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13-11-2019
राजधानी के बाद अब सभी जिला मुख्यालयों में खुलेगा गढ़ कलेवा, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को जन चौपाल में राजधानी रायपुर की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के निर्देश दिए है। सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के लिए मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है। रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध गढ़ कलेवा का संचालन किया जा रहा है। जिसमें स्व सहायता समूहों की लगभग सौ महिलाएं कार्य कर रही हैं। इस केन्द्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न स्थानों और राज्य के बाहर से आने वाले लोग पारम्परिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लाभ उठा रहे हैं। राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खुलने से लोगों को छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद मिल पाएगा साथ ही हजारों  स्थानीय महिलाओं को स्व सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार भी मिलेगा। 

जन चौपाल कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के सभी जिला मुख्यालयों में गढ़ कलेवा खोलने के संबंध में मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति रायपुर के विश्वजीत मित्रा ने सुझाव पत्र प्रस्तुत किया है। जिसमें सभी जिला मुख्यालयों के जिलाधीश कार्यालय परिसरों, जिला न्यायालय परिसरों, रेलवे स्टेशनों और स्वामी विवेकानन्द विमानतल में गढ़ कलेवा केन्द्र खोलने का सुझाव दिया है। इन स्थानों में गढ़ कलेवा खुलने से राज्य के सभी जिलों के नागरिकों के साथ-साथ अन्य राज्यों के लोगों को  भी छत्तीसगढ़ के पारम्परिक व्यंजनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। 
 

10-10-2019
प्रदेश स्तरीय चित्रकला प्रदर्शनी 11 अक्टूबर से, अनेक चित्रकार लेंगे हिस्सा

रायपुर। कला किसी उम्र, क्षेत्र या वर्ग विशेष की मोहताज नहीं होती। विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करते हुए चित्रकार अपने मुकाम को हासिल करके ही दम लेते हैं। उक्त पवित्र उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए श्रीजन समूह द्वारा विभिन्न व्यवसायों से जुड़े चित्रकारों के लिए 11 से 13 अक्टूबर के मध्य त्रिदिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी कला वीथिका महंत घासीदास संग्रहालय में आयोजित की जा रही है। यह जानकारी प्रेसक्लब रायपुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में श्रीजन समूह एवं भारतीय संगीत कला केन्द्र की डायरेक्टर लक्ष्मी स्वर्णकार ने दी। उन्होंने पत्रकारवार्ता में बताया कि चित्रकला प्रदर्शनी में रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर, कोरबा, राजनांदगांव, भिलाई और पिथौरा से लगभग 45 कलाकारों ने अपनी कृतियां भेजी हैं। इसके अलावा अनेक चित्रकार प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। रश्मि ने पत्रकारवार्ता में बताया कि इस वर्ष प्रदर्शनी का थीम धर्म और अध्यात्म विषय रखा गया है। उक्त प्रतियोगिता 18 वर्ष से अधिक सीनियर ग्रुप एवं 18 वर्ष से कम आयु के जूनियर गु्रप में 2 श्रेणी में आयोजित की गई है। प्रदर्शनी में प्रेम आर्ट गैलरी से दिनेश धीवर, चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. रानू मिश्रा, बैंकिंग क्षेत्र से प्रीति नायक सोनी, गृहिणी कंचन प्रभा अग्रवाल एवं वर्षा जैन हिस्सा लेंगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रायपुर पश्चिम के विधायक विकास उपाध्याय होंगे। अध्यक्षता राजकमल थियेटर के डायरेक्टर राजकमल नायक करेंगे। उक्त पेंटिंग प्रतियोगिता में सीनियर चित्रकारों में 28 एवं जूनियर चित्रकारों में अब तक 14 कलाकारों का चयन हो चुका है।

 

