कोई अंकुश है और न ही उनका सुपरविजन हो पा रहा है। 

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि  प्राइवेट स्कूल कॉलेजों के साथ ही, केंद्रीय विद्यालय जैसे संगठन भी अभिभावकों को फीस भरने के लिए मैसेज भेज रहे हैं जो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित है। अब मैं मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षा मंत्रियों से यह प्रश्न करता हूं कि जब देश में कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण हुए लॉकडाउन के बाद आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है, लोगों के पास अपने जीविकोपार्जन के लिए पैसे नहीं हैं तो उस सूरत में लोग अपने बच्चों की स्कूल फीस कैसे भरें और जब सरकारें कह रही हैं कि फिलहाल फीस भरने की जरूरत नहीं है तो यह प्राइवेट और सरकारी शैक्षणिक संगठन किस आधार पर अभिभावकों को फीस देने के लिए मैसेज भेज रहे हैं। यह विचारणीय है। इस पर कृपया ध्यान दें नहीं तो देश में बहुत ही विकराल स्थिति पैदा हो जाएगी, साथ ही मैं मांग करता हूं की एक ऐसी टीम का गठन किया जाए जो कि देश में सभी प्रकार के निर्देशों और आदेशों के पालन और क्रियान्वयन का सुपरविजन करें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या केंद्र और राज्य की योजनाएं और नियमों का पालन सही प्रकार से हो पा रहा है या नहीं? क्या वाकई जनता को इन नियमों आदेशों और योजनाओं से लाभ मिल पा रहा है या नहीं!

11-06-2020
मानसून आने से पहले खुले और जाम पड़े नालों को ठीक करे नगर निगम : प्रकाशपुंज पांडेय

रायपुर। समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मीडिया के माध्यम से जनता से जुड़ी एक बड़ी समस्या पर नगर निगम का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि, प्रायः ये देखा जा सकता है कि मानसून आते ही छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर शहर के नाले और नालियाँ और ओवरफ्लो हो जाते हैं और उसमें बह रहा कचरा व कीचड़ सड़कों पर आ जाता है जिससे वहाँ रह रहे लोगों और राहगीरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह किसी एक वर्ष का काम नहीं है यह समस्या हर वर्ष आती है। ऐसा नहीं है कि नगर निगम और प्रशासन को इस बारे में पता नहीं है, लेकिन इसके बावजूद ऐसे जरूरी विषय और गंभीर समस्या पर प्रशासन और निगम ध्यान नहीं देता है यह समझ से परे है। प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि रायपुर शहर में ऐसी तमाम रहवासी कॉलोनियां भी हैं जहां जलभराव की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। एक बारिश में ही यह समस्याएं जमीन के ऊपर दिखने लगती हैं। साथ ही कई कॉलोनियों की सीमा से लगे हुए नाले बहते हैं जो कि खुले हैं और उनसे हमेशा ही बदबू आती रहती है जिससे वहां के रहवासियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रायपुर ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश में जलभराव की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या है जिसके कारण शहर में गंदगी फैलती है और बीमारी बढ़ने का डर हमेशा बना हुआ रहता है। गंदगी के कारण मच्छर मक्खी उत्पन्न होते हैं और डेंगू मलेरिया जैसी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं। मौजूदा दौर में जब एक तरफ कोरोनावायरस का संकट मौजूद है वहीं दूसरी ओर आने वाले मानसून में नालियों के ओवरफ्लो होने के कारण जलभराव होने से बहुत सी बीमारियाँ जन्म लेंगे?

प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से अनुरोध किया है कि जब प्रदेश के लगभग सभी निगमों में कांग्रेस की ही सत्ता है ऐसे में उन्हें एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए जनहित में समूचे छत्तीसगढ़ में एक सुचारू और बेहतरीन ड्रेनेज सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट का काम करवा कर समूचे देश में एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए कि एक अच्छी सरकार कैसे काम करती है, क्योंकि यह समस्या हर साल आनी है और हर साल लोग इस समस्या के कारण परेशानियों का सामना करने को मजबूर होते हैं। यही जनता आप को बड़ी ही उम्मीदों के साथ वोट देकर जिताती है, तो आप का यह कर्तव्य और दायित्व बनता है कि कम से कम यह एक काम करके जनता को राहत प्रदान करें।

01-06-2020
रसोई गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि से जनता पर पड़ी दोहरी मार : प्रकाशपुंज पांडेय

समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने देश में रसोई गैस सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी पर रोष प्रकट करते हुए कहा है कि जब पिछले 2 महीने से जनता अपने घरों में बंद हैं, उनके पास आय के साधनों की कमी है, बहुतों की तो आय बंद है, तब ऐसी परिस्थिति में सरकार को महंगाई कम करते हुए कम से कम रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीजों के दामों में कटौती करनी चाहिए। लेकिन इसके विपरीत हर घर की जरूरत रसोई गैस सिलेंडर के दामों में अनलॉक पार्ट १ के पहले दिन ही बढ़ोतरी करना पूरी तरह से जनता के ऊपर दोहरी मार जैसा है।

लॉकडाउन के पहले भी महंगाई दर बढ़ी हुई थी। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर (जीडीपी), गिरी हुई थी। आरबीआई के गवर्नर ने भी कहा है कि हमारी विकास दर नेगेटिव में आ गई है। ऐसे में महंगाई बढ़ाकर सरकार को क्या हासिल होगा? इससे सरकार की छवि बद से बदतर बनती जाएगी। 

केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ऐसे विपत्ति के समय राजनीति को दूर रखते हुए देश और देश की जनता के हित में अच्छे और सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है ना कि अहंकार वश राजनीति से प्रेरित होकर एक दूसरे को नीचा दिखाने का काम करना चाहिए, क्योंकि इसका सीधे-सीधे प्रभाव देश पर और देश की जनता पर पड़ता है। 

अगर यही हाल रहा तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगी, आंदोलित हो जाएगी, रोष प्रकट करेगी और देश के हालात बिगड़ जाएंगे। चुनाव के समय तो अपने मताधिकार का प्रयोग करके जनता इन सरकारों को बखूबी जवाब देगी। लेकिन आज भी समय है, देश में जो नफ़रत का बीज बोया जा रहा है उससे ऊपर उठकर देश-हित में अगर सार्थक प्रयास और सकारात्मक कदम सभी राजनीतिक दल, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष उठाता है तो यकीनन देश का और जनता का भला होगा इसमें कोई दो राय नहीं है। वरना समय आने पर जनता को सिंहासन के हिलाना बख़ूबी आता है।

28-05-2020
भारत में मज़दूर क्यों हैं मजबूर? : प्रकाशपुंज पाण्डेय

रायपुर। समाजसेवी और राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने मौजूदा हालात में लॉक डाउन में फंसे मज़दूरों की स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से प्रश्न किया है कि जो राष्ट्र निर्माता है वो भला क्यों उपेक्षित है? मज़दूर, जिसने भारत की प्रगति की नींव रखी है, आज वो परेशान है और वो भी सिर्फ इसलिए कि उसे अपने परिवार के बीच अपने घर जाना है। केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार, दोनों ही मज़दूरों की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। मज़दूर वर्ग लॉक डाउन होने के कारण काम, जीविकोपार्जन व धन के अभाव में अपने घर जाना चाहता है तो क्या यह गलत है? क्या अब इस देश में कोई व्यक्ति अपने परिवार जनों से मिलने अपने घर भी नहीं जा सकता है, वो भी प्रतिकूल परिस्थितियों में?प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने कहा कि लॉक डाउन की घोषणा करने से पहले क्या सरकार को पता नहीं था कि भारत वर्ष में रोजी-रोटी और रोजगार की तलाश में लोग अपने घरों से दूर दूसरे राज्यों में जाते हैं और वहीं रह कर काम करते हैं? कोई शौक से अपना परिवार छोड़कर हजारों मील दूर जाकर काम नहीं करता है।

वो अपने परिवार के लिए ही ये कुर्बानी देता है। सरकार को चाहिए था कि लॉक डाउन की घोषणा से पहले ही कम से कम एक सप्ताह का समय देकर सभी लोगों को, मजदूर हो या श्रमिक हो या फिर और कोई व्यक्ति जो कि एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने के लिए जाते हैं, उन्हें बसों, ट्रेनों और यातायात के अन्य साधनों से उनके गंतव्य तक पहुंचाती और उसके बाद लॉकडाउन का सुनियोजित तरीके से घोषणा करती, तो इससे किसी को परेशानी भी नहीं होती। आज देखिए मजदूरों की स्थिति बेचारे सड़कों पर चल रहे हैं, भूखे- प्यासे, न जेब में पैसे, न खाने को रोटी, ना ही सरकारी इंतजाम।

