GLIBS
08-10-2020
ई वालेट उपयोग करने बरते सावधानी, साइबर ठगों से रहे सावधान

गुंडरदेही। ई वालेट्स क्या है और इसके क्या नफा नुकसान है इसके बारे में सोशल साइट्स पर जानकारी देते हुए बालोद पुलिस के टीआई रोहित मालेकर द्वारा लोगों के साथ जानकारी साझा की है। सोशल प्लेटफॉर्म कर जानकारी देते हुए गुंडरदेही टीआई रोहित मालेकर ने बताया कि यह एक डिजिटल सेवा है,जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन करने के लिए किया जाता है। इसमें ऑनलाइन खरीदारी, बिल भुगतान, रिचार्ज, टिकट बुकिंग, मनी ट्रांसफर, शामिल है यह एक प्रीपेड सेवा होती है। ई वालेट का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक वालेट है, इसे डिजिटल वॉलेट भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि मोबाइल वॉलेट आपको प्री पैड सर्विस मुहैया कराता है यानी पहले आपको वॉलेट में पैसा डालना पड़ता है। इसके बाद आप वॉलेट में उपलब्ध पैसे का इस्तेमाल सम्मिलित ऑनलाइन सेवाओं के भुगतान के लिए कर सकते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण पेटीएम ऐप है।उन्होंने बताया कि डिजिटल वालेट का इस्तेमाल हम ई-कॉमर्स वेबसाइट से ऑनलाइन खरीदारी के लिए कर सकते हैं। बहुत सारे यूटिलिटी बिल को भरने के लिए भी इसका इस्तेमाल हम कर सकते हैं।

जैसे बिजली का बिल, प्रीपेड रिचार्ज, मूवी टिकट, फोन बिल इत्यादि से पेमेंट करते समय हमें बार-बार एटीएम या क्रेडिट कार्ड डिटेल्स जैसे की कार्ड नंबर सीवीवी को देने की जरूरत नहीं है।इसके साथ खाना ऑनलाइन मांगने के लिए, यात्रा के बुकिंग करने के लिए ऑनलाइन मनी ट्रांसफर के लिए, अगर किसी कारणवश ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है, तब हमें जल्दी पैसे वापस मिल जाते हैं। ई-वालेट के उपयोग के लिए एक मोबाइल,जिसमें इंटरनेट कनेक्शन हो एक बैंक अकाउंट और एक एप्लीकेशन जिसे आपको मोबाइल से इंस्टॉल करना होता है।आज के दौर में वॉलेट्स का उपयोग कर साइबर ठग ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। हिंदी वॉलेट्स के माध्यम से साइबर ठग आमजन से एटीएम कार्ड का नंबर पूछ कर ओटीपी साझा करके हाथों से पैसा निकाल लेते हैं। अतः किसी भी इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट का सावधानी पूर्वक उपयोग करना चाहिए।
 

शब्बीर रिजवी की रिपोर्ट

 

02-08-2020
ऑनलाइन शॉपिंग करने से पहले सतर्कता जरूरी, थाना प्रभारी ने बताए ठगी से बचने के उपाय

गुंडरदेही। ऑनलाइन ठगी से किस प्रकार बचा जाए इसकी जानकारी गुंडरदेही थाना प्रभारी रोहित मालेकर ने दी। रोहित ने कहा कि आजकल सोशल साइट्स पर ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफार्म की बाढ़ आई हुई है। इसमें प्रमुख ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म है, जिसमें इस्तेमाल किए गए उत्पादों का लेनदेन किया जाता है। इस प्लेटफार्म का उपयोग करके खरीदार सीधे विक्रेता से संपर्क कर सकता है, जहां इस वेबसाइट ने उत्पादों की खरीद और बिक्री को आसान बनाया है वहीं इसका उपयोग कर साइबर अपराधी ठगी की घटना को अंजाम भी दे रहे हैं। आर्मी की आईडी का मिस यूज करते हैं और ग्राहक को आत्मविश्वास में ले लेते हैं। सामान्य कार या बुलेट की आकर्षक फोटो वेबसाइट में डालकर उसे बेचने का प्रयास किया जाता है। एडवांस पेमेंट देने को कहते हैं। एडवांस पेमेंट मिलने के बाद प्रोडक्ट को कोरियर से डिलीवरी की बात की जाती है रकम लेने के बाद प्रोडक्ट कभी भी डेलीवर्ड नहीं होता है। ऐसे अपराधों से बचने के लिए क्या करें, किसी भी व्यक्ति पर ऑनलाइन डील करते समय विश्वास नहीं करना चाहिए। विक्रेता से मिलकर ही सामान को फिजिकली चेक करना चाहिए। विजेता से मिलकर ही पेमेंट करने का प्रयास करें किसी भी प्रकार के मनी रिक्वेस्ट लिंक को क्लिक न करें, अगर विक्रेता कोई कोरियर स्लिप भेजता है तो पहले उस लिंक को वेरीफाई जरूर कर ले। सावधान रहें सुरक्षित रहें।

शब्बीर रिजवी की रिपोर्ट

16-02-2019
Social Media: इंदौर में सोशल मीडिया पर धारा-144 लागू 

इंदौर। पूरे जिले में सोशल साइट्स पर करफ्यू लगा दिया गया है। कलेक्टर ने आदेश जारी किया है कि पूरे जिले में उत्तेजित करने  वाली फोटो, चित्र, मैसेज करने अथवा उसे आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद भी अगर कोई ऐसा काम करता हुआ पाया जाता है तो उसके विरुध्द तत्काल  वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। ये जानकारी एडीएम अजय देव शर्मा ने दी। उन्होंने कहा कि ये आदेश 2 मार्च तक प्रभावशील रहेगा।

प्रशासन का सांप्रदायिक सौहार्द्र बढ़ाने पर जोर:

कुल मिलाकर प्रशासन की कोशिश यही है कि किसी भी प्रकार से जिले में सांप्रदायिक सौदार्द्र न बिगड़ने पाए। ऐसे में अगर कोई इसके विरुध्द जाने की कोशिश करेगा तो उस पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का आदेश सभी को ज्ञात हो इसी लिए तमाम समाचार माध्यमों को इसकी सूचना दे दी गई है।

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