27-09-2019
गढ़कलेवा से तीन साल का किराया वसूलने अब होश आया सरकार को

रायपुर। महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में स्थित गढ़कलेवा से किराया वसूलने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार अब होश में आई है। पिछले 3 सालों से मोनिषा महिला स्व सहायता समूह की ओर से गढ़कलेवा का संचालन किया जा रहा था, लेकिन पिछली सरकार के समय से अब तक संस्कृति विभाग के किसी भी अधिकारी ने गढ़कलेवा से सरकार के राजस्व का हिस्सा नहीं लिया। अब विभाग की ओर से गढ़कलेवा के संचालक को तीन साल का किराया पटाने का नोटिस भेजा गया है। सवाल तो ये उठता है कि आखिर पिछली सरकार के समय भी इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया गया? किस आधार पर गढ़कलेवा का अनुबंध किया गया था और संचालन सौंपते समय संचालक समूह को सारी जानकारी क्यों नहीं दी गई? पिछले तीन सालों का किराया पटाने का नोटिस मिलते ही संचालक समूह के होश उड़ गए हैं। इस समस्या को लेकर संचालक सरिता शर्मा सहित सहयोगी महिलाओं का प्रतिनिधिमंडल आज मिलिए मंत्री से कार्यक्रम में खाद्य-नागरिक आपूर्ति, संस्कृति मंत्री से मिलने राजीव भवन पहुंचा था। साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हेलीपेड में भी मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

 मीडिया से चर्चा में मोनिषा महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष व गढ़कलेवा की संचालिका सरिता शर्मा ने कहा कि तीन सालों से हमने अपनी मेहनत से छत्तीसगढ़ी पकवान को बनाकर गढ़कलेवा के नाम को आगे बढ़ाया,गढ़कलेवा आज नाम का मोहताज नहीं रह गया है। गढ़कलेवा के संचालन करने में हमारे 3 साल की मेहनत है और आज हम ही लोगों को पात्रता नहीं दी जा रही है। इसका  टेंडर हो चुका है, हमारे पास पूरा डॉक्यूमेंट है लेकिन  हम लोगों से 3 साल का किराया मांगा जा रहा है। अब हम लोग कहां से एक साथ इतने दिन का किराया दे पाएंगे? हमारा उतना बिल भी पास नहीं हुआ है कि हम किराया पटा सकें। शुरू में हम लोगों को बताया भी नहीं गया था कि किराया देना है। 2016 में ही हमको बता दिया जाता तो हम निर्णय लेते और इसी के तहत आगे बढ़ते। सरिता शर्मा ने कहा कि अचानक टेंडर निकलने के 7 दिन पहले हम को नोटिस दिया गया है। कहा गया है कि किराया पटाओ, नहीं तो आप लोग पात्र नहीं होंगे।  तीन साल में गढ़कलेवा में कोई भी आपराधिक गतिविधि नहीं हुई है, सिर्फ गढ़कलेवा का नाम ही हुआ है। अहमदाबाद, दिल्ली, गुजरात में भी हमने छत्तीसगढ़ का नाम कमाया है। ठेठरी, खुर्मी, फरा नाम से बिक रहे हैं लेकिन हमें आज पात्रता नहीं दी जा रही है तो हम मंत्री अमरजीत भगत के पास गुहार लगाने आए थे। मंत्री भगत को समस्या बता दिए हैं, उन्होंने आश्वासन दिया है कि मदद का प्रयास करेंगे। सरिता शर्मा ने बताया कि इस संबंध में शाम करीब 4 बजे पुलिस ग्राउंड हेलीपेड में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। मंत्री अमरजीत भगत का कहना है कि गढ़कलेवा के बारे में दो-तीन पक्ष के लोग मुलाकात करने आज आए थे। उनके आवेदनों को विभाग को ट्रांसफर किया गया है। उसमें जो उचित होगा, वह कार्यवाही की जाएगी। इस प्रतिस्पर्धा में महिला समूह को ही आना है, जो टेंडर में क्वालीफाई करेगा, वह आगे आएगा। टेंडर की प्रक्रिया में जो फुलफिल करेगा, जिसका ज्यादा रेट रहेगा उसको अवसर मिलेगा। यह महिलाओं का मामला है, महिलाएं ही इसमें चाहती है प्रतिस्पर्धा करना। इसमें किसी को भी नहीं लगना चाहिए कि उनके साथ पक्षपात हुआ है, प्रतिस्पर्धा है जिनका रेट ज्यादा आएगा उनको संचालन दिया जाएगा।

 

23-09-2019
राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव राजधानी में 28-29 दिसम्बर को  