यहां तक कि रेलवे पटरी हो से भी अपने घर को जाने को विवश हैं क्योंकि सड़क से जाओ तो पुलिस डंडे मारती है। समाचार चैनलों और अखबारों के द्वारा पूरे देश ने देखा है कि कैसे मजदूर ट्रेनों के नीचे कटकर मर गए, कैसे पैदल चलते चलते उन्होंने अपना देह त्याग दिया, कैसे छोटे-छोटे बच्चे अपनी मृत माताओं के बगल में बैठे बिलख रहे हैं,जिन्हें यह भी नहीं पता कि उनकी मां की मौत हो गई है।ऐसी खबरें जो आपके दिल को दहला दें, सबने देखा है। समझ सबको आता है, कोई व्यक्ति मूर्ख नहीं है। लेकिन सरकार, जनता को मूर्ख समझ कर केवल घोषणाएं करती है। आज भी जब इतना होने के बाद ट्रेनें शुरू हुई हैं तो देखा जा सकता है कि रेलवे स्टेशनों पर खाने के पैकेट और पानी की बोतलों के लिए कैसे लूट हो रही है। आखिर क्यों हो रही है लूट क्योंकि सरकारी इंतजाम नाकाफ़ी हैं। केवल कागजों पर और समाचार चैनलों पर घोषणा करने से ही काम नहीं होता। इसे जमीन पर उतर कर कार्यान्वित करने से ही रिजल्ट आता है।

 

19-05-2020
देश हम सभी का है तो ज़िम्मेदारी भी सभी की है : प्रकाशपुन्ज पाण्डेय

रायपुर। समाजसेवी व राजनीतिक विश्लेषक प्रकाशपुन्ज पाण्डेय ने वर्तमान स्थिति के मद्देनज़र मज़दूरों की इस हालत का कसूरवार केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार को ठहराया है। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी की तरह ही देश में लॉकडाउन का निर्णय भी पूर्णतः बिना तैयारी के लिया हुआ एक गैरजिम्मेदाराना कदम था,जिसका खामियाज़ा आज पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है। जब लॉकडाउन करना ही था तो मोदी सरकार को सबसे पहले सभी मंत्रियों से, उनके सलाहकारों से साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तमाम मुख्यमंत्रियों से सलाह लेनी थी। और भी उचित होता अगर पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व मंत्रियों, विपक्षी दलों, पत्रकारों और समाज के तमाम समाजसेवी व बुद्धिजीवी वर्ग की भी सलाह लेते। अगर जो ऐसा हुआ होता तो शायद देश में आज ऐसी विकट परिस्थितियाँ उत्पन्न ना होतीं और ना ही कोई किसी को दोष दे पाता।पाण्डेय ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी लेकिन लॉकडाउन के बाद यह और जर्जर हो चुकी है लोगों के पास पैसे नहीं है, खाने के लिए संसाधनों की कमी है। यही नहीं लोगों में कोरोनावायरस के कारण जो डर उत्पन्न हो गया है वह भी सबसे बड़ा कारण है कि आज देश में एक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। किसी को नहीं समझ रहा है कि आगे ऐसे कब तक जीना पड़ेगा? ऐसे कब तक विपरीत परिस्थितियों में काम करना पड़ेगा?

अगर इन सब चीजों के बारे में पहले से ही डिजास्टर कंट्रोल की तैयारी की गई होती तो शायद यह दिन नहीं देखना पड़ता। उसके ऊपर मज़दूरों का मीलों पैदल चलना और देश के जगह-जगह से उनकी मौत की ख़बरें आना और पीड़ादायक है। दिल बैठ जाता है देख कर जब किसी मज़दूर की घर वापसी के दौरान मौत की खबर आती है। लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस के प्रकोप पर भी कोई रोकथाम होती नहीं दिखती क्योंकि जब लॉकडाउन 1 किया गया था तब कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 थी और अब वह बढ़कर एक लाख पहुंच चुकी है। यह अच्छी बात है कि उसमें से कई लोग ठीक भी हो रहे हैं, लेकिन उसके कारण लोग मर भी तो रहे हैं। आज भी यह प्रश्न बना हुआ है कि जब कोरोना वायरस की कोई दवा बनी ही नहीं है तो लोग ठीक कैसे हो रहे हैं इस बात को अगर सरकार समझाने में कारगर हो जाती तो शायद लोग और भी संभल जाते पर आज तिथि बहुत ही विकट बन चुकी है।