रायपुर। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने आज यहां महंत घासीदास संग्रहालय के सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव तैयारियों के सबंध में होटल संचालकों, ट्रैवल टूर ऑपरेटर्स एवं सिनेमा व्यवसायियों से विचार विमर्श किया। भगत ने कहा कि 28 और 29 दिसम्बर को नेशलन ट्राइवल डांस प्रतियोगिता का आयोजन राजधानी रायपुर में होना प्रस्तावित है। इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि नृत्य महोत्सव स्थल पर राज्य शासन की योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी, हाथकरघा वस्त्रों और कृषि आधारित विभिन्न उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। संस्कृति मंत्री भगत ने बताया कि इस नृत्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित देशभर के विभिन्न राज्यों के लगभग 2500 लोक कलाकार भाग लेंगे। इनके अलावा देशभर के कलाप्रेमी भी कार्यक्रम देखने छत्तीसगढ़ आएंगे। इनके आवागमन, निवास और अन्य जरूरतों के लिए होटल संचालकों और ट्रैवल ऑपरेटर्स का सहयोग जरूरी है। साथ ही प्रचार-प्रसार के लिए सिनेमा व्यवसायियों का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले अतिथियों का होटल और ट्रैवल ऑपरेटरों सहित सभी लोग सौजन्यपूर्ण व्यवहार और उनके खान-पान की व्यवस्था उन्हीं के अनुरूप करें ताकि छत्तीसगढ़ की छवि देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य के रूप में हो। उन्होंने कहा कि आवास एवं परिवहन के लिए ऑनलाइन बुकिंग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पर्यटन विभाग के सभी रिसोर्ट और मोटल को अपग्रेड करने के भी निर्देश दिए हैं।  बैठक में वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में देश के कोने-कोने से कलाकार और पर्यटक आएंगे। यह एक ऐतिहासिक आयोजन होगा, इसमें होटल प्रबंधकों को अच्छी भूमिका निभानी होगी उनको अपने आचार व्यवहार और अच्छी व्यवस्था करके मेहमानों को संतुष्ट करना होगा। संस्कृति विभाग के सचिव सोनमणि बोरा ने बताया कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की प्रतियोगिता में चार विषयों पर आधारित कार्यक्रम होंगे। पहला विवाह या मांगलिक अवसर पर होने वाले नृत्य, दूसरा कृषि आधारित जैसे फसल कटने के समय आयोजित होने वाले नृत्य, तीसरा देश के विभिन्न राज्यों में त्यौहारों, विशेष अवसरों पर होने वाले नृत्य और चौथे विषय को खुली प्रतियोगिता के रूप में रखा गया है। एक प्रदेश से चार ग्रुप शामिल होंगे। छत्तीसगढ़ में आयोजन की तैयारियों के लिए विकासखण्ड स्तर पर नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन 15 नवम्बर तक किया जाएगा। विकासखण्ड स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का 16 से 30 नवम्बर तक जिला स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा और एक से 10 अक्टूबर तक संभाग स्तर पर प्रतियोगिता का आयोजन होगा और इस प्रतियोगिता में जो टीम सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे, उन्हें राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में प्रदर्शन के लिए चयनित किया जाएगा। बैठक में संस्कृति विभाग के संचालक अनिल कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में होटल संचालकों एवं उनके एसोसिएशन के पदाधिकारी, ट्रैवल टूर ऑपरेटर्स एवं उनके पदाधिकारियों, सिनेमा व्यवसायी और संस्कृति और पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

12-09-2019
संस्कृति विभाग ने कराया 'गांधी जी की छवि' पर कार्यांजलि का आयोजन

रायपुर। संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व द्वारा महंत घासीदास संग्रहालय स्थित संस्कृति भवन के सभागार में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आयोजित गांधी जी की छवि कार्यक्रम में गांधीजी के जीवन पर केंद्रित फिल्म के अंशों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में डॉ अनिल चौबे ने व्याख्यान दिया। इस मौके पर संस्कृति विभाग के सचिव सोनमणि बोरा एवं संचालक अनिल कुमार साहू ने आमंत्रित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. अनिल चौबे ने बताया कि रिचर्ड एटनबरो द्वारा निर्मित गांधी फिल्म बीस वर्षों की कड़ी और अथक मेहनत से बनी और उसे 9 श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त हुआ था। यह फिल्म भारत और भारत से बाहर गांधी जी के जीवन में घटित महत्वपूर्ण घटनाओं और उन घटनाओं का मोहन दास को महात्मा गांधी बनाने में प्रभाव की, उनके चिंतन, दर्शन, निर्भीकता और कार्यप्रणाली के बारे में प्रामाणिक जानकारी देता है। इस विषय में डॉ. चौबे ने विस्तार पूर्वक ऑडियो-विजुअल के माध्यम से बताया। देश को शांतिपूर्ण तरीके से आजादी दिलाने के लिए उनके द्वारा किये गए सत्य और अहिंसा के प्रयोगों से लोग परिचित हुए। यह आयोजन विभाग द्वारा गांधी जी के कार्यान्जलि के तारतम्य में किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पद्मश्री महादेव प्रसाद पांडेय ,पद्मश्री एके शर्मा सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

 

11-09-2019
महात्मा गांधी से संबंधित चलचित्रों के अंश का प्रदर्शन व व्याख्यान कल

रायपुर। महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती पर 12 सितम्बर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से संबंधित चलचित्रों के अंश का प्रदर्शन एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया है। गांधीजी की छवि, व्याख्यान कार्यक्रम स्थानीय महंत घासीदास संग्रहालय स्थित संस्कृति भवन परिसर रायपुर के सभागार में दोपहर 12 बजे शुरू होगा। इस मौके पर गांधी दर्शन और चिंतन पर खुली चर्चा होगी। इस आयोजन का मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं सिने प्रलेखक डॉ. अनिल चौबे होंगे। कार्यक्रम में चौबे द्वारा दर्शक, श्रोताओं के जिज्ञासा का समाधान किया जाएगा।

24-05-2019
महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में बनेगा 'संस्कृति हाट'

 

रायपुर। राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में 'संस्कृति हाट' बनेगा। संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने शुक्रवार को संग्रहालय परिसर का निरीक्षण कर 'संस्कृति हाट' के लिए कार्ययोजना तैयार करने निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गढ़कलेवा से लगे स्थान पर छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प और कलाकृति की विभिन्न वस्तुओं की प्रदर्शनी-सह बिक्री के लिए पर्याप्त संख्या में नए स्टॉल बनाने को कहा।

संस्कृति मंत्री ने कहा कि राजधानी रायपुर के मध्य 'संस्कृति हाट' विकसित होने से ग्रामीण शिल्पियों की कला कृतियों को अच्छा बाजार मिलेगा। उन्होंने निरीक्षण के दौरान पूरे परिसर को सुसज्जित कर उसकी सफाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने संग्रहालय में रखी गई पुरातात्विक मूर्तियों के रखरखाव आदि की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। संस्कृति संचालनालय में पदस्थ अधिकारियों से कामकाज की जानकारी ली। उन्होंने संस्कृति विभाग के आयुक्त अनिल कुमार साहू से विभागीय सेटअप के संबंध में भी चर्चा की। 

10-12-2018
Mahant Ghasidas Sangrahalay : नए साल में नए कलेवर में दिखेगा महंत घासीदास संग्रहालय 

रायपुर। राजधानी के कचहरी चौक स्थित महंत घासीदास संग्रहालय के फेसिया को एक अलग रूप-रंग दिया जा रहा है। पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियों और कलात्मक वस्तुओं की रेप्लिका संग्रहालय के फेसिया में लगाया जाएगा। रेप्लिका में सिरपुर और भोरमदेव से प्राप्त मूर्तियों को महत्व दिया गया है। साथ ही फाइबर ग्लास के साथ चमचमाता रूप संग्रहालय को मिलेगा। उक्त बातें संस्कृति विभाग के क्यूरेटर प्रताप पारेख ने कहीं। 

उन्होंने बताया कि यह बदलाव पुरातत्वविद एके शर्मा और उनकी टीम की खास देखरेख में किया जा रहा है। पिछले तीन महीने से संग्रहालय का  सौन्दर्यीकरण चल रहा है। इसका बजट 24 लाख तक है। 30 दिसंबर को संग्रहालय को एक नए कलेवर में ढाल दिया जाएगा। नए साल में संग्रहालय घूमने आए लोग नए लुक के साथ घूमने का आनंद लेंगे। यह देश का पहला ऐसा संग्रहालय है जिसका फेसिया पुरातात्विक और ऐतिहासिक वस्तुओं से तैयार किया जा रहा है। बता दें कि महंत घासीदास संग्रहालय राज्य की संस्कृति को जानने और समझने का प्रमुख केंद्र है। यहां राज्य के विभिन्न हिस्सों से लाए पुरातात्विक और ऐतिहासिक वस्तुओं के प्रदर्शन के लिए लोकप्रिय है।

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