 

17-05-2020
लॉक डाउन में जरूरतमंदों के लिए सभी वर्गों से बढ़े मदद के हाथ

रायपुर/जशपुरनगर। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जिला प्रशासन समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्था और आम नागरिक भी जरूरतमंद लोगों के सहयोग के लिए आगे हाथ बढ़ाकर मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में जिले के कर्मचारी, मितानिन, रसोइया, भृत्य, स्वास्थ्य कार्यकर्ता  भी सहयोग देने में पीछे नहीं है। वे भी स्वेच्छा से मुख्यमंत्री राहत कोष और कलेक्टर कोविड रिलिव फंड में अपना सहयोग दे रहे हैं। जशपुर के महिला पुरूष मध्यान्ह भोजन रसोइयां संघ ने कोरोना वायरस संक्रमण से राहत के लिए 7 लाख 15 हजार 800 रुपए की सहायता राशि दी है। इसी प्रकार दुलदुला ब्लाॅक के मितनिन बहनों ने भी कोविड-19 कलेक्टर रिलिफ फंड में 43 हजार 150 रुपए की सहायता राशि का योगदान की।
क्वारेंटाइन सेंटरों में रसोईया, भृत्य ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। श्रमिकों के लिए भोजन, पानी, साफ-सफाई की जिम्मेदारी उन्हीं के उपर निर्भर है।आदिमजाति विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि छोटे-छोटे कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और जनप्रतिनिधि आगे आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि क्वारेंटाइन सेंटर प्री-मैट्रिक बालक एवं कन्या छात्रावास सरबकोम्बो में भृत्य,रसोइया और स्वीपर को ग्राम पंचायत सरबकोम्बो के सचिव ने महिला भृत्यों को साड़ी एवं पुरूष भृत्यो को लोवर टी शर्ट देकर प्रोत्साहित किया। रसोइया,भृत्य स्वीपर ने धन्यवाद देते हुए कहा कि जरूरतमंद लोगों को सहयोग देने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और सेवा भावना से निरंतर कार्य करते रहेंगे।

 

29-04-2020
डोनेशन ऑन व्हील्स के जरिए राशन सामग्री सहित सब्जियों का भी किया जा रहा दान

भिलाई। डोनेशन ऑन व्हील्स के जरिए दान देने वाले आम नागरिक, समाजसेवी, संगठन अब हरी साग सब्जियां भी देने लगे हैं। दान के जरिए प्राप्त होने वाले इन हरी सब्जियों को आश्रय स्थल व राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। सेक्टर 5 सड़क 27 निवासी अजय वर्मा ने 19 किलो चावल, 2 किलो दाल 10 किलो आटा सहायता के लिए आज प्रदान किया। इसके अलावा यादव समाज भिलाई के सुरेंद्र यादव द्वारा लगभग 5 क्विंटल हरी सब्जियां प्रदान की। इन सब्जियों को आकाशगंगा, प्रियदर्शनी परिसर, नेहरू भवन आमोद भवन व वैशालीनगर सांस्कृतिक भवन में रूके हुए व्यक्तियों के भोजन के लिए पहुंचाया गया। भिलाई नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि लॉक डाउन में भूखे, गरीब, असहाय एवं इसी प्रकार के अन्य लोगों तक सहायता प्रदान करने अब आप अपने घर पर ही रह कर डोनेशन ऑन व्हील्स वाहन की मदद से राहत पैकेट, सब्जियां इत्यादि प्रदाय करके सहयोग कर सकते हैं।

ऐसे लोगों के लिए किसी भी प्रकार की सहायता देने के लिए डोनेशन ऑन व्हील्स वाहन की मदद ले सकते हैं साथ ही निगम के हेल्पलाइन नंबर 6260008819, 9907878744 एवं 9109176812 पर संपर्क करके वाहन को अपने घर तक दान करने के लिए बुलाया जा सकता है। लॉक डाउन के दौरान लोग घर से नहीं निकल पा रहे है परंतु जरूरतमंदों की मदद के इच्छुक है ऐसे लोग डोनेशन ऑन व्हील्स की मदद से राहत पैकेट, सब्जियां या अन्य राशन सामग्री जरूरतमंदों के लिए दे सकते हैं। निगम प्राप्त राशन सामग्रियों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है। 

 